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धर्म को आधार बनाकर बनने वाला कानून संविधान के साथ संविधान निर्माताओं का अपमान : सय्यद मोहम्मद अशरफ

13 दिसंबर शुक्रवार,लखनऊ आल इंडिया उलमा व माशाईख बोर्ड के अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफी फ़ोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने लखनऊ में नागरिकत

सरकार शिक्षा और रोजगार पर ध्यान दे : सय्यद मोहम्मद अशरफ
اللہ تعالیٰ نے اپنے حبیب کو کوثر عطا فرمایا : سید محمد اشرف کچھوچھوی
मंदिर मस्जिद तलाक नहीं ,समस्या है अशिक्षा बेरोज़गारी और गरीबी : सय्यद मोहम्मद अशरफ

13 दिसंबर शुक्रवार,लखनऊ आल इंडिया उलमा व माशाईख बोर्ड के अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफी फ़ोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने लखनऊ में नागरिकता संशोधन बिल पर कहा है कि मज़हब को बुनियाद बना कर अगर कोई कानून बनाया जाता है तो यह भारत के संविधान के साथ संविधान निर्माताओं का अपमान है।
उन्होंने कहा कि यह देश के मुसलमानों का मसला नहीं है बल्कि हर उस सच्चे भारतीय का मसला है जो भारत के संविधान में विश्वास रखता है क्योंकि हमें एक देश के रूप में बांधे रखने वाला संविधान ही है, हज़रत ने स्पष्ट कहा कि यह डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर का अपमान है या फिर दलितों के खिलाफ कोई घिनौनी साजिश क्योंकि आसाम में जिस तरह ज़्यादा तर एन आर सी के कारण अपनी नागरिकता साबित न कर पाने वाले दबे कुचले हुए लोग ही हैं जबकि मुसलमानों की संख्या मात्र 5 लाख ही है अगर यह पूरे देश में लागू होता है तो दलित और आदिवासी समुदाय सबसे अधिक पीड़ित होगा।
और अगर वह नागरिकता नहीं साबित कर सका तो भ्रष्ट तंत्र उसके पूरे जीवन की कमाई मात्र नागरिकता के नाम पर खा जाएगा क्योंकि यह बात जगजाहिर है कि छोटी छोटी सरकारी योजनाएं गरीबों तक बिना रिश्वत के नहीं पहुंचती तो फिर यह जीवन मरण का सवाल होगा इस प्रकार यह उत्पीड़ित समाज के लोग नागरिकता के लिए शोषण के शिकार रहेंगे और फिर इनके लिए आरक्षण बेमाना हो जायेगा।
हज़रत ने कहा कि जिस तरह इस कानून को सिर्फ मुसलमानों के खिलाफ प्रचारित किया जा रहा है वह सही नहीं है जबकि सच यह है कि यह कानून भारत की आत्मा के खिलाफ है ,यह कानून आइडिया ऑफ इंडिया के खिलाफ है और यह कानून संविधान का मज़ाक है इस बात को मुसलमानों को समझना चाहिए कि इसके खिलाफ लड़ाई हर भारतीय की लड़ाई है जो भारत के संविधान में विश्वास रखता है।
उन्होंने कहा कि देश के सभी अमन पसंद लोगों को सामने आना चाहिए और संविधान बचाने के लिए मुहिम चलानी चाहिए,मामला अब अदालत में है हम भारत के सर्वोच्च न्यायालय से उम्मीद करते हैं कि वह इंसाफ करेगा साथ ही भारत के महामहिम राष्ट्रपति महोदय से अपील करते हैं कि इस संविधान विरोधी कानून को अपनी मंजूरी प्रदान n करें क्योंकि यह कानून डॉक्टर अम्बेडकर का अपमान है साथ ही दलितों और आदिवासियों के उत्पीड़न का हथियार है।

By: Yunus Mohani

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