सिर्फ जश्ने आज़ादी मनाना नहीं बल्कि आज़ादी को महफूज़ भी रखना है: सय्यद मोहमम्द अशरफ

15 अगस्त /दिल्ली “सिर्फ जश्ने आज़ादी मनाना नहीं बल्कि आज़ादी को महफूज़ भी रखना है “यह बात आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड और वर्ल्ड सूफी फोरम के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहमम्द अशरफ किछौछवी ने जश्ने आज़ादी के मौक़े पर कही उन्होंने मुल्क के सभी लोगों को यौमे आज़ादी की मुबारकबाद देते हुए कहा कि यह मुल्क का राष्ट्रिय पर्व है .

सभी को पूरे हर्षो उल्लास के साथ इसमें शरीक होना चाहिए क्योंकि देश से हम हैं हमारी पहचान हमारे मुल्क से है इसकी आज़ादी को बरक़रार रखना हम सबकी सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी है .उन्होंने कहा कि आज़ादी को छीनने के लिए बड़ी ताकतें लगी हुई हैं लेकिन हम हिन्दोस्तानी अपना सबकुछ लुटाकर भी इसे किसी को छीनने नहीं देंगे .

हज़रत ने कहा कि हमारे बीच में नफरत के बीज इसीलिए बोये जा रहे हैं कि हम एक होकर अपने मुल्क को भी बचाने न खड़े हो सके क्योंकि हमारा इतिहास यही रहा है जब देश की बात आई है तो हम सब एक नज़र आये हैं और देश के दुश्मन यह जानते हैं कि अगर यह एक रहे तो इन्हें मात देना मुमकिन नहीं है .

उन्होंने कहा कि हिन्दू मुस्लिम नहीं हिन्दोस्तानी बन कर सोचिये कि नफरत का नतीजा क्या होगा ?मोहब्बत से नफरतों को हरा दीजिये यही देशभक्ति का तकाजा है.अब अगर कोई नफरत की बात करे तो समझ जाइये यह देश का दुश्मन है देश तोडना चाहता है .लोगों के बहकावे में मत आइये सबको गले लगाइये.

 

By: Yunus Mohani

 सपनों का हिन्दोस्तान बनाना आज़ादी के परवानों को सच्ची श्रधांजलि: उलमा मशाइख बोर्ड

14 अगस्त 2018 ग़ालिब अकादमी, बस्ती हज़रत निजामुद्दीन में आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड द्वारा आयोजित “एक शाम आज़ादी के परवानो के नाम “कार्यक्रम में बोलते हुए दरगाह निज़ामुद्दीन औलिया के गद्दीनशीन हज़रत सय्यद फरीद अहमद निज़ामी ने कहा कि “सपनों का हिन्दोस्तान बनाना आज़ादी के परवानों को सच्ची श्रधांजलि होगी” उन्होंने कहा कि हम सबकी साझा ज़िम्मेदारी है कि देश से भ्रष्टाचार को हटाने का भरसक प्रयास करें ताकि समाज की अंतिम पंक्ति में बैठे इंसान तक ऊपर से चलने वाली योजनाओं का पूरा लाभ मिल सके.

दिल्ली वक्फ बोर्ड और हज कमेटी के ई .ओ.अशफाक अहमद आरिफी ने जंगे आज़ादी के सिपाहियों को सलाम करते हुए कहा कि मुस्लिम उलमा ने जंगे आज़ादी में जो किरदार पेश किया वह बेमिसाल है. अल्लामा फज़ले हक़ खैराबादी का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अंग्रेजों के खिलाफ जिहाद का फतवा देने वाले मौलाना ने मुल्क की आज़ादी के लिए जान कुर्बान कर दी और फिरंगी हुकूमत कि जड़ों में दही डाल दिया जब यह लडाई आगे बढ़ी तो अनगिनत आलिमे दीन ने अपने खून से इसको ताक़त दी. दिल्ली उर्स कमेटी के चेयरमैन ज़ाकिर खान ने कहा का खानक़ाहों का बड़ा रोल जंगे आज़ादी में रहा, समाज को दिशा देने का काम यहाँ से किया जाता है, मोहब्बत का संदेश आम किया जाता है, इस मुश्किल दौर में खानक़ाहों की बड़ी ज़िम्मेदारी है कि मुल्क की आज़ादी को बरकरार रखने और सपनों का भारत बनाने के लिए समाज को दिशा दें और यह काम हो भी रहा है. सय्यद आज़म अली सज्जादानशीन हज़रत तुर्कमान बियाबानी रह्मतुल्लाह अलैहि ने कहा कि मुल्क को फिरंगी चंगुल से आज़ाद कराने में सभी देशवासियों ने मिलकर लडाई लड़ी, मुसलिम उलमा ने अपना किरदार बखूबी अंजाम दिया, अब ज़िम्मेदारी हम सबकी है कि इस आज़ादी का मोल समझें, अपनी आने वाली नस्लों को बतायें कि इस आज़ादी को हासिल करने में हमने अपनी जानों के नज़राने पेश किये हैं, इस चमन को हमें हर हाल में सुरक्षित रखना है. कार्यक्रम में बोलते हुए स्थानीय विधायक श्री प्रवीन कुमार ने कहा कि बोर्ड का यह प्रयास सराहनीय है. उन्होंने कहा कि देश भ्रष्टाचार के दलदल में फँस गया है अब हमें दोबारा लडाई लड़नी है इसलिए हमें अपना इतिहास पढना होगा, अपने बुजुर्गों की कुर्बानियां याद करनी होगी. श्री अनिल बाजपाई विधायक (गांधीनगर) ने कहा कि गोरों से मुल्क आज़ाद हो गया है लेकिन काले अंग्रेजों ने अपनी गन्दी नज़र देश के खज़ाने पर डाली हुई है, हमें इनकी लालची सोच से मुल्क को आज़ाद करना होगा, यही शहीदों को हमारी श्रधांजलि होगी. श्री नितिन त्यागी विधायक (लक्ष्मी नगर) ने कहा कि देश आज़ादी का जश्न मना रहा है लेकिन नफरत की बेड़ियाँ हमें क़ैद करने पर तुली हैं, मुल्क को नफरतों के तूफ़ान से बचाना हम सब की सांझी ज़िम्मेदारी है. प्रोफेसर ख्वाजा मोहम्मद इकरामुद्दीन, जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस के प्रोग्रामों का आयोजन असल में इस लिए होता है कि हम ने स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए जो बलिदान दिये हैं उनको याद करें, क्योंकि इतिहास हमें देश की मोहब्बत के लिए ज़हनों को ताज़ा करता है. इस दिन को इसलिए भी याद रखने की जरूरत है, क्योंकि वर्तमान परिस्थितियों में इतिहास को मिटाने का सहज प्रयास किया जा रहा है, खासकर मुस्लिम समुदाय में उलमा ने विशेष तौर पर इसके लिए प्रयास किया है. तारीख को जीवित रखने के लिए ऐसे कार्यक्रमों की आवश्यकता है. गुलाम रसूल देहलवी ने जंगे आज़ादी पर अहम् जानकारी दी ,कार्यक्रम को सय्यद फरहान हक्की सज्जादा नशीन हज़रत मोहद्दिस अब्दुल हक देहलवी र.अ., सय्यद वकील अहमद, अब्दुल मोईद अजहरी, ,एफ. आई. इस्माइली,ने भी संबोधित किया.

कार्यक्रम का संचालन करते हुए यूनुस मोहानी ने कहा कि आज़ादी की क़ीमत समझे बगैर उसका हक़ अदा नहीं किया जा सकता, लिहाज़ा हम सब को मिलाकर जान से प्यारे हिन्दोस्तान में एक बार फिर घर घर तक यह संदेश पहुँचाना होगा कि देश है तो हम हैं, नफरत की दीवार गिराकर इसकी तरक्की के लिए आगे आयें. कार्यक्रम का प्रारम्भ मौलाना मुख़्तार अशरफ ने क़ुरआन मजीद की तिलावत से की, हाफिज क़मरुद्दीन ने नात पेश की और हाफिज़ हुसैन शेरानी ने क़ौमी तराना गाया. आखिर में सय्यद शादाब हुसैन रिज़वी ने लोगों का शुक्रिया अदा किया. कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के बाद मुल्क में अमन व चैन की दुआ के साथ हुआ.

By: यूनुस मोहानी

ग़रीबी और अशिक्षा को मिटाने की बात कीजिए तलाक़ पर तकरार बेमानी : सय्यद मोहम्मद अशरफ

श्रीलंका/कोलंबो 9 अगस्त “गरीबी और अशिक्षा मिटाने की बात कीजिए तलाक़ पर तकरार बेमानी” यह बात वर्ल्ड सूफी फोरम व आल इंडिया उलमा व मशायख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने पत्रकारों द्वारा तीन तलाक़ पर पूछे गए सवाल के जवाब में कहीं। वह इस समय श्रीलंका दौरे पर हैं।
हज़रत ने भारत सरकार द्वारा संसद में पेश ट्रिपल तलाक़ बिल में संशोधन पर पूछे गए सवाल पर कहा कि तलाक़ मुसलमानों का सबसे बड़ा मसला नहीं है सबसे बड़ा मसला हिन्दुस्तानी मुसलमानों की बदहाली गरीबी और अशिक्षा है इसपर बहस कर इसे दूर करने का इमानदार प्रयास होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अभी संशोधन क्या हुआ है इसकी जानकारी नहीं है लिहाजा इस पर बात करना सही नहीं है लेकिन यह ज़रूर कहूंगा कि तलाक़ से प्रभावित मुस्लिम महिलाओं की संख्या .5 फीसदी है जबकि अनुच्छेद 341 पर प्रतिबंध होने से लगभग 95% मुसलमान परेशान है और अपने अधिकारों से वंचित हैं यदि सरकार वास्तव में सबका साथ सबका विकास के एजेंडे पर काम करना चाहती है तो इसपर बहस करवाकर इस प्रतिबंध को हटाने का मार्ग प्रशस्त करे।
हज़रत ने कहा कि नफरत को रोकने के लिये मोहब्बत को आम कीजिए , तलाक़ पर कोई बात करने से पहले मुसलमानों को विश्वास में लिया जाना ज़रूरी है।
उन्होंने राज्यसभा के उपसभापति चुने जाने पर श्री हरिवंश जी को मुबारकबाद देते हुए कहा कि हम उम्मीद करते है कि वह अपने अनुभव से देश के लोकतंत्र को और मजबूत करेंगे।

By: Younus Mohani

Syed Ashraf Kichchauchwi promotes Sufism in Sri Lanka

Friday, August 3/2018

The AIUMB President has gone on a visit to his spiritual followers in Sri Lanka to work on spirituality, humanity and morality that can be carried out through Sufism. He founded the World Sufi Forum in 2016 which has grown vastly all over the globe including Sri Lanka.

He has also granted permission for Baiat-o-Iradat (administering oath of spiritual allegiance), as an heir to the Chishtia, Nizamia and Ashrafia lines of mysticism. He has a vast number of disciples in different parts of the world including Sri Lanka. New disciples are introduced in accordance to the aforementioned mystical paths (silsila).

The World Sufi Forum that Hazrat has initiated is growing globally as each day passes. Through firm determination and constant struggle, Hazrat is engulfing the world with his key messages: Tolerance, Acceptance and Unconditional Love.

It is noteworthy that Hazrat Maulana Syed Mohammad Ashraf Kichhauchwi son of Sayyad Izhar Ashraf Miyan—popularly known as “Shaykh al-A’zam”—the eldest son of Hazrat Sarkar-e-Kalan Sayyad Mukhtar Ashraf (Rahmatullahi alayhi). This clearly shows that he falls in line with the many esteemed and pious Sufi saints that have come through the Chishti-Nizami-Ashrafi Silsila in Kichchawcha Shareef.

It has been the salient characteristic of the Ashrafi Sufi hospice (Khanquah) that in every period, there has been an eminent personality accomplished with both spiritual and modern education, mystical inclination, intellectual grandeur, inherited zeal and determination showing path of Shariat (Revealed Law) and Tariquat (way to Allah).

Alahazrat Ashrafi Mian (R.A.) adorned it up to 1355 AH devoting his whole life in making the world familiar with name and mission of Hazrat Makhdoom Simnani (R.A.) followed by Mufti Syed Shah Mokhtar Ashraf (R.A.) who decorated this dignified office with his sublime spirituality for 62 years. Now Hazrat Maulana Syed Ashraf is inheriting virtues of his righteous predecessors and spiritual ancestors, possessing extraordinary merits whose religious, spiritual and reformatory activities and works have been, internationally recognised and admired.

Hazrat Syed Ashraf Kichchauchwi has been instrumental in promotion of Sufism in the modern India as well as aboard. With his progressive views on religion, nation and society, he has the future needs of the new generation of Muslims at heart.

Source:

www.wordforpeace.com/aiumb-president-in-sri-lanka-to-work-on-spirituality-humanity-and-morality-through-sufism/

 

By: Ghulam Rasool Dehlvi

आतंक को नकारने के लिए पाक की आवाम मुबारकबाद की पात्र – सय्यद अशरफ

26 जुलाई/लखनऊ

“आतंक को नकारने के लिए पाक की आवाम मुबारकबाद की पात्र ” यह बात वर्ल्ड सूफी फोरम व आल इंडिया उलमा व मशायख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने पाकिस्तान इलेक्शन में आतंकी सरगना हाफ़िज़ सईद की पार्टी को एक भी सीट न मिलने पर खुशी जाहिर करते हुए कही ।उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की आवाम ने साफ तौर से बता दिया है कि वह दहशतगर्दी को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं करना चाहते और अमन के साथ हैं ।
हज़रत ने कहा कि इस बार पाकिस्तान में जो बदलाव दिखाई दे रहा है वह हमारे मुल्क के लिए बेहतर है हम उम्मीद करते हैं कि नई हुकूमत से दोनों देशों के ताल्लुकात बेहतर होंगे हज़रत ने इमरान खान को बधाई देते हुए कहा कि हम दुआ करते हैं कि इमरान खान सूफिया की तालीम पर अमल करते हुए पाकिस्तान में मोहब्बत की फिजा को बहाल कर आवाम की बेहतरी के लिए काम करें।हज़रत ने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि दोनों मुल्को के सम्बन्ध बेहतर होंगे।
उन्होंने कहा कि आतंक को रोकना सबकी ज़िम्मेदारी है अगर हमने इसे नहीं समझा तो सबका नुक़सान होगा लिहाजा दोनों मुल्कों को क़दम से क़दम मिलाकर चलना होगा।

 

By: Yunus Mohani

دہشت گردی کو نکارنے کے لئے پاکستانی عوام کو مبارک باد: سید محمد اشرف

پاکستانی عوام نے انتہا پسندی اور تشدد کے مقابلے امن اور مروت کو ترجیح دیا
لکھنؤ یوپی، (پریس رلیز)26 جولائی
حالیہ پاکستانی انتخاب میں پاکستانی عوام نے دہشت گردی کو سرے سے نکارتے ہوئے انتہا پسندی کے خلاف اپنی منشاء کو صاف ظاہر کرکے بڑا فیصلہ لیا ہے۔حافظ سعید جیسے مبینہ انتہا پسندکی حمایت یافتہ پارٹی کو ایک بھی سیٹ نہ دے کر پاکستانی عوام نے دہشت گردی کے خلاف یکسر کھڑے ہو کر یہ صاف کردیا کہ پاکستانی عوام کبھی بھی نفرت اور تشدد کی حمایت نہیں کر سکتی۔ اس عوام کے اس موقف کے لئے وہ مبارک باد کے مستحق ہیں۔یہی حوصلہ نئی حکومت کو دہشت گردی کے خلاف سخت اقدام کرنے میں مدد گار ثابت ہوگا۔ ان خیالات کا اظہار ورلڈ صوفی فورم کے صدر اور آل انڈیا علماء و مشائخ بورڈ کے بانی حضرت سید محمد اشرف کچھوچھوی نے اپنے بیان میں کیا۔انہوں نے مزید کہا کہ پاکستان میں یہ نیا بدلاؤ نئی امیدوں کو جنم دے رہا ہے۔اس نئی حکومت سے یہ امید ہے کہ اب دونوں ملکوں کے درمیان حالات میں بہتری آئے گی۔سید محمد اشرف نے عمران خان کو مبارکباد پیش کرتے ہوئے کہا کہ ہم دعا کرتے ہیں کہ عمران خان پاکستان کی اکثرعوام کی عقیدت و محبت کا احترام کرتے ہوئے صوفیا کی تعلیمات پر عمل پیرا ہوکر پاکستان میں محبت و اخوت اور ہمدردی اور انصاف کی فضا قائم کریں گے اور ذاتی مفادات اور غیر ضروری سیاست میں پھنسنے کی بجائے عوام کی بہتری اور امن کے قیام و فروغ کو ترجیح دیں گے۔انہوں نے کہا کہ ہمیں نئی حکومت سے پوری توقع ہے کہ دونوں ملکوں کے بیچ رشتے کو بھروسہ اور اعتماد کی بنیاد پر بہتر کریں گے۔ کیوں کہ دونوں ملکوں کے درمیان خوشگوار رشتوں کے بیچ سب سے بڑی دیواروں میں سے ایک دہشت گردی ہے۔ اور عمران خان سے ہم یہ توقع کرتے ہیں کہ ان کا پہلا قدم انتہا پسندی اور تشدد کے تمام راستوں کو مسدود کرنا ہوگا۔

Congratulate to Pakistani People for rejecting Terrorism : Syed Muhammad Ashraf Kichhochhawi

Lucknow, UP, (Press release) 26 July 2018

In recent Pakistan Assembly election result Pakistani people rejected any type of support to Terrorism as they totally denied to give any seat to known terror symbol of terrorism Hafiz Saeed Party. By this, they clearly declared their opinion and stand on any type of terror. They expressed their will of peace and harmony on their ground. This was stated by the founder of All India Ulama & Mashaikh Board and president of World Sufi Forum Hazrat Syed Muhammad Ashraf Kichhochhawi. He further stated the newly elected government is expected to make healthy relation between India and Pakistan by clearly countering every aspect of terrorism and to maintain the peace and harmony by respecting the Sufi believes and teaching as the majority of Pakistani Muslims. Syed Ashraf Congratulated Emran Khan on his big victory and praised for him for good relation between the two country and working for the sake of common people. He said Pakistan has always believe in Sufi tradition and it always has a strong effect in the mass. Emran Khan is expected to spread those Sufies teachings to counter any kind of hate and violence.

By: Abdul Moid Azhari

मज़लूम की पहचान मज़हब से न करें, नफरत के एजेंडे को बढ़ने से रोकें : सय्यद मोहम्मद अशरफ

25 जुलाई/अम्बेडकरनगर

मज़लूम की पहचान मज़हब से न करें, नफरत के एजेंडे को बढ़ने से रोकें” यह विचार वर्ल्ड सूफी फोरम व आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड के संस्थापक, अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने हज़रत मख़दूम अशरफ जहांगीर सिमनानी रहमतुल्लाह अलैहि की दरगाह पर हाज़िरी के बाद मीडिया से कही, उन्होंने कहा हम जब मज़लूम की पहचान उसके मज़हब या ज़ाति की बुनियाद पर करते हैं तो नफरत के एजेंडे को ताक़त मिलती है और वह कामयाब हो जाता है।
हज़रत ने कहा कि मज़लूम सिर्फ मज़लूम होता है उसका कोई धर्म या ज़ा नहीं होती लेकिन खास तौर से इस बात को कहना कि यहां मरने वाला मुसलमान है या दलित या फिर कोई और तो इससे समाज में एक तरह का खौफ पनपता है और नफरत फैलती है. हमारा प्रयास होना चाहिए कि अतिताईयों के मक़सद को कामयाब न होने दें जो हम को ज़ाती और धर्म के साथ बांटना चाहते हैं ताकी उनके खतरनाक इरादे कामयाब हो जाएं।
उन्होंने कहा कि सूफिया ने गंगा जमुनी तहज़ीब को जन्म दिया जिसमें नफरत के लिए कोई जगह नहीं है, हमारा मुल्क अपनी इसी खूबसूरती और इस मोहब्बत वाली तहज़ीब के लिए जाना जाता है। कुछ देश के दुश्मन हमसे हमारी यह तहज़ीब छीनना चाहते हैं, हमें मज़हब और ज़ाती के नाम पर बांट कर वह अपने घिनौने एजेंडे को कामयाब करने पर तुले हैं।
हज़रत ने कहा कि मीडिया को भी अपनी ज़िम्मेदारी निभाते हुए इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि नफरत बढ़ाने वाली बातों और खबरों को रोका जाए, यह मुल्क मेरा और आपका नहीं बल्कि हमारा है, हम मिलकर इसका मुस्तक़बिल संवार सकते हैं, हम का माना हिन्दू और मुस्लिम से है, साथ में भारत में रहने वाले सभी धर्म के मानने वाले हैं अगर हम को मैं और तुम में बदला दिया गया तो देश का बड़ा नुक़सान होगा ।
उन्होंने साफ शब्दों में सरकार से कहा कि अब सरकार तय करे कि देश में क़ानून का राज चलेगा या भीड़ फैसला करेगी? हिन्दू ,मुसलमान ,सिख ,ईसाई सब आपस में हैं भाई भाई, क्या यह अब सिर्फ एक जुमला बन गया है या फिर मुल्क की बुनियादी ज़रत है ?

 

By: यूनुस मोहानी

सिर्फ क़ानून बना देने से नहीं बल्कि उसे सख्ती और ईमानदारी से लागू करने से रुकेगी हत्याएं : सय्यद मोहम्मद अशरफ

17 जुलाई/ हनुमानगढ़ राजस्थान.

“सिर्फ क़ानून बना देने से नहीं बल्कि उसे सख्ती और ईमानदारी से लागू करने से रुकेगी हत्याएं” यह बात वर्ल्ड सूफी फोरम व आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड के संस्थापक, अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने सर्वोच्च न्यायलय द्वारा संसद में भीड़ द्वारा हत्या करने पर क़ानून बनाने की बात कहने पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कही ।उन्होंने कहा कि सिर्फ क़ानून होने से कुछ नहीं होगा अगर उसे ईमानदारी से लागू न किया जाऐ।
हज़रत ने कहा, भीड़ जिस तरह सड़कों पर उतर कर निर्दोष लोगों को मार रही है यह भयावह स्थिति है इससे अगर सख्ती से नहीं निपटा गया तो फिर जंगलराज को कोई नहीं रोक पाऐगा और पूरा देश जल उठेगा। आज पूरी दुनिया हमारे मुल्क की तरफ हसरत भरी निगाहों से देख रही है मगर हमने इस हिंसक भीड़ को नहीं रोका तो विकास की कल्पना भी बेईमानी है।
उन्होंने कहा कि राज्य और केन्द्र  सरकार की ज़िम्मेदारी है कि ऐसे उपद्रवी भीडतंत्र को किसी प्रकार का संरक्षण न मिले और इन्हें हर स्तर पर हतोउत्साहित किया जाऐ।अपराधियों से सख्ती से निपटा जाना चाहिए, लोगों को भी सचेत रहते हुए किसी के बहकावे में नहीं आना चाहिए और क़ानून को किसी भी क़ीमत हाथ में नहीं लेना चाहिए।
क़ानून तब ही प्रभावी होता है जब उसका खौफ लोगों के दिल में हो अगर उसको लागू करने वाले ईमानदारी से क़ानून तो बनाया जाऐ लेकिन उसको सख्ती से लागू करवाने की गारंटी भी सरकार को देनी चाहिए क्योंकि इस तरह भीड़ द्वारा किसी की हत्या हमारे समाज के धीरे धीरे वहशी हो जाने का संकेत है, इसे रोका जाना चाहिए। मोहब्बत का पैगाम सब तक पहुंचाया जाए ताकि नफरत की आग को ठंडा किया जा सके।

By: Yunus Mohani

अफवाहें आग लगा रही हैं और नफरत जानें ले रही हैं : सय्यद मोहम्मद अशरफ

15 जुलाई/ खुंजा राजस्थान

अफवाहें आग लगा रही हैं और नफरत जाने ले रही है, यह बात एक जलसे को खिताब करते हुए वर्ल्ड सूफी फोरम एवम आल इंडिया उलमा व मशाइख़ बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने कही, उन्होंने कर्नाटक में गूगल के इंजीनियर मोहम्मद आज़म की एक अफवाह के चलते भीड़ के ज़रिए हत्या पर बोलते हुए कहा कि मुल्क खतरनाक दौर से गुज़र रहा है, सोशल मीडिया जहां एक ताक़तवर ज़रिया है अपनी बात रखने का, नफरत के सौदागरों ने उसे हथियार बना लिया है।
उन्होंने कहा कि अब वक़्त अा गया है सरकार को फौरन कोई ऐसा तरीका अपनाना होगा जिससे यह प्लेटफार्म भी बच जाए और वैचारिक आतंकी इसे अपना हथियार भी न बना सके।हज़रत ने कहा, बच्चा चोरी के इल्जाम में एक पढ़े लिखे इंसान को वहशी भीड़ मार देती है, यह कैसा समाज हमने बना दिया है, क्या यही विकास का मॉडल है ?

हज़रत ने कहा कि क़ुरआन में अल्लाह ने फरमाया कि" ईमान वालों जब तुम्हारे पास कोई खबर आए तो उसकी खूब तहक़ीक़ कर लिया करो "लिहाजा यही उसूल है कि किसी बात को मान लेने से पहले उसकी तहकीक ज़रूरी है आज लोग बिना तहक़ीक़ के हर बात को सच मान कर नफरत की आग में बेगुनाहों की जान लेने पर तुले हैं।

उन्होंने कहा, कहीं दलित, कहीं मुस्लिम कहीं महिलाएं नफरत का शिकार हो रही हैं,ऐसे में हुकूमत की ज़िम्मेदारी बनती है कि वह ऐसे इंतज़ाम करे जिससे वैचारिक आतंकी कामयाब न होने पाए, हज़रत ने शदीद ग़म और ग़ुस्से का इजहार करते हुए कहा कि एक तरफ पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में ज़हरीली सोच के मालिक बम धमाके कर बेगुनाहों की जान ले रहे हैं, और हमारे मुल्क में अफवाह को बम की शक्ल में इस्तेमाल कर बेगुनाहों की जान ली जा रही है, हम इसकी सख्त मज़म्मत करते हैं और अहले अमन से अपील करते हैं कि लामबंद होकर नफरत की आंधियों के खिलाफ खड़े हो जाइए, मोहब्बत के चिराग का मुहाफिज़ खुदा है।

By: यूनुस मोहानी