इस्लाम की तालीम मोहब्बत है और मदरसे इसे हासिल करने की जगह: सय्यद मोहम्मद अशरफ

11 जनवरी /दार्जलिंग
इस्लाम की तालीम मोहब्बत है और मदरसे इसे हासिल करने की जगह”यह बात आल इंडिया उलमा व माशायख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने एक धर्म सभा को संबोधित करते हुए कही , उत्तर प्रदेश शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिज़वी द्वारा मदरसों में आतंकवाद की तालीम दिए जाने के बयान पर बात करते हुए उन्होंने साफ़ कहा अपने सियासी आकाओं को खुश करने और खुद को जेल की सलाखों से बचाने के लिये वह नफरत की सियासत कर रहे हैं और मदरसों को बदनाम करने की घिनौनी कोशिश में लगे हैं उनकी बात का सच से कोई तल्ल्लुक नहीं है .
हज़रत ने भारत सरकार और उत्तरप्रदेश सरकार दोनों से वसीम रिज़वी की जाँच कराकर उनके ज़रिये किये गए वक्फ घोटालों को उजागर कर इन्हें कड़ी सजा देने की मांग की क्योंकि मदरसे मोहब्बत की तालीम देते हैं ,धर्म नफरत नहीं सिखाता तो फिर जहाँ धर्म कि तालीम होती है वहां नफरत को फैलाने वालों का क्या काम .हज़रत ने पैगम्बरे अमन –ओ –शांति हज़रत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलहि वसल्लम की हदीस का ज़िक्र करते हुए कहा कि मोमिन आईने की तरह होता है जिसमे जो खुद जैसा होता है वैसी ही शक्ल आईने में दिखती है क्योंकि आइना झूट नहीं बोलता अगर कोई इंसान बुरा है तो उसे सामने बुराई ही नज़र आएगी वसीम रिज़वी को इसपर गौर करना चाहिए .
उन्होंने कहा लोगों को नफरत की नयी नयी चालों से होशियार रहना होगा और मोहब्बत से नफ़रत को मिटाना होगा ,हम सब की ज़िम्मेदारी है कि जो नफरत की बात करे उसका सामाजिक बहिष्कार करें मज़हब के नाम पर नफरत के व्यापारियों के धंधे को पनपने न दें .मोहब्बत सबके लिए नफरत किसी से नहीं के उसूल पर ज़िन्दगी गुजारें यही वह फार्मूला है जिससे शांति को कायम रखा जा सकता है .

By: Younus Mohani