सपनों का हिन्दोस्तान बनाना आज़ादी के परवानों को सच्ची श्रधांजलि: उलमा मशाइख बोर्ड

14 अगस्त 2018 ग़ालिब अकादमी, बस्ती हज़रत निजामुद्दीन में आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड द्वारा आयोजित “एक शाम आज़ादी के परवानो के नाम “कार्यक्रम में बोलते हुए दरगाह निज़ामुद्दीन औलिया के गद्दीनशीन हज़रत सय्यद फरीद अहमद निज़ामी ने कहा कि “सपनों का हिन्दोस्तान बनाना आज़ादी के परवानों को सच्ची श्रधांजलि होगी” उन्होंने कहा कि हम सबकी साझा ज़िम्मेदारी है कि देश से भ्रष्टाचार को हटाने का भरसक प्रयास करें ताकि समाज की अंतिम पंक्ति में बैठे इंसान तक ऊपर से चलने वाली योजनाओं का पूरा लाभ मिल सके.

दिल्ली वक्फ बोर्ड और हज कमेटी के ई .ओ.अशफाक अहमद आरिफी ने जंगे आज़ादी के सिपाहियों को सलाम करते हुए कहा कि मुस्लिम उलमा ने जंगे आज़ादी में जो किरदार पेश किया वह बेमिसाल है. अल्लामा फज़ले हक़ खैराबादी का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अंग्रेजों के खिलाफ जिहाद का फतवा देने वाले मौलाना ने मुल्क की आज़ादी के लिए जान कुर्बान कर दी और फिरंगी हुकूमत कि जड़ों में दही डाल दिया जब यह लडाई आगे बढ़ी तो अनगिनत आलिमे दीन ने अपने खून से इसको ताक़त दी. दिल्ली उर्स कमेटी के चेयरमैन ज़ाकिर खान ने कहा का खानक़ाहों का बड़ा रोल जंगे आज़ादी में रहा, समाज को दिशा देने का काम यहाँ से किया जाता है, मोहब्बत का संदेश आम किया जाता है, इस मुश्किल दौर में खानक़ाहों की बड़ी ज़िम्मेदारी है कि मुल्क की आज़ादी को बरकरार रखने और सपनों का भारत बनाने के लिए समाज को दिशा दें और यह काम हो भी रहा है. सय्यद आज़म अली सज्जादानशीन हज़रत तुर्कमान बियाबानी रह्मतुल्लाह अलैहि ने कहा कि मुल्क को फिरंगी चंगुल से आज़ाद कराने में सभी देशवासियों ने मिलकर लडाई लड़ी, मुसलिम उलमा ने अपना किरदार बखूबी अंजाम दिया, अब ज़िम्मेदारी हम सबकी है कि इस आज़ादी का मोल समझें, अपनी आने वाली नस्लों को बतायें कि इस आज़ादी को हासिल करने में हमने अपनी जानों के नज़राने पेश किये हैं, इस चमन को हमें हर हाल में सुरक्षित रखना है. कार्यक्रम में बोलते हुए स्थानीय विधायक श्री प्रवीन कुमार ने कहा कि बोर्ड का यह प्रयास सराहनीय है. उन्होंने कहा कि देश भ्रष्टाचार के दलदल में फँस गया है अब हमें दोबारा लडाई लड़नी है इसलिए हमें अपना इतिहास पढना होगा, अपने बुजुर्गों की कुर्बानियां याद करनी होगी. श्री अनिल बाजपाई विधायक (गांधीनगर) ने कहा कि गोरों से मुल्क आज़ाद हो गया है लेकिन काले अंग्रेजों ने अपनी गन्दी नज़र देश के खज़ाने पर डाली हुई है, हमें इनकी लालची सोच से मुल्क को आज़ाद करना होगा, यही शहीदों को हमारी श्रधांजलि होगी. श्री नितिन त्यागी विधायक (लक्ष्मी नगर) ने कहा कि देश आज़ादी का जश्न मना रहा है लेकिन नफरत की बेड़ियाँ हमें क़ैद करने पर तुली हैं, मुल्क को नफरतों के तूफ़ान से बचाना हम सब की सांझी ज़िम्मेदारी है. प्रोफेसर ख्वाजा मोहम्मद इकरामुद्दीन, जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस के प्रोग्रामों का आयोजन असल में इस लिए होता है कि हम ने स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए जो बलिदान दिये हैं उनको याद करें, क्योंकि इतिहास हमें देश की मोहब्बत के लिए ज़हनों को ताज़ा करता है. इस दिन को इसलिए भी याद रखने की जरूरत है, क्योंकि वर्तमान परिस्थितियों में इतिहास को मिटाने का सहज प्रयास किया जा रहा है, खासकर मुस्लिम समुदाय में उलमा ने विशेष तौर पर इसके लिए प्रयास किया है. तारीख को जीवित रखने के लिए ऐसे कार्यक्रमों की आवश्यकता है. गुलाम रसूल देहलवी ने जंगे आज़ादी पर अहम् जानकारी दी ,कार्यक्रम को सय्यद फरहान हक्की सज्जादा नशीन हज़रत मोहद्दिस अब्दुल हक देहलवी र.अ., सय्यद वकील अहमद, अब्दुल मोईद अजहरी, ,एफ. आई. इस्माइली,ने भी संबोधित किया.

कार्यक्रम का संचालन करते हुए यूनुस मोहानी ने कहा कि आज़ादी की क़ीमत समझे बगैर उसका हक़ अदा नहीं किया जा सकता, लिहाज़ा हम सब को मिलाकर जान से प्यारे हिन्दोस्तान में एक बार फिर घर घर तक यह संदेश पहुँचाना होगा कि देश है तो हम हैं, नफरत की दीवार गिराकर इसकी तरक्की के लिए आगे आयें. कार्यक्रम का प्रारम्भ मौलाना मुख़्तार अशरफ ने क़ुरआन मजीद की तिलावत से की, हाफिज क़मरुद्दीन ने नात पेश की और हाफिज़ हुसैन शेरानी ने क़ौमी तराना गाया. आखिर में सय्यद शादाब हुसैन रिज़वी ने लोगों का शुक्रिया अदा किया. कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के बाद मुल्क में अमन व चैन की दुआ के साथ हुआ.

By: यूनुस मोहानी

सिर्फ क़ानून बना देने से नहीं बल्कि उसे सख्ती और ईमानदारी से लागू करने से रुकेगी हत्याएं : सय्यद मोहम्मद अशरफ

17 जुलाई/ हनुमानगढ़ राजस्थान.

“सिर्फ क़ानून बना देने से नहीं बल्कि उसे सख्ती और ईमानदारी से लागू करने से रुकेगी हत्याएं” यह बात वर्ल्ड सूफी फोरम व आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड के संस्थापक, अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने सर्वोच्च न्यायलय द्वारा संसद में भीड़ द्वारा हत्या करने पर क़ानून बनाने की बात कहने पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कही ।उन्होंने कहा कि सिर्फ क़ानून होने से कुछ नहीं होगा अगर उसे ईमानदारी से लागू न किया जाऐ।
हज़रत ने कहा, भीड़ जिस तरह सड़कों पर उतर कर निर्दोष लोगों को मार रही है यह भयावह स्थिति है इससे अगर सख्ती से नहीं निपटा गया तो फिर जंगलराज को कोई नहीं रोक पाऐगा और पूरा देश जल उठेगा। आज पूरी दुनिया हमारे मुल्क की तरफ हसरत भरी निगाहों से देख रही है मगर हमने इस हिंसक भीड़ को नहीं रोका तो विकास की कल्पना भी बेईमानी है।
उन्होंने कहा कि राज्य और केन्द्र  सरकार की ज़िम्मेदारी है कि ऐसे उपद्रवी भीडतंत्र को किसी प्रकार का संरक्षण न मिले और इन्हें हर स्तर पर हतोउत्साहित किया जाऐ।अपराधियों से सख्ती से निपटा जाना चाहिए, लोगों को भी सचेत रहते हुए किसी के बहकावे में नहीं आना चाहिए और क़ानून को किसी भी क़ीमत हाथ में नहीं लेना चाहिए।
क़ानून तब ही प्रभावी होता है जब उसका खौफ लोगों के दिल में हो अगर उसको लागू करने वाले ईमानदारी से क़ानून तो बनाया जाऐ लेकिन उसको सख्ती से लागू करवाने की गारंटी भी सरकार को देनी चाहिए क्योंकि इस तरह भीड़ द्वारा किसी की हत्या हमारे समाज के धीरे धीरे वहशी हो जाने का संकेत है, इसे रोका जाना चाहिए। मोहब्बत का पैगाम सब तक पहुंचाया जाए ताकि नफरत की आग को ठंडा किया जा सके।

By: Yunus Mohani

अफवाहें आग लगा रही हैं और नफरत जानें ले रही हैं : सय्यद मोहम्मद अशरफ

15 जुलाई/ खुंजा राजस्थान

अफवाहें आग लगा रही हैं और नफरत जाने ले रही है, यह बात एक जलसे को खिताब करते हुए वर्ल्ड सूफी फोरम एवम आल इंडिया उलमा व मशाइख़ बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने कही, उन्होंने कर्नाटक में गूगल के इंजीनियर मोहम्मद आज़म की एक अफवाह के चलते भीड़ के ज़रिए हत्या पर बोलते हुए कहा कि मुल्क खतरनाक दौर से गुज़र रहा है, सोशल मीडिया जहां एक ताक़तवर ज़रिया है अपनी बात रखने का, नफरत के सौदागरों ने उसे हथियार बना लिया है।
उन्होंने कहा कि अब वक़्त अा गया है सरकार को फौरन कोई ऐसा तरीका अपनाना होगा जिससे यह प्लेटफार्म भी बच जाए और वैचारिक आतंकी इसे अपना हथियार भी न बना सके।हज़रत ने कहा, बच्चा चोरी के इल्जाम में एक पढ़े लिखे इंसान को वहशी भीड़ मार देती है, यह कैसा समाज हमने बना दिया है, क्या यही विकास का मॉडल है ?

हज़रत ने कहा कि क़ुरआन में अल्लाह ने फरमाया कि" ईमान वालों जब तुम्हारे पास कोई खबर आए तो उसकी खूब तहक़ीक़ कर लिया करो "लिहाजा यही उसूल है कि किसी बात को मान लेने से पहले उसकी तहकीक ज़रूरी है आज लोग बिना तहक़ीक़ के हर बात को सच मान कर नफरत की आग में बेगुनाहों की जान लेने पर तुले हैं।

उन्होंने कहा, कहीं दलित, कहीं मुस्लिम कहीं महिलाएं नफरत का शिकार हो रही हैं,ऐसे में हुकूमत की ज़िम्मेदारी बनती है कि वह ऐसे इंतज़ाम करे जिससे वैचारिक आतंकी कामयाब न होने पाए, हज़रत ने शदीद ग़म और ग़ुस्से का इजहार करते हुए कहा कि एक तरफ पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में ज़हरीली सोच के मालिक बम धमाके कर बेगुनाहों की जान ले रहे हैं, और हमारे मुल्क में अफवाह को बम की शक्ल में इस्तेमाल कर बेगुनाहों की जान ली जा रही है, हम इसकी सख्त मज़म्मत करते हैं और अहले अमन से अपील करते हैं कि लामबंद होकर नफरत की आंधियों के खिलाफ खड़े हो जाइए, मोहब्बत के चिराग का मुहाफिज़ खुदा है।

By: यूनुस मोहानी

संसार में संगठित आतंकवाद के पहले शिकार हैं हज़रत अली- मौलाना अब्दुल मोईद अज़हरी

6 जून/ नई दिल्ली

“संसार में संगठित आतंकवाद के पहले शिकार हैं हज़रत अली” यह बात आल  इंडिया उलमा व माशाईख बोर्ड यूथ के जनरल सेक्रेटरी मौलाना अब्दुल मोईद अजहरी ने बोर्ड के केन्द्रीय कार्यालय में हज़रत अली अलैहिस्सलाम की शहादत के मौक़े पर आयोजित कार्यक्रम ‘द फर्स्ट विक्टिम ऑफ टेररिज्म हज़रत अली ‘ में बोलते हुए कही।

मौलाना ने कहा कि हज़रत अली अलैहिस्सलाम की शहादत दुनिया की तारीख में संगठित आतंकवाद की पहली घटना है उसके बाद से आतंकी संगठन अमन के दुश्मन बनकर अलग अलग रूप में नजर आते रहे हैं लेकिन इंसानी तारीख में कोई और घटना हज़रत अली की शहादत से पहले इस तरह की नहीं मिलती जहां वैचारिक आतंकवाद ने संगठित होकर हमला किया हो और जान का नुक़सान किया हो हालांकि पहले भी लोगों को क़त्ल किया गया है लेकिन वह संगठित आतंकवाद की श्रेणी में नहीं आता ।

कार्यक्रम में बोलते हुए गुलाम रसूल देहलवी ने कहा कि आतंकवाद के पहले दस्ते का नाम खारजी है और फिर इसका नाम हर दौर में बदलता रहा, कभी ये नासबी बनकर आया कभी यजीदी और इस वक़्त दाईश के रूप में दुनिया के लिए चुनौती बना हुआ है। उन्होंने कहा कि हज़रत अली की शहादत अमन पर हमला था, न्याय के शासन में अपराधियों का दम घुट रहा था तो उन्होंने संगठित होकर आतंकी साजिश रची और इब्ने मुलजिम नाम के नौजवान ने हज़रत अली पर आत्मघाती हमला किया और आपको शहीद किया, इस तरह पहला आत्मघाती आतंकवादी हमला हज़रत अली पर किया गया, आत्मघाती इसलिए क्योंकि मस्जिद के अंदर हमले के बाद इब्ने मुलजिम को पता था कि वह पकड़ा जायेगा और मार दिया जायेगा।

पंडित श्री देव शर्मा जी ने कहा कि हज़रत अली अमन के पैरोकार थे और अमन के दुश्मन ने हज़रत अली को शहीद किया, आज दुनिया में खून खराबा हो रहा है वह उसी विचारधारा की देन है जो हज़रत अली की दुश्मन थी लोगों, को इस सोच से बचना चाहिए ।

आल  इंडिया उलमा व माशाईख बोर्ड के ऑफिस सेक्रेटरी जनाब यूनुस मोहानी ने कहा कि हज़रत अली ने फरमाया कि ‘अगर तुम्हे कोई इंसान छोटा नजर आता है तो इसका यह मतलब है कि या तो तुम उसे दूर से देख रहे हो या फिर गुरूर से, हज़रत अली अलैहिस्सलाम की यह बात अगर समझ जाएं तो सामाजिक न्याय के लिए संघर्ष की आवश्यकता नहीं बचती।उन्होंने विश्व पर्यावरण दिवस को हज़रत अली से जोड़ते हुए कहा कि हज़रत अली पर्यावरण प्रेमी थे उन्होंने रेगिस्तान में खजूर के बागों की श्रंखला बना दी और उसे लोगों के लिए वक्फ कर दिया हज़रत अली दुनिया के पहले इंसान हैं जिन्हें आत्मघाती आतंकवादी हमले के जरिए शहीद किया गया।

कार्यक्रम का आग़ाज़ हाफिज मोहम्मद हुसैन शेरानी ने क़ुरआन पाक की तिलावत से किया और निज़ामत की ज़िम्मेदारी मौलाना अंजर अल्वी ने निभाई, जनाब सुहैल रिज़वी  ने भी अपने विचार रखे, सभा के अंत में हज़रत अली की नज़र हुईं और मुल्क एवम दुनिया में शांति की दुआ की गई।

इस्लाम ने दिया दुनिया को लेडीज़ फर्स्ट का तसव्वुर : सय्यद मोहम्मद अशरफ

8 अप्रैल/ पश्चिम बंगाल
इस्लाम ने दिया दुनिया को लेडीज़ फर्स्ट का तस्व्वुर” यह बात वर्ल्ड सूफी फोरम व आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने बोर्ड की इस्लामपुर शाखा द्वारा आयोजित एकदिवसीय सेमिनार में बतौर मुख्य अतिथि बोलते हुए कही।
हज़रत ने कहा कि पूरे मुल्क में लोग प्रदर्शन कर रहे हैं, हमारी मां बहनों को भी सड़कों पर उतरना पड़ा है, कानून के खिलाफ जिसकी वजह हमारा दीन पर अमल न करना है, अल्लाह रब्बुल इज्जत तलाक़ को हलाल चीज़ों में सबसे ज़्यादा नापसंद फरमाता है तो फिर उसका इस्तेमाल छोटी छोटी बातों पर करना किस तरह सही हो सकता है, मुसलमान पर शराब हराम है और अक्सर मुसलमान शराब के नशे में तलाक़ दे रहे हैं और फिर मुफ्तियों के पास जाकर फतवा मांगते फिरते हैं, अगर मुसलमान अल्लाह के हुक्म पर अमल करे तो वह इस परेशानी से बच सकते हैं।
उन्होंने कहा, निकाह के वक़्त अगर काजी दूल्हा और दुल्हन दोनों को उनके हक बताए और शादी से एक महीना पहले से दोनों के घरवाले उन्हें शादीशुदा ज़िन्दगी गुजारने के इस्लामी तरीके जानने और समझने के लिए किसी जानकार आलिमे दीन से राबता करे तो इस परेशानी से बड़ी आसानी से बचा जा सकता है।
हज़रत ने कहा कि इस्लाम ने ही दुनिया को लेडीज फर्स्ट का तसव्वुर दिया है, वह भी सिर्फ तसव्वुर नहीं बल्कि इस पर अमल भी किया है, उसका सबसे पहला उदाहरण निकाह है जिसमें पहले लड़की की इजाज़त ली जाती है उसके बाद लड़के से पूछा जाता है, इतने अहम फैसले में इस्लाम ने लड़की को पहला हक दिया है।
यह इस्लाम ही है जिसने हमारी मां के कदमो में जन्नत रखी और हमारी बेटियों को हमारे लिए रहमत बना दिया, ऐसे में इस्लाम पर औरतों के साथ ज़ुल्म का इल्ज़ाम लगाना जहालत है, इसके सिवा कुछ भी नहीं, उन्होंने साफ कहा कि हमारी औरतों को भी दीन सीख कर उस पर मजबूती से अमल करना चाहिए, औरतों की भी ज़िम्मेदारी है समाज को बुराइयों से बचाने की।

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यूनुस मोहानी

नबी का फरमान: जिससे लोग भलाई की उम्मीद न रख पाएँ वह सबसे बुरा इंसान : सय्यद मोहम्मद अशरफ

12 मार्च /सूरतगढ़ गंगानगर

नबी का फरमान जिससे लोग भलाई की उम्मीद न रख पाएँ वह सबसे बुरा इंसान” यह बात वर्ल्ड सूफी फोरम और आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड के संस्थापक व अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने एक जलसे को ख़िताब करते हुए कही.
उन्होंने कहा कि रसूले खुदा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया कि जिस शख्स से लोगों को भलाई की उम्मीद न हो और उसके शर से महफूज़ न हो वह बदतरीन शख्स है. हज़रत ने कहा कि फरमाने नबी यह भी है कि तुम में सबसे बेहतर वह है जो लोगों के काम आए और उनकी भलाई करे तो अब हमें इस पर अमल करना होगा.
उन्होंने कहा कि यहाँ कहीं मज़हब की बात नहीं की गई बल्कि सबके लिए कहा गया है, अगर हम मोहब्बत का दावा करते हैं तो हमें भला बनना होगा न कि बदतरीन और हमारे भला बन जाने से अमन खुद बखुद कायम हो जाऐगा.
उन्होंने कहा, इसी तालीम को औलिया अल्लाह ने आम किया और इस पर अमल कर के लोगों के दिलों को जीत लिया, यही वजह है कि आज भी लोग उनकी मज़ारों पर अकीदत के फूल लेकर आते हैं और दामने मुराद भर भर कर ले जाते हैं. हजरत ख्वाजा गरीब नवाज़ रहमतुल्लाहि अलैहि का कौल कि अपने दुश्मन से मेहरबानी से पेश आना और उसका ख्याल रखना नफस की जीनत में से एक है, साफ़ इसी हदीस की तरफ इशारा करता है, हमें इस पर अमल करना है तभी हम कामयाब हो सकते हैं.

By: यूनुस मोहानी

मंदिर मस्जिद तलाक नहीं ,समस्या है अशिक्षा बेरोज़गारी और गरीबी : सय्यद मोहम्मद अशरफ

12 मार्च /उदयपुर
मंदिर, मस्जिद तलाक़ नहीं समस्या है अशिक्षा बेरोज़गारी और गरीबी: यह विचार वर्ल्ड सूफी फोरम और आल इंडिया उलमा व माशाइख़ बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने उदयपुर में एक सभा को संबोधित करते हुए रखे.
उन्होंने कहा कि मुल्क में रहने वाले मुसलमानों में सबसे कम तलाक होता है, ऐसा अब तक किये गए तमाम सर्वे बताते हैं तो फिर यह राष्ट्रीय समस्या नहीं हो सकती लेकिन मुसलमानों को भी अपने आप में सुधार करना होगा सिर्फ शरियत बचाने का नारा लगाने से कुछ नहीं होगा बल्कि शरियत को जानकर उसपर अमल करना होगा यह तलाक का मुद्दा ही खतम हो जायेगा. अभी लोग अपनी अज्ञानता के चलते कई बार गलती कर रहे हैं जिसे नहीं किया जाना चाहिए.
हज़रत ने कहा कि इसी तरह मंदिर और मस्जिद भी कोई समस्या नहीं है मामला कोर्ट में है जो फैसला आएगा हो जायेगा इसको लेकर भी देश में कोई हंगामा नहीं होना चाहिए और न ही लोगों का वक़्त इस मुद्दे पर बर्बाद किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा, देश की सबसे बड़ी परेशानी बेरोजगार नौजवानों की बढती हुई फ़ौज है जो निरंतर अवसाद में ग्रस्त होती जा रही है, सरकार को इसकी फ़िक्र करनी चाहिए, यदि इस पर जल्दी गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो देश का बड़ा नुक्सान होगा.
अशिक्षा एक गंभीर मुद्दा है जहाँ सर्व शिक्षा अभियान पर इतना पैसा ख़र्च हो रहा है, वहीँ इसका कोई प्रभाव नहीं दिख रहा, लोगों को सही शिक्षा मिले इसका प्रबंध किया जाए और गरीबों के हित में काम किया जाए, शिक्षित लोग रोज़गार प्राप्त करेंगे तो गरीबी खुद बखुद खतम हो जाएगी, इसपर ध्यान दिया जाना चाहिए.
हज़रत यहाँ अपने एक दिवसीय दौरे पर आए हुए थे, इस अवसर पर उन्होंने इस्लाम के पहले खलीफा का ज़िक्र करते हुए बताया कि आज हज़रत अबु बकर सिद्दीक़ रज़ी अल्लाहु अन्हू के विसाल का दिन है, उनकी सीरत पर प्रकाश डालते हुए हज़रत ने कहा कि हमें अपने नबी से वैसे मोहब्बत करनी चाहिए जैसे हज़रत अबु बकर सिद्दीक़ रज़ी अल्लाहु अन्हू ने की.

By : यूनुस मोहानी

दशमलव 5 फीसदी औरतों की नहीं हुकूमत पूरे 5 फ़ीसदी औरतों की फ़िक्र करे : सय्यद मोहम्मद अशरफ

10 मार्च /मालेगांव , .5 फीसदी औरतों की नहीं हुकूमत 5 फ़ीसदी औरतों की फ़िक्र करे “यह बात वर्ल्ड सूफी फोरम एवं आल इंडिया उलेमा व मशाइख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने मालेगांव में आयोजित तह्फ्फुज़े शरियत व सूफी कांफ्रेंस में बोलते हुए कही .

उन्होंने कहा कि मुसलमानों को चाहिए कि वह इल्म हासिल करें और शरियत पर अमल करें ताकि किसी तरह की कोई परेशानी न हो सिर्फ तहफ्फुज़े शरियत का नारा लगाने से कुछ नहीं होगा .हज़रत ने कहा कि शरियत यानि इस्लामी कानून इंसान की हिफाज़त के लिए है ताकि वह ज़ुल्म से बचा रहे आखिर यह हालत कैसे आ गए कि हम शरियत बचाने के लिए आज कोशिश कर रहे हैं ?हमें इस बात पर गौर करना चाहिए अगर हमने शरियत पर अमल किया होता तो यह हालात नहीं आते .

तलाक को लेकर जिस तरह बवाल मचा है और कानून बनाने की कवायद चल रही है वह भी हमारी अपनी कमियों की वजह से हुआ है जिस अमल को अल्लाह और अल्लाह के रसूल ने सख्त नपसंद किया है उसपर अमल किया जाता है तो तकलीफ होनी ही है हमें चाहिए हम अपने अल्लाह को राज़ी करें .

उन्होंने कहा कि अगर सरकार वाकई में मुसलमान औरतों की फ़िक्र कर रही है तो तलाक पर कानून बनाने से तो महज़ .5 %मुस्लिम औरतों का ही भला होगा और अगर आर्टिकल 341 से प्रतिबन्ध हटा लिया जाये तो 5 % मुस्लिम औरतों को फायेदा होगा अगर हक ही देना है तो 341 से प्रतिबन्ध हटा लिया जाना चाहिए क्योंकि तभी सबका साथ सबका विकास मुमकिन होगा .

आल इंडिया उलेमा व मशाइख बोर्ड यूथ के राष्ट्रिय अध्यक्ष मौलाना सय्यद आलमगीर अशरफ किछौछवी ने कहा कि युवाओं को चाहिए कि खुद तालीम हासिल करें और अपने छोटों को मदद करें सूफिया की तालीमात को पढ़ें भी और उस पर अमल भी करें क्योंकि देश में जिस तरह के हालात बनाने की कोशिश की जा रही है उसे सूफिया की मोहब्बत भारी तालीम से ही रोका जा सकता है.

By: Yunus Mohani

सारी मखलूक़ रब का कुंबा लेकिन एक ख़ुदा को मानने वाले एक नहीं : सय्यद आलमगीर अशरफ

5 मार्च/ नागपुर
सारी मखलूक रब का कुंबा लेकिन एक खुदा को मानने वाले एक नहीं, आल इंडिया उलेमा व मशायख बोर्ड (यूथ) के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सय्यद आलमगीर अशरफ ने यह बात बोर्ड की यूथ विंग की तरफ से चल रहे चार रोज़ा कार्यक्रम के समापन के मौके पर बोलते हुए कही।
उन्होंने कहा कि मुसलमान आपस में मसलक, मशरब में बटे हुए हैं और हालात इतने खराब हो गए हैं कि यह देख रहे हैं जिनपर ज़ुल्म हो रहा है वह हमारे मसलक या मशरब का है कि नहीं जबकि न सिर्फ सारे इंसान बल्कि सारी रचनाएं उस पालनहार का कुनबा है ।
मुसलमानों को शिक्षा पर खास ध्यान देते हुए अपने हालात को बेहतर करने की कोशिश करनी चाहिए और इसके लिए इत्तेहाद वक़्त की सबसे बड़ी जरूरत है आल इन्डिया उलेमा व मशायख बोर्ड लगातार सूफिया के तरीके पर चलते हुए सभी तक मोहब्बत का पैगाम आम कर रहा है युवाओं को इससे जुड़ कर काम को और गति देनी होगी।
मौलाना ने श्री श्री रविशंकर के बयान की निन्दा करते हुए कहा कि संतो की ज़बान ऐसी नहीं होती उनके यहां तो मोहब्बत की भाषा बोली जाती है। सरकार से मौलाना ने मांग करते हुए कहा कि इस प्रकार की बयानबाज़ी करने वालों पर लगाम लगाई जानी चाहिए।
मौलाना अशरफ ने कहा कि मजलूम कोई भी हो हमें उसके साथ खड़े होना है सीरिया में हालात खराब है सबको वहां के रहने वालों के लिए दुआ करनी चाहिए।
आल इंडिया उलेमा व मशायख बोर्ड यूथ जरिए यह प्रोग्राम महबूब नगर , अंसार नगर,धोबिनगर,तकिया दीवान शाह,में संपन्न हुआ इसको सफल बनाने में मुख्य रूप से हाफ़िज़ अख़्तर आलम अशरफी,सूफी असलम क़ादरी , एजाज अशरफी, गुड च्वाइस टेलर, शेख़ जावेद , नब्बू अशरफी , आसिफ अशरफी , आकिब कलाम भाई,मोहम्मद हुसैन , तौसीफ अशरफी, ख्वाजा मोइनुद्दीन, अबुजर अशरफी, नूरुद्दीन अशरफी सहित बड़ी तादाद में युवाओं ने मेहनत की।
प्रोग्राम के समापन पर दरगाह हज़रत बाबा ताजुद्दीन रहमतुल्लाह की दरगाह पर सीरिया सहित संसार में जहां भी इंसानियत परेशान है उनके लिए खास दुआ की गई।

By: Yunus Mohani

नबी ने बताया पाकी आधा ईमान ,यही है स्वच्छता अभियान : सय्यद मोहम्मद अशरफ

सम्भल/ 22 फरवरी
नबी ने बताया पाकी आधा ईमान , यही है स्वच्छता अभियान ” यह बात आल इन्डिया उलमा व मशाइख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने सम्भल में एक जलसे को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि नबी सारे आलम के लिए रहमत हैं और पैग़म्बरे अमन ने पाकी को आधा ईमान कहा, यहां पाकी का सम्बन्ध सिर्फ जिस्म की पाकी से नहीं है बल्कि रूह की पाकी से है, हमें सिर्फ अपना जिस्म पाक नहीं रखना है, अपना घर, अपनी गली, अपना मोहल्ला, अपना शहर, अपना मुल्क सब पाक और साफ रखना है, क्योंकि पाकी आधा ईमान है, तो हर आशिके रसूल अगर यह ज़िम्मेदारी उठा लेगा तो हर जगह सफाई नज़र आएगी।
नबी- ए- रहमत ने आज से लगभग 1400 साल पहले हमें स्वछछता अभियान में लगा दिया जो इतना बड़ा है जिसमें सिर्फ बाहर की गन्दगी साफ नहीं होती है बल्कि अंदर की गन्दगी भी साफ हो जाती है, सिर्फ नजर आने वाली नहीं बल्कि जो आत्मा पर,दिल पर धूल और मैल जमा है उसे भी साफ करने की बात कही गई।
हज़रत ने कहा हमें अपने नबी की हर बात को मानना फ़र्ज़ है अगर हम खुद को उनका उम्मती कहते हैं तो अमल से भी हमें दिखाना होगा ।
हज़रत किछौछवी ने कहा कि इस पैगाम को मुल्क की सतह पर नहीं बल्कि इमान की सतह पर देखा जाना चाहिए।
हज़रत ने कहा, स्वच्छता अभियान का मतलब सिर्फ कूड़ा साफ करना नहीं है याद रखिए अगर नफरत जैसी गन्दगी दिलों से साफ नहीं की गई तो किसी तरह की सफाई का कोई मतलब नहीं है और नबी ने मोहब्बत से नफरत को साफ करने का अमल हमें सिखाया है यही बात गरीब नवाज़ ने लोगो तक पहुंचाई “मोहब्बत सबके लिए नफरत किसी से नहीं “यही मकसद है स्वच्छता अभियान का अगर नफरत पनपती रही तो नुक़सान तय है।