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इंसाफ से ही कायम हो सकता है अमन : सय्यद मोहमद अशरफ

17 दिसंबर / नई दिल्ली 1984 सिख दंगों पर हाई कोर्ट के फैसले पर बात करते हुए आल इन्डिया उलमा व मशाईख बोर्ड के अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफी फोरम के चेयरमैन हज

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देश में अशान्ति फैलाना चाहते हैं पैग़म्बर के दुश्मन : सय्यद मोहम्मद अशरफ
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17 दिसंबर / नई दिल्ली
1984 सिख दंगों पर हाई कोर्ट के फैसले पर बात करते हुए आल इन्डिया उलमा व मशाईख बोर्ड के अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफी फोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहमद अशरफ किछौछवी ने कहा कि ” इंसाफ से ही अमन कायम हो सकता है” उन्होंने कहा भारत के संविधान ने सबको न्याय के समक्ष समान माना है यानी सबके लिए न्याय की परिकलपना की है  व्यावाहरिक तौर पर यह पूर्णता किया जाना अभी शेष है।
हज़रत ने कहा कि दंगो में जिन लोगों ने अपनो को खोया और जिनकी ज़िंदगियां जीवित रहते हुए भी मुर्दों जैसी हो गई लेकिन उन्होंने न्याय की उम्मीद नहीं छोड़ी आज 34 साल बाद उनके लिए बड़ा दिन है। उन्होंने यह भी कहा कि न्याय में देरी न्याय न मिलने के समान ही है।
देश में हुए तमाम दंगों के मुजरिमों को सजा मिलनी चाहिए और न्याय में देरी नहीं होनी चाहिए चाहे ज़ुल्म करने वाला किसी भी पद पर हो उसका कितना भी रूसूख हो अगर दोषी है तो सजा मिलना जरूरी है वरना लोगों में असुरक्षा की भावना बढ़ती है और न्याय व्यवस्था से विश्वास डिगता है जो समाज और देश दोनों के लिए सही नहीं है।
हज़रत ने कहा, धर्म भी न्याय की शिक्षा देता है और पैगम्बर ने इसे स्थापित किया, मीसाक़े  मदीना पर अमल करने वाला राज्य अमन का गहवारा बन गया ।उन्होंने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि बेगुनाह लोगों का खून बहाने वाले चाहे मलियाना, भागलपुर, भरतपुर, मुजफ्फरनगर, गुजरात या मुंबई दंगों के मुजरिम हो सभी  को भी सजा मिलेगी और पीड़ितों को न्याय।
By: यूनुस मोहानी

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