पैगंबर की शान में किसी भी तरह की गुस्ताखी नाकाबिले बर्दाश्त : सय्यद मोहम्मद अशरफ

29 अक्टूबर, नई दिल्ली
आल इंडिया उलमा व मशाइख़ बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफ़ी फोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने फ्रांस में पैग़म्बरे अमन व शांति हज़रत मुहम्मद मुस्तफा सल्लाल्लाहु अलैहि वसल्लम की शान में की गई गुस्ताखी पर सख्त गुस्से का इजहार करते हुए कहा कि फ्रीडम ऑफ स्पीच,और फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन के नाम पर यह को गुस्ताखी की जा रही है मुसलमान इसे बर्दाश्त नहीं कर सकते इसके लिए फ्रांस के राष्ट्रपति को माफी मांगनी चाहिए ,और जब तक ऐसा नहीं होता हमें खुलकर और पूरी ताकत से इनका बहिष्कार करना चहिए।
हज़रत ने कहा कि भारत सरकार से मांग करते हैं कि वह भारतीय मुसलमानों की भावनाओ का सम्मान करते हुए फ्रांस पर दबाव बनाये कि वह अपने देश में हो रही इस तरह की गुस्ताखी पर रोक लगाए ,उन्होंने बताया कि बोर्ड ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग को भी इस आशय का पत्र लिखा है कि संयुक्त राष्ट्र ह्यूमन राइट्स चार्टर का सभी को सम्मान करना चाहिए और इसके अनुच्छेद 42 का पालन होना चहिए अतः इसका पालन करते हुए फ्रांस को विश्व समुदाय से माफी मांगनी चाहिए ,साथ ही यह भी मांग की गई है कि ईशनिंदा कानून को पास कर इसका सख्ती से पालन किया जाय ताकि किसी भी तरह की गंदी सोच को पनपने से रोका जा सके।
उन्होंने मुसलमानों सहित सभी अमन पसंद लोगों से अपील की कि शांति व्यवस्था को बनाए रखते हुए फ्रांस का कड़ा विरोध किया जाए और जबतक माफी नहीं आती इनके सामान का बहिष्कार करें।
हज़रत ने सभी को ईदमिलाुन्नबी साल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम की मुबारकबाद देते हुए कहा कि इस बार इस जश्न को ऐसे मनाया जाए कि हम सब मिलकर नबी की सुन्नत पर अमल करते हुए अच्छे अखलाक वाले बने और अपने नबी का चर्चा अपने अमल से करें।

कुर्बानियों से मिली आज़ादी की हिफाज़त हमारी ज़िम्मेदारी : सय्यद मोहम्मद अशरफ

कुर्बानियों से मिली आजादी इसकी हिफ़ाज़त हमारी ज़िम्मेदारी – सय्यद अशरफ
14 अगस्त 2020 नई दिल्ली
आल इंडिया उलमा व मशाइख़ बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफ़ी फोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने आजादी की पूर्व संध्या पर सभी देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की बधाई देते हुए कहा कि यह आज़ादी हमें बड़ी कुर्बानियों के बाद हासिल हुई है इसकी हिफाज़त हम सब की ज़िम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि नफरतों से देश को कमजोर करने की भयानक साजिश चल रही है और एक प्रयास किया जा रहा है कि भारत की सुंदरता अनेकता में एकता को खत्म कर दिया जाए ,इससे सिर्फ देश कमजोर होगा और घाट लगाये बैठे दुश्मन इसका भरपूर फायदा उठायेगा ,सभी देशवासियों को इस साजिश को समझ लेना चाहिए और किसी भी प्रकार की हिंसा से दूर रहना चाहिए हमें अपने देश को आगे बढ़ाना है और यह हम आपस में लड़ कर नहीं कर सकते हमारी आपसी लड़ाई हमारे देश को कमजोर करती है।
हज़रत ने कहा कि सभी को सबकी भावनाओं की इज्जत करनी चाहिए और सभी धर्मों का सम्मान करना चाहिये यही निर्देश हमें हमारा धर्म भी देता है वतन से मोहब्बत आधा ईमान है यह पैग़म्बरे इस्लाम की तालीम है हमें इसपर अमल करते हुए अपने मुल्क को आगे ले जाना है हमें अपने बुजुर्गों कि कुर्बानी नहीं भूलनी चाहिए कि किस तरह 40 हज़ार से ज़्यादा उलमा की लाशे पेड़ों पर लटका दी गई लेकिन हमारे क़दम पीछे नहीं गए यह इस आजादी का मोल है यह आसानी से हासिल नहीं हुई।
उन्होंने कहा सभी लोग स्वतंत्रता दिवस पर शान से तिरंगा लहराते हुए यह निश्चय करें कि अब एक सूत्र के साथ हम इस देश को आगे ले जाएंगे नफरत किसी से नहीं मोहब्बत सबके लिए।

यूनुस मोहानी

غریبوں کی بھوک اور اپنی انا کو مٹانے کا تہوار ہے عیدالاضحیٰ :سید محمد اشرف

جولائی 31 2020 نئی دہلی ، آل انڈیا علماء و مشائخ بورڈ کے قومی صدر اور ورلڈ صوفی فورم کے چیئرمین حضرت سید محمد اشرف کچھوچھوی نے عید الاضحی کے موقع پر عوام کو مبارکباد دیتے ہوئے کہا کہ یہ تہوار لوگوں کی بھوک مٹانے اور ان کی انا کو مٹانے کا ہے. اپنے مالک ، پالنہار کے سامنے سرشار ہونے اور اسکی مرضی سے زندگی گزارنے اور قربانی پیش کرنے کا ایک سبق ہے عید الاضحٰی۔

حضرت نے کہا کہ یہ وہ قربانی ہے جو اللہ کے پیارے نبی حضرت ابراہیم خلیل اللہ اور حضرت اسماعیل ذبیح اللہ کی سنت ہے جسے انہوں نے اپنے رب کے حکم سے ادا کیا ، جبکہ ہمارے نبی حضرت محمد مصطفی صلی اللہ علیہ وآلہ وسلم نے اس کو فاقہ کشی کے خلاف ایک عظیم جنگ قرار دیا ہے۔ اور حکم دیا کہ قربانی کے گوشت کے تین حصے کیے جائیں ، جس کا ایک حصہ غریبوں کا ہو ، ایک رشتہ دار، دوست واحباب اور ایک خود کھا سکتا ہے ، اس طرح ان تین دن کے دوران ہر شخص کو کھانا پہنچانے کا اہتمام کیا جائے جس سے کسی شخص کی خود اعتمادی کو بھی تکلیف نہ پہنچے،اور یہ بھی پتہ چلے کہ کس کے پاس کھانا نہیں ہے اور بعد میں اس کی مدد کی جائے ، ہمیں اس پوشیدہ پیغام کو سمجھنا ہوگا تبھی ہم حقیقی مقصد تک پہنچیں گے۔

انہوں نے کہا کہ قرآن مجید میں واضح طور پر لکھا ہے کہ آپ کا خون اور گوشت مجھ تک نہیں پہنچتا ، لیکن پہنچتا ہے تو صرف تقویٰ ، اور تقویٰ اپنے رب کے سامنے سرشار ہونے کا نام ہے، آپ کی انا کی تباہی کا نام ہے ، لہذا اس تہوار کے اصل مقصد کو سمجھتے ہوئے صفائی کے خصوصی خیال کے ساتھ منائیں ، کسی بھی قیمت پر قانون کی خلاف ورزی نہ کریں ، جن جانوروں کی قانونی ممانعت ہے ہرگز قربانی نہ کریں ، جبکہ اپنے ساتھی بھائیوں کے جذبات کا خیال رکھیں۔

بورڈ نے قربانی کے تعلق سے جو ہدایات جاری کی ہیں ان پر عمل کرتے ہوئے عید منائیں، سبھی کو عید الاضحی کی پرخلوص مبارکباد.

भारत का अमन बचाना हम सब की सांझी ज़िम्मेदारी : सय्यद अशरफ

25 फरवरी,नई दिल्ली
आल इंडिया उलमा व माशाईख बोर्ड के अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफी फ़ोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने दिल्ली में हो रही हिंसा पर चिंता जाहिर करते हुए लोगों से अमन की अपील की उन्होंने कहा कि भारत के अमन की हिफ़ाज़त हम सब की सांझी ज़िम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि मुल्क में हिंसा फैलाने वाले न सिर्फ देश के बल्कि इंसानियत के दुश्मन हैं ,हिंसा चाहे कोई भी करे उस बर्दाश्त नहीं किया जा सकता सरकार को इस रोकने के लिए फौरन कार्यवाही करनी चाहिए इतना ही नहीं जिस तरह दिल्ली पुलिस ने किरदार पेश किया है उससे चिंता और बढ़ जाती है इसकी भी जांच होनी चहिए।
हज़रत ने लोगों से अफवाहों से बचने का आह्वाहन किया उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति अपने स्तर से लोगों से शांति बनाए रखने की अपील करे ,हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई में न बंटे बल्कि इस चुनौती का सामना एक भारतीय बनकर कर अगर हम सब सिर्फ देश के बारे में सोचें तो शांति स्थापित हो जाएगी ,सिर्फ खुद को देशभक्त बताना ही देशभक्ति नहीं है बल्कि इसके लिए आपको योगदान देना होता है,वक़्त आने पर कुर्बानी देनी होती है यह समय एकजुट होकर नफरत को हराने का समय है।
धर्म हिंसा से रोकता है जबकि अधर्म हिंसा की प्रेरणा देता है तो भला कोई रामभक्त हिंसा कैसे कर सकता है और कोई अल्लाह से डरने वाला आग कैसे लगा सकता है इसपर विचार ज़रूरी है कि फिर यह राम का नारा लगाने वाले या आग लगाने वाले कौन लोग हैं जो धर्म का चोला ओढ़कर देश जलाने निकले हैं।
यह देश सांझी संस्कृति का देश है जहां ब्रह्मा की नगरी कहे जाने वाले पुष्कर में खिलने वाला गुलाब गरीब नवाज़ की बारगाह में चढ़ता है अभी अजमेर शरीफ में उर्स में सभी मजहबों के लोग एक साथ अपनी अकीदत के फूल पेश करने जमा होंगे यह मुल्क की खूबसूरती है।आइए हम सब मिलकर इस देश की सुंदरता की हिफ़ाज़त करें ,दिल्ली के लोग किसी के बहकावे में न आएं ।

Syed Ashraf Kichchauchwi promotes Sufism in Sri Lanka

Friday, August 3/2018

The AIUMB President has gone on a visit to his spiritual followers in Sri Lanka to work on spirituality, humanity and morality that can be carried out through Sufism. He founded the World Sufi Forum in 2016 which has grown vastly all over the globe including Sri Lanka.

He has also granted permission for Baiat-o-Iradat (administering oath of spiritual allegiance), as an heir to the Chishtia, Nizamia and Ashrafia lines of mysticism. He has a vast number of disciples in different parts of the world including Sri Lanka. New disciples are introduced in accordance to the aforementioned mystical paths (silsila).

The World Sufi Forum that Hazrat has initiated is growing globally as each day passes. Through firm determination and constant struggle, Hazrat is engulfing the world with his key messages: Tolerance, Acceptance and Unconditional Love.

It is noteworthy that Hazrat Maulana Syed Mohammad Ashraf Kichhauchwi son of Sayyad Izhar Ashraf Miyan—popularly known as “Shaykh al-A’zam”—the eldest son of Hazrat Sarkar-e-Kalan Sayyad Mukhtar Ashraf (Rahmatullahi alayhi). This clearly shows that he falls in line with the many esteemed and pious Sufi saints that have come through the Chishti-Nizami-Ashrafi Silsila in Kichchawcha Shareef.

It has been the salient characteristic of the Ashrafi Sufi hospice (Khanquah) that in every period, there has been an eminent personality accomplished with both spiritual and modern education, mystical inclination, intellectual grandeur, inherited zeal and determination showing path of Shariat (Revealed Law) and Tariquat (way to Allah).

Alahazrat Ashrafi Mian (R.A.) adorned it up to 1355 AH devoting his whole life in making the world familiar with name and mission of Hazrat Makhdoom Simnani (R.A.) followed by Mufti Syed Shah Mokhtar Ashraf (R.A.) who decorated this dignified office with his sublime spirituality for 62 years. Now Hazrat Maulana Syed Ashraf is inheriting virtues of his righteous predecessors and spiritual ancestors, possessing extraordinary merits whose religious, spiritual and reformatory activities and works have been, internationally recognised and admired.

Hazrat Syed Ashraf Kichchauchwi has been instrumental in promotion of Sufism in the modern India as well as aboard. With his progressive views on religion, nation and society, he has the future needs of the new generation of Muslims at heart.

Source:

www.wordforpeace.com/aiumb-president-in-sri-lanka-to-work-on-spirituality-humanity-and-morality-through-sufism/

 

By: Ghulam Rasool Dehlvi