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सब अल्लाह के बन्दे हैं, भाई भाई बन कर रहो : सय्यद मोहम्मद अशरफ

17 नवंबर/लखनऊ आल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड  के अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफी फोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने मोहसिने इंसानियत नबिए रहमत

In God’s name
فروری میں بین اقوامی صوفی کانفرنس کے انعقاد کی تیاریاں شروع پہلی تیاری میٹنگ میں سیمینار اور عوامی اجتماع کے مختلف پہلوؤں کا جائزہ
जो देश का दुश्मन वह हमारा दुश्मन : सय्यद मोहम्मद अशरफ
17 नवंबर/लखनऊ
आल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड  के अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफी फोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने मोहसिने इंसानियत नबिए रहमत हज़रत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहू  अलैहि वसल्लम की हदीस बयान करते हुए कहा कि फरमाने नबी है “बदगुमानी से बचो क्योंकि बदगुमानी की अक्सर बातें झूठी होती है,लोगों के ऐब तलाश करते न फिरो,आपस में हसद न करो,और बुग़ज़ न रखो किसी की पीठ पीछे बुराई न करो बल्कि सब अल्लाह के बन्दे हैं आपस में भाई भाई बन कर रहो” नबी की इस तालीम पर लोगों ने अमल छोड़ा है इसी लिए दुनिया में इतनी बद अमनी है।
हज़रत ने कहा कि अगर हम बदगुमान नहीं होंगे तो कोई लाख चाह ले लेकिन हमारे बीच लड़ाई नहीं करवा सकता, इसी तरह अगर हम एक दूसरे के लिए खैर चाहेंगे, आपस में हसद नहीं करेंगे तो मोहब्बत का जो माहौल बनेगा उससे हमारी दुनिया भी खूबसूरत होगी और हमे आखिरत में भी उसका सिला मिलेगा।उन्होंने कहा कि सीरत के हर पहलू पर हमें गौर व फिकर करना  है और उस पर अमल करना है क्योंकि इसके सिवा कुछ निजात का जरिया नहीं, क्योंकि नबी की सीरत हुकमे खुदा से जुदा मुमकिन नहीं।
रसूले मक़बूल सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया कि “तुममें बदतरीन शख्स वह है जो चुगलखोरी करते फिरते हैं और दोस्तों के बीच ताल्लुकात खराब कराते फिरते हैं” इस हदीस को खूब याद रखना होगा क्योंकि जिसे रसूल बदतरीन कह रहे हैं वह यकीनन बड़ी बुराई में है लिहाजा इससे बचिये, अगर कोई शख्स  ऐसा है तो उसे सुधारने की कोशिश कीजिए वरना उसकी बात मत सुनिए, ऐसे लोग आपके आंगन में नफरत का बीज बोते हैं और फिर आपका या फिर आपके अपनों का लहू इसे सीचने के काम में बेकार जाता है।
आपस में मोहब्बत कीजिए, मीलाद का यही पैगाम है, लड़ाने वालों से होशियार रहिए, मोहब्बत को फरोग दीजिए इसी में हम सब की भलाई है। हज़रत ने कहा, मुल्क में जिस तरह का माहौल बनाया जा रहा है इससे होशियार रहिए क्योंकि सियासत के खूनी पंजे मजहब, ज़ात नहीं देखते सिर्फ उन्हें लहू से मतलब होता है जिससे वह सत्ता पा सकें।  सिर्फ मुसलमान ही नहीं बल्कि मुल्क में रहने वाले सभी लोग नफरत को नकार दें तो खुद बखुद मोहब्बत का निज़ाम कायम हो जाएगा।
यूनुस मोहानी

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