ख़ुदा की बन्दगी और बन्दों की सेवा करना ही ख्वाजा ग़रीब नवाज़ का मिशन: सैयद मोहम्मद अशरफ

मकराना में जश्न ए ख्वाजा ग़रीब नवाज़ के अवसर पर ऑल इंडिया उलमा व मशाइख़ बोर्ड के अध्यक्ष का ख़िताब

22 मार्च / मकराना, नागौर (प्रेस विज्ञाप्ति) कल रात नागौर शरीफ के मकराना में जश्न ए ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ कार्यक्रम का आयोजन हुआ जिसमें विशेष रूप से आमंत्रित ऑल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड और वर्ल्ड सूफी फोरम के अध्यक्ष हज़रत सैयद मोहम्मद अशरफ किछोछ्वी साहब ने कहा कि हज़रत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती का मिशन ख़ुदा की बन्दगी और उस के बन्दों की सेवा करना है।
हज़रत ने विशेष रूप से कार्यक्रम में आए हुए युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि आप देश का भविष्य हैं, आप को अपनी शिक्षा को लेकर संवेदनशील होना होगा, आज मुस्लिम वर्ग क्यों पिछड़ा है, उसका सब से बड़ा कारण है कि कोशिश और मेहनत करने से पहले ही हार मान लेते हैं कि हम शिक्षा प्राप्त कर के क्या करेंगे जब हमें नौकरियां ही नहीं मिलेंगी। यह गलत सोच है, हज़रत ने कहा कि अगर कोई युवा दिन में आठ घंटे पढ़ाई के लिए समय निकालता है तो आप दस घंटे पढ़ाई के लिए समय निकालें, साथ ही कहा कि शिक्षा प्राप्त करने का उद्देश्य केवल पैसा प्राप्त करना न हो बल्कि हर विभाग में अपना प्रतिनिधित्व होना चाहिए जिस से अपने देश, समाज और कौम की सेवा कर सकें।
हज़रत ने कहा कि आज हम जिन के नाम पर यहाँ इकठ्ठा हुए हैं उनका मिशन शिक्षा प्राप्त करना था, आपने कहा कि मुस्लिम क़ौम कब तक मज़लूमियत का रोना रोती रहेगी, अब समय आ गया है कि मज़लूमियत का रोना बंद करें और कड़ी मेहनत करना शुरू करें। हमारे उज्ज्वल भविष्य का निर्माण वर्तमान प्रतिक्रिया के आधार पर पर टिका हुआ है। नींव को उत्तेजक बना कर निर्माण पूरा कर लें या हार मान कर भविष्य के निर्माण की उम्मीदों के किले अभी गिरा दें, यह आपके हाथ में है।
कार्यक्रम में मौलाना मोहम्मद अबरार अशरफी नाज़िम जामिया हनफ़िया नजमुल उलूम, हाफिज़ मोहम्मद अशरफ शेरानी, मौलाना अरफात अज़हरी, मौलाना मोहम्मद मुस्तक़ीम शेरानी, मौलाना अब्दुल रहमान, हाफिज़ मोहम्मद रिज़वान, हाफिज़ मोहम्मद नदीम, मौलाना मोहम्मद शाहरुख, मौलाना मोहम्मद शाकिर, मौलाना मोहम्मद रफीक़, मौलाना मोहम्मद जावेद और अज़मत अली, अयूब खान शेरानी, यूसुफ खान शेरानी, अब्दुल ग़फ्फार खान के अलावा मकराना की सभी मस्जिदों के इमाम और कई लोगों ने भाग लिया, कार्यक्रम का अंत देश में शांति की दुआ और सलात व सलाम के साथ हुआ।

By:
हुसैन शेरानी