मदरसे दीन का क़िला हैं,यहाँ से हमेशा शांति व भाई चारे का पैगाम दिया गया है

सैयद मोहम्मद अशरफ किछौछवी
सूफ़िया ए किराम ने दुनिया के सामने धर्म का प्रचार करने के लिए सुन्नते रसूल ﷺका अहसन तरीक़ा पेश किया। उन्होंने भारतीय सभ्यता और संस्कृति अपनायी और लोगों के साथ प्यार, मोहब्बत और ख़ुलूस का बर्ताव किया और आपके पास आने वाले से उसके धर्म और जाती न पूछते हुए उसके दुःख दर्द को दूर करने की कोशिश की। यही कारण है कि उनके किरदार और अख़लाक़ की बदौलत लाखों की संख्या में लोगों ने इस्लाम क़ुबूल किया।
उक्त विचार हज़रत मौलाना सैयद मोहम्मद अशरफ किछौछवी (संस्थापक एंव अध्यक्ष आल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड) ने कलियर शरीफ में अल जामिया तुल अशरफ़ीअ ज़िया ए मखदूम के संगे बुनियाद के अवसर पर जलसा को संबोधित करते हुए व्यक्त किये।
उन्होंने मुसलमानों के पिछड़ेपन का ज़िक्र करते हुए कहा कि हमारी इस बुरी दशा का कारण क़ुरआन व हदीस की शिक्षाओं का पालन न करना है। सूफ़ी विद्वानों ने प्रेम, भाईचारे, और मानव सेवा का जो पाठ पढ़ाया है उस पर अमल करके ही हम सफलता की राह पर अग्रसर हो सकते हैं।
मौलाना किछौछवी ने कहा कि हमारी ज़िम्मेदारी है कि बुज़ुर्गाने दीन ने इस्लाम की जिन शिक्षाओं को हम तक पहुँचाया है उन पर अमल करें और अपने किरदार व अमल द्वारा इस्लाम की सही तस्वीर पेश करें। मौलाना ने ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ का कथन ”मुहब्बत सबके लिए नफरत किसी से नहीं”का हवाला देते हुए कहा कि हमें शांति, प्रेम और भाईचारे का वातावरण बनाये रखना है और देश के विकास और खुशहाली में अपना रोल अदा करना है।
क़ारी मुशर्रफ हुसैन ने कहा कि मदरसे दीन का क़िला हैं और दीन की तब्लीग में उनका महत्वपूर्ण चरित्र है। मदरसों ने बुज़ुर्गाने दीन के मिशन को जारी रखा है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इंशा अल्लाह आने वाले समय में अल जामिया तुल अशरफ़ीअ ज़िया ए मखदूम भी दीन व सुन्नियत के प्रचार व प्रसार में अपना महत्वपूर्ण रोल अदा करेगा।
सभा का आग़ाज़ क़ारी इरशाद की तिलावत से हुआ, सञ्चालन क़ारी इरफान अशरफी ने अंजाम दिया। क़ारी मुर्सलीन ने नात का नज़राना पेश किया। क़ारी आसिम अशरफी (व्यवस्थापक) ने आने वाले मेहमानों को धन्यवाद् ज्ञापित किया। जलसा में अली शान, आज़ाद साबरी, अली खान, इकरार खान आदि के अलावा बड़ी संख्या में लोग मोजूद रहे। सभा का समापन सलात व सलाम और देश में समृद्धि और शांति की विशेष दुआ पर हुआ।