हक़दार तक हक़ पहुँचाना असल इबादत : सय्यद मोहम्मद अशरफ

22 अप्रैल, बुधवार: किछौछा अम्बेडकर नगर।
आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफी फ़ोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी अपनी ख़ानक़ाह खानकाहे अशरफिया शैखे आजम सरकारें कलां में बोर्ड और अल अशरफ ट्रस्ट के तत्वाधान में पिछले कई दिनों से हक़दार तक उनका हक़ पहुंचा रहे हैं, लगातार यहां से जरूरतमंदों को राशन बांटा जा रहा है, रमज़ान राशन किट के तौर पर ख़ानक़ाह से लगभग 600 हक़दार घरों तक राशन पहुँचाया जायेगा।
इस मौक पर हज़रत ने कहा कि रमज़ानुल मुबारक का पाक महीना शुरू होने वाला है, हमारी ज़िम्मेदारी बनती है लोगों तक राशन पहुँचाया जाये ताकि रमजान में उन्हें रोज़े रखने की कोई परेशानी पेश ना आये। उन्होंने कहा कि रमज़ान के महीने में हम खुसूसी इबादतें करते हैं लेकिन कोरोना वायरस की वजह से हुकूमत ने लॉक डाउन लागू कर रखा है और शरीअत ने भी इंसानी ज़िंदगी को बड़ी एहमियत दी है इसलिए इंसानी ज़िंदगी की हिफाज़त करते हुए एहकामे शरीअत की पाबन्दी की जानी चाहिए।
हमें चाहिए, लॉक डाउन में पिछले दिनों की तरह इमाम, मोअज़्ज़िन समेत सिर्फ पांच लोग पांच वक़्त की नमाज़ों की तरह तरावीह का भी एहतेमाम करें । ज़्यादा से ज़्यादा क़ुरान मजीद की तिलावत की जाये, कहीं भी किसी भी हालत में भीड़ नहीं लगानी है , हमारी दीनी और समाजी दोनों ज़िम्मेदारी है कि कहीं कोई भूखा न रह जाए, इसका खास ख्याल रखें।
हज़रत ने खुसूसी कहा, लाउड स्पीकर का इस्तेमाल सेहरी और इफ्तार का वक़्त बताने के लिए छोटे से एलान के लिए किया जाये और सेहरी के लिए जगाने वगैरह के लिए लाउड स्पीकर का इस्तेमाल न करें।
उन्होंने रमज़ानुल मुबारक में लोगों से घर में ही रहकर इबादत करने और कोरोना वायरस की महामारी से छुटकारा पाने के लिए ख़ास दुआ करने की अपील की ।

By: Husain Sherani

कोरोना वायरस से ज़्यादा खतरनाक है नफरत का वायरस : सय्यद मोहम्मद अशरफ

17 मार्च, 2020 महराजगंज
आल इंडिया व मशाइख़ बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफी फ़ोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि कोरोना वायरस से अधिक खतरनाक नफरत का वायरस है।
उन्होंने कहा कि हम कोरोना से बचने के लिए मास्क तो पहन रहे हैं लेकिन नफरत से बचने के लिए ज़हरीली जुबानों को नहीं रोक रहे हैं,हम वायरस से बचने के लिए बार बार हैंडवाश या साबुन से हाथ धो रहे हैं लेकिन उन हाथों को लोगों की मदद के लिए नहीं बढ़ा रहे, खांसते या छींकते वक़्त बीमारी के डर से मुंह को ढाप रहे हैं लेकिन किसी जरूरतमंद के कपड़ों का इंतजाम नहीं कर रहे।
हज़रत ने कहा कि दुनिया कोरोंना से एकजुट होकर लड़ लेगी इसकी दवा बनाकर इसे हरा भी देगी लेकिन इससे ज़्यादा खतरनाक बीमारी का इलाज होते हुए भी इसे खतम करने को तैयार नहीं है।
जबकि सिर्फ एक मुस्कुराहट इस वायरस से बचा सकता है,एक ख़ामोशी,इंसाफ और लोगों की मदद करने का जज्बा इसका इलाज है अगर सब इस काम में लग जाएं तो इस वायरस को खतम कर इसपे जीत हासिल की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि हम कोरोना को सुन्नते रसूल पे अमल कर हरा देंगे क्योंकि डॉक्टर जो बचाव के तरीके बता रहे हैं वह नबी की सुन्नत है इसी तरह हम नफरत के वायरस को भी नबी की सुन्नत पर अमल कर हरा सकते हैं जो सूफिया ने करके दिखाया और संदेश सुनाया कि नफरत किसी से नहीं मोहब्बत सबके लिए।

हलाल रिज़्क़, इंसाफ और मोहब्बत से बचेगी दुनिया : सय्यद मोहम्मद अशरफ

उलमा व मशाइख बोर्ड अध्यक्ष की कोरोना वायरस से सावधान रहने की अपील!

15 मार्च रविवार,सुनौली
आल इंडिया उलमा व मशाइख़ बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफी फ़ोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने कल सुनौली नेपाल बार्डर पर एक धर्म सभा को संबोधित करते हुए मौजूदा समय में दुनिया पा कोरोंना वायरस के खतरे पर बात करते हुए कहा कि “हलाल रिज्क,इंसाफ और मोहब्बत से बचेगी दुनिया”!
हज़रत ने कहा कि हमारे पैदा करने वाले रब ने हमें बता दिया कि हम क्या खा सकते हैं और क्या नहीं जब हम उससे मुंह मोड़ेंगे तो इस तरह की मुसीबत में गिरफ्तार हो जाएंगे,सिर्फ खान पान से ही नहीं बल्कि इंसाफ न करने पर भी ऐसी स्थिति उत्पन्न होगी दुनिया तरह तरह की मुसीबत में फंसती जा रही है तरक्की के नाम पर रोज इंसानियत को नेस्तनाबूद करने वाले हथियारों को बनाया जा रहा है जिस हथियार से दुनिया को सबसे ज़्यादा नुक़सान पहुंच सकता है जिससे सबसे ज़्यादा जाने जा सकती है उसे सबसे बेहतर हथियार माना जा रहा है और उस मुल्क को सबसे ज़्यादा विकसित राष्ट्र माना जा रहा है,जबकि होना तो यह चाहिए था कि सबसे ज़्यादा विकसित मुल्क उसे मना जाए जहां इंसान की जिंदगी को सबसे ज़्यादा बेहतर करने पर काम हो,जहां इंसाफ का निज़ाम कायम हो,और सबसे अच्छा हथियार वह हो जिससे सबसे काम इंसानी जानो का नुकसान हो।
उन्होंने कहा कि दुनिया आज कोविड19 की वजह चीन के लोगों के गलत खान पान को मान रही है चमगादड़ को इसका मुख्य कारण माना जा रहा है लेकिन इसी खतरे को आज से 1500 साल पहले हमारे नबी ने बता दिया था और सबको यह बता दिया कि क्या खाया जा सकता है और क्या नहीं अगर नबी की बात पर अमल हो तो मुमकिन नहीं कि इस तरह की बीमारी फैले,सिर्फ इतना ही नहीं इस बीमारी से बचने के जो उपाय डॉक्टर बता रहे थे यह तो सब प्यारे नबी की सुन्नत हैं खांसी अाए तो मुंह ढंक लो छींक अाए तो मुंह ढंक लो हाथ धो वज़ू करो जिससे नांक और मुंह में को गंदगी है साफ हो जाए ।
मुसलमानों को कोरोंना से नहीं अपने रब से डरना चाहिए और अपने रसूल की सुन्नत पर अमल करना चाहिए आप अपने आप इस खतरनाक बीमारी से बच जाएंगे साफ सफाई का ख्याल रखें हाथो को साफ रखें ।
हलाल रिज्क बीमारियों से बचाता है ,वहीं इंसाफ से अमन कायम होता है और अमन होने से तरक्की होती है ,हुकूमत को इंसाफ का निज़ाम कायम करना चाहिए जिस तरह के हालात से मुल्क दो चार है इसमें इंसाफ के जरिए लोगों में भरोसा कायम किया जाना चाहिए और नफरतों को मिटा कर मोहब्बत का वातावरण बनाया जाना चाहिए क्योंकि यदि नफरत नहीं रुकी तो कोरोंना से अधिक घातक साबित होगी और इस वायरस की एक ही वैक्सीन है वह है मोहब्बत।

Yunus Mohani

نئی نسل کو بچانے کے لیےخاندان کی ہر بیٹی کو تعلیم یافتہ بنایا جائے : سید محمد اشرف

عرس اعلی حضرت اشرفی میاں کچھوچھہ شریف کے سالانہ پرگرام میں حضور اشرف ملت کا فرمان
ہر سال کی طرح امسال بھی عالم اسلام کی عظیم ہستی،مجدد سلسلہ اشرفیہ،اعلیٰ حضرت سیدمحمد علی حسین اشرفی میاں کچھوچھوی قدس سرہ کا سالانہ عرس پاک نہایت تزک واحتشام کے ساتھ منعقد ہوا جس میں محفل عید میلاد النبی سے خطاب فرماتے ہوئے حضرت اشرف ملت نے کہا کہ اگر امت مسلمہ اپنی آنے والی نسلوں کو بچانا چاہتی ہے تو اسے اپنے گھر کی کم سے کم ایک بچی کو دینی تعلیم وتربیت سے آراستہ کرنا ہوگا۔انھوں نے کہا کہ بعض خلاف اولی مسائل کا سہا را لے کر خواتین کو مکمل طور پر معاشرتی دھارے سے کاٹ کر علاحدہ کردیا گیا ہے جس کی وجہ سے ان کو دینی مسائل سیکھنے کا موقع کم سے کم ملتا ہے۔اور ہر بچی مدرسہ میں جاکر تعلیم بھی حاصل نہیں کر سکتی ہے اس لیے صنف نازک کو ایساماحول فراہم کرنا ہی ہو گا جس سے وہ دین ومذہب کی سمجھ حاصل کرسکے۔مزارات پر عورتوں کی حاضری تمام فتا وی کے باوجود نہیں رک سکی، لہٰذا اب اس کو روکنے پر قوت صرف کرنے کی بجائے اسے بار آور بنا یا جائے،اوراعراس میں ان کی حاضری کوانھیں دین کی تعلیم وتر بیت سے جو ڑنے کا ایک حسین موقع بنا دیا جائے۔آخر مفتیان کرام عورتوں کے لیے نسواں اجتماعات منعقد کرہی رہے ہیں تو اجتماع کی نیت سے عرس میں جانا کیونکر ممنوع ہو سکتا ہے۔انھوں نے عورتوں کی فعال کا رکردگی کی ایک مثال پیش کرتے ہوئے کہا کہ مرکزی حکومت کے ظالمانہ کالا قانون سی اے اے، این آر سی، اور این پی آر، کی مخالفت کا پرچم جس طبقے نے بلند کیاہے اور قوم وملت کی عزت وآبرو بچائی ہے،اور یہ نتیجہ ہے ان کے دنیا وی تعلیم سے جڑنے کا،اب اگروہی طبقہ دینی تعلیم سے بھی جڑ گیا تو اندازہ کرسکتے ہیں کہ کیسا عظیم الشاان انقلاب آسکتا ہے۔
پروگرام کا آغاز تلاوت کلا م پاک سے ہوا،اس کے بعد محمدثاقب سلمہ متعلم جامعہ اشرفیہ مختا رالعلوم ٹانڈہ اور دیگر مداحان رسالت نے نعت ومنقبت کا نذرانہ پیش کیا۔اس کے بعدمفکر اسلام حضرت مولانا حبیب الرحمن علوی مداری سدھارتھ نگری ایکزیکٹوممبر بورڈ نے اشرف ملت کی قائدانہ صلاحیت کے موضوع پر پرمغز خطاب فرمایا۔اور کہا کہ قائد کے بغٖیر بڑی سے بڑی فوج بھی ناکام ہو جاتی ہے۔اللہ کا لاکھ لاکھ شکر واحسان ہے کہ امت مسلمہ کا یہ مسئلہ حضرت اشرف ملت کے منظر عام پر آنے کے بعد حل ہو چکا ہے،قومی وملی مسائل پر اشرف ملت کی نگاہ بہت باریک ہے،اس لیے پوری قوم کو قائد تلاش کرنے کی بجائے ان کی قیادت پر متفق ہو جاناچاہیے۔اور آل انڈیا علما ومشائخ بور ڈ اس کے لیے سب سے موزوں پلیٹ فارم ہے۔جو پچھلی ایک دہائی سے قوم وملت کی ترجمانی کر رہاہے۔علامہ مداری نے کہا کہ جو لوگ بورڈ کی بے بنیادافوہوں کی وجہ سے مخالفت کررہے ہیں ان کو اپنا محاسبہ کرنا چاہیے،اور قوم وملت کے سرمایے کو برباد ہو نے سے بچا ناچاہیے۔یہ ایک سنہرا موقع ہے اس سے فائد ہ اٹھا نا چاہیے۔
اس کے بعد امیرا لقلم حضرت علامہ ومولانا مفتی صوفی مقبول احمد سالک مصباحی بانی ومہتمم جامعہ خواجہ قطب الدین بختیار کاکی،نئی دہلی نے اطاعت امیر کے موضوع پر شاندار خظاب فرمایا اور کہا کہ امت مسلمہ کے تمام مسائل کا حل صرف اور صرف اطاعت امیر میں ہے۔۴۱سو سالوں سے امت مسلمہ جو انارکی وبے چینی اور افتراق وانتشار کا شکا رہے اس کی بنیا دی وجہ امیر کی عدم اطاعت ہے۔اگر روز اول سے ہی امیر وقت کی اطاعت کی گئی ہو تی تو نہ قتل عثمان غنی کا بلوہ پیش آتا اور نہ حضرت مولاعلی،حضرت امام حسن کی مظلومانہ شہادت پیش آتی۔اور نہ ہی آ نے والے وقت میں معرکہ کرب وبلا کا سانحہ پیش آتا،جس کا درد آج تک بھلایا نہ جاسکا۔مولانا سالک مصباحی نے کہا کہ آج بھی نہ عالم اسلام کا کوئی متفقہ قائد ہے اور نہ مسلمانان ہند کا ہی کوئی رہبر ورہنما ہے،شتر بے مہار کی طرح ہر قبیلہ اور مسلک جد اجد اراستے پر گامزن ہے۔جس کی وجہ سے پچھلے ستر سالوں میں مسلمان ستر بار اجتماعی قتل عام کا شکار ہو چکا ہے۔اورابھی حال میں دہلی میں ہونے والی تباہی کا درد ناک منظر سب کے سامنے ہے۔ مولانا مصباحی نے کہا کہ اب نہ کوئی نیا نبی آنے والا ہے اور نہ وحی الٰہی نازل ہونے والی ہے،اب ہمیں ہی کچھ کرنا ہوگا۔اور وقت بہت مختصر رہ گیا ہے،دشمن ہمارے صفایا کی پوری تیاری کرچکا ہے۔یکے بعد دیگرے سب کا نمبر آنے والاہے۔
مجاہد اسلام مولانا سید محمد عالم گیر اشرف اشرفی الجیلانی بانی سنی سینٹر ناگپورنے کہا کہ منافق اگر صحیح بات بھی کہے تو نہ سنا جائے جیسا کہ قرآن کریم میں ارشاد باری تعالی ہوا۔اور منافقین کہتے ہیں کہ آپ اللہ کے رسول ہیں اور اللہ گواہی دیتا ہے کہ آپ اللہ کے رسول ہیں اور یہ منافقین سخت جھوٹے ہیں۔وجہ اس کی روح کلمہ سے منافقین کی ناواقفیت ہے۔اور روح کلمہ سے مراد ذات مصطفیٰ اور خاندان مصطفی ہے۔دور رسالت میں ذات مصطفٰی کے منکرین تھے اور اس کے بعد خاندان مصطفیٰ کے منکرین کی کثرت ہے۔اور یہ دونوں کے دونوں روح کلمہ سے ناواقف ہو نے کی وجہ سے مردود ومبغوض ہیں۔اور افسوس کہ آج بھی یہ دونوں ہمارے درمیان موجود ہیں۔اور ملت کے لیے ناسور ہیں۔مجاہد اسلام نے اس بات پر زور دیا کہ سادات کرام کی تعظیم وتوقیر کی تحریک کو آگے بڑھا یا جائے،اور سماج میں ان کے تئیں احترام وتکریم کے جذبات کو فروغ دیا جائے۔سادات اگرچہ کسی کی تعظیم وتوقیر کے محتاج نہیں ہیں مگر ان کی تعظیم وتوقیر سے مسلمانوں میں طاقت وقوت پیدا ہوتی ہے۔
عرس کا یہ پروگرام سہ روزہ تقریبات پر مشتمل رہا۔جس کی تفصیل کچھ اس طرح ہے۔
۹/رجب المرجب،۱۴۴۱ھ مطابق ۵/مارچ ۰۲۰۲ ء بروز جمعرات ۴۲/واں عرس سرکار کلاں مخدوم المشائخ حضرت سید شاہ محمد مختا راشرف الاشرفی الجیلانی قدس سرہ العزیز
پروگرام: (۱)بعد نماز عصر: رسم پرچم کشائی وترانہ اشرفی،(۲)بعد نماز عشا: تقاریر علمائے کرام
۰۱/رجب المرجب،۱۴۴۱ھ مطابق ۶/مارچ ۰۲۰۲ ء بروز جمعہ۸/واں عرس شیخ اعظم محمد اظہا راشرف الاشرفی الجیلانی قدس سرہ العزیز بانی جامع اشرف وسجادہ نشین آستانہ عالیہ اشرفیہ حسنیہ سرکارکلاں درگاہ کچھوچھہ شریف و عرس عالم ربانی،ضلع امبیڈکر نگر،یو پی
پروگرام: (۱)بعد نمازفجر: قرآن خوانی،(۲)صبح ۹/بجے دن تا ۱/بجے دن: نعت ومنقبت ومحفل سماع،وقل شریف،(۳)بعد نماز عشا: تقاریر علمائے کرام
۱۱/رجب المرجب،۱۴۴۱ھ مطابق ۷/مارچ ۰۲۰۲ ء بروزہفتہ عرس اعلی حضرت شیخ لمشائخ سید شاہ ابو احمد المدعو محمد علی حسین الاشرفی الجیلانی،رضی اللہ تعالی عنہ
پروگرام: (۱)بعد نمازفجر: قرآن خوانی،(۲)صبح ۹/بجے دن تا ۱/بجے دن : نعت ومنقبت ومحفل سماع،وقل شریف مع فاتحہ ودعا (۳) بعد نماز ظہر: تقسیم لنگر
پروگرام کی سیادت وسرپرستی شیخ الہند حضور اشرف ملت ابوالنواز حضرت سید محمد اشرف الاشرفی الجیلانی،بانی وصدر آل انڈیا علما ومشائخ بور ڈ وچیر مین ورلڈ صوفی فورم،نئی دہلی نے فرمائی۔نظامت کے فرائض راقم السطورمحمد عرفان اشرفی خطیب وامام غوثیہ مسجد ڈالی گنج کراسنگ لکھنؤ نے انجام دی۔جب کہ نگرانی وترتیب کا فریضہ آل انڈیا علما ومشائخ بور ڈ کے قومی ترجمان امیر القلم مولانا مقبول احمد سالک مصباحی دہلوی نے انجام دیا۔پروگرام میں قرب وجوار کے عوام اہل سنت،سنی صوفی مسلمان،اورعلما ومشائخ کے علاوہ دورو دراز کے مریدین ومتوسلین اور علما ومشائخ نے بھی شرکت کی۔مولانا برکت حسین مصباحی پرنسپل،اور قاری مہتاب عالم استاذ جامعہ کاملیہ مفتاح العلوم،حافظ کاشف علی گو رکھپوری،قدیر جویلری کولھوئی بازار،مہراج گنج یوپی،مولانا مفتی تاج الدین اشرفی پرنسپل جامعہ اشرفیہ مختار العلوم ٹانڈہ،حضرت شیخ سرفراز احمد اشرفی خلیفہ حضور اشرف ملت (ہالینڈ)حضرت پیر محمد علی نقش بندی میرٹھ اورمولانا ابن علی اشرفی دوارکا (نئی دہلی) مولانا عظیم اشرف سنبھلی وغیرہ نے اپنی شرکت سے پروگرام کوکامیاب بنایا۔
جس دن خانقاہ اشرفیہ حسنیہ سرکار کلاں میں عرس کا اختتام ہوتا ہے اسی دن خانقاہ شیخ اعظم سرکار کلاں میں عرس کا آغاز ہوتا ہے تاکہ کسی طرح کی تکرار اور مریدین کے لیے زحمت کا ذریعہ نہ بنے۔اور خانقاہ شیخ اعظم کا عرس بھی سہ روزہ ہوتا ہے،جیسا کہ اشتہار سے ظاہر ہے۔امسال آخری قل شریف میں خانقاہ اشرفیہ حسنیہ سرکار کلاں کے صاحب سجادہ حضرت سید محمود اشرف اشرفی الجیلانی بھی رونق افروز ہوئے جس سے عرس اشرفی کا رنگ دوبالا ہوگیا۔اور دونوں برادران کو ایک جگہ ایک مجلس میں دیکھ کر زائرین اور خانوادہ کے افراد کے چہرے کھل اٹھے،۔حضور قائد ملت نے کرم نوازی فرماتے ہوئے آخری قل شریف میں دعا بھی فرمائی۔حضور قائد ملت کے ساتھ ساتھ آپ کے نور نظر ولی عہد،بھی جلوہ افروزرہے۔مزیدبرآں حضرت سید احسن میاں اشرفی جیلانی چیف ایڈیٹر مجلہ سرکارکلاں،حضور اشرف ملت کے برادر اصغر حضرت سید حماد اشرف اشرفی جیلانی،حضرت سید حسن میاں اشرفی جیلانی،حضرت سید راشد میاں اشرفی جیلانی حضرت سید عسکری میاں اشرفی جیلانی جانشین محدث اعظم،دامت برکاتہم وغیرہ کی آمد آمد نے پروگرام کو عرش نشین بناد یا۔
پروگرام کے اختتام پرتمام افراد خانہ، علماومشائخ، زائرین وحاضرین اور جامع اشرف کے تمام طلبہ واساتذہ کی لنگر عام سے ضیافت کی گئی۔اور یہ مبارک سلسلہ الحمد للہ تینوں دن جاری وساری رہتا ہے۔ ہر سال کی طرح امسال بھی ملک کے مختلف صوبوں اور علاقوں کے عقیدت منداں اور رضاکاران شریک ہوئے اورخانقاہ میں منعقد ہونے والی تمام تقریبات کو بحسن وخوبی انجام دیا۔خصوصیت کے ساتھ مختار العلوم کے طلبہ،اساتذہ،بہار وبنگال، راجستھان اور سنبھل ومراد آباد کے زائرین کی جان توڑ کوششیں بڑی قیمتی ہو تی ہیں۔اللہ تعالی ان تمام حضرات کو جزائے خیر عطا فرمائے۔اور بالخصوص غوث العالم،تارک السلطنت سلطان سید اشرف جہاں گیر سمنانی قدس رضی اللہ تعالی عنہ کے فیوض وبرکات سے مالامال فرمائے۔آمین

AIUMB की दिल्ली दंगों में तबाह लोगों के लिए रिलीफ की अपील ।


अस्सलामु अलैकुम ,
आप हज़रात बखूबी वाक़िफ़ हैं देश के हालात से और दिल्ली में जिस तरह की तबाही हुई उससे भी। कुछ नादान नफरत के नशे में चूर होकर कब इंसानियत के दुश्मन दरिंदे बन गए जिन्होंने बस्ती की बस्ती जला डाली, लोगों की जानें गईं , घर दुकान सब तबाह हो गए, लोग सड़कों पर आ गए। ऐसे में हम सब का दीनी और इंसानी फ़र्ज़ है कि हम इनकी मदद को आगे आएं और इनकी बिखरी ज़िंदगियों को समेटने का काम करें।
पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम के फरमान के मुताबिक़ मुसीबतज़दा लोगों की मदद बिना उनके धर्म और ज़ात पात को देखे इंसानियत की बुनियाद पर करनी है, सूफियों ने यही तरीक़ा अपनाया कि अपने अख़लाक़ से नफरतों की आग को ठंडा कर दिया, अब समय आ गया है, आपके आल इंडिया उलमा व मशाइख़ बोर्ड ने यह फैसला किया है कि हम सब मिलकर दिल्ली दंगों में उजड़े हुए लोगों को हर मुमकिन मदद पहुंचाएंगे ताकि उनकी ज़िंदगी पटरी पर आ सके।
इस अज़ीम कारे खैर में बोर्ड अपने सभी ज़िम्मेदारों से अपील करता है कि वे अपने अपने इलाकों में रिलीफ जमा करें और बोर्ड के ज़रिए दिए गए एकाउंट नंबर में इसे जमा करें ताकि लोगों को राहत पहुंचाई जा सके , जो फसाद में बर्बाद हुए हमारे भाई बहन हैं उनकी ज़िम्मेदारी हमारी है लिहाज़ा बढ़ चढ़ कर इस कारे खैर में हिस्सा लें।
अल्लाह हम सब के इस नेक अमल को अपने हबीब करीम जनाबे मुहम्मदुर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम के सदक़े अपनी बारगाह में क़ुबूल फरमाए।
آمین یا رب العالمین. بجاہ سید المرسلین ﷺ
Account Details:
Bank : VIJAYA BANK, KALKAJI, DELHI
A/C : 606301011003687
Name : AL ASHRAF TRUST
Ifsc Code : VIJB0006065

आल इंडिया उलमा व मशाइख़ बोर्ड , दिल्ली

AIUMB Joint Secretary at 9th Annual International Conference on Tasawwuf/Sufism and World Peace.

Istanbul, Turkey: February 19th, 2020


First time India represented at the 9th Annual International Conference on Tasawwuf/Sufism and World Peace – Istanbul – Turkey.

Haji Syed Salman Chishty, Joint Secretary at All India Ulama & Mashaikh Board (An apex body of Sunni Sufi Muslims in India) represented 800 years old Sufi lineage of the Chishty Sufi Order from Ajmer Sharif and Indian Sub Continent at the Conference.

AIUMB Joint Secretary said He was Proud to raise our Indian Flag and represent All India Ulama & Mashaikh Board (An apex body of Sunni Sufi Muslims) India for the first time at the 9th annual International Summit on Sufism/Tasawwuf org by Intl Academy of Sufi Scholars in Turkey. Thanks to International Institute of Non Aligned Studies, Delhi for facilitating our presence at the summit.

Haji Syed Salman Chishty talked about importance of having Sufi Understanding of the hearts among the peace loving societies across the world and said that Sufism/Tasawwuf is primarily realized by the renditions of the hearts, not by analytics of the mind. Important to reflect on vibrations of the Heart to experience Spiritual longing n Belongings to the Divine Realm, In his remarks.
while He addressed the Round Table Discussion along with Sufi Scholars from over 50 countries mainly from Arab Middle Eastern, North African, Central and South Asia, USA, Balkans, European Union and Russian Federations.

Organised by “International Academy of Sufi Scholars and DarAsalaam Kulliasi”. Leading Islamic scholars, Spiritual leaders, Sufi personalities & diplomats from 50 countries & organisations have taken part.

Introducing AIUMB at the summit he said that All India Ulama & Mashaikh Board (AIUMB) has been established with the basic purpose of popularizing the message of peace of Islam and ensuring peace for the country and community and the humanity. AIUMB is striving to propagate Sunni Sufi culture globally .Mosques, Dargahs, Aastanas, and Khanqahs are such fountain heads of spirituality where worship of God is supplemented with worldly duties of propagating peace, amity, brotherhood and tolerance.

On the closing remarks Haji Syed Salman Chishty extended warm regards and thanks on behalf of India and extended the personal invitation to all Sufi Spiritual leaders to visit India and experience the rich spiritual and cultural heritage of India.

Concluding Prayers for World Peace was done collectively by all eminent Spiritual personalities.

By: Husain Sherani

वतन पे जान लुटाने वालों का हम सब पर क़र्ज़ : सय्यद मोहम्मद अशरफ

कोलकाता में 16 फरवरी को सूफी कांफ्रेंस आयोजित

14 फरवरी,2020 कोलकाता,

आल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड के अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफी फ़ोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने पिछले साल आज ही के दिन हुए पुलवामा अटैक में वतन पर अपनी जान लुटा देने वाले भारत के वीर जवानों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि वतन पर जान लुटाने वालो का हम सब पर कर्ज है।

उन्होंने कहा कि जब हमारे जवान मुश्किल से मुश्किल मौसम और हालात से जूझते हुए हमारी सरहदों की हिफ़ाज़त करते हैं तब हम अपने घरों में चैन की नींद सोते हैं, हमारी हर सुकून भरी नींद पर इनका अहसान है, हमें यह नहीं भूलना चाहिए। सभी देशवासियों को मिलकर उनके परिवारों की हर तरह की मदद करनी चाहिए ताकि जो अपना सबकुछ हमारे वतन के लिए न्योछावर कर गए उनके परिवार एक बेहतर जिंदगी गुजार सकें।
हज़रत ने कहा कि हमें हर वक़्त अपने जवानों की कुर्बानी याद रहनी चाहिए, इससे भ्रष्टाचार भी कम होगा और समाज में आपसी भाईचारा भी बढ़ेगा, उन्होंने पूरे देश का आह्वाहन करते हुए कहा कि आइए हम सब देश के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दर्शाते हुए यह संकल्प लें कि अब इन वीर सपूतों के सम्मान में हम देश को दीमक की तरह खोखला कर रहे भ्रष्टाचार के विरूद्ध खड़े होंगे और अपने अपने स्तर पर जहां भी संभव होगा इसे रोकने का प्रयास करेंगे, यही इन वीरों के प्रति हमारी असली श्रद्धांजलि होगी।
वह यहां कोलकाता में आल इंडिया उलमा व मशाइख़ बोर्ड द्वारा 16 फरवरी रविवार को आयोजित होने वाली सूफी कॉन्फ्रेंस के लिए आए हुए हैं, इस कॉन्फ्रेंस में देश की बड़ी विख्यात ख़ानक़ाहों के सज्जादानशीन प्रतिनिधि, उलमा और बुद्धिजीवी शिरकत कर रहे हैं और कोलकाता की धरती पर आयोजित होने वाली यह अपनी तरह की पहली कॉन्फ्रेंस है जिसमें बड़ी तादाद में लोगों के जुटने की बात हो रही है।

Yunus Mohani

یوم جمہوریہ پرآل انڈیا علماء و مشائخ بورڈ کی صدارت و سرپرستی میں بچیوں نے دکھایا ہنر

جامعہ فاطمہ نسواں میں جشن یوم جمہوریہ کا انعقاد
خوریجی، نئی دہلی (پریس رلیز)
یوم جمہوریہ کا جشن ہر ہندوستانی کے لئے ایک قانونی، دستوری، ملکی اور سماجی تہوار ہے۔ یہ وہ موقعہ ہے جس دن ملک کے مخلتف مذاہب، برادریوں، زبانوں، تہذیبوں اور علاقوں کے پھولوں کو دستور ہند کے گملے میں سجا کر ایک گلدستہ بنایا گیا تھا۔ 26 جنوری 1950 کو یہ دستور نافذ کیا گیا جس نے ملک کے ہر باشندے کو برابری کا حق دیا۔ان خیالات کا اظہار خوریجی خاص میں لڑکیوں کے ادارہ جامعہ فاطمہ نسواں کے ناظم جناب عرفان صاحب نے کیا۔
طالبات سے خطاب کرتے ہوئے ماہنامہ کنزلایمان کے مدیر مولانا ظفر الدین برکاتی نے کہا کہ ماضی کے آزادی اور انقلاب کی تاریخ میں اگر چہ مردوں کے تذکروں کا غلبہ ہے لیکن وہاں بھی خواتین کا خاطر خواہ رول موجودہ ہے۔جھانسی کی رانی لکشمی بائی اور بیگم حضرت محل کے نام قابل ذکر ہیں۔ دستور ہند تیار کرنے کے لئے 249 ارکان پر مبنی دستور ساز کمیٹی نے 7رکنی ایک صدارتی کمیٹی تشکیل دی تھی جس میں ایک خاتون اعجاز رسول کا نام بھی ہے۔دستور ہند کے نفاذ کے وقت ہندوستانی پرچم کی تزئین کا کام بھی ایک خاتون سریا طیب نے کیا تھا۔کل جب اکیسویں صدی کی تاریخ لکھی جائے گی تو اس میں سر فہرست نام ان خواتین کا ہوگا جنہوں نے شاہین باغ سے پورے ملک میں انقلاب کی شمع جلائی ہے۔
مولانا مختار اشرف نے اپنے خطاب کے دوران ماں کے قدموں کے نیچے جنت، بیوی کے حقوق، بہن کے فرائض اور بیٹی کی فضیلت پر قرآن آیات اور نبوی ارشادات کے حوالے سے روشنی ڈالی۔انہوں نے کہا کہ جس طرح اسلام کا دستور ہمارے لئے ضروری ہے اسی طرح ہمارے ملک کا دستور بھی ہمارے لئے واجب العمل ہے۔ کیونکہ اس پر عمل آوری کا حکم ہمیں ہمارا قرآن اور صاحب قرآن دیتے ہیں۔
نیا سویرا نیوز کے چیف ایڈیٹر عبد المعید ازہری نے اپنی گفتگو کے دوران کہا کہ خدا نے انسان کو صرف عبادت کے لئے نہیں پیدا کیا کیونکہ عبادت کے لئے تو فرشتوں کی بڑی تعداد موجود ہے۔اور عبادت صرف نما ز روزہ اور دیگر فرائض نہیں ہیں۔بلکہ ایک انسان کی زندگی کسی دوسرے کے لئے باعث تکلیف نہ ہو اور ہر فرد کی زندگی میں خدا کی مخلوق سے محبت اور اس کے لئے درد ہو یہ بھی عبادت اور خدا کی اس میں رضا بھی ہے۔ہر وہ علم جس سے خود کی ذات اور ارد گرد کے ماحولیات میں مثبت تبدیلی نہ آئے وہ سودمند نہیں ہے۔
پروگرام کے اخیرمیں آل انڈیا علماء و مشائخ بورڈ صدر دفتر کے ترجمان محمد حسین شیرانی نے دستور ہند کا پہلا صفحہ پڑھ کر اس کی حفاظت کا عزم و عہد لیا۔ بورڈ دہلی کے سکریٹری سید شاداب حسین رضوی نے شکریہ ادا کیا۔ پروگرام میں جامعہ فاطمہ نسواں کی طالبات شبانہ ناز،کہکشاں مزمل نے یوم جمہوریہ اور شہریت ترمیمی قانون پر تقریریں کیں، کنیز نوری،جنت الفردوس، سائمہ شاکر،اقرا عثمان،منتشا محسن، فرح اعجاز اور نعیمہ نیاز نے قومی ترانہ، گیت، نظم پیش کئے۔پروگرام میں محمد عظیم اشرف، منا بھائی، عبد القیوم، حافظ قمرالدین، حافظ سلیم الدین جامعہ کے اساتذہ، استانیہ، دیگر ذمہ داروں کے علاوہ جامعہ کی طالبات اور خوریجی علاقہ کی ذمہ دار خواتین موجود تھیں۔

Abdul Moid Azhari

देश भक्ति का सैलाब है मुल्क में, भारत का भविष्य सुनहरा : सय्यद मोहम्मद अशरफ

26 जनवरी, नई दिल्ली
आल इंडिया उलमा व मशाइख़ बोर्ड के अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफी फ़ोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने सभी देशवासियों को 71वां गणतंत्र दिवस की बधाई देते हुए कहा कि आज देश में देश भक्ति का सैलाब आया है जिसने दुनिया को संदेश दिया है कि भारत का भविष्य बहुत सुनहरा है।
उन्होंने लोगों को शिक्षा के लिए आंदोलन चलाने की बात कही, उन्होंने कहा कि सभी को इस ओर ध्यान देना है और लोगों को जिनके पास पैसे हैं, जो अपने बच्चों को पढ़ाने के अलावा दूसरे बच्चे की फीस जमा कर सकता है वह करे, जो दो बच्चों की फीस भर सकता है भरे और जो 4 बच्चे पढ़ा सकता है पढ़ाए क्योंकि मुल्क और समाज की तरक्की शिक्षा से ही होगी।
हज़रत ने कहा कि लोगों को हिंसा से अराजकता से बिल्कुल बचते हुए लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखनी चाहिए,हमें ख्याल रखना चाहिए कि किसी भी हालत में देश का नुक़सान न होने पाए, यह खुशी की बात है कि लोगों में जिस तरह का ज़ज़्बा अपने संविधान और देश के लिए देखा जा रहा है, जो बताता है कि मुल्क का भविष्य सुनहरा है और किसी भी विदेशी ताकत में यह ताकत नहीं है कि वह हमारे इस चमन को बांट पाए।
आज हर हाथ में तिरंगा है, हर ज़ुबान पर संविधान यह भारत की ताकत को दर्शाता है कि भले हज़ार असहमतियां हों लेकिन देश की बात आएगी हमारे तिरंगे के सम्मान की बात आएगी तो हम एकजुट हैं, सरकार और जनता के बीच खींचतान तो लोकतंत्र की खूबसूरती है लेकिन इसमें हिंसा का कोई स्थान नहीं है, सभी को गणतंत्र दिवस की बधाई और यह अपील भी कि इस चमन को आग से बचा कर रखना है ताकि यह फूल खूब खिले, खूब महके, वतन में हमेशा फसले बाहर रहे।

Yunus Mohani

ननकाना साहिब गुरुद्वारे पर हमला नबी की तालीम के सख्त खिलाफ : सय्यद मोहम्मद अशरफ

4 जनवरी (2020)शनिवार,मुम्बई
आल इंडिया उलमा व मशाइख़ बोर्ड के अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफी फ़ोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने ननकाना साहिब गुरुद्वारे को घेर कर पत्थरबाजी की घटना की निन्दा करते हुए कहा है कि यह काम नबी की तालीम के सख्त खिलाफ है,उन्होंने कहा कि जब पैगम्बर ए इस्लाम सल्लाल्लाहू अलैहि वसल्लम ने मदीना स्टेट बनाया तो वहां के अल्पसंख्यकों के अधिकार रखे और उनकी इबादतगाहों तथा उनकी जान माल की हिफ़ाज़त का वादा किया।
उन्होंने कहा, पाकिस्तान की सरकार इस मामले में फौरन दखल दे और हर कीमत पर ऐसा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाए तथा गुरुद्वारे की पवित्रता को बरकरार रखा जाए। चूंकि ननकाना साहिब में सिख भाइयों के प्रथम गुरु गुरु नानक देव जी का जन्म हुआ इसलिए इस जगह से उनकी अकीदत है,जिसका सम्मान किया जाना चाहिए।
हज़रत ने पाकिस्तान के लोगों से अपील करते हुए कहा कि नबी की तालीम पर अमल करें क्योंकि इस तरह अगर कोई करता है तो यह सीधा उस पैग़म्बरे अमन की तालीम की अव्हेलना है लिहाज़ा सब बाहर निकलकर सिख भाइयों की मदद के लिए आएँ।
उन्होंने कहा कि भारत का हर मुसलमान सिख भाइयों के साथ है और हम इस तरह के कृत्य को बर्दाश्त नहीं करते, इसकी कड़ी निन्दा करते हैं क्योंकि किसी को किसी की धार्मिक भावनाओं को आहत करने का अधिकार इस्लाम नहीं देता है, इस्लाम की तालीम हर जगह ज़ुल्म और ज़ालिम के खिलाफ मजलूम के साथ खड़े होना है।

By: यूनुस मोहानी