हथियारों से नहीं मोहब्बत से बचेगी दुनिया – सय्यद मोहम्मद अशरफ

मुजफ्फरपुर :बिहार के मुजफ्फरपुर में सरकार मदीना कॉन्फ्रेंस में शिरकत करने पहुंचे ऑल इंडिया उलमा व मशाइख़  बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष हज़रत मौलाना सय्यद मोहम्मद अशरफ किछोछ्वी  ने जनता  को सम्बोधित  करते हुए कहा दुनिया में जिस तरह से नफ़रतें पनप रही हैं, लोग धर्म  के नाम पर लड़ रहे हैं, खून बहा रहे हैं, दुनिया में फसाद  फैला हुआ है और दुनिया के नेता हथियारों द्वारा  शांति की स्थापना करना चाहते हैं जो नामुमकिन है ।
न कभी इतिहास में हथियारों से शांति आई  है न कभी भविष्य में आऐगी, हमेशा नफरतों को मोहब्बत से मिटाया गया है, इस्लाम यानि सलामती का धर्म यानि वह धर्म  जिसमें सिर्फ मोहब्बत है नफरत के लिए कोई जगह नहीं यहाँ तक की दुश्मन से भी नफरत का हुक्म नहीं उस धर्म को कुछ गलत सोच  के लोग आतंकवाद  से जोड़ रहे हैं जो इस्लाम के साथ ना इंसाफी है, इसकी पुरज़ोर निंदा  करते हैं! ऑल इंडिया उलमा व मशाईख़  बोर्ड ने पूरी दुनिया को साफ़ बता दिया है कि आतंकवादी  कौन हैं और मुसलमान किन्हें कहते हैं !
सूफियों ने उस  तालीम को आम किया जो नबी सलल्लाल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अता की , उनके जीवन में कहीं नफरत का अंश तक नहीं मिलता, हर अच्छे बुरे को उन्होंने अपने पास बिठाया और उसे मोहब्बत वाला बना दिया, हक़ीक़त में  जो तालीम हमारे नबी सलल्लाल्लाहु अलैहि वसल्लम ने दी वही तालीम दुनिया से नफरतों को मिटा सकती है, यह बात सब जानते हैं और  दिलों से मानते भी हैं लेकिन ज़बान और अमल से लोग इक़रार करने को तैयार नहीं हैं।
हम पूरी दुनिया के शासकों से अपील करते हैं: अपना मूल्यवान छोड़ दीजिये दुनिया तबाह होने की तरफ बढ़ रही है, इसे बचा लीजिये, मोहब्बत का सन्देश सभी के लिए है, हथियारों से अमन नहीं आ सकता जो लोग भटक गए हैं उन्हें सही रास्ता हमें दिखाना  होगा!

राष्ट्रीय अध्यक्ष ने विशेष  तौर से भारत की  सरकार से मांग की कि हमारे प्यारे हिंदुस्तान  में नफरतों को पनपने से रोक दीजिये, जो धार्मिक  नफरतों के नाम पर घिनौना खेल लोग खेल रहे हैं इसे रोका जाना चाहिए उन्होंने मुसलमानों से भी अपील की कि इस्लाम की तालीम पर अमल कीजिये दुसरे मज़हबों का सम्मान कीजिये उनकी आस्थाओं का सम्मान कीजिये! हमारी तरफ  से पूरी कोशिश की जानी चाहिए कि लोग चाह कर भी हमसे नफरत न कर पाएं, समाज सेवा में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लीजिये, जिस चीज़ में दुसरे धर्मों  की  आस्था है उससे बचने की कोशिश  कीजिये ।
अमन बड़ी चीज़ है इसकी सबसे ज़्यादा ज़िम्मेदारी मुसलमानो पर है क्योंकि अल्लाह ने और उसके रसूल जनाबे मोहम्मदुर रसूलुल्लाह सलल्लाल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हमें अमन क़ायम करने  की तालीम दी है तो हम हर उस काम से बचें  जिससे किसी का दिल दुखे और  शर का खतरा हो । सरकारे मदीना कॉन्फ्रेंस में हज़रत अल्लामा कमरुज़्ज़मा खान आज़मी साहब  भी मौजूद थे जिन्होंने अमन का पैग़ाम दिया ।