आतंकवाद के विरुद्ध आन्दोलन का नाम हुसैनियत है

15 Oct
Syed Alamghir Ashraf

इस्लाम मानवता का धर्म है। इस्लाम शब्द ही से इस धर्म का उद्देश्य और उस का अर्थ समझ में आ जाता है। इस्लाम एक इन्सान के  निजी एवं व्यक्तिगत जीवन से लेकर उसके पारिवारिक, सामाजिक धार्मिक, राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय जीवन जीने का तरीका सिखाता है। पूरे विश्व में शांति की स्थापना करने हेतु पैगम्बर मुहम्मद SAW साहब ने फ़रमाया की पड़ोसियों का ख़याल रखो। वो पड़ोसी चाहे जिस धर्म या समुदाय से सम्बन्ध रखते हो। अपने आप को किसी धर्म या समुदाय से सम्बंधित करने वाले ढोंगी हर जगह पाए जाते हैं। वो सम्बंधित धर्म और समुदाय को नुकसान पहुन्चाते हैं। उस धर्म का अपमान करते हैं। इस्लाम धर्म से अपने आप को सम्बंधित कर इस्लामी शिक्षाओं का उल्लंघन और उसे अपमानित करने वाला इस्लामी इतिहास में सब से बड़ा आतंकी और अत्याचारी व्यक्ति यज़ीद है। जिस ने पैग़म्बर SAW साहब के परिवार को शहीद किया और औरतों और बच्चों पर ज़ुल्म किया। अब अगर इस्लाम धर्म को यज़ीद की विचारधारा से देखा जाये तो उस में ज़ुल्म, अत्याचार, हिंसा और अन्याय मिलेगा। अगर इस्लाम को हुसैन के कर्मों और उनकी सोच के आधार पर देखा जाये तो इस्लाम में न्याय, शांति, प्रेम, अहिंसा सब्र और सौहार्द मिलेगा। यह एक वास्तविकता है कि अधर्म का अंत होता होता और सत्य अजर और अमर होता है। यही वजह है कि यज़ीद के अत्याचारों का सूर्य शाम के अंधेरों में डूब गया लेकिन हुसैन के सत्य की किरने आज भी हर सवेरे में चमकती हैं। आज हुसैन अ.स. सिर्फ हज़रत अली अ.स. के बेटे और हज़रात मुहम्मद SAW के नवासे नहीं रहे बल्कि क़यामत तक के लिए सत्य और असत्य, सच और झूट, धर्म और अधर्म के बीच फ़र्क और विभाजक का नाम हुसैन है। अत्याचार और अन्याय के विरुद्ध उठने वाली हर आवाज़ का नाम हुसैन है। ज़ुल्म और ज़्यादती के विरुद्ध खड़ा होने वाला हर व्यक्ति हुसैनी है। आल इण्डिया उलमा व मशाईख बोर्ड इसी हुसैनी मिशन को जन जन तक पहुँचाने का काम कर रही है। इस्लाम के नाम पर फैलाई जा रही दहशतगर्दी और उस पर हो रही घिनावनी राजनीति के विरुद्ध तमाम खानकाहों, दरगाहों और आस्तानों की सामूहिक आवाज़ बन कर आल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड देश भर में गग्रुकता अभियान चला रहा है। साम्प्रदायिकता के विरुद्ध आपसी सौहार्द को बहल करने का कार्य कर रहा है। इस संगठन को विश्वास है की सूफियों और सूफीवाद में यकीन और आस्था रखने वाले लोग इस अभियान का हिस्सा बनेंगे और देश के कोने कोने में नफरत के विरुद्ध प्रेम के दीपक हर भारतीय के दिल में रोशन करेंगे। आतंकवाद और कट्टरवाद के हर रंग को मुंह तोड़ जवाब देंगे। यह देश हमारा है। हुसैन अ.स. हमारे है। उनका मिशन हमारा है। हज़रात इमाम हुसैन अ.स. ने फ़रमाया ज़ुल्म और अत्याचार के विरुद्ध जितनी देर से खड़े होगे बलिदान उतना ज्यादा देना होगा। कर्बला में हजारों यज़ीदी फ़ौज के सामने तनहा हुसैन ने ज़ालिम यज़ीद के सामने सीना तान कर यह पैगाम दिया कि ज़ुल्म सहना भी ज़ुल्म है। अकेले पर और कमजोरी की परवाह किये बगैर बुराई के खिलाफ खड़े हो जाओ। सत्य कभी कमज़ोर और तन्हा नहीं होता। आज अधर्मी और असत्य का साथी ज़ालिम यज़ीद का नाम लेने वाला कोई नहीं। कर्बला के बाद किसी माँ ने अपने बच्चे का नाम यज़ीद नहीं रखा। सत्य और धर्म की खुदाई आवाज़ बनकर हुसैन आज भी हर नेक इन्सान के दिल में बसे हैं। जब से इन्सान बेदार और जागरूक हुआ है हर कौम पुकारती है कि हमारे हैं हुसैन।

आज कुछ आतंकवादी अपने आप को मुसलमान कहते हैं और अपनी दहशत के कारोबार को इस्लाम की सेवा कहते हैं। इस्लाम के इन दुश्मनों और उस जैसी विचाधारा रखने वाले हर व्यक्ति को यह समझना होगा की इस्लाम यज़ीदी विचाधारा का नाम नहीं है इस्लाम हो हुसैन आचरण और विचारधारा का नाम है। आज के इस युग में यज़ीदी विचारधारा को वहाबी विचाधारा से जाना जाता है। जो कल यज़ीदी थे आज वही वहाबी हैं। कल भी पैगाबर ए इस्लाम के परिवार वालों ने इस विचारधारा का विरोध किया था और आज भी वो परिवार इस विचारधारा का विरोध कर रहा है। इस परिवार की सामूहिक आवाज़ का नाम आल इण्डिया उलमा व मशाईख बोर्ड है।

उलमा, मशाईख और विद्वानों का यह संगठन पिछले एक दशक से आतंकवाद और कट्टरवाद के विरुद्ध एक लम्बी लड़ाई लड़ रहा है। इस के लिए कई महासभाए और महासम्मेलन का आयोजन भी किया। इसी साल मार्च में अंतर्राष्ट्रीय सूफी सम्मेलन के नाम से एक बड़े सम्मेलन का आयोजन दिल्ली में 4 दिनों तक किया गया। इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए यह संगठन आगामी 4 दिसंबर को एक सुन्नी कांफ्रेंस लखनऊ में करने जा रहा है जिस में देश भर की सूफी सज्जादा और विद्वानों को आमंत्रित किया गया है। चूँकि यह सम्मेलन देश में कट्टरता और साम्प्रदायिकता के विरुद्ध एक आन्दोलन है इस लिए यह हर भारतीय का कार्यक्रम है। इस में हर भारतीय को भाग लेना चाहिए। मीडिया बंधुओं से मुख्य रूप से निवेदन है की इस अभियान का हिस्सा बने और अपन सहयोग दें।