सय्यद अफजल मियाँ देश के लिए गौरव थे : सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी

20, दिसंबर 2020, किछोछा, अम्बेडकर नगर
जामिया मिल्लिया इस्लामिया और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के पूर्व रजिस्ट्रार और एडीजी (IPS) भोपाल मध्य प्रदेश के सय्यद मोहम्मद अफजल मियां देश के लिए एक अहम शख्शियत थे। आप एक खुश अख़लाक़, एक साहिबे किरदार शख्शियत हमारे बीच से रुखसत हुई है। आप बहुत ही नेकदिल और रहमदिल अफसर थे। इतना ऊंचा पद संभालने के बावजूद आप विनम्र स्वभाव और सहनशीलता के प्रतीक थे। बेशक, आपका निधन न केवल जमात-ए-अहल-ए-सुन्नत बल्कि पूरे देश के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
उक्त बातें आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफी फोरम के चेयरमैन हजरत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने अपनी ख़ानक़ाह अशरफिया किछौछा मुकद्दसा में एक समारोह को संबोधित करते हुए व्यक्त की । हजरत ने कहा कि मरहूम अफ़ज़ल मियां देश की खिदमत के साथ-साथ दीनी तालीम से युवाओं को जोड़ने का उनका लक्ष्य निरंतर जारी था। देश की तरक्की और मज़लूमो को न्याय मिले इसलिए उन्होंने आईपीएस को चुना और समाज सेवा में जुट गए।
उन्होंने युवाओं को शिक्षित होकर ही उन मुकामों को हासिल करने का लक्ष्य बताया जिसके लिए आज का युवा सोच रखता है। दीनी तालीम के साथ साथ आज के हालात पर उनका विशेष ध्यान रहता था। निश्चित ही हम सबको यह कमी सदियों तक महसूस होगी। हज़रत सय्यद अफ़ज़ल मियाँ बरकाती मारहरवी का निधन एक बहुत बड़ी क्षति है जिसकी भरपाई मुश्किल है। हज़रत ने अंत में दुआ फ़रमाई की अल्लाह तआला आपके दरजात बुलन्द फरमाए और घर परिवार और अकीदतमंदों को सब्र अता फरमाए ,आमीन

By: नुरूलहुदा मिस्बाही। भारत डेली न्यूज

सख्त कानून बनाने से नहीं बल्कि अच्छा समाज बनाने से रुकेंगे बलात्कार : सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी

4 दिसंबर,लखनऊ
आल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड के अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफी फ़ोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने लख़नऊ में बोर्ड की मीटिंग के दौरान नागरिकता बिल पर बात करते हुए कहा कि संविधान की रक्षा उसपर अमल करने से होगी सिर्फ बात करने से नहीं जब भारत का संविधान पंथ निरपेक्ष है और उसमें न्याय की द्रष्टि में सबको समान माना गया है तो उसमें धर्म के नाम पर फर्क करना गैर संवैधानिक और संविधान की मूल भावना के विपरीत है।
उन्होंने कहा कि अभी नागरिकता बिल पर जिस तरह की बात हो रही है उससे ऐसा महसूस होता है कि यह बिल राजनीत से प्रेरित है सरकार को इसपर विचार करना चाहिए क्योंकि धर्म के नाम पर भेद करना भारत के संविधान के खिलाफ काम होगा ।
हैदराबाद में डॉक्टर प्रियंका रेड्डी के साथ हुई घिनौनी घटना पर बात करते हुए कहा कि देश में बलात्कार किसी भी सख्त कानून बना देने से नहीं रुकेंगे हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि सख्त कानून भी आवश्यक है लेकिन इसके लिए इस तरह के मामले में एक महीने के भीतर सजा का प्रावधान आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि सरकार को इसके लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट में यह मुकदमे चला कर एक माह में फैसले की व्यवस्था करनी चाहिए वहीं उन्होंने यह भी कहा कि यह संपूर्ण रूप से रोकने के लिए सरकार को सबसे पहले पूरे देशें में पूर्ण शराबबंदी लागू करनी चाहिए,वहीं अन्य प्रकार के सभी नशे जिसमें ध्रूम पान भी शामिल है सब पर रोक लगनी चाहिए,वहीं समाज को बेहतर बनाया जाना चाहिए ,जो शिक्षा के बिना संभव नहीं है।
पैगम्बर ने एक आदर्श समाज की स्थापना की जिसका परिणाम यह हुआ कि लोगों में कानून का भय कानून की इज्जत के साथ आया वहीं लोग दूषित सोच से पाक रहे ,क्योंकि बलात्कार जहां एक जघन्य कृत्य है वहीं एक दूषित मानसिकता का परिणाम है हमें मानसिकता और इस घिनौने विचार पर रोक लगानी है और इसके लिए व्यापक अभियान चलाना है ताकि बलात्कारी सोच को समाप्त किया जा सके।
बैठक में बाबरी मस्जिद मामले में दायर की गई पुनर्विचार याचिका पर भी बात हुई और बोर्ड अध्यक्ष ने साफ कर दिया कि हमारा काम दिल जीतना है ,हम अपना काम कर रहे हैं हम इस मामले के पक्षकार नहीं लिहाज़ा हम आम मुसलमानों की तरह अदालत के फैसले का सम्मान करते हैं।
By: Yunus Mohani

फैसला कुछ भी हो नफरत हारनी चाहिए : सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी

8 नवंबर,शुक्रवार मदीना सऊदी अरब
आल इंडिया उलमा व मशाइख़ बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफी फ़ोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने मदीना शरीफ से बयान जारी कर लोगों को पैग़म्बरे अमन की विलादत की मुबारकबाद दी है,उन्होंने भारत की सर्वोच्च अदालत द्वारा कल सुबह अयोध्या मामले पर आने वाले फैसले पर लोगों से अपील की है कि इसे जीत और हार के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए सभी भारतीयों की यह साझा ज़िम्मेदारी है कि हर हाल में अमन शांति बरकरार रहे,किसी भी अफवाह पर ध्यान नहीं दें और हर हाल में नफरत को हरा दें।
यह अभी तक आने वाले और फैसलों की तरह ही एक फैसला है जिसे भारतीयों को उसी तरह लेना है जैसा पहले होता आया है,हुकूमत और प्रशासन अपना काम करेंगे हमें अपनी ज़िम्मेदारी निभानी है ,और भारत को जिताना है मुसलमानों को पैग़म्बरे अमन के मीलाद के दिन यह फैसला आ रहा है ,अब हमे पैगम्बर की तालीम पर अमल कर बताना है कि हम नबी के सच्चे गुलाम हैं और किसी भी कीमत पर अमन को खराब नहीं होने देना है।