AIUMB condemns attacks in New Zealand Mosque

New Delhi, Mar 15

AIUMB President & Founder Hazrat Syed Mohammad Ashraf Kichchawchchvi reacted to hate-filled terror attack targeting two mosques in the New Zealand city of Christchurch where at least 49 people were killed and 20 seriously injured.

Hazrat said that the attack on the innocent people in Mosque is extremely disturbing and painful. We strongly condemn this act of violence. Such attacks are a grim reminder to the entire world that radicalization and spread of terror in the name of religion needs to be tackled.

AIUMB President said that in such situation we need to spread the message of Khwaja Gharib Nawaz R.A as “Love for all, Malice for none”. And this is the only way to fight of terrorism, he added.

देश भर में उलमा व मशाईख़ बोर्ड का रोष विरोध प्रदर्शन, मदरसों और दरगाहों से दी गई शहीदों को श्रद्धांजली

महाराज गंज, यूपी

आल इंडिया उलमा व मशाईख़ बोर्ड द्वारा देश भर में पुलवामा में हुए आतंकी हमले के विरुद्ध विरोध प्रदर्शन जारी है। कल बोर्ड के युवा समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष सय्यद आलमगीर अशरफ ने इंदौर की एक जामे मस्जिद से ख़िताब करते हुए इस आतंकी हमले की कड़ी निंदा की थी और आज राजकोट में एक प्रेस कांफ्रेंस का आयोजन करने जा रहे हैं जिस में दोषियों के ख़िलाफ़ जल्द और कड़ी सज़ा की मांग की जाएगी। सय्यद अशरफ के मुताबिक़ बोर्ड देश के कोने कोने से इस आवाज़ को उठाएगा और जब तक सज़ा नहीं मिल जाती विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।

इसी कड़ी में यूपी के महाराज गंज ज़िले के नौतनवा में सय्यद अफ़ज़ाल अहमद और मौलाना क़मर आलम की अगुवाई में हमले के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन हुआ जिस में नौतनवा के लगभग सभी मदरसों के विद्यार्थियों, अध्यापकों, मस्जिदों के इमामों ने भाग लिया और एक साथ बोर्ड की आवाज़ को मज़बूत किया कि सब्र का पैमाना भर चुका है। अब ज़ालिम और क़ातिल को बख्शा ना जाये।

मदरसा अशरफिया दारुल उलूम और मदरसा गौसिया बरकतुल उलूम के प्रबंधकों और अध्यापकों ने विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेते हुए कहा कि मुल्क पर उठने वाली किसी भी नज़र को हम किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं कर सकते।

विरोध प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे मौलाना कमर आलम ने कहा कि यह मुल्क हमारा है और इस मुल्क का हर बाशिंदा हमारा भाई है। मुल्क की सरहदों पर सिपाही हमारी रक्षा में खड़े हैं। आज उन पर हुआ यह जघन्य हमला हम पर और हमारी आन बान और शान पर हमला है जो हमें किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं। अगर सरकार इन के ख़िलाफ़ कुछ नहीं कर सकती तो हम सर पर कफ़न बाँध कर मुल्क की हिफाज़त के लिए तैयार हैं।

मास्टर शमीम अशरफी ने कहा कि हमारे सिपाही हमारा अभिमान और स्वाभिमान हैं। हम उन के परिवार के साथ हैं। उन्हीं इन्साफ दिला कर रहेंगे और और हमला में लिप्त एक एक अपराधी को जब तक सज़ा नहीं मिल जाती चुप नहीं बैठेंगे।

इन के अलावा प्रदर्शन में हाफिज़ कलीम उल्लाह, मौलाना ज़ुल्फ़िकार, मौलाना रफ़ीक, कारी जुनैद अशरफी, मौलाना उमर, मुहम्मद इदरीस खान अशरफी, अतीक़ अंसारी, शम्स तबरेज़, मुहम्मद नियाज़ कुरैशी, आज़ाद अशरफ कुरैशी, महबूब आलम, इरशाद खान और सद्दाम हुसैन समेत मदरसों छात्र, प्रबंधक, अध्यापक और मस्जिदों के इमाम शामिल हुए।

 

Source: Nayasavera.net

देश भर में उलमा व मशाईख़ बोर्ड का रोष विरोध प्रदर्शन, मदरसों और दरगाहों से दी गई शहीदों को श्रद्धांजली

उलमा मशाइख बोर्ड के आह्वाहन पर मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षकों की लडाई लड़ रहे सभी बड़े संगठन आये एक साथ

6 फ़रवरी ,लखनऊ ,

विगत 36 महीनों से वेतन न मिलने पर समस्याओं से जूझ रहे मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षक अलग अलग संगठन बना कर अपनी लडाई को लड़ रहे थे जिससे आपस में एक संवाद हीनता की स्थिति उत्पन्न हो गयी थी और लडाई शिथिल पड़ रही थी .

आल इंडिया उलमा व मशायख बोर्ड ने इनकी लड़ाई को अपना समर्थन देते हुए जहाँ 28 जनवरी को सामाजिक न्याय सम्मलेन से इस आवाज़ को ज़ोरदार तरीके से उठाया वहीँ बड़ा क़दम उठाते हुए सभी संगठनों के प्रमुखों से मिलकर उनके विचारों को सुना बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने एक संयुक्त मोर्चा बनाकर सभी संगठनों से इसमें सदस्य रहने का प्रस्ताव रखा जिसके माध्यम से लड़ाई को एकजुटता के साथ लड़ा जा सके और संवादहीनता की जो स्थिति पनप रही है उसे रोका जा सके .
हज़रत के इस प्रस्ताव को सभी बड़े संगठनों से स्वीकार किया और प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर अपनी मजूरी दी यह इस लड़ाई को लड़ने वाले सभी शिक्षकों की पहली जीत है और जल्द ही उनकी समस्या का समाधान निकलने की ओर पहला क़दम है .
उत्तर प्रदेश में इन शिक्षकों की संख्या लगभग 30 हज़ार है जिनको एक संयुक्त मोर्चा बना कर एकजुट किया गया है .

By: यूनुस मोहानी

सत्ता में भागीदारी है समाज की समस्याओं का हल : सय्यद आलमगीर अशरफ

4 फरवरी/जालौन ,आल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड युवा शाखा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सय्यद आलमगीर अशरफ ने कल जालौन में एक सभा को संभोधित करते हुए कहा कि “सत्ता में भागीदारी है समाज की समस्याओं का हल” उन्होंने कहा,  28 जनवरी को आल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने देश की तमाम बड़ी खानक़ाहों के सज्जादानशीन व प्रतिनिधियों और बोर्ड के तमाम राज्यों के अध्यक्षों और पदाधिकारियों की मौजूदगी में भागीदारी की मांग के बाद पूरे देश में यह बात चल चुकी है और लोग अपना मन बना रहे हैं कि  भागीदारी के बिना  हम किसी के साथ नहीं जा सकते।
मौलाना ने कहा कि अब झूठे वादे और खोखले दावों पर हमें भरोसा नहीं है,  हमें जो हमारी तादाद के हिसाब से भागीदारी देगा हम उसके साथ होंगे, उन्होंने साफ कहा कि बोर्ड ने साफ तौर से ऐलान कर दिया है कि हम अपने लोगों की लड़ाई हर जगह लड़ेंगे और सियासी रहनुमाई भी करेंगे क्योंकि समाज को तब तक कुछ हासिल नहीं हो सकता जब तक सत्ता में आप भागीदार न हो जाएं ।
सभा को संबोधित करते हुए मौलाना कैसर रज़ा मदारी ने कहा कि हम शेखुल हिन्द हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ मियां की आवाज़ में अपनी आवाज़ मिलाते हुए हर बच्चे बच्चे तक यह पैग़ाम पहुंचा दें कि अब सिर्फ बात भागीदारी की होगी क्योंकि सिर्फ मदारिस और दारुल उलूम से कौम के मसले हल नहीं किए जा सकते, इसके लिए हमें सियासत में हिस्सेदार बनना होगा, सिर्फ वोटर और सपोर्टर बन कर नहीं बल्कि सत्ता में भागीदार बन कर हम सामाजिक न्याय की लड़ाई जीत सकते हैं।
सभा में हजारों लोगों ने शिरकत की और बोर्ड के ऐलान का समर्थन किया, कार्यक्रम  का समापन  सलात व  सलाम के बाद मुल्क में शांति की दुआ के साथ हुआ।
By : यूनुस मोहानी

India cannot progress without Minorities: AIUMB President

Country cannot progress if proper and equitable representation is not given to Minorities and backward communities in jobs and government, said Syed Ashraf Kichchawchchvi  President of All India Ulama & Mashaikh Board in a largely attended programme in Lucknow.  Displaying a rare opportunity of Muslim Intellectual gathering in the Capital city of Lucknow, speakers from all prominent DARGAHS expressed their views and community voice.
Syed Salman Chisty, Gaddinnashin from Ajmer Dargah and founder president of Chishty Foundation laid emphasis on equal distribution of power and participation. “”It’s not possible that one man holds a Marshall and the the other power in this today’s world”” this will lead to confrontation. Ashraf Mia of Kichchawchcha sharif, President of the Board that merely  promises will not solve the problems of the community. Actual participation of jobs, and other fields will will lead to justice then. He said that India being a democratic Country where people’s have the great and important voting power, Minorities have always been cheated .He questions with the government as to why Article 341 has not been resolved as yet. Syed Ale Mustafa Pasha Sajjadanashin from Hyderabad and Syed Naseeruddin Chisty, Syed Farid Nizami of Nizmuddin Dargah, Delhi,  Syed Tarvin Hashmi of Bijapur Dargah and Ammar Ahmed Hashmi of Radauli sharif  and Sajjadanashin Makanpur Dargah, also expressed their concerns at justice not being given to Minorities and backward classes.
Intellectual from all walks of life gathered ,gathered to express their anguish. Shivpal Singh Yadav ,President of Pragathasheel Samajwadi Party (Lohia) supported the conclave and promised equal participation from his party to them.  He also mentioned that he himself was hounded by the government after the Babri masjid demolition to the extent that he went underground for 6 months. Criticizing the Union government on failure on all fronts he said that we should think above religion,  caste, communities and only then country development take place. He strongly condemned the recently statement of Shiv Sena that Muslims should get divested of voting rights. India belongs to both Hindus and Muslims to gather,  Shivpal Singh said.
The vast gathering of Muslims leadership and intellectual, on a single platform;, which was supported by various political outfit also fathers prominence.  In view of 2019 elections all the political parties thus conclave will make them take notice of it .Equal participation as bhagidari is a must and government cannot ignore this major demand of them.
Source: ClickTv.in
https://clicktv.in/india-cannot-progress-without-minorities-aiumb-president/

شراکت داری کے بغیر سماجی انصاف ایک دھوکہ

بورڈ کے بینرتلے علماومشائخ ،دانشوروں نے سماجی انصاف کے لئے متحد ہوکرلڑائی لڑنے کا عزم کیا
(لکھنؤ۔۲۸ جنوری (پریس رلیز
آل انڈیا علماء و مشائخ بورڈ کے زیر اہتمام اندرا گاندھی پرتشٹھان،لکھنؤ میں ایک پروگرام ”ساماجک نیائے سمیلن” کا انعقاد کیا گیا جس میں پورے ملک سے بورڈ کے عہدیداروں، مسلم دانشوروں اور علماء نے حصہ لیا۔اس کانفرنس میں ملک کے سبھی بڑی درگاہوں کے سجادہ نشین اور نمائندوں نے شرکت کی۔
اس موقع پر اجتماع سے خطاب کرتے ہوئے بورڈ کے بانی وصدر حضرت سید محمد اشرف کچھوچھوی نے کہا کہ یہاں مسلم سماج کے ہر طبقے کے لوگ ملک کے ہر کونے سے آئے ہوئے ہیں، تمام لوگ جانتے ہیں کہ جس طرح کی پریشانی سے آج معاشرہ پریشان ہے، انصاف کے نام پر آپ سے ووٹ لیا جاتاہے اور بعد میں آپ کودھوکہ ملتا ہے۔
انہوں نے سوال کیاکہ ہم کب تک دھوکہ کھانا چاہتے ہیں ،یہ سوال ہر شخص سے ہے۔ انہوں نے کہا کہ ہمارا ملک ایک جمہوری ملک ہے جہاں سب کو ووٹ دے کر اظہار رائے کا اختیارہے لیکن آخر کب تک ہم دوسروں کی رائے پر چلیں گے؟ سوال یہ بھی ہے کہ کیا بناشراکت داری کے آپ کچھ کرسکتے ہیں؟ حضرت کچھوچھوی نے کہا کہ آرٹیکل 341پر جوجدوجہد چل رہی ہے کیا وہ کہیں تک پہنچی؟
اشرف کچھوچھوی نے کہا کہ اب ہم سب مل کر اس جنگ کو لڑیں اور کسی کو ہمارے جدوجہد کا غلط فائدہ نہ اٹھانے دیں اور یہ اسی وقت ممکن ہے جب اقتدار میں ہماری حصہ داری طے ہو، ہم جعلی مسکراہٹ اور جھوٹے وعدوں پر نہیں بلکہ شراکت داری کے نام پر اپنا فیصلہ کریں۔حضرت نے کہا کہ شراکت داری کے بغیر انصاف ممکن نہیں ہے، یہ صرف دھوکہ دہی ہے۔
خانقاہ شیخ العالم ردولی شریف کے سجادہ نشین اور بورڈ کے قومی مجلس عملہ کے رکن حضرت شاہ عمار احمد احمدی (نیر میاں) نے کہا کہ مدرسہ بورڈ میں جس طرح کی بدعنوانی پھیلی ہوئی ہے اس کے لئے بھی قدم اٹھائے جانے چاہئے اور یہ بھی تب ہی ممکن ہوگا جب ہم اقتدار میں حصہ داری کریں، میں حضرت اشرف میاں کی بات سے متفق ہوں کہ بدعنوانی کو ختم کئے بغیر مدارس کی حالت سنوارنے کی بات کرنا خود ایک بے ایمانی ہے۔
کرناٹک سے تشریف لائے حضرت سید تنویر ہاشمی نے کہا کہ درگاہوں سے محبت کا پیغام دیا جاتا ہے، یہ واحدایک ایسی جگہ ہے جہاں ہر مذہب کے لوگ بغیر کسی امتیاز کے آتے ہیں اور محبت کے پھول پیش کرتے ہیں، انکی حفاظت ضروری ہے اوراس کے لئے بورڈ مسلسل مطالبہ کر تارہا ہے کہ درگاہ ایکٹ بنا کر ان کی حفاظت کی جائے لیکن لوگ وعدہ کرکے مکر گئے لہذا ہمیں اب شراکت داری کی طرف جاناہوگا۔ انہوں نے کہا کہ اگر آپ اقتدار میں شریک نہیں ہوں گے تو نقصان ہی ہوگا ۔
درگاہ خواجہ غریب نواز کے گدی نشین سید سلمان چشتی نے کہا کہ نفرت کی ہر آواز کو ہمیں محبت سے دبا دینا ہے، لیکن اگر انصاف نہیں ہوا تو ایک بے چینی رہتی ہے، سماجی انصاف کے بغیر ترقی کاخواب ہی جھوٹا ہے۔ یہ کس طرح ممکن ہے کہ ایک انسان کے پاس ساری طاقت ہو اور دوسرا محروم رہے پھر دونوں کو برابر بوجھ اٹھانے کے لیے کہا جائے۔یقیناطاقتور شخص زیادہ بوجھ اٹھائے گا اور یہی عدم توازن معاشرے میں ٹکراؤ کی وجہ ہے۔
تلنگانہ سے آئے سید آل مصطفی پاشا نے کہا کہ مسلم سماج کی اس ملک میں سب سے بڑی جنگ آرٹیکل 341 پر لگی پابندی کوہٹوانا ہے۔انہوں نے کہا حکومتیں ہمیں الجھا کر اصل مسئلے سے ہٹائے رکھنا چاہتی ہیں اور سیاسی جماعتیں ہمارے درمیان تصادم کرانا چاہتی ہیں جو ہمیں کمزور کرنے کی سازش ہے لہذا اب ہمیں ہوشیار ہوکر اقتدار میں شرکت یقینی کرنی ہوگی تاکہ ہم اپنی جنگ لڑنے کے خود قابل ہوں اورجیت بھی سکیں۔انہوں نے بورڈ کے صدر کی حمایت کرتے ہوئے کہا کہ ہم اپنے قائد کے ہر کے فیصلے میں ان کے ساتھ ہیں۔
مکنپور درگاہ سے آئے بورڈ کے قومی مجلس عملہ کے رکن حضرت سیدسیدالانوارسیدی میاں نے حج کمیٹی میں ہو رہی بدعنوانی کا مسئلہ اٹھایا اورکہا کہ حاجیوں کے ساتھ سوتیلا برتاؤ ہو رہا ہے اورزیادہ پیسے لے کر سہولتیں نہیں مل رہی ہیں۔ اس بدعنوانی کوختم کرنا ہوگا اور یہ بھی شراکت داری کے ساتھ ہی ممکن ہے ۔ انہوں نے کہا کہ ہم نے اپنا اپناقائد اشرف میاں کوبنایا ہے اور ہمیں ان کی حوصلہ افظائی بھی کرنی ہے اورساتھ بھی دینا ہے۔
احمد آباد سے تشریف لائے سید نصیر الدین چشتی نے کہا کہ آج ہم جہاں کھڑے ہیں اگر ہم ا بھی بھی اپنی قیادت مضبوط نہیں کر پائے تو سماجی انصاف کی لڑائی کبھی نہیں جیتی جا سکتی لہذا ہم سب اشرف میاں کے ساتھ برابری سے اس جنگ میں شریک ہیں اور ان کی ہر طرح کی حمایت کرتے ہیں۔
بورڈ کی ایڈوائزری کمیٹی کے رکن پروفیسر خواجہ اکرام الدین نے تعلیمی نظام اور مدرسے کے موضوع پر بات کرتے ہوئے مدرسہ بورڈ کی بدعنوانی کے بارے میں تفصیلی بحث کرتے ہوئے مدارس کی بہتری کے بارے میں بتایا۔ خواجہ اکرام نے کہا تعلیم اگر معیاری نہیں ہوگی تو نقصان تو ہوگا ہی اس کے لئے متحد ہوکر بورڈ کو مضبوط کرنا ہے اورشراکت داری کی اس جنگ کو لڑناہے۔
اجلاس کوریٹایرڈ IAS افسر انیس انصاری نے بھی خطاب کیا اور آرٹیکل 341 کے سلسلے میں لوگوں کو بیدار کیا۔
جدید مدرسہ استاد یونین کے صدر سمیت دیگر عہدیداروں نے اپنے مسئلہ کو بورڈ کے پلیٹ فارم کے ذریعے متعارف کرایا۔دہلی سے آئے پروفیسر سید اختر نے بھی مدرسہ ایجوکیشن کو بہتر بنانے پر اپنی بات رکھی۔اس کے ساتھ دیگر علماء نے بھی کانفرنس سے خطاب کیا اور شراکت داری کی بات پر بورڈ کے فیصلے کی تائید کرتے ہوئے کرتے ہوئے کہا کہ ہم بڑی مشکل سے قائد کوتلاش کرپائے ہیں اب ہم آپ کے فیصلے کے ساتھ ہیں۔
اس موقع پر بورڈ نے تمام سیاسی جماعتوں کومخاطب کرتے ہوئے میمورنڈم پڑھا اوربعد میں سبھی سیاسی جماعتوں کومیمورنڈم بھیجا گیا۔
پروگرام میں آئے ہوئے مہمانوں کا استقبال بورڈ کے ریاستی صدر سید شادان شکوہ مداری نے کیا اورنظامت کے فرائض مولانااشتیاق قادری نے انجام دیا۔

आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड 28 को करेगा सामाजिक न्याय सम्मेलन: सय्यद मोहमम्द अशरफ

17 जनवरी /नई दिल्ली –आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड के अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहमम्द अशरफ किछौछवी ने पत्रकारों को बताया कि आगामी 28 जनवरी 2019 को बोर्ड लखनऊ के इंदिरा गाँधी प्रतिष्ठान में एक सम्मेलन आयोजित कर रहा है जिसका नाम सामजिक न्याय सम्मलेन होगा .उन्होंने बताया कि इस सम्मलेन में बोर्ड के पूरे भारत से सभी ज़िम्मेदार शिरकत करेंगे जिनमे देश की तमाम ख़ानक़ाहों  के सज्जादानशीन और उलमा के साथ ही मुस्लिम बुद्धिजीवी लगभग 1500 की तादाद  में देश के मौजूदा हालात और मुस्लिम समाज के मसाइल  पर चर्चा करेंगे और उसके हल के लिए एक एजेंडा तय करेंगे.

उन्होंने कहा कि अब तक सिर्फ हमारे तुष्टिकरण का ढिंढोरा पीटा गया है हमारे समाज के विकास के लिए कोई ठोस रणनीति नहीं बनाई गई यहाँ तक कि अपने घोषणा पत्र में वादा करने के बाद भी मायूसी ही हमारे हिस्से में आई है लिहाज़ा इस सूरते हाल को देखते हुए सर से सर जोड़कर अब हमें एक ऐसा कार्यक्रम बनाना होगा जिससे देश के विकास में हमारे युवा भी बराबर  के शरीक हों , हज़रात ने कहा कि प्रतिभाओं की  कमी नहीं है लेकिन सही दिशा में प्रयास न होने से नाकामी का बोझ कौम पर बढ़ रहा है.

हज़रत ने कहा कि हुकूमते हिन्द ने 10% आरक्षण सवर्ण जातियों को तो दे दिया लेकिन संविधान की मूल भावना के  विरूद्ध आर्टिकल 341 पर प्रतिबन्ध को समाप्त नहीं किया जो मुसलमानों के पिछड़ेपन का एक कारण है, हमें इसके लिए भी बड़ी लडाई लड़नी है जिस पर भी सामाजिक न्याय सम्मेलन में विस्तृत चर्चा होगी और आने वाले समय के लिए रणनीति तय की  जाएगी .

मुसलामानों की शिक्षा भी एक बड़ा मसला है, मदरसा बोर्ड में जिस तरह के लोग बैठाले गए हैं उनसे एक बड़ा नुक्सान मुसलमानों को हो रहा है वहीँ मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षकों का वेतन भी नहीं दिया जा रहा है जिससे उनकी ज़िन्दगी दो भर हो गई है, इन विषयों पर भी सम्मेलन में व्यापक चर्चा के बाद रणनीति बनाई जाएगी.

By: Yunus Mohani

 

शाह फैसल का इस्तीफ़ा कश्मीरी नवजवानों का हौसला तोड़ने वाला : AIUMB

12 जनवरी, नई दिल्ली

आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड ने इंडियन सिविल सर्विसेज़ टापर शाह फैसल के इस्तीफे को एक बचकाना और जज्बाती क़दम बताते हुए कहा है कि उनके इस क़दम से उन तमाम मुस्लिम नवजवानों के हौसले को गहरा आघात पहुंचा है जो उन्हें अपना आइडियल मान रहे थे और सिविल सर्विसेज़ में जाने की तय्यारी कर रहे थे .

बोर्ड ने एक प्रेस नोट जारी कर कहा है कि उनका यह फैसला कश्मीर के नवजवानों के हक़ में नहीं बल्कि कश्मीरी अवाम को नुक्सान पहुँचाने वाला है क्योंकि उनके इस क़दम से लोगों में एक अविश्वास की भावना पैदा होगी जो उनके लिए घातक है. शाह फैसल ने जब सिविल सर्विसेज़ में टॉप किया तो कश्मीर के तमाम नवजवानों में एक हौसला पैदा हुआ और उन्हें एक बेहतर राह दिखी कि इस तरह वह मुख्य धारा का हिस्सा बनकर तरक्क़ी भी कर सकते हैं और लोगों की मदद भी.

शाह फैसल के इस फैसले से जहाँ उस विचारधारा को बल मिलेगा जो नवजवानों को वरगला कर आतंकवाद की तरफ मोड़ने के काम में लगी हुई है वहीँ उन नवजवानों को नुक्सान होगा जिनके हौसले पस्त हुए हैं.

By: यूनुस मोहानी

दंगा भड़काना चाहता है वसीम रिज़वी, सरकार करे कार्यवाही : सय्यद मोहम्मद अशरफ

9 जनवरी /लखनऊ,

आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड के अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफी फोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने वसीम रिज़वी के सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो पर कड़ा एतराज़ जताते हुए उसे अमन का दुश्मन करार दिया है ,उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार एवं केंद्र सरकार से मांग की है कि फ़ौरन ऐसे असामाजिक तत्व के खिलाफ राष्ट्रद्रोह का मुक़दमा लिख कर कड़ी कार्यवाही की जाये. उन्होंने कहा कि यह शख्स लगातार अपनी भड़काऊ और बेतुकी बातों से देश एवं प्रदेश का अमन खराब करना चाहता है .
हज़रत ने कहा एक महत्त्वपूर्ण पद पर बैठा यह शख्स संविधान की मर्यादों को तोड़ रहा है और देश में दंगा फैला कर लगातार देश को अस्थिर करने की घिनौनी साजिश रच रहा है, यह शख्स कट्टरपंथी विचार से प्रेरित है और उसे फैलाना चाहता है. उन्होंने भारत सरकार से मांग की है कि फ़ौरन ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्यवाही की जाये क्योंकि प्रदेश में जहाँ कुम्भ का मेला चल रहा है ऐसे में अगर हालात  खराब हुए तो उन्हें नियंत्रित करना मुश्किल होगा लिहाज़ा इस पर त्वरित कार्यवाही कि जाये.
उन्होंने कहा कि सुफिया ने सदैव मोहब्बत का संदेश दिया है और इस संदेश का यह असर है कि लखनऊ में दंगे बंद हो गये लेकिन शांति के दुश्मनों से यह देखा नहीं जा रहा है और वह इस सामाजिक ताने बाने को तोड़ देने पर तुल गये हैं हालांकि यह एक अंतर्राष्ट्रीय साजिश का हिस्सा है जिसकी एक कड़ी वसीम रिज़वी भी हो सकते हैं इसकी जांच की जानी चाहिए.

By: यूनुस मोहानी

इबादगाहों की जंग सियासतदानों की खुराक है: सय्यद मोहम्मद अशरफ

5 ,जनवरी/संभल,

आल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड के अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफी फोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने एक जलसे को संबोधित करते हुए कहा कि “इबादगाहों की जंग सियासतदानों की खुराक है” उनका। यह बयान देश में चल रही नफरत की सियासत के संबंध में था उन्होंने कहा आम जनता को उसके मूल मुद्दों से भटकाने के लिए यह तरीका अपनाया गया है।
हज़रत ने कहा जब कोई मसला मुल्क की सबसे बड़ी अदालत में है तो उसपर लगातार बयानबाज़ी सिर्फ जज्बात भड़काने के लिए है ,आम लोगों को इसे समझना चाहिए क्योंकि अगर हम आपस में झगड़े तो मुल्क का नुक़सान होगा और घिनौनी सियासी चाल कामयाब हो जाएगी।
उन्होंने कहा कि इंसानी जान बहुत कीमती है लोग एक दूसरे के खून के प्यासे घूम रहे हैं हालांकि यह बहुत कम तादाद में है ज़्याातर लोग मोहब्बत वाले हैं लेकिन अमन वालों की खामोशी की वजह से यह लोग कामयाब होते दिखते हैं और देश माहौल खराब करते हैं हम सब की साझा ज़िम्मेदारी है कि इनके खतरनाक मनसूबों को कामयाब न होने दे।
ज़ुल्म कहीं भी हो उसे बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए और उसका मुकाबला किया जाना चाहिए अगर हम सब इन सियासी चालो को नहीं समझे तो अपना और अपने वतन का नुक़सान करेंगे लिहाज़ा सभी को समझना चाहिए कि जिसकी इबादत करते हैं वह ज़ालिम को पसंद नहीं करता ।सभी को अपने मूल मुद्दों से भटकना नहीं चाहिए और वह है शिक्षा ,स्वास्थ्य,और रोजगार यह सब बिना शांति के संभव नहीं है।

By: Younus Mohani