नबी को समझने के लिए अली की और अली को समझने के लिए इल्म की ज़रूरत : सय्यद मोहम्मद अशरफ

28/नवम्बर,हनुमानगढ़
“नबी को समझने के लिए अली की और अली को समझने के लिए इल्म की ज़रूरत,”यह बात आल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड के अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफी फोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने हनुमानगढ़ में एक जलसे को संबोधित करते हुए कही, उन्होंने कहा कि इस वक़्त सियासी लोग घिनौने खेल में लगे हुए हैं और लगातार लोगों को अहम मुद्दों से भटकाने के लिए धर्म का सहारा ले रहे हैं।
उन्होंने कहा कि  पूरे मुल्क में नफरतों की नर्सरी तय्यार की जा रही है यह पौधे बड़े होकर पूरे मुल्क को अंधेरे में डुबो देंगे,हम सब को होशियार रहना चाहिए,हज़रत ने राजस्थान चुनाव प्रचार के दौरान उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान को गैरजिम्मेदाराना बताते हुए कहा कि अली को समझ पाना सबके बस की बात नहीं क्योंकि हज़रत अली करमल्लाहू वजहुल करीम  शहरे इल्म का दरवाज़ा हैं इस  दरवाजे तक इल्म की तलाश वाले आते हैं।
हज़रत ने कहा किसी मजहबी रहनुमा पर गलत टिप्पणी करना अनुचित और असंवैधानिक है इससे लोगों की भावनाएं आहत होती है जो एक जिम्मेदार व्यक्ति को शोभा नहीं देता ।कोई किसी चीज में आस्था रख सकता है और कोई उसमे आस्था नहीं रखता यह नितांत निजी मामला है
क़ुरआन में साफ कहा गया है कि “तुम्हारे लिए तुम्हारा दीन है और हमारा लिए हमारा दीन” तब इस तरह की बातों का कोई मतलब नहीं है सबको मिलजुल कर रहना चाहिए क्योंकि मोहब्बत के बिना देश बिखर जाएगा और सच्चे देशभक्त कभी देश तोड़ने वाली चीज़ों को बर्दाश्त नहीं कर सकते।
उन्होंने लोगों से आह्वाहन किया कि इल्म हासिल करने के लिए बड़ी से बड़ी मुसीबत को भी बर्दाश्त कीजिए क्योंकि इल्म के बिना हम इन चालों को समझ नहीं सकते और हमें यूंही बहकाया जाता रहेगा ,मजहब को समझने के लिए भी इल्म की जरूरत है वरना न हम अली को समझ सकेंगे न तलीमे नबी पर सही सही अमल कर सकेंगे,लिहाज़ा अपने बच्चो को खूब पढ़ाएं आपस में मिलजुल कर रहें ख्वाजा गरीब नवाज के इस पैगाम को फैलाएं कि ” मोहब्बत सबके लिए नफरत किसी से नहीं”
By: यूनुस मोहानी

जहालत गरीबी की बदतरीन शक्ल है : सय्यद मोहम्मद अशरफ

20/नवम्बर,

आल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड के अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफी फोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने पूरी दुनिया को  ईद  मिलादुन्नबी सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम की मुबारकबाद देते हुए कहा कि अल्लाह के रसूल का इरशाद है कि “अशिक्षा गरीबी का सबसे कुरूप चेहरा है” दुनिया को इस बात को समझना चाहिए, विशेष रूप से मुसलमानों को इस बात को समझते हुए इल्म हासिल करने की तरफ मेहनत करनी चाहिए, क्योंकि फरमाने नबी है कि “हर मुसलमान मर्द और औरत पर इल्मे दिन सीखना फ़र्ज़ है” यहां इल्मे दीन का मतलब यह नहीं है कि दुनियावी इल्म नहीं जानना है क्योंकि दीन में दुनिया शामिल है।
हज़रत ने फ़रमाया कि हम सब के आका पैग़म्बरे अमन सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया कि” इल्म हासिल करने के लिए अगर चीन भी जाना पड़े तो जाओ” लिहाज़ा इल्म हासिल करिये और उसके लिए हर मुश्किल उठाने के लिए तय्यार रहिये क्योंकि इसी में फायदा है और आगे की आसानी है।
उन्होंने कहा कि अल्लाह के रसूल सबके लिए रहमत हैं और हम उनकी उम्मत हैं लिहाजा हमें भी सबके लिए बेहतर होना चाहिए, हमारी वजह से किसी को तकलीफ नहीं होनी चाहिए, लोग हमें देखकर कहें कि उम्मती ऐसे हैं तो नबी की शान कितनी आला होगी, हम सबको सीरते नबी पर गौर करना है और आपकी तालीम पर अमल करना है क्योंकि मीलाद मानने का सबसे अफजल तरीका यही है कि हम लोगों के लिए फायदा पहुंचाने वाले बन जाएं, हम अमल वाले बन कर जब अपने नबी की तालीम का चर्चा करेंगे तो लोगों पर वह बात असर करेगी।
हज़रत ने पूरे संसार को मुबारकबाद देते हुए कहा कि जश्न मनाईए और लोगों को बताईए कि आमद किसकी है और इसका तरीका वही हो जिससे लोगों को खूब फायदा पहुंचे ।

By: Yunus Mohani

सब अल्लाह के बन्दे हैं, भाई भाई बन कर रहो : सय्यद मोहम्मद अशरफ

17 नवंबर/लखनऊ
आल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड  के अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफी फोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने मोहसिने इंसानियत नबिए रहमत हज़रत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहू  अलैहि वसल्लम की हदीस बयान करते हुए कहा कि फरमाने नबी है “बदगुमानी से बचो क्योंकि बदगुमानी की अक्सर बातें झूठी होती है,लोगों के ऐब तलाश करते न फिरो,आपस में हसद न करो,और बुग़ज़ न रखो किसी की पीठ पीछे बुराई न करो बल्कि सब अल्लाह के बन्दे हैं आपस में भाई भाई बन कर रहो” नबी की इस तालीम पर लोगों ने अमल छोड़ा है इसी लिए दुनिया में इतनी बद अमनी है।
हज़रत ने कहा कि अगर हम बदगुमान नहीं होंगे तो कोई लाख चाह ले लेकिन हमारे बीच लड़ाई नहीं करवा सकता, इसी तरह अगर हम एक दूसरे के लिए खैर चाहेंगे, आपस में हसद नहीं करेंगे तो मोहब्बत का जो माहौल बनेगा उससे हमारी दुनिया भी खूबसूरत होगी और हमे आखिरत में भी उसका सिला मिलेगा।उन्होंने कहा कि सीरत के हर पहलू पर हमें गौर व फिकर करना  है और उस पर अमल करना है क्योंकि इसके सिवा कुछ निजात का जरिया नहीं, क्योंकि नबी की सीरत हुकमे खुदा से जुदा मुमकिन नहीं।
रसूले मक़बूल सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया कि “तुममें बदतरीन शख्स वह है जो चुगलखोरी करते फिरते हैं और दोस्तों के बीच ताल्लुकात खराब कराते फिरते हैं” इस हदीस को खूब याद रखना होगा क्योंकि जिसे रसूल बदतरीन कह रहे हैं वह यकीनन बड़ी बुराई में है लिहाजा इससे बचिये, अगर कोई शख्स  ऐसा है तो उसे सुधारने की कोशिश कीजिए वरना उसकी बात मत सुनिए, ऐसे लोग आपके आंगन में नफरत का बीज बोते हैं और फिर आपका या फिर आपके अपनों का लहू इसे सीचने के काम में बेकार जाता है।
आपस में मोहब्बत कीजिए, मीलाद का यही पैगाम है, लड़ाने वालों से होशियार रहिए, मोहब्बत को फरोग दीजिए इसी में हम सब की भलाई है। हज़रत ने कहा, मुल्क में जिस तरह का माहौल बनाया जा रहा है इससे होशियार रहिए क्योंकि सियासत के खूनी पंजे मजहब, ज़ात नहीं देखते सिर्फ उन्हें लहू से मतलब होता है जिससे वह सत्ता पा सकें।  सिर्फ मुसलमान ही नहीं बल्कि मुल्क में रहने वाले सभी लोग नफरत को नकार दें तो खुद बखुद मोहब्बत का निज़ाम कायम हो जाएगा।
यूनुस मोहानी

इंसाफ से मुल्क मजबूत होता है लोगों का विश्वास बढ़ता है : सय्यद मोहम्मद अशरफ

31 अक्टूबर /नई दिल्ली,
मलियाना कांड में आरोपी पी.ए. सी. के 16 जवानों को दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा उम्रकैद की सज़ा दिये जाने पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए आल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड के अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफी फोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने कहा कि ” इंसाफ से मुल्क मज़बूत होता है,लोगों का विश्वास बढ़ता है ” उन्होंने कहा देर से सही लेकिन इंसाफ मिला है हमें मुल्क की अदालत पर पूरा भरोसा है।
हज़रत ने कहा कि लोकतंत्र में अगर इंसाफ से विश्वास उठ जाए तो कुछ शेष नहीं बचता। दोषियों को उनके अपराध का दण्ड मिलना ही चाहिए इसके लिए धर्म, ज़ात,पद का कोई भेद नहीं किया जा सकता, अपराधी को मात्र अपराधी के रूप में ही देखा जाना चाहिए ।
कानून तोड़ने वाला, उसका मज़ाक बनाने वाला कोई भी हो उसको सज़ा ज़रूर मिलनी चाहिए, मलियाना में जिस तरह निर्दोषों को मारा गया उनके परिवार वालों के लिए आज कुछ राहत का दिन है जिन्होंने अपने घर के नौजवान खोए वह उस दिन को तो नहीं भूल सकते लेकिन उन्होंने न्याय के लिए जो निरंतर प्रयास किया आज उसकी जीत हुई और अपराधियों को न्यायालय ने सज़ा दी है यह ऐसे समय में जब देशवासियों का एक एक करके देश की मुख्य संस्थाओं से विश्वास डगमगाया है न्यायपालिका में विश्वास को बढ़ाने वाला फैसला है।
उन्होंने कहा कि बिना इंसाफ के अमन को कायम नहीं किया जा सकता, नाइंसाफी ही अशांति का कारण होती है, इसलिए सभी को समान और समय पर न्याय प्रदान करना आवश्यक है। देश के संविधान और न्यायालय पर हमारा पूरा विश्वास है।
By: यूनुस मोहानी

मस्जिद मन्दिर का फैसला अदालत करेगी आप अपने भविष्य का फैसला कीजिए : सय्यद मोहम्मद अशरफ

29/अक्टूबर,नई दिल्ली
बाबरी मस्जिद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई कब होगी इसका फैसला अब जनवरी में होगा इस पर बात करते हुए आल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड  के अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफी फोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने साफ कहा कि ,”मस्जिद – मन्दिर का फैसला अदालत करेगी,आप अपने भविष्य का फैसला कीजिए” उन्होंने कहा कि अगर हमारे बच्चे अनपढ़ रहे ,हमारे नवजवान बेरोजगार रहे और लोगों को सही इलाज नहीं मिला तो यह बात  आप खुद सोचिए आपकी ज़िन्दगी कैसे होगी देश के हर नागरिक को इस दिशा में सोचना चाहिए।
देश में जिस तरह की बहस चल रही है उससे सिर्फ नुकसान के कुछ हासिल नहीं होगा लोग अपना भला बुरा नहीं सोच पा रहे हैं और वही सोचने और समझने पर मजबूर हैं जो उन्हें साजिश के तौर पर समझाया और दिखाया जा रहा है ,न तो यह खुद उनके हित में है और न ही हमारे मुल्क के।
उन्होंने कहा कि मुसलमानों को समझना चाहिए कि मुद्दा क्या है? जबकि आज हालात ऐसे हैं कि हम खुद में उलझे हुए हैं सही गलत का फैसला नहीं कर पा रहे हैं और कहीं न कहीं गलत लोगों के फेंके जाल में फस कर उनके ही एजेंडे को बढ़ाते हुए नजर आते हैं आपको समझना चाहिए कि हम कहां खड़े हैं और इस हालत को हम कैसे बदलेंगे इस पर सोचना चाहिए।
हज़रत ने कहा कि हमारे पास रसूले अकरम सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम की तालीम मौजूद है हालात को कैसे हमवार बनाया जाता है उसके लिए हयाते तय्यबा के हर पहलू पर हमें न सिर्फ गौर करना है बल्कि उसपर अमल भी करना है किस तरह मुश्किल हालात में हक कहा जाता है उसके लिए करबला मौजूद है जो सबक है हमारे लिए और औलिया अल्लाह किस तरह मोहब्बत के पैगाम को नफरत के तूफान के बीच सुनाते हैं और हवा बदल देते हैं हमें इस पर गौर और फिक्र करनी होगी।
मस्जिद को सजदो से सजाइए ,अपने बच्चो को पढ़ाइए,अफवाहों से दूर रहिए और एक अच्छे शहरी की सारी ज़िम्मेदारी निभाइए यही आपका भविष्य तय करेंगे यही मुसलमान की पहचान है कि वह अल्लाह और उसके रसूल के हुक्म पर अमल करे अपने वतन से मोहब्बत करे और लोगों के लिए फायदा पहुंचाने वाला हो बिना मजहब का  और ज़ात पात का फर्क किये।
हज़रत ने इंडोनेशिया में हुई विमान दुर्घटना पर गहरा दुख जताया उन्होंने कहा कि हम दुआ करते हैं कि सभी लोग सलामत बचा लिए जाएं और कोई जान का नुक़सान न हो हमारी संवेदनाएं उन परिवारों के साथ हैं जिनके घर के लोग इस हवाई जहाज़ में सवार थे अल्लाह उनको अपने हबीब के सदके इस मुसीबत के वक़्त में हिम्मत और सब्र अता फरमाए।
By: यूनुस मोहानी

ज़ुल्म किसी भी तरह का हो, हुसैनियत उसका इलाज : सय्यद मोहम्मद अशरफ

28/अक्टूबर, कोलकाता
ज़ुल्म किसी भी तरह का हो हुसैनियत ही  उसका इलाज है ” आल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष  एवं वर्ल्ड सूफी फोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने ,न सिर्फ देश  बल्कि पूरे संसार में हो रहे ज़ुल्म पर हसनैन करीमैन कांफ्रेंस में बोलते हुए कही।
उन्होंने कहा हुसैनियत नाम है ज़ुल्म के खिलाफ खड़े होने का, ज़ुल्म के खिलाफ खामोश रहना भी ज़ुल्म है क्योंकि ऐसा करके आप ज़ालिम की मदद करते हैं अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम फरमाते हैं कि मजलूम की मदद करो और ज़ालिम की भी ,ज़ालिम की मदद यह है कि उसे ज़ुल्म से रोका जाये।
अगर ज़ुल्म देखकर आप खामोश रहते हैं तो आप ज़ालिम को और ज़ालिम बनाते हैं । हज़रत ने कहा कि हसनैन करिमैन की ज़िंदगी से हमें सबक़ लेना है ।एक तरफ इमाम हसन मुज्तबा हैं कि आप अमन को क़ायम रखने के लिए क़ुर्बानी पेश करते दिखाई देते हैं तो दूसरी जानिब इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम हैं जो ज़ुल्म के खिलाफ अपना सब कुछ निछावर करते दिखाई दे रहे हैं लेकिन मक़सद दोनों ही तरफ बढ़ते हुए ज़ुल्म को रोकना है ।
ज़ुल्म का इलाज आले मोहम्मद से सीखना होगा क्योंकि इसके सिवा और कोई दर नहीं जहां से इसे प्रैक्टिकल तौर पर समझा जा सके। दुनिया में ज़ुल्म बढ़ता ही जा रहा है, लोगों को अफवाहों के ज़ए बहकाया जा रहा है, सच को दबाने के लिए झूठ को बार बार  चीख कर बोला जा रहा है और लोग आखिर में उसे ही सच समझ कर नफरत की आग में झुलसने को मजबूर हैं। हज़रत ने कहा कि अब हमें अफवाहों को रोकना होगा, हम सबकी ज़िम्मेदारी है कि सच को जाना जाए और बिना सच जाने कोई भी राय न बनाई जाए।
हज़रत किछौछवी ने कहा कि सियासी बेदारी भी जरूरी है, अपने हक़  को समझें, वोट की ताक़त को समझें और समझदारी के साथ फैसले करें क्योंकि नफरत अपना काम कर रही है और लोगों को अपने असर में ले रही है, आपको मोहब्बत के पानी का छिड़काव इस आग पर करना है, क्योंकि इस्लाम का पैगाम जो हम तक गरीब नवाज़ ने पहुंचाया कि “मोहब्बत सबके लिए, नफरत किसी से नहीं, ” हमें इस पर अमल करना है और यही हुसैनियत है, हमें इसपर अमल करना है।
By: यूनुस मोहानी

दिल्ली में मदरसा छात्र की हत्या बेखौफ गुंडाराज की मिसाल : सय्यद मोहम्मद अशरफ

26 अक्टूबर / नई दिल्ली ,

दिल्ली के मदरसे में पढ़ने वाले 8 साल के छोटे से बच्चे को जिस तरह क़त्ल किया गया वह मुल्क की राजधानी में बेखौफ गुंडाराज की घिनौनी मिसाल है यह बात आल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड के अध्यक्ष और वर्ल्ड सूफी फोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने कही।
उन्होंने कहा कि यह मुल्क भर में नफरत के बढ़ते प्रदूषण का असर है हवाओं में ज़हर घोल दिया गया है , मुट्ठी भर लोग पूरे देश को इस आग में झोंक देने की फिराक में है। हज़रत ने कहा कि मालवीय नगर के मदरसे के बच्चे को जिस तरह मार दिया गया वह कानून व्यवस्था के मुंह पर गुंडों का तमाचा है ।
देश में जानलेवा नफरत का वायरस फैल गया है सबको इसे रोकने के लिए काम करना होगा मजहबी पहचान के आधार पर जो जहरीला खेल चल रहा है वह भारत के हित में नहीं है।हज़रत ने मांग की है कि बच्चे के कातिलों को सख्त से सख्त सज़ा दी जाए क्योंकि माब लिंचिंग अब बच्चों के क़त्ल तक पहुंच गई है।
सभी को मिलजुल कर इसका मुकाबला करना चाहिए नफरत को हरगिज़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा ।उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि यह जो तमाशा चल रहा है यह देशहित में नहीं है इसे सरकार तत्काल सख्ती से रोके और बच्चे के परिवार को मुआवजा दिया जाए।हज़रत ने यह भी पूछा कि राजनेता इस वक़्त कहां है कोई नजर क्यों नहीं आता ।

By: Yunus Mohani

इस्लाम एक मुकम्मल निज़ाम-ए-हयात ,क़यामत तक के लिए हैं उसूल-ए- क़ुरआन: सय्यद मोहम्मद अशरफ

29 सितम्बर, देवास

आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड के अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफी फोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने मध्य प्रदेश के देवास में एक जलसे को संबोधित करते हुए कहा कि “इस्लाम एक मुकम्मल निज़ाम-ए- हयात है,क़यामत तक के लिए हैं उसूले क़ुरआन” उन्होंने यह बात सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया के द्वारा भारतीय दंड सहिंता की धारा 497 को समाप्त किये जाने के सम्बन्ध में कही.

उन्होंने कहा कि इस क़ानून के रहने या न रहने का मुसलमानों पर कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि क़ुरआन में ज़िना हराम है और ता क़यामत हराम ही रहेगा इसमें कोई बदलाव नहीं किया जा सकता, लिहाज़ा इस क़ानून के होने या न होने से क़ुरआन पर ईमान रखने वालों पर कोई फर्क नहीं पड़ता, उन्हें हर उस काम से दूर रहना है जिसे अल्लाह और उसके रसूल ने हराम क़रार दिया.

हज़रत किछौछ्वी ने यह भी कहा कि इस्लाम एक मुकम्मल निज़ाम-ए- हयात है, इसमें हर चीज़ का बहुत विस्तृत वर्णन किया गया है और हर बुरे काम के लिए दंड पहले से ही तय है. लेकिन हम जहाँ रहते हैं उस देश के हर उस क़ानून को मानना हमारी ज़िम्मेदारी है जिससे हमारे दीन में फर्क न पड़ता हो.

हज़रत ने कहा कि भारत की अपनी एक संस्कृति है उस पर इस तरह के क़ानूनों के ख़त्म होने का अच्छा असर नहीं पड़ेगा क्योंकि समाज में अगर क़ानून का खौफ़ खतम होगा तो लोग गुनाह की तरफ आसानी से आकर्षित होंगे, सरकार और अदालत को इस ओर भी गौर करना चाहिए .

मुसलमान क़ुरआन पर ईमान रखने वाले और अमल करने वाले हैं तो उन्हें बखूबी समझ लेना चाहिए कि दुनिया के बनाये क़ानून वक़्त के साथ बदलते हैं लेकिन अल्लाह का क़ानून नहीं बदल सकता, लिहाज़ा बुरी बातों से दूर रहिये और नेक अमल रखिये इसी मे हमारी और आपकी निजात है.

By: यूनुस मोहानी

 

 

हक़ कभी ज़ुल्म से समझौता नहीं करता, यही है कर्बला का सबक़: सय्यद मोहम्मद अशरफ

20 सितम्बर /किछौछा

आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड के अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफी फोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने कहा कि “हक कभी ज़ुल्म से समझौता नहीं करता यही कर्बला का सबक है” सिर्फ इतना ही नहीं उन्होंने आगे कहा कि हमें हक का पैरोकार होने के लिए उनके किरदार को अपनाना पड़ेगा जो अहले हक हैं और फिर हम देखेंगे कि ज़ालिम क्यों न कितना भी ताक़तवर हो वह हारा हुआ ही नज़र आएगा .

उन्होंने कहा कि यज़ीदियत हर दौर में हुसैनियत से हारती रहेगी क्योंकि हक से कभी बातिल जीत नहीं सकता सत्य से असत्य को विजय नहीं मिल सकती कुछ देर को सत्य परेशान हो सकता है लेकिन उसे पराजित नहीं किया जा सकता जब परेशानी आये तो सब्र से काम लेना है सब्र की मेराज का नाम हुसैन है .

हज़रत ने कहा कि धोके में आने की ज़रूरत नहीं है बस साबिर तलाश कीजिये हक़ मिल जायेगा क्योंकि कुरान में साफ़ कहा गया है कि “अल्लाह सब्र करने वालों के साथ है”ज़िक्रे हुसैन हर दौर में हुआ है और हर दौर में होगा क्योंकि इससे हमें प्रेरणा मिलती है सत्य की राह पर चलने की और ईमान ताज़ा हो जाता है .

उन्होंने कहा कि अपने किरदार को वैसा कर लेना जैसा इस्लाम चाहता है उसके लिए अहलेबैत के किरदार को अपनाना होगा और जब आप इसे अपना लेंगे तो कोई सरकार कोई कानून बना ले आप उससे प्रभावित इसलिए नहीं होंगे क्योंकि आप कोई ऐसा अमल नहीं करेंगे जिससे कोई आप पर या आपके मज़हब पर ऊँगली उठा सके .

उन्होंने सरकार द्वारा तीन तलाक़ पर लाये गए अधध्याधेश पर कहा कि यह चुनावी दौर है ऐसे में ये क़दम चुनावी रणनीत का हिस्सा भर है इससे मुस्लिम औरतों की ज़िन्दगी बेहतर नहीं होगी बल्कि समाज में अपराध अधिक बढ़ेंगे सरकार को इस ओर ध्यान देना चहिये था क्योंकि लोकतंत्र में जनता के हित की बात होनी चहिये न कि दल के हित की उन्होंने यह भी कहा कि मुस्लिम समाज को भरोसे में लेकर फैसला किया जाना चाहिए था.

हज़रत ने कहा कि हमें अपने किरदार को अहलेबैत के किरदार में ढालना होगा फिर आप यहाँ भी इज्ज़तवालों में शुमार होंगे और वहां भी.

By: Yunus Mohani

हज यात्रियों को सही सुविधा उपलब्ध करवाई जाये : सय्यद मोहम्मद अशरफ

8 सितंबर /भटिंडा

आल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड के अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफी फोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने भारत सरकार से मांग की है कि हज यात्रियों को उचित सुविधा दी जाए क्योंकि हज यात्री आम तौर से उपलब्ध हवाई टिकट अधिक दामों में खरीदते हैं और सभी प्रकार का टैक्स भी अदा करते हैं ,उसके बाद भी हज यात्रियों को एयरपोर्ट पर अलग से कोई सुविधा मिलना तो दूर की बात है अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा करने वाले आम यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं से भी वंचित किया गया है,जो बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि हज मंत्रालय और हज कमेटी को इस ओर ध्यान देते हुए तुरंत हज यात्रियों को हज के सफर से आने पर उचित सुविधा देने का प्रबंध करना चाहिए।हज़रत ने कहा कि यह हमारा अधिकार है जिसका हम मूल्य चुकाते हैं और ये कोई आपकी मेहरबानी नहीं है ,हज़रत किछौछवी ने तल्ख लहजे में कहा कि सरकार जल्द इसपर कार्यवाही करे हज यात्रियों को बड़ी असुविधा है उन्हें अपना सामान मिलने में दिक्कत हो रही है क्योंकि अधिकतर यात्री बूढ़े हैं और उनमें से बहुत पढ़ना लिखना भी नहीं जानते जिस वजह से उनका सामान मिलने में बड़ी दिक्कत है, एक बार उनका सामान मुश्किलों के बाद मिल जाता है तो एयरपोर्ट के बाहर एक बार फिर उनका सामान लेकर एक लोडर पर लाद दिया जाता है और हाजियों को कैंप में ले जाया जाता है जहां भी भारी अव्यवस्था का माहौल है।
जहां कैंप लगाया गया है वहां न हाजियों के लिए उचित व्यवस्था है न उनको लेने आने वालों के लिए कोई प्रबंध,यहां तक की प्रसाधन का भी उचित प्रबंध नहीं है और कैंप के बाहर पानी भरा हुआ है।
हज़रत ने कहा कि सरकार तुरन्त इस ओर ध्यान दे और उचित प्रबंध करे क्योंकि धन वसूली के बाद भी सुविधा न देना ज़ुल्म है और ज़ुल्म बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।