फरमाने नबी: उसके लिए जन्नत में घर कि ज़िम्मेदारी मेरी है जो हक़ पर होने के बाद भी झगड़ा छोड़ दे : सय्यद मोहम्मद अशरफ

15 मार्च /हिंडो जैतससर
फरमाने नबी है कि उसके लिए मैं जन्नत में एक घर की ज़िम्मेदारी लेता हूँ जो हक पर होने के बावजूद भी झगड़ा छोड़ दे” यह बात वर्ल्ड सूफी फोरम और आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने कही.
वह कल यहाँ एक जलसे में बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे थे. उन्होंने कहा कि रसूले खुदा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का यह फरमाने आलिशान अमन को कायम करने के लिए बेहतरीन अमल है और अपनी दुनिया और आखिरत दोनों सवारने का जरिया भी है. उन्होंने कहा कि आज कल लोग ग़लत होते हुए भी पीछे नहीं हटने के लिए बज़िद हैं, उन्हें इस फरमाने रसूल पर गौर करना चाहिए क्योंकि अगर आप ग़लत हैं तो आप ज़ुल्म कर रहे हैं और ज़ुल्म करने वाला यकीनन ज़ालिम है.
हज़रत ने कहा, मुल्क में जिस तरह के हालात हैं हमें इस हदीसे पाक पर गौर करने की ज़रूरत है ताकि हम आपस में प्यार और मोहब्बत के साथ रह सकें. हज़रत ने लोगों का ध्यान बदगुमानी की तरफ भी दिलाया और कहा कि रहमते आलम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का इरशाद है कि बदगुमानी बदतरीन झूठ है, लिहाज़ा अपने भाई के लिए बदगुमानी न पालो बल्कि जब तक हकीकत का पता न हों उसके बारे में अच्छा तसव्वुर करो इससे नफरते खतम होंगी और अफवाहों से होने वाले नुक्सान खुद बखुद रुक जायेंगे.
उन्होंने कहा कि तालीमे नबी को जानिए और उस पर अमल कीजिये, मौजूदा माहौल का हल भी हमें कुरआन और हदीस में दिया गया है, उसे पढ़िए और समझिये फिर उस पर अमल भी कीजिये. हज़रत ने कहा कि अपने पड़ोसी का ख्याल रखिये क्योंकि हमारे नबी का फरमान है कि वह शख्स मुसलमान नहीं हो सकता कि जो खुद पेट भर कर खाये और उसका पडोसी भूखा सो जाए और इसमें कहीं मज़हब की क़ैद नहीं है, पड़ोसी किसी भी धर्म का मानने वाला हो हमें उसका भरपूर ख्याल रखना चाहिए.

By: यूनुस मोहानी