समाज में हैवानों के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए : सय्यद आलमगीर अशरफ

नागपुर,20 अप्रेल

रोजाना जिस तरह रेप (बलात्कार) की घटनाए हो रही है उससे पूरा मुल्क परेशान है हर तरफ से इंसाफ के लिये पब्लिक प्रदर्शन एहतिजाज (protest) कर रही है देश में बलात्कारियो के खिलाफ सख्त से सख्त कानून बनाने की अपील कर रही है हालांकि सरकार ने इस ओर पहल की है पूरे मुल्क में प्रदर्शन हो रहे हैं न कि सिर्फ मुल्क में बल्कि विदेशों में भी इस मसले पर बड़ी किरकिरी हुई है

इसी सिलसिले में 20 अप्रेल 2018 शाम 7 बजे नूरी मेहबुबिया जामा मस्जिद पीलीनदी नागपुर में आल इंडिया उलमा मशाइख बोर्ड और अशरफी ग्रुप की जानिब से पुर अमन कैंडल मार्च का एहतेमाम किया गया जुलूस मस्जिद से निकल कर इलाके से होता हुवा मस्जिद पर ही खत्म हुआ जुलूस की कयादत आल इंडिया उलेमा मशायख़ बोर्ड यूथ के राष्ट्रीय अध्यक्ष हज़रत मौलाना सय्यद आलमगीर अशरफ किछौछवी ने की उन्होंने इस अवसर पर कहा कि समाज में हैवानों के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए ,बेटियों की अस्मत लूटने वालों को साज़ाए मौत दी जानी चाहिए ताकि लोगों के दिलों में ऐसा हैवानों वाला क़दम उठाने से पहले एक खौफ रहे ।
उन्होंने कहा मजलूम उसके मजहब की बिना पर नहीं देखा जाना चाहिए वह जिस भी धर्म का हो इससे कोई मतलब नहीं।
अगर समाज ज़ालिम और मजलूम का परीक्षण उसके धर्म के आधार पर करेगा तो न्याय नहीं किया जा सकता ।
उन्होंने कहा देश जिस तरह एकजुट होकर जालिमों के खिलाफ खड़ा हुआ है यह ही हमारे मुल्क की ताकत है और हमें इसे और मजबूत करना है।
हज़रत ने कहा सरकार से हमारा मुतालबा है कि रेप के मुजरिमों को साजाए मौत देने वाला कानून जल्द से जल्द बनाए और फास्ट ट्रैक कोर्ट में रेप के मुक़दमे की सुनवाई हो।
प्रदर्शन में मुख्य रूप से हाफ़िज़ अख़्तर आलम अशरफी,मोहम्मद रियाज़ अशरफी,तौफीक अंसारी, राजा भाई,इम्तियाज़ अशरफी समेत सैकड़ों लोग शामिल हुए प्रदर्शन में युवाओं ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया ।

 

By: Yunus Mohani

AIUMB ने बलात्कारियों को फांसी की सज़ा देने के लिए राष्ट्रीय सहमति बनाने की मांग की!

13 अप्रैल 2018
कठुआ जिले में आठ वर्षीय निर्दोष लड़की की बलात्कार और हत्या की निंदा करते हुए, सूफी मुस्लिमों की सर्वोच्च संस्था, आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड ने अपराधियों को फांसी की सजा के लिए राष्ट्रीय सहमति बनाने की मांग की है।
AIUMB के राष्ट्रीय सचिव शाह हसन जामी ने कहा, “यह ‘मृत्यु दंड’ से कम नहीं होना चाहिए जो जानवरों की तरह किये गए इस वहशी और अमानवीय क्रूरता के लिए उपयुक्त है”। उन्होंने आगे कहा कि सरकार को बढ़ते हुए बलात्कार के अपराध को रोकने के लिए एक “नया कानून” लाना चाहिए।
आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड के संयुक्त सचिव व अजमेर शरीफ के गद्दीनशीन सय्यद सलमान चिश्ती ने कहा: “भारत में यौन उत्पीड़न (पास्को ) अधिनियम, में 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के साथ बलात्कार के लिए मौत की सजा पर एक संशोधन अनिवार्य है, क्योंकि भारत में बलात्कार की कई क्रूर घटनाएं हुईं जहां पीड़ितों में ज्यादातर लड़कियां थीं,” ।
इस त्रासदी के महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए, वर्ल्ड सूफी फोरम के प्रवक्ता, लेखक और मीडिया सह-समन्वयक, गुलाम रसूल देहलवी ने कहा: “असिफा की क्रूर बलात्कार और बेरहम हत्या-एक भारतीय बेटी के साथ किये गए भयानक अपराध के तौर पर देखा जाना चाहिए हमारी आँखें खुलनी चाहिए मगर सावधान! इसे देश में हिन्दू मुस्लिम मानसिकता के रूप में चित्रित नहीं किया जाना चाहिए। यदि कोई मुस्लिम, हिंदू, दलित या किसी अन्य धर्म, पंथ या जाति का शिकार हो, तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। “अपराध उतना ही संगीन और निंदनीय रहेगा।
श्री देहलवी ने कहा: “कुछ ऐसे लोग हैं जो निर्दोष असिफा के साथ हुई बर्बरता को इस तरह देख रहे हैं कि क्योंकि वह मुस्लिम बेटी हैं, गुर्जर और बकरवाल आदिवासी समुदाय से संबंधित हैं। हालाँकि किसी भी भारतीय नागरिक के लिए जो इस भयानक विकास से ईमानदारी से चिंतित हैं, उसे कोई फर्क नहीं पड़ता- मुस्लिम या हिंदू हमें जो चिंता है, वह झूठी धार्मिक पहचान के भेस में क्रूरता और उत्पीड़न है और धर्म के आधार पर किसी भी विभाजन से ऊपर उठने वाले सभी पीड़ितों के लिए न्याय कि मांग होनी चाहिए। कठुआ की 8 वर्षीय मुस्लिम लड़की और उन्नाव की 18 वर्षीय हिंदू लड़की, क्रूरता की प्रकृति रखने वाले ‘अमानवीय’ पुरुषों की शिकार हुई हैं। वे एक सभ्य समाज का हिस्सा नहीं थे हमें उनके भारतीय होने की वजह खुद को शर्मिंदा महसूस करना चाहिए। हालांकि, भारत में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की भावना को ट्रिगर नहीं करना चाहिए। ”
उन्होंने कहा: “प्रधान मंत्री ने देश को आश्वासन दिया है कि कोई अपराधी बख्शा नहीं जाएगा और” हमारी बेटियों को निश्चित रूप से न्याय मिलेगा”, हमें देखना होगा कि क्या पूरा न्याय दिया जाएगा। और यह केवल तभी संभव है जब बलात्कार के अपराधियों को मृत्यु के लिए फांसी दी जाती है”।
इस संबंध में, aiumb के कार्यवाहक सचिव और एक वरिष्ठ पत्रकार श्री यूनुस मोहानी ने एक चुभता हुआ सवाल उठाया। उन्होंने पूछा: “क्या यह ‘न्यू इंडिया’ ‘उदार और प्रगतिशील’ लोगों से संबंधित है, जो लंबे समय तक अपने समाज में ऐसे घिनौने अपराधों को देख रहे हैं, और अब लगभग एक दैनिक आधार पर?” उन्होंने कहा क्योंकि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में भी कहा है”, “हमें समझ में नहीं आता हैं कि आरोपी को गिरफ्तार करने की बजाय पुलिस ने क्यों शिकायतकर्ता को पहले गंभीर मामलों के संबंध में गिरफ्तार किया है।

By: Ghulam Rasool Dehalvi

Kathua Rape Crime: AIUMB Calls for a National Consensus for Exemplary Punishment for the Culprits

13 April 2018

Harshly condemning the rape and murder of the eight-year-old innocent girl in Kathua district, All India Ulama & Mashaikh Board (AIUMB), an apex body of Sufi Muslims in India is calling for a national consensus for exemplary punishment for the culprits.
“It should be nothing short of a ‘death penalty’ which is only fitting for this insane and inhuman brutality of the beasts”, said Syed Hasan Jamee, the national secretary of the AIUMB. He further said that the government should bring a “new law” on the rising rape crimes.
Syed Salman Chishty, the Joint Secretary of All India Ulama & Mashaikh Board and the hereditary custodian of the Ajmer Sharif said:
“An amendment in the Protection of Children from Sexual Offences (POCSO) Act on death penalty for rape of children below 12 years of age is mandatory after India has witnessed several brutal incidents of the rapes where the victims were mostly minor girls”, he added.
Highlighting the crucial aspects of this tragedy, the World Sufi Forum’s spokesperson, writer and media co-coordinator, Ghulam Rasool Dehlvi stated: “The brutal rape and merciless murder of Asifa—a minor Indian child—should open our eyes. But beware! It should not be painted as Muslim victimhood mentality in the country. It doesn’t make any difference if the victim is Muslim, Hindu, Dalit or of any other faith, creed or caste.”
Mr. Dehlvi continued: “There are a few people who are flogging off the narrative that the innocent Asifa was victimized because she was a Muslim’s daughter, besides belonging to the tribal community of Gujjar and Bakarwal. But for any Indian citizen sincerely concerned with this ghastly development, it makes no difference—being Muslim or Hindu. What worries us is the brutality and oppression in the disguise of the false religious identity and what concerns us the breaking of silence for all victims rising above any division on the basis of religion. Both the 8-year Muslim girl of Kathua and the 18-year old Hindu girl of Unnao were victims of the ‘inhuman’ men of the beastly nature. They were not part of a civilized society. We must feel ashamed of them being Indians. However, it should not trigger any sense of communal polarization in India.”
He added saying: “Though the Prime Minister has assured the country that no culprit will be spared and that “Our daughters will definitely get justice”, we have to watch if the complete justice would be delivered. And that is only possible when the rape criminals are hanged to death”.
In this regard, the officiating secretary of the AIUMB and a veteran journalist, Mr. Yunus Mohani posed a hard-hitting question. He asked: “Is this the newfound narrative of “New India” belonging to the ‘liberal and progressive’ people who have been witnessing such heinous crimes in their society for long, and now almost on a daily basis?”
“We fail to understand why the Investigating Agency instead of arresting the accused persons, arrests the complainant first in connection with such serious cases, as the Allahabad High Court has also asked in its order”, he averred.

By: Ghulam Rasool Dehalvi

अयोध्या मुद्दे का समाधान केवल बातचीत से: सय्यद मोहम्मद अशरफ

नौतनवा: 1 April 2018
भारत नेपाल सीमा पर स्थित नौतनवा में आयोजित एक कार्यक्रम में शिरकत करने आये वर्ल्ड सूफी फोरम एवं ऑल इंडिया ओलेमा मशाइख बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष सैय्यद मोहम्मद अशरफ मियां कछौछवी ने कहा कि देश में अमन कायम रखने के लिए हम सभी को प्यार और मोहब्बत के साथ रहने की जरूरत है।
इस दौरान उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि आयोध्या मसले का हल केवल आपस मे बातचीत से हो सकता है, क्योंकि सियासतदानों ने अपना काम तो कर ही दिया है, अब हम हिंदुस्तान वासियों का काम बचा है और हमें अपनी जिम्मेदारियां निभाना चाहिए और बातचीत से इस मसले का हल निकालना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हम लोग मंदिर और मस्जिद की बात कर रहे है लेकिन इंसानी जिंदगी के बारे में नही कुछ कर रहे है, देश मे नफरत का माहौल बनाने से किसी चीज का हल नहीं निकल सकता इससे इंसानियत जरूर खतरे में पड़ेगी, हमारे मुल्क की गंगा जमुनी तहजीब जरूर खतरे में पड़ेगी और हमारी जो सुपर पावर बनने की रेस है कहीं इन्हीं वजहों से पीछे ना हो जाए इस लिए बातचीत से अयोध्या मसले का कोई न कोई हल निकल आएगा

सियासत ने अपना काम कर दिया है आग आपको बुझानी है : सय्यद मोहम्मद अशरफ

30 मार्च/ कोल्हिपुर महाराजगंज,
“सियासत ने अपना काम कर दिया है आग आपको बुझानी है ” ये बात वर्ल्ड सूफी फोरम एवम् आल इंडिया उलमा व मशायख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने एक जलसे को संबोधित करते हुए कही।
हज़रत ने कहा बिहार, बंगाल में जो कुछ चल रहा है अगर उसे वक़्त रहते नहीं रोका गया तो पूरा देश इसकी चपेट में आ जाएगा और मुल्क के लिए इससे बुरा कुछ नहीं होगा ,उन्होंने कहा जिस तरह लोग सड़कों पर धर्म बचाने निकल पड़े हैं अगर यह लोग धर्म का पालन कर लेते तो इनके हाथ में हथियार नहीं गुलाब के फूल होते।
सियासत अपनी घिनौनी चाल चल रही है और बेरोजगारों की भीड़ उनके इशारे पर नाच रही है नतीजा आगजनी पथराव हत्या लूट ,अगर लोगों ने जल्दी यह बात नहीं समझी तो देश का बड़ा नुक़सान होगा लिहाज़ा सरकारों की पहली ज़िम्मेदारी है कि वह हालात संभाले और निष्पक्षता के साथ कार्यवाही करते हुए दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दे।
हज़रत ने कहा लोगों को याद रखना चाहिए कि मंदिर और मस्जिद का फायदा तब है जब आप ज़िंदा हैं इंसान नहीं होगा तो इनका क्या फायदा और हम इंसान मार रहे हैं इन इबादतगाहों के लिए सामाजिक सदभावना को खतम करने की नापाक कोशिश की जा रही है ,गंगा जमुनी तहजीब को तार तार किया जा रहा है, ऐसे समय में जरूरत है ख्वाजा गरीब नवाज के मिशन पर काम किया जाए, मिशन यह है कि मोहब्बत सबके लिए नफरत किसी से नही अगर सब इसपर अमल कर लें तो इस आग को रोका सकता है।

By: Yunus Mohani

ख्वाजा ग़रीब नवाज़ की विचारधारा को मानने वाले ज़ालिम नहीं हो सकते : सय्यद मोहम्मद अशरफ

24 मार्च/ अजमेर
चिश्ती मंज़िल दरगाह अजमेर शरीफ में आल इन्डिया उलमा व मशाइख बोर्ड ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की जिसकी अध्यक्षता बोर्ड के संरक्षक हज़रत मौलाना सय्यद मेहदी मियाँ चिश्ती साहब ने की। उन्होंने कहा कि दुनिया में जिस तरह बारूद की बू फ़ैल गई है उसे वापिस खुशबूदार बनाने के लिए मोहब्बत वाली खुशबू चाहिए जो गरीब नवाज़ के दर के फूलों से आती है ।हज़रत ने कहा कि गरीब नवाज़ मिशन इंसानियत की सेवा है तड़पती हुई इंसानियत का इलाज गरीब नवाज़ ने किया और अबतक उनके मिशन पर चलने वाले यह काम कर रहे हैं।हज़रत ने सभी उर्स की मुबारकबाद दी। वर्ल्ड सूफी फोरम एवं आल इन्डिया उलमा व माशाइख़ बोर्ड के संस्थापक व अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि इस बारगाह से हमेशा मोहब्बत की तालीम मिली है, यहां लोगो को गले लगाना सिखाया जाता है, गला काटने की बात करने वालों का यहां से कोई वास्ता नहीं। इस बात से यह पहचान करना आसान है कि दहशतगर्द कौन हैं।
हज़रत ने कहा कि हम ख्वाजा के दर से इराक़ में दहशतगर्दों के ज़रिए भारतीय नागरिकों को क़त्ल किए जाने की कड़ी निंदा करते हैं साथ ही यह ऐलान फिर से करते हैं कि इन दहशतगर्दों का इस्लाम से कोई वास्ता नहीं, न सिर्फ इस्लाम बल्कि दुनिया के किसी भी धर्म से इनका ताल्लुक नहीं, क्योंकि मजहब मोहब्बत की तालीम देते हैं।
उन्होंने पूरी दुनिया के लोगों को उर्स गरीब नवाज़ की मुबारकबाद देते हुए कहा कि आईये गरीब नवाज़ के पैगाम “मोहब्बत सबके लिए नफरत किसी से नहीं” को आम करते हुए आपसी दूरियां मिटा दी जाए और देश में अमन की फिजा को और मजबूत किया जाए।
बोर्ड के राष्ट्रीय कार्यकारणी सदस्य हज़रत सय्यद अम्मार अहमद अहमदी उर्फ नय्यर मिंया ने कहा कि सूफिया की तालीम मज़लूम की हिमायत है न की ज़ुल्म करना, गरीब नवाज़ की बारगाह में असली हिन्दुस्तान दिखता है जहां बिना मजहब का फर्क किए, रंगो नसल का इम्तियाज़ किए बिना लोग मोहब्बत के साथ आते हैं और लंगर खाते हैं। उन्होंने कहा, गरीब नवाज़ की बारगाह में आकर वासुदेव कुटंबुकम की जो धारणा है वह दिखाई देती है।
बोर्ड के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव हाजी सय्यद सलमान चिश्ती ने सभी लोगों को ख्वाजा गरीब नवाज़ के 806 वे उर्स की मुबारकबाद दी और कहा कि आल इन्डिया उलमा व मशाइख बोर्ड हुज़ूर गरीब नवाज़ के मिशन को लेकर आगे चल रहा है, हम हर तरह की नफरत का कड़ा विरोध करते हैं, हमारा मिशन गरीब नवाज़ का मिशन है, यानी हर मज़लूम की हिमायत करना और सबके साथ मोहब्बत का सुलूक करना है।उन्होंने कहा,हम विश्व बंधुत्व का संदेश देते हैं, हम सब मिलकर पूरी दुनिया को मोहब्बत से जीत लें और नफरतों को हरा दें।

By: यूनुस मोहानी

इंसानियत की भलाई है ख्वाजा का मिशन : सय्यद मोहम्मद अशरफ

22 मार्च /नागौर,
‘इंसानियत की भलाई है ख्वाजा का मिशन’ वर्ल्ड सूफी फोरम और आल इंडिया उलेमा व मशाइख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने यह बात जश्ने ख्वाजा गरीब नवाज़ नाम से आयोजित एक महफ़िल में कही .
हज़रत ने कहा कि दर्द और ज़ुल्म से तड़पती हुई इंसानियत की भलाई के लिए हम सबको हज़रात ख्वाजा गरीब नवाज़ रहमतुल्लाह अलहि के मिशन पर चलना होगा क्योंकि इन्सानी हमदर्दी और भलाई की फ़िक्र में ही तमाम परेशानियों का हल छुपा हुआ है .
उन्होंने कहा कि गरीब नवाज़ की तालीम है कि भूखों को खाना खिलाओ अपने दुश्मन पर भी मेहरबानी करो अगर हम इन बातों पर अमल करने लग जाएँ तो खुद बखुद कई मसले खतम हो जायेंगे .बारगाहे गरीब नवाज़ से वाबिस्ता होने का यह मतलब नहीं कि सिर्फ हम उनके नामलेवा बने रहे बल्कि असल हक तब अदा होगा जब हम उनकी तालीम पर अमल भी करें उनके दिखाए गये रास्ते पर चलें ,इल्म हासिल करें .
हज़रत गरीब नवाज़ के पैगाम मोहब्बत सबके लिए नफरत किसी से नहीं को आम कर दीजिये इसके लिए बस आपको मोहब्बत वाला बन कर निकलना होगा सबके साथ से बेहतर सुलूक कीजिये आपसी झगड़ों को पहले खतम कीजिये और अपने मोहब्बत वाले सुलूक से लोगों का दिल जीतिये ,क्योंकि असली हुकूमत तो दिलों पर होती है गरीब नवाज़ लोगों के दिलों पर हुकूमत करते हैं.
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यूनुस मोहानी

दशमलव 5 फीसदी औरतों की नहीं हुकूमत पूरे 5 फ़ीसदी औरतों की फ़िक्र करे : सय्यद मोहम्मद अशरफ

10 मार्च /मालेगांव , .5 फीसदी औरतों की नहीं हुकूमत 5 फ़ीसदी औरतों की फ़िक्र करे “यह बात वर्ल्ड सूफी फोरम एवं आल इंडिया उलेमा व मशाइख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने मालेगांव में आयोजित तह्फ्फुज़े शरियत व सूफी कांफ्रेंस में बोलते हुए कही .

उन्होंने कहा कि मुसलमानों को चाहिए कि वह इल्म हासिल करें और शरियत पर अमल करें ताकि किसी तरह की कोई परेशानी न हो सिर्फ तहफ्फुज़े शरियत का नारा लगाने से कुछ नहीं होगा .हज़रत ने कहा कि शरियत यानि इस्लामी कानून इंसान की हिफाज़त के लिए है ताकि वह ज़ुल्म से बचा रहे आखिर यह हालत कैसे आ गए कि हम शरियत बचाने के लिए आज कोशिश कर रहे हैं ?हमें इस बात पर गौर करना चाहिए अगर हमने शरियत पर अमल किया होता तो यह हालात नहीं आते .

तलाक को लेकर जिस तरह बवाल मचा है और कानून बनाने की कवायद चल रही है वह भी हमारी अपनी कमियों की वजह से हुआ है जिस अमल को अल्लाह और अल्लाह के रसूल ने सख्त नपसंद किया है उसपर अमल किया जाता है तो तकलीफ होनी ही है हमें चाहिए हम अपने अल्लाह को राज़ी करें .

उन्होंने कहा कि अगर सरकार वाकई में मुसलमान औरतों की फ़िक्र कर रही है तो तलाक पर कानून बनाने से तो महज़ .5 %मुस्लिम औरतों का ही भला होगा और अगर आर्टिकल 341 से प्रतिबन्ध हटा लिया जाये तो 5 % मुस्लिम औरतों को फायेदा होगा अगर हक ही देना है तो 341 से प्रतिबन्ध हटा लिया जाना चाहिए क्योंकि तभी सबका साथ सबका विकास मुमकिन होगा .

आल इंडिया उलेमा व मशाइख बोर्ड यूथ के राष्ट्रिय अध्यक्ष मौलाना सय्यद आलमगीर अशरफ किछौछवी ने कहा कि युवाओं को चाहिए कि खुद तालीम हासिल करें और अपने छोटों को मदद करें सूफिया की तालीमात को पढ़ें भी और उस पर अमल भी करें क्योंकि देश में जिस तरह के हालात बनाने की कोशिश की जा रही है उसे सूफिया की मोहब्बत भारी तालीम से ही रोका जा सकता है.

By: Yunus Mohani

सारी मखलूक़ रब का कुंबा लेकिन एक ख़ुदा को मानने वाले एक नहीं : सय्यद आलमगीर अशरफ

5 मार्च/ नागपुर
सारी मखलूक रब का कुंबा लेकिन एक खुदा को मानने वाले एक नहीं, आल इंडिया उलेमा व मशायख बोर्ड (यूथ) के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सय्यद आलमगीर अशरफ ने यह बात बोर्ड की यूथ विंग की तरफ से चल रहे चार रोज़ा कार्यक्रम के समापन के मौके पर बोलते हुए कही।
उन्होंने कहा कि मुसलमान आपस में मसलक, मशरब में बटे हुए हैं और हालात इतने खराब हो गए हैं कि यह देख रहे हैं जिनपर ज़ुल्म हो रहा है वह हमारे मसलक या मशरब का है कि नहीं जबकि न सिर्फ सारे इंसान बल्कि सारी रचनाएं उस पालनहार का कुनबा है ।
मुसलमानों को शिक्षा पर खास ध्यान देते हुए अपने हालात को बेहतर करने की कोशिश करनी चाहिए और इसके लिए इत्तेहाद वक़्त की सबसे बड़ी जरूरत है आल इन्डिया उलेमा व मशायख बोर्ड लगातार सूफिया के तरीके पर चलते हुए सभी तक मोहब्बत का पैगाम आम कर रहा है युवाओं को इससे जुड़ कर काम को और गति देनी होगी।
मौलाना ने श्री श्री रविशंकर के बयान की निन्दा करते हुए कहा कि संतो की ज़बान ऐसी नहीं होती उनके यहां तो मोहब्बत की भाषा बोली जाती है। सरकार से मौलाना ने मांग करते हुए कहा कि इस प्रकार की बयानबाज़ी करने वालों पर लगाम लगाई जानी चाहिए।
मौलाना अशरफ ने कहा कि मजलूम कोई भी हो हमें उसके साथ खड़े होना है सीरिया में हालात खराब है सबको वहां के रहने वालों के लिए दुआ करनी चाहिए।
आल इंडिया उलेमा व मशायख बोर्ड यूथ जरिए यह प्रोग्राम महबूब नगर , अंसार नगर,धोबिनगर,तकिया दीवान शाह,में संपन्न हुआ इसको सफल बनाने में मुख्य रूप से हाफ़िज़ अख़्तर आलम अशरफी,सूफी असलम क़ादरी , एजाज अशरफी, गुड च्वाइस टेलर, शेख़ जावेद , नब्बू अशरफी , आसिफ अशरफी , आकिब कलाम भाई,मोहम्मद हुसैन , तौसीफ अशरफी, ख्वाजा मोइनुद्दीन, अबुजर अशरफी, नूरुद्दीन अशरफी सहित बड़ी तादाद में युवाओं ने मेहनत की।
प्रोग्राम के समापन पर दरगाह हज़रत बाबा ताजुद्दीन रहमतुल्लाह की दरगाह पर सीरिया सहित संसार में जहां भी इंसानियत परेशान है उनके लिए खास दुआ की गई।

By: Yunus Mohani

मोहब्बत ज़िन्दगी है नफरत मौत : सय्यद मोहम्मद अशरफ

4 मार्च/पीलीभीत
मोहब्बत ज़िन्दगी है नफरत मौत ‘यह विचार आल इंडिया उलमा व मशायख बोर्ड एवं वर्ल्ड सूफी फोरम के अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने आल इंडिया अशरफुल अम्बिया कान्फ्रेंस में बोलते हुए रखे .उन्होंने कहा कि दुनिया तबाही की राह पर चल पड़ी है सीरिया हो यमन हो या दुनिया का कोई भी कोना हिंसा पैर पसार रही है और इन्सानी जिंदगियों को निगल रही है .

हज़रत ने कहा कि रहमते आलम सल्लल्लाहुअलहिवसल्लम ने दुनिया को जो पैगाम दिया उसी में सबकी भलाई है हमें सीरत के हर हर पहलू को अमली ज़िन्दगी में उतारने की कोशिश करनी चाहिए मेरे सरकार ने फ़रमाया कि लोगों में बेहतर वह जो लोगों का भला चाहता है ,तो खुद को बेहतर बनाना होगा .

फरमाने रसूल है कि मुसलमान वह जिसकी ज़बान और हाथ से सारे इन्सान महफूज़ रहें तो अब समझ ले दुनिया कि मज़लूमो के कातिल कौन हैं .

मोहब्बत ज़िन्दगी है क्योंकि मोहब्बत में भलाई है, नफरत मौत है क्योंकि नफरत में नुक्सान है गरीब नवाज़ ने इसीलिए कहा मोहब्बत सबके लिए नफरत किसी से नहीं ,इसी बात को आम कर दीजिये दुनिया से ज़ुल्म मिट जायेगा

मुफ्ती साजिद हस्नी कादरी ने कहा कि हमारे आक़ा हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा पूरी दुनिया के लिए रहमत बनकर आए और हुज़ूर ने हमेशा गरीबों व नादार लोगों की मदद की । उन्होंने लोगों से हुज़ूर की सीरत-ए-तैयबा पर चलने की हिदायत दी.

और सरकार ए कलाँ हज़रत सैयद मुख्तार अशरफ अशरफी जिलानी रहमतुल्लाह अलैहि की जीवनी पर भी विस्तार से प्रकाश डाला।

सभा का आगाज़ क़ुरआन करीम की तिलावत के साथ हाफिज रिजवान अशरफ ने किया.निज़ामत मौलाना गुलाम मुस्तफा ने की.जलसे को मुफ़्ती नूर मोहम्मद हसनी, मौलाना यासीन अशरफी, मुफ्ती रिज़वान अहमद अशरफी, मुफ्ती जाकिर हुसैन, सैयद कलीम अशरफ, सैयद सुहैल अहमद अशरफी , सैयद हैदर अशरफ ने भी संबोधित किया।

सभा में मौलाना शादाब अली, ज़हीर अहमद अशरफी, तक़ी शम्सी, मंसूर अहमद शम्सी, जमील अशरफी, गुड्डू अशरफी, सरताज अहमद, नूर मियां लुत्फी, जहीर मियां लुत्फी, गनी शम्सी और हाफिज जाकिर हुसैन के अलावा हज़ारों की तादाद में लोग मौजूद रहे.जलसे का अंत सलात व सलाम और देश में अमन व शांति की दुआ के साथ हुआ.