देश का माहौल खराब करने की हो रही है साजिश : सय्यद मोहम्मद अशरफ

07 जनवरी 2021 नई दिल्ली,
आल इंडिया उलमा मशाईख बोर्ड के अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफ़ी फोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने एक नफरत के वाहक द्वारा हज़रत ख्वाजा गरीब नवाज की शान में गुस्ताखी कर सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल करने पर सरकार से मांग की है कि इस तरह के लोगों पर सख्त से सख्त कार्यवाही की जाये,क्योंकि इस तरह की बाते करने वाले देश के दुश्मन है और देश को तोड़ने की साजिश कर रहे हैं ,क्योंकि हज़रत ख्वाजा गरीब नवाज में हर धर्म और मजहब के लोग आस्था रखते हैं लिहाज़ा यह देश एवम दुनिया के करोडों करोड़ लोगों की भावनाओं को आहत करने वाला है और इस प्रकार देश का माहौल खराब करने की साजिश रची जा रही है।
उन्होंने कहा कि यह देश गंगा जमुनी तहजीब का देश है यहां सभी की भावनाओं का आदर होता है ऐसे में ऐसे लोग देश के हर कोने में नजर आ रहे हैं जो देश को कमज़ोर करने की कोशिश में दिन रात एक किए हैं यह साफ तौर से विदेशी साजिश जान पड़ती है ,हमारी सीमाओं पर अपनी गंदी नजर गड़ाये लोग हमारे मुल्क के माहौल को खराब करने के लिए इस तरह के लोगों को प्रोत्साहन से रहे हो सकते है इसकी गंभीरता से जांच होनी चाहिए और नफरत के वाहकों को तुरंत सलाखों के पीछे भेजा जाना चाहिए।
हज़रत ख़्वाजा गरीब नवाज़ की शान में गुस्ताखी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जा सकती यह भारत की ज़मीन सूफ़ी संतों की ज़मीन है इनके दरबार से मुहब्बत का संदेश आम होता है और भारत की सुन्दरता यहां दिखाई देती है लेकिन यह नफरत के सौदागर इसे बर्दाश्त नहीं कर पा रहे और विदेशी ताकतों के हाथों में खेल कर देश को कमज़ोर करने में लगे हुए हैं।
हज़रत ने कहा कि हमने प्रधानमंत्री और ग्रह मंत्री को पत्र लिखकर मांग की है कि जल्द से जल्द ऐसे लोगों की गिरफ्तारी हो और देश का माहौल खराब करने वालों को सलाखों के पीछे धकेला जाए ,हज़रत ने कहा कि पूरे देश में अलग अलग जगहों पर इस प्रकार का काम ऐसे देशद्रोहियों के द्वारा किया जा रहा है अभी मध्य प्रदेश से जिस प्रकार धार्मिक स्थलों पर हमले के जो वीडियो वायरल हुए वह सब इसी ओर इशारा करते हैं।
उन्होंने कहा कि हज़रत ख्वाजा गरीब नवाज पर भद्दी अपमानजनक टिप्पणी करने वाले व्यक्ति को तुरंत गिरफ्तार करने की हम मांग करते हैं भारत को कमज़ोर करने वालो को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता सरकार फौरन कार्यवाही करे ।

By: Yunus Mohani

रीयल्टी पर बात हो रियूमर्स पर नहीं : सय्यद मोहम्मद अशरफ

27 दिसंबर 2020, नई दिल्ली
आल इंडिया उलमा मशाईख बोर्ड के अध्यक्ष एवम वर्ल्ड सूफ़ी फोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने देश में कोरोना वैक्सीन को लेकर मचे बवाल पर कहा है कि किसी को भी अफवाहों पर ध्यान नहीं देना चाहिए बल्कि हकीकत पर बात होनी चाहिए ,मुंबई में एक मुस्लिम संगठन द्वारा यह बहस छेड़ी गई है कि जो वैक्सीन भारत में आ रही है उसमें इस्लाम में हराम की गई चीज़ों को इस्तेमाल किया गया है,इस बात से एक नई बात निकल पड़ी है।
हालांकि यह सवाल इंडोनेशिया से उठा जहां चीन में निर्मित कोरोना वैक्सीन का इस्तेमाल किया जाना है क्योंकि यह कहा जा रहा है कि उस वैक्सीन में इस्लाम में हराम पोर्क बेस्ड जिलेटिन का इस्तेमाल हुआ है लिहाज़ा इस वजह से मुसलमान इसे नहीं लगवा सकते और यही बहस हमारे मुल्क में आ पहुंची है जबकि हमारे यहां अभी चीन में निर्मित वैक्सीन को आयात करने का कोई फैसला नहीं हुआ है ,लिहाज़ा इस बहस का अभी कोई औचित्य नहीं है।
उन्होंने कहा लेकिन यह ज़रूरी है कि जो वैक्सीन भारत के लोगों को दी जानी है उसका कंपोजीशन लोगों को बताया जाये यह जानने का उनका हक़ है ,अगर ऐसी बात कही जा रही है तो उसमें कोई बुराई नहीं है क्योंकि हर दवा की पैकिंग पर उसमें इस्तेमाल की जाने वाली चीजों को लिखा जाता है अगर ऐसा कोई मामला है तो इसे भी लोगों को बता दिया जाना चाहिए इसमें कोई बुराई नहीं है।
हज़रत ने कहा लेकिन इसे विवाद का विषय बनाने का काम किसी को भी नहीं करना चाहिए क्योंकि इस वक्त इस महामारी से निपटने के लिए जो भी ज़रूरी है किया जाना है, क्योंकि जान बचाना फ़र्ज़ है और जान पर अगर बन आती है और इसके सिवा कोई विकल्प मौजूद नहीं है तो इसे है लगवाना होगा ,इसलिए इस पर पहले तहकीक होनी चाहिए फिर कोई बात कहनी चाहिए जोश में की गई बातों से सिर्फ समाज में गुमराही फैलती है ।
इससे पहले भी इस तरह के विवाद हो चुके हैं जब एक आयु्वेदिक दवा बनाने वाली कम्पनी के उत्पादों में मानव अस्थियों के प्रयोग की बात आई थी लिहाज़ा ऐसी कोई भी चीज जो हमारे जैन समुदाय के भाइयों ,हिन्दू समाज के लोगों और मुसलमानों के यहां धार्मिक रूप से वर्जित है उसका उपयोग किया गया है तो जानकारी देना आवश्यक है क्योंकि यह सभी की धार्मिक आस्था का सवाल भी है और अगर ऐसा कोई विकल्प मौजूद है जिसमें ऐसा तत्व शामिल नहीं है तो उसे प्राप्त करने का हक़ है वरना महामारी से निपटने के लिए जो भी आवश्यक होगा उसे सभी को लगवाना होगा ऐसे में किसी भी प्रकार का विवाद पैदा करना उचित नहीं होगा।अगर किसी बात पर सवाल उठा है तो उसकी हकीक़त भी बता दी जानी चाहिए इससे समाज में विश्वास बढ़ता है और सवाल का जवाब ना मिलने पर भ्रम फैलता है।

By: यूनुस मोहानी

सय्यद अफजल मियाँ देश के लिए गौरव थे : सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी

20, दिसंबर 2020, किछोछा, अम्बेडकर नगर
जामिया मिल्लिया इस्लामिया और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के पूर्व रजिस्ट्रार और एडीजी (IPS) भोपाल मध्य प्रदेश के सय्यद मोहम्मद अफजल मियां देश के लिए एक अहम शख्शियत थे। आप एक खुश अख़लाक़, एक साहिबे किरदार शख्शियत हमारे बीच से रुखसत हुई है। आप बहुत ही नेकदिल और रहमदिल अफसर थे। इतना ऊंचा पद संभालने के बावजूद आप विनम्र स्वभाव और सहनशीलता के प्रतीक थे। बेशक, आपका निधन न केवल जमात-ए-अहल-ए-सुन्नत बल्कि पूरे देश के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
उक्त बातें आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफी फोरम के चेयरमैन हजरत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने अपनी ख़ानक़ाह अशरफिया किछौछा मुकद्दसा में एक समारोह को संबोधित करते हुए व्यक्त की । हजरत ने कहा कि मरहूम अफ़ज़ल मियां देश की खिदमत के साथ-साथ दीनी तालीम से युवाओं को जोड़ने का उनका लक्ष्य निरंतर जारी था। देश की तरक्की और मज़लूमो को न्याय मिले इसलिए उन्होंने आईपीएस को चुना और समाज सेवा में जुट गए।
उन्होंने युवाओं को शिक्षित होकर ही उन मुकामों को हासिल करने का लक्ष्य बताया जिसके लिए आज का युवा सोच रखता है। दीनी तालीम के साथ साथ आज के हालात पर उनका विशेष ध्यान रहता था। निश्चित ही हम सबको यह कमी सदियों तक महसूस होगी। हज़रत सय्यद अफ़ज़ल मियाँ बरकाती मारहरवी का निधन एक बहुत बड़ी क्षति है जिसकी भरपाई मुश्किल है। हज़रत ने अंत में दुआ फ़रमाई की अल्लाह तआला आपके दरजात बुलन्द फरमाए और घर परिवार और अकीदतमंदों को सब्र अता फरमाए ,आमीन

By: नुरूलहुदा मिस्बाही। भारत डेली न्यूज

जिससे मुल्क में खुशहाली आती हो उस बात का समर्थन : सय्यद मोहम्मद अशरफ

13 दिसंबर,2020,नई दिल्ली,रविवार
आल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफ़ी फोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने एक बयान जारी कर कहा कि हम हर उस बात का समर्थन करते हैं जिससे देश के हर नागरिक को उसका हक़ मिलता हो और देश में खुशहाली आती हो।
उन्होंने कहा कि देश में जिस तरह देश का किसान सड़कों पर है और लगातार हुकूमत से कृषि बिल वापिस लेने की मांग की जा रही है उसमें सरकार और किसानों दोनों के जरिए अलग बात की जा रही है, जहां किसानों की बात है उनका मानना है कि यह देश के किसानों के हक़ में नहीं वहीं सरकार कह रही है कि यह किसानों को बहुत फायदा पहुंचाने वाला है,लेकिन सरकार ने काफी हद तक कानून में बदलाव की बात की है जिससे यह समझ तो आता है कि कुछ कमी ज़रूर रह गई ऐसे में गंभीरता से विचार की ज़रूरत है।
हमारा मुल्क खेती पर निर्भर है ऐसे में अपने खेत छोड़ कर किसान सड़क पर हैं इससे देश का नुकसान हो रहा है लिहाज़ा सरकार को इस पर फौरन फैसला लेना चाहिए और इस गतिरोध को समाप्त करना चाहिए, उन्होंने कहा कि किसी भी हाल में आंदोलन को मज़हबी रंग नहीं देना चाहिए और न हीं इसे हिंसक होना चाहिए जिस तरह कुछ पोस्टर को लेकर विवाद हुआ वह दुर्भाग्यपूर्ण है।
सभी गतिरोध के बाद भी देशहित सर्वोपरि रखना है इसे सरकार को भी समझना चाहिए, उन्होंने कहा कि हर जायज़ मांग का हम समर्थन करते हैं जिससे देश का फायदा होता है हर उस बात का विरोध सबको करना चाहिए जिससे देश का अहित होता है।
हज़रत ने कहा कि हमारा काम है कि देश की और देश के लोगों की दोनों की सेवा करें, अभी हमारे देश के लोग सड़कों पर अगर आये है तो भी हमारा कर्तव्य है कि इनकी सेवा सत्कार की जाये, यह बात सरकार को भी समझ आनी चाहिए, उन्होंने कहा कि हमने बोर्ड के लोगों को निर्देशित किया है कि वह खिदमते खल्क के जज्बे के साथ लोगों की खिदमत करें और लोगों की परेशानी में काम आयें यही धर्म है,।
उन्होंने यह भी कहा कि देश के किसानों की जायज़ मांगों को सरकार को फौरन मान लेना चाहिए और इस मसले को जल्द से जल्द हल करना चाहिए ।

By: Yunus Mohani

अग्निकांड में तबाह परिवारों के साथ खड़ा है बोर्ड, जल्दी मिलेगा प्रतिनिधिमंडल: सय्यद अशरफ

29 नवंबर रविवार,नई दिल्ली,
आल इंडिया उलमा मशाइख़ बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफ़ी फोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने संजरी चौक मालेगांव महाराष्ट्र में हुए भीषण अग्निकांड पर अफसोस जताते हुए कहा है कि ऐसे दौर में जब कोरोना महामारी की वजह से कारोबार चौपट है ऐसे में जिन लोगों के आशियाने जल गए हम सब उनके साथ खड़े है आल इंडिया उलमा मशाईख बोर्ड का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही मौके पर पहुंच कर जिन लोगों का नुकसान हुआ है उनसे मुलाक़ात करेगा और मुमकिन मदद करने की कोशिश करेगा,
हज़रत ने कहा कि सभी का फ़र्ज़ है कि वह मुसीबतजदा लोगों की मदद को आगे आएं बिना किसी भेदभाव के यही हमारा इन्सानी और दीनी फरीजा है ग्यारहवीं के इस मुकद्दस महीने में इस बार गौसे आजम की न्याज को इस तरह भी करे क्योंकि इस बार हर साल की तरह घरों में ढेग पकवा कर आप लोगों को बुला कर नहीं खिला पा रहे हैं क्योंकि महामारी का दौर चल रहा है तो इसे इस तरह किया जाए कि इस तरह जहां ज़रूरत है वहां हम खुद को पहुंचाएं और परेशान लोगों की मुमकिन मदद करें।
हज़रत ने महाराष्ट्र सरकार से भी अपील की है कि वह पीड़ित परिवारों को उचित मदद करे ताकि उनके नुकसान की भरपाई की जा सके।
उन्होंने कहा कि लोगों की मदद करते वक्त उनका मजहब,मसलक और जात पात न देखी जाए बल्कि हर परेशानहाल की मदद को आगे आया जाए इससे जहां हमसे हमारा खुदा खुश होगा वहीं समाज में मोहब्बत भी फैलेगी जो नफरत के जहर को खतम कर देगी।

By: यूनुस मोहानी

مختار اشرف لائبریری بلاتفریق مسلک ومذہب ملک کی چند نامور لائبریریوں میں سے ایک ا ہے: سید محمد اشرف کچھوچھوی

مولانا سید اظہار اشرف کچھوچھوی کے تعلیمی نظریات پر یونیورسٹی سطح پرریسرچ کی ضروورت ہے۔
مولانا مقبول ا حمد سالک مصباحی
سلسلہ اشرفیہ کچھوچھہ شریف کی عالمی شہرت کی حامل علمی وروحانی شخصیت مولانا مفتی سید شاہ محمد اظہار اشرف اشرفی جیلانی محدث کچھوچھوی رحمتہ اللہ علیہ کی حیات وخدمات پر آپ کے سالانہ عرس کے موقع پر آل انڈیا علما ومشائخ بورڈ کے لائک پیج پر لائیو سمپوزیم کا انعقاد،جس میں متعدد اہم اسکالر س،علما ومشائخ اور خاص کر حضرت سید محمد اشرف کچھوچھوی صدر آل انڈ یا علما ومشائخ بورڈشریک ہوئے جس سے پروگرام کی اہمیت بڑھ گئی۔پروگرام کے میزبان معروف صحافی اور میڈیااسپیشلسٹ محترم مختار اشرف نے اپنی نپی تلی اور پرفیکٹ میزبانی سے سمپوزیم کو چار چاند لگا دیا۔موص…
مختار اشرف لائبریری بلاتفریق مسلک ومذہب ملک کی چند نامور لائبریریوں میں سے ایک ا ہے۔
سید محمد اشرف کچھوچھوی
مولانا سید اظہار اشرف کچھوچھوی کے تعلیمی نظریات پر یونیورسٹی سطح پرریسرچ کی ضروورت ہے۔
مولانا مقبول ا حمد سالک مصباحی
سلسلہ اشرفیہ کچھوچھہ شریف کی عالمی شہرت کی حامل علمی وروحانی شخصیت مولانا مفتی سید شاہ محمد اظہار اشرف اشرفی جیلانی محدث کچھوچھوی رحمتہ اللہ علیہ کی حیات وخدمات پر آپ کے سالانہ عرس کے موقع پر آل انڈیا علما ومشائخ بورڈ کے لائک پیج پر لائیو سمپوزیم کا انعقاد،جس میں متعدد اہم اسکالر س،علما ومشائخ اور خاص کر حضرت سید محمد اشرف کچھوچھوی صدر آل انڈ یا علما ومشائخ بورڈشریک ہوئے جس سے پروگرام کی اہمیت بڑھ گئی۔پروگرام کے میزبان معروف صحافی اور میڈیااسپیشلسٹ محترم مختار اشرف نے اپنی نپی تلی اور پرفیکٹ میزبانی سے سمپوزیم کو چار چاند لگا دیا۔موصوف شیخ اعظم کی زندگی کے مختلف پہلوؤں پر سوالات کیے،مقررین اور شرکائے سیمپوزیم نے اس کے جامع جوابات دیے۔
حضرت مولانا رضی احمد مصباحی،ارریہ،بہار نے خاندانی پس منظر پر گفتگو کرتے ہوئے کہا کہ مخدوم العلما حضرت علامہ ومولانا مفتی سید شاہ محمد اظہار اشرف اشرفی جیلانی محدث کچھوچھوی رحمتہ اللہ کا تعلق خاندان رسالت سے تھا جس کو حضور اکر م صلی اللہ علیہ وسلم نے دین کے تحفظ وبقا کی اہم ذمہ د اری سونپی ہے،سرکار کی بارگاہ ناز سے لے کر کچھوچھہ شریف تک حضرتحاجی عبد الرزاق نورالعین کی وساطت سے ایک تسلسل قائم ہے۔کچھوچھہ میں جو کچھ نظر آتا ہے وہ فیضان رسالت پناہی ہے۔
مفتی شاہنوا زاشرفی جامعی،خطیب وامام جامع مسجد،درگ،چھتیس گڑھ نے کہا کہ مخدوم العلما حضرت علامہ ومولانا مفتی سید شاہ محمد اظہار اشرف اشرفی جیلانی محدث کچھوچھوی رحمتہ اللہ نے شیخ اعظم کی فن حدیث پر روشنی ڈالتے ہوئے کہ ہر سال آپ ختم بخاری شریف کرایاکرتے تھے۔اور جب بھی مسند حیث پر بیٹھتے تو ایک خاص قسم کا نور آپ کے چہرے پر جلوہ گر ہوتاتھا،جو عام دنوں میں نظر نہیں آتاتھا۔اور ختم بخاری شریف میں آپ کی ہونے والی تقریر کی خصوصیت یہ تھی کہ ہر سال نیا مضمون بیان ہوتا۔کبھی مکرر نہ ہوتا۔اور دوسرے اتنے عام فہم انداز میں بیان کرتے کہ کم پڑھا لکھا اور اناڑی کسان بھی سمجھ جاتا تھا۔طلبہ پر شفقت کا انداز تو بہت ہی نرالا تھا۔نادار طلبہ کی کفالت بھی کرتے۔جب بھی سفر سے آتے طلبہ کو نذرانے پیش کرتے،موسمی پھل کھلاتے۔سہ منی اتنا بنواتے کہ سارے طلبہ شکم شیر ہو کر کھالیتے۔اساتذہ کی ضروریات پر بھی کڑی نظر رہتی۔
معروف سنی صوفی اسکالر حضرت مولانامقبول احمد سالک مصباحی،بانی ومہتمم جامعہ خواجہ قطب الدین بختیار کاکی،نئی دہلی نے خانوادہ اشرفیہ کے تاریخی تسلسل پر کلام کرتے ہوئے کہا کہ خانوادہ اشرفیہ کی نسبت سلطان التارکین،القدوۃ الکبری، اوحدالدین میر کبیر حضرت سید محمد مخدوم اشرف نور بخشی سمنانی،سامانی کے نام پاک کی جانب ہے مگر اس کی رگوں میں حاجی الحرمین حضرت حاجی عبد الرزاق نور العین کا دوڑ رہاہے۔جن کے بارے میں حضرت مخدوم پاک نے فرمایا تھا کہ لوگ اپنی اولاد اپنی پست سے پید اکرتے ہیں،میں عبدالرزاق کو اپنی آنکھوں سے پید اکیاہے۔
سالک دہلوی نے خصوصیت کے ساتھ شیخ اعظم کی تعمیری،تعلیمی اورتربیتی خدمات کا ذکر کرتے ہوئے کہا کہ موجودہ دور میں شیخ اعظم سرسید ثانی تھے،بس فرق یہ ہے کہ سر سید جد ید تعلیم کے میدان میں جانے گئے اور شیخ اعظم علوم دینیہ کے حوالے سے پہچا نے گئے۔شیخ اعظم کا تعلیمی نظریہ اتنا جدید اور تعمیری ہے کہ اس پر باضابطہ تحقیق کی ضرورت ہے،اور اسے ایک منہج عمل کی شکل میں پیش کرنے کی ضرورت ہے۔اور جہاں تک آپ کی ذاتی قابلیت کی بات ہے تو آپ ایک عظیم محدث،عظیم فقیہ ومفتی،اور نثر نگا ر وشاعر تھے۔آپ کی عظیم علمی یادگار منظوم مثنوی مولانا روم علیہ الرحمہ ہے۔اور یہ غالبا اردو زبان میں اکلوتی کاوش ہے۔آپ کی شاعری انتہائی موثر اور سلیس ہے،لفظ لفظ سے عشق رسالت پھوٹتا ہے۔آپ کی شاعری اور منظوم ترجمہ پرباضابطہ پی ایچ ڈی کی جاسکتی ہے۔مولانا مصباحی نے مجدد تعلیمات اشرفیہ حضور اشرف ملت سے کہا کہ یہ کام اب شروع ہوجاناچاہیے۔
سید معاذ اشرف اشرفی جیلانی،کچھوچھہ شریف بارگاہ شیخ اعظم میں خراج عقیدت پیش کرتے ہوئے کہا کہ شیخ اعظم نے ہماری رہ نمائی کے لیے اپنے فرزندوں کیاایسی تربیت فرمائی ہے کہ ان کی شکل میں ہمیں اپنا مربی اورسر پرست دکھائی دیتا ہے۔حضرت قائد ملت معلمین ومدرسین کے لیے اور اشرف ملت علما ومشائخ اور نوجوانوں کے لیے ایک سایہ دار درخت کی طرح ہیں۔سلسلہ اشرفیہ ان حضرات کی موجودگی میں کسی مسئلے کا شکار نہیں ہوسکتی۔
آخر میں مجدد تعلیمات اشرفیہ حضرت سید محمد اشرف کچھوچھوی صدر آل انڈ یا علما ومشائخ بورڈ نے اپنے افکار وخیالات سے آگاہ فرمایا،اور پنے مشاہدات وتجربات کی روشنی میں حضور والد گرامی شیخ اعظم قدس سرہ کی حیات وخدمات پر تفصیل سے روشنی ڈالی۔ مختار اشرف لائبریری اس وقت قائم کی جب آپ عمر کی آخری منزل میں پہونچ چکے تھے۔آپ کو یہ اندیشہ کھائے جاتا تھا کہ اگر ہمارے پاس ایک مرکزی لائبریری نہیں رہی تواسلام دشمن طاقتوں نے اسلاف کی کتا بوں خصوصا علم حدیث میں اگر تحریف کر دیا ہمیں یاان میں تبدیلی کردی تو پھر ہم ان کا کسیے مقابلہ کریں گے۔لائبریری کے بارے میں شیخ اعظم کا ایک بڑالارج کنسیپٹ تھا،آپ نے لائبریری کے قیام کے وقت ذہین علما کودارالعلوم دیوبند اور ندوۃ العلما،اورعلی گڑھ یونیورسٹی میں بھیجاتاکہ ان کا طریقہ کار معلوم کریں،اور ان کے بالمقابل لائبریری تعمیر کی جاسکے۔لائبریری سے متصل ایک کمپیوٹر روم بھی بنا یا گیا،تحقیق کے مقصد سے آنے والے اسکالرس اور محققین کے لیے لائبریری سے متصل رہائشی کمرے تعمیر کروائے۔تبرکات اوراسلامی آثار کو محفوظ کرنے کے لیے میوزیم بنوایا،پوری دنیا سے جدید ترین کتا بوں کا کلیکشن جمع کر کے لائبریری کو عالمی معیار کا بنادیا۔مختار اشرف لائبریری کی تعمیر شیخ اعظم کا عظیم علمی کارنامہ ہے۔جسے بلاشبہہبلاتفریق مسلک ومذہب ملک کی چند نامور لائبریریوں میں گنا جاسکتا ہے۔
حضرت اشرف ملت نے کہاکہ حضرت کی شاعری فی البدیہ اور انتہائی زبردست ہوا کرتی تھی۔مثنوی مولانا روم کا منظوم ترجمہ آپ کا عا لمی معیار کا اردو ادبی کارنامہ ہے۔اور یہ کئی جلدوں میں ہے۔عمرکے آخری حصے میں جب آنکھوں کی بینائی متاثر ہوگئی، منظوم ترجمے کو اساتذہ سے املا کروایا کرتے تھے۔آ پ کی شاعری کامجموعہ بھی تین جلدوں میں شایع ہوچکا ہے۔حضرت اشرف ملت نے خصوصیت کے ساتھ سرکار غریب نواز سے اور غوث اعظم سے آپ کی بے پناہ عقیدت کا چرچا کیا۔اور کہا کہ اگر جامع اشرف کابجٹ بارگاہ غوثیت مآب سے منظور ہوا مگر اس کا بجٹ ریلیز کروانے کے لیے باضابطہ اجمیر جایا کرتے تھے۔اور اجمیر سے واپس آکر عرس سرکارکلاں میں اس کی تفصیلات بیان کرتے۔
عصری علوم کے لیے بھی آپ کے ذہن میں بڑی تڑپ تھی،انشاء اللہ اس کا کام الااشرف ٹرسٹ کے ذریعے یہ کام ہوگا۔حضرت نے جو کچھ کیاخالصتا لوجہ اللہ کیا۔چاپلوس ان کے قریب بھی نہیں جاسکتا تھا۔صرف نعرے لگانے والے اور میٹھی میٹھی بات کرنے والوں کا وہاں گزر ہی نہیں تھا۔پورا جاعم اشرف تعمیر کرڈٖالا مگر کیمپسں میں کوئی بورڈ ہی نظر نہیں آتا تھا۔کام کا نظر یہ تھا کہ کام شروع کرنے سے پہلے یقین پدیا کرو،ارادہ کروا تو اس کا آغاز کردو،کوشش جاری رکھو،آخری سانس تک محنت ہونی چاہیے۔پروگرام تقریبا ڈیڑھ گھنٹے تک جاری رہا۔
رپورٹ: ڈاکٹر سراج احمد مصباحی،
ریسرچ اسکالر جامعہ ملیہ اسلامیہ،جامعہ نگر،اوکھلا،نئی دہلی

पैगंबर की शान में किसी भी तरह की गुस्ताखी नाकाबिले बर्दाश्त : सय्यद मोहम्मद अशरफ

29 अक्टूबर, नई दिल्ली
आल इंडिया उलमा व मशाइख़ बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफ़ी फोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने फ्रांस में पैग़म्बरे अमन व शांति हज़रत मुहम्मद मुस्तफा सल्लाल्लाहु अलैहि वसल्लम की शान में की गई गुस्ताखी पर सख्त गुस्से का इजहार करते हुए कहा कि फ्रीडम ऑफ स्पीच,और फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन के नाम पर यह को गुस्ताखी की जा रही है मुसलमान इसे बर्दाश्त नहीं कर सकते इसके लिए फ्रांस के राष्ट्रपति को माफी मांगनी चाहिए ,और जब तक ऐसा नहीं होता हमें खुलकर और पूरी ताकत से इनका बहिष्कार करना चहिए।
हज़रत ने कहा कि भारत सरकार से मांग करते हैं कि वह भारतीय मुसलमानों की भावनाओ का सम्मान करते हुए फ्रांस पर दबाव बनाये कि वह अपने देश में हो रही इस तरह की गुस्ताखी पर रोक लगाए ,उन्होंने बताया कि बोर्ड ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग को भी इस आशय का पत्र लिखा है कि संयुक्त राष्ट्र ह्यूमन राइट्स चार्टर का सभी को सम्मान करना चाहिए और इसके अनुच्छेद 42 का पालन होना चहिए अतः इसका पालन करते हुए फ्रांस को विश्व समुदाय से माफी मांगनी चाहिए ,साथ ही यह भी मांग की गई है कि ईशनिंदा कानून को पास कर इसका सख्ती से पालन किया जाय ताकि किसी भी तरह की गंदी सोच को पनपने से रोका जा सके।
उन्होंने मुसलमानों सहित सभी अमन पसंद लोगों से अपील की कि शांति व्यवस्था को बनाए रखते हुए फ्रांस का कड़ा विरोध किया जाए और जबतक माफी नहीं आती इनके सामान का बहिष्कार करें।
हज़रत ने सभी को ईदमिलाुन्नबी साल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम की मुबारकबाद देते हुए कहा कि इस बार इस जश्न को ऐसे मनाया जाए कि हम सब मिलकर नबी की सुन्नत पर अमल करते हुए अच्छे अखलाक वाले बने और अपने नबी का चर्चा अपने अमल से करें।

खानकाहों से मोहब्बत का संदेश जारी होता है नफरत की हिमायत नहीं: सय्यद मोहम्मदअशरफ

25 अक्टूबर,दिल्ली
आल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड के अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफ़ी फोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने दरगाह ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैहि के खादिम सरवर चिश्ती के पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया की हिमायत करने पर सख्त गुस्से का इजहार करते हुए कहा कि दरगाहे प्रेम और भाईचारे का संदेश देने की जगह है न कि किसी संदिग्ध और कट्टरपंथी सोच वाले संगठन की हिमायत करने की।
उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यह उनकी ज़ाती सोच है इसका आम मुसलमानों की राय से कोई ताल्लुक नहीं है,इसे पूरी तरह खारिज किया जाना चाहिए क्योंकि अगर इस तरह के संदेश दरगाह के प्लेटफॉर्म से कोई शकस देता है इससे समाज में गलत संदेश जाता है इसे सख्ती के साथ रोका जाना चाहिए, पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया की गतिविधियां संदिग्ध पाई गई है और जांच चल रही है उसकी विचारधारा सबको पता है कट्टरपंथी विचारों से देश का सौहार्द्य बिगड़ता है जिससे देश का नुकसान है हमें ऐसे विचारों को किसी भी कीमत पर प्रोत्साहन नहीं देना है ,और इन्हें बढ़ने से रोकना है क्योंकि देश के युवाओं को भ्रमित नहीं होने देना है।
हज़रत ने सरवर चिश्ती के बयान पर कहा कि यह नासमझी में दिया गया बयान है उन्हें सोचना चाहिए कि वह जहां बैठ कर यह बात कर रहे हैं उस बारगाह का संदेश क्या है ?अजमेर भारतीय मुसलमानों का मरकज़ है वहां बैठ कर ऐसी फिजूल बात करना गुमराह करने जैसा है।

نفرت پھیلانے والوں سے سختی سے نمٹے سرکار: سید محمد اشرف

اکتوبر18. 2020 ، نئی دہلی، (پریس ریلیز) آل انڈیا علماء و مشائخ بورڈ کے قومی صدر اورورلڈ صوفی فورم کے چیئرمین حضرت سید محمد اشرف کچھوچھوی نے ملک میں بڑھتی نفرت اور اس کام میں مصروف ایسی تنظیموں کی مذمت کرتے ہوئے کہا کہ ملک میں امن کو برقرار رکھنے کے لئے حکومت کو نفرت کے تاجروں کے ساتھ سختی سے نمٹنا ہوگا۔
انہوں نے آل انڈیا صوفی سجادہ نشین کونسل کے قومی کنوینر حضرت عبد الخادر قادری وحید پاشا کو فون کے ذریعے سے انجام بھگتنے و جان سے مارنے کی دھمکی پی ایف آئی / ایس ڈی پی آئی کا ممبر بتانے والے فاضل کی طرف سے دیئے جانے پر غصے کا اظہار کیا ہے۔ اعتماد اخبار میں شائع ہونے والے مضمون جس میں SDPI / PFI کے ذریعہ عوام کو آگاہ کیا گیا تھا اور ان کی سچائی کا اعلان کرتے ہوئے عوام کو ایسی تنظیم سے دوررہنے کے لئے کہا گیا تھا، جس سے ہندوستان کے امن نظام کی دیکھ بھال میں رکاوٹ پیدا ہوتی ہے۔ مضمون میں کہا گیا ہے کہ پی ایف آئی / ایس ڈی پی آئی ایک ایسی تنظیم ہے جو ایک بنیاد پرست سلفی آئیڈیالوجی سے متاثر ہے جس کا نظریہ دہشت گردی کو فروغ دیتاہے اور آئی ایس آئی ایس جیسی تنظیم سے مماثلت رکھتا ہے۔ اس کے ذریعہ ہندوستان کی سینکڑوں سال پرانی صوفی روایت پر حملہ کیا جا رہا ہے جس میں محبت ہی محبت ہے۔
اس مضمون پر جس شخص نے خود کو PFI / SDPI کا ممبر قرار دیا ہے اس کی طرف سے جس طرح کا ردعمل دیا گیا ہے وہ اس تنظیم کی ہولناکی کو سمجھانے کے لئے کافی ہے، آخرکس طرح کی تعلیم حاصل کی جا رہی ہے جس سے انسان حیوان بنا جا رہا ہے، احتجاج کا پرتشدد طریقہ فکر کی غلاظت کو بے نقاب کرتا ہے۔حضرت نے کہا کہ جو بھی شخص نفرت پھیلاتا ہے اور کسی مذہب سے اپنے آپ کو جوڑتا ہے اسے کسی مہذب معاشرے میں برداشت نہیں کیا جانا چاہئے، کیونکہ ماب لنچنگ جیسے سنگین جرم ہو یا پھر دہشت گرد کی بزدلانہ حرکت یہ سب ملک کی داخلی سلامتی کے لیے خطرہ ہے۔انہوں نے واضح طور پر نفرت انگیز تنظیموں کے خلاف سخت کارروائی کا مطالبہ کیا۔ حضرت نے کہا کہ ملک کی ترقی امن کے بغیر ممکن نہیں اور ایسے بزدلانہ لوگ ملک کے دشمن ہیں جو نفرت کا کاروبار پھیلائے ہوئے ہیں۔

नफरत फैलाने वालों से सख्ती से निपटे सरकार: सय्यद मोहम्मद अशरफ

18 अक्टूबर 2020, नई दिल्ली,प्रेस रिलीज
आल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफ़ी फोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने देश में बढ़ती नफरत और इस काम में लगी ऐसी संस्थाओं की कड़ी निन्दा करते हुए कहा कि देश में अमन कायम रहे इसके लिए सरकार को नफरत के कारोबारियों से सख्ती से निपटना होगा।
उन्होंने आल इंडिया सूफ़ी सज्जादा नशीन काउंसिल के राष्ट्रीय संयोजक हज़रत अब्दुल खादेर कादरी वहीद पाशा को फोन के माध्यम से अंजाम भुगतने व जान से मारने की धमकी पीएफआई/ एसडीपीआई का सदस्य बताने वाले व्यक्ति फाजिल के द्वारा दिए जाने पर रोष व्यक्त किया है,उर्दू अख़बार एत्माद में प्रकाशित लेख ,’जिसमें एसडीपीआई /पीएफआई के माध्यम से जनता को सचेत किया गया था एवम उनकी सत्यता बयान करते हुए जनता से ऐसे संगठन से दूरी बनाने की बात कही गई थी, जिससे भारत की शांति व्यवस्था बनाए रखने में व्यवधान पैदा होता है।लेख में कहा गया है कि पीएफआई/एसडीपीआई एक कट्टरपंथी सल्फी विचारधारा से प्रेरित संगठन है, जिसकी विचारधारा आतंकवाद को बढ़ावा देती है ,और आईं एस एआई एस जैसे संगठन से मेल खाती है ,इसके द्वारा भारत की सैकड़ों वर्ष पुरानी सूफ़ी परंपरा पर हमला किया जा रहा है जिसमें प्रेम ही प्रेम है ।
इस लेख पर पीएफआई / एसडीपीआई का खुद को सदस्य बताने वाले व्यक्ति द्वारा जिस तरह की प्रतिक्रिया दी गई है वह इस संगठन की भयावयता को बताने के लिए काफी है,आखिर किस तरह की सीख दी जा रही है जिससे इंसान हैवान बना जा रहा है, विरोध का हिंसक तरीका विचार की गन्दगी को सामने रखता है,।
हज़रत ने कहा कि नफरत फैलाने वाला कोई भी हो और खुद को किसी भी धर्म से जोड़ता हो उसे सभ्य समाज में बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए,क्योंकि मोब्लिंचिंग जैसे घिनौने अपराध हो या फिर आतंकवाद की कायराना घटना यह सब देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा हैं ।
उन्होंने साफ तौर से हर प्रकार की नफरत फैलाने वाली घिनौनी सोच रखने वाले संगठनों पर सख्ती के साथ कार्यवाही करने की मांग की हज़रत ने कहा कि देश की तरक्की शांति के बिना संभव नहीं है और ऐसे कायर लोग देश के दुश्मन हैं जो नफरत का कारोबार फैलाए हुए है।