पैग़म्बरे इस्लाम की शान में गुस्ताखी करने वाले मुल्क में फसाद फैलाना चाहते हैं : सय्यद मोहम्मद अशरफ

3 अप्रैल 2021, शनिवार, नई दिल्ली
पैग़म्बरे इस्लाम की शान में नरसिंहानंद नाम के विदेशी एजेंट द्वारा अशोभनीय टिप्पणी किए जाने पर सख्त गुस्से का इज़हार करते हुए आल इंडिया उलमा व मशाइख़ बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफ़ी फोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने कहा कि मुल्क में बड़े पैमाने पर दंगे भड़काने की साजिश की जा रही है, कोरोना वायरस के दुबारा बड़ रहे संक्रमण के बीच देश को अस्थिर करने की व्यापक साजिश रची जा रही है ,दुनिया जानती है कि नबी की शान में गुस्ताखी को किसी भी कीमत पर मुसलमान बर्दाश्त नहीं कर सकते और यह ऐसा मामला है जिसपर मुसलमान किसी मसलक में बंटे बिना एकजुट है लिहाज़ा देश में बड़े पैमाने पर दंगे करवाने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि यह मामला बहुत गंभीर है, एक देश और इंसानियत के दुश्मन द्वारा पैग़म्बरे अमन के खिलाफ जिस तरह की अपमानजनक टिप्पणी की गई है ,जिससे मुसलमानों में शदीद गुस्सा है लगातार विदेशी ताकतों द्वारा प्रयास हो रहा है और इसी के चलते विद्या प्रकाशन प्राईवेट लिमिटेड द्वारा छापी गई कक्षा 4 में पढ़ाई जाने वाली किताब में पहले एक फर्जी खाका पैग़म्बरे इस्लाम का छापा गया और उसी समय नरसिंहानंद नामक वैचारिक आतंकवादी द्वारा ऐसी घिनौनी बात की गई जो साफ तौर से देश को सांप्रदायिक दंगों में झिकने की व्यापक साजिश दिखाई पड़ती है,जब देश के 5 राज्यों में चुनाव चल रहा है ऐसे में ऐसी घटना होना साफ इशारा करता है कि यह एक गहरी साजिश है।
सभ्य समाज में इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता ,किसी भी धर्म का चोला ओढ़ कर किसी दूसरे धर्म के खिलाफ जहर उगलने वाला व्यक्ति किसी भी कीमत पर धार्मिक नहीं हो सकता वह सिर्फ आतंकी ही हो सकता है और आतंकवादियों की समाज में कोई जगह नहीं है सरकार को इस व्यक्ति की तुरंत गिरफ्तार करना चाहिए और उससे कड़ी पूछताछ कर इस गहरी साजिश का पर्दाफाश करना चाहिए।
हज़रत ने कहा कि देश के मुसलमानों में गहरा गम और गुस्सा है हम सभी से शांति बनाए रखने की अपील करते हैं ताकि इन आतंकवादियों की साजिश कामयाब न होने पाए अपने गुस्से का इज़हार कानूनी तौर पर करें किसी भी कीमत पर कानून का उल्लंघन न करें ,पैगम्बर की शान में गुस्ताखी को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता और मुसलमान सबकुछ अपने नबी की शान के लिए लुटा सकता है हमारी जान आका की शान पर कुर्बान है लेकिन हमें ध्यान रहना चाहिए कि अगर हमने नबी की तालीम से मुंह मोड़ा तो हम भी गुस्ताखी करेंगे लिहाज़ा आतंक का मुक़ाबला कानून का सहारा लेकर किया जाना चाहिए,पैग़म्बरे अमन की तालीम है अमन कायम करना इसे हमें नहीं भूलना है और इन आतंकियों को जवाब देना है कि उस नबी के उम्मती है जिसने दुनिया को जन्नत बनाने का हुनर अपने अनुयायियों को सिखाया।
उन्होंने कहा कि सरकार तुरंत इस पर कार्यवाही करे,उन्होंने बताया कि आल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड व्यापक तौर से देशव्यापी मुहिम चलाएगा और जबतक इस आतंकी को गिरफ्तार नहीं किया जाता तबतक हैं खामोश नहीं बैठने वाले ,हमने देश के प्रधानमंत्री और गृहमंत्री सहित अल्पसंख्यक आयोग को शिकायत कर कार्यवाही की मांग की है और देश भर में एफआईआर कराई जा रही है,देश में किसी भी तरह माहौल खराब नहीं होना चाहिए अगर ऐसा होता है तो आतंकी विचार जीतेगा इस बात को खास ख्याल रखा जाना चाहिए।

कोरोना वायरस से ज़्यादा खतरनाक है नफरत का वायरस : सय्यद मोहम्मद अशरफ

17 मार्च, 2020 महराजगंज
आल इंडिया व मशाइख़ बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफी फ़ोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि कोरोना वायरस से अधिक खतरनाक नफरत का वायरस है।
उन्होंने कहा कि हम कोरोना से बचने के लिए मास्क तो पहन रहे हैं लेकिन नफरत से बचने के लिए ज़हरीली जुबानों को नहीं रोक रहे हैं,हम वायरस से बचने के लिए बार बार हैंडवाश या साबुन से हाथ धो रहे हैं लेकिन उन हाथों को लोगों की मदद के लिए नहीं बढ़ा रहे, खांसते या छींकते वक़्त बीमारी के डर से मुंह को ढाप रहे हैं लेकिन किसी जरूरतमंद के कपड़ों का इंतजाम नहीं कर रहे।
हज़रत ने कहा कि दुनिया कोरोंना से एकजुट होकर लड़ लेगी इसकी दवा बनाकर इसे हरा भी देगी लेकिन इससे ज़्यादा खतरनाक बीमारी का इलाज होते हुए भी इसे खतम करने को तैयार नहीं है।
जबकि सिर्फ एक मुस्कुराहट इस वायरस से बचा सकता है,एक ख़ामोशी,इंसाफ और लोगों की मदद करने का जज्बा इसका इलाज है अगर सब इस काम में लग जाएं तो इस वायरस को खतम कर इसपे जीत हासिल की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि हम कोरोना को सुन्नते रसूल पे अमल कर हरा देंगे क्योंकि डॉक्टर जो बचाव के तरीके बता रहे हैं वह नबी की सुन्नत है इसी तरह हम नफरत के वायरस को भी नबी की सुन्नत पर अमल कर हरा सकते हैं जो सूफिया ने करके दिखाया और संदेश सुनाया कि नफरत किसी से नहीं मोहब्बत सबके लिए।