तालीमे नबी पर अमल किये बिना अमन मुमकिन नहीं: सय्यद मोहम्मद अशरफ

नवंबर 1, शुक्रवार लखनऊ,
वर्ल्ड सूफी फ़ोरम के चेयरमैन और आल इंडिया उलमा व मशाइख़ बोर्ड के अध्यक्ष सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने लखनऊ में एक धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि तालीमे नबी पर अमल क़िये बिना अमन संभव नहीं है उन्होंने कहा कि अल्लाह के प्यारे रसूल हज़रत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया कि अगर आपका पड़ोसी आपके दुर्व्यवहार की वजह परेशान है तो आप मुसलमान नहीं हो सकते ,अब पड़ोसी को देखा जाए तो एक घर दूसरे घर का पड़ोसी है,एक मोहल्ला दूसरे मोहल्ले का पड़ोसी है,एक शहर दूसरे शहर का पड़ोसी है,एक प्रदेश दूसरे प्रदेश का पड़ोसी और एक देश दूसरे देश का पड़ोसी है इस तरह पूरा संसार आपस में पड़ोसी है तो सार यही निकलता है कि अगर लोग सिर्फ इस एक शिक्षा पर अमल कर ले और अपने पड़ोसी का ख्याल रख लें तो पूरे संसार में शांति स्थापित हो जायेगी।
उन्होंने कहा कि पैगम्बर ने कहा कि सबसे बड़ा पुण्य का काम लोगों को खाना खिलाना है,लोग इस तालीम पर अमल करें तो संसार से भूकमरी समाप्त हो जायेगी ,हम सबको इस पर अमल करना है जब हम अमल करके दिखा देंगे तो लोग चाहे जितनी कोशिश कर लें हमारे खिलाफ किसी के दिल में नफरत पैदा नहीं कर सकते ,यही काम सूफिया ने किया उन्होंने नबी की तालीम पर अमल किया और पूरा संसार उनका दीवाना हो गया,और चाहे कोई कितनी नफरत की बात करे उनके आस्तानों पर अकीदतमंदो की भीड़ कम नहीं होती।
हज़रत ने कहा कि हम सबको अगर अमन चाहिए तो खुद को उसी सांचे में ढालना होगा जो सुन्नत के मुताबिक हो आजकल लोग सिर्फ अच्छी बाते बता रहे हैं उसपर खुद अमल नहीं करते यही वजह है कि समाज में बुराइयां फैल रही हैं,लगातार लोग घाटे में जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि समाज में नफरत नहीं बढ़ रही है ऐसा जो लोग कह रहे हैं उनका दृष्टिकोण सही नहीं है मोहब्बत कम हो रही है यह सही बात है ,जब मोहब्बत घटेगी तो उसी अनुपात में नफरत फैलेगी यही हो रहा है इसे रोकने का एक मात्र साधन नबी की शिक्षाओं पर अमल करना है।
यह मुबारक महीना है इसका एहतराम यह है कि हम सब नबी के बताए रास्ते पर चलें और लोगों के लिए राहत और आसानी पैदा करने वाले बन जाएं लोग हमें देख कर कहें कि यहां हमें कोई खतरा नहीं है यह मोहम्मद सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम के गुलाम हैं इनके पास हमारी इज्जत ,दौलत जान सब सुरक्षित है,सभी को आमदे रसूल की मुबारकबाद देते हुए हज़रत ने कहा कि इस पूरे हफ्ते को आल इंडिया उलमा व मशाइख़ बोर्ड वीक ऑफ ह्यूमिनिटी के तौर पर मनाता है आप सब इसे उसी तरह मनाइए लोगों की खूब मदद कीजिए गरीबों यतीमो के काम आइए ,लोगों को खाना खिलाइए ,पेड़ लगाए ,साफ सफाई रखे और दुरूद की महफ़िल साजाएं।

By: Yunus Mohani

वसीम रिज़वी की गिरफ्तारी को लेकर आल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड की राष्ट्रपति से गुहार

12 Sept, 2019 महाराजगंज
आल इंडिया उलमा व मशाइख़ बोर्ड की महराजगंज शाखा ने महामहिम राष्ट्रपति को जिलाधिकारी महराजगंज के माध्यम से शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन एवं विवादित फिल्म (आयशा द मदर ऑफ बिलीवर्स) के निर्माता वसीम रिज़वी के विरूद्ध सख्त कानूनी कार्यवाही किए जाने की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा। बोर्ड के महाराजगंज यूनिट द्वारा 6 सूत्रीय ज्ञापन दिया गया जिसमें वसीम रिज़वी द्वारा निर्मित दुनिया भर के मुसलमानों की भावनाओं को आहत पहुंचाने वाली फिल्म को भारतीय सेंसर बोर्ड द्वारा मंजूरी न दिए जाने की मांग की गई। साथ ही फिल्म के निर्माता के उद्देश्य की जांच करवाने एवं इस फिल्म के निर्माण के लिए पैसा कहां से आया इस बात की जांच करवाने की मांग की गई। बोर्ड के लोगों का मानना है कि इस फिल्म के निर्माण में किसी आतंकी संगठन का पैसा लगा है या फिर किसी विदेशी साजिशकर्ता का क्योंकि इस फिल्म का उद्देश्य लोगों में नफरत पैदा कर देश में अशांति फैलाना है।क्योंकि यह फिल्म भारत के संविधान द्वारा प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमा से बाहर जाकर समुदाय विशेष की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के उद्देश्य से बनी है।

अतः इसकी रिलीज़ पर तत्काल रोक अति आवश्यक है। यह हमारे देश की आंतरिक सुरक्षा का मामला है। इससे पहले बोर्ड की महाराजगंज शाखा द्वारा बीते शुक्रवार को इस फिल्म के विरूद्ध प्रदर्शन किया गया और हस्ताक्षर अभियान चलाया गया। जिलाधिकारी से मिलने गए प्रतिनिधिमंडल द्वारा जिलाधिकारी को ज्ञापन के साथ हस्ताक्षरित बैनर भी सौंपा गया जिसे जिलाधिकारी महोदय द्वारा महामहिम राष्ट्रपति महोदय को प्रेषित किया जाएगा। प्रतिनिधिमंडल में सय्यद अफजाल, मौलाना बरकत हुसैन, मौलाना अब्दुल्ला, मौलाना कमरे आलम, आज़ाद अशरफी, इद्रीस खान अशरफी, महताब आलम, डॉक्टर नेहाल, महबूब आलम, शमीम अशरफी आदि शामिल रहे।

آل انڈیا علما و مشائخ بورڈ صدر دفتر میں ذکر شہدائے کربلا

شہادت حسین ؓ کا مقصد نظام عدل و انصاف کو قائم کرنا: محمد حسین شیرانی
(ستمبر11،نئی دہلی (پریس ریلیز)
شہادت حسین ؓ کے مقصود کو سمجھیں تو معلوم ہوگا کہ آپ کا مقصدکتاب و سنت کے قانون کو صحیح طور پر رواج دینا، نظام عدل و انصاف کو قائم کرنا، حق کے مقابلہ میں باطل سے نہ ڈرنا، خوف و ہراس اور مصیبت و مشقت میں نہ گھبرانا اور ہر وقت اپنے مالک حقیقی کو یاد رکھنا اور اسی پر توکل اور ہر حال میں خداکا شکر ادا کرناتھا، ان مقاصد کو آج ملت فراموش کر چکی ہے جس کی وجہ سے تاریکی میں پھنستی جا رہی ہے۔ ہمیں چاہئے کہ ہم شہادت حسین ؓ کے مقصود کو سمجھیں، اس سے پیغام حاصل کریں اور تاریک زندگیوں کو روشن و منور کریں۔ان خیالات کا اظہار محمد حسین شیرانی نے کیا۔
محمد عظیم اشرف نے کہا کہ امام عالی مقام حضرت امام حسینؓ کی شہادت تاریخ کا ایک الم ناک حادثہ ہے جسے امت کبھی فراموش نہیں کر سکتی، صدیاں گزرنے کے بعد بھی شہادت کربلا لوگوں کو یاد ہے لیکن حقیقت یہ ہے کہ اس عظیم شہادت کے باوجود آج امت نے امام عالی مقام کی قربانیوں اور مقصود شہادت کو فراموش کر دیا ہے، دین اور نبوی تعلیمات کے لئے جو نا قابل فراموش کارنامہ امام عالی مقام اور آپ کے مبارک خاندان نے انجام دیا اس کو نظر انداز کر دیاجس کی وجہ سے ملت خسارے میں ہے۔
محفل میں حافظ محمد قمرالدین نے منقبت پیش کی، محمد اشرف ایس، محمد جنید، صدام حسین،طفیل احمد،حسنین خان،محمد شعیب، توصیف،شاداب اور الفیض وغیرہ نے شرکت کی، محفل کا اختتام صلوٰہ وسلام،فاتحہ خوانی اور ملک میں امن و امان کی دعا کے ساتھ ہوا۔

By: Husain Sherani

پروگرام میں دعوت دینے کے لیے جمعیۃ علماء ہند کا شکریہ، بحثیت قوم ہمیں خود احتسابی کی ضرورت: سید محمداشرف کچھوچھوی

دہلی:۵/اگست
ملک میں جاری ماب لنچنگ کے انسانیت سوز واقعات اور فرقہ پرستی کے بڑھتے قدم کو روکنے کے لیے جمعیۃ علماء ہند کے زیر اہتمام تالکٹورہ انڈوراسٹیڈیم نئی دہلی میں امن و یکتا سمیلن منعقد ہوا جس میں ہند و، مسلم، سکھ، عیسائی سمیت تمام مذاہب و مسالک کے رہنماؤں نے شرکت کی.
آل انڈیا علماء و مشائخ بورڈ کے بانی و صدر اور ورلڈ صوفی فورم کے چیئرمین حضرت سید محمد اشرف کچھوچھوی نے پروگرام میں دعوت کے لیے جمعیۃ علماء ہند کا شکر یہ ادا۔ انھوں نے کہا کہ اسلام سلامتی اور خیرخواہی کا درس دیتا ہے۔ ہمارے رسول صلی اللہ علیہ وسلم کی سیر ت موجود ہے کہ آپ نے کس طرح اپنے دشمنوں کے ساتھ خیر خواہی کا معاملہ پیش کیا.

انہوں نے کہا کہ ماب لنچنگ کے خلاف موثر قانون بنایا جائے. مذہب، ذات پات، رنگ و نسل، زبان اور فرقوں کی بنیاد پر بانٹنے والے ملک اور قوم کے بدترین دشمن ہیں.

Prof. Khwaja Ekram at AIUMB’s conclave: “Muslims never lagged behind in sacrificing their life for the country” WordForPeace Special Correspondent

New Delhi: 25 August

The one-day seminar organized by All India Ulama and Mashaikh Board at Delhi’s Ghalib Academy on the theme “Participation of Muslims in the creation and development of India” successfully concluded with the remarkable message from the Chief Guest, Professor Khwaja Mohammad Ikramuddin of Jawaharlal Nehru University, Delhi. He said: “Muslims never lagged behind in sacrificing their life for the country from Tipu Sultan to Birgedier Veer Abdul Hameed and ever since, Muslims have been in the front in giving life and wealth for the country”. Speaking on the core subject of Muslims’ participation in the freedom movement, he said that, whether it was the first freedom struggle of 1857 or the 1947 Independence of India from the British rule, the sacrifices of Muslims along with Hindus and Sikhs appear in the first row.

Another JNU professor, Syed Akhtar Hussain was the distinguished guest at the seminar. He dwelt on the significance of Musaddas Haali, also known as “Musaddas e-madd o-Jazr e-Islam”. It gives a historical account of the rise and fall of the Islamic empire in the sub-continent. It also speaks about the Islamic empire at its best and worst and aims to forewarn the Muslims of the sub-continent, make them more aware of their past and help them learn from their forefathers’ mistakes.

In this event, scholars, ulema and researchers from across the capital participated and presented their research papers. The program was presided by Syed Farid Ahmed Nizami of Dargah Hazrat Nizamuddin Aulia.

Speaking at the seminar, Professor Khwaja Khwaja Mohammed Ikramuddin said that the success of the independence struggle was possible only when the whole country unitedly fought against the British with the same fervour. He further said, at that time, a great many Muslim ulema waged both intellectual and physical jihad against the British, after which scores of people came out of their comfort zones and fought against the colonisers. “The ulema did not just give the fatwa but also jumped straight into the freedom war, from Allama Fazle Haq Khairabadi, Mufti Inayatullah Kakorvi, Maulana Ali Jauhar to Maulana Hasrat Mohani. The Muslim freedom lovers everywhere were wearing shroud in the head against the British, and that is why the British rulers killed and crucified thousands of ulama and their bodies were seen on the trees on both sides of the road. He also said that Tipu Sultan, Bahadur Shah Zafar, and many other names like them cannot be removed from the history of India’s independence.

Highlighting the role of Muslim poets and philosophers in the Independence struggles, JNU Professor in the Urdu department, Syed Akhtar Hussain said that Urdu journalism’s herculean efforts are recorded in golden letters in the history of the Indian freedom movement. The honour to go to jail under the British Press Act against Indian journalists was also conferred upon a Maulana, an Urdu journalist who was named Maulana Hasrat Mohani. He was the first Indian journalist who was imprisoned under this Act, he said.

In this program, Maulna Zafaruddin Barkati Editor Monthly Kanzul Iman Delhi, Maulana Abdul Moeed Azhari Editor Naya Savera, Ghulam Rasool Dehlavi Research Scholar Jamia Milia Islamia, Maulana Maqbool Salik Misbahi, Maulana Mir Sayyed Wasim Ashraf Sadar of All India Sunni Mission etc. were also invited.

The program was moderated by Younus Mohani. Hafiz Mohammad Nizamuddin recited the Quran-e- Majeed, while Hafiz Qamruddin, Hafiz Mohammad Azim Ashraf, Rukhsar Fatima recited the Na’at-e- Rasool. Young girl students including Gulnaz, Muskan, Saima, Raunaq, Kaneez, Mansha, Jannatul Firdaus, Ghosia, Farha and Zia presented the Urdu national anthem (Tarana).

The AIUMB program coordinator Mr. Husain Sherani gave vote of thanks and at the end of the program, the Wali Ahad Sajjadanshin of Dargah Hazrat Nizamuddin Auliya prayed for the peace and prosperity of the country.

मुल्क के लिए जान देने में मुसलमान कभी पीछे नहीं रहे: प्रो. ख्वाजा मोहम्मद इकरामुद्दीन

नई दिल्ली: 25 अगस्त

आल इंडिया उलमा व मशायख बोर्ड के द्वारा एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन दिल्ली के ग़ालिब अकादमी में किया गया जिसका विषय “भारत के निर्माण व विकास में मुसलमानों की भागीदारी “था इस में देश भर से आये शोधार्थियों ने अपने शोध पत्र पढ़ें.,सेमिनार में मुख्य अतिथि के रूप में जवाहर लाल नेहरु यूनिवर्सिटी दिल्ली के प्रोफ़ेसर ख्वाजा मोहम्मद इकरामुद्दीन रहे, कार्यक्रम कि अध्यक्षता सय्यद फरीद अहमद निजामी, वली अहद सज्जादानशीन दरगाह हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया ने की, सेमिनार में विशिष्ट अतिथि के रूप में जे एन यू के प्रोफेसर सय्यद अख्तर हुसैन रहे.

सेमिनार में बोलते हुए प्रोफ़ेसर ख्वाजा ख्वाजा मोहम्मद इकरामुद्दीन ने कहा कि जंगे आज़ादी की कामयाबी तभी मुमकिन थी जब पूरा देश एकजुट होकर अंग्रेजों के खिलाफ लड़ता और यही हुआ भी. उन्होंने कहा कि उस दौर में बड़े बड़े मुस्लिम उलमा ने अंग्रेजों के खिलाफ जिहाद के फतवे दिये जिसके बाद लोग बाहर आये, उलमा ने सिर्फ फतवे नहीं दिए बल्कि खुद भी जंग में सीधे तौर पर कूदे, चाहे वह अल्लामा फजले हक खैराबादी हों या मुफ़्ती इनायतुल्लाह काकोरवी, जौहर बिरादरान हों या फिर मौलाना हसरत मोहानी, हर तरफ आज़ादी के दीवाने अंग्रेजों के खिलाफ सर पर कफन बांधे जंगे आज़ादी में थे, यही वजह थी कि हजारों उलमा को अंग्रेजों ने सड़क के किनारे एक साथ सूली पर चढ़ा दिया और सड़क के दोनों किनारे पर मौजूद पेड़ों पर उलमा की लाशें नज़र आयीं.

उन्होंने कहा कि टीपू सुल्तान ,बहादुर शाह ज़फर यह नाम हिन्दुस्तान की जंगे आज़ादी के इतिहास से हटाये नहीं जा सकते, हमें आने वाली नस्लों तक इस बात को पहुँचाना है.
प्रोफेसर सय्यद अख्तर हुसैन ने उर्दू ज़बान के जंगे आज़ादी में रोल पर रोशनी डालते हुए कहा कि उर्दू शायरी में ही नहीं बल्कि उर्दू पत्रकारिता का भारतीय इतिहास के जंगे आज़ादी में सुनहरे अक्षरों में दर्ज है और यह सम्मान भी उर्दू पत्रकारिता के पास है कि ब्रिटिश प्रेस एक्ट के अंतर्गत जेल जाने वाला पहला भारतीय पत्रकार भी उर्दू पत्रकारिता करने वाला एक मौलाना था जिसका नाम मौलाना हसरत मोहानी था.

उन्होंने जंगे आज़ादी में मुसलमानों की भागीदारी विषय पर बोलते हुए कहा कि मुल्क के लिए जान देने में मुसलमान कभी पीछे नहीं रहे, चाहे वह जंगे आज़ादी हो या फिर आज का वक़्त, जब भी कुर्बानियों की बारी आई है मुसलमान पहली पंक्ति में खड़े दिखाई देते हैं. यह सिलसिला टीपू सुल्तान से लेकर बिरगेडियर उस्मान वीर अब्दुल हमीद तक और तब से अब तक चला आ रहा है.

सेमिनार में मौलना ज़फरुद्दीन बरकाती संपादक कन्जुल ईमान दिल्ली मासिक, ‘मौलाना अब्दुल मोईद अजहरी संपादक नया सवेरा, गुलाम रसूल देहलवी रिसर्च स्कालर जामिया मिलिया इस्लामिया, मौलाना मकबूल सालिक मिस्बाही, मौलाना मीर सय्यद वसीम अशरफ सदर आल इंडिया सुन्नी मिशन, आदि ने अपने शोध पत्र पढ़े.
कार्यक्रम का संचालन यूनुस मोहानी ने किया, कार्यक्रम की शुरुआत तिलावते क़ुरान ए मजीद से हाफिज़ मोहम्मद निज़ामुद्दीन ने की, हाफिज़ कमरुद्दीन, हाफिज़ मोहम्मद अज़ीम अशरफ, रुखसार फातिमा ने नाते रसूल और गुल्नाज़,मुस्कान,साईमा,रौनक़,कनीज़,मंशा,जन्नतुल फिरदौस,गोसिया,फरहा और ज़िया ने तराना पेश किया.

सेमिनार के संयोजक मोहम्मद हुसैन शेरानी ने धन्यवाद ज्ञापन दिया, कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रगान हुआ और मुल्क की तरक्क़ी एवं अमन व शांति की दुआ की गई.

By: Yunus Mohani

نئی دہلی میں 25 اگست 2019 کو یک روزہ ” بھارت کی تعمیر و ترقی میں مسلمانوں کی حصے داری” سیمینار

نئی دہلی: 25 اگست 2019 ء کو بروز اتوار دوپہر دو بجے سے شام چھ بجے تک آل انڈیا علما و مشائخ بورڈ کے زیر اہتمام غالب اکیڈمی درگاہ حضرت نظام الدین اولیاء دہلی میں یک روزہ سیمینار بعنوان” بھارت کی تعمیر و ترقی میں مسلمانوں کی حصے داری” ہونا طے پایا ہے جس میں آپ کی شرکت کامیابی کی ضمانت ہے.موضوع کے تحت سیمینار میں ” بھارت

کو سونے کی چڑیا بنانے اور مرکز امن و شانتی بنائے رکھنے پر مسلم حکمرانوں ، نوابوں اور علمائے کرام کی مسلسل کوششوں کا تذکرہ ” بطور خاص تحریر و تقریر کا عنوان ہوگا، تاکہ سیمینار کے مندوبین، حاضرین و سامعین اور ناظرین کو بتا سکیں کہ جنگ آزادی میں ایک لاکھ چالیس ہزار علمائے دین اور ہزاروں مسلمانوں کی قربانی ، تحریک آزادی کے نامور مسلم قائدین کی سیاسی بصیرت اور علمائے ہند کی سماجی قیادت. بہمنی، مغلیہ، سوری، غلامان، خلجی حکمرانوں اور مسلم نوابوں کی تعمیری خدمت ، بھارتی پرچم ترنگا کے مرکز لال قلعہ کی تاریخی شان و شوکت ، بھارت کے سیاسی سماجی نظام اور مشرقی علوم و فنون کی تعمیر و ترقی میں مسلمانوں کی ہزار سو سالہ خدمات پر دانشوروں کا قومی اجتماع اور مذاکرہ یہ تقاضا کرتا ہے کہ بھارت کی تہذیب اور دستور ہند کے تاریخی تقاضوں کا خیال رکھا جائے تب ہوگا ” سب کا ساتھ ، سب کا وکاس” اور پھر حاصل ہوگا ” سب کا وشواس

अहंकार और नफरत को ज़िबाह किये बिना पूरा नहीं कुर्बानी का मकसद – सय्यद अशरफ

11 अगस्त ,लखनऊ
लोगों को ईद उल अजहा की मुबारकबाद देते हुए आल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड के अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफी फोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने कहा कि अल्लाह की राह में कुर्बानी का असल मकसद तब पूरा होगा जब हम अपने घमंड गुरूर और नफ़रत को भी खतम कर दें और लोगों के लिए आसानी पैदा करने वाले बन जाएं।
उन्होंने कहा कि मुल्क में जिस तरह से नफरतें सर चढ़ कर बोल रही हैं उन्हें खतम करना हमारा काम है ,हमें खुद आगे बढ़ कर लोगों को गले लगाना है सुन्नते इब्राहिमी तो हम अदा कर रहे हैं सीरते रसूल पर भी हमारी नजर रहनी चाहिए और अगर हमारी ज़िन्दगी का हर लम्हा उसमें ढल गया तो हम कामयाब हो जायेंगे ,फिर कोई हमसे नफरत नहीं कर सकेगा।
हज़रत ने लोगों से कहा कि कुर्बानी ज़रूर करें जिनपर वाजिब है लेकिन अपने हमवतन भाइयों के जज्बात का ख्याल रखें,हमारी वजह से किसी को किसी भी तरह की परेशानी न हो,साफ सफाई का खूब ख्याल रखे,जिन जानवरों पर पाबंदी है हरगिज़ उनकी कुर्बानी न करें,कानून का पालन करे और खून को नालियों में न बहाएं,सोशल मीडिया पर एहतियात बरतें कि किसी भी कुर्बानी वाली विडियो को शेयर न करें,।
हज़रत ने अपील करते हुए कहा कि जो लोग नफली कुर्बानी करना चाहते हैं वह मुल्क में परेशान हाल लोगों की मदद करें ,कुर्बानी भुखमरी के खिलाफ सबसे बड़ी जंग है इस बात का ख्याल रखते हुए जरूरतमंदो तक उनका हिस्सा हर हाल में पहुंचाएं ,दुनिया में जहां भी इंसानियत परेशान है ज़ुल्म का शिकार है उनके लिए दुआ करें और मुल्क की फिज़ा खुशगवार रहे इसकी दुआ करें।उन्होंने आल इंडिया उलमा मशाईख बोर्ड की जानिब से लोगों को मुबारकबाद पेश करते हुए यह भी कहा कि सभी बोर्ड के जिम्मेदार अपनी अपनी जगह पर लोगों में जागरूकता फैलायें,ताकि लोग असल मकसद तक पहुंच सके।

कुर्बानियों के बाद मिली है आज़ादी नफरत इसे बर्बाद न करने पाये: सय्यद मोहम्मद अशरफ

15 अगस्त लखनऊ,

आल इंडिया उलमा मशाईख बोर्ड के अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफी फोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने अहले वतन को जश्ने आज़ादी की मुबारकबाद देते हुए कहा कि बड़ी कुर्बानियों के बाद गुलामी की जंजीरों से आज़ादी मिली है अब फैल रही नफरत इसे बर्बाद कर देगी।

हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने इस मौके पर कहा कि बोर्ड नफरतों को खत्म कर मोहब्बत बांटने का काम कर रहा है,और यह काम तेजी से हो भी रहा है,मुसलमान अपने मुल्क से मोहब्बत करते हैं क्योंकि नबी का फरमान है कि वतन से मोहब्बत ईमान का हिस्सा है,फिर कोई मुसलमान कैसे अपने देश से गद्दारी कर सकता है,हां कुछ ग़लत लोग हैं जिनके सिर्फ नाम मुसलमानों जैसे है मगर वह गद्दार है मजहब के भी और वतन के भी ऐसे लोगों पर सख्त नजर रखी जानी चाहिए ,।

बोर्ड के आह्वाहन पर देश की ज़्यादातर खानकाहों में झण्डा फहराया गया,और यह सिलसिला मदरसों से बढ़कर मस्जिद के सहन तक पहुंच गया है,दरगाह निज़ामुद्दीन औलिया के प्रांगण में भी झण्डा फहराया गया जिसमें बोर्ड दिल्ली शाखा के जिम्मेदार सय्यद फरीद निजामी ने झण्डा फहराया,दरगाह अजमेर शरीफ में चिश्ती मंज़िल में झण्डा फहराया गया जिसमें बोर्ड के संयुक्त सचिव सय्यद सलमान चिश्ती ने झण्डा फहराया,हैदराबाद में तेलंगाना प्रदेश के अध्यक्ष सय्यद आले मुस्तफा पाशा ने झण्डा फहराया,कर्नाटक में सय्यद तनवीर हाशमी ने खानकाह बीजापुर में झण्डा फहराया

पंजाब में रमज़ान अशरफी ने झण्डा फहराया, राजस्थान में कारी अबुलफतेह ने झण्डा फहराया साथ ही छत्तीसगढ़ में मौलाना मोहम्मद अली फारुकी ने झण्डा फहराया।

आज जश्ने आज़ादी के मौके पर पूरे देश में बोर्ड की हर शाखा में झण्डा फहराया गया और राष्ट्रगान हुआ, हर जगह सभा आयोजित की गई और लोगों में मिठाई बांटी गई। लखनऊ में बोर्ड के प्रदेश कार्यालय में भी झण्डा फहराया गया और राष्ट्रगान गाया गया जिसमें बोर्ड के जिम्मेदारों ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर बढ़ रही नफरत को रोकने के लिए बोर्ड के लखनऊ शाखा के अध्यक्ष मौलाना इश्तियाक क़ादरी ने मस्जिदों में फ़्री क्लीनिक शुरू करने की बात की और अपनी मस्जिद में इसे शुरू करने का ऐलान किया,उन्होंने कहा कि पूरे मुल्क में मस्जिदों में यह काम शुरू किया जाना चाहिए।

इस मौके पर उन्होंने कहा कि मस्जिद में जब बंदा जाता है तो उसकी रूह का इलाज होता है वहां अगर उसके जिस्म का इलाज भी होने लगेगा तो मकसद पूरा हल होगा और यह क्लीनिक हर मजहब के लोगों के लिए होगी जो फ्री में गरीबों को दवा देगी और इलाज होगा इससे यकीनन नफरतें खतम होंगी ।
रायेबरेली, संभल,मुरादाबाद, मेरठ,फैजाबाद,मकनपुर सहित देश में बोर्ड की हर शाखा में बड़ी धूमधाम से जश्ने आज़ादी मनाया गया।



उलमा मशाइख बोर्ड का स्कूल में पोधरोपण

1 अगस्त, 2019 (मोगा)

इस्लाम में पोधरोपण सदक़ा -ए- जारिया.