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कोर्ट का सम्मान लेकिन सरकार मनमाना क़ानून थोपने की न करे कोशिश : सय्यद मोहम्मद अशरफ

मरिशस : 22 अगस्त तीन तलाक़ पर उच्चतम न्यायालय के फैसले का हम सम्मान करते हैं लेकिन सरकार मनमाना क़ानून थोपने की कोशिश न करे, मुसलमान पर्सनल लाॅ में हस्

At Sufi meet, PM Modi touches hearts of Muslims; says Allah has 99 names and none of them stands for violence: DNA
All India Ulama & Mashaikh Board’s notion of only a particular interpretation of a faith is not desirable
India can be an honest broker in West Asia:Hindustan Times

मरिशस : 22 अगस्त
तीन तलाक़ पर उच्चतम न्यायालय के फैसले का हम सम्मान करते हैं लेकिन सरकार मनमाना क़ानून थोपने की कोशिश न करे, मुसलमान पर्सनल लाॅ में हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं करेंगे, यह हमारा संवैधानिक अधिकार है, यह बात आल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड के संस्थापक एवं अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने मीडिया द्वारा तीन तलाक़ पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय के फैसले पर किए गए सवाल पर कही।
उन्होंने कहा कि अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना तब तक उचित नहीं जब तक आदेश को पढ़ न लिया जाए लेकिन हम स्पष्ट रूप से मुस्लिम पर्सनल लाॅ के साथ हैं, मुस्लिम पर्सनल लाॅ बोर्ड के नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को जल्दबाजी में महज़ राजनीतिक लाभ के लिए क़ानून लाने में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए बल्कि मुस्लिम समाज को भरोसे में लेकर कोई क़ानून लाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा आल इंडिया उलमा मशाइख़ बोर्ड इसके लिए पूरे देश में सेमिनार आयोजित करेगा और इस संबंध में उचित राय बनाए जाने का प्रयास करेगा ताकि इस संबंध में उचित क़ानून बन सके जिससे पर्सनल लाॅ में भी कोई दखलंदाज़ी न होती हो।
बोर्ड के संयुक्त राष्ट्रीय सचिव सय्यद सलमान चिश्ती ने भी कोर्ट के फैसले पर कहा कि दरअसल कोर्ट ने तीन तलाक को असंवैधानिक नहीं माना है लेकिन तीन तलाक़ पर 6 माह की रोक लगाते हुए सरकार को क़ानून बनाने के लिए निर्देशित किया है, ऐसे में गेंद सरकार के पाले में है और ये समय है कि सरकार मुस्लिम पर्सनल लाॅ का सम्मान करते हुए ऐसा क़ानून बनाए जिससे वह मुस्लिम समाज का भरोसा जीत सके क्योंकि मुस्लिम पर्सनल लॉ में बदलाव देश के मुसलमानों को मंजूर नहीं।

By: यूनुस मोहानी

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