दशमलव 5 फीसदी औरतों की नहीं हुकूमत पूरे 5 फ़ीसदी औरतों की फ़िक्र करे : सय्यद मोहम्मद अशरफ

10 मार्च /मालेगांव , .5 फीसदी औरतों की नहीं हुकूमत 5 फ़ीसदी औरतों की फ़िक्र करे “यह बात वर्ल्ड सूफी फोरम एवं आल इंडिया उलेमा व मशाइख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने मालेगांव में आयोजित तह्फ्फुज़े शरियत व सूफी कांफ्रेंस में बोलते हुए कही .

उन्होंने कहा कि मुसलमानों को चाहिए कि वह इल्म हासिल करें और शरियत पर अमल करें ताकि किसी तरह की कोई परेशानी न हो सिर्फ तहफ्फुज़े शरियत का नारा लगाने से कुछ नहीं होगा .हज़रत ने कहा कि शरियत यानि इस्लामी कानून इंसान की हिफाज़त के लिए है ताकि वह ज़ुल्म से बचा रहे आखिर यह हालत कैसे आ गए कि हम शरियत बचाने के लिए आज कोशिश कर रहे हैं ?हमें इस बात पर गौर करना चाहिए अगर हमने शरियत पर अमल किया होता तो यह हालात नहीं आते .

तलाक को लेकर जिस तरह बवाल मचा है और कानून बनाने की कवायद चल रही है वह भी हमारी अपनी कमियों की वजह से हुआ है जिस अमल को अल्लाह और अल्लाह के रसूल ने सख्त नपसंद किया है उसपर अमल किया जाता है तो तकलीफ होनी ही है हमें चाहिए हम अपने अल्लाह को राज़ी करें .

उन्होंने कहा कि अगर सरकार वाकई में मुसलमान औरतों की फ़िक्र कर रही है तो तलाक पर कानून बनाने से तो महज़ .5 %मुस्लिम औरतों का ही भला होगा और अगर आर्टिकल 341 से प्रतिबन्ध हटा लिया जाये तो 5 % मुस्लिम औरतों को फायेदा होगा अगर हक ही देना है तो 341 से प्रतिबन्ध हटा लिया जाना चाहिए क्योंकि तभी सबका साथ सबका विकास मुमकिन होगा .

आल इंडिया उलेमा व मशाइख बोर्ड यूथ के राष्ट्रिय अध्यक्ष मौलाना सय्यद आलमगीर अशरफ किछौछवी ने कहा कि युवाओं को चाहिए कि खुद तालीम हासिल करें और अपने छोटों को मदद करें सूफिया की तालीमात को पढ़ें भी और उस पर अमल भी करें क्योंकि देश में जिस तरह के हालात बनाने की कोशिश की जा रही है उसे सूफिया की मोहब्बत भारी तालीम से ही रोका जा सकता है.

By: Yunus Mohani