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ईद उल अज़हा के मौक़े पर मज़हब के साथ मुल्क के क़ानून का भी पूरा पालन करें मुसलमान : सय्यद मोहम्मद अशरफ

अजमेर: 29 अगस्त आने वाले त्योहार ईदुल अज़हा के मौक़े पर मुसलमान जहां मज़हबी आज़ादी के अधिकार पर अमल करते हुए क़ुर्बानी करें वहीं मुल्क के क़ानून का भी पूरा

अधिकांश मुस्लिम महिलाएं शरीअत कानून से खुश : सय्यद आलमगीर अशरफ
آل انڈیا علما و مشائخ بورڈ صدر دفتر میں ذکر شہدائے کربلا
India Must Act Urgently Against Wahhabi Organisations-New Age Islam

अजमेर: 29 अगस्त
आने वाले त्योहार ईदुल अज़हा के मौक़े पर मुसलमान जहां मज़हबी आज़ादी के अधिकार पर अमल करते हुए क़ुर्बानी करें वहीं मुल्क के क़ानून का भी पूरा ख्याल रखें. यह बात आल इंडिया उलमा मशाइख़ बोर्ड के संस्थापक व अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने अजमेर शरीफ में दरगाह ख्वाजा ग़रीब नवाज़ रहमतुल्लाह अलैहि में छटी शरीफ की नजर के बाद बैतुन नूर में कही।
हज़रत ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि कई जगह इस बार कुछ इंसानियत और अमन के दुश्मन लोग और संगठन क़ुर्बानी के दौरान अमन खराब करने की कोशिश कर सकते हैं लिहाजा सब्र से काम लें और मुल्क के क़ानून का सम्मान करते हुए उसका पूरा पालन करें ,उन्होंने कहा कि लोग हरगिज़ खुली जगह क़ुर्बानी न करें, दीन भी यही कहता है, क़ुर्बानी के खून को नालियों में न बहाएँ बल्कि उसे दफन करें, साथ ही जानवर के वह अंग जो खाऐ नहीं जाते और इस्लाम में जिनका खाना मना है उसे भी दफन करें, इन्हे किसी को देने की इजाजत नहीं है क्योंकि आपके लिए जो खाना ठीक नहीं वह आप किसी को नहीं दे सकते, साफ सफाई का पूरा ख्याल रखें, किसी को आपकी वजह से परेशानी नहीं होनी चाहिए।
हज़रत ने कहा कि आप क़ुर्बानी का गोश्त ग़रीबों और परेशान हालों तक पहुंचाने का खास इंतज़ाम करें। हज़रत ने बताया कि हमारे मुल्क में क़ुर्बानी पर कोई पाबंदी नहीं है लेकिन किसी गैरमज़हब के मानने वाले की भावनाओं का हमें ख्याल रखना चाहिए, हमें अपने पड़ोसी का हक़ अदा करना है, अपने हमवतन का ख्याल रखना है क्योंकि हम मुसलमान हैं तो अमन क़ायम रखने की ज़िम्मेदारी हमारी है।उन्होंने लोगों को हज की मुबारकबाद दी।
बोर्ड के संरक्षक हज़रत मौलाना सय्यद मेहदी मियां चिश्ती ने लोगों को ख्वाजा गरीब नवाज़ की छटी शरीफ की मुबारकबाद देते हुए कहा कि क़ुर्बानी अपने रब से क़रीब होने का बेहतरीन ज़रिया है और हर साहिबे हैसियत पर क़ुर्बानी वाजिब है लेकिन ख्याल रहे कि हरगिज़ किसी का दिल न दुखे, किसी को परेशानी न हो,गंदगी बिल्कुल न फैले, इसका खास ख्याल रखे, ग़रीब नवाज़ का यही पैग़ाम तो है कि किसी का दिल तोड़ना अल्लाह का घर तोड़ने से बड़ा गुनाह है, लिहाजा दिलों को जोड़िए और ख्याल रहे कि इंसान तब तक अपने रब की खुशी हासिल नहीं कर सकता जब तक वह परेशान हाल लोगों की हैसियत रखते हुए मदद नहीं करता।
बोर्ड के संयुक्त राष्ट्रीय सचिव सय्यद सलमान चिश्ती ने सभी को गरीब नवाज़ की छटी के साथ ही ईद ए इब्राहीमी और हज की मुबारकबाद देते हुए कहा कि हमें याद रहना चाहिए कि मुल्क के कई हिस्सों में बाढ़ से लोग परेशान हैं, हमें उनकी मदद करनी है और यह ईद हमें यही सिखाती भी है कि अपने रब की खुशी के लिए हम अपना माल क़ुर्बान करते हैं. इसी एहसास को और जगाना है, क्योंकि इंसानी ज़िंदगियां खतरे में है और रब की खुशी हासिल करने का हमारे पास ये ज़रिया है। ज़रूरतमंद की मदद करना ही सुफिया का तरीका रहा है. यही नबी का दीन है। मोहब्बत सबके लिए नफरत किसी से नहीं. यही पैग़ाम है दुनिया को नफरतों से बचाने का।
By: यूनुस मोहानी

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