हक़ कभी ज़ुल्म से समझौता नहीं करता, यही है कर्बला का सबक़: सय्यद मोहम्मद अशरफ

20 सितम्बर /किछौछा

आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड के अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफी फोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने कहा कि “हक कभी ज़ुल्म से समझौता नहीं करता यही कर्बला का सबक है” सिर्फ इतना ही नहीं उन्होंने आगे कहा कि हमें हक का पैरोकार होने के लिए उनके किरदार को अपनाना पड़ेगा जो अहले हक हैं और फिर हम देखेंगे कि ज़ालिम क्यों न कितना भी ताक़तवर हो वह हारा हुआ ही नज़र आएगा .

उन्होंने कहा कि यज़ीदियत हर दौर में हुसैनियत से हारती रहेगी क्योंकि हक से कभी बातिल जीत नहीं सकता सत्य से असत्य को विजय नहीं मिल सकती कुछ देर को सत्य परेशान हो सकता है लेकिन उसे पराजित नहीं किया जा सकता जब परेशानी आये तो सब्र से काम लेना है सब्र की मेराज का नाम हुसैन है .

हज़रत ने कहा कि धोके में आने की ज़रूरत नहीं है बस साबिर तलाश कीजिये हक़ मिल जायेगा क्योंकि कुरान में साफ़ कहा गया है कि “अल्लाह सब्र करने वालों के साथ है”ज़िक्रे हुसैन हर दौर में हुआ है और हर दौर में होगा क्योंकि इससे हमें प्रेरणा मिलती है सत्य की राह पर चलने की और ईमान ताज़ा हो जाता है .

उन्होंने कहा कि अपने किरदार को वैसा कर लेना जैसा इस्लाम चाहता है उसके लिए अहलेबैत के किरदार को अपनाना होगा और जब आप इसे अपना लेंगे तो कोई सरकार कोई कानून बना ले आप उससे प्रभावित इसलिए नहीं होंगे क्योंकि आप कोई ऐसा अमल नहीं करेंगे जिससे कोई आप पर या आपके मज़हब पर ऊँगली उठा सके .

उन्होंने सरकार द्वारा तीन तलाक़ पर लाये गए अधध्याधेश पर कहा कि यह चुनावी दौर है ऐसे में ये क़दम चुनावी रणनीत का हिस्सा भर है इससे मुस्लिम औरतों की ज़िन्दगी बेहतर नहीं होगी बल्कि समाज में अपराध अधिक बढ़ेंगे सरकार को इस ओर ध्यान देना चहिये था क्योंकि लोकतंत्र में जनता के हित की बात होनी चहिये न कि दल के हित की उन्होंने यह भी कहा कि मुस्लिम समाज को भरोसे में लेकर फैसला किया जाना चाहिए था.

हज़रत ने कहा कि हमें अपने किरदार को अहलेबैत के किरदार में ढालना होगा फिर आप यहाँ भी इज्ज़तवालों में शुमार होंगे और वहां भी.

By: Yunus Mohani

वोट हमारा हक, वोटर बनना हमारी जिममेदारी : सय्यद मोहम्मद अशरफ

5/सितंबर , चित्तौड़गढ़

“वोट हमारा हक़ और वोटर बनना हमारी ज़िम्मेदारी” आल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष  व
वर्ल्ड सूफी फोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने यह बात जगह जगह लोगों के नाम वोटर लिस्ट से गायब होने पर लोगों को आगाह करते हुए कही।
हज़रत ने कहा, हर तरफ से आवाज़ उठ रही है कि वोटर लिस्ट में नाम गायब हैं और हर चुनाव में ये होता आया है, पूरे पूरे मोहल्ले के लगभग लोगों के नाम वोटर लिस्ट से गायब होते हैं , लोग अपने मताधिकार का प्रयोग करने से वंचित रह जाते हैं और उनका लोकतंत्र में जो सबसे बड़ा अधिकार है वह उसका फायदा नहीं उठा पाते।
उन्होंने एनआरसी की बात करते हुए कहा की आसाम में गरिकता के लिए जूझ रहे हैं ,अगर समाज बेदार नहीं हुआ और उसने अपना कर्तव्य नहीं निभाया तो कल ऐसे लोगों की स्थिति भी वैसी ही हो सकती है कि उन्हें अपनी नागरिकता को साबित करने के लिए दर दर की ठोकरें खाना पड़े और अपने ही देश में शरणार्थी जैसी स्थिति हो जाए ।
हज़रत किछौछवी ने कहा कि मैंलोगों से आह्वाहन करता हूं कि भारत के निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची का पुनरीक्षण कार्य किया जा रहा है, सभी 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके लोग अपना नाम मतदाता सूची में जुड़वा लें ताकि आने वाले समय में आपको आपके संवैधानिक अधिकार से वंचित न किया जा सके।
उन्होंने यह भी कहा कि सब लोग मतदाता सूची में न सिर्फ नाम जुड़वाएं बल्कि वोट भी ज़रूर करें क्योंकि आपके वोट न करने से यदि कोई ग़लत व्यक्ति चुना जाता है तो उसके द्वारा किए गए गलत कार्यों के आप भी भागीदार होते हो क्योंकि आपने मताधिकार का प्रयोग न करके गलत व्यक्ति को मौक़ा दिया।
हज़रत ने कहा कि खासतौर पर मुसलमान इन चीज़ों से दूर रहते हैं, उन्हें अपनी ज़िम्मेदारी समझनी चाहिए,वहीं उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि किसी भी प्रकार की हीलहवाली लोकतंत्र में बर्दाश्त नहीं की जाएगी सभी वैधपत्र रखने वाले लोगों को मताधिकार का प्रयोग करने का हक़ है, यदि किसी कारणवश उस व्यक्ति का नाम वोटरलिस्ट में न हो तो उसे आधार के ज़रिए वोट करने का मौक़ा चाहिए और आधार को वोटर आइडी से जोड़ दिया जाना चाहिए।

जो देश का दुश्मन वह हमारा दुश्मन : सय्यद मोहम्मद अशरफ

चित्तौड़गढ़।

चीन ने अपनी जनसंख्या को अपनी ताकत में बदल दिया और इसके बल पर आज विश्व की विकसित अर्थव्यवस्था बन चुका है। लेकिन हम इसी बात को लेकर रो रहे हैं । हम जनसंख्या नियंत्रण कानून के नाम पर राजनीति कर रहे हैं।
यह बात सैयद सरदार अहमद अशरफी के सालाना उर्स में सम्मिलित होने आए आल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष सैयद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कही।
हज़रत ने कहा कि हमारे देश में संसाधनों की कोई कमी नहीं है। लेकिन कर्ताधर्ताओं की इच्छा शक्ति की कमी से सही दिशा में कार्य नहीं हो रहे हैं। संसाधन बढ़ाए जा सकते हैं, देश में शिक्षा संस्थानों की उपलब्धता बढ़ाई जा सकती है, रोजगार के अवसर बढ़ाए जा सकते हैं।
उन्होंने कश्मीर में सेना पर पत्थर बाजी के सवाल के जवाब में कहा कि कश्मीर से कन्याकुमारी और गुजरात से पश्चिम बंगाल तक कहीं भी और कोई भी मेरे देश और देश के कानून के विरुद्ध आवाज उठाएगा तो वह मेरा सबसे बड़ा दुश्मन होगा। चाहे वह मेरा भाई हो, चाहे रिश्तेदार हो, दोस्त हो चाहे कोई भी हो।
किछौछवि ने कहा कि आज हर इंसान एक दूसरे से इल्जामी सवाल कर रहा है और इल्जामी जवाब दे रहा है। जैसे कोई किसी को कहे कि चोरी मत करो तो सामने वाला जवाब देता है कि तुम्हारा भाई भी तो चोर है। इस तरह की मानसिकता से समाज में सुधार नहीं होगा हमें महसूस करना पड़ेगा जो गलत है वह गलत है हर आदमी की जिम्मेदारी है कि वह अपने को बेहतर बनाएं। हमें अपनी जाति धर्म क्षेत्र भाषा से ऊपर उठकर अपने आप को बेहतर बनाना होगा ऐसी राह निकालनी होगी जिससे समाज का विकास हो।
मैं मानता हूं कि धर्म हमें हमेशा उस राह पर डालता है जो हमें बेहतर बनाती है। आज विडंबना यह है कि धर्म की आड़ में ही अधर्म किया जा रहा है और उसे धर्म बताने की शिक्षा दी जा रही है ऐसे चंद लोग हैं जिन्हें हमें पहचानना है, हमारी खामोशी जुर्म को बढ़ाने में मददगार होती है ,और हम इसमें भागीदार हो जाते हैं। देशवासियों से यह अपेक्षा है कि जहां कहीं भी बुराई देखें उसके खिलाफ खड़े हो जाएं। सय्यद मोहम्मद अशरफ ने महाभारत का उदाहरण देते हुए बताया कि जब अर्जुन ने युद्ध के समय अपने सामने खड़े अपने परिजनों पर बाण चलाने के लिए मना कर दिया तो कृष्ण ने उन्हें समझाया कि जो सामने खड़े हैं वह तुम्हारे अपने हैं लेकिन जालिम है मैंने तुम्हें जुल्म के खिलाफ खड़ा किया जुल्म करने वाला कोई भी हो अगर अच्छा बनना है तो जुल्म के खिलाफ खड़ा होना होगा ,उस समय यह नहीं देखा जाएगा कि सामने आपका दोस्त है या रिश्तेदार है अगर वह ज़ालिम है तो तुम्हें उसके विरोध में खड़ा होना होगा। धर्म हमेशा सार्वभौमिक बात करता है जो दुनिया में सभी जगह सही होती है हम जिस धर्म की बात करते हैं लेकिन उसे मानते नहीं है। उन्होंने अल्पसंख्यक कल्याण के प्रयासों को नाकाफी बताया और कहा कि हमने बदलाव के साथ ही इस क्षेत्र में भी परिवर्तन की उम्मीद की थी लेकिन चेहरे बदले हैं काम नहीं। विकास योजनाएं आम भारतीयों को ध्यान में रखकर बनाई जानी चाहिए, राजनीति और वोट के लिए नहीं ध्रुवीकरण के लिए योजनाएं नहीं बनानी चाहिए। जब तक देश के हर नागरिक का विकास नहीं होगा तब तक देश का विकास नहीं हो सकता है ।
उन्होंने यूरोप का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां पर जिसके पास कोई काम नहीं है वह भी हमसे अच्छी जिंदगी बिता रहा है।
हज़रत ने तीन तलाक के मुद्दे को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यह पूरी तरह से राजनैतिक मुद्दा है समाज से इस संबंध में कभी कोई आवाज नहीं उठी। आने वाले चुनाव में समर्थन देने की बात पर उन्होंने कहा कि हम सभी में आपस में तुलना करेंगे और जो बेहतर होगा देश हित में होगा उसके बारे में सोचेंगे ।
इसके साथ ही उन्होंने राम मंदिर के मुद्दे पर बोलते हुए कहा कि राम मंदिर मुद्दा आपस में बैठकर सुलझाया जा सकता है या फिर न्यायालय के आदेश की पालना की जा सकती है।लेकिन आपस में वही लोग सुलझा सकते हैं जो पक्षकार हैं, यह प्रकरण नयायालय में विचाराधीन है तो हमें न्यायालय पर भरोसा करना चाहिए। चुनाव सामने आते ही राम मंदिर के मुद्दे को उठाए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि हम हिंदुस्तानी बहुत ज्यादा भावुक है हम जानते हैं कि सामने वाला हमारी भावुकता का फायदा उठा रहा है लेकिन हम बार-बार उसके फरेब में आ जाते हैं हमें अपने आप में सुधार करना होगा।
प्रेस वार्ता के दौरान सज्जादा नशीन मोहम्मद सलीम अशरफी मौलाना मोहम्मद इब्राहिम अशरफी और यूसुफ अशरफी सहित कई अकीदतमंद उपस्थित रहे।

بہار اسٹیٹ مدرسہ ایجوکیشن بورڈ کے نصاب سے انگریزی مضمون کو ختم کرنے سے بہارمدارس کے بچوں کا مستقبل خطرے میں: سید محمد اشرف کچھوچھوی 

چتوڑگڑھ،راجستھان،۱؍ستمبر(پریس ریلیز) بہار اسٹیٹ مدرسہ ایجوکیشن بورڈ کی جانب سے فوقانیہ اور مولوی امتحانات سے لازمی پیپر انگریزی جو 100 نمبر کا تھا جسے ہٹا نے سے سیدھا نقصان طلبہ و طالبات کا ہوگا۔ ان خیالات کا اظہار آل انڈیا علماء و مشائخ بورڈ کے قومی صدراور ورلڈ صوفی فورم کے چیئرمین حضرت سید محمد اشرف کچھوچھوی نے چتوڑ گڑھ سے جاری ایک بیان میں کیا۔
بورڈ کے قومی صدر نے کہا کہ طلبہ و طالبات کو کسی بھی یونیورسٹی میں کسی بھی شعبے میں داخلہ لینے کے لئے یا روزگار حاصل کرنے کے لئے انگریزی زبان کا ہونا لازمی ہے۔موجودہ دور میں زیادہ تر علمی معلومات اسی زبان میں میسرہیں جس سے مستفیدہونے کے لیے ضروری ہے کہ اس زبان پر تحریری اور زبانی اعتبار سے دسترس حاصل کی جائی لیکن اس کو ہٹاکر بہار مدرسہ بورڈ نے طلبہ و طالبات کے مستقبل کے ساتھ کھلواڑ کیا ہے اور ساتھ ہی ایجوکیشن بورڈ کے ذریعہ قدیم مدت سے چلی آرہی روایتوں سے ہٹ کر جمعہ کے دن امتحان بھی کرایا گیا ہے جو کہ غلط ہے۔
ان حرکتوں سے پتہ چلتا ہے کہ حکومت بہار نے پورا ارادہ کر لیا ہے کہ مدرسہ بورڈ ختم کردیا جائے جس کا تازہ نمونہ یہ بھی ہے کہ اگست کی آخری تاریخوں میں فوقانیہ اور مولوی جماعت کا امتحان کروایا جا رہا ہے تاکہ کوئی بھی طلبہ و طالبات دیگر کالجوں اور یونیورسٹیوں میں داخلہ نہ لے سکیں کیونکہ ملک کے بیشتر تعلیمی اداروں میں جولائی ماہ ہی میں داخلہ کی کار روائی مکمل کر لی جاتی ہے۔
انہونے یہ بھی کہا کہ یادرکھئے اگر مدرسہ بورڈ کو حکومت نے ختم کردیا تو ہمارے بچوں کا مستقبل تو ختم ہوگا ہی ساتھ ہی ہمارے گھروں میں بے روزگاری بھی بڑھے گی اس لئے آل انڈیا علما و مشائخ بورڈ حکومت بہار سے اسکو بحال کرنے کا پر زور مطالبہ کرتا ہے۔

आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड ने संयुक्त राष्ट्र संघ और हॉलैंड सरकार को दर्ज कराया विरोध

पैग़म्बर ए अमन की शान में गुस्ताखी ना क़ाबिल ए बर्दाश्त: सय्यद अशरफ

18 अगस्त (दिल्ली)

“पैग़म्बर ए अमन की शान में गुस्ताखी ना क़ाबिल ए बर्दाश्त” आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष व वर्ल्ड सूफी फोरम के चेयरमैन सय्यद मोहम्मद अशरफ किछोछ्वी ने हॉलैंड के एक सांसद द्वारा पैग़म्बर ए अमन का कार्टून बनाने का कॉम्पीटिशन पार्लियामेंट हाउस में उनकी पार्टी के दफ्तर में आयोजित करने के देहश्तगरदान काम पर कही. हज़रत ने कहा कि किसी भी मज़हब कि तौहीन आतंकवाद ही है, उनहोंने बताया कि आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड ने संयुक्त राष्ट्र संघ व हॉलैंड सर्कार को अपना विरोध पत्र लिख कर दर्ज कराया है और मांग की है कि ऐसा करने वाले किसी व्यक्ति/संस्था को कड़ी से कड़ी सज़ा दी जाए और ताकि भविष्य में कोई ऐसा करने का प्रयत्न भी ना करे. उन्होंने कहा भारत सरकार से भी बोर्ड मांग करता है कि इस मसले पर अपना विरोध हॉलैंड सरकार से जताए क्योंकि इससे भारत में रहने वाले करोड़ों भारतीय मुसलमानों की भावनाएँ आहत हुई हैं. पैग़म्बर की शान में गुस्ताखी मुसलमान बर्दाश्त नहीं कर सकता इसलिए नफरत फैलाने वले उनके जज्बात को इसी के जरिये भड़काना चाहते हैं, जो कि एक वैश्विक षडयंत्र का हिस्सा है. हमें नफरत को पछाड़ने के लिए ऐसा करने वालों को रोकना होगा.

सिर्फ जश्ने आज़ादी मनाना नहीं बल्कि आज़ादी को महफूज़ भी रखना है: सय्यद मोहमम्द अशरफ

15 अगस्त /दिल्ली “सिर्फ जश्ने आज़ादी मनाना नहीं बल्कि आज़ादी को महफूज़ भी रखना है “यह बात आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड और वर्ल्ड सूफी फोरम के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहमम्द अशरफ किछौछवी ने जश्ने आज़ादी के मौक़े पर कही उन्होंने मुल्क के सभी लोगों को यौमे आज़ादी की मुबारकबाद देते हुए कहा कि यह मुल्क का राष्ट्रिय पर्व है .

सभी को पूरे हर्षो उल्लास के साथ इसमें शरीक होना चाहिए क्योंकि देश से हम हैं हमारी पहचान हमारे मुल्क से है इसकी आज़ादी को बरक़रार रखना हम सबकी सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी है .उन्होंने कहा कि आज़ादी को छीनने के लिए बड़ी ताकतें लगी हुई हैं लेकिन हम हिन्दोस्तानी अपना सबकुछ लुटाकर भी इसे किसी को छीनने नहीं देंगे .

हज़रत ने कहा कि हमारे बीच में नफरत के बीज इसीलिए बोये जा रहे हैं कि हम एक होकर अपने मुल्क को भी बचाने न खड़े हो सके क्योंकि हमारा इतिहास यही रहा है जब देश की बात आई है तो हम सब एक नज़र आये हैं और देश के दुश्मन यह जानते हैं कि अगर यह एक रहे तो इन्हें मात देना मुमकिन नहीं है .

उन्होंने कहा कि हिन्दू मुस्लिम नहीं हिन्दोस्तानी बन कर सोचिये कि नफरत का नतीजा क्या होगा ?मोहब्बत से नफरतों को हरा दीजिये यही देशभक्ति का तकाजा है.अब अगर कोई नफरत की बात करे तो समझ जाइये यह देश का दुश्मन है देश तोडना चाहता है .लोगों के बहकावे में मत आइये सबको गले लगाइये.

 

By: Yunus Mohani

ग़रीबी और अशिक्षा को मिटाने की बात कीजिए तलाक़ पर तकरार बेमानी : सय्यद मोहम्मद अशरफ

श्रीलंका/कोलंबो 9 अगस्त “गरीबी और अशिक्षा मिटाने की बात कीजिए तलाक़ पर तकरार बेमानी” यह बात वर्ल्ड सूफी फोरम व आल इंडिया उलमा व मशायख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने पत्रकारों द्वारा तीन तलाक़ पर पूछे गए सवाल के जवाब में कहीं। वह इस समय श्रीलंका दौरे पर हैं।
हज़रत ने भारत सरकार द्वारा संसद में पेश ट्रिपल तलाक़ बिल में संशोधन पर पूछे गए सवाल पर कहा कि तलाक़ मुसलमानों का सबसे बड़ा मसला नहीं है सबसे बड़ा मसला हिन्दुस्तानी मुसलमानों की बदहाली गरीबी और अशिक्षा है इसपर बहस कर इसे दूर करने का इमानदार प्रयास होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अभी संशोधन क्या हुआ है इसकी जानकारी नहीं है लिहाजा इस पर बात करना सही नहीं है लेकिन यह ज़रूर कहूंगा कि तलाक़ से प्रभावित मुस्लिम महिलाओं की संख्या .5 फीसदी है जबकि अनुच्छेद 341 पर प्रतिबंध होने से लगभग 95% मुसलमान परेशान है और अपने अधिकारों से वंचित हैं यदि सरकार वास्तव में सबका साथ सबका विकास के एजेंडे पर काम करना चाहती है तो इसपर बहस करवाकर इस प्रतिबंध को हटाने का मार्ग प्रशस्त करे।
हज़रत ने कहा कि नफरत को रोकने के लिये मोहब्बत को आम कीजिए , तलाक़ पर कोई बात करने से पहले मुसलमानों को विश्वास में लिया जाना ज़रूरी है।
उन्होंने राज्यसभा के उपसभापति चुने जाने पर श्री हरिवंश जी को मुबारकबाद देते हुए कहा कि हम उम्मीद करते है कि वह अपने अनुभव से देश के लोकतंत्र को और मजबूत करेंगे।

By: Younus Mohani

دہشت گردی کو نکارنے کے لئے پاکستانی عوام کو مبارک باد: سید محمد اشرف

پاکستانی عوام نے انتہا پسندی اور تشدد کے مقابلے امن اور مروت کو ترجیح دیا
لکھنؤ یوپی، (پریس رلیز)26 جولائی
حالیہ پاکستانی انتخاب میں پاکستانی عوام نے دہشت گردی کو سرے سے نکارتے ہوئے انتہا پسندی کے خلاف اپنی منشاء کو صاف ظاہر کرکے بڑا فیصلہ لیا ہے۔حافظ سعید جیسے مبینہ انتہا پسندکی حمایت یافتہ پارٹی کو ایک بھی سیٹ نہ دے کر پاکستانی عوام نے دہشت گردی کے خلاف یکسر کھڑے ہو کر یہ صاف کردیا کہ پاکستانی عوام کبھی بھی نفرت اور تشدد کی حمایت نہیں کر سکتی۔ اس عوام کے اس موقف کے لئے وہ مبارک باد کے مستحق ہیں۔یہی حوصلہ نئی حکومت کو دہشت گردی کے خلاف سخت اقدام کرنے میں مدد گار ثابت ہوگا۔ ان خیالات کا اظہار ورلڈ صوفی فورم کے صدر اور آل انڈیا علماء و مشائخ بورڈ کے بانی حضرت سید محمد اشرف کچھوچھوی نے اپنے بیان میں کیا۔انہوں نے مزید کہا کہ پاکستان میں یہ نیا بدلاؤ نئی امیدوں کو جنم دے رہا ہے۔اس نئی حکومت سے یہ امید ہے کہ اب دونوں ملکوں کے درمیان حالات میں بہتری آئے گی۔سید محمد اشرف نے عمران خان کو مبارکباد پیش کرتے ہوئے کہا کہ ہم دعا کرتے ہیں کہ عمران خان پاکستان کی اکثرعوام کی عقیدت و محبت کا احترام کرتے ہوئے صوفیا کی تعلیمات پر عمل پیرا ہوکر پاکستان میں محبت و اخوت اور ہمدردی اور انصاف کی فضا قائم کریں گے اور ذاتی مفادات اور غیر ضروری سیاست میں پھنسنے کی بجائے عوام کی بہتری اور امن کے قیام و فروغ کو ترجیح دیں گے۔انہوں نے کہا کہ ہمیں نئی حکومت سے پوری توقع ہے کہ دونوں ملکوں کے بیچ رشتے کو بھروسہ اور اعتماد کی بنیاد پر بہتر کریں گے۔ کیوں کہ دونوں ملکوں کے درمیان خوشگوار رشتوں کے بیچ سب سے بڑی دیواروں میں سے ایک دہشت گردی ہے۔ اور عمران خان سے ہم یہ توقع کرتے ہیں کہ ان کا پہلا قدم انتہا پسندی اور تشدد کے تمام راستوں کو مسدود کرنا ہوگا۔

Congratulate to Pakistani People for rejecting Terrorism : Syed Muhammad Ashraf Kichhochhawi

Lucknow, UP, (Press release) 26 July 2018

In recent Pakistan Assembly election result Pakistani people rejected any type of support to Terrorism as they totally denied to give any seat to known terror symbol of terrorism Hafiz Saeed Party. By this, they clearly declared their opinion and stand on any type of terror. They expressed their will of peace and harmony on their ground. This was stated by the founder of All India Ulama & Mashaikh Board and president of World Sufi Forum Hazrat Syed Muhammad Ashraf Kichhochhawi. He further stated the newly elected government is expected to make healthy relation between India and Pakistan by clearly countering every aspect of terrorism and to maintain the peace and harmony by respecting the Sufi believes and teaching as the majority of Pakistani Muslims. Syed Ashraf Congratulated Emran Khan on his big victory and praised for him for good relation between the two country and working for the sake of common people. He said Pakistan has always believe in Sufi tradition and it always has a strong effect in the mass. Emran Khan is expected to spread those Sufies teachings to counter any kind of hate and violence.

By: Abdul Moid Azhari

मज़लूम की पहचान मज़हब से न करें, नफरत के एजेंडे को बढ़ने से रोकें : सय्यद मोहम्मद अशरफ

25 जुलाई/अम्बेडकरनगर

मज़लूम की पहचान मज़हब से न करें, नफरत के एजेंडे को बढ़ने से रोकें” यह विचार वर्ल्ड सूफी फोरम व आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड के संस्थापक, अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने हज़रत मख़दूम अशरफ जहांगीर सिमनानी रहमतुल्लाह अलैहि की दरगाह पर हाज़िरी के बाद मीडिया से कही, उन्होंने कहा हम जब मज़लूम की पहचान उसके मज़हब या ज़ाति की बुनियाद पर करते हैं तो नफरत के एजेंडे को ताक़त मिलती है और वह कामयाब हो जाता है।
हज़रत ने कहा कि मज़लूम सिर्फ मज़लूम होता है उसका कोई धर्म या ज़ा नहीं होती लेकिन खास तौर से इस बात को कहना कि यहां मरने वाला मुसलमान है या दलित या फिर कोई और तो इससे समाज में एक तरह का खौफ पनपता है और नफरत फैलती है. हमारा प्रयास होना चाहिए कि अतिताईयों के मक़सद को कामयाब न होने दें जो हम को ज़ाती और धर्म के साथ बांटना चाहते हैं ताकी उनके खतरनाक इरादे कामयाब हो जाएं।
उन्होंने कहा कि सूफिया ने गंगा जमुनी तहज़ीब को जन्म दिया जिसमें नफरत के लिए कोई जगह नहीं है, हमारा मुल्क अपनी इसी खूबसूरती और इस मोहब्बत वाली तहज़ीब के लिए जाना जाता है। कुछ देश के दुश्मन हमसे हमारी यह तहज़ीब छीनना चाहते हैं, हमें मज़हब और ज़ाती के नाम पर बांट कर वह अपने घिनौने एजेंडे को कामयाब करने पर तुले हैं।
हज़रत ने कहा कि मीडिया को भी अपनी ज़िम्मेदारी निभाते हुए इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि नफरत बढ़ाने वाली बातों और खबरों को रोका जाए, यह मुल्क मेरा और आपका नहीं बल्कि हमारा है, हम मिलकर इसका मुस्तक़बिल संवार सकते हैं, हम का माना हिन्दू और मुस्लिम से है, साथ में भारत में रहने वाले सभी धर्म के मानने वाले हैं अगर हम को मैं और तुम में बदला दिया गया तो देश का बड़ा नुक़सान होगा ।
उन्होंने साफ शब्दों में सरकार से कहा कि अब सरकार तय करे कि देश में क़ानून का राज चलेगा या भीड़ फैसला करेगी? हिन्दू ,मुसलमान ,सिख ,ईसाई सब आपस में हैं भाई भाई, क्या यह अब सिर्फ एक जुमला बन गया है या फिर मुल्क की बुनियादी ज़रत है ?

 

By: यूनुस मोहानी