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आल इंडिया उलमा व मशाइख़ बोर्ड : ज्ञापन

  सांप्रदायिक दंगो को लेकर मुसलमानों मे भय पाया जाता है । सरकार इस भय को दूर करे तथा जो बड़े छोटे दंगे हुए हैं उनमें क्या कार्यवाही हुई है इस

बरकती जैसे लोग अमन के दुश्मन , ऐसे लोगों का करें पूर्ण बहिष्कार : सय्यद मोहम्मद अशरफ
वक्फ के लुटेरे कौम के सबसे बड़े दुश्मन : सय्यद मोहम्मद अशरफ
AIUMB Welcomes Action against Zakir Naek and IRF: Press Release

Letter Pad

 

  1. सांप्रदायिक दंगो को लेकर मुसलमानों मे भय पाया जाता है । सरकार इस भय को दूर करे तथा जो बड़े छोटे दंगे हुए हैं उनमें क्या कार्यवाही हुई है इस पर ग्रह मंत्रालय अपना बयान जारी करे ।
  2. विशिष्ट मुस्लिम धार्मिक स्थलों और हर प्रांत की राजधानी में सूफी केंद्र स्थापित किए जाएं और राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में भी एक महान सूफी केन्द्र बनाया जाए जिसमें एक पुस्तकालय की स्थापना की जाए, जिस में बेहतर और विश्वसनीय पुस्तकों का प्रबन्ध हो ताकि सूफिया के समाज सेवा के संदेश को आम किया जा सके।
  3. सूफिया किराम के आस्तानों पर आने वाले अंतरराष्ट्रीय पर्यटक के लिये ज़यारती (तीर्थ) वीजा की सुविधा व ज़ायरीन के लिए रेल तथा सड़क परिवहन को बेहतर बनाया जाए, रियायती टिकट की व्यवस्था, बिजली और पानी का मुकम्मल बन्दो बस्त और एक सूफी सर्किट स्थापित किया जाए ताकि इसके जरिए भारत के तमाम मह्त्वपूर्ण आस्तानों, खानकाहों और दरगाहों को एक दूसरे से जोड़ दिया जाए।
  4. जनता की भलाई और कल्याण के लिए चलाई जाने वाली सरकारी योजनाओं के सभी केन्द्रों को दरगाहों, आस्तानों के निकट स्थापित किया जाए ताकि हर धर्म और पंथ के लोग अधिक से अधिक लाभ उठा सकें।
  5. मुसलमानों की घनी आबादी वाले क्षेत्रों में उच्च गुणवत्ता के शिक्षा के केंद्र खोलने के साथ साथ तकनीकी शिक्षा का प्रावधान किया जाए। इन शिक्षा केंद्रों में पारंपरिक शांतिपूर्ण धार्मिक पाठ्यक्रम पढ़ाया जाए ताकि कट्टरपंथी विचारधारा को लगाम लगाई जा सके। इन शिक्षा केंद्रों में पढ़ाए जाने वाले पाठ्यक्रम को तैयार करने में आल इंडिया उलमा व मशाइख़ बोर्ड हर तरह का सहयोग देने के लिए तैयार है।
  6. आल इंडिया उलमा व मशाइख़ बोर्ड द्वारा प्रस्तुत संशोधनों को सामने रखकर केंद्रीय मदरसा बोर्ड विधेयक संसद में पेश करके उसे जल्द से जल्द पारित कराया जाए।
  7. सूफी मत में विश्वास रखने वाले लोगों को सेंट्रल वक़्फ़ परिषद, राज्य और केंद्रीय वक्फ बोर्ड, केंद्रीय और प्रांतीय हज समिति, मौलाना आज़ाद एजुकेशन फाउंडेशन, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक, वित्तीय विकास निगम, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और अल्पसंख्यक आयोग जैसी संस्थाओं में उनकी संख्या के हिसाब से सीटें दी जाएं और यदि संभव हो तो आल इंडिया उलमा व मशाइख़ बोर्ड से इस संबंध में सलाह भी ली जाए।
  8. वह मस्जिदें या दरगाहें जिन्हें पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित किया जा रहा है उनके अंदर होने वाले धार्मिक कार्यकमों के प्रबंधन की ज़िम्मेदारी आल इंडिया उलमा व मशाइख़ बोर्ड या अन्य सुन्नी सूफी संगठनों के हवाले की जाए ताकि वाकिफ की मंशा के अनुसार धार्मिक कार्यकम बिना किसी व्यवधान के सम्पन्न हो सकें और कट्टरपंथी विचारधारा को बढ़ावा देने वाले व्यक्तियों से हमारे आस्ताने सुरक्षित रहें।
  9. अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय में एक अलग दरगाह मैनेजमेंट बोर्ड बनाया जाए और इस बोर्ड का पूरा प्रबंधन वक़्फ़ बोर्ड के बजाय देश की बड़ी खानकाहों के प्रमुखों को सौंपा जाए जिनका प्रतिनिधित्व आल इंडिया उलमा व मशाइख़ बोर्ड कर रहा है।
  10. भारत मे जो भी वक्फ संपत्तियाँ हैं वो सभी सुन्नी सूफी विचारधारा के लोगों द्वारा ही वक्फ की गयी हैं । लेकिन उन पर आज कट्टरपंथी विचारधारा से संबन्धित लोग क़ाबिज़ हैं । जबकि कट्टरपंथी विचार धारा इस देश मे 1855 मे आई है । उस से पूर्व देश में मुसलमानों में दो ही (सुन्नी सूफी , शिया ) विचारधारा के लोग मौजूद थे । वक्फ संपत्तियाँ उन्ही के द्वारा ही वक्फ की गयी हैं । इसी लिए सुन्नी वक्फ बोर्ड और शिया वक्फ बोर्ड के नाम से दो बोर्ड बनाए गये । शिया वक्फ बोर्ड पर तो शिया क़ाबिज़ हैं पर सुन्नी वक्फ बोर्ड पर 1919 के बाद से कट्टरपंथी विचारधारा के लोग क़ाबिज़ होते चले गए और आज चपरासी से लेकर चैरमैन तक लगभग इसी विचार धारा के लोग पाये जाते हैं। जबकि 1919 से पूर्व सुन्नी वक्फ बोर्ड और उससे जुड़ी हुई तमाम सम्पत्तियों, मस्जिदों, मदरसों, और ख़ानक़ाहों का संचालन सिर्फ सुन्नी सूफी मुसलमान ही करता रहा है। अतः बोर्ड मांग करता है कि 1919 के बाद कट्टरपंथी विचारधारा द्वारा वक्फ की गयी सम्पत्तियों को अलग कर के उनका अलग बोर्ड बना दिया जाए और पूर्व की भांति सुन्नी वक्फ बोर्ड को सुन्नी सूफी मुसलमानों के हवाले किया जाये।
  11. कट्टरपंथी विचारधारा द्वारा सूफी सुन्नी मुसलमानों की मस्जिदों पर कब्ज़ा करने की प्रक्रिया को तुरंत रोका जाए क्योंकि यह न केवल वाकिफ की मंशा का विरोध है बल्कि देश की शांति और व्यवस्था के लिए भी बड़ा खतरा है।
  12. आल इंडिया उलमा व मशाइख़ बोर्ड इस बात की भी मांग करता है कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और अल्पसंख्यक मंत्रालय में प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए एक निगरानी समिति का गठन किया जाए जो कट्टरपंथी विचारधारा को बढ़ावा देने वाले समाचार, लेख और संपादकीय पर कड़ी निगाह रखे।
  13. मुस्लिम समस्याओं को समझने के लिए सरकारी प्रतिनिधियों के साथ एक संयुक्त सजेशन एंड एक्शन कमेटी बनाई जाए जिस में बोर्ड को भी शामिल किया जाए।
  14. मुसलमानों के लिए बैंको से क़र्ज़ और दूसरी सरकारी सुविधाओं को आसान बनाया जाये।
  15. अल्पसंख्यकों के लिए बनायी गयी योजनाओं में मुसलमानों की जनसंख्या के अनुसार उनका लाभ सुनिश्चित किया जाये।

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