सरकार शिक्षा और रोजगार पर ध्यान दे : सय्यद मोहम्मद अशरफ

19जनवरी/ बुरहानपुर
सरकार शिक्षा और रोजगार पर ध्यान दे,आल इन्डिया उलमा व मशायख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने सरकार को चेताते हुए यह बात कही. उन्होंने कहा देश युवाशक्ति को सही दिशा दिए बिना आगे नहीं बढ़ेगा. देश का विकास युवाओं को बेहतर शिक्षा व्यवस्था और रोजगार देने से होगा। वह यहां मीडिया से रूबरू थे।
हज सब्सिडी खत्म किए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा, हम इस क़दम का स्वागत करते हैं साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर सरकार अपने बयान के मुताबिक़ सब्सिडी की रकम मुस्लिम समाज की बच्चियों की शिक्षा पर खर्च करेगी तो समाज के गरीब वर्ग को इसका फायदा पहुंचेगा।
उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री का बयान कि “हम मदरसों के खिलाफ नहीं और सरकार इन्हें बंद नहीं करने जा रही बल्कि इसमें अच्छी व्यवस्था हो” का भी स्वागत योग्य है, सरकार को सभी नागरिकों के हित में काम करना चाहिए यही लोकतंत्र का तकाजा है।
उन्होंने कहा, जिस तरह देश में बेरोजगारों की भीड़ बढ़ रही है यह खतरनाक है हमारे नौजवान अवसाद ग्रस्त हो रहे हैं और गलत राह पर जा रहे हैं. जिसका नतीजा दिन प्रतिदिन बढ़ता अपराध का ग्राफ है। सरकार को इस और देखना होगा, न सिर्फ केंद्र सरकार बल्कि राज्य में बैठी सरकारों को भी प्रबंध करना चाहिए वरना देश खतरे में है।
हज़रत ने कहा, सूफी संतो की यह पावन धरती आज नफरत की आग में झुलस रही है, सभी को इसे बचाने के लिए आगे आना होगा। हज़रत ने कहा कि ख्वाजा गरीब नवाज़ का यह कौल कि “मोहब्बत सबके लिए नफरत किसी से नहीं” आज बहुत ज़रूरी है क्योंकि इसपर अमल करके ही नफरत को हराया सकता है।

मज़लूमों पर ज़ुल्म करने वालों से खतरनाक है हाथ मिलाना : सय्यद मोहम्मद अशरफ

15 जनवरी/इंदौर “मजलूमों पर ज़ुल्म करने वालों से खतरनाक है हाथ मिलाना” यह बात आल इन्डिया उलेमा व मशायख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने इंदौर में जलसे को खिताब करते हुए कही ।उन्होंने कहा ज़ालिम की हिमायत भी ज़ुल्म है ,पूरी दुनिया आतंकवाद के खतरे से दो चार है ऐसे में ज़ालिम को साथ लेकर उसे ख़तम करने की बात बेईमानी है।
हज़रत ने कहा जिस तरह की खबरें ,फोटो और वीडियो फिलिस्तीनियों पर इजरायल के ज़ुल्म के देखने और सुनने के मिलते है वह इंसानियत को शर्मसार करते हैं जो निंदनीय है उन्होंने कहा ऐसे में जब इजरायल के राष्ट्रध्यक्ष भारत दौरे पर आए हैं भारत को उनसे इस संबंध में बात करनी चाहिए और ज़ुल्म को रोकने के लिए कहना चाहिए।
हज़रत ने यह भी कहा कि भारत को इजरायल से व्यापार इसी शर्त पर करना चाहिए कि वह फिलिस्तीनियों पर ज़ुल्म रोके, क्योंकि भारत एक शांतिप्रिय देश है ,और हमारी नीति यहीं है कि हम ज़ालिम के साथ नहीं है। इंसानियत पर ज़ुल्म को मजहब , संप्रदाय , जाति के आधार पर नहीं देखा जा सकता, सभी इंसान हैं और उनके मानवाधिकारों का हनन अपराध है मानवता के प्रति।
हज़रत ने कहा कि हमें होश से काम लेना होगा जोश में आकर कोई ऐसा कदम नहीं उठाया जाना चाहिए जो नफरत को बढ़ावा दे क्योंकि इस्लाम की तालीम मोहब्बत है और हमारा फ़र्ज़ है कि हम उसपर अमल करें ।

By: यूनुस मोहानी

मुसलमान खुद हैं जिम्मेदार सुधार करें : सय्यद मोहम्मद अशरफ

7 जनवरी/ नई दिल्ली
मुसलमान खुद जिम्मेदार हैं सुधार करें यह बात हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया के उर्स के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए आल इंडिया उलेमा व मशायख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने मौजूदा समय में तीन तलाक़ को लेकर चल रही बहस पर कहीं ।
उन्होंने कहा मुसलमान खुद शरीयत पर अमल नहीं करते और इस आधार पर जब कहीं और से बात आती है तो परेशान हो जाते हैं यह हमारी अपनी कमजोरी है,सूफिया ने शरीयत को अपने अमल में ढाल कर पेश किया यही वजह है इनके आस्तानो पर हर मजहब के लोग अकीदत के फूल पेश करते नजर आते हैं हम खुद को अमल की बुनियाद पर सुधारने को तैयार नहीं हो रहे जिसकी वजह है कि जो शरीयत जानते है न इस्लाम वह रोज़ रोज़ नई नई तरह की बात उठा कर हमारे जज्बात को भड़काना चाहते हैं।
हज़रत ने कहा हमें होशियार रहना होगा अपने लोगों को जागरूक करना होगा,यह हमारी ज़िम्मेदारी है हमें होश से काम लेना है वरना याद रखिए हम खुद ही अपने घरों में आग लगाने वाले होंगे, नफरत को कामयाब होने दीजिए खुद को शरीयत पर अमल करने वाला बना लीजिए शरीयत का तहफ्फुज खुद बखुद होगया।
महफ़िल में दरगाह निज़ामुद्दीन औलिया के सज्जादानशीन हज़रत सय्यद अहमद अली निजामी, वली अहद दरगाह हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया सय्यद फरीद अहमद निजामी सहित काफी बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।समापन सलातो सलाम के बाद विश्वशांति की दुआ के साथ हुआ ।

By: YunusMohani

मस्जिदों को नमाजियों से भर दें लाउडस्पीकर की इजाज़त ले: सय्यद मोहम्मद अशरफ

संभल/ 8 जनवरी
मस्जिदों को नामाजियो से भर दें और लाउडस्पीकर की प्रशासन से इजाज़त लें यह बात आल इन्डिया उलेमा व मशायख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने संभल में एक जलसे को संबोधित करते हुए कही ।हज़रत ने साफ तौर पर कहा कि मुसलमान लाउडस्पीकर की आवाज़ की वजह से नमाज़ नहीं पड़ता बल्कि अपने रब के हुक्म से नमाज़ पढ़ता है हमें इस बात को अमली तौर पर बताना होगा।
उन्होंने कहा कि लाउडस्पीकर के लिए जो भी कानूनी तरीका हो उसे अपना कर इजाज़त हासिल करे और क़ानून का पूरा पालन करते हुए अपने दीनी फरीजे को भी पूरा करें । हज़रत ने लोगों से होश से काम लेने की बात कही जज्बात को काबू में रखते हुए काम करे ताकि नफरत अपने मकसद में हरगिज़ कामयाब न हो सके और मोहब्बत के फूल की खुश्बू पूरे चमन को महका दे।
हज़रत किछौछवी ने यह भी कहा कि मस्जिदों को हमे भरना होगा यह हमारी ज़िम्मेदारी है जिसे मुसलमान जान तो रहे हैं लेकिन अमल नहीं कर रहे हम जिस चीज का खुद ख्याल नहीं रख रहे अगर उसे लेकर बात होती है तो गलती हमारी है ,लोग आज तरह तरह से हमे उकसाने की साजिश रच रहें है हमें होशियार रहना होगा ।
अल्लाह के वालियो ने अल्लाह के हुकम और नबी की तालीम को हम तक पहुंचाया अगर हम औलिया अल्लाह से मोहब्बत रखते हैं तो मोहब्बत का तकाजा है कि महबूब की अदा को अपनाया जाय।

By: Yunus Mohani

ज़ुल्म किसी के भी साथ हो हमें मजलूम के साथ खड़े होना है: सय्यद मोहम्मद अशरफ

सैफनी रामपुर/9 जनवरी
ज़ुल्म किसी के भी साथ हो हमें मजलूम के साथ खड़े होना है ये इस्लाम की तालीम है ,यह बात कल सैफानि रामपुर में जश्ने गौसुलवरा को संबोधित करते हुए आल इंडिया उलेमा व माशाइख़ बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने कहीं ।हज़रत ने कहा पैग़म्बरे अमन व शांति ने हमें यही तालीम दी मोहब्बत , मुआफ़ करने का जज़्बा,ज़ालिम की मुखालफत,यह मुसलमान की पहचान है।
उन्होंने कहा कि हमारी ज़िम्मेदारी है कि अपने अमल से लोगों को बताए कि मुसलमान ऐसे होते हैं , मस्ज़िदों को भर दें ,दावत का यही तरीका सूफिया ने अपनाया अपने किरदार को लोगों के सामने पेश किया। लेकिन हम तब ज़ुल्म के खिलाफ खड़े होते हैं जब हम पर ज़ुल्म हो वरना हम खामोश रहते हैं यह गलत है।
हज़रत ने साफ तौर पर कहा कि मजलूम की हिमायत उसका मजहब या ज़ात देखकर नहीं की जाती, ज़ालिम का विरोध हर हाल में किया जाना चाहिए ,यही पैग़ाम हमे हमारे नबी ने दिया। देश में जिस तरह नफ़रत बढ़ रही है उससे सबको मिलकर निपटना होगा और नफरत से लडने के लिए मोहब्बत हमारा हथियार है ,दलितों ,आदिवासियों, ईसाई भाइयों सिख भाइयों सहित समाज के हर तबके के साथ जिसपर ज़ुल्म हो रहा है हमे खड़े होना होगा ।

By: Yunus Mohani

इस्लाम की तालीम मोहब्बत है और मदरसे इसे हासिल करने की जगह: सय्यद मोहम्मद अशरफ

11 जनवरी /दार्जलिंग
इस्लाम की तालीम मोहब्बत है और मदरसे इसे हासिल करने की जगह”यह बात आल इंडिया उलमा व माशायख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने एक धर्म सभा को संबोधित करते हुए कही , उत्तर प्रदेश शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिज़वी द्वारा मदरसों में आतंकवाद की तालीम दिए जाने के बयान पर बात करते हुए उन्होंने साफ़ कहा अपने सियासी आकाओं को खुश करने और खुद को जेल की सलाखों से बचाने के लिये वह नफरत की सियासत कर रहे हैं और मदरसों को बदनाम करने की घिनौनी कोशिश में लगे हैं उनकी बात का सच से कोई तल्ल्लुक नहीं है .
हज़रत ने भारत सरकार और उत्तरप्रदेश सरकार दोनों से वसीम रिज़वी की जाँच कराकर उनके ज़रिये किये गए वक्फ घोटालों को उजागर कर इन्हें कड़ी सजा देने की मांग की क्योंकि मदरसे मोहब्बत की तालीम देते हैं ,धर्म नफरत नहीं सिखाता तो फिर जहाँ धर्म कि तालीम होती है वहां नफरत को फैलाने वालों का क्या काम .हज़रत ने पैगम्बरे अमन –ओ –शांति हज़रत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलहि वसल्लम की हदीस का ज़िक्र करते हुए कहा कि मोमिन आईने की तरह होता है जिसमे जो खुद जैसा होता है वैसी ही शक्ल आईने में दिखती है क्योंकि आइना झूट नहीं बोलता अगर कोई इंसान बुरा है तो उसे सामने बुराई ही नज़र आएगी वसीम रिज़वी को इसपर गौर करना चाहिए .
उन्होंने कहा लोगों को नफरत की नयी नयी चालों से होशियार रहना होगा और मोहब्बत से नफ़रत को मिटाना होगा ,हम सब की ज़िम्मेदारी है कि जो नफरत की बात करे उसका सामाजिक बहिष्कार करें मज़हब के नाम पर नफरत के व्यापारियों के धंधे को पनपने न दें .मोहब्बत सबके लिए नफरत किसी से नहीं के उसूल पर ज़िन्दगी गुजारें यही वह फार्मूला है जिससे शांति को कायम रखा जा सकता है .

By: Younus Mohani

AIUMB President met with Former PM of Malaysia Dr Mahathir bin Mohammad

Malaysia: 5 January 2018
AIUMB President & Founder Hazrat Maulana Syed Mohammad Ashraf Kichchawchchwi met with Doctor Mahathir bin Mohammad, the fourth Prime Minister of Malaysia from 1981 to 2003, the longest-serving PM of Malayasia, Islamic intellectual, author, thinker and prominent leader of the Muslim world, appreciated World Sufi Forum’s Vision and Global efforts to promote Sufism.
He congratulated Indian Muslims on their peaceful, multi-cultural and pluralistic values. Quoted the Qur’an to be progressive, integrated and United against extremism, terrorism, religious persecution and fanaticism.
When asked about his role model as a leader, he said: ” Beloved Prophet (peace be upon him)”

By: Ghulam Rasool Dehalvi

अगर नफरत यूंही बढ़ी तो समाज बिखर जायेगा :सय्यद मोहम्मद अशरफ

कोटा/12 दिसम्बर
अगर नफरत यूंही बढ़ी तो समाज बिखर जायेगा, यह बात आल इन्डिया उलमा व मशायख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने जलसे को संबोधित करते हुए कही, उन्होंने कहा, समाज में जिस तरह नफरत पनप रही है उससे देश को खतरा है क्योंकि अगर देश में अमन नहीं होगा तो विकास संभव ही नहीं है।
उन्होंने कहा इस्लाम सलामती का पैग़ाम है यह ज़िन्दगी जीने का वह तरीका है जिस पर चलने से अमन चैन और विकास होता है क्योंकि दुनिया जब ज़ुल्म के घनघोर अंधेरे में थी तब पैगम्बर हजरत मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लललाहू अलैहि वसल्लम ने दुनिया को जीने का वह रास्ता दिखा दिया जो उजालों की तरफ जाता है, अब जो लोग दहशत और नफरत का कारोबार कर रहे हैं वह आज भी अंधेरे में हैं और अगर हम उनका समर्थन करते हैं तो हम भी ज़ालिम ही कहलायेंगे।
हज़रत ने कहा की किसी भी कीमत में नफरतों के कारवां को रोकना होगा, और इसके लिए हमें तालीम पैग़म्बरे अमन पर अमल भी करना होगा। हज़रत किछौछवी ने सभी अमन चाहने वालों का आह्वाहन किया कि आईये मोहब्बत का संदेश घर घर तक पहुंचाये । सूफिया का पैग़ाम यही है “मोहब्बत सबके लिए नफरत किसी से नहीं”।

By: यूनुस मोहानी

अमन वालों की ख़ामोशी भी ज़ुल्म है : सय्यद अशरफ

कोटा /11 दिसम्बर “अमन वालों कि ख़ामोशी भी ज़ुल्म है’ यह बात आल इंडिया उलेमा व मशायख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने एक जलसे में ख़िताब करते हुए कही .हजरत ने कहा सिर्फ ज़ुल्म करना ही इंसान को ज़ालिम नहीं बनाता बल्कि किसी के किसी के साथ ज़ुल्म करने पर खामोश रहना भी हमे ज़ालिम बनाता है .

उन्होंने कहा जिस तरह आये दिन वहशी दरिन्दे मजलूमों को अपना शिकार बना रहे है उन्हें मज़हब के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए बल्कि उन्हें दरिन्दे के तौर पर देखा जाना चाहिये और उनके खिलाफ इंसानियत के तकाजे पर खड़ा होना चाहिए, लेकिन समाज में जिस तरह की नफरत घुल रही है वहां धर्म पैमाना बनता जा रहा है, जोकि धर्म है ही नहीं ,क्योंकि धर्म मोहब्बत का सन्देश देता है, ज़ुल्म को समाप्त करने का मार्ग दिखाता है, न कि हमें हिंसक पशु बनाता है .

हज़रत ने कहा पैगम्बरे अमनो शांति सल्लललाहूअलहिवसल्लम की तालीमात पर अमल करने से आदमी इंसान बनता है और इंसान ज़ालिम नहीं होता, क्योंकि ज़ालिम आदमी हो सकता है इंसान नहीं.हज़रत ने बिना धर्म सम्प्रदाये का फर्क किये अमन वालों से ज़ुल्म के खिलाफ खड़े हो जाने की अपील की. उन्होंने कहा कि रसूले खुदा का फरमान है कि ज़ालिम और मजलूम दोनों की मदद करो ज़ालिम की मदद यह है कि उसे ज़ुल्म से रोक दिया जाये .
अमन वालों की ख़ामोशी ज़ालिम को और ज़ालिम बनाती है इस चुप्पी को तोडना होगा सबको मोहब्बत के साथ एक जुट होकर ज़ालिम के खिलाफ खड़ा होना होगा पैगाम वही है “मोहब्बत सबके लिए नफरत किसी से नहीं “
जलसे को मौलना उमर अशरफी ने भी संबोधित किया और हजारों की संख्या में लोग मौजूद रहे .

BY: Yunus Mohani

बिके हुए लोग अफवाहों को हवा देकर नफरत फैला रहे हैं :सय्यद मोहम्मद अशरफ

संतकबीर नगर /9 दिसम्बर
बिके हुए लोग अफवाहों को हवा देकर नफरत फैला रहे है यह बात संतकबीनगर ज़िले के धर्मसंघवा नामक स्थान पर एक कार्यक्रम में बोलते हुए आल इंडिया उलमा व मशायख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने कहीं ।
उन्होंने कहा, पूरी दुनिया में अफवाहों के कारोबारी ज़हर बेच रहे हैं हर तरफ ज़ुल्म हो रहा है, ऐसे में अगर अमन वाले लोग खामोश रहे तो दुनिया जल जायेगी, हमे न सिर्फ इस प्यारे वतन को बल्कि पूरी दुनिया को बचाने के लिए आगे आना होगा, अफवाहों पर ध्यान न दें आपस में मोहब्बत को बढ़ाइए ।
हज़रत ने कहा मुल्क में वहशी भेड़ियों की एक टोली घूम रही है जो ज़ुल्म के अंधेरे को कायम करना चाहती है ताकि अमन के उजाले को ख़तम कर दिया जाय, राजस्थान ,शब्बीरपुरा,दादरी ,हरियाणा इसी मंसूबे की कड़ियां हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि न कोई मुस्लिम हिन्दू से नफरत करता है न कोई हिन्दू मुसलमान से, न सिख ईसाई से, नफरत तो सियासत का घिनौना हथियार है जिसको मजहब का लिबास पहना कर ज़ुल्म किया जा रहा है। हज़रत ने कहा याद रखिए अगर ज़ुल्म के खिलाफ नहीं खड़े हुए तो आप भी मुजरिम हैं आप भी ज़ालिम साथ दे रहें है,लिहाज़ा मोहब्ब्त का दिया रोशन किजिए नफरत को नकार दीजिये ।हमारा पैग़ाम वही है मोहब्बत सबके लिए नफरत किसी से नहीं।
जलसे में मौलाना अली अहमद बिस्मिल अजीजी और मौलाना मकबूल सालिक मिस्बाही ने भी अपने ख्यालात का इजहार किया।

By: यूनुस मोहानी