قرآنی آیات پر عدالت کافیصلہ دستور ہند اور مسلمانوں کے جذبات کاترجمان:سید محمد اشرف کچھوچھوی

اپریل14/،نئی دہلی(پریس ریلیز)
جیسا کہ توقع تھی سپریم کورٹ نے پیر کو اتر پردیش شیعہ وقف بورڈ کے سابق چیئرمین وسیم رضوی کی رٹ پٹیشن کو مسترد کردیا ہے، جس میں اس نے مبینہ طور پر تمام تر تاریخی حقائق کو یکسر نظر انداز
کرتے ہوئے قرآن پاک سے کچھ آیات کو ہٹانے کا مطالبہ کیا تھا۔ ان کا دعویٰ تھا کہ یہ آیات مبینہ طور پر غیر مسلموں کے خلاف تشدد کو فروغ دے رہی ہیں۔جو کہ ایک جھوٹ اور زہریلا پروپیگنڈا کے سوا کچھ نہ تھا۔دراصل وسیم بد بخت نے اپنے اس زہریلے اور گستاخانہ بیان سے اپنی کرپشن اور بد اعمالیوں سے جانچ ایجینسیوں کی توجہ ہٹانی تھی۔جس میں ناکام رہا۔اس کی جانچ کی فائل بھی کھل گئی ہے اور الحمد للہ!اس کی پی آئی ایل بھی سپریم کورٹ سے خارج ہوگئی۔
جسٹس آر ایف نریمن کی سربراہی والی بنچ نے رٹ پٹیشن کو خارج کرتے ہوئے کہا کہ یہ ایک بالکل بے وقوفانہ،غیر سنجیدہ پٹیشن ہے۔یہی نہیں عدالت نے درخواست دائر کرنے پر درخواست گزار پر50 ہزار روپے کا جرمانہ عائد کیا ہے۔ جب معاملہ کو اٹھایا گیا تو جسٹس نریمن نے وکیل سے پوچھا کہ کیا وہ درخواست کو لے کر سنجیدہ ہیں؟ سینئر ایڈووکیٹ آر کے رائے زادہ،جو رضوی کی طرف سے وکیل ہیں، نے جواب دیا کہ وہ مدرسہ تعلیم کے ضوابط تک درخواست کو محدود رکھے ہوئے ہیں۔ اس نے کہا کہ بعض آیات کا لفظی ترجمہ غیرمسلموں کے خلاف تشدد کو فروغ دیتا ہے اور اس لیے انھیں پڑھانے سے بچوں کو یقین ہوسکتا ہے۔
وکیل نے کہا کہ میری تجویزیہ ہے کہ یہ پیغام غیر مسلموں کے خلاف تشدد کی وکالت کرتا ہے۔ بچوں کو معصوم عمر میں مدرسوں میں اسیر بنا کر رکھا جاتاہے۔ طلبہ کوایسی تعلیم نہیں دی جانی چاہیے اور ایسے نظریات کی مارکیٹنگ میں کوئی جگہ نہیں ہوسکتی۔ میں نے مرکزی حکومت کو کارروائی کے لیے لکھا ہے، لیکن کچھ بھی نہیں ہوا۔مرکزی حکومت اور مدرسہ بورڈ کو یہ یقینی کرنے کے لیے بلایا جا سکتا ہے کہ تشدد کی وکالت کرنے والی آیات کی لغوی تعلیم سے بچنے کے لیے کیا اقدامات اٹھائے گئے ہیں۔حالانکہ بنچ اس معاملے پر غور کرنے کو تیار نہیں تھی اور اس درخواست کو‘’بالکل فضول، سطحی اور غیر سنجیدہ‘ قرار دیتے ہوئے مسترد کردیا اور 50,000 روپے جرمانہ عائد کیا۔
ہم عدالت عالیہ کے شکر گزار ہیں کہ اس نے بر وقت صحیح اور آئینی قدم اٹھا تے ہوئے وسیم رضوی کی دائر کردہ پی آئی ایل کو خارج کردیا،جس سے آنے والے دورا کے ایک اہم فتنے کا سد باب ہوگیا۔رہ گئی بات وسیم رضوی کے وکیل کی دلیل کی تو اس میں کوئی دم خم نہیں،اس کے دلیلوں کو عادالت عالیہ نے یکسر مسترد کردیا۔ یہ ایک حقیقت ہے کہ یہ کامیابی کسی ایک فرد یاتنظیم کی نہیں ہے کہ بلکہ پورے ملک کے تمام محبین وطن اور فرزندان اسلام کی اجتماعی کوششوں کا نتیجہ ہے،اس میں ہر مکتب فکر کے لوگوں نے کوشش کی،خاص کر وسیم رضوی جس فرقے سے ہو نے کادعویدار ہے اس نے بھی بڑھ چڑھ کر اس کے رد وابطال میں حصہ لیا۔آل انڈیا علما ومشائخ بورڈ ہمیشہ ہی مسلم مسائل کو امن اور قانون کے دائرے میں رہتے ہوئے حل کر نے کی وکالت کرتا ہے۔الحمد للہ۔بورڈ کی اکثر شاخوں کی جانب سے اس کے خلاف احتجاج اور مظاہرہ ہوا،اور حسب قانون وانتظام میمورنڈم بھی جگہ جگہ پیش کیاگیا۔اور آئندہ بھی اس طرح کے مسائل میں اسی طرح کا لائحہ عمل طے کیا جائے گا۔البتہ میں عدالت عالیہ سے درخواست کروں گا کہ صرف جرمانے سے وسیم رضوی کے جرم پر پردہ نہیں ڈالاجاسکتا۔اسے ہر حال میں گرفتا رکیا جائے اور اسے قرار واقعی سزادی جائے۔بورڈ کے تمام رضا کاران،ممبران،اور عوام اہل سنت کا شکریہ جنھوں نے میری آواز پر لبیک ک ہتے ہوئے،بورڈ کے بینر تلے اس ملعون ک؁ خلاف جمع ہو کر اپنے جذبہ ایمانی کاثبوت پیش کیا۔اللہ تعالی ہمیں اسی طرح استقامت اور پامردی سے ملت کے کاموں کو کرنے کی توفیق رفیق ؑطا فرمائے۔آمین

Yati Narasimhanand hate speech creates communal divide, AIUMB calls for strict legal action

April 08,2021 New Delhi

All India Ulama and Mashaekh Board (AIUMB), an apex body of India’s Sunni Sufi Muslims have condemned the hate speech made by Yati Narasimhanand Saraswati, declaring him a ‘hate preacher disguised as sadhu sant’.

AIUMB Chhattisgarh branch has lodged a complaint against Narasimhanand Saraswati, saying that he’s trying to harm the syncretic culture and the peaceful Ganga-Jamani Tehzib of India. “He insulted Hazrat Muhammad ( pbuh), the benefactor of humanity and messenger of mercy for the whole world, and is making offensive remarks against his noble personality which is completely reprehensible”, the statement said. It should be noted that in Islam, religious leaders of any religion are respectable and to make insulting remarks against them, by using abusive words is haraam (strictly prohibited). Similarly, the person who hurt the feelings of millions of Muslims in India by abusing Prophet Muhammad (pbuh) should be considered a criminal and must be strictly dealt with as per the law of the land, it added.
Having stated the above, All India Ulama and Mashaekh Board Chattisgarh Unit led by Qari Mohammad Imran Ashrafi and General Secretary Noman Akram Hamid filed the report in Thana City Kotwali and requested the government and administration to take strict action against Narasimhanand and punish him.

In fact, the people of the organisation to which Narsinghanad is associated should also take action against him so that such people can be restrained, the AIUMB Chhattisgarh branch said.

It is a known fact that even before this incident, Yati Narasimhanand Saraswati has made inflammatory statements to disrupt social harmony and communal unity in the country. In one earlier incident, he insulated the Indian Ironmen and our former President Dr. A, P, J Abdul Kalam by calling him a ‘Pakistani agent’.

With such an absurd statement, this person has been defaming the respected national heroes of India, which we Indians cannot tolerate at all. Therefore, the administration should seriously and promptly rectify this gross violation of the law which is spewing venom and promoting communal disharmony. Then only the current anger in the Muslim community will end and such hate rhetoric can be curbed.

Source: ClickTV

Yati Narasimhanand hate speech creates communal divide, AIUMB calls for strict legal action

पैग़म्बरे इस्लाम की शान में गुस्ताखी करने वाले मुल्क में फसाद फैलाना चाहते हैं : सय्यद मोहम्मद अशरफ

3 अप्रैल 2021, शनिवार, नई दिल्ली
पैग़म्बरे इस्लाम की शान में नरसिंहानंद नाम के विदेशी एजेंट द्वारा अशोभनीय टिप्पणी किए जाने पर सख्त गुस्से का इज़हार करते हुए आल इंडिया उलमा व मशाइख़ बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफ़ी फोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने कहा कि मुल्क में बड़े पैमाने पर दंगे भड़काने की साजिश की जा रही है, कोरोना वायरस के दुबारा बड़ रहे संक्रमण के बीच देश को अस्थिर करने की व्यापक साजिश रची जा रही है ,दुनिया जानती है कि नबी की शान में गुस्ताखी को किसी भी कीमत पर मुसलमान बर्दाश्त नहीं कर सकते और यह ऐसा मामला है जिसपर मुसलमान किसी मसलक में बंटे बिना एकजुट है लिहाज़ा देश में बड़े पैमाने पर दंगे करवाने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि यह मामला बहुत गंभीर है, एक देश और इंसानियत के दुश्मन द्वारा पैग़म्बरे अमन के खिलाफ जिस तरह की अपमानजनक टिप्पणी की गई है ,जिससे मुसलमानों में शदीद गुस्सा है लगातार विदेशी ताकतों द्वारा प्रयास हो रहा है और इसी के चलते विद्या प्रकाशन प्राईवेट लिमिटेड द्वारा छापी गई कक्षा 4 में पढ़ाई जाने वाली किताब में पहले एक फर्जी खाका पैग़म्बरे इस्लाम का छापा गया और उसी समय नरसिंहानंद नामक वैचारिक आतंकवादी द्वारा ऐसी घिनौनी बात की गई जो साफ तौर से देश को सांप्रदायिक दंगों में झिकने की व्यापक साजिश दिखाई पड़ती है,जब देश के 5 राज्यों में चुनाव चल रहा है ऐसे में ऐसी घटना होना साफ इशारा करता है कि यह एक गहरी साजिश है।
सभ्य समाज में इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता ,किसी भी धर्म का चोला ओढ़ कर किसी दूसरे धर्म के खिलाफ जहर उगलने वाला व्यक्ति किसी भी कीमत पर धार्मिक नहीं हो सकता वह सिर्फ आतंकी ही हो सकता है और आतंकवादियों की समाज में कोई जगह नहीं है सरकार को इस व्यक्ति की तुरंत गिरफ्तार करना चाहिए और उससे कड़ी पूछताछ कर इस गहरी साजिश का पर्दाफाश करना चाहिए।
हज़रत ने कहा कि देश के मुसलमानों में गहरा गम और गुस्सा है हम सभी से शांति बनाए रखने की अपील करते हैं ताकि इन आतंकवादियों की साजिश कामयाब न होने पाए अपने गुस्से का इज़हार कानूनी तौर पर करें किसी भी कीमत पर कानून का उल्लंघन न करें ,पैगम्बर की शान में गुस्ताखी को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता और मुसलमान सबकुछ अपने नबी की शान के लिए लुटा सकता है हमारी जान आका की शान पर कुर्बान है लेकिन हमें ध्यान रहना चाहिए कि अगर हमने नबी की तालीम से मुंह मोड़ा तो हम भी गुस्ताखी करेंगे लिहाज़ा आतंक का मुक़ाबला कानून का सहारा लेकर किया जाना चाहिए,पैग़म्बरे अमन की तालीम है अमन कायम करना इसे हमें नहीं भूलना है और इन आतंकियों को जवाब देना है कि उस नबी के उम्मती है जिसने दुनिया को जन्नत बनाने का हुनर अपने अनुयायियों को सिखाया।
उन्होंने कहा कि सरकार तुरंत इस पर कार्यवाही करे,उन्होंने बताया कि आल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड व्यापक तौर से देशव्यापी मुहिम चलाएगा और जबतक इस आतंकी को गिरफ्तार नहीं किया जाता तबतक हैं खामोश नहीं बैठने वाले ,हमने देश के प्रधानमंत्री और गृहमंत्री सहित अल्पसंख्यक आयोग को शिकायत कर कार्यवाही की मांग की है और देश भर में एफआईआर कराई जा रही है,देश में किसी भी तरह माहौल खराब नहीं होना चाहिए अगर ऐसा होता है तो आतंकी विचार जीतेगा इस बात को खास ख्याल रखा जाना चाहिए।

राजनैतिक लाभ के लिए वसीम रिजवी की घटिया हरकत : सय्यद मोहम्मद अशरफ

नई दिल्ली, 13 मार्च (प्रेस विज्ञप्ति)
वसीम रिज़वी के क़ुरआन मजीद से 26 आयात को हटा देने और उक्त आयात को आतंकवाद को बढ़ावा देने का कारण बताते हुए सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में याचिका दायर करने पर आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड के अध्यक्ष एंव वर्ल्ड सूफी फोरम के चेयरमैन हजरत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने अदालती कार्यवाही की बात करते हुए लोगों से विरोध प्रदर्शनों, रैलियों को आयोजित करने और सोशल मीडिया पर दुरुपयोग न करने की अपील की। बोर्ड के अध्यक्ष ने कहा कि वसीम रिज़वी की यह हरकत केवल शोहरत हासिल करने और राजनीतिक हित साधने के लिए की गयी है। वसीम रिज़वी ने क़ुरआन करीम के हवाले से जो बात कही वह किसी भी तरह से क़ाबिले क़ुबूल नहीं।
हज़रत ने आगे कहा कि क़ुरान अल्लाह की किताब है और पैगंबर ए इस्लाम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का रहती दुनिया तक बाक़ी रहने वाला चमत्कार है जिसमें बदलाव की जरा भी गुंजाइश नहीं है। वसीम रिज़वी की हरकत कोई नई बात नहीं है इससे पहल भी कई बार इस्लाम के खिलाफ ऐसी हरकतें होती रही हैं।
दुनिया भर की किताबों में बदलाव हुआ है लेकिन क़ुरआन मजीद में एक शब्द का भी बदलाव नहीं हुआ यही इसके सच्चे होने का सबूत है। स्पष्ट रूप से क़ुरआन में लिखा गया है कि क़ुरआन अल्लाह की किताब है और इसका रक्षक खुद अल्लाह है। इसलिए, इसका एक भी शब्द इधर उधर नहीं किया जा सकता है। लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं है कि हम कुछ न करें बल्कि इसका हर कानूनी तरीके से विरोध किया जाना चाहिए। जिलाधिकारी और राज्यपाल को ज्ञापन दें, अगर कोर्ट में कार्यवाही होती है तो उसको फॉलो करें और हर मुमकिन मदद करें।

وسیم رضوی کی سیاسی مفاد کے لئے گھٹیا حرکت: سید محمد اشرف کچھوچھوی

آل انڈیا علماء ومشائخ بورڈ کا عدالتی کارروائی کا انتباہ
نئی دہلی 13/مارچ(پریس ریلیز)
وسیم رضوی کے قرآن کریم کی 26/ آیات کو قرآن پاک سے ہٹانے اور مذکورہ آیات کو دہشت گردی کو فروغ دینے کا سبب قرار دیتے ہوئے سپریم کورٹ میں عرضی داخل کرنے پر آل انڈیا علما ومشائخ بورڈ کے قومی صدر و ورلڈ صوفی فورم کے چیئرمین حضرت سید محمد اشرف کچھوچھوی نے عدالتی کارروائی کی بات کہتے ہوئے عوام سے مشتعل نہ ہونے، احتجاج و مظاہرہ و جلسے اور سوشل میڈیا پر گالی گلوج نہ کرنے کی اپیل کی ہے۔ بورڈ کے صدر نے کہا کہ وسیم رضوی کی یہ حرکت صرف پبلیسٹی بٹورنے اور سیاسی مفادات حاصل کرنے کی غرض سے کی گئی گھٹیا حرکت ہے، ملحد وسیم رضوی نے قرآن کریم کے حوالے سے جو بد بختانہ اور گستاخانہ بیان دیاہے وہ کسی بھی طرح قابل قبول نہیں،یہ وہ مطالبہ ہے جس کی جرات وہمت پچھلی صدیوں میں بڑا سے بڑا دشمن اسلام نہیں کر سکا۔حتیٰ سرکار رسالت مآب کے زمانے میں اہل کتاب یہودونصاریٰ بھی نہ کر سکے۔افسوس کہ مسلمانوں کا ہمیشہ سے المیہ رہاہے کہ جوکام دشمن پوری طاقت وقوت کے باوجود نہیں کر سکتا اسے مسلمانوں میں سے دلال کھڑے کر کے کروانے کی کوشش کرتا ہے۔
حضرت نے مزید کہا کہ قرآن اللہ کی کتاب ہے اور رسول اکرم کا قیامت تک باقی رہنے والا معجزہ ہے جس میں تبدیلی کی ذرہ برابر بھی گنجائش نہیں،وسیم رضوی کی حرکت کوئی نئیبھی نہیں ہے،اس سے پہلے بھی کئی بار اسلام اور شعائر اسلام کے خلاف ایسی حرکتیں ہوتی رہی ہیں۔اسلام دشمن طاقتوں کو سب سے زیادہ تکلیف جس بات سے ہے وہ قرآن کا محفوظ ومامون ہو نا ہے،کیونکہ دنیا جہان کی کتا بیں بد ل گئیں مگر قرآن آج تک نہیں بدلااور یہ اس کی حقانیت کی دلیل ہے۔قرآن کریم میں صاف لکھا ہے کہ قرآن کو اللہ نے نازل کیا ہے اور وہی اس کی حفاظت کرنے والاہے۔لہٰذا قرآن پاک کا ایک لفظ بھی ادھر ادھر نہیں کیا جا سکتا۔ لیکن اس کا یہ بھی مطلب نہیں کہ ہم ہاتھ پر ہاتھ دھرے بیٹھے رہیں،بلکہ ہر قانونی طریقے سے اس کی مخالفت کی جائے،اس کے خلاف احتجاج درج کرایاجائے۔مگر صبر اور ہوش وحواس کادامن ہاتھ سے نہ جانے دیاجائے۔کسی بھی علاقے کے ذمہ داران جب آپ کو آواز دیں تو قانونی بالادستی قائم رکھتے ہوئے احتجاج میں شریک ہوں اور زیادہ سے زیادہ ضلع مجسٹریٹ اور گورنر کومیمورنڈم دیں۔اگر کورٹ میں کارروائی ہوتی ہے تو اس کو فالوکریں اور اپنا ہر ممکن تعاون پیش کریں۔

Husain Sherani

علماء مشائخ بورڈ کے چینل پر حضرت ابو بکر صدیق کی یاد میں محفل کا انعقاد۔

گزشتہ روز 22 جمادی الاخریٰ حضرت ابوبکرصدیق رضی اللہ تعالی عنہ کے یوم و صال کی مناسبت سے آل انڈیا علما، مشائخ بورڈ کی جانب سے آن لائن پروگرام کیا گیا، جس میں مولانا مختار اشرف نے منظوم خراجِ عقیدت پیش کیا جب کہ پورنیہ بہار سے مولانا منظر محسن نے سیدنا ابوبکر صدیق کی پاکیزہ حیات اور بے مثال خدمات پر تفصیل سے روشنی ڈالی۔
پروگرام کے ہوسٹ مختار اشرف نے کہا کہ :
سیدنا صدیق اکبر کی پیدائش رسول اللہ ﷺ کی پیدائش سے دو سال چند ماہ بعد ہوئی تھی، آپ کا پیدائشی نام عبدالکعبہ تھا۔ اسلام قبول کرنے پر پیغمبر اسلام ﷺ نے آپ کا نام عبدالله رکھ دیا۔ حضرت صدیق اکبر نے مردوں میں سب سے پہلے مسلمان ہونے کا شرف پایا۔ جب آپ نے اسلام قبول کیا تھا اس وقت آپ کے پاس چالیس ہزار درہم یا دینار تھے، ہجرت سے قبل ہی 35 ہزار اسلام کی اشاعت کے لیے خرچ کر دیا تھا، پھر مدینہ پہنچنے کے بعد بھی آپ کا ہاتھ کھلا رہا یہاں تک کہ غزوہ تبوک کے موقع پر اپنا سب کچھ، اللہ و رسول کی رضا کی خاطر اللہ کی راہ میں قربان کر دیا جب دنیا سے رخصت ہوے تو وراثت میں کوئی درہم و دینار نہیں بچا تھا یہ تھا آپ کا جذبہ انفاق فی سبیل اللہ۔ مفتی منظر محسن صاحب نے کہا کہ
پیغمبر اسلام ﷺ نے سب سے پہلا امیر حج بھی انہیں ہی مقرر فرمایا، امام الانبیا کی موجودگی میں مسجد نبوی میں امت کی امامت کا شرف بھی آپ ہی کو عطا ہوا، #دو_مرتبہ امام الانبیاء صلی اللہ علیہ و آلہ و سلم نے آپ کی اقتدا میں نماز بھی ادا فرمائی۔ حضرت سیدنا ابو بکر صدیق کی چار پشتوں کو صحابی رسول ہونے کا شرف حاصل ہے آپ کے سوا کوئی ایسا نہیں جس کو یہ فضیلت حاصل ہو۔
سیدنا ابو بکر صدیق شروع ہی سے سلیم الفطرت تھے، شراب نوشی اور بت پرستی سے عمر بھر محفوظ رہے۔ جس کی تصدیق رسول اللہ ﷺ اور جناب جبریل فرشتے نے کی ہیں۔

رسول اللہ ﷺ کے وصال کے بعد آپ مسندِ خلافت کے لئے چنے گئے، مملکت اسلامیہ کی بنیاد حضرت ابوبکر صدیق رضی اللہ عنہ کی خلافت کے زمانہ میں پڑی کیوں کہ آپ نے نہ صرف لوگوں کے دلوں میں عقائد کو راسخ کیا بلکہ تبلیغی و جنگی وفود ملک کے مختلف حصوں میں بھی بھیجے۔ عقائد کے رسوخ و نفوذ کے لیے آپ نے جو نمایاں کارنامہ انجام دیا وہ فتنہ ارتداد کو کچلنے کی صورت میں ظاہر ہوا۔ حکومت کو بیرونی خطرات سے محفوظ رکھنے کے لیے جو کارنامہ آپ نے انجام دیا وہ یہ ہے کہ سرحدوں پر فوجیں بھیج کر دشمنوں پر اپنی حکومت کے داخلی استحکام کا رعب جمادیا۔ ان دونوں کارناموں میں آپ کو دوسرے خلفاء پر اولیت اور فوقیت حاصل ہے۔
خلافت کی بیعت لینے کے بعد حضرت ابوبکر صدیق نے جو خطبہ پڑھا وہ اسلام کی اصل حقیقت کی تصویر کھینچ رہا ہے اور اس راز کو ظاہر کرتا ہے جس کے سبب سے اسلام نے اتنی تیزی کے ساتھ پوری روئے زمین پر اپنا سایہ پھیلا دیا ،وہ خطبہ یہ ہے:
’’ اے لوگو ! میں تمہارا امیر مقرر کیا گیا ہوں اور اس میں کوئی شک نہیں کہ میں اس قابل نہیں تھا،میں تم سے بہتر نہیں ۔ اگر میں اچھا کام کروں تو میری مدد کرنا،میں پھر جاؤں تو سیدھا کرنا، سچائی امانت ہے اور جھوٹ خیانت ہے، تم میں سے جو کم زور ہے وہی میرے نزدیک طاقت ور ہے، یہاں تک کہ میں اُس کو اُس کا حق لے کر دوں، تم میں جو طاقت ور ہے وہی میرے نزدیک کم زور ہے یہاں تک کہ میں اس سے حق وصول نہ کر لوں، تم میں سے کسی کو جہاد ترک نہیں کرنا چاہیے کیوں کہ جب بھی کوئی قوم جہاد کو چھوڑ دے گی اللہ تعالیٰ اس قوم کو ذلت میں مبتلا کردے گا ۔ جب تک میں اللہ اور اللہ کے رسول كى فرماں برداری کروں تو میری فرماں برداری کرنا ،اگر مجھ سے اللہ تعالیٰ کی نافرمانی کا ارتکاب ہو تو تم سے فرماں برداری کروانے کا مجھے کوئی حق نہیں۔ ‘‘
حضرت سیدنا صدیق اکبر کا یہ خطبہ ان کی متوازن شخصیت اور کردار کا آئینہ دار ہے اور دنیا بھر کے اُمرا و سلاطین، بالخصوص مسلم حکمراں و قائدین کے لیے اس خطبہ میں بڑا سبق ہے۔
بورڈ کے ترجمان مختار اشرف صاحب نے کہا کہ علماء مشائخ بورڈ کی جانب سے اشرف ملت کے زیر سایہ اصحاب و اہلبیت رسول کے مشن کو فروغ کا سلسلہ لگاتا ر جاری ہے۔

آل انڈیا علما ومشائخ بورڈ کی کارکردگی کا جائزہ

حضور اشرف ملت کا دورہ ممبر ا،تھانے، مہاراشٹرا
ممبرا (مہاراشٹرا)2/فروری بروز منگل
معروف اسلامی اسکالر اور صوفی عالم دین نبیرہ حضورسرکارکلاں،شہزادہ حضورشیخ اعظم پیرطریقت،رہبر راہ شریعت، حضرت علامہ الحاج الشاہ سید محمد اشرف اشرفی جیلانی نعیمی کچھوچھوی دامت برکاتہم،حضورمظہر المشائخ حضرت سید مظہر الدین اشرف کی عیادت اور آل انڈیا علما ومشائخ بورڈ کی کارکرکردگی کا جائزہ لینے ممبر اتشریف لائے،آپ کی آمد رات بارہ بجے کے قریب ہوئی۔اور ایک گھنٹے تک قیام رہا اس دوران آپ نے حضور مظہر المشائخ کی خیریت دریافت کی،اور ان کی جلد صحت ایبی کے لیے دعاکی۔حضرت نے حضور مظہر المشائخ کی ذات کو ممبر کے لیے فال نیک قرار دیااور کہا کہ ممبر میں فرزند مخدوم سمناں کی موجودگی ممبر اکی ترقی وخوش حالی کی ضمانت ہے۔مظہرالمشا ئخ کی خدمات سلسلہ اشرفیہ کے فروغ وترقی میں ناقابل انکار ہیں۔اس نشست میں بورڈ کے حوالے سے اہم گفت وشنید ہوئی۔اور بورڈ کو ترقی دینے اور اس کادائرہ کار وسیع رکنے کے ذرائع پر غور وخوض ہوا۔ممبرا کے متعد د علما ومشائخ اور نمائندہ حضرات موجود رہے۔ اس موقعے پر مفتی منظر حسن خان اشرفی گھاٹ کوپر،مولانا سید حسن اشرفی گووونڈی،قاری عمران احمد اشرفی ملنڈ بھی شریک مجلس رہے۔
حضور اشرف ملت نے مولانا قیصر امام اشرفی کو ممبر امیں بورڈ کا صدرنامزد فرمایا اور کہا کہ مولانا قیصر ممبرا کے حالات سے واقف ہیں،اور یہاں کے لوگوں سے ان کے رابطے بھی اچھے ہیں، ان کے زریعے ان سے انشاء اللہ بورڈ کی تعمیر وترقی کاکام ہوگا۔حضرت نے حاضرین کو مخاطب کرتے ہوئے کہا کہ مولانا قیصر امام اشرفی کاساتھ دیں۔مولانا قیصر امام اشرفی تقریبا دو دہائی سے ممبئی میں مقیم ہیں،اور ممبئی کی رگ رگ سے واقف ہیں،درالعلوم محمدیہ مین انھوں نے تعلیم حاصل کی،اور فراغت کے بعد مینارہ مسجد سے پانچ چھ سالوں تک جڑے رہے۔اس کے بعد ممبرا کا رخ کیا اور اس کے بعد سے اب تم ممبرامیں دعوت وتبلیغ،عملیات اور خدمت خلق کا فریضہ انجام دے رہے ہیں۔مولانا کا زیادہ وقت آج بھی ممبئی ہی میں گزرتا ہے،اور ہفتے میں دو دن کے لیے ممبرا میں بھی آتے ہیں۔ممبرا میں موصوف کا اپنا ذاتی مکان بھی ہے۔اور ایک دینی تربیت گاہ جامعہ اشرفیہ نصیریہ مدینۃ العلوم ایجوکیشن ٹرسٹ کے ڈائریکٹربھی ہیں۔حاضرین نے مولانا قیصر امام کی صلاحیتوں کا اعتراف کیا اور کہاکہ بورڈ ان کی سربراہی میں ممبر میں خوب ترقی کرے گا۔
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ترتیب وپیش کش:
مقبول احمد سالک مصباحی

آل انڈیا علما ومشائخ بورڈ شاخ گوونڈی کے زیر اہتمام نوریہ غوثیہ مسجدگوونڈی میں حضرت فاطمہ زہرا کا یوم ولادت دھوم دھام سے منایاگیا

20/۔جمادی الثانیہ بروز بدھ 1442ھ،مطابق 3/فروری 2021ء آل انڈیا علما ومشائخ بورڈ شاخ گوونڈی کے زیر اہتمام
نوریہ غوثیہ مسجدگوونڈی میں حضرت فاطمہ زہرا کا یوم ولادت دھوم دھام سے منایاگیا۔
معروف اسلامی اسکالر اور صوفی عالم دین نبیرہ حضورسرکارکلاں،جانشین حضورشیخ اعظم پیرطریقت،رہبر راہ شریعت، حضرت علامہ الحاج الشاہ سید محمد اشرف اشرفی جیلانی نعیمی کچھوچھوی دامت برکاتہمکاولہانہ خطاب،مجلس میں گوونڈی کے علما وائمہ اور عوام اہل سنت کاجم غفیر
اس موقع سے اشرف ملت نے حضور شیخ اعظم کی لکھی ہوئی اپنی پسندیدہ نعت پاک پیش فرمائی،جسے سامعیں نے خوب جھوم جھوم کر رکے سنا اور بار بار نعرہائے تکببیر ورسالت بلند کرتے رہے۔
جس کے ہاتھوں میں ہے ذوالفقار نبی
جس کے پہلو میں ہے شاہوار نبی
دختر مصطفیٰ جس کی دولھن نبی
جس کے بیٹوں سے نسل نبی ہے چلی
ہاں وہی ہاں وہی، ہاں علی وولی
نعرہ حیدری یاعلی یا علی
جس کے بارے میں فرمائیں پیارے نبی
جس کا مولیٰ ہوں میں اس کا مولیٰ علی
جس کی تلوار کی جگ میں شہرت ہوئی
جس کے بیٹوں سے رسم شجاعت چلی
ہاں وہی ہاں وہی،ہاں علی وولی
نعرہ حیدری یاعلی یا علی
میرے نانا بھی ہیں، میرے داتا بھی ہیں
سیدوں کے وہی جد اعلیٰ بھی ہیں
ان کے نانا بھی ان کے داتا بھی ہیں
میرے آقا بھی ہیں میرے مولیٰ بھی ہیں
نظمی وہ ہی صفی ورضی،و نجی
ہاں وہی ہاں وہی،ہاں علی وولی
نعرہ حیدری یاعلی یا علی
خاندان نبوت رسالت کی تعریف وتوصیف پر مشتمل کلام سن کر پورا مجمع سرشار وبیخود ہوگیا۔سارے سامعین کلام کو دہرا رہے تھے،یقینا کلام رسول جب فرزند رسول کی زبان سے ادا ہو تو اس کامزہ ہی کچھ اور ہوتا ہے۔اور یہ سادات کچھوچھہ کی خصوصیت ہے کہ خطابت اور خوش گلوئی ان کو ورثے میں ملتی ہے۔حالانکہ حضور اشرف ملت کسی مدرسے کے باضابطہ فارغ التحصیل نہیں،اور نہ ہی مولویت کا ان کے اوپر لیبل لگا ہوا ہے،آپ کی تعلیم وتربیت بنیادی طور پر علی گڑھ مسلم یونیورسٹی میں ہوئی ہے،اور انجینیرکی ڈگری حاصل کرنے کے بعد ایک زمانے تک تجارت ومعیشت اور رئیل اسٹیٹ کے پیشے سے بھی جڑے رہے ہیں،البتہ حضور سرکار کلاں اورحضور شیخ اعظم کی صحبت اور ذاتی مطالعہ کاکمال ہے کہ اس وقت خطیب اعظم ہند کی طرح مذہبی اسٹیجوں پر گرج رہے ہیں۔اور بڑے بڑے نامی گرامی خطبا آپ کے فکر انگیز خطاب کے سامنے ٹکتے نظر نہیں آتے۔خطیب اگر خوش گلو بھی ہوتو سونے پر سہاگہ ہوجاتا ہے،اور دونوں کے ساتھ آل رسول ہواور اس کے ساتھ ساتھ وجاہت کا آئینہ بھی ہو تو سبحان للہ۔اور یہ ساری خوبیاں حضور اشرف ملت میں اللہ تعالیٰ نے جمع فرمادی ہیں۔
حضور اشرف ملت نے اپنے دلآویز خطاب میں سیدہ فاطمہ ہزرا رضی اللہ تعالی عنہا کی عظمت وفضیلت پر خاص گفتگو فرمائی،اور ان کی پاکیزہ سیرت کے اہم پہلؤوں کو اجاگر کیا۔اور کہا کہ امت مسلمہ کی تمام ماؤں اور بہنوں کے لیے حضرت فاطمہ زہرا کی سیرت ایک آئیڈیل اور نمونہ ہے۔انھوں نے کہ حضرت فاطمہ زہرا رضی اللہ عنہا کی عظمت وفضیلت کے لیے یہ کافی ہے کہ آپ ہی کے ذریعے رسول پاک کی نسل پاک چلی۔حضرت نے ایک سوال کے جواب میں کہاکہ مغربی دنیا اسلام کی مقبولیت سے سخت خائف ہے اسی لیے مسلمانوں کو مشتعل کرنے کے لیے طرح طرح کے ہتھ کنڈے اپناتی رہتی ہے،جس کی تازہ مثال حضرت فاطمہ زہرا رضی اللہ تعالیٰ عنہ کی پاکیزہ شخصیت پر فلم بنانا بھی ہے۔جس سے مسلمانوں میں سخت اضطراب پیدا ہوا۔حضرت نے کہا کہ ہم اس حرکت کی سخت مذمت کرتے ہیں۔
آل انڈیا علما ومشائخ بورڈ فقط نام نہیں ہے بلکہ ایک تحریک ہے،یہ کسی حجرے میں لگے ہوئے سائن بورڈ کا نام نہیں ہے،اور نہ ہی لیٹر پیڈ والی تنظیم ہے،یہ جب سے قائم ہوئی،یہ تنظیم فعال ہے،اب تک کئی بڑے بڑے مسلم مہاپیچائت اور نیشنل وانٹرنیشنل کانفرنسز منعقد کی۔لکھنؤ میں جلوس محمد ی کاقیام واجرا میں اس کااہم رول ہے،میں نے عہد کی اتھا کہ جب تک جلوس نکل نہیں جاتا میں لکھنؤ سے باہر قدم نہیں نکالوں گا۔انتہائی مختصر وقت میں ملک کے ۷۱ صوبوں میں اس کی شاخیں قائم ہیں۔اور ہر شاخ کے ذریعے اس صوبے کے ملی ومی مسائل کو حکومت کے سامنے پیش کرتے رہتے ہیں۔
اشرف ملت نے قوم کیاصلاح کرتے ہوئے کہا کہ صرف مروجہ نعروں سے کام نہیں چلے گا،بلکہ نعرے کی روح تک پہنچنے کی کوشش کرنی ہوگی۔صرف آواز بلدن مت کرو بلکہ نعرہ کی حقیقت کو بھی سمجھو،نعرہ دراصل عقائد کا برملا اظہار ہے۔نعرہ تکبیر میں اللہ کی کبریائی ہے،نعرہ رسالت میں عظمت رسالت ہے مگر اس کے ساتھ ساتھ نعرہ حیدری اہل بیت رسالت کے ساتھ ہماری وابستگی کا اظہار ہے۔اس کے بعد جتنے نعرے چاہو لگاؤ۔
حضرت افسوس کرتے ہوئے کہا کہ دنیا کی تمام اقوام میں مسلمان کمزور ہے،اور مسلمانوں میں اہل سنت سب سے زیادہ کمزور ہیں۔اور یہ سب اہل سنت کے داخلی انتشارتقسیم کا نتیجہ ہے۔جب قومیں انفرادیت کاشکار ہوجاتی ہیں تو ہر طرف سے آواز آتی ہے کہ کہاں سے پہلے کہاں سے پہلے،اور جب اجتماعیت کے ساتھ کام کرتی ہیں تو آواز آتی ہے یہاں سے پہلے یہاں پہلے۔

ترتیب وپیش کش:
گدائے اشرفی
مقبول احمد سالک مصباحی

ऑल इंडिया उलमा मशाइख बोर्ड जयपुर जिला के अध्यक्ष नियुक्त किए गए वाहिद यजदानी.

जयपुर 19 जनवरी. ऑल इंडिया उलमा मशाइख बोर्ड ने वाहिद यजदानी को जयपुर ज़िला का अध्यक्ष घोषित किया, बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष हजरत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछोछवी के आदेश पर बोर्ड कार्यसमिति दिल्ली के समन्वयक हाफ़िज़ हुसैन शेरानी ने नियुक्त पत्र पेश किया.
वाहिद यजदानी ने कहा कि ऑल इंडिया ऊलमा व मशाईख बोर्ड मोहब्बत के पैग़ाम को आम करने वाला संगठन है, और सभी धर्मों का आदर करता है, श्री यजदानी को राजस्थान की कई दरगाहों के सज्जादा नशीन एवं कई संस्था, संगठन क्लब ने मुबारकबाद पेश की और माला पहनाकर स्वागत किया गया और कई जगह सम्मान किया गया. वाहिद यजदानी ने बताया कि ऊलमा मशाईख बोर्ड सूफी विचारधारा को बढ़ावा देने वाला संगठन है, बोर्ड की भारतवर्ष में कई शाखाएँ हैं जो सूफी संतों के पैग़ाम को बढ़ावा देने एंव अल्लाह, पैगंबर मोहम्मद मुस्तफा के बताए हुए रास्ते पर अमल करते हैं, श्री यजदानी ने बोर्ड के प्लेटफॉर्म पर चलने का संकल्प लिया.

नौजवानों के हाथों में देश का भविष्य सुनहरा : सय्यद मोहम्मद अशरफ

26 जनवरी, नई दिल्ली
इस बार कोरोना महामारी के कारण गणत्रंत्र दिवस बोर्ड के सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर मनाया गया जिसमें बोर्ड एग्जीक्यूटिव सदस्य हज़रत सय्यद तनवीर हाश्मी, हज़रत सय्यद अम्मार अहमद नय्यर मियाँ, हज़रत सय्यद आलमगीर मियां, हज़रत सय्यद सलमान चिश्ती, हज़रत सय्यद फरीद अहमद निज़ामी के अलावा जनाब यूनुस मोहानी ने अवाम को संबोधित किया. प्रोग्राम का संचालन मुख़्तार अशरफ ने किया.
आल इंडिया उलमा व मशाइख़ बोर्ड के अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफी फ़ोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने सभी देशवासियों को 72 वां गणतंत्र दिवस की बधाई देते हुए कहा कि आज देश में देश भक्ति का सैलाब आया है जिसने दुनिया को संदेश दिया है कि भारत का भविष्य बहुत सुनहरा है।
उन्होंने लोगों को शिक्षा के लिए आंदोलन चलाने की बात कही, उन्होंने कहा कि सभी को इस ओर ध्यान देना है और लोगों को जिनके पास पैसे हैं, जो अपने बच्चों को पढ़ाने के अलावा दूसरे बच्चे की फीस जमा कर सकता है वह करे, जो दो बच्चों की फीस भर सकता है भरे और जो 4 बच्चे पढ़ा सकता है पढ़ाए क्योंकि मुल्क और समाज की तरक्की शिक्षा से ही होगी।
हज़रत ने कहा कि लोगों को हिंसा से अराजकता से बिल्कुल बचते हुए लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखनी चाहिए,हमें ख्याल रखना चाहिए कि किसी भी हालत में देश का नुक़सान न होने पाए, यह खुशी की बात है कि लोगों में जिस तरह का ज़ज़्बा अपने संविधान और देश के लिए देखा जा रहा है, जो बताता है कि मुल्क का भविष्य सुनहरा है और किसी भी विदेशी ताकत में यह ताकत नहीं है कि वह हमारे इस चमन को बांट पाए।
आज हर हाथ में तिरंगा है, हर ज़ुबान पर संविधान यह भारत की ताकत को दर्शाता है कि भले हज़ार असहमतियां हों लेकिन देश की बात आएगी हमारे तिरंगे के सम्मान की बात आएगी तो हम एकजुट हैं, सरकार और जनता के बीच खींचतान तो लोकतंत्र की खूबसूरती है लेकिन इसमें हिंसा का कोई स्थान नहीं है, सभी को गणतंत्र दिवस की बधाई और यह अपील भी कि इस चमन को आग से बचा कर रखना है ताकि यह फूल खूब खिले, खूब महके, वतन में हमेशा फसले बाहर रहे।