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कुदरत का निजाम है गुनाहों से तौबा(GST) करने वालों को माफ़ी -सय्यद अशरफ

लखनऊ:आल इंडिया उलेमा मशाइख बोर्ड के संस्थापक अध्यछ हज़रत सय्यद मोहमम्द अशरफ किछौछवी ने जी एस टी को गुनाहों से तौबा बताते हुए कहा की अगर इंसान रब की बार

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सरकार शिक्षा और रोजगार पर ध्यान दे : सय्यद मोहम्मद अशरफ

लखनऊ:आल इंडिया उलेमा मशाइख बोर्ड के संस्थापक अध्यछ हज़रत सय्यद मोहमम्द अशरफ किछौछवी ने जी एस टी को गुनाहों से तौबा बताते हुए कहा की अगर इंसान रब की बारगाह में जीएसटी को अपना ले तो उसके दरजात बुलंद होने से कोई नहीं रोक सकता यह रब का निजाम हैं .
यह बात उन्होंने एक सवाल के जवाब में कही जब उनसे जीएसटी पर उनकी राय पूछी गयी उन्होंने कहा की मुल्क की बेहतरी और कालाबाजारी रोकने के लिए अगर कोई क़दम उठाया जाता है तो हम सब को उसका समर्थन करना चाहिए सरकार ने कानून बनाया है अब उसके नतीजे कुछ दिन बाद पता चलेंगे लिहाज़ा किसी चीज़ का विरोध सिर्फ बदगुमानी की बुनियाद पर ठीक नहीं है .
हज़रत ने कल बिहार में भीड़ के ज़रिये दो दलित भाइयों को जान से मारे जाने की पुरजोर मज़म्मत की उन होने कहा की धीरे धीरे जो खौफ का माहौल बनाया जा रहा है वोह मुल्क के लिए खतरनाक है जो किसी को चैन से जीने नहीं देगा अगर आज हिंसक भीड़ के निशाने पर मुसलमान दलित सिख और इसाई हैं तो कल यह आपस में भी एक दुसरे के खून के प्यासे होंगे जो बड़ा डरावना होगा .

उन्होंने कहा जिस तरह उत्तरप्रदेश में आये दिन हिंसक वारदातें हो रही है उससे एक समुदाय में जो डर पैदा हो रहा है वोह ठीक नहीं है सरकार को इस पर ध्यान देना होगा.
हज़रत ने फिर एक बार सभी अमनपसंद भारतियों से एकजुट होकर इस नफरत वाली भीड़ को मोहब्बत से हरा देने की अपील की है उन्होंने कहा की अब समय आ गया कि हम ज़ुल्म के खिलाफ खड़े हो जाएँ क्योंकि नफरते हद से गुज़रती जा रही हैं अगर हमने देर की तो अंजाम ज्यादा बुरा होगा .लिहाज़ा सब्र का दामन बिना छोड़े मोहब्बत को आम किया जाये और नफरत को हरा दिया जाये .

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