اولاد آدم کو حضرت آدم کا بھولا ہوا سبق پڑھانا صوفی ازم کا اہم مقصد: شیخ اشرف آفند ی،جرمنی


جنوری19 ،2020) دوپہر ۲ بجے سے شام ۵ بجے تک غالب اکیڈمی بستی حضرت نظام الدین میں ”امن وامان کے قیام میں صوفیا کا کردار“ کے عنوان سے ایک خصوصی نشست کا اہتمام آل انڈیا علما ومشائخ بورڈ کی جانب سے کیا گیا ۔
غالب اکیڈمی میں منعقدہ صوفی نشست سے خطاب کرتے ہوئے معروف انٹر نیشنل صوفی اسکالر شیخ اشرف آفندی (جرمنی)نے کہا کہ لوگ دنیا میں ایک مقام سے دوسرے مقام تک صرف بلڈنگیں اور عمارتیں دیکھنے کے لیے سیاحت کرتے ہیں،جب کہ انھیں عمارتوں کی بجائے اچھے اور اعلیٰ اشخاص یعنی صوفیا اور بزرگان دین کی زیارت سفرکرنا چاہیے۔موصوف نے کہا کہ ہم دہلی صرف لال قلعہ،جامع مسجد اورقطب مینار دیکھنے نہیں آئے بلکہ یہاں جو صوفیا اور اہل اللہ آارام فرماہیں،ان کی زیارت کے لیے آئے ہیں۔ انھوں نے کہاکہ تحقیق سے یہ بات ثابت ہوچکی ہے کہ حضرت آدم علیہ السام ہی دنیا کے سب سے پہلے انسان ہیں،اور دنیا کی پوری آبادی انھیں کی اولاد ہے۔اور حضرت آدم علیہ السلام صرف پہلے بشر ہی نہیں اس دنیامیں اللہ کے پہلے نبی بھی ہیں۔اسی طرح وہ اس دنیا کے پہلے مومن بھی ہیں۔آدم علیہ السلام جنت سے آئے،اور جنت ہی سے ایمان کا تحفہ بھی لے کر آئے۔ایمان ہمارے لیے حضرت آدم کا لایا ہوا قیمتی تحفہ ہے۔

پروفیسر ڈاکٹر سید شمیم احمد منعمی، خانقاہ منعمیہ نے کہا کہ خانقاہوں نے کبھی بھی کسی کا مذہب اور نام یا ذات ویکھ کر کسی کی خدمت نہیں کی۔صوفیا کا مطمح نظر الخلق عیال اللہ کا ہو تا ہے۔وہ انسانی برادری کو ایک کنبہ اور ایک خاندان کی طرح مانتے ہیں۔ان کاا خلاق عام انسانوں سے بہت بلند ہو تا ہے۔ان کا نظریہ تخلقوا باخلاق اللہ کا اصول ہو تا ہے۔وہ اللہ کے اخلاق سے متصف ہوتے ہیں۔اللہ تعالی نے چاند وسورج اور زمین وآسمان بنائے، ہوااورپانی کو وجود بخشا،مگر اس کی افادیت کافر اور مومن کے اعتبا رسے نہیں رکھی،بلکہ اس سے ہر کوئی مستفید ہوتا ہے۔اسی طرح صوفی بھی اپنے فیض سے سارے جہان کو منور کرتا ہے۔سب ہی اس کے آستاں سے اپنی ضروریات پوری کرتے ہیں۔

پروفیسر ڈاکٹر خواجہ محمد اکرام الدین، جے این یو نے کہاکہ صوفیا کا سلسلہ پوری دنیا میں پھیلا ہواہے۔اور ہر خطے میں اہل اللہ کے مزارات اور ن کے تہذیبی آّ ثار موجود ہیں۔حکومتیں اگر چاہیں تو ان سلاسل کے ذریعے اقوام عالم کو ایک دوسرے کے قریب کرسکتی ہیں۔فروغ تصوف اور احیائے تہذیب کے حوالے سے انھوں نے حکومت ہند کے ذریعے کی جانے والی کو بھی سراہا اور کہا کہ حکومت کوئی بھی اس کے مثبت رویے سے استفادے کے جو مواقع ہو ں انھیں گنو انا نہیں چاہیے۔
مولانامقبول احمد سالک مصباحی نے کہا کہ سرزمین ہند کی ولایت مطلقہ بارگاہ رسالت پناہی علیہ السلام سے حضرت خواجہ غریب نواز اجمیری رضی اللہ عنہ کوعطاہوئی ہے، خوجہ ہند شہنشاہ ہند ہیں، انھوں نے اپنی غیر معمولی روحانیت سے تعلیم اسلام سے لوگوں میں محبت اور بھائی چارہ پیدا کیا۔خواجہ غریب نواز کی حکمت وبصیرت اور ان کی فراست مومنانہ اہل ہند کے اشخاص اور داعیوں کے لیے مشعل راہ ہے۔ان کے بتا ئے ہوئے راستے پر چل کر ہم نفرت وعداوت کی آندھیوں کو سرد کرسکتے ہیں۔

مولانا عبدالمعید ازہری اور مولانا غلام رسول دہلوی نے بھی اظہار خیال کیا، نظامت کے فرائض مولانا ظفرالدین برکاتی، چیف ایڈیٹرماہنامہ کزالایمان اور مولانامختار اشرف نے انجام دیئے۔سید شاداب حسین رضوی،رئیس اشرفی،عظیم اشرفی نے آنے والے تمام مہمانوں کاشکریہ ادا کیا۔آخر میں مہمانان کی گل پوشی کی گئی۔ جامعہ خواجہ قطب الدین بختیار کاکی کے طلبہ واساتذہ،حافظ وقاری انصار احمد خطیب وامام برکاتیہ مسجد،حاجی،رفیع احمد صدر اعلی برکاتیہ مسجدکے علاوہ مختلف مساجد کے ذمہ داران اور مدارس کے اسا تذہ نے بھی شرکت کی۔

मुल्क के नवजवानो ने बता दिया है मुल्क का भविष्य सुनहरा – सय्यद अशरफ

15 जनवरी नई दिल्ली,
आल इंडिया उलमा व मशाइख़ बोर्ड के अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफी फ़ोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने कल दिल्ली के शाहीन बाग में चल रहे प्रदर्शन में शिरकत की उन्होंने इस मौके पर बामसेफ के अध्यक्ष वामण मेश्राम से मुलाक़ात भी की वह भी धरने को अपना समर्थन देने आए थे,धरना स्थल से लौटते समय उन्होंने प्रेस से कहा कि मुल्क की आवाम के दिल में मुल्क और संविधान को लेकर जो मोहब्बत है उसने यह बता दिया है कि मुल्क का भविष्य सुनहरा है।

हज़रत ने कहा कि जिस तरह लोगों ने मज़हब और जात पात का जाल तोड़ कर एकजुटता दिखाई है उसने मुल्क के दुश्मनों को सीधा संदेश दिया है कि भारत को कमजोर नहीं किया जा सकता किसी लम्हे के लिए लोगों को धोखा दे कर उन्हें वरगलाया जा सकता है लेकिन यह भाव हरगिज़ स्थाई नहीं रह सकता क्योंकि भारत की मिट्टी में गंगा जमुनी तहजीब बसती है,यहां ईद और दीवाली एक दूसरे को गले लगाकर ही पूरी होती है ,यह एकजुटता तोड़ने में दुश्मन टूट जाएगा मुल्क नहीं टूटने वाला है।

उन्होंने सरकार से इस मामले को गंभीरता से देखने और लोगों से संवाद स्थापित करने की सलाह देते हुए कहा कि मुल्क हट से नहीं संविधान से चलता है हमें और किसी भी प्रदर्शनकारी को किसी भी मजलूम को नागरिकता दिए जाने से कोई विरोध नहीं है ,लेकिन मजहबी कैद हरगिज़ सही नहीं है मजलूम कोई भी हो हमें उसके साथ खड़े होना होगा।
देश के युवाओं से संवाद स्थापित होना चाहिए ,उनकी समस्याओं को सुना जाना चाहिए और न्याय होना चाहिए ,जब पूरे देश में विरोध है तो पुनः विचार होना ,जेएनयू , ए एम यू,जामिया में छात्रों के साथ जो हिंसा हुई है उसकी सही जांच हो और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही होनी चाहिए।हिंसा की कोई गुंजाइश नहीं है लोग इसका ख्याल रखें कि कोई बलवाई उनके बीच न घुसने पाए।

उन्होंने कहा कि यह धर्म विशेष का मामला नहीं है देश का है और सड़क पर किसी एक धर्म के लोग नहीं है बल्कि सभी भारत के लोग हैं इसका यही स्वरूप भारत की हकीकत है इसे समझा जाना चाहिए,छात्र और महिलाएं नेतृत्व कर रही हैं हम मुल्क के अच्छे भविष्य के लिए दुआ करते है।

Yunus Mohani

डर के माहौल में शिक्षा संभव नहीं और बिना शिक्षा विकास : सय्यद मोहम्मद अशरफ

जेएनयू केम्पस में नाक़ाबपोश गुंडों का हमला देश के भविष्य पर हमला
6 जनवरी मुम्बई,
आल इंडिया उलमा व मशाइख़ बोर्ड के अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफी फ़ोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने कल जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय के कैम्पस में हुई हिंसा की कड़ी निन्दा करते हुए कहा कि जो भी यूनिवर्सिटी कैम्पस में घुस कर इस तरह की हिंसा कर रहे थे फौरन उनकी गिरफ्तारी होनी चाहिए क्योंकि डर के माहौल में शिक्षा संभव नहीं है और शिक्षा के बिना विकास संभव नहीं।
हज़रत ने कहा कि यह वाकई हैरत में डालने वाली बात है कि इतने हथियारबंद लोग विश्विद्यालय में कैसे प्रवेश कर गये और लोकल सुरक्षा कर्मी उन्हें रोकते नहीं हैं, आखिर यह किस तरह का माहौल बन रहा है, अगर ऐसा ही चलता रहा तो लोग अपने बच्चों को कैसे पढ़ने के लिए भेजेंगे, इस तरह कैसे भारत पढ़ेगा और आगे बढ़ेगा।
उन्होंने कहा कि इस मामले में राजनीत नहीं होनी चाहिए यह भारत के भविष्य का सवाल है, सभी लोगों को एकजुट होकर इस तरह की घटनाओं को रोकने का प्रयास करना होगा यदि ऐसा नहीं हुआ तो देश का विकास बाधित होगा। जिन बच्चों को चोट आई है हम उनके जल्द स्वस्थ्य होने की दुआ करते हैं और छात्र छात्राओं को विश्वास दिलाना चाहते हैं कि देश के सभी अमन पसंद लोग आपके साथ खड़े हैं, आपको भयभीत होने की जरूरत नहीं है।
सभी विश्विद्यालयों के छात्र छात्राओं से हम यह अपील भी करते हैं कि किसी भी तरह की हिंसा का विरोध कीजिए और अगर आपके बीच कोई ऐसा करने की कोशिश करता है तो उसे रोक दीजिए, आप देश का भविष्य हैं और हम सब आपके साथ हैं। देश की कानून व्यवस्था पर भरोसा रखिए, मतभेद होना चाहिए मनभेद नहीं यही तरक्की की राह है, किसी के बहकावे में न आएँ न ही अफवाहों पर ध्यान दें।

यूनुस मोहानी

ननकाना साहिब गुरुद्वारे पर हमला नबी की तालीम के सख्त खिलाफ : सय्यद मोहम्मद अशरफ

4 जनवरी (2020)शनिवार,मुम्बई
आल इंडिया उलमा व मशाइख़ बोर्ड के अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफी फ़ोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने ननकाना साहिब गुरुद्वारे को घेर कर पत्थरबाजी की घटना की निन्दा करते हुए कहा है कि यह काम नबी की तालीम के सख्त खिलाफ है,उन्होंने कहा कि जब पैगम्बर ए इस्लाम सल्लाल्लाहू अलैहि वसल्लम ने मदीना स्टेट बनाया तो वहां के अल्पसंख्यकों के अधिकार रखे और उनकी इबादतगाहों तथा उनकी जान माल की हिफ़ाज़त का वादा किया।
उन्होंने कहा, पाकिस्तान की सरकार इस मामले में फौरन दखल दे और हर कीमत पर ऐसा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाए तथा गुरुद्वारे की पवित्रता को बरकरार रखा जाए। चूंकि ननकाना साहिब में सिख भाइयों के प्रथम गुरु गुरु नानक देव जी का जन्म हुआ इसलिए इस जगह से उनकी अकीदत है,जिसका सम्मान किया जाना चाहिए।
हज़रत ने पाकिस्तान के लोगों से अपील करते हुए कहा कि नबी की तालीम पर अमल करें क्योंकि इस तरह अगर कोई करता है तो यह सीधा उस पैग़म्बरे अमन की तालीम की अव्हेलना है लिहाज़ा सब बाहर निकलकर सिख भाइयों की मदद के लिए आएँ।
उन्होंने कहा कि भारत का हर मुसलमान सिख भाइयों के साथ है और हम इस तरह के कृत्य को बर्दाश्त नहीं करते, इसकी कड़ी निन्दा करते हैं क्योंकि किसी को किसी की धार्मिक भावनाओं को आहत करने का अधिकार इस्लाम नहीं देता है, इस्लाम की तालीम हर जगह ज़ुल्म और ज़ालिम के खिलाफ मजलूम के साथ खड़े होना है।

By: यूनुस मोहानी

ज़रूरतमंदों की मदद भी आंदोलन का हिस्सा: शाह हसन जामी

29 दिसंबर,नई दिल्ली।
आल इंडिया उलमा व मशाइख़ बोर्ड ने हर साल की तरह इस साल भी एक निर्देश अपनी सभी शाखाओं में जारी कर कहा है कि लोगों की मदद की जाए बिना उनकी जात और धर्म पूछे, इस भयानक सर्दी में यूं लोगों तक गर्म कपड़े कम्बल जैसी ज़रूरी चीज़ें पहुंचाई जाऍ जिनके पास अपना बदन ढकने के लिए गर्म कपड़े नहीं है।
इसी क्रम में बोर्ड के राष्ट्रीय महासचिव शाह हसन जामी के द्वारा दिल्ली के श्रम विहार, कालिंदी कुंज इलाके में यह काम शुरू किया गया, यहाँ झुग्गी झोंपड़ी में रहने वाले वह लोग हैं जिनके पास इस भयानक सर्दी से बचाव करने के लिए ओढ़ने का साधन नहीं है।

बोर्ड के कार्यालय प्रभारी हुसैन शेरानी ने सुश्री ऐमन और मौलाना अज़ीम अशरफ के साथ मिलकर कंबल बांटे ।
जिससे काफी लोगों को राहत मिली साथ ही यह संदेश भी दिया गया कि हम लोगों के लिए आसानियां पैदा करने वाले बने न कि मुसीबत।

जामिया में पुलिसिया दमन भारत के भविष्य पर हमला :सय्यद मोहम्मद अशरफ

15 दिसंबर, नई दिल्ली
आल इंडिया उलमा व मशाइख़ बोर्ड के अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफी फ़ोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के अंदर घुस कर जामिया के छात्र छात्राओं पर पुलिस के लाठीचार्ज की कड़ी निन्दा की है।
हज़रत ने कड़े शब्दों में कहा कि यह भारत के भविष्य पर हमला है केंद्र सरकार को फौरन स्थिति को संभालना चाहिए, देश में जिस तरह का माहौल पनप रहा है वह बेहतर नहीं है लोगों में चिंता और भय है सरकार को इसे दूर करना चाहिए, हज़रत ने छात्रों से भी शांति की अपील करते हुए कहा कि कानून को किसी भी हाल में हाथ में न लें शांति और संयम बनाए रखे।
हज़रत ने दिल्ली पुलिस की इस बर्बर कार्यवाही को निकम्मापन करार दिया,उन्होंने कहा कि अगर बिना इजाज़त विश्विद्यालय में पुलिस घुसी है तो इसकी जांच होनी चाहिए और दोषियों पर कड़ी कार्यवाही की जानी चाहिए, विश्विद्यालय पढ़ने की जगह है पुलिसिया तांडव की नहीं इसके लिए सरकार को फौरन क़दम उठाने चाहिए। बच्चों के साथ कोई गलत बर्ताव नहीं किया जाए और उन्हें सकुशल उनके घर भेजा जाय।

By: Yunu Mohani

आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड का CAB और NRC के विरोध दिल्ली में प्रदर्शन

लक्ष्मी नगर,नई दिल्ली 13/12/2019

देश के सभी अमन वाले शेहरियों की जानिब से गुस्से का इज़हार करने के लिए NRC और CAB के ख़िलाफ़ ज़बरदस्त मुज़ाहरा पेश कर राजधानी दिल्ली का लक्ष्मी नगर इलाक़ा भी गवाह बना, नमाज़ ए जुमा के बाद इलाके के हज़ारों लोग NRC और CAB के खिलाफ इकट्ठे हुए।

जुलूस में आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड दिल्ली शाखा के महासचिव सय्यद शादाब हुसैन रिज़वी ने कहा कि किसी भी बुरे काम को रोकना हर मुसलमान का फर्ज़ है और ईमान का हिस्सा है और मुसलमानों पर वाजिब है कि वह देश के संविधान की हिफाज़त करे। उन्होंने और कहा कि यह समय सारे शिकवे भूलाकर तमाम अमन वाले और सेक्युलर लोगों को एक साथ आने का है क्योंकि इन दोनों बिलों के परिणाम सिर्फ मुसलानों को ही नहीं बल्कि देश के विभिन्न वर्गों को दूरगामी नुकसान देंगे।

लोगों के आह्वान पर जनाब मौहम्मद शादाब खान लोगों से मुख़ातिब हुए, मौहम्मद शादाब ने कहा कि एक तरफ देश को तानाशाही की तरफ ले जाया जा रहा है, दूसरी तरफ अमन वाले लोग सो रहे हैं, पहले तीन तलाक के मामले में अहले हदीस और वहाबी चुप रहे कि यह हनफियों का मामला है, फिर 370 पर तमाम मुसलमान चुप रहे कि यह कश्मीरियों का मामला है तो कभी अमन के नाम पर बाबरी मस्जिद मामले में मुसलमानों को चुप रखा गया, कभी दहशतगर्द कहा गया फिर भी मुसलमान चुप रहा, लेकिन अब यह मामला सिर्फ लोकत्रंत्र का नही बल्कि मुसलमानों की इज़्ज़त-आबरू का है। कार्यक्रम को सफल बनाने में जनाब वक़ार चौधरी, जनाब रईसुद्दीन सैफी, मौहम्मद अज़हर, साद अहमद, अनीसुल हक़, साकिब सैफी ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया।

By: Husian Sherani

धर्म को आधार बनाकर बनने वाला कानून संविधान के साथ संविधान निर्माताओं का अपमान : सय्यद मोहम्मद अशरफ

13 दिसंबर शुक्रवार,लखनऊ आल इंडिया उलमा व माशाईख बोर्ड के अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफी फ़ोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने लखनऊ में नागरिकता संशोधन बिल पर कहा है कि मज़हब को बुनियाद बना कर अगर कोई कानून बनाया जाता है तो यह भारत के संविधान के साथ संविधान निर्माताओं का अपमान है।
उन्होंने कहा कि यह देश के मुसलमानों का मसला नहीं है बल्कि हर उस सच्चे भारतीय का मसला है जो भारत के संविधान में विश्वास रखता है क्योंकि हमें एक देश के रूप में बांधे रखने वाला संविधान ही है, हज़रत ने स्पष्ट कहा कि यह डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर का अपमान है या फिर दलितों के खिलाफ कोई घिनौनी साजिश क्योंकि आसाम में जिस तरह ज़्यादा तर एन आर सी के कारण अपनी नागरिकता साबित न कर पाने वाले दबे कुचले हुए लोग ही हैं जबकि मुसलमानों की संख्या मात्र 5 लाख ही है अगर यह पूरे देश में लागू होता है तो दलित और आदिवासी समुदाय सबसे अधिक पीड़ित होगा।
और अगर वह नागरिकता नहीं साबित कर सका तो भ्रष्ट तंत्र उसके पूरे जीवन की कमाई मात्र नागरिकता के नाम पर खा जाएगा क्योंकि यह बात जगजाहिर है कि छोटी छोटी सरकारी योजनाएं गरीबों तक बिना रिश्वत के नहीं पहुंचती तो फिर यह जीवन मरण का सवाल होगा इस प्रकार यह उत्पीड़ित समाज के लोग नागरिकता के लिए शोषण के शिकार रहेंगे और फिर इनके लिए आरक्षण बेमाना हो जायेगा।
हज़रत ने कहा कि जिस तरह इस कानून को सिर्फ मुसलमानों के खिलाफ प्रचारित किया जा रहा है वह सही नहीं है जबकि सच यह है कि यह कानून भारत की आत्मा के खिलाफ है ,यह कानून आइडिया ऑफ इंडिया के खिलाफ है और यह कानून संविधान का मज़ाक है इस बात को मुसलमानों को समझना चाहिए कि इसके खिलाफ लड़ाई हर भारतीय की लड़ाई है जो भारत के संविधान में विश्वास रखता है।
उन्होंने कहा कि देश के सभी अमन पसंद लोगों को सामने आना चाहिए और संविधान बचाने के लिए मुहिम चलानी चाहिए,मामला अब अदालत में है हम भारत के सर्वोच्च न्यायालय से उम्मीद करते हैं कि वह इंसाफ करेगा साथ ही भारत के महामहिम राष्ट्रपति महोदय से अपील करते हैं कि इस संविधान विरोधी कानून को अपनी मंजूरी प्रदान n करें क्योंकि यह कानून डॉक्टर अम्बेडकर का अपमान है साथ ही दलितों और आदिवासियों के उत्पीड़न का हथियार है।

By: Yunus Mohani

موجودہ مشکل حالات میں سیرت عبد القادر جیلانی ؓ امید کی ایک کرن


آل انڈیا علما ومشائخ بورڈ کے زیر اہتمام منعقد یوم عبد القادر جیلانی میں علماءکا اظہار خیال
مولانا مقبول احمد سالک مصباحی نے کہا کہ تصوف حالات کے دھارے میں بہنے اور کمزوری وبزدلی کی کمزور تاویلات کانام نہیں،تصوف درحقیقت اللہ کے ماسوا کسی بھی شئی سے نہ ڈرنے کا کانام ہے،صوفی کی آنکھوں میں اللہ کے سوا کسی کا خوف نہیں ہوتا،خواہ ارباب اقتدار کتنا ہی طاقت ور کیوں نہ ہو،حضرت شیخ عبد القادر جیلانی اپنے کردار وعمل سے امت محمدیہ کو یہی پیغام دیا ہے۔انھوں نے کہا کہ حضرت غوث اعظم کی اکیانوے سالہ زندگی اس پر شاہد عدل ہے کہ آپ کسی بھی سلطان وشہنشاہ کے سامنے کبھی نہیں جھکے،بلکہ اسے اپنی خداد دعوتی کردار وعمل سے مرعوب ومسخر کردیا۔قادری سلسلہ کی ایک خصوصیت یہ بھی ہے کہ اس کے مریدین وخلفانے بیت المقدس کی آزادی میں کلیدی کردار ادا کیا ہے،اس سے اس سلسلہ کی ڈائنامک خصوصیت کا پتہ چلتا ہے۔اور یہ بھی واضح کرتا ہے کہ اصؒ مجاہد فی سبیل اللہ صوفیا اور اولیا اللہ ہی ہیں جو نفس امارہ اور شیطانی طاقتوں کے خلاف جہاد کرتے رہتے ہیں۔

مولانا رئیس ازہری (اسلامی اسکالر)نے کہا کہ اگر آج مسلمانوں کو اپنی زندگی کامیاب بنانی ہے تو اسے سرکار غوث اعظمؓ کی تعلیمات پر عمل پیرا ہونا ہوگا۔ آپ نے تعلیمات سرکار غوث اعظم ؓ کی جھلکیاں پیش کیں کہ توحید پر جمے رہو، توحید کے رنگ میں رنگے رہو، توحید کی رسی مضبوطی سے پکڑے رہو کیونکہ توحید ہی سرمایہ نجات ہے۔آپ نے مزید کہا کہ اولیاء کرام کی مجلسوں میں شرکت کرنے سے تزکیہ نفس ہوتا ہے۔

مولانا مختار اشرف اسلامی اسکالر جامعہ ملیہ اسلامیہ نے کہا کہ ہمیں اس پر بھی غور کرنا چاہیے کہ قرآن پاک نے سچوں کے ساتھ رہنے کا حکم کیوں دیا ہے؟اس کانکتہ یہ ہے کہ علم کوئی بھی شخص حاصل کرکے علامہ بن سکتا ہے،مگر ضروری نہیں کہ وہ سچا بھی ہو۔صحبت سچوں کی ہی اکسیر ہے، سرزمین ہند میں سچوں کے امام حضرت خواجہ معین الدین چشتی ہیں،ان سے قطب الدین جڑے تو بختیا ر کاکی ہوگئے،فریدالدین ان سے جڑے تو گنج شکر ہوگئے،ان سے نظام الدین جڑ ے تو محبوب الہی ہو گئے،سید اشرف کسی سچے کی صحبت میں بیٹھے تو مخدوم سمناں ہوگئے اور یہ سلسلہ خیرو برکت اسی طرح رواں دواں رہا۔انھوں نے کہا کہ آج ملک میں مسلمانوں کے خلاف جو ماحول بن رہا ہے تو یہ ہماری دعوتی کوتاہیوں کی وجہ سے ہے،در اصل فتوی تصوف پر غالب آگیا،حکمت پرعلم غالب آگیا،صوفیا پس منظر میں چلے گئے،سماج پر ظاہر پرست علما غالب آگئے اور سب کچھ بدل کر رکھ دیا،ضرورت اس بات کی ہے کہ فتوی پر دعوت کو غالب کیا جائے،اور صوفیا کے طریقہ دعوت کو عام کیاجائے۔

سید شاداب حسین رضوی رکن دہلی اسٹیٹ حج کمیٹی اورجنرل سکریٹری آل انڈیا علما ومشائخ بور ڈ نے کہا کہ موجودہ حالات اگر چہ مشکل ہیں مگر ہمیں مایوس ہونے کی ضرورت نہیں بلکہ انتہائی دانش مندی اور صبر ورضاسے اس کا سامنا کرنا ہے،بالخصوص جذباتی نعروں سے احتراز کرنا ہے،قانونی چارہ جوئی اور عوامی رائے عامہ کی بیداری،اور مسائل کی گہرائی تک جانے کی ضرورت ہے۔انھوں نے کہا کہ حالات بد سے بدتر ہوسکتے ہیں مگر مومن کبھی مایوس نہیں ہوتا۔

مولانا عظیم اشرف نے کہا کہ مسلمانوں کی افتا دطبع یہ ہے کہ وہ اپنی مرضی سے مسائل کا حل چاہتا ہے جب کہ یہ ناممکن ہے،حل مسائل کے لیے قرآن پاک نے ہمیں جو گائیڈ لائن دیا ہے اس کی اتباع ضروری ہے،قرآن نے واضح الفاظ میں کہا ہے کہ سربلندی اور کامیابی کے لیے ضروری ہے کہ مسلمان اللہ سے ڈرتا رہے اور سچوں کے ساتھ رہے،انھوں نے کہا کہ موجودہ حالات کی تبدیلی کے لیے ضروری ہے کہ مسلمان اپنے حالات خوبدلیں،بد اعمالیوں،بالخصوص کبیرہ گناہوں سے بچیں،صوفیا کرام خاص کر حضرت شیخ عبد القادر جیلانی کی سیرت طیبہ کو اپنے لیے مشعل راہ بنائیں۔
محمد حسین شیرانی نے میٹنگ کا ایجنڈا رکھا جس پر ممبران نے کھل کر اپنی رائے کا اظہا رکیا۔میٹنگ میں خاص کر موجودہ حالات کے تناظر میں مسلمانوں کا رویہ کیا ہو،اس پر بھی غور وخوض ہوا۔
علما ودانشوران نے ان خیالات کا اظہار آل انڈیا علما ومشائخ بور ڈ کی مرکزی آفس میں منعقدہ ماہانہ مشاورتی نشست میں کیا۔نشست کا آغازتلاوت کلام پاک سے مولانا آصف رضانے کیا۔بعدہ سید محمد ریحان (جامعہ ملیہ اسلامیہ)اور حافظ قمر الدین (نیا سویرا نیوز پورٹل)نے نعت پاک پیش کی۔
اس موقعہ سے حاضرین کی ضیافت کا اہتمام بھی کیاگیا۔حضرت شیخ عبد القادر جیلانی رضی اللہ عنہ کی گیارہویں کی مناسبت سے ایصال ثواب کا اہتمام بھی کیاگیا۔صلاۃ وسلام اور مولانا سالک مصباحی کی دعا پر مجلس کا اختتام ہوا۔
شرکاء میں جناب ایڈووکیٹ تہذیب الرحمن،مولانا مظفر ازہری،مولانا محمد قاسم، ماسٹر شبر خصالی،عظمت علی،محمد اشرف امان الرحمن وغیرہ موجود رہے۔

By: Maulana Maqbool Ahmad Salik Misbahi

सख्त कानून बनाने से नहीं बल्कि अच्छा समाज बनाने से रुकेंगे बलात्कार : सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी

4 दिसंबर,लखनऊ
आल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड के अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफी फ़ोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने लख़नऊ में बोर्ड की मीटिंग के दौरान नागरिकता बिल पर बात करते हुए कहा कि संविधान की रक्षा उसपर अमल करने से होगी सिर्फ बात करने से नहीं जब भारत का संविधान पंथ निरपेक्ष है और उसमें न्याय की द्रष्टि में सबको समान माना गया है तो उसमें धर्म के नाम पर फर्क करना गैर संवैधानिक और संविधान की मूल भावना के विपरीत है।
उन्होंने कहा कि अभी नागरिकता बिल पर जिस तरह की बात हो रही है उससे ऐसा महसूस होता है कि यह बिल राजनीत से प्रेरित है सरकार को इसपर विचार करना चाहिए क्योंकि धर्म के नाम पर भेद करना भारत के संविधान के खिलाफ काम होगा ।
हैदराबाद में डॉक्टर प्रियंका रेड्डी के साथ हुई घिनौनी घटना पर बात करते हुए कहा कि देश में बलात्कार किसी भी सख्त कानून बना देने से नहीं रुकेंगे हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि सख्त कानून भी आवश्यक है लेकिन इसके लिए इस तरह के मामले में एक महीने के भीतर सजा का प्रावधान आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि सरकार को इसके लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट में यह मुकदमे चला कर एक माह में फैसले की व्यवस्था करनी चाहिए वहीं उन्होंने यह भी कहा कि यह संपूर्ण रूप से रोकने के लिए सरकार को सबसे पहले पूरे देशें में पूर्ण शराबबंदी लागू करनी चाहिए,वहीं अन्य प्रकार के सभी नशे जिसमें ध्रूम पान भी शामिल है सब पर रोक लगनी चाहिए,वहीं समाज को बेहतर बनाया जाना चाहिए ,जो शिक्षा के बिना संभव नहीं है।
पैगम्बर ने एक आदर्श समाज की स्थापना की जिसका परिणाम यह हुआ कि लोगों में कानून का भय कानून की इज्जत के साथ आया वहीं लोग दूषित सोच से पाक रहे ,क्योंकि बलात्कार जहां एक जघन्य कृत्य है वहीं एक दूषित मानसिकता का परिणाम है हमें मानसिकता और इस घिनौने विचार पर रोक लगानी है और इसके लिए व्यापक अभियान चलाना है ताकि बलात्कारी सोच को समाप्त किया जा सके।
बैठक में बाबरी मस्जिद मामले में दायर की गई पुनर्विचार याचिका पर भी बात हुई और बोर्ड अध्यक्ष ने साफ कर दिया कि हमारा काम दिल जीतना है ,हम अपना काम कर रहे हैं हम इस मामले के पक्षकार नहीं लिहाज़ा हम आम मुसलमानों की तरह अदालत के फैसले का सम्मान करते हैं।
By: Yunus Mohani