हुसैन का ज़िक्र ज़ुल्म और भ्रष्टाचार का इलाज है : सय्यद मोहम्मद अशरफ

9 सितंबर, रायपुर छत्तीसगढ़
आल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड के अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफी फोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने एक धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि हुसैन का ज़िक्र ज़ुल्म एवम भ्रष्टाचार का इलाज है।
उन्होंने कहा कि दुनिया में जहां भी ज़ुल्म है कुप्रबंधन है नाइंसाफी है वहां हुसैन का ज़िक्र उसके खिलाफ आवाज है,क्योंकि रसूले अकरम सल्लललाहू अलैहि वसल्लम के नवासे ने अपने 6 माह के बेटे से लेकर अपने पूरे घर की कुर्बानी इस ज़ुल्म और भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष में दी और आने वाली दुनिया को यह संदेश दिया कि अगर कहीं ज़ुल्म और नाइंसाफी हो भ्रष्टाचार हो तो उसके खिलाफ बड़ी से बड़ी कुर्बानी देने से भी पीछे नहीं हटना चाहिए।
हज़रत ने कहा कि जिस तरह की जंग करबला में इमाम ने लड़ी उसकी मिसाल पूरी इंसानी तारीख में नहीं मिलती जहां वफादारी ने भी अपने कमाल को छुआ यह वाहिद जंग है जिसमें मैदान में सर कटाने वाला जीता और क़ातिल बुरी तरह हार गया । अली के बेटों ने करबला के तपते रेगिस्तान में भूके और प्यासे रहते हुए जो इबारत लिखी उससे रहती दुनिया तक लोग हौसला पाते रहेंगे।
करबला सिर्फ जंग नहीं है बल्कि एक पैगाम है कि ज़ुल्म को बर्दाश्त करना भी ज़ुल्म है इसीलिए हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने फरमाया कि ज़ुल्म के खिलाफ जितनी देरी से खड़े होंगे कुर्बानी उतनी ज़्यादा देनी होगी,लिहाजा हम सब मोहर्रम में इमाम का ज़िक्र इसलिए करते हैं कि हम ज़ुल्म करने वाले नहीं बल्कि ज़ालिम के विरोधी हैं भ्रष्टाचार के नाइंसाफी के विरोधी है। मोहर्रम दुनिया में ज़ुल्म के खिलाफ अमन वालों के प्रदर्शन का नाम है।

By: Yunus Mohani

हुसैन मीज़ाने इन्साफ ,इन्साफ के बिना अमन मुमकिन नहीं : सय्यद मोहम्मद अशरफ

मारीशस /20 अप्रैल

‘हुसैन मीज़ाने इन्साफ, इंसाफ के बिना अमन मुमकिन नहीं “यह बात वर्ल्ड सूफी फोरम व आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने एक सभा को संबोधित करते हुए कही .
हज़रत ने पूरी दुनिया को हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के यौमे विलादत की मुबारकबाद पेश करते हुए कहा कि इमाम आली मकाम का फरमान है कि  जान का चला जाना नुक्सान नहीं, सबसे बड़ा नुक्सान किसी की नज़र से गिर जाना है’ इसीलिए जब इन्साफ नहीं मिलता तो हुक्मरान आवाम की नज़र से गिर जाते हैं जिसका नतीजा बदअमनी होती है.
उन्होंने कहा कि इन्साफ का होना बहुत ज़रूरी है, सिर्फ अदालतों में ही नहीं हमारा सबके लिए इंसाफ पसंद होना भी ज़रूरी है क्योंकि हम जो अपने लिए चाहते हैं वही दूसरों के लिए भी पसंद करें, यही तलीमे मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम है. इमामे आली मकाम फरमाते हैं कि “अगर दुनिया में इन्केलाब लाना चाहते हो तो तहजीबे नफ्स की शुरुआत खुद से करो, दुनिया खुद बखुद बदल जाएगी, हज़रत ने कहा, यह ज़रूरी बात है हम दूसरों की कमी तलाशते रहते हैं जबकि तरीका यह है कि खुद में सुधार किया जाये ताकि लोग आपको देख कर बदल जाये.
उन्होंने हज़रत इमाम हुसैन का ज़िक्र करते हुए कहा कि इमाम फरमाते हैं “वह क्या बदनसीब इंसान है जिसके दिल में अल्लाह ने जानदारों के लिए रहम की आदत पैदा न की; हज़रत ने यह बात हिन्दोस्तान में कम उम्र बच्चियों के साथ आये दिन हो रही हैवानियत का तज़किरा करते हुए कही, उन्होंने कहा कि यह वह दरिन्दे हैं जो समाज के लिए नासूर हैं और इनकी सजा मौत से कम हरगिज़ नहीं होनी चाहिए.  भारत में भी कई जगह आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड के कार्यकर्ताओं ने महिलाओं के साथ हो रही बर्बरता के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया, उत्तरप्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी बोर्ड के प्रदेश सचिव हज़रत सय्यद हम्माद अशरफ किछौछवी और मौलाना आले रसूल ,रमजान अशरफी सहित सैकड़ों लोगों ने इस बरबरियत के खिलाफ कठोर कानून की मांग की उन्होंने कहा कि ऐसे जालिमों की सजा सिर्फ मौत होनी चाहिए जो महिलाओं पर इस तरह की बरबरियत करते हैं साथ ही हम्माद अशरफ ने कहा कि इस मसले को मज़हब के चश्मे से हरगिज़ नहीं देखा जाना चाहिए ..

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