नबी को समझने के लिए अली की और अली को समझने के लिए इल्म की ज़रूरत : सय्यद मोहम्मद अशरफ

28/नवम्बर,हनुमानगढ़
“नबी को समझने के लिए अली की और अली को समझने के लिए इल्म की ज़रूरत,”यह बात आल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड के अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफी फोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने हनुमानगढ़ में एक जलसे को संबोधित करते हुए कही, उन्होंने कहा कि इस वक़्त सियासी लोग घिनौने खेल में लगे हुए हैं और लगातार लोगों को अहम मुद्दों से भटकाने के लिए धर्म का सहारा ले रहे हैं।
उन्होंने कहा कि  पूरे मुल्क में नफरतों की नर्सरी तय्यार की जा रही है यह पौधे बड़े होकर पूरे मुल्क को अंधेरे में डुबो देंगे,हम सब को होशियार रहना चाहिए,हज़रत ने राजस्थान चुनाव प्रचार के दौरान उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान को गैरजिम्मेदाराना बताते हुए कहा कि अली को समझ पाना सबके बस की बात नहीं क्योंकि हज़रत अली करमल्लाहू वजहुल करीम  शहरे इल्म का दरवाज़ा हैं इस  दरवाजे तक इल्म की तलाश वाले आते हैं।
हज़रत ने कहा किसी मजहबी रहनुमा पर गलत टिप्पणी करना अनुचित और असंवैधानिक है इससे लोगों की भावनाएं आहत होती है जो एक जिम्मेदार व्यक्ति को शोभा नहीं देता ।कोई किसी चीज में आस्था रख सकता है और कोई उसमे आस्था नहीं रखता यह नितांत निजी मामला है
क़ुरआन में साफ कहा गया है कि “तुम्हारे लिए तुम्हारा दीन है और हमारा लिए हमारा दीन” तब इस तरह की बातों का कोई मतलब नहीं है सबको मिलजुल कर रहना चाहिए क्योंकि मोहब्बत के बिना देश बिखर जाएगा और सच्चे देशभक्त कभी देश तोड़ने वाली चीज़ों को बर्दाश्त नहीं कर सकते।
उन्होंने लोगों से आह्वाहन किया कि इल्म हासिल करने के लिए बड़ी से बड़ी मुसीबत को भी बर्दाश्त कीजिए क्योंकि इल्म के बिना हम इन चालों को समझ नहीं सकते और हमें यूंही बहकाया जाता रहेगा ,मजहब को समझने के लिए भी इल्म की जरूरत है वरना न हम अली को समझ सकेंगे न तलीमे नबी पर सही सही अमल कर सकेंगे,लिहाज़ा अपने बच्चो को खूब पढ़ाएं आपस में मिलजुल कर रहें ख्वाजा गरीब नवाज के इस पैगाम को फैलाएं कि ” मोहब्बत सबके लिए नफरत किसी से नहीं”
By: यूनुस मोहानी

इल्म से दूर रहकर हम खुद अपने ऊपर ज़ुल्म कर रहे हैं : सय्यद मोहम्मद अशरफ

10 मई/ खरगौन, मध्य प्रदेश

“इल्म से दूर रहकर हम खुद अपने ऊपर ज़ुल्म कर रहे हैं” यह विचार वर्ल्ड सूफी फोरम एवम् आल इंडिया उलमा व मशाइख़ बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने जनसभा को संबोधित करते हुए कही, उन्होंने कहा मुसलमान सिर्फ अपने साथ भेदभाव किये जाने की बात करते हैं और मजलूमियत का रोना रोते रहते हैं मुसलमानों ने यही अपना पसंदीदा काम बना रखा है अपनी नाकामयाबियों पर सोचने के बजाय यह पूरी कौम सिर्फ दूसरो को इल्ज़ाम देने के काम में मसरूफ है।
हज़रत ने कहा जिस कौम की किताब क़ुरआन है और उसका पहला अल्फ़ाज़ इकरा है अफसोस वह कौम इल्म से दूर है हमारी कम से कम 50 फीसदी आबादी ने स्कूल और मदरसे का मुंह नहीं देखा आखिर इसके लिए कौन ज़िम्मेदार है?
आपको क्या किसी पार्टी ने अपने बच्चो को पढ़ाने से रोका प्रशासन ने रोका फिर हमारे किसी गैर मजहबी भाई ने आपको रोका नहीं बल्कि आपने अपने ऊपर यह ज़ुल्म खुद किया है किसीऔर ने नहीं हमने खुद पस्ती का रास्ता चुना है हमने अल्लाह और उसके रसूल का फरमान नहीं माना और खुद को परेशानियों में घेरा है अब अगर आपको इस पस्ती से खुद को उबारना है तो इल्म हासिल करना होगा और इसके लिए कौम को बेदार करना होगा ।
हज़रत ने कहा कि मजलूमियत का रोना छोड़ दीजिए और लोगों पर इल्ज़ाम देना बंद कीजिए अपने बच्चे पढ़ाइए यही आगे बढ़ने का रास्ता है ।

By: Yunus Mohani