अफवाहें आग लगा रही हैं और नफरत जानें ले रही हैं : सय्यद मोहम्मद अशरफ

15 जुलाई/ खुंजा राजस्थान

अफवाहें आग लगा रही हैं और नफरत जाने ले रही है, यह बात एक जलसे को खिताब करते हुए वर्ल्ड सूफी फोरम एवम आल इंडिया उलमा व मशाइख़ बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने कही, उन्होंने कर्नाटक में गूगल के इंजीनियर मोहम्मद आज़म की एक अफवाह के चलते भीड़ के ज़रिए हत्या पर बोलते हुए कहा कि मुल्क खतरनाक दौर से गुज़र रहा है, सोशल मीडिया जहां एक ताक़तवर ज़रिया है अपनी बात रखने का, नफरत के सौदागरों ने उसे हथियार बना लिया है।
उन्होंने कहा कि अब वक़्त अा गया है सरकार को फौरन कोई ऐसा तरीका अपनाना होगा जिससे यह प्लेटफार्म भी बच जाए और वैचारिक आतंकी इसे अपना हथियार भी न बना सके।हज़रत ने कहा, बच्चा चोरी के इल्जाम में एक पढ़े लिखे इंसान को वहशी भीड़ मार देती है, यह कैसा समाज हमने बना दिया है, क्या यही विकास का मॉडल है ?

हज़रत ने कहा कि क़ुरआन में अल्लाह ने फरमाया कि" ईमान वालों जब तुम्हारे पास कोई खबर आए तो उसकी खूब तहक़ीक़ कर लिया करो "लिहाजा यही उसूल है कि किसी बात को मान लेने से पहले उसकी तहकीक ज़रूरी है आज लोग बिना तहक़ीक़ के हर बात को सच मान कर नफरत की आग में बेगुनाहों की जान लेने पर तुले हैं।

उन्होंने कहा, कहीं दलित, कहीं मुस्लिम कहीं महिलाएं नफरत का शिकार हो रही हैं,ऐसे में हुकूमत की ज़िम्मेदारी बनती है कि वह ऐसे इंतज़ाम करे जिससे वैचारिक आतंकी कामयाब न होने पाए, हज़रत ने शदीद ग़म और ग़ुस्से का इजहार करते हुए कहा कि एक तरफ पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में ज़हरीली सोच के मालिक बम धमाके कर बेगुनाहों की जान ले रहे हैं, और हमारे मुल्क में अफवाह को बम की शक्ल में इस्तेमाल कर बेगुनाहों की जान ली जा रही है, हम इसकी सख्त मज़म्मत करते हैं और अहले अमन से अपील करते हैं कि लामबंद होकर नफरत की आंधियों के खिलाफ खड़े हो जाइए, मोहब्बत के चिराग का मुहाफिज़ खुदा है।

By: यूनुस मोहानी

अलग देश की बात करने वाले मुसलमानों के दुश्मन : सय्यद मोहम्मद अशरफ

10 जुलाई/लखनऊ “अलग देश की बात करने वाले मुसलमानों के दुश्मन” यह बात वर्ल्ड सूफी फोरम एवम् आल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने कश्मीर के मुफ्ती नसीरुल इस्लाम के उस बयान पर कही जिसमें मुफ्ती ने कहा था कि अगर भारत सरकार शरीयत अदालत नहीं दे सकती तो मुसलमानों को अलग देश दे दिया जाए। हज़रत ने कहा कि ये मुसलमानों के साथ दुश्मनी निभाना है न की उनकी हिमायत करना क्योंकि हम हिन्दुस्तानी मुसलमान अपने मुल्क से मोहब्बत करने वाले हैं, हमने जिन्ना का भी विरोध किया और ऐसे लोगों का भी हम कड़ा विरोध करते हैं।
उन्होंने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने बेवक्त की शहनाई बजाई है और नादान लोग इसकी धुन को नफरत का राग बना रहे हैं जबकि दारुलक़जा को समाधान केंद्र के तौर पर आप बिना हमारे मुल्क के कानून और संविधान से टकराए बिना बना सकते हैं तो इसमें इतना शोर मचाने का क्या मतलब है?
हज़रत ने यह सवाल भी पूछा कि बोर्ड ने इस वक़्त क्यों यह बात शुरू की जबकि ऐसी कोई दिक्कत है नहीं, उन्होंने कहा कि इसमें सियासत की बू अा रही है, मुल्क के मुसलमान हरगिज़ ऐसी बेबुनियाद बातो के साथ नहीं है और हम  बेबुनियाद बयानबाज़ी की कड़ी निन्दा करते हैं और देश बांटने की बात करने वालो से मुसलमानों को होशियार रहने की अपील करते है ।
 By:
यूनुस मोहानी

मज़हब के नाम पर मौत का कारोबार बर्दाश्त नहीं, आतंकी क़ायर हैं : सय्यद मोहम्मद अशरफ

मॉरीशस /2 जुलाई

मज़हब के नाम पर मौत का कारोबार बर्दाश्त नहीं, आतंकी क़ायर हैं, यह बात वर्ल्ड सूफी फोरम के चेयरमैन व आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड के संस्थापक, अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने अफगानिस्तान में सिख समुदाय पर किए गए आतंकी हमले पर अफसोस जताते हुए कही।
उन्होंने कहा कि आतंकी क़ायरों की बहकी हुईं भीड़ का हिस्सा हैं जो मज़हब का चोला ओढ़ कर बेगुनाह लोगों को शिकार बना रहे हैं, हज़रत ने कहा कि हम इसकी घोर निन्दा करते हैं और सिर्फ निन्दा ही नहीं करते हैं बल्कि दुनिया के सभी अमन पसन्द लोगों  से अपील करते हैं कि आतंक के विरूद्ध धर्म क्षेत्र और जाति का भेद भूल कर खड़े हो जाईए, हमें इस नासूर को समाज से मिटाना ही होगा वरना कोई सुरक्षित नहीं है।
हज़रत ने कहा, दुनिया को नफरत से लड़ने के लिए मोहब्बत का हथियार उठाना होगा क्योंकि बारूद से लगी आग को बारूद से नहीं बुझाया जा सकता, सबको आपस में मोहब्बत करनी होगी और ज़ुल्म से नफरत चाहे वह कहीं भी हो किसी पर भी हो, हमें इसमें दोहरा रवैया नहीं अपनाना चाहिए ।
उन्होंने कहा, हमारी सारी संवेदनाएं उन मज़लूमों के साथ हैं जो इस क़ायराना हमले का शिकार हुए, हम उनके परिवार वालों के लिए सब्र की दुआ करते हैं और जो लोग घायल है जल्द से जल्द उनके स्वस्थ होने की इश्वर से प्रार्थना करते हैं।
हज़रत ने लोगों से मुखातिब होते हुए कहा कि याद रखिए नफरत का इलाज सिर्फ मोहब्बत है अगर आप अमन कायम करना चाहते हैं तो मजलूम के साथ खड़े हो जाईए और ज़ालिम का पुरजोर विरोध कीजिए चाहे वो ज़ालिम कोई भी हो।

By: यूनुस मोहानी

हैवान का समाज में कोई स्थान नहीं, फास्ट ट्रैक में चले मुकदमा,फांसी हो : सय्यद आलमगीर अशरफ

सलोन /29 जून ,”हैवान का समाज में कोई स्थान नहीं,फास्ट ट्रैक में चले मुकदमा फांसी हो” यह बात खैरहा में जलसे को संबोधित करते हुए आल इन्डिया उलेमा व माशाइख़ बोर्ड यूथ के राष्ट्रीय अध्यक्ष हज़रत मौलाना सय्यद आलमगीर अशरफ किछौछवी ने कही।

उन्होंने कहा, अगर हैवानों को समाज में खुला छोड़ा गया तो वह दिन दूर नहीं जब मुल्क की पहचान रेपिस्तान के तौर पर होगी ,उन्होंने कहा कि हैवान की पहचान मजहब की बुनियाद पर नहीं की जानी चाहिए बल्कि उसे सिर्फ दरिंदे के तौर पर देखा जाना चाहिए क्योंकि कोई भी मजहब इस तरह के घिनौने और आपराधिक कामो की इजाज़त नहीं देता।

हज़रत ने कहा कि हम हुकूमत से मांग करते हैं कि फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चला कर दरिंदे को 3 माह के भीतर फांसी पर लटका दिया जाए मजहबे इस्लाम में बलात्कारी की जैसी सज़ा का प्रावधान है अगर वैसी सजा दी जाय तो इस तरह की दरिंदगी पर रोक लग सकती है।
उन्होंने कहा कि बलात्कारियों की किसी भी सभ्य समाज में कोई जगह नहीं है इनका हर स्तर पर बहिष्कार किया जाना चाहिए और इस पर सांप्रदायिक राजनीत नहीं की जानी चाहिए। मौलाना ने कहा कि हम सब पीड़िता के साथ हैं क्योंकि मजहब यही सिखाता है कि मजलूम का साथ दो और ज़ालिम के खिलाफ खड़े हो उन्होंने कहा कि हम दरिंदे को फांसी दिलवाने के लिए भरसक प्रयास करेंगे ताकि हमारी और बहन बेटियां महफूज़ रह सके और दरिंदगी की शिकार हमारी बच्ची को इंसाफ मिल सके।

By: यूनुस मोहानी

World Sufi Forum and AIUMB congratulate Turkish President Recep Tayyip Erdogan for his Re-election

New Delhi, June 27
Founder of World Sufi Forum and AIUMB President Hazrat Syed Ashraf Kichchauchwi has sent a letter of felicitation to Turkish President Recep Tayyip Erdogan for his historic re-election in the Turkish presidential election.
In the letter, AIUMB President has congratulated the Turkish President and said that, this victory belongs to the peoples of the friendly nation of Turkey. The Turkish people have strengthened the hand of the re-elected President Recep Tayyip Erdogan by voting in favour of the President Erdogan.
“We hope that under the dynamic leadership of President Erdogan, Turkey will move ahead towards peace, progress and prosperity”, he said.
“We are praying for the long life, good health and constant success for the Turkish President Recep Tayyip Erdogan”, he said.

संसार में संगठित आतंकवाद के पहले शिकार हैं हज़रत अली- मौलाना अब्दुल मोईद अज़हरी

6 जून/ नई दिल्ली

“संसार में संगठित आतंकवाद के पहले शिकार हैं हज़रत अली” यह बात आल  इंडिया उलमा व माशाईख बोर्ड यूथ के जनरल सेक्रेटरी मौलाना अब्दुल मोईद अजहरी ने बोर्ड के केन्द्रीय कार्यालय में हज़रत अली अलैहिस्सलाम की शहादत के मौक़े पर आयोजित कार्यक्रम ‘द फर्स्ट विक्टिम ऑफ टेररिज्म हज़रत अली ‘ में बोलते हुए कही।

मौलाना ने कहा कि हज़रत अली अलैहिस्सलाम की शहादत दुनिया की तारीख में संगठित आतंकवाद की पहली घटना है उसके बाद से आतंकी संगठन अमन के दुश्मन बनकर अलग अलग रूप में नजर आते रहे हैं लेकिन इंसानी तारीख में कोई और घटना हज़रत अली की शहादत से पहले इस तरह की नहीं मिलती जहां वैचारिक आतंकवाद ने संगठित होकर हमला किया हो और जान का नुक़सान किया हो हालांकि पहले भी लोगों को क़त्ल किया गया है लेकिन वह संगठित आतंकवाद की श्रेणी में नहीं आता ।

कार्यक्रम में बोलते हुए गुलाम रसूल देहलवी ने कहा कि आतंकवाद के पहले दस्ते का नाम खारजी है और फिर इसका नाम हर दौर में बदलता रहा, कभी ये नासबी बनकर आया कभी यजीदी और इस वक़्त दाईश के रूप में दुनिया के लिए चुनौती बना हुआ है। उन्होंने कहा कि हज़रत अली की शहादत अमन पर हमला था, न्याय के शासन में अपराधियों का दम घुट रहा था तो उन्होंने संगठित होकर आतंकी साजिश रची और इब्ने मुलजिम नाम के नौजवान ने हज़रत अली पर आत्मघाती हमला किया और आपको शहीद किया, इस तरह पहला आत्मघाती आतंकवादी हमला हज़रत अली पर किया गया, आत्मघाती इसलिए क्योंकि मस्जिद के अंदर हमले के बाद इब्ने मुलजिम को पता था कि वह पकड़ा जायेगा और मार दिया जायेगा।

पंडित श्री देव शर्मा जी ने कहा कि हज़रत अली अमन के पैरोकार थे और अमन के दुश्मन ने हज़रत अली को शहीद किया, आज दुनिया में खून खराबा हो रहा है वह उसी विचारधारा की देन है जो हज़रत अली की दुश्मन थी लोगों, को इस सोच से बचना चाहिए ।

आल  इंडिया उलमा व माशाईख बोर्ड के ऑफिस सेक्रेटरी जनाब यूनुस मोहानी ने कहा कि हज़रत अली ने फरमाया कि ‘अगर तुम्हे कोई इंसान छोटा नजर आता है तो इसका यह मतलब है कि या तो तुम उसे दूर से देख रहे हो या फिर गुरूर से, हज़रत अली अलैहिस्सलाम की यह बात अगर समझ जाएं तो सामाजिक न्याय के लिए संघर्ष की आवश्यकता नहीं बचती।उन्होंने विश्व पर्यावरण दिवस को हज़रत अली से जोड़ते हुए कहा कि हज़रत अली पर्यावरण प्रेमी थे उन्होंने रेगिस्तान में खजूर के बागों की श्रंखला बना दी और उसे लोगों के लिए वक्फ कर दिया हज़रत अली दुनिया के पहले इंसान हैं जिन्हें आत्मघाती आतंकवादी हमले के जरिए शहीद किया गया।

कार्यक्रम का आग़ाज़ हाफिज मोहम्मद हुसैन शेरानी ने क़ुरआन पाक की तिलावत से किया और निज़ामत की ज़िम्मेदारी मौलाना अंजर अल्वी ने निभाई, जनाब सुहैल रिज़वी  ने भी अपने विचार रखे, सभा के अंत में हज़रत अली की नज़र हुईं और मुल्क एवम दुनिया में शांति की दुआ की गई।

AIUMB statement on Kasmir Ceasefire: Need for complete cessation of violence

President of All India Ulama & Mashaikh Board (AIUMB), Hazrat Sayed Ashraf Kichchauchwi, during a day-long meeting at a branch of the Board, has welcomed the Centre’s decision to stop operation of security forces in Jammu & Kashmir during the holy month of Ramazan.

Hazrat stressed that people in Jammu and Kshmir are tired of continuous clashes between the militants and the military in several parts of the region. “Therefore, nothing could be better than prevalence of peace and security during the holy month of Ramazan”, he said.

He added saying: “For this noble peace cause to be achieved, the holy month of Ramazan is the best occasion. It is harbinger of goodwill, bonhomie and harmony.” Hazrat ardently appealed to both the state and the people for extending their sincere cooperation in establishment of peace in the region by all possible means.

The AIUMB President stressed the need for complete cessation of violence in every part of the country. He also appealed to the Government of India to take concrete initiatives for finding a long-lasting solution to the issues and conflicts like Kashmir.

 

By: Ghulam Rasool Dehlvi

सियासी तूफ़ान है संभल कर रहिये तालीमी इदारे ज़द में हैं : सय्यद मोहम्मद अशरफ

8 मई /धर्मसिंहवां, संतकबीर नगर

“सियासी तूफ़ान है संभल कर रहिये तालीमी इदारे ज़द में हैं “यह बात वर्ल्ड सूफी फोरम एवं आल इन्डिया उलमा व मशाइख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने कही, उन्होंने कहा कि पूरे देश में जिस तरह से हालात बने हुए हैं और हम अपनी नासमझियों की वजह से जिस तरह उनका शिकार हो रहे हैं अब हमें होशियार होना होगा. अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में चल रहे हंगामे पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि अब तालीमी इदारे सियासत के तूफ़ान की ज़द में हैं, मदरसे से लेकर यूनिवर्सिटी तक स्कूल से लेकर कॉलेज तक हर जगह सियासत की घिनौनी चाल चली जा रही है, ऐसे में हमें अपने ज़हनो को खोल कर सब्र और अक्ल से काम लेना है और हरगिज़ देश को तोड़ने वाली ताक़तों को कामयाब नहीं होने देना है .

हज़रत ने कहा कि यह वक़्त इम्तेहानो का है और नौजवान आन्दोलन कर रहे हैं, यह हमारी नाकामयाबी है दूसरों के फेंके हुए जाल में हम फंसे हुए हैं ऐसे में हमें जोश से नहीं होश से काम लेना है ताकि हम अपने मकसद यानि तालीम हासिल करने में पूरी तरह कामयाब हो जाएँ और हम जब तालीम हासिल कर लेंगे तो हमें कोई अपने जाल में आसानी से नहीं फंसा सकेगा.

उन्होंने कहा, अपने मिशन से न हटना और उस पर लगे रहना जीत है और यही तरीका हमें सूफिया की ज़िन्दगी में मिलता है, उन्होंने मुश्किलात के बावजूद अपना काम किया और कामयाब हुए, हमे भी चाहिए कि औलिया के दर से वाबिस्ता रहें और मुश्किलों के बावजूद भी अपने काम पर डंटे रहें, मोहब्बत को आम करना हमारा काम हैं, नफरत को खतम कर देना हमारी ज़िम्मेदारी है, कैंपस में हरगिज़ नफरतों को पनपने न दें यही हमारी जीत है और यही मुल्क की तरक्की का रास्ता भी है.

By: यूनुस मोहानी

समाज में हैवानों के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए : सय्यद आलमगीर अशरफ

नागपुर,20 अप्रेल

रोजाना जिस तरह रेप (बलात्कार) की घटनाए हो रही है उससे पूरा मुल्क परेशान है हर तरफ से इंसाफ के लिये पब्लिक प्रदर्शन एहतिजाज (protest) कर रही है देश में बलात्कारियो के खिलाफ सख्त से सख्त कानून बनाने की अपील कर रही है हालांकि सरकार ने इस ओर पहल की है पूरे मुल्क में प्रदर्शन हो रहे हैं न कि सिर्फ मुल्क में बल्कि विदेशों में भी इस मसले पर बड़ी किरकिरी हुई है

इसी सिलसिले में 20 अप्रेल 2018 शाम 7 बजे नूरी मेहबुबिया जामा मस्जिद पीलीनदी नागपुर में आल इंडिया उलमा मशाइख बोर्ड और अशरफी ग्रुप की जानिब से पुर अमन कैंडल मार्च का एहतेमाम किया गया जुलूस मस्जिद से निकल कर इलाके से होता हुवा मस्जिद पर ही खत्म हुआ जुलूस की कयादत आल इंडिया उलेमा मशायख़ बोर्ड यूथ के राष्ट्रीय अध्यक्ष हज़रत मौलाना सय्यद आलमगीर अशरफ किछौछवी ने की उन्होंने इस अवसर पर कहा कि समाज में हैवानों के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए ,बेटियों की अस्मत लूटने वालों को साज़ाए मौत दी जानी चाहिए ताकि लोगों के दिलों में ऐसा हैवानों वाला क़दम उठाने से पहले एक खौफ रहे ।
उन्होंने कहा मजलूम उसके मजहब की बिना पर नहीं देखा जाना चाहिए वह जिस भी धर्म का हो इससे कोई मतलब नहीं।
अगर समाज ज़ालिम और मजलूम का परीक्षण उसके धर्म के आधार पर करेगा तो न्याय नहीं किया जा सकता ।
उन्होंने कहा देश जिस तरह एकजुट होकर जालिमों के खिलाफ खड़ा हुआ है यह ही हमारे मुल्क की ताकत है और हमें इसे और मजबूत करना है।
हज़रत ने कहा सरकार से हमारा मुतालबा है कि रेप के मुजरिमों को साजाए मौत देने वाला कानून जल्द से जल्द बनाए और फास्ट ट्रैक कोर्ट में रेप के मुक़दमे की सुनवाई हो।
प्रदर्शन में मुख्य रूप से हाफ़िज़ अख़्तर आलम अशरफी,मोहम्मद रियाज़ अशरफी,तौफीक अंसारी, राजा भाई,इम्तियाज़ अशरफी समेत सैकड़ों लोग शामिल हुए प्रदर्शन में युवाओं ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया ।

 

By: Yunus Mohani

AIUMB ने बलात्कारियों को फांसी की सज़ा देने के लिए राष्ट्रीय सहमति बनाने की मांग की!

13 अप्रैल 2018
कठुआ जिले में आठ वर्षीय निर्दोष लड़की की बलात्कार और हत्या की निंदा करते हुए, सूफी मुस्लिमों की सर्वोच्च संस्था, आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड ने अपराधियों को फांसी की सजा के लिए राष्ट्रीय सहमति बनाने की मांग की है।
AIUMB के राष्ट्रीय सचिव शाह हसन जामी ने कहा, “यह ‘मृत्यु दंड’ से कम नहीं होना चाहिए जो जानवरों की तरह किये गए इस वहशी और अमानवीय क्रूरता के लिए उपयुक्त है”। उन्होंने आगे कहा कि सरकार को बढ़ते हुए बलात्कार के अपराध को रोकने के लिए एक “नया कानून” लाना चाहिए।
आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड के संयुक्त सचिव व अजमेर शरीफ के गद्दीनशीन सय्यद सलमान चिश्ती ने कहा: “भारत में यौन उत्पीड़न (पास्को ) अधिनियम, में 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के साथ बलात्कार के लिए मौत की सजा पर एक संशोधन अनिवार्य है, क्योंकि भारत में बलात्कार की कई क्रूर घटनाएं हुईं जहां पीड़ितों में ज्यादातर लड़कियां थीं,” ।
इस त्रासदी के महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए, वर्ल्ड सूफी फोरम के प्रवक्ता, लेखक और मीडिया सह-समन्वयक, गुलाम रसूल देहलवी ने कहा: “असिफा की क्रूर बलात्कार और बेरहम हत्या-एक भारतीय बेटी के साथ किये गए भयानक अपराध के तौर पर देखा जाना चाहिए हमारी आँखें खुलनी चाहिए मगर सावधान! इसे देश में हिन्दू मुस्लिम मानसिकता के रूप में चित्रित नहीं किया जाना चाहिए। यदि कोई मुस्लिम, हिंदू, दलित या किसी अन्य धर्म, पंथ या जाति का शिकार हो, तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। “अपराध उतना ही संगीन और निंदनीय रहेगा।
श्री देहलवी ने कहा: “कुछ ऐसे लोग हैं जो निर्दोष असिफा के साथ हुई बर्बरता को इस तरह देख रहे हैं कि क्योंकि वह मुस्लिम बेटी हैं, गुर्जर और बकरवाल आदिवासी समुदाय से संबंधित हैं। हालाँकि किसी भी भारतीय नागरिक के लिए जो इस भयानक विकास से ईमानदारी से चिंतित हैं, उसे कोई फर्क नहीं पड़ता- मुस्लिम या हिंदू हमें जो चिंता है, वह झूठी धार्मिक पहचान के भेस में क्रूरता और उत्पीड़न है और धर्म के आधार पर किसी भी विभाजन से ऊपर उठने वाले सभी पीड़ितों के लिए न्याय कि मांग होनी चाहिए। कठुआ की 8 वर्षीय मुस्लिम लड़की और उन्नाव की 18 वर्षीय हिंदू लड़की, क्रूरता की प्रकृति रखने वाले ‘अमानवीय’ पुरुषों की शिकार हुई हैं। वे एक सभ्य समाज का हिस्सा नहीं थे हमें उनके भारतीय होने की वजह खुद को शर्मिंदा महसूस करना चाहिए। हालांकि, भारत में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की भावना को ट्रिगर नहीं करना चाहिए। ”
उन्होंने कहा: “प्रधान मंत्री ने देश को आश्वासन दिया है कि कोई अपराधी बख्शा नहीं जाएगा और” हमारी बेटियों को निश्चित रूप से न्याय मिलेगा”, हमें देखना होगा कि क्या पूरा न्याय दिया जाएगा। और यह केवल तभी संभव है जब बलात्कार के अपराधियों को मृत्यु के लिए फांसी दी जाती है”।
इस संबंध में, aiumb के कार्यवाहक सचिव और एक वरिष्ठ पत्रकार श्री यूनुस मोहानी ने एक चुभता हुआ सवाल उठाया। उन्होंने पूछा: “क्या यह ‘न्यू इंडिया’ ‘उदार और प्रगतिशील’ लोगों से संबंधित है, जो लंबे समय तक अपने समाज में ऐसे घिनौने अपराधों को देख रहे हैं, और अब लगभग एक दैनिक आधार पर?” उन्होंने कहा क्योंकि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में भी कहा है”, “हमें समझ में नहीं आता हैं कि आरोपी को गिरफ्तार करने की बजाय पुलिस ने क्यों शिकायतकर्ता को पहले गंभीर मामलों के संबंध में गिरफ्तार किया है।

By: Ghulam Rasool Dehalvi