इस्लाम एक मुकम्मल निज़ाम-ए-हयात ,क़यामत तक के लिए हैं उसूल-ए- क़ुरआन: सय्यद मोहम्मद अशरफ

29 सितम्बर, देवास

आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड के अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफी फोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने मध्य प्रदेश के देवास में एक जलसे को संबोधित करते हुए कहा कि “इस्लाम एक मुकम्मल निज़ाम-ए- हयात है,क़यामत तक के लिए हैं उसूले क़ुरआन” उन्होंने यह बात सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया के द्वारा भारतीय दंड सहिंता की धारा 497 को समाप्त किये जाने के सम्बन्ध में कही.

उन्होंने कहा कि इस क़ानून के रहने या न रहने का मुसलमानों पर कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि क़ुरआन में ज़िना हराम है और ता क़यामत हराम ही रहेगा इसमें कोई बदलाव नहीं किया जा सकता, लिहाज़ा इस क़ानून के होने या न होने से क़ुरआन पर ईमान रखने वालों पर कोई फर्क नहीं पड़ता, उन्हें हर उस काम से दूर रहना है जिसे अल्लाह और उसके रसूल ने हराम क़रार दिया.

हज़रत किछौछ्वी ने यह भी कहा कि इस्लाम एक मुकम्मल निज़ाम-ए- हयात है, इसमें हर चीज़ का बहुत विस्तृत वर्णन किया गया है और हर बुरे काम के लिए दंड पहले से ही तय है. लेकिन हम जहाँ रहते हैं उस देश के हर उस क़ानून को मानना हमारी ज़िम्मेदारी है जिससे हमारे दीन में फर्क न पड़ता हो.

हज़रत ने कहा कि भारत की अपनी एक संस्कृति है उस पर इस तरह के क़ानूनों के ख़त्म होने का अच्छा असर नहीं पड़ेगा क्योंकि समाज में अगर क़ानून का खौफ़ खतम होगा तो लोग गुनाह की तरफ आसानी से आकर्षित होंगे, सरकार और अदालत को इस ओर भी गौर करना चाहिए .

मुसलमान क़ुरआन पर ईमान रखने वाले और अमल करने वाले हैं तो उन्हें बखूबी समझ लेना चाहिए कि दुनिया के बनाये क़ानून वक़्त के साथ बदलते हैं लेकिन अल्लाह का क़ानून नहीं बदल सकता, लिहाज़ा बुरी बातों से दूर रहिये और नेक अमल रखिये इसी मे हमारी और आपकी निजात है.

By: यूनुस मोहानी

 

 

अदालत अपना काम करेगी, हम दिल जीतने का काम करें: सय्यद मोहम्मद अशरफ

27/सितंबर भद्रक उड़ीसा

मस्जिद मन्दिर की बड़ी बहस के बीच आल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड के अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफी फोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने बड़ी बात कहीं है,उन्होंने कहा “अदालत अपना काम करेगी ,हम दिल जीतने का काम करें “उनका यह बयान उस वक़्त आया जिस समय देश की सर्वोच्च अदालत ने मस्जिद में नमाज़ पढ़ना इस्लाम का एक अनिवार्य हिस्सा है या नहीं पर अपना फैसला सुनाया,अदालत ने इस विषय में साफ कहा कि यह बात जो 1994 के फैसले में कही गई थी कि मस्जिद में नमाज़ पढ़ना इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं है को गलत समझा गया यह सिर्फ अधिग्रहण के संबंध में था जिसका विवाद है वैसे देश में गुरुद्वारा चर्च मंदिर मस्जिद सब बराबर हैं।भारत का संविधान सभी को अपने धर्म को मानने उसका प्रचार प्रसार करने की स्वतंत्रता देता है।हालांकि कोर्ट ने साफ किया कि यह फैसला मंदिर मस्जिद विवाद से बिल्कुल अलग है।
हज़रत ने साफ कहा कि हमें समझना होगा कि हम इस्लाम के मानने वाले हैं लिहाजा हमारा फ़र्ज़ है कि मस्जिदें नमाजियों से भरी रहें हम जो हालात का सामना कर रहे हैं वह हमारी कमियों का नतीजा है हमें खुद को सुधारना होगा और मस्जिदों को सजदो से सजाना होगा ,क्योंकि लाइट और एयरकंडीशन लगा देने से मस्जिद खूबसूरत नहीं होती उसका हुस्न नमाजियों से है और क़ुरआन में अल्लाह ने फरमाया कि “बेशक नमाज़ बेहयाई और बुरी बातों से रोकती है” अगर हमें खुद को कामयाब करना है तो अपने रब से रिश्ता मजबूत करना होगा ,और उसका तरीका है कि सच्चो के साथ हो जाईए।
उन्होंने कहा बाबरी मस्जिद का मामला अदालत में है हमें अदालत पर भरोसा रखना चाहिए ।चुनावी अभियान शुरू हो चुका है हर तरफ से आपको भटकाने की कोशिश की जाएगी लेकिन हमें अफवाहों पर ध्यान नहीं देना है और न ही मुख्य मुद्दों से भटकना है ।मुल्क में अमन को किसी भी कीमत पर खराब नहीं होने देना है ।अदालत अपना काम करेगी हमारा काम दिलों को जीतना है क्योंकि दिल जीतना असली जीत है। कर्बला का भी यही सबक है कि दिलो पर राज करने वालों की सल्तनत कभी खतम नहीं होती।

By: Yunus Mohani

हक़ कभी ज़ुल्म से समझौता नहीं करता, यही है कर्बला का सबक़: सय्यद मोहम्मद अशरफ

20 सितम्बर /किछौछा

आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड के अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफी फोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने कहा कि “हक कभी ज़ुल्म से समझौता नहीं करता यही कर्बला का सबक है” सिर्फ इतना ही नहीं उन्होंने आगे कहा कि हमें हक का पैरोकार होने के लिए उनके किरदार को अपनाना पड़ेगा जो अहले हक हैं और फिर हम देखेंगे कि ज़ालिम क्यों न कितना भी ताक़तवर हो वह हारा हुआ ही नज़र आएगा .

उन्होंने कहा कि यज़ीदियत हर दौर में हुसैनियत से हारती रहेगी क्योंकि हक से कभी बातिल जीत नहीं सकता सत्य से असत्य को विजय नहीं मिल सकती कुछ देर को सत्य परेशान हो सकता है लेकिन उसे पराजित नहीं किया जा सकता जब परेशानी आये तो सब्र से काम लेना है सब्र की मेराज का नाम हुसैन है .

हज़रत ने कहा कि धोके में आने की ज़रूरत नहीं है बस साबिर तलाश कीजिये हक़ मिल जायेगा क्योंकि कुरान में साफ़ कहा गया है कि “अल्लाह सब्र करने वालों के साथ है”ज़िक्रे हुसैन हर दौर में हुआ है और हर दौर में होगा क्योंकि इससे हमें प्रेरणा मिलती है सत्य की राह पर चलने की और ईमान ताज़ा हो जाता है .

उन्होंने कहा कि अपने किरदार को वैसा कर लेना जैसा इस्लाम चाहता है उसके लिए अहलेबैत के किरदार को अपनाना होगा और जब आप इसे अपना लेंगे तो कोई सरकार कोई कानून बना ले आप उससे प्रभावित इसलिए नहीं होंगे क्योंकि आप कोई ऐसा अमल नहीं करेंगे जिससे कोई आप पर या आपके मज़हब पर ऊँगली उठा सके .

उन्होंने सरकार द्वारा तीन तलाक़ पर लाये गए अधध्याधेश पर कहा कि यह चुनावी दौर है ऐसे में ये क़दम चुनावी रणनीत का हिस्सा भर है इससे मुस्लिम औरतों की ज़िन्दगी बेहतर नहीं होगी बल्कि समाज में अपराध अधिक बढ़ेंगे सरकार को इस ओर ध्यान देना चहिये था क्योंकि लोकतंत्र में जनता के हित की बात होनी चहिये न कि दल के हित की उन्होंने यह भी कहा कि मुस्लिम समाज को भरोसे में लेकर फैसला किया जाना चाहिए था.

हज़रत ने कहा कि हमें अपने किरदार को अहलेबैत के किरदार में ढालना होगा फिर आप यहाँ भी इज्ज़तवालों में शुमार होंगे और वहां भी.

By: Yunus Mohani

हज यात्रियों को सही सुविधा उपलब्ध करवाई जाये : सय्यद मोहम्मद अशरफ

8 सितंबर /भटिंडा

आल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड के अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफी फोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने भारत सरकार से मांग की है कि हज यात्रियों को उचित सुविधा दी जाए क्योंकि हज यात्री आम तौर से उपलब्ध हवाई टिकट अधिक दामों में खरीदते हैं और सभी प्रकार का टैक्स भी अदा करते हैं ,उसके बाद भी हज यात्रियों को एयरपोर्ट पर अलग से कोई सुविधा मिलना तो दूर की बात है अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा करने वाले आम यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं से भी वंचित किया गया है,जो बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि हज मंत्रालय और हज कमेटी को इस ओर ध्यान देते हुए तुरंत हज यात्रियों को हज के सफर से आने पर उचित सुविधा देने का प्रबंध करना चाहिए।हज़रत ने कहा कि यह हमारा अधिकार है जिसका हम मूल्य चुकाते हैं और ये कोई आपकी मेहरबानी नहीं है ,हज़रत किछौछवी ने तल्ख लहजे में कहा कि सरकार जल्द इसपर कार्यवाही करे हज यात्रियों को बड़ी असुविधा है उन्हें अपना सामान मिलने में दिक्कत हो रही है क्योंकि अधिकतर यात्री बूढ़े हैं और उनमें से बहुत पढ़ना लिखना भी नहीं जानते जिस वजह से उनका सामान मिलने में बड़ी दिक्कत है, एक बार उनका सामान मुश्किलों के बाद मिल जाता है तो एयरपोर्ट के बाहर एक बार फिर उनका सामान लेकर एक लोडर पर लाद दिया जाता है और हाजियों को कैंप में ले जाया जाता है जहां भी भारी अव्यवस्था का माहौल है।
जहां कैंप लगाया गया है वहां न हाजियों के लिए उचित व्यवस्था है न उनको लेने आने वालों के लिए कोई प्रबंध,यहां तक की प्रसाधन का भी उचित प्रबंध नहीं है और कैंप के बाहर पानी भरा हुआ है।
हज़रत ने कहा कि सरकार तुरन्त इस ओर ध्यान दे और उचित प्रबंध करे क्योंकि धन वसूली के बाद भी सुविधा न देना ज़ुल्म है और ज़ुल्म बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।

हम उम्मीद करते हैं, अदालत जल्द 341पर भी इंसाफ देगी : सय्यद मोहम्मद अशरफ

7 सितंबर /कलियर,

आल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष और वर्ल्ड सूफी फोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने कलियर में एक जलसे को खिताब करते हुए कहा कि “हम उम्मीद करते हैं कि अदालत 341 पर भी जल्द फैसला करेगी” वह कल यहां एक प्रोग्राम शहीद कांफ्रेंस में शिरकत करने आए हुए थे।
उन्होंने कहा कि जब अदालत 377 पर इतनी गंभीरता से विचार कर खतम कर सकती है तो फिर 341 पर लगा प्रतिबंध तो पहली नजर में ही असंवैधानिक प्रतीत होता है क्योंकि ये सीधे तौर पर धर्म के आधार पर आरक्षण दिए जाने वाला है जबकि संविधान के अनुच्छेद 341पर प्रतिबंध सरासर गलत है जोकि संविधान के अनुच्छेद 15 और अनुच्छेद 29(2) का परस्पर विरोधभासी है इसपर जल्द ही अदालत न्याय प्रदान करेगी हम ऐसी उम्मीद करते हैं।
हज़रत ने कहा जिस तरह मुल्क में बेरोज़गारों की जमात बढ़ रही है वह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है । आए दिन हो रही भीड़ द्वारा हत्याएं देश को गृहयुद्ध की ओर खींच रही हैं सरकार को इसपर बहुत गंभीर होकर विचार करना होगा और कड़े कदम उठाने होंगे क्योंकि अब ये सिलसिला दलितों और मुस्लिमो से आगे आकर सभी को अपने घिनौने घेरे में ले रहा है।
हज़रत किछौछवी ने कहा लोगों को खुद समझदार होकर मूल विषय से भटकना नहीं चाहिए वह है। स्वास्थ्य ,रोजगार, शिक्षा और सुरक्षा जबकि हमें भटकाया जा रहा है कभी धर्म का इस्तेमाल कर और कभी तरह तरह के नये- नये हथकंडे अपना कर ,लिहाज़ा आप सबको होशियार रहना होगा,और सबको मतदान करना होगा उन्होंने लोगों से अपील की कि सभी लोग मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज करवाए ये सबका मूल अधिकार है ।
इस्लाम मोहब्बत का मजहब है इसे हम और आप अपने कर्म से लोगों को बताएं क्योंकि हमारा अमल हमारे व्यक्तित्व का निर्धारण करता है आखिर में केरल के लोगों के लिए मदद जुटाने का आह्वाहन करते हुए उन्होंने दुनिया के हर कोने में परेशान इंसानियत के लिए दुआ की।

By: Yunus Mohani

वोट हमारा हक, वोटर बनना हमारी जिममेदारी : सय्यद मोहम्मद अशरफ

5/सितंबर , चित्तौड़गढ़

“वोट हमारा हक़ और वोटर बनना हमारी ज़िम्मेदारी” आल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष  व
वर्ल्ड सूफी फोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने यह बात जगह जगह लोगों के नाम वोटर लिस्ट से गायब होने पर लोगों को आगाह करते हुए कही।
हज़रत ने कहा, हर तरफ से आवाज़ उठ रही है कि वोटर लिस्ट में नाम गायब हैं और हर चुनाव में ये होता आया है, पूरे पूरे मोहल्ले के लगभग लोगों के नाम वोटर लिस्ट से गायब होते हैं , लोग अपने मताधिकार का प्रयोग करने से वंचित रह जाते हैं और उनका लोकतंत्र में जो सबसे बड़ा अधिकार है वह उसका फायदा नहीं उठा पाते।
उन्होंने एनआरसी की बात करते हुए कहा की आसाम में गरिकता के लिए जूझ रहे हैं ,अगर समाज बेदार नहीं हुआ और उसने अपना कर्तव्य नहीं निभाया तो कल ऐसे लोगों की स्थिति भी वैसी ही हो सकती है कि उन्हें अपनी नागरिकता को साबित करने के लिए दर दर की ठोकरें खाना पड़े और अपने ही देश में शरणार्थी जैसी स्थिति हो जाए ।
हज़रत किछौछवी ने कहा कि मैंलोगों से आह्वाहन करता हूं कि भारत के निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची का पुनरीक्षण कार्य किया जा रहा है, सभी 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके लोग अपना नाम मतदाता सूची में जुड़वा लें ताकि आने वाले समय में आपको आपके संवैधानिक अधिकार से वंचित न किया जा सके।
उन्होंने यह भी कहा कि सब लोग मतदाता सूची में न सिर्फ नाम जुड़वाएं बल्कि वोट भी ज़रूर करें क्योंकि आपके वोट न करने से यदि कोई ग़लत व्यक्ति चुना जाता है तो उसके द्वारा किए गए गलत कार्यों के आप भी भागीदार होते हो क्योंकि आपने मताधिकार का प्रयोग न करके गलत व्यक्ति को मौक़ा दिया।
हज़रत ने कहा कि खासतौर पर मुसलमान इन चीज़ों से दूर रहते हैं, उन्हें अपनी ज़िम्मेदारी समझनी चाहिए,वहीं उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि किसी भी प्रकार की हीलहवाली लोकतंत्र में बर्दाश्त नहीं की जाएगी सभी वैधपत्र रखने वाले लोगों को मताधिकार का प्रयोग करने का हक़ है, यदि किसी कारणवश उस व्यक्ति का नाम वोटरलिस्ट में न हो तो उसे आधार के ज़रिए वोट करने का मौक़ा चाहिए और आधार को वोटर आइडी से जोड़ दिया जाना चाहिए।

International bodies must enact laws against disrespecting holy Prophets and sacred personalities: World Sufi Forum

New Delhi, September 3, 2018. 

World Sufi Forum (WSF) has written a letter to the UN Secretary, the UN Human Rights Council (UNHRC), European Union (EU) and other international bodies to introduce laws against disrespecting holy Prophets and sacred personalities. This letter has been written in the wake of the recent failed plan to draw contemptuous cartoons of the Prophet Muhammad (peace be upon him).

WSF urges the UN in line with the guidelines of UNHRC Resolution 16/18, to speak up against any ill-conceived plan to defame, denigrate or disrespect the holy personalities of any faith tradition.

In this letter, the WSF stresses that,

  • World community combats negative stereotyping and stigmatization of any faith community and its leaders, and discrimination, incitement to violence as per the Resolution 16/18 adopted by the UN Human Rights Council in March 2011.
  • It has now become inevitable to make international laws to curb the contemptuous and disrespectful behavior towards the holy Prophets and all other sacred personalities in future.
  • The UN Human Rights Council (UNHRC) and European Union must discourage any future blasphemous act against Prophet Muhammad (peace be upon him), which leads to an environment of tension, discord and distress in the Muslim world.
  • If the objective of global peace is to be achieved, the United Nations and all international bodies are duty-bound to enact clear and manifest laws making blasphemy of holy Prophets and other personages a punishable offence.
  • This should not just be confined to formulation of laws but the necessary laws should be translated into action, in letter and spirit.
  • Freedom of Expression should be redefined in order to protect the world from clash of civilizations. Any disrespectful or contemptuous behavior against the holy Prophets is cannot be called ‘freedom of expression’ by any legal imagination. Rather, it is violation of fundamental right to profess any religion and love and respect its holy personages.
  • If the United Nations, European Union and other international organizations did not address this extremely sensitive issue, nothing would save the world from promoting religious extremism and plunging into another ‘clash of civilizations’.
  • The peaceful and the true Prophet-loving Muslims have exercised utmost patience and restraint on a number of occasions when blasphemous, objectionable and immoral material was published against Prophet of Islam so that international peace could stay intact.\
  • International community must curtail these factors which ultimately result in the emergence of extremist thoughts and groups. It would halt the efforts towards attaining global peace and would strengthen the extremists’ narratives and ulterior motives.

The World Sufi Forum urges the world community to curb such acts which only help the extremists. While we need more tolerance, respect for cultural and religious diversity and enhanced dialogue at all levels, we need to fight extremism in all forms and manifestations.

 

With Best Wishes.

Syed Mohammad Ashraf Kichchawchchvi

Chairman, World Sufi Forum

Founder & President

All India Ulama & Mashaikh Board

जो देश का दुश्मन वह हमारा दुश्मन : सय्यद मोहम्मद अशरफ

चित्तौड़गढ़।

चीन ने अपनी जनसंख्या को अपनी ताकत में बदल दिया और इसके बल पर आज विश्व की विकसित अर्थव्यवस्था बन चुका है। लेकिन हम इसी बात को लेकर रो रहे हैं । हम जनसंख्या नियंत्रण कानून के नाम पर राजनीति कर रहे हैं।
यह बात सैयद सरदार अहमद अशरफी के सालाना उर्स में सम्मिलित होने आए आल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष सैयद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कही।
हज़रत ने कहा कि हमारे देश में संसाधनों की कोई कमी नहीं है। लेकिन कर्ताधर्ताओं की इच्छा शक्ति की कमी से सही दिशा में कार्य नहीं हो रहे हैं। संसाधन बढ़ाए जा सकते हैं, देश में शिक्षा संस्थानों की उपलब्धता बढ़ाई जा सकती है, रोजगार के अवसर बढ़ाए जा सकते हैं।
उन्होंने कश्मीर में सेना पर पत्थर बाजी के सवाल के जवाब में कहा कि कश्मीर से कन्याकुमारी और गुजरात से पश्चिम बंगाल तक कहीं भी और कोई भी मेरे देश और देश के कानून के विरुद्ध आवाज उठाएगा तो वह मेरा सबसे बड़ा दुश्मन होगा। चाहे वह मेरा भाई हो, चाहे रिश्तेदार हो, दोस्त हो चाहे कोई भी हो।
किछौछवि ने कहा कि आज हर इंसान एक दूसरे से इल्जामी सवाल कर रहा है और इल्जामी जवाब दे रहा है। जैसे कोई किसी को कहे कि चोरी मत करो तो सामने वाला जवाब देता है कि तुम्हारा भाई भी तो चोर है। इस तरह की मानसिकता से समाज में सुधार नहीं होगा हमें महसूस करना पड़ेगा जो गलत है वह गलत है हर आदमी की जिम्मेदारी है कि वह अपने को बेहतर बनाएं। हमें अपनी जाति धर्म क्षेत्र भाषा से ऊपर उठकर अपने आप को बेहतर बनाना होगा ऐसी राह निकालनी होगी जिससे समाज का विकास हो।
मैं मानता हूं कि धर्म हमें हमेशा उस राह पर डालता है जो हमें बेहतर बनाती है। आज विडंबना यह है कि धर्म की आड़ में ही अधर्म किया जा रहा है और उसे धर्म बताने की शिक्षा दी जा रही है ऐसे चंद लोग हैं जिन्हें हमें पहचानना है, हमारी खामोशी जुर्म को बढ़ाने में मददगार होती है ,और हम इसमें भागीदार हो जाते हैं। देशवासियों से यह अपेक्षा है कि जहां कहीं भी बुराई देखें उसके खिलाफ खड़े हो जाएं। सय्यद मोहम्मद अशरफ ने महाभारत का उदाहरण देते हुए बताया कि जब अर्जुन ने युद्ध के समय अपने सामने खड़े अपने परिजनों पर बाण चलाने के लिए मना कर दिया तो कृष्ण ने उन्हें समझाया कि जो सामने खड़े हैं वह तुम्हारे अपने हैं लेकिन जालिम है मैंने तुम्हें जुल्म के खिलाफ खड़ा किया जुल्म करने वाला कोई भी हो अगर अच्छा बनना है तो जुल्म के खिलाफ खड़ा होना होगा ,उस समय यह नहीं देखा जाएगा कि सामने आपका दोस्त है या रिश्तेदार है अगर वह ज़ालिम है तो तुम्हें उसके विरोध में खड़ा होना होगा। धर्म हमेशा सार्वभौमिक बात करता है जो दुनिया में सभी जगह सही होती है हम जिस धर्म की बात करते हैं लेकिन उसे मानते नहीं है। उन्होंने अल्पसंख्यक कल्याण के प्रयासों को नाकाफी बताया और कहा कि हमने बदलाव के साथ ही इस क्षेत्र में भी परिवर्तन की उम्मीद की थी लेकिन चेहरे बदले हैं काम नहीं। विकास योजनाएं आम भारतीयों को ध्यान में रखकर बनाई जानी चाहिए, राजनीति और वोट के लिए नहीं ध्रुवीकरण के लिए योजनाएं नहीं बनानी चाहिए। जब तक देश के हर नागरिक का विकास नहीं होगा तब तक देश का विकास नहीं हो सकता है ।
उन्होंने यूरोप का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां पर जिसके पास कोई काम नहीं है वह भी हमसे अच्छी जिंदगी बिता रहा है।
हज़रत ने तीन तलाक के मुद्दे को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यह पूरी तरह से राजनैतिक मुद्दा है समाज से इस संबंध में कभी कोई आवाज नहीं उठी। आने वाले चुनाव में समर्थन देने की बात पर उन्होंने कहा कि हम सभी में आपस में तुलना करेंगे और जो बेहतर होगा देश हित में होगा उसके बारे में सोचेंगे ।
इसके साथ ही उन्होंने राम मंदिर के मुद्दे पर बोलते हुए कहा कि राम मंदिर मुद्दा आपस में बैठकर सुलझाया जा सकता है या फिर न्यायालय के आदेश की पालना की जा सकती है।लेकिन आपस में वही लोग सुलझा सकते हैं जो पक्षकार हैं, यह प्रकरण नयायालय में विचाराधीन है तो हमें न्यायालय पर भरोसा करना चाहिए। चुनाव सामने आते ही राम मंदिर के मुद्दे को उठाए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि हम हिंदुस्तानी बहुत ज्यादा भावुक है हम जानते हैं कि सामने वाला हमारी भावुकता का फायदा उठा रहा है लेकिन हम बार-बार उसके फरेब में आ जाते हैं हमें अपने आप में सुधार करना होगा।
प्रेस वार्ता के दौरान सज्जादा नशीन मोहम्मद सलीम अशरफी मौलाना मोहम्मद इब्राहिम अशरफी और यूसुफ अशरफी सहित कई अकीदतमंद उपस्थित रहे।

بہار اسٹیٹ مدرسہ ایجوکیشن بورڈ کے نصاب سے انگریزی مضمون کو ختم کرنے سے بہارمدارس کے بچوں کا مستقبل خطرے میں: سید محمد اشرف کچھوچھوی 

چتوڑگڑھ،راجستھان،۱؍ستمبر(پریس ریلیز) بہار اسٹیٹ مدرسہ ایجوکیشن بورڈ کی جانب سے فوقانیہ اور مولوی امتحانات سے لازمی پیپر انگریزی جو 100 نمبر کا تھا جسے ہٹا نے سے سیدھا نقصان طلبہ و طالبات کا ہوگا۔ ان خیالات کا اظہار آل انڈیا علماء و مشائخ بورڈ کے قومی صدراور ورلڈ صوفی فورم کے چیئرمین حضرت سید محمد اشرف کچھوچھوی نے چتوڑ گڑھ سے جاری ایک بیان میں کیا۔
بورڈ کے قومی صدر نے کہا کہ طلبہ و طالبات کو کسی بھی یونیورسٹی میں کسی بھی شعبے میں داخلہ لینے کے لئے یا روزگار حاصل کرنے کے لئے انگریزی زبان کا ہونا لازمی ہے۔موجودہ دور میں زیادہ تر علمی معلومات اسی زبان میں میسرہیں جس سے مستفیدہونے کے لیے ضروری ہے کہ اس زبان پر تحریری اور زبانی اعتبار سے دسترس حاصل کی جائی لیکن اس کو ہٹاکر بہار مدرسہ بورڈ نے طلبہ و طالبات کے مستقبل کے ساتھ کھلواڑ کیا ہے اور ساتھ ہی ایجوکیشن بورڈ کے ذریعہ قدیم مدت سے چلی آرہی روایتوں سے ہٹ کر جمعہ کے دن امتحان بھی کرایا گیا ہے جو کہ غلط ہے۔
ان حرکتوں سے پتہ چلتا ہے کہ حکومت بہار نے پورا ارادہ کر لیا ہے کہ مدرسہ بورڈ ختم کردیا جائے جس کا تازہ نمونہ یہ بھی ہے کہ اگست کی آخری تاریخوں میں فوقانیہ اور مولوی جماعت کا امتحان کروایا جا رہا ہے تاکہ کوئی بھی طلبہ و طالبات دیگر کالجوں اور یونیورسٹیوں میں داخلہ نہ لے سکیں کیونکہ ملک کے بیشتر تعلیمی اداروں میں جولائی ماہ ہی میں داخلہ کی کار روائی مکمل کر لی جاتی ہے۔
انہونے یہ بھی کہا کہ یادرکھئے اگر مدرسہ بورڈ کو حکومت نے ختم کردیا تو ہمارے بچوں کا مستقبل تو ختم ہوگا ہی ساتھ ہی ہمارے گھروں میں بے روزگاری بھی بڑھے گی اس لئے آل انڈیا علما و مشائخ بورڈ حکومت بہار سے اسکو بحال کرنے کا پر زور مطالبہ کرتا ہے۔

दुनिया के सभी देशों से अंतरराष्ट्रीय ईश निंदा क़ानून बनवाने के लिए एकजुट होने की वर्ल्ड सूफी फोरम की अपील।

31 अगस्त /चित्तौड़गढ़,

वर्ल्ड सूफी फोरम के चेयरमैन और आल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड के संस्थापक, अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने पत्रकारों को बताया कि वर्ल्ड सूफी फोरम ने दुनिया के तमाम देशों से पत्र भेज कर अपील की है कि अंतरराष्ट्रीय ईश निंदा क़ानून बना कर दुनिया को वैचारिक आतंकवाद से बचाया जाऐ।
उन्होंने कहा कि यह क़दम हाल में हॉलैंड के एक सरफिरे द्वारा पैग़म्बरे अमन व शांति हज़रत मोहम्मद सल्लाल्लहू अलैहि वसल्लम के कार्टून की प्रतियोगिता आयोजित करने के ऐलान के बाद उठाना ज़रूरी है क्योंकि दुनिया में बसने वाले अरबों की तादाद में मुसलमानों की आस्था ऐसी घिनौनी करतूत से आहत हुई है। न सिर्फ मुसलमानों की बल्कि सभी अमन पसंद लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं ।
उन्होंने कहा, हालांकि पूरी दुनिया में हो रहे विरोध प्रदर्शनों और संयुक्त राष्ट्र मानव अधिकार आयोग से वर्ल्ड सूफी फोरम की शिकायत के बाद इस प्रतियोगता को आयोजित नहीं किया जाने का ऐलान किया गया है लेकिन यह अंतिम उपचार या न्याय नहीं है ।उन्होंने कहा कि कहीं भी दुनिया के किसी कोने में कोई किसी भी धर्म के खिलाफ अगर ऐसी घिनौनी बात करता है जिससे उस धर्म के मानने वालों को दुख होता है तो अंतरराष्ट्रीय कानून का होना जरूरी है ताकि दोषी को सज़ा मिल सके और फिर किसी की हिम्मत न हो ऐसा कुकृत्य करने की।
हज़रत ने कहा नामूसे रिसालत पर हमला करने वाले दुनिया को अशांत करना चाहते हैं असली आतंकी यही विचार रखने वाले हैं जो किसी की धार्मिक भावनाओं को अपना हथियार बना कर अपना शैतानी मकसद हल करना चाहते हैं ।लिहाज़ा इस मुद्दे पर सबको साथ आना होगा ।

By: यूनुस मोहानी