सिर्फ क़ानून बना देने से नहीं बल्कि उसे सख्ती और ईमानदारी से लागू करने से रुकेगी हत्याएं : सय्यद मोहम्मद अशरफ

17 जुलाई/ हनुमानगढ़ राजस्थान.

“सिर्फ क़ानून बना देने से नहीं बल्कि उसे सख्ती और ईमानदारी से लागू करने से रुकेगी हत्याएं” यह बात वर्ल्ड सूफी फोरम व आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड के संस्थापक, अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने सर्वोच्च न्यायलय द्वारा संसद में भीड़ द्वारा हत्या करने पर क़ानून बनाने की बात कहने पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कही ।उन्होंने कहा कि सिर्फ क़ानून होने से कुछ नहीं होगा अगर उसे ईमानदारी से लागू न किया जाऐ।
हज़रत ने कहा, भीड़ जिस तरह सड़कों पर उतर कर निर्दोष लोगों को मार रही है यह भयावह स्थिति है इससे अगर सख्ती से नहीं निपटा गया तो फिर जंगलराज को कोई नहीं रोक पाऐगा और पूरा देश जल उठेगा। आज पूरी दुनिया हमारे मुल्क की तरफ हसरत भरी निगाहों से देख रही है मगर हमने इस हिंसक भीड़ को नहीं रोका तो विकास की कल्पना भी बेईमानी है।
उन्होंने कहा कि राज्य और केन्द्र  सरकार की ज़िम्मेदारी है कि ऐसे उपद्रवी भीडतंत्र को किसी प्रकार का संरक्षण न मिले और इन्हें हर स्तर पर हतोउत्साहित किया जाऐ।अपराधियों से सख्ती से निपटा जाना चाहिए, लोगों को भी सचेत रहते हुए किसी के बहकावे में नहीं आना चाहिए और क़ानून को किसी भी क़ीमत हाथ में नहीं लेना चाहिए।
क़ानून तब ही प्रभावी होता है जब उसका खौफ लोगों के दिल में हो अगर उसको लागू करने वाले ईमानदारी से क़ानून तो बनाया जाऐ लेकिन उसको सख्ती से लागू करवाने की गारंटी भी सरकार को देनी चाहिए क्योंकि इस तरह भीड़ द्वारा किसी की हत्या हमारे समाज के धीरे धीरे वहशी हो जाने का संकेत है, इसे रोका जाना चाहिए। मोहब्बत का पैगाम सब तक पहुंचाया जाए ताकि नफरत की आग को ठंडा किया जा सके।

By: Yunus Mohani