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मानवजीवन की रक्षा इबादतगाहों के विवाद से ज़्यादा ज़रूरी : सय्यद मोहम्मद अशरफ

लखनऊ/17 नवंबर मानव जीवन की रक्षा इबादतगाहों के विवाद से ज़्यादा ज़रूरी है क्योंकि मानव जीवन बहुमूल्य है यह बात आल इंडिया उलमा व मशाईख़ बोर्ड के संस्था

ज़ोरा ज़िला शोपियान, कश्मीर में आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड का एकदिवसीय सूफी कांफ्रेंस
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सरकार बर्मा के बेगुनाहों को पनाह दे, मानवता को शर्मसार होने से बचाये : सय्यद मोहम्मद अशरफ

लखनऊ/17 नवंबर

मानव जीवन की रक्षा इबादतगाहों के विवाद से ज़्यादा ज़रूरी है क्योंकि मानव जीवन बहुमूल्य है यह बात आल इंडिया उलमा व मशाईख़ बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने लख़नऊ में मीडिया से बाबरी मस्जिद को लेकर चल रहे घटनाक्रम के संबंध में कही. उन्होंने साफ कहा कि हम अगर धर्म की बात करते हैं तो धर्म यह कहता है कि किसी भी तरह बेगुनाहों के खून को बहने से बचाया जाए ।
हज़रत ने साफ कहा कि देश के सभी नागरिकों को न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और सभी को उसके निर्णय का सम्मान करना चाहिए. उन्होंने अदालत के बाहर समझौते के लिए चल रही कोशिशों पर कहा कि यह समझौता पक्षकारों के बीच ही संभव है अगर वह चाहतें है और कोई हल निकल सकता है जिससे मोहब्बत वाली फिज़ा  बनेगी तो ज़रूर होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि हम इस संबंध में पक्षकार नहीं हैं, हमारा काम सौहार्द को बनाने का है, प्रेम बांटने का है, सूफिया की तालीम को आम करते हुए लोगों के बीच मोहब्बत फैलाना है, क्योंकि अगर किसी बेगुनाह का खून बहा तो हम सब हार जाएंगे, क्योंकि इबादतगाह इबादत करने वालों के लिए हैं तो पहला कर्तव्य मानव जीवन की रक्षा है, उसे सांप्रदायिक विवादों से बाहर निकालना है।
हज़रत किछौछवी ने कहा, सूफी संतों  ने सदा जोड़ने का काम किया है, हम तोड़ने वालों के साथ नहीं हैं , लेकिन जोड़ने वालों के साथ हैं. हम यही पैग़ाम आपको भी देते हैं “मोहब्बत सबके लिए, नफरत किसी से नहीं” शांति का यही मंत्र है।

By: युनुस मोहानी

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