इस्लाम एक मुकम्मल निज़ाम-ए-हयात ,क़यामत तक के लिए हैं उसूल-ए- क़ुरआन: सय्यद मोहम्मद अशरफ

29 सितम्बर, देवास

आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड के अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफी फोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने मध्य प्रदेश के देवास में एक जलसे को संबोधित करते हुए कहा कि “इस्लाम एक मुकम्मल निज़ाम-ए- हयात है,क़यामत तक के लिए हैं उसूले क़ुरआन” उन्होंने यह बात सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया के द्वारा भारतीय दंड सहिंता की धारा 497 को समाप्त किये जाने के सम्बन्ध में कही.

उन्होंने कहा कि इस क़ानून के रहने या न रहने का मुसलमानों पर कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि क़ुरआन में ज़िना हराम है और ता क़यामत हराम ही रहेगा इसमें कोई बदलाव नहीं किया जा सकता, लिहाज़ा इस क़ानून के होने या न होने से क़ुरआन पर ईमान रखने वालों पर कोई फर्क नहीं पड़ता, उन्हें हर उस काम से दूर रहना है जिसे अल्लाह और उसके रसूल ने हराम क़रार दिया.

हज़रत किछौछ्वी ने यह भी कहा कि इस्लाम एक मुकम्मल निज़ाम-ए- हयात है, इसमें हर चीज़ का बहुत विस्तृत वर्णन किया गया है और हर बुरे काम के लिए दंड पहले से ही तय है. लेकिन हम जहाँ रहते हैं उस देश के हर उस क़ानून को मानना हमारी ज़िम्मेदारी है जिससे हमारे दीन में फर्क न पड़ता हो.

हज़रत ने कहा कि भारत की अपनी एक संस्कृति है उस पर इस तरह के क़ानूनों के ख़त्म होने का अच्छा असर नहीं पड़ेगा क्योंकि समाज में अगर क़ानून का खौफ़ खतम होगा तो लोग गुनाह की तरफ आसानी से आकर्षित होंगे, सरकार और अदालत को इस ओर भी गौर करना चाहिए .

मुसलमान क़ुरआन पर ईमान रखने वाले और अमल करने वाले हैं तो उन्हें बखूबी समझ लेना चाहिए कि दुनिया के बनाये क़ानून वक़्त के साथ बदलते हैं लेकिन अल्लाह का क़ानून नहीं बदल सकता, लिहाज़ा बुरी बातों से दूर रहिये और नेक अमल रखिये इसी मे हमारी और आपकी निजात है.

By: यूनुस मोहानी

 

 

हक़ कभी ज़ुल्म से समझौता नहीं करता, यही है कर्बला का सबक़: सय्यद मोहम्मद अशरफ

20 सितम्बर /किछौछा

आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड के अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफी फोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने कहा कि “हक कभी ज़ुल्म से समझौता नहीं करता यही कर्बला का सबक है” सिर्फ इतना ही नहीं उन्होंने आगे कहा कि हमें हक का पैरोकार होने के लिए उनके किरदार को अपनाना पड़ेगा जो अहले हक हैं और फिर हम देखेंगे कि ज़ालिम क्यों न कितना भी ताक़तवर हो वह हारा हुआ ही नज़र आएगा .

उन्होंने कहा कि यज़ीदियत हर दौर में हुसैनियत से हारती रहेगी क्योंकि हक से कभी बातिल जीत नहीं सकता सत्य से असत्य को विजय नहीं मिल सकती कुछ देर को सत्य परेशान हो सकता है लेकिन उसे पराजित नहीं किया जा सकता जब परेशानी आये तो सब्र से काम लेना है सब्र की मेराज का नाम हुसैन है .

हज़रत ने कहा कि धोके में आने की ज़रूरत नहीं है बस साबिर तलाश कीजिये हक़ मिल जायेगा क्योंकि कुरान में साफ़ कहा गया है कि “अल्लाह सब्र करने वालों के साथ है”ज़िक्रे हुसैन हर दौर में हुआ है और हर दौर में होगा क्योंकि इससे हमें प्रेरणा मिलती है सत्य की राह पर चलने की और ईमान ताज़ा हो जाता है .

उन्होंने कहा कि अपने किरदार को वैसा कर लेना जैसा इस्लाम चाहता है उसके लिए अहलेबैत के किरदार को अपनाना होगा और जब आप इसे अपना लेंगे तो कोई सरकार कोई कानून बना ले आप उससे प्रभावित इसलिए नहीं होंगे क्योंकि आप कोई ऐसा अमल नहीं करेंगे जिससे कोई आप पर या आपके मज़हब पर ऊँगली उठा सके .

उन्होंने सरकार द्वारा तीन तलाक़ पर लाये गए अधध्याधेश पर कहा कि यह चुनावी दौर है ऐसे में ये क़दम चुनावी रणनीत का हिस्सा भर है इससे मुस्लिम औरतों की ज़िन्दगी बेहतर नहीं होगी बल्कि समाज में अपराध अधिक बढ़ेंगे सरकार को इस ओर ध्यान देना चहिये था क्योंकि लोकतंत्र में जनता के हित की बात होनी चहिये न कि दल के हित की उन्होंने यह भी कहा कि मुस्लिम समाज को भरोसे में लेकर फैसला किया जाना चाहिए था.

हज़रत ने कहा कि हमें अपने किरदार को अहलेबैत के किरदार में ढालना होगा फिर आप यहाँ भी इज्ज़तवालों में शुमार होंगे और वहां भी.

By: Yunus Mohani

हज यात्रियों को सही सुविधा उपलब्ध करवाई जाये : सय्यद मोहम्मद अशरफ

8 सितंबर /भटिंडा

आल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड के अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफी फोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने भारत सरकार से मांग की है कि हज यात्रियों को उचित सुविधा दी जाए क्योंकि हज यात्री आम तौर से उपलब्ध हवाई टिकट अधिक दामों में खरीदते हैं और सभी प्रकार का टैक्स भी अदा करते हैं ,उसके बाद भी हज यात्रियों को एयरपोर्ट पर अलग से कोई सुविधा मिलना तो दूर की बात है अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा करने वाले आम यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं से भी वंचित किया गया है,जो बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि हज मंत्रालय और हज कमेटी को इस ओर ध्यान देते हुए तुरंत हज यात्रियों को हज के सफर से आने पर उचित सुविधा देने का प्रबंध करना चाहिए।हज़रत ने कहा कि यह हमारा अधिकार है जिसका हम मूल्य चुकाते हैं और ये कोई आपकी मेहरबानी नहीं है ,हज़रत किछौछवी ने तल्ख लहजे में कहा कि सरकार जल्द इसपर कार्यवाही करे हज यात्रियों को बड़ी असुविधा है उन्हें अपना सामान मिलने में दिक्कत हो रही है क्योंकि अधिकतर यात्री बूढ़े हैं और उनमें से बहुत पढ़ना लिखना भी नहीं जानते जिस वजह से उनका सामान मिलने में बड़ी दिक्कत है, एक बार उनका सामान मुश्किलों के बाद मिल जाता है तो एयरपोर्ट के बाहर एक बार फिर उनका सामान लेकर एक लोडर पर लाद दिया जाता है और हाजियों को कैंप में ले जाया जाता है जहां भी भारी अव्यवस्था का माहौल है।
जहां कैंप लगाया गया है वहां न हाजियों के लिए उचित व्यवस्था है न उनको लेने आने वालों के लिए कोई प्रबंध,यहां तक की प्रसाधन का भी उचित प्रबंध नहीं है और कैंप के बाहर पानी भरा हुआ है।
हज़रत ने कहा कि सरकार तुरन्त इस ओर ध्यान दे और उचित प्रबंध करे क्योंकि धन वसूली के बाद भी सुविधा न देना ज़ुल्म है और ज़ुल्म बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।

जो देश का दुश्मन वह हमारा दुश्मन : सय्यद मोहम्मद अशरफ

चित्तौड़गढ़।

चीन ने अपनी जनसंख्या को अपनी ताकत में बदल दिया और इसके बल पर आज विश्व की विकसित अर्थव्यवस्था बन चुका है। लेकिन हम इसी बात को लेकर रो रहे हैं । हम जनसंख्या नियंत्रण कानून के नाम पर राजनीति कर रहे हैं।
यह बात सैयद सरदार अहमद अशरफी के सालाना उर्स में सम्मिलित होने आए आल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष सैयद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कही।
हज़रत ने कहा कि हमारे देश में संसाधनों की कोई कमी नहीं है। लेकिन कर्ताधर्ताओं की इच्छा शक्ति की कमी से सही दिशा में कार्य नहीं हो रहे हैं। संसाधन बढ़ाए जा सकते हैं, देश में शिक्षा संस्थानों की उपलब्धता बढ़ाई जा सकती है, रोजगार के अवसर बढ़ाए जा सकते हैं।
उन्होंने कश्मीर में सेना पर पत्थर बाजी के सवाल के जवाब में कहा कि कश्मीर से कन्याकुमारी और गुजरात से पश्चिम बंगाल तक कहीं भी और कोई भी मेरे देश और देश के कानून के विरुद्ध आवाज उठाएगा तो वह मेरा सबसे बड़ा दुश्मन होगा। चाहे वह मेरा भाई हो, चाहे रिश्तेदार हो, दोस्त हो चाहे कोई भी हो।
किछौछवि ने कहा कि आज हर इंसान एक दूसरे से इल्जामी सवाल कर रहा है और इल्जामी जवाब दे रहा है। जैसे कोई किसी को कहे कि चोरी मत करो तो सामने वाला जवाब देता है कि तुम्हारा भाई भी तो चोर है। इस तरह की मानसिकता से समाज में सुधार नहीं होगा हमें महसूस करना पड़ेगा जो गलत है वह गलत है हर आदमी की जिम्मेदारी है कि वह अपने को बेहतर बनाएं। हमें अपनी जाति धर्म क्षेत्र भाषा से ऊपर उठकर अपने आप को बेहतर बनाना होगा ऐसी राह निकालनी होगी जिससे समाज का विकास हो।
मैं मानता हूं कि धर्म हमें हमेशा उस राह पर डालता है जो हमें बेहतर बनाती है। आज विडंबना यह है कि धर्म की आड़ में ही अधर्म किया जा रहा है और उसे धर्म बताने की शिक्षा दी जा रही है ऐसे चंद लोग हैं जिन्हें हमें पहचानना है, हमारी खामोशी जुर्म को बढ़ाने में मददगार होती है ,और हम इसमें भागीदार हो जाते हैं। देशवासियों से यह अपेक्षा है कि जहां कहीं भी बुराई देखें उसके खिलाफ खड़े हो जाएं। सय्यद मोहम्मद अशरफ ने महाभारत का उदाहरण देते हुए बताया कि जब अर्जुन ने युद्ध के समय अपने सामने खड़े अपने परिजनों पर बाण चलाने के लिए मना कर दिया तो कृष्ण ने उन्हें समझाया कि जो सामने खड़े हैं वह तुम्हारे अपने हैं लेकिन जालिम है मैंने तुम्हें जुल्म के खिलाफ खड़ा किया जुल्म करने वाला कोई भी हो अगर अच्छा बनना है तो जुल्म के खिलाफ खड़ा होना होगा ,उस समय यह नहीं देखा जाएगा कि सामने आपका दोस्त है या रिश्तेदार है अगर वह ज़ालिम है तो तुम्हें उसके विरोध में खड़ा होना होगा। धर्म हमेशा सार्वभौमिक बात करता है जो दुनिया में सभी जगह सही होती है हम जिस धर्म की बात करते हैं लेकिन उसे मानते नहीं है। उन्होंने अल्पसंख्यक कल्याण के प्रयासों को नाकाफी बताया और कहा कि हमने बदलाव के साथ ही इस क्षेत्र में भी परिवर्तन की उम्मीद की थी लेकिन चेहरे बदले हैं काम नहीं। विकास योजनाएं आम भारतीयों को ध्यान में रखकर बनाई जानी चाहिए, राजनीति और वोट के लिए नहीं ध्रुवीकरण के लिए योजनाएं नहीं बनानी चाहिए। जब तक देश के हर नागरिक का विकास नहीं होगा तब तक देश का विकास नहीं हो सकता है ।
उन्होंने यूरोप का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां पर जिसके पास कोई काम नहीं है वह भी हमसे अच्छी जिंदगी बिता रहा है।
हज़रत ने तीन तलाक के मुद्दे को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यह पूरी तरह से राजनैतिक मुद्दा है समाज से इस संबंध में कभी कोई आवाज नहीं उठी। आने वाले चुनाव में समर्थन देने की बात पर उन्होंने कहा कि हम सभी में आपस में तुलना करेंगे और जो बेहतर होगा देश हित में होगा उसके बारे में सोचेंगे ।
इसके साथ ही उन्होंने राम मंदिर के मुद्दे पर बोलते हुए कहा कि राम मंदिर मुद्दा आपस में बैठकर सुलझाया जा सकता है या फिर न्यायालय के आदेश की पालना की जा सकती है।लेकिन आपस में वही लोग सुलझा सकते हैं जो पक्षकार हैं, यह प्रकरण नयायालय में विचाराधीन है तो हमें न्यायालय पर भरोसा करना चाहिए। चुनाव सामने आते ही राम मंदिर के मुद्दे को उठाए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि हम हिंदुस्तानी बहुत ज्यादा भावुक है हम जानते हैं कि सामने वाला हमारी भावुकता का फायदा उठा रहा है लेकिन हम बार-बार उसके फरेब में आ जाते हैं हमें अपने आप में सुधार करना होगा।
प्रेस वार्ता के दौरान सज्जादा नशीन मोहम्मद सलीम अशरफी मौलाना मोहम्मद इब्राहिम अशरफी और यूसुफ अशरफी सहित कई अकीदतमंद उपस्थित रहे।

मज़लूम की पहचान मज़हब से न करें, नफरत के एजेंडे को बढ़ने से रोकें : सय्यद मोहम्मद अशरफ

25 जुलाई/अम्बेडकरनगर

मज़लूम की पहचान मज़हब से न करें, नफरत के एजेंडे को बढ़ने से रोकें” यह विचार वर्ल्ड सूफी फोरम व आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड के संस्थापक, अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने हज़रत मख़दूम अशरफ जहांगीर सिमनानी रहमतुल्लाह अलैहि की दरगाह पर हाज़िरी के बाद मीडिया से कही, उन्होंने कहा हम जब मज़लूम की पहचान उसके मज़हब या ज़ाति की बुनियाद पर करते हैं तो नफरत के एजेंडे को ताक़त मिलती है और वह कामयाब हो जाता है।
हज़रत ने कहा कि मज़लूम सिर्फ मज़लूम होता है उसका कोई धर्म या ज़ा नहीं होती लेकिन खास तौर से इस बात को कहना कि यहां मरने वाला मुसलमान है या दलित या फिर कोई और तो इससे समाज में एक तरह का खौफ पनपता है और नफरत फैलती है. हमारा प्रयास होना चाहिए कि अतिताईयों के मक़सद को कामयाब न होने दें जो हम को ज़ाती और धर्म के साथ बांटना चाहते हैं ताकी उनके खतरनाक इरादे कामयाब हो जाएं।
उन्होंने कहा कि सूफिया ने गंगा जमुनी तहज़ीब को जन्म दिया जिसमें नफरत के लिए कोई जगह नहीं है, हमारा मुल्क अपनी इसी खूबसूरती और इस मोहब्बत वाली तहज़ीब के लिए जाना जाता है। कुछ देश के दुश्मन हमसे हमारी यह तहज़ीब छीनना चाहते हैं, हमें मज़हब और ज़ाती के नाम पर बांट कर वह अपने घिनौने एजेंडे को कामयाब करने पर तुले हैं।
हज़रत ने कहा कि मीडिया को भी अपनी ज़िम्मेदारी निभाते हुए इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि नफरत बढ़ाने वाली बातों और खबरों को रोका जाए, यह मुल्क मेरा और आपका नहीं बल्कि हमारा है, हम मिलकर इसका मुस्तक़बिल संवार सकते हैं, हम का माना हिन्दू और मुस्लिम से है, साथ में भारत में रहने वाले सभी धर्म के मानने वाले हैं अगर हम को मैं और तुम में बदला दिया गया तो देश का बड़ा नुक़सान होगा ।
उन्होंने साफ शब्दों में सरकार से कहा कि अब सरकार तय करे कि देश में क़ानून का राज चलेगा या भीड़ फैसला करेगी? हिन्दू ,मुसलमान ,सिख ,ईसाई सब आपस में हैं भाई भाई, क्या यह अब सिर्फ एक जुमला बन गया है या फिर मुल्क की बुनियादी ज़रत है ?

 

By: यूनुस मोहानी

अलग देश की बात करने वाले मुसलमानों के दुश्मन : सय्यद मोहम्मद अशरफ

10 जुलाई/लखनऊ “अलग देश की बात करने वाले मुसलमानों के दुश्मन” यह बात वर्ल्ड सूफी फोरम एवम् आल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने कश्मीर के मुफ्ती नसीरुल इस्लाम के उस बयान पर कही जिसमें मुफ्ती ने कहा था कि अगर भारत सरकार शरीयत अदालत नहीं दे सकती तो मुसलमानों को अलग देश दे दिया जाए। हज़रत ने कहा कि ये मुसलमानों के साथ दुश्मनी निभाना है न की उनकी हिमायत करना क्योंकि हम हिन्दुस्तानी मुसलमान अपने मुल्क से मोहब्बत करने वाले हैं, हमने जिन्ना का भी विरोध किया और ऐसे लोगों का भी हम कड़ा विरोध करते हैं।
उन्होंने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने बेवक्त की शहनाई बजाई है और नादान लोग इसकी धुन को नफरत का राग बना रहे हैं जबकि दारुलक़जा को समाधान केंद्र के तौर पर आप बिना हमारे मुल्क के कानून और संविधान से टकराए बिना बना सकते हैं तो इसमें इतना शोर मचाने का क्या मतलब है?
हज़रत ने यह सवाल भी पूछा कि बोर्ड ने इस वक़्त क्यों यह बात शुरू की जबकि ऐसी कोई दिक्कत है नहीं, उन्होंने कहा कि इसमें सियासत की बू अा रही है, मुल्क के मुसलमान हरगिज़ ऐसी बेबुनियाद बातो के साथ नहीं है और हम  बेबुनियाद बयानबाज़ी की कड़ी निन्दा करते हैं और देश बांटने की बात करने वालो से मुसलमानों को होशियार रहने की अपील करते है ।
 By:
यूनुस मोहानी

मज़हब के नाम पर मौत का कारोबार बर्दाश्त नहीं, आतंकी क़ायर हैं : सय्यद मोहम्मद अशरफ

मॉरीशस /2 जुलाई

मज़हब के नाम पर मौत का कारोबार बर्दाश्त नहीं, आतंकी क़ायर हैं, यह बात वर्ल्ड सूफी फोरम के चेयरमैन व आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड के संस्थापक, अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने अफगानिस्तान में सिख समुदाय पर किए गए आतंकी हमले पर अफसोस जताते हुए कही।
उन्होंने कहा कि आतंकी क़ायरों की बहकी हुईं भीड़ का हिस्सा हैं जो मज़हब का चोला ओढ़ कर बेगुनाह लोगों को शिकार बना रहे हैं, हज़रत ने कहा कि हम इसकी घोर निन्दा करते हैं और सिर्फ निन्दा ही नहीं करते हैं बल्कि दुनिया के सभी अमन पसन्द लोगों  से अपील करते हैं कि आतंक के विरूद्ध धर्म क्षेत्र और जाति का भेद भूल कर खड़े हो जाईए, हमें इस नासूर को समाज से मिटाना ही होगा वरना कोई सुरक्षित नहीं है।
हज़रत ने कहा, दुनिया को नफरत से लड़ने के लिए मोहब्बत का हथियार उठाना होगा क्योंकि बारूद से लगी आग को बारूद से नहीं बुझाया जा सकता, सबको आपस में मोहब्बत करनी होगी और ज़ुल्म से नफरत चाहे वह कहीं भी हो किसी पर भी हो, हमें इसमें दोहरा रवैया नहीं अपनाना चाहिए ।
उन्होंने कहा, हमारी सारी संवेदनाएं उन मज़लूमों के साथ हैं जो इस क़ायराना हमले का शिकार हुए, हम उनके परिवार वालों के लिए सब्र की दुआ करते हैं और जो लोग घायल है जल्द से जल्द उनके स्वस्थ होने की इश्वर से प्रार्थना करते हैं।
हज़रत ने लोगों से मुखातिब होते हुए कहा कि याद रखिए नफरत का इलाज सिर्फ मोहब्बत है अगर आप अमन कायम करना चाहते हैं तो मजलूम के साथ खड़े हो जाईए और ज़ालिम का पुरजोर विरोध कीजिए चाहे वो ज़ालिम कोई भी हो।

By: यूनुस मोहानी

इल्म से दूर रहकर हम खुद अपने ऊपर ज़ुल्म कर रहे हैं : सय्यद मोहम्मद अशरफ

10 मई/ खरगौन, मध्य प्रदेश

“इल्म से दूर रहकर हम खुद अपने ऊपर ज़ुल्म कर रहे हैं” यह विचार वर्ल्ड सूफी फोरम एवम् आल इंडिया उलमा व मशाइख़ बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने जनसभा को संबोधित करते हुए कही, उन्होंने कहा मुसलमान सिर्फ अपने साथ भेदभाव किये जाने की बात करते हैं और मजलूमियत का रोना रोते रहते हैं मुसलमानों ने यही अपना पसंदीदा काम बना रखा है अपनी नाकामयाबियों पर सोचने के बजाय यह पूरी कौम सिर्फ दूसरो को इल्ज़ाम देने के काम में मसरूफ है।
हज़रत ने कहा जिस कौम की किताब क़ुरआन है और उसका पहला अल्फ़ाज़ इकरा है अफसोस वह कौम इल्म से दूर है हमारी कम से कम 50 फीसदी आबादी ने स्कूल और मदरसे का मुंह नहीं देखा आखिर इसके लिए कौन ज़िम्मेदार है?
आपको क्या किसी पार्टी ने अपने बच्चो को पढ़ाने से रोका प्रशासन ने रोका फिर हमारे किसी गैर मजहबी भाई ने आपको रोका नहीं बल्कि आपने अपने ऊपर यह ज़ुल्म खुद किया है किसीऔर ने नहीं हमने खुद पस्ती का रास्ता चुना है हमने अल्लाह और उसके रसूल का फरमान नहीं माना और खुद को परेशानियों में घेरा है अब अगर आपको इस पस्ती से खुद को उबारना है तो इल्म हासिल करना होगा और इसके लिए कौम को बेदार करना होगा ।
हज़रत ने कहा कि मजलूमियत का रोना छोड़ दीजिए और लोगों पर इल्ज़ाम देना बंद कीजिए अपने बच्चे पढ़ाइए यही आगे बढ़ने का रास्ता है ।

By: Yunus Mohani

सियासी तूफ़ान है संभल कर रहिये तालीमी इदारे ज़द में हैं : सय्यद मोहम्मद अशरफ

8 मई /धर्मसिंहवां, संतकबीर नगर

“सियासी तूफ़ान है संभल कर रहिये तालीमी इदारे ज़द में हैं “यह बात वर्ल्ड सूफी फोरम एवं आल इन्डिया उलमा व मशाइख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने कही, उन्होंने कहा कि पूरे देश में जिस तरह से हालात बने हुए हैं और हम अपनी नासमझियों की वजह से जिस तरह उनका शिकार हो रहे हैं अब हमें होशियार होना होगा. अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में चल रहे हंगामे पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि अब तालीमी इदारे सियासत के तूफ़ान की ज़द में हैं, मदरसे से लेकर यूनिवर्सिटी तक स्कूल से लेकर कॉलेज तक हर जगह सियासत की घिनौनी चाल चली जा रही है, ऐसे में हमें अपने ज़हनो को खोल कर सब्र और अक्ल से काम लेना है और हरगिज़ देश को तोड़ने वाली ताक़तों को कामयाब नहीं होने देना है .

हज़रत ने कहा कि यह वक़्त इम्तेहानो का है और नौजवान आन्दोलन कर रहे हैं, यह हमारी नाकामयाबी है दूसरों के फेंके हुए जाल में हम फंसे हुए हैं ऐसे में हमें जोश से नहीं होश से काम लेना है ताकि हम अपने मकसद यानि तालीम हासिल करने में पूरी तरह कामयाब हो जाएँ और हम जब तालीम हासिल कर लेंगे तो हमें कोई अपने जाल में आसानी से नहीं फंसा सकेगा.

उन्होंने कहा, अपने मिशन से न हटना और उस पर लगे रहना जीत है और यही तरीका हमें सूफिया की ज़िन्दगी में मिलता है, उन्होंने मुश्किलात के बावजूद अपना काम किया और कामयाब हुए, हमे भी चाहिए कि औलिया के दर से वाबिस्ता रहें और मुश्किलों के बावजूद भी अपने काम पर डंटे रहें, मोहब्बत को आम करना हमारा काम हैं, नफरत को खतम कर देना हमारी ज़िम्मेदारी है, कैंपस में हरगिज़ नफरतों को पनपने न दें यही हमारी जीत है और यही मुल्क की तरक्की का रास्ता भी है.

By: यूनुस मोहानी

हमने जिन्ना को 1947 में ही नकार दिया, अब इसके जरिए राजनीत बंद हो : सय्यद मोहम्मद अशरफ

3 मई / बासनी, नागौर

“हमने जिन्ना को 1947 में ही नकार दिया अब इसके जरिए राजनीत बंद हो” यह बात वर्ल्ड सूफी फोरम और आल इन्डिया उलमा व मशाईख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने उर्स शेखे तरीकत के मौके पर एक जलसे को खिताब करते हुए कही।
हज़रत ने कहा कि मुल्क के शिक्षण संस्थानों को नफरत की आग में किसी भी हालत में नहीं धकेला जाना चाहिए क्योंकि समाज पर इसका गहरा और बुरा प्रभाव पड़ता है ,उन्होंने कहा कि जहां तोड़ने की बात शिक्षण संस्थानों में शुरू होगी तो समाज को कोई बिखराव से नहीं रोक सकता ।
हज़रत ने कहा कि भारतीय मुसलमान ख्वाजा के दर को छोड़ कर कहीं नहीं जाने वाला, सूफिया के मोहब्बत के पैगाम को देश में हर जगह आम करना हमारा काम है, जहां भी नफरत की आग लगेगी हम सब भारतवासी मोहब्बत के पानी से उसे बुझा देंगे ।
हज़रत ने कहा कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के पहले ग्रेजुएट ईश्वर चंद्र थे इससे समझना चाहिए कि नाम से किसी शिक्षण संस्थान को निशाना बनाने का प्रयास घिनौनी और स्तरहीन राजनीत के सिवा कुछ नही। हज़रत ने कहा कि सरकार से मांग करते हैं कि शिक्षण संस्थानों को राजनीत से बचाया जाए और उन्हें नफरत की से बचाने हेतु हर संभव प्रयास किया जा