हाकिम बदलने से नहीं निज़ाम बदलने से होगा विकास : सय्यद मोहम्मद अशरफ

15 दिसंबर /नई दिल्ली
हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी, अध्यक्ष आल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड एवं चेयरमैन वर्ल्ड सूफी फोरम ने देश के मौजूदा हालात पर चर्चा करते हुए कहा कि “हाकिम बदलने से नहीं निज़ाम बदलने से होगा विकास ” उन्होंने अभी हाल में 5 राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजों पर यह अहम बात कही।
हज़रत ने कहा कि कुछ लोग सिर्फ शासक बदल जाने से बदलाव की उम्मीद रखते हैं, वह धोखे में हैं क्योंकि जब तक व्यवस्था को सही नहीं किया जाएगा तब तक हालात का बदलना मुमकिन नहीं है, नयी हुकूमत अपनी प्राथमिकताएं यदि पुरानी सरकार वाली ही रखेगी तो बदलाव क्या होगा ? यदि गरीब को इलाज ,शिक्षा किसान को उसकी फसल का सही मूल्य,सस्ती दरों पर खाद बीज नहीं मिलेगा तो क्या बदलेगा? अगर हमारे नवजवान बेरोजगार ही रहेंगे तो क्या विकास होगा ?
हज़रत ने पांचों राज्यो में चुन कर आयी सरकारों को शुभकामनाए देते हुए कहा कि इंसाफ के साथ ईमानदारी से काम करते हुए लोगो को फायदा पहुंचाने का काम यह सरकार करें हम ऐसी कामना करते हैं। हज़रत ने सबसे महत्वपूर्ण बात मुसलमानों को संबोधित करते हुए कही उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर जिस तरह की ओछी टिप्पणियां की जा रही है वह बहुत ग़लत हैं और नफरत को बढ़ाने वाली हैं लोगों को इससे बचना चाहिए।
चुनाव में एक दल की जीत हुई एक की हार इसे धर्म से जोड़ना और गलत टिप्पणियां करने से हमारा और मुल्क दोनों का नुक़सान है अब चुनाव समाप्त हो चुके हैं तो सभी प्रदेशवासियों को मिलकर नई सरकार की प्राथमिकताएं वहीं हों जिसकी जनता को जरूरत है इसके लिए दबाव बनाना चाहिए न कि इस तरह की बात करनी चाहिए जिससे किसी को चिढ़ हो और नफरत के सौदागरों को मौका मिले।
By: Yunus Mohani

शांति के बिना विकास की परिकल्पना भी बेईमानी : सय्यद मोहम्मद अशरफ

13 मार्च/ हिंदौर सूरतगढ़,
“शांति के बिना विकास की परिकल्पना भी बेईमानी” वर्ल्ड सूफी फोरम और आल इन्डिया उलमा व मशायख बोर्ड के संस्थापक व अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने यह बात एक जलसे को संबोधित करते हुए कही।
उन्होंने कहा,विकास के लिए पहली शर्त है शांति, अगर अमन को खतम किया गया तो विकास के बारे में सोचा भी नहीं जा सकता, हज़रत ने कहा कि पैग़म्बरे अमन ने तालीम दी जिससे पूरी दुनिया में निश्चित तौर पर शांति कि स्थापना की जा सकती है, उन्होंने कहा, नबी ने फरमाया कि तुम्हारा पड़ोसी तुम्हारे शर से अगर महफूज़ नहीं है तो तुम मोमिन नहीं हो सकते, सिर्फ इस हदीस पर अमल करने से शांति स्थापित की जा सकती है।
हज़रत ने कहा कि कोई भी धर्म हिंसा की शिक्षा नहीं देता, सभी धर्म कहते हैं कि मानवता की रक्षा की जानी चाहिए, फिर इस्लाम ने तो जानवरों तक के अधिकार बताए हैं और पैगम्बर ने तालीम दी कि किसी चिड़िया का घोसला भी न उजाड़ा जाए। मुसलमानों की ज़िम्मेदारी अमन क़ायम करने की ज़्यादा है क्योंकि हमें लोगों के लिए भलाई करनी है, अगर खुद को बेहतरीन लोगों में शामिल करवाना चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि आपस में मोहब्बत के साथ रहना और अपने पड़ोसी के हुकूक अदा करना हमारी ज़िम्मेदारी है, उसे निभाना होगा, उन्होंने याद दिलाया कि किस तरह हिन्दुस्तान में सूफिया ने मोहब्बत की तालीम को आम किया है, उस पर ध्यान देकर अमल करना होगा क्योंकि मुल्क के विकास में हमारा योगदान अग्रणी होना चाहिए।