फैसला कुछ भी हो नफरत हारनी चाहिए : सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी

8 नवंबर,शुक्रवार मदीना सऊदी अरब
आल इंडिया उलमा व मशाइख़ बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफी फ़ोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने मदीना शरीफ से बयान जारी कर लोगों को पैग़म्बरे अमन की विलादत की मुबारकबाद दी है,उन्होंने भारत की सर्वोच्च अदालत द्वारा कल सुबह अयोध्या मामले पर आने वाले फैसले पर लोगों से अपील की है कि इसे जीत और हार के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए सभी भारतीयों की यह साझा ज़िम्मेदारी है कि हर हाल में अमन शांति बरकरार रहे,किसी भी अफवाह पर ध्यान नहीं दें और हर हाल में नफरत को हरा दें।
यह अभी तक आने वाले और फैसलों की तरह ही एक फैसला है जिसे भारतीयों को उसी तरह लेना है जैसा पहले होता आया है,हुकूमत और प्रशासन अपना काम करेंगे हमें अपनी ज़िम्मेदारी निभानी है ,और भारत को जिताना है मुसलमानों को पैग़म्बरे अमन के मीलाद के दिन यह फैसला आ रहा है ,अब हमे पैगम्बर की तालीम पर अमल कर बताना है कि हम नबी के सच्चे गुलाम हैं और किसी भी कीमत पर अमन को खराब नहीं होने देना है।

आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड नौतनवां यूनिट का मॉब लिंचिंग के विरोध ज्ञापन !

29 जून,नौतनवां
आल इंडिया उलमा व मशाइख़ बोर्ड नौतनवां यूनिट ने आज उप जिलाधिकारी जसधीर सिंह जी को झारखंड में मरहूम तबरेज़ अंसारी के साथ हुई मॉब लिंचिंग के विरोध में ज्ञापन सौंपा। इस मौके पर मौलाना फरीदुद्दीन मिस्बाही ने कहा कि एक सभ्य समाज में यह घटना स्वीकार्य नहीं है, आये दिन होने वाली ऐसी हिंसक घटनाएं अल्पसंख्यक समुदाय में डर पैदा कर रही हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की घटनाओं से समाज में नफरत फैलती है, हम ऐसी घटनाओं खिलाफ कार्यवाही की मांग करते हैं ।
वफद में हाफ़िज कलीमुल्ला, मौलाना रफ़ीक़ फैजी, मौलाना जुल्फेकार अली, क़ारी जुनैद अशरफी जामई, मोहम्मद इद्रीस खान अशरफी, मोहम्मद अतीक़, मोहम्मद हेलाल अशरफी, नासिफ अंसारी, इमरान खान, उस्मान क़ुरैशी, साहब आलम क़ुरैशी, गुलफाम क़ुरैशी, मुकर्रम अंसारी, आज़ाद अशरफ अशरफी और नसरुद्दीन क़ुरैशी मौजूद रहे।

गिरीराज के खिलाफ हो कड़ी कार्यवाही ,आल इंडिया उलमा व मशाइख़ बोर्ड ने अल्पसंख्यक आयोग में की शिकायत ।।

10 मई , नई दिल्ली , बेगूसराय बिहार से भारतीय जनता पार्टी के लोकसभा प्रत्याशी गिरिराज सिंह द्वारा इस्लाम धर्म के प्रवर्तक हज़रत मुहम्मद साहब और उनकी बेटी हज़रत फातिमा पर अभद्र एवम अमर्यादित टिप्पणी के बाद पूरे देश के मुसलमानों में काफी गुस्सा है ।आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग से गिरिराज सिंह की शिकायत की और आयोग से उक्त के विरूद्ध कड़ी से कड़ी कार्यवाही करने की मांग की।
बोर्ड ने लिखित शिकायत पत्र के माध्यम से आयोग से कहा कि गिरिराज सिंह द्वारा किए गए कृत से न सिर्फ मुसलमानों की अपितु समस्त सभ्य समाज की भावनाऐं आहत हुई हैं ,यह कृत भारतीय कानून के अनुसार देशद्रोह की श्रेणी में आता है क्योंकि इससे दो समुदायों के मध्य वैमनस्यता फैल सकती थी अतः इसके खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाय ताकि देश में रहने वाले अल्पसंख्यक वर्ग को न्याय मिल सके।
बोर्ड के अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने लोगों से शांति बनाए रखते हुए कानूनी कार्यवाही करने की अपील की।

 

By: Younus Mohani

आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड 28 को करेगा सामाजिक न्याय सम्मेलन: सय्यद मोहमम्द अशरफ

17 जनवरी /नई दिल्ली –आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड के अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहमम्द अशरफ किछौछवी ने पत्रकारों को बताया कि आगामी 28 जनवरी 2019 को बोर्ड लखनऊ के इंदिरा गाँधी प्रतिष्ठान में एक सम्मेलन आयोजित कर रहा है जिसका नाम सामजिक न्याय सम्मलेन होगा .उन्होंने बताया कि इस सम्मलेन में बोर्ड के पूरे भारत से सभी ज़िम्मेदार शिरकत करेंगे जिनमे देश की तमाम ख़ानक़ाहों  के सज्जादानशीन और उलमा के साथ ही मुस्लिम बुद्धिजीवी लगभग 1500 की तादाद  में देश के मौजूदा हालात और मुस्लिम समाज के मसाइल  पर चर्चा करेंगे और उसके हल के लिए एक एजेंडा तय करेंगे.

उन्होंने कहा कि अब तक सिर्फ हमारे तुष्टिकरण का ढिंढोरा पीटा गया है हमारे समाज के विकास के लिए कोई ठोस रणनीति नहीं बनाई गई यहाँ तक कि अपने घोषणा पत्र में वादा करने के बाद भी मायूसी ही हमारे हिस्से में आई है लिहाज़ा इस सूरते हाल को देखते हुए सर से सर जोड़कर अब हमें एक ऐसा कार्यक्रम बनाना होगा जिससे देश के विकास में हमारे युवा भी बराबर  के शरीक हों , हज़रात ने कहा कि प्रतिभाओं की  कमी नहीं है लेकिन सही दिशा में प्रयास न होने से नाकामी का बोझ कौम पर बढ़ रहा है.

हज़रत ने कहा कि हुकूमते हिन्द ने 10% आरक्षण सवर्ण जातियों को तो दे दिया लेकिन संविधान की मूल भावना के  विरूद्ध आर्टिकल 341 पर प्रतिबन्ध को समाप्त नहीं किया जो मुसलमानों के पिछड़ेपन का एक कारण है, हमें इसके लिए भी बड़ी लडाई लड़नी है जिस पर भी सामाजिक न्याय सम्मेलन में विस्तृत चर्चा होगी और आने वाले समय के लिए रणनीति तय की  जाएगी .

मुसलामानों की शिक्षा भी एक बड़ा मसला है, मदरसा बोर्ड में जिस तरह के लोग बैठाले गए हैं उनसे एक बड़ा नुक्सान मुसलमानों को हो रहा है वहीँ मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षकों का वेतन भी नहीं दिया जा रहा है जिससे उनकी ज़िन्दगी दो भर हो गई है, इन विषयों पर भी सम्मेलन में व्यापक चर्चा के बाद रणनीति बनाई जाएगी.

By: Yunus Mohani

 

 सपनों का हिन्दोस्तान बनाना आज़ादी के परवानों को सच्ची श्रधांजलि: उलमा मशाइख बोर्ड

14 अगस्त 2018 ग़ालिब अकादमी, बस्ती हज़रत निजामुद्दीन में आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड द्वारा आयोजित “एक शाम आज़ादी के परवानो के नाम “कार्यक्रम में बोलते हुए दरगाह निज़ामुद्दीन औलिया के गद्दीनशीन हज़रत सय्यद फरीद अहमद निज़ामी ने कहा कि “सपनों का हिन्दोस्तान बनाना आज़ादी के परवानों को सच्ची श्रधांजलि होगी” उन्होंने कहा कि हम सबकी साझा ज़िम्मेदारी है कि देश से भ्रष्टाचार को हटाने का भरसक प्रयास करें ताकि समाज की अंतिम पंक्ति में बैठे इंसान तक ऊपर से चलने वाली योजनाओं का पूरा लाभ मिल सके.

दिल्ली वक्फ बोर्ड और हज कमेटी के ई .ओ.अशफाक अहमद आरिफी ने जंगे आज़ादी के सिपाहियों को सलाम करते हुए कहा कि मुस्लिम उलमा ने जंगे आज़ादी में जो किरदार पेश किया वह बेमिसाल है. अल्लामा फज़ले हक़ खैराबादी का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अंग्रेजों के खिलाफ जिहाद का फतवा देने वाले मौलाना ने मुल्क की आज़ादी के लिए जान कुर्बान कर दी और फिरंगी हुकूमत कि जड़ों में दही डाल दिया जब यह लडाई आगे बढ़ी तो अनगिनत आलिमे दीन ने अपने खून से इसको ताक़त दी. दिल्ली उर्स कमेटी के चेयरमैन ज़ाकिर खान ने कहा का खानक़ाहों का बड़ा रोल जंगे आज़ादी में रहा, समाज को दिशा देने का काम यहाँ से किया जाता है, मोहब्बत का संदेश आम किया जाता है, इस मुश्किल दौर में खानक़ाहों की बड़ी ज़िम्मेदारी है कि मुल्क की आज़ादी को बरकरार रखने और सपनों का भारत बनाने के लिए समाज को दिशा दें और यह काम हो भी रहा है. सय्यद आज़म अली सज्जादानशीन हज़रत तुर्कमान बियाबानी रह्मतुल्लाह अलैहि ने कहा कि मुल्क को फिरंगी चंगुल से आज़ाद कराने में सभी देशवासियों ने मिलकर लडाई लड़ी, मुसलिम उलमा ने अपना किरदार बखूबी अंजाम दिया, अब ज़िम्मेदारी हम सबकी है कि इस आज़ादी का मोल समझें, अपनी आने वाली नस्लों को बतायें कि इस आज़ादी को हासिल करने में हमने अपनी जानों के नज़राने पेश किये हैं, इस चमन को हमें हर हाल में सुरक्षित रखना है. कार्यक्रम में बोलते हुए स्थानीय विधायक श्री प्रवीन कुमार ने कहा कि बोर्ड का यह प्रयास सराहनीय है. उन्होंने कहा कि देश भ्रष्टाचार के दलदल में फँस गया है अब हमें दोबारा लडाई लड़नी है इसलिए हमें अपना इतिहास पढना होगा, अपने बुजुर्गों की कुर्बानियां याद करनी होगी. श्री अनिल बाजपाई विधायक (गांधीनगर) ने कहा कि गोरों से मुल्क आज़ाद हो गया है लेकिन काले अंग्रेजों ने अपनी गन्दी नज़र देश के खज़ाने पर डाली हुई है, हमें इनकी लालची सोच से मुल्क को आज़ाद करना होगा, यही शहीदों को हमारी श्रधांजलि होगी. श्री नितिन त्यागी विधायक (लक्ष्मी नगर) ने कहा कि देश आज़ादी का जश्न मना रहा है लेकिन नफरत की बेड़ियाँ हमें क़ैद करने पर तुली हैं, मुल्क को नफरतों के तूफ़ान से बचाना हम सब की सांझी ज़िम्मेदारी है. प्रोफेसर ख्वाजा मोहम्मद इकरामुद्दीन, जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस के प्रोग्रामों का आयोजन असल में इस लिए होता है कि हम ने स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए जो बलिदान दिये हैं उनको याद करें, क्योंकि इतिहास हमें देश की मोहब्बत के लिए ज़हनों को ताज़ा करता है. इस दिन को इसलिए भी याद रखने की जरूरत है, क्योंकि वर्तमान परिस्थितियों में इतिहास को मिटाने का सहज प्रयास किया जा रहा है, खासकर मुस्लिम समुदाय में उलमा ने विशेष तौर पर इसके लिए प्रयास किया है. तारीख को जीवित रखने के लिए ऐसे कार्यक्रमों की आवश्यकता है. गुलाम रसूल देहलवी ने जंगे आज़ादी पर अहम् जानकारी दी ,कार्यक्रम को सय्यद फरहान हक्की सज्जादा नशीन हज़रत मोहद्दिस अब्दुल हक देहलवी र.अ., सय्यद वकील अहमद, अब्दुल मोईद अजहरी, ,एफ. आई. इस्माइली,ने भी संबोधित किया.

कार्यक्रम का संचालन करते हुए यूनुस मोहानी ने कहा कि आज़ादी की क़ीमत समझे बगैर उसका हक़ अदा नहीं किया जा सकता, लिहाज़ा हम सब को मिलाकर जान से प्यारे हिन्दोस्तान में एक बार फिर घर घर तक यह संदेश पहुँचाना होगा कि देश है तो हम हैं, नफरत की दीवार गिराकर इसकी तरक्की के लिए आगे आयें. कार्यक्रम का प्रारम्भ मौलाना मुख़्तार अशरफ ने क़ुरआन मजीद की तिलावत से की, हाफिज क़मरुद्दीन ने नात पेश की और हाफिज़ हुसैन शेरानी ने क़ौमी तराना गाया. आखिर में सय्यद शादाब हुसैन रिज़वी ने लोगों का शुक्रिया अदा किया. कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के बाद मुल्क में अमन व चैन की दुआ के साथ हुआ.

By: यूनुस मोहानी

हुसैन मीज़ाने इन्साफ ,इन्साफ के बिना अमन मुमकिन नहीं : सय्यद मोहम्मद अशरफ

मारीशस /20 अप्रैल

‘हुसैन मीज़ाने इन्साफ, इंसाफ के बिना अमन मुमकिन नहीं “यह बात वर्ल्ड सूफी फोरम व आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने एक सभा को संबोधित करते हुए कही .
हज़रत ने पूरी दुनिया को हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के यौमे विलादत की मुबारकबाद पेश करते हुए कहा कि इमाम आली मकाम का फरमान है कि  जान का चला जाना नुक्सान नहीं, सबसे बड़ा नुक्सान किसी की नज़र से गिर जाना है’ इसीलिए जब इन्साफ नहीं मिलता तो हुक्मरान आवाम की नज़र से गिर जाते हैं जिसका नतीजा बदअमनी होती है.
उन्होंने कहा कि इन्साफ का होना बहुत ज़रूरी है, सिर्फ अदालतों में ही नहीं हमारा सबके लिए इंसाफ पसंद होना भी ज़रूरी है क्योंकि हम जो अपने लिए चाहते हैं वही दूसरों के लिए भी पसंद करें, यही तलीमे मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम है. इमामे आली मकाम फरमाते हैं कि “अगर दुनिया में इन्केलाब लाना चाहते हो तो तहजीबे नफ्स की शुरुआत खुद से करो, दुनिया खुद बखुद बदल जाएगी, हज़रत ने कहा, यह ज़रूरी बात है हम दूसरों की कमी तलाशते रहते हैं जबकि तरीका यह है कि खुद में सुधार किया जाये ताकि लोग आपको देख कर बदल जाये.
उन्होंने हज़रत इमाम हुसैन का ज़िक्र करते हुए कहा कि इमाम फरमाते हैं “वह क्या बदनसीब इंसान है जिसके दिल में अल्लाह ने जानदारों के लिए रहम की आदत पैदा न की; हज़रत ने यह बात हिन्दोस्तान में कम उम्र बच्चियों के साथ आये दिन हो रही हैवानियत का तज़किरा करते हुए कही, उन्होंने कहा कि यह वह दरिन्दे हैं जो समाज के लिए नासूर हैं और इनकी सजा मौत से कम हरगिज़ नहीं होनी चाहिए.  भारत में भी कई जगह आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड के कार्यकर्ताओं ने महिलाओं के साथ हो रही बर्बरता के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया, उत्तरप्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी बोर्ड के प्रदेश सचिव हज़रत सय्यद हम्माद अशरफ किछौछवी और मौलाना आले रसूल ,रमजान अशरफी सहित सैकड़ों लोगों ने इस बरबरियत के खिलाफ कठोर कानून की मांग की उन्होंने कहा कि ऐसे जालिमों की सजा सिर्फ मौत होनी चाहिए जो महिलाओं पर इस तरह की बरबरियत करते हैं साथ ही हम्माद अशरफ ने कहा कि इस मसले को मज़हब के चश्मे से हरगिज़ नहीं देखा जाना चाहिए ..

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इस्लाम ने दिया दुनिया को लेडीज़ फर्स्ट का तसव्वुर : सय्यद मोहम्मद अशरफ

8 अप्रैल/ पश्चिम बंगाल
इस्लाम ने दिया दुनिया को लेडीज़ फर्स्ट का तस्व्वुर” यह बात वर्ल्ड सूफी फोरम व आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने बोर्ड की इस्लामपुर शाखा द्वारा आयोजित एकदिवसीय सेमिनार में बतौर मुख्य अतिथि बोलते हुए कही।
हज़रत ने कहा कि पूरे मुल्क में लोग प्रदर्शन कर रहे हैं, हमारी मां बहनों को भी सड़कों पर उतरना पड़ा है, कानून के खिलाफ जिसकी वजह हमारा दीन पर अमल न करना है, अल्लाह रब्बुल इज्जत तलाक़ को हलाल चीज़ों में सबसे ज़्यादा नापसंद फरमाता है तो फिर उसका इस्तेमाल छोटी छोटी बातों पर करना किस तरह सही हो सकता है, मुसलमान पर शराब हराम है और अक्सर मुसलमान शराब के नशे में तलाक़ दे रहे हैं और फिर मुफ्तियों के पास जाकर फतवा मांगते फिरते हैं, अगर मुसलमान अल्लाह के हुक्म पर अमल करे तो वह इस परेशानी से बच सकते हैं।
उन्होंने कहा, निकाह के वक़्त अगर काजी दूल्हा और दुल्हन दोनों को उनके हक बताए और शादी से एक महीना पहले से दोनों के घरवाले उन्हें शादीशुदा ज़िन्दगी गुजारने के इस्लामी तरीके जानने और समझने के लिए किसी जानकार आलिमे दीन से राबता करे तो इस परेशानी से बड़ी आसानी से बचा जा सकता है।
हज़रत ने कहा कि इस्लाम ने ही दुनिया को लेडीज फर्स्ट का तसव्वुर दिया है, वह भी सिर्फ तसव्वुर नहीं बल्कि इस पर अमल भी किया है, उसका सबसे पहला उदाहरण निकाह है जिसमें पहले लड़की की इजाज़त ली जाती है उसके बाद लड़के से पूछा जाता है, इतने अहम फैसले में इस्लाम ने लड़की को पहला हक दिया है।
यह इस्लाम ही है जिसने हमारी मां के कदमो में जन्नत रखी और हमारी बेटियों को हमारे लिए रहमत बना दिया, ऐसे में इस्लाम पर औरतों के साथ ज़ुल्म का इल्ज़ाम लगाना जहालत है, इसके सिवा कुछ भी नहीं, उन्होंने साफ कहा कि हमारी औरतों को भी दीन सीख कर उस पर मजबूती से अमल करना चाहिए, औरतों की भी ज़िम्मेदारी है समाज को बुराइयों से बचाने की।

By
यूनुस मोहानी