कोरोना वायरस से ज़्यादा खतरनाक है नफरत का वायरस : सय्यद मोहम्मद अशरफ

17 मार्च, 2020 महराजगंज
आल इंडिया व मशाइख़ बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफी फ़ोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि कोरोना वायरस से अधिक खतरनाक नफरत का वायरस है।
उन्होंने कहा कि हम कोरोना से बचने के लिए मास्क तो पहन रहे हैं लेकिन नफरत से बचने के लिए ज़हरीली जुबानों को नहीं रोक रहे हैं,हम वायरस से बचने के लिए बार बार हैंडवाश या साबुन से हाथ धो रहे हैं लेकिन उन हाथों को लोगों की मदद के लिए नहीं बढ़ा रहे, खांसते या छींकते वक़्त बीमारी के डर से मुंह को ढाप रहे हैं लेकिन किसी जरूरतमंद के कपड़ों का इंतजाम नहीं कर रहे।
हज़रत ने कहा कि दुनिया कोरोंना से एकजुट होकर लड़ लेगी इसकी दवा बनाकर इसे हरा भी देगी लेकिन इससे ज़्यादा खतरनाक बीमारी का इलाज होते हुए भी इसे खतम करने को तैयार नहीं है।
जबकि सिर्फ एक मुस्कुराहट इस वायरस से बचा सकता है,एक ख़ामोशी,इंसाफ और लोगों की मदद करने का जज्बा इसका इलाज है अगर सब इस काम में लग जाएं तो इस वायरस को खतम कर इसपे जीत हासिल की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि हम कोरोना को सुन्नते रसूल पे अमल कर हरा देंगे क्योंकि डॉक्टर जो बचाव के तरीके बता रहे हैं वह नबी की सुन्नत है इसी तरह हम नफरत के वायरस को भी नबी की सुन्नत पर अमल कर हरा सकते हैं जो सूफिया ने करके दिखाया और संदेश सुनाया कि नफरत किसी से नहीं मोहब्बत सबके लिए।

मोहब्बत ज़िन्दगी है नफरत मौत : सय्यद मोहम्मद अशरफ

4 मार्च/पीलीभीत
मोहब्बत ज़िन्दगी है नफरत मौत ‘यह विचार आल इंडिया उलमा व मशायख बोर्ड एवं वर्ल्ड सूफी फोरम के अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने आल इंडिया अशरफुल अम्बिया कान्फ्रेंस में बोलते हुए रखे .उन्होंने कहा कि दुनिया तबाही की राह पर चल पड़ी है सीरिया हो यमन हो या दुनिया का कोई भी कोना हिंसा पैर पसार रही है और इन्सानी जिंदगियों को निगल रही है .

हज़रत ने कहा कि रहमते आलम सल्लल्लाहुअलहिवसल्लम ने दुनिया को जो पैगाम दिया उसी में सबकी भलाई है हमें सीरत के हर हर पहलू को अमली ज़िन्दगी में उतारने की कोशिश करनी चाहिए मेरे सरकार ने फ़रमाया कि लोगों में बेहतर वह जो लोगों का भला चाहता है ,तो खुद को बेहतर बनाना होगा .

फरमाने रसूल है कि मुसलमान वह जिसकी ज़बान और हाथ से सारे इन्सान महफूज़ रहें तो अब समझ ले दुनिया कि मज़लूमो के कातिल कौन हैं .

मोहब्बत ज़िन्दगी है क्योंकि मोहब्बत में भलाई है, नफरत मौत है क्योंकि नफरत में नुक्सान है गरीब नवाज़ ने इसीलिए कहा मोहब्बत सबके लिए नफरत किसी से नहीं ,इसी बात को आम कर दीजिये दुनिया से ज़ुल्म मिट जायेगा

मुफ्ती साजिद हस्नी कादरी ने कहा कि हमारे आक़ा हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा पूरी दुनिया के लिए रहमत बनकर आए और हुज़ूर ने हमेशा गरीबों व नादार लोगों की मदद की । उन्होंने लोगों से हुज़ूर की सीरत-ए-तैयबा पर चलने की हिदायत दी.

और सरकार ए कलाँ हज़रत सैयद मुख्तार अशरफ अशरफी जिलानी रहमतुल्लाह अलैहि की जीवनी पर भी विस्तार से प्रकाश डाला।

सभा का आगाज़ क़ुरआन करीम की तिलावत के साथ हाफिज रिजवान अशरफ ने किया.निज़ामत मौलाना गुलाम मुस्तफा ने की.जलसे को मुफ़्ती नूर मोहम्मद हसनी, मौलाना यासीन अशरफी, मुफ्ती रिज़वान अहमद अशरफी, मुफ्ती जाकिर हुसैन, सैयद कलीम अशरफ, सैयद सुहैल अहमद अशरफी , सैयद हैदर अशरफ ने भी संबोधित किया।

सभा में मौलाना शादाब अली, ज़हीर अहमद अशरफी, तक़ी शम्सी, मंसूर अहमद शम्सी, जमील अशरफी, गुड्डू अशरफी, सरताज अहमद, नूर मियां लुत्फी, जहीर मियां लुत्फी, गनी शम्सी और हाफिज जाकिर हुसैन के अलावा हज़ारों की तादाद में लोग मौजूद रहे.जलसे का अंत सलात व सलाम और देश में अमन व शांति की दुआ के साथ हुआ.

इस्लाम की तालीम मोहब्बत है और मदरसे इसे हासिल करने की जगह: सय्यद मोहम्मद अशरफ

11 जनवरी /दार्जलिंग
इस्लाम की तालीम मोहब्बत है और मदरसे इसे हासिल करने की जगह”यह बात आल इंडिया उलमा व माशायख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने एक धर्म सभा को संबोधित करते हुए कही , उत्तर प्रदेश शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिज़वी द्वारा मदरसों में आतंकवाद की तालीम दिए जाने के बयान पर बात करते हुए उन्होंने साफ़ कहा अपने सियासी आकाओं को खुश करने और खुद को जेल की सलाखों से बचाने के लिये वह नफरत की सियासत कर रहे हैं और मदरसों को बदनाम करने की घिनौनी कोशिश में लगे हैं उनकी बात का सच से कोई तल्ल्लुक नहीं है .
हज़रत ने भारत सरकार और उत्तरप्रदेश सरकार दोनों से वसीम रिज़वी की जाँच कराकर उनके ज़रिये किये गए वक्फ घोटालों को उजागर कर इन्हें कड़ी सजा देने की मांग की क्योंकि मदरसे मोहब्बत की तालीम देते हैं ,धर्म नफरत नहीं सिखाता तो फिर जहाँ धर्म कि तालीम होती है वहां नफरत को फैलाने वालों का क्या काम .हज़रत ने पैगम्बरे अमन –ओ –शांति हज़रत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलहि वसल्लम की हदीस का ज़िक्र करते हुए कहा कि मोमिन आईने की तरह होता है जिसमे जो खुद जैसा होता है वैसी ही शक्ल आईने में दिखती है क्योंकि आइना झूट नहीं बोलता अगर कोई इंसान बुरा है तो उसे सामने बुराई ही नज़र आएगी वसीम रिज़वी को इसपर गौर करना चाहिए .
उन्होंने कहा लोगों को नफरत की नयी नयी चालों से होशियार रहना होगा और मोहब्बत से नफ़रत को मिटाना होगा ,हम सब की ज़िम्मेदारी है कि जो नफरत की बात करे उसका सामाजिक बहिष्कार करें मज़हब के नाम पर नफरत के व्यापारियों के धंधे को पनपने न दें .मोहब्बत सबके लिए नफरत किसी से नहीं के उसूल पर ज़िन्दगी गुजारें यही वह फार्मूला है जिससे शांति को कायम रखा जा सकता है .

By: Younus Mohani

मोहब्बत ज़िन्दगी है नफरत मौत : सय्यद मोहम्मद अशरफ

गोरखपुर/19 दिसम्बर
मोहब्बत ज़िन्दगी है और नफरत मौत यह बात कल मोहल्ला तुर्कमान गोरखपुर में एक धर्मसभा को संबोधित करते हुए आल इंडिया उलेमा व मशायख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने कहीं ,उन्होंने कहा नफरत समाज को तोड़ती है और मोहब्बत सभ्य समाज का निर्माण करती है ,नफरत आग लगाती है मोहब्बत उस आग को बुझाने का काम करती है,धर्म का संदेश मोहब्ब्त है और अधर्म नफरत है, फैसला आपको करना है कि आप धर्म के साथ हैं या अधर्म के।
हज़रत ने कहा लोग देश को तोड़ने की साजिश रच रहे हैं ,अफवाहों के बाज़ार गर्म है ऐसे माहौल में पैगम्बर हजरत मुहम्मद मुस्तफा सल्लललाहू अलैहि वसल्लम की शिक्षाओं पर अमल करके हम न सिर्फ अपने प्यारे देश बल्कि पूरे संसार में शांति स्थापित कर सकते हैं,उन्होंने कहा खास तौर से हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम आपसी रिश्तों को मजबूत करे पड़ोसी के हक अदा करे साफ सफाई का ध्यान रखे ।
अपने धर्म पर पूरी तरह अमल करते हुए दूसरों की धार्मिक भावनाओं एवं धर्म का सम्मान करें,यही पैग़म्बरे इस्लाम की तालीम है अगर हम इसपर अमल नहीं करते तो हमारा मोहब्ब्त का दावा कमजोर है।देश के मौजूदा हालात पर बोलते हुए हज़रत ने कहा नफरत रोज़ नई सूरत में दिखाई दे रही है लोगों की इज्जत ,जान और माल सब वहशी दरिंदों के निशाने पर है देश का सम्मान तिरंगा भी इस बिगड़ी भीड़ को रास नहीं आ रहा और धर्मांध लोग इसे अपमानित कर रहे हैं सरकार को ऐसे तत्वों से सख्ती से निपटना होगा और सभी शांति के समर्थकों को एक साथ आकर इनके खिलाफ खड़ा होना होगा। हमे अपराधी धर्म आधार पर नहीं देखना चाहिए और न ही पीड़ित को अगर किसी पर भी ज़ुल्म होता है तो ज़ालिम का विरोध करना होगा।क्योंकि अपराधी सिर्फ अपराधी है हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई के रूप में उसकी पहचान नहीं की जानी चाहिए।
जलसे में बड़ी संख्या में लोगों ने शिरकत की जलसे का समापन सलातो सलाम के बाद मुल्क में अमन की दुआ के साथ हुआ।

By: Yunus Mohani

मज़हब मोहब्बत सिखाता है नफरत नहीं : सय्यद मोहम्मद अशरफ

संभल/19 नवंबर

मज़हब मोहब्बत सिखाता है नफरत नहीं, यह बात हज़रत इमाम हसन की शहादत के मौके पर आयोजित एक धर्मसभा में आल इंडिया उलेमा व मशायख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने कहीं उन्होंने कहा हर धर्म मोहब्बत का पैग़ाम देता है तो फिर धर्म के नाम पर नफरत फैलाने वाले यह लोग कौन है ? आखिर मजहब के नाम पर खून बहाने वाले भोले भाले लोगों को किस तरह गुमराह कर पा रहे हैं ?
उन्होंने कहा कि यह इसलिए कामयाब हो पा रहे हैं क्योंकि हम मजहब को समझना ही नहीं चाहते हम झूठ और फरेब का शिकार हैं लोग हमें हर तरह फरेब दे रहे हैं यहां तक कि हम इबादतगाहों के विवाद में उलझे हुए हैं जब दुनिया दूसरे गृह पर बसने की बात कर रही है उस दौर में हमारा यह हाल है ।
हज़रत ने कहा हमें अपने बुजुर्गों से सीखना होगा कि मुश्किल दौर में किस तरह अमन कायम किया जाए यही तालीम हमें हज़रत इमाम हसन मुज्तबा अलहिससलाम की ज़िन्दगी में मिलती है आपने बताया कि किस तरह अमन को कायम करने के लिए कुर्बानी दी जाय ।आज इस दौर के किसी हुक्मरान में यह हिम्मत नहीं कि अगर अमन और सत्ता में से उसे कोई एक चुनना हो तो वह अमन चुने और अमन को कायम करने के लिए सत्ता को त्याग दे यह अमल इमाम का ही है और हमारी ज़िम्मेदारी है कि इसे अपनी ज़िन्दगी में उतारे तभी हम इस दुनिया को शांति का गहवारा बनाए रख सकते हैं ।
“मोहब्बत सबके लिए नफरत किसी से नहीं “यह संदेश हज़रत इमाम हसन अलैहस्सलाम की ज़िन्दगी में मिलता है आपने अपने क़ातिल का बदला भी अपने रब पर छोड़ दिया और अमन के लिए अज़ीम कुर्बानी पेश की।

By: Yunus Mohani

मोहब्बत वालों का है हिन्दुस्तान : सय्यद अशरफ

मेरठ : 6 अक्टूबर हिंदुस्तान हर मोहब्बत करने वाले का है यह बात आल इंडिया उलमा मशायख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने शाहपीर साहब की मस्जिद में आयोजित अजमते हुसैन कांफ्रेंस में बोलते हुए कही ।हज़रत मेरठ में सय्यद अहमद अली सत्तारी की दावत पर कार्यक्रम में मुख्य अतिथि थे ,हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की कुर्बानी को याद करते हुए उन्होंने कहा इमाम ने हिन्दुस्तान की तरफ आने की बात कही इसलिए यह हिन्दुस्तान हुसैन का हिन्दुस्तान है यह प्यारी धरती जहां मोहब्बतें बिखरी हुई हैं यह सरजमीं हुसैन के बेटे गरीब नवाज़ की भी है।किसी को कोई हक नहीं है कि वह अपनी विचारधारा किसी पर थोपे जहां लोग इसे राम कृष्ण और नानक की धरती कहते हैं वहीं यह कबीर का हिन्दुस्तान भी है और मोहब्बत वाले इसे ख्वाजा का हिन्दुस्तान कहते हैं इससे जिन्हें परेशानी है वह देश को तोड़ने की साजिश कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने नफरतें बाटने वाले दुस्साहसी एवम् दुराचारी ज़ालिम शासक यजीद के खिलाफ खड़े होकर बता दिया कि मोहब्बत को मिटाना आसान नहीं है ,ज़ुल्म कुछ देर तो विजय पाता दिखाई देगा लेकिन वास्तविकता यह है कि पराजय उसकी किस्मत है ,हुसैन ने दुनिया को सिखाया कि सर कटा कर अपना पूरा घर लुटा कर किस तरह विजय प्राप्त की जाती है मोहब्बत वालों का यही आचरण है ।
आज हर मोहब्बत वाला हुसैन का है इसमें धर्म की कैद भी नहीं हिन्दुस्तान में ही हुसैनी ब्राह्मण भी हैं सिख भी हैं ईसाई और मुसलमान भी यह है हुसैन की विजय ,विचारधारा की विजय कर्बला में हुसैन की हुईं और कटने के बाद भी उनका सर सबसे बुलंद रहा मजलुमियत में किस तरह जीत हासिल की जाये रहती दुनिया हुसैन से सीखती रहेगी ।
पीर अहमद अली सत्तारि ने कहा कि हुसैन अलैहिस्सलाम से मोहब्बत रखने वाले ज़ुल्म के खिलाफ हर दौर में खड़े होते रहे हैं और मजलूमों की मदद करते रहे हैं देश और समाज में व्याप्त नफरत और भ्रष्टाचार को मिटाना हुसैनियत है और इसे बढ़ावा देना यजीदीयत है।
कार्यक्रम की शुरुआत कुरान की तिलावत के साथ मौलाना मुख्तार अशरफ ने की इसके बाद सय्यद सरमद अली और सय्यद वलीअहमद सत्तारी ने नात और मनकबत पेश की इसके बाद मुफ्ती साजिद हस्नी और नूरमोहम्मद हसनी ने जलसे को खिताब किया जलसे का संचालन मौलाना मोहम्मद सद्दाम ने किया जलसे की सदारत पीर मोहम्मद अली सत्तारी ने की कार्यक्रम का समापन सलातो सलाम के बाद दुनिया में शांति की दुआ के साथ हुआ। बाद में लंगर बांटा गया जलसे में बड़ी संख्या में लोगों ने शिरकत की.
By Yunus Mohani