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हमने जिन्ना को 1947 में ही नकार दिया, अब इसके जरिए राजनीत बंद हो : सय्यद मोहम्मद अशरफ

3 मई / बासनी, नागौर “हमने जिन्ना को 1947 में ही नकार दिया अब इसके जरिए राजनीत बंद हो” यह बात वर्ल्ड सूफी फोरम और आल इन्डिया उलमा व मशाईख बोर्ड के संस

آل انڈیا علما ومشائخ بورڈ شاخ گوونڈی کے زیر اہتمام نوریہ غوثیہ مسجدگوونڈی میں حضرت فاطمہ زہرا کا یوم ولادت دھوم دھام سے منایاگیا
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3 मई / बासनी, नागौर

“हमने जिन्ना को 1947 में ही नकार दिया अब इसके जरिए राजनीत बंद हो” यह बात वर्ल्ड सूफी फोरम और आल इन्डिया उलमा व मशाईख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने उर्स शेखे तरीकत के मौके पर एक जलसे को खिताब करते हुए कही।
हज़रत ने कहा कि मुल्क के शिक्षण संस्थानों को नफरत की आग में किसी भी हालत में नहीं धकेला जाना चाहिए क्योंकि समाज पर इसका गहरा और बुरा प्रभाव पड़ता है ,उन्होंने कहा कि जहां तोड़ने की बात शिक्षण संस्थानों में शुरू होगी तो समाज को कोई बिखराव से नहीं रोक सकता ।
हज़रत ने कहा कि भारतीय मुसलमान ख्वाजा के दर को छोड़ कर कहीं नहीं जाने वाला, सूफिया के मोहब्बत के पैगाम को देश में हर जगह आम करना हमारा काम है, जहां भी नफरत की आग लगेगी हम सब भारतवासी मोहब्बत के पानी से उसे बुझा देंगे ।
हज़रत ने कहा कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के पहले ग्रेजुएट ईश्वर चंद्र थे इससे समझना चाहिए कि नाम से किसी शिक्षण संस्थान को निशाना बनाने का प्रयास घिनौनी और स्तरहीन राजनीत के सिवा कुछ नही। हज़रत ने कहा कि सरकार से मांग करते हैं कि शिक्षण संस्थानों को राजनीत से बचाया जाए और उन्हें नफरत की से बचाने हेतु हर संभव प्रयास किया जा

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