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मज़हब के नाम पर मौत का कारोबार बर्दाश्त नहीं, आतंकी क़ायर हैं : सय्यद मोहम्मद अशरफ

मॉरीशस /2 जुलाई मज़हब के नाम पर मौत का कारोबार बर्दाश्त नहीं, आतंकी क़ायर हैं, यह बात वर्ल्ड सूफी फोरम के चेयरमैन व आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड के संस

आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड राय बरेली शाखा की जानिब से जश्ने ईद मीलादुन्नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्ल्म व जश्ने गौसे आज़म कांफ्रेंस कामयाबी के साथ संपन्न।
ऑल इंडिया उलामा व मशाइख बोर्ड मोगा ने खिलाड़ियों को सम्मानित किया
Sufism “inspiring antidote” to jihadist terror: Granoff: India Today

मॉरीशस /2 जुलाई

मज़हब के नाम पर मौत का कारोबार बर्दाश्त नहीं, आतंकी क़ायर हैं, यह बात वर्ल्ड सूफी फोरम के चेयरमैन व आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड के संस्थापक, अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने अफगानिस्तान में सिख समुदाय पर किए गए आतंकी हमले पर अफसोस जताते हुए कही।
उन्होंने कहा कि आतंकी क़ायरों की बहकी हुईं भीड़ का हिस्सा हैं जो मज़हब का चोला ओढ़ कर बेगुनाह लोगों को शिकार बना रहे हैं, हज़रत ने कहा कि हम इसकी घोर निन्दा करते हैं और सिर्फ निन्दा ही नहीं करते हैं बल्कि दुनिया के सभी अमन पसन्द लोगों  से अपील करते हैं कि आतंक के विरूद्ध धर्म क्षेत्र और जाति का भेद भूल कर खड़े हो जाईए, हमें इस नासूर को समाज से मिटाना ही होगा वरना कोई सुरक्षित नहीं है।
हज़रत ने कहा, दुनिया को नफरत से लड़ने के लिए मोहब्बत का हथियार उठाना होगा क्योंकि बारूद से लगी आग को बारूद से नहीं बुझाया जा सकता, सबको आपस में मोहब्बत करनी होगी और ज़ुल्म से नफरत चाहे वह कहीं भी हो किसी पर भी हो, हमें इसमें दोहरा रवैया नहीं अपनाना चाहिए ।
उन्होंने कहा, हमारी सारी संवेदनाएं उन मज़लूमों के साथ हैं जो इस क़ायराना हमले का शिकार हुए, हम उनके परिवार वालों के लिए सब्र की दुआ करते हैं और जो लोग घायल है जल्द से जल्द उनके स्वस्थ होने की इश्वर से प्रार्थना करते हैं।
हज़रत ने लोगों से मुखातिब होते हुए कहा कि याद रखिए नफरत का इलाज सिर्फ मोहब्बत है अगर आप अमन कायम करना चाहते हैं तो मजलूम के साथ खड़े हो जाईए और ज़ालिम का पुरजोर विरोध कीजिए चाहे वो ज़ालिम कोई भी हो।

By: यूनुस मोहानी

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