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देश में अशान्ति फैलाना चाहते हैं पैग़म्बर के दुश्मन : सय्यद मोहम्मद अशरफ

राजस्थान :17 सितम्बर देश में अशान्ति फैलाना चाहते हैं पैग़म्बर के दुश्मन यह बात आल इंडिया उलमा व मशायख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशर

All India Ulama & Mashaikh Board’s notion of only a particular interpretation of a faith is not desirable
इबादगाहों की जंग सियासतदानों की खुराक है: सय्यद मोहम्मद अशरफ
تصوف وصوفی اورحضرت مخد وم اشرف جہانگیر سمنانی

राजस्थान :17 सितम्बर
देश में अशान्ति फैलाना चाहते हैं पैग़म्बर के दुश्मन यह बात आल इंडिया उलमा व मशायख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने गुजरात कि एक महिला अंजू डांगर द्वारा पैगम्बरे अमन कि शान में गुस्ताखी पर अपना गुस्सा जताते हुए कही ,हज़रत ने साफ़ कहा कि इस्लाम दुश्मन ताक़तें जानती हैं मुसलमान सब कुछ बर्दाश्त कर सकता है लेकिन अपने रसूल कि शान में गुस्ताखी हरगिज़ बर्दाश्त नहीं कर सकता इसीलिए अब यह आतंकी सोच रखने वाले देशद्रोही अपनी नीचता के चरम पर पहुँच रहे हैं ताकि मुसलमानों को तकलीफ दी जा सके .
हज़रत ने कहा आल इंडिया उलमा मशाइख बोर्ड न सिर्फ इसकी भर्त्सना करता है बल्कि इस औरत को सजा दिलाने के लिए हर मुमकिन कोशिश का एलान भी करता है हम मुल्क के कानून के मुताबिक इसे कड़ी से कड़ी सजा दिए जाने के लिए हर मुमकिन कोशिश करेंगे ,उन्होंने यह भी कहा कि अगर सोशल मीडिया पर इस तरह की घटिया टिप्पड़ी होती रहीं किसी भी धर्म या सम्प्रदाय के खिलाफ तो भारत में शांति बनी रहना संभव नहीं होगा ,सरकार को इस पर विचार करते हुए इसे रोकना ही होगा ,देश बड़े खतरे के मुहाने पर खड़ा है ऐसे में इस प्रकार की नफरत का प्रचार सिर्फ ज़हर घोलने वाला है .
उन्होंने साफ़ कहा कि हम अपने नबी की शान में किसी भी तरह की गुस्ताखी बर्दाश्त नहीं करेंगे ,ऐसी नीच सोच रखने वाली महिला को खुली हवा में सांस लेने का अधिकार नहीं है उसे सलाखों के पीछे होना चाहिये.
उन्होंने कहा अगर ऐसा नहीं होता है तो हम देशव्यापी आन्दोलन छेड़ेंगे ताकि आइन्दा किसी भी धर्म या सम्प्रदाए के विरूद्ध ऐसा करने वाला बक्शा न जाये और उसे सख्त से सख्त सजा मिले .यह सिर्फ धार्मिक भावनाए आहत करने भर का मामला नहीं है ,यह मामला देश को सांप्रदायिक आग में झोकने की कोशिश का भी है यानि साफ साफ देशद्रोह का है अतः इस महिला को सख़्त से सख़्त सजा की हम मांग करते हैं.
By: यूनुस मोहानी

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