इस्लाम ने दिया दुनिया को लेडीज़ फर्स्ट का तसव्वुर : सय्यद मोहम्मद अशरफ

8 अप्रैल/ पश्चिम बंगाल
इस्लाम ने दिया दुनिया को लेडीज़ फर्स्ट का तस्व्वुर” यह बात वर्ल्ड सूफी फोरम व आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने बोर्ड की इस्लामपुर शाखा द्वारा आयोजित एकदिवसीय सेमिनार में बतौर मुख्य अतिथि बोलते हुए कही।
हज़रत ने कहा कि पूरे मुल्क में लोग प्रदर्शन कर रहे हैं, हमारी मां बहनों को भी सड़कों पर उतरना पड़ा है, कानून के खिलाफ जिसकी वजह हमारा दीन पर अमल न करना है, अल्लाह रब्बुल इज्जत तलाक़ को हलाल चीज़ों में सबसे ज़्यादा नापसंद फरमाता है तो फिर उसका इस्तेमाल छोटी छोटी बातों पर करना किस तरह सही हो सकता है, मुसलमान पर शराब हराम है और अक्सर मुसलमान शराब के नशे में तलाक़ दे रहे हैं और फिर मुफ्तियों के पास जाकर फतवा मांगते फिरते हैं, अगर मुसलमान अल्लाह के हुक्म पर अमल करे तो वह इस परेशानी से बच सकते हैं।
उन्होंने कहा, निकाह के वक़्त अगर काजी दूल्हा और दुल्हन दोनों को उनके हक बताए और शादी से एक महीना पहले से दोनों के घरवाले उन्हें शादीशुदा ज़िन्दगी गुजारने के इस्लामी तरीके जानने और समझने के लिए किसी जानकार आलिमे दीन से राबता करे तो इस परेशानी से बड़ी आसानी से बचा जा सकता है।
हज़रत ने कहा कि इस्लाम ने ही दुनिया को लेडीज फर्स्ट का तसव्वुर दिया है, वह भी सिर्फ तसव्वुर नहीं बल्कि इस पर अमल भी किया है, उसका सबसे पहला उदाहरण निकाह है जिसमें पहले लड़की की इजाज़त ली जाती है उसके बाद लड़के से पूछा जाता है, इतने अहम फैसले में इस्लाम ने लड़की को पहला हक दिया है।
यह इस्लाम ही है जिसने हमारी मां के कदमो में जन्नत रखी और हमारी बेटियों को हमारे लिए रहमत बना दिया, ऐसे में इस्लाम पर औरतों के साथ ज़ुल्म का इल्ज़ाम लगाना जहालत है, इसके सिवा कुछ भी नहीं, उन्होंने साफ कहा कि हमारी औरतों को भी दीन सीख कर उस पर मजबूती से अमल करना चाहिए, औरतों की भी ज़िम्मेदारी है समाज को बुराइयों से बचाने की।

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यूनुस मोहानी

नबी का फरमान: जिससे लोग भलाई की उम्मीद न रख पाएँ वह सबसे बुरा इंसान : सय्यद मोहम्मद अशरफ

12 मार्च /सूरतगढ़ गंगानगर

नबी का फरमान जिससे लोग भलाई की उम्मीद न रख पाएँ वह सबसे बुरा इंसान” यह बात वर्ल्ड सूफी फोरम और आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड के संस्थापक व अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने एक जलसे को ख़िताब करते हुए कही.
उन्होंने कहा कि रसूले खुदा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया कि जिस शख्स से लोगों को भलाई की उम्मीद न हो और उसके शर से महफूज़ न हो वह बदतरीन शख्स है. हज़रत ने कहा कि फरमाने नबी यह भी है कि तुम में सबसे बेहतर वह है जो लोगों के काम आए और उनकी भलाई करे तो अब हमें इस पर अमल करना होगा.
उन्होंने कहा कि यहाँ कहीं मज़हब की बात नहीं की गई बल्कि सबके लिए कहा गया है, अगर हम मोहब्बत का दावा करते हैं तो हमें भला बनना होगा न कि बदतरीन और हमारे भला बन जाने से अमन खुद बखुद कायम हो जाऐगा.
उन्होंने कहा, इसी तालीम को औलिया अल्लाह ने आम किया और इस पर अमल कर के लोगों के दिलों को जीत लिया, यही वजह है कि आज भी लोग उनकी मज़ारों पर अकीदत के फूल लेकर आते हैं और दामने मुराद भर भर कर ले जाते हैं. हजरत ख्वाजा गरीब नवाज़ रहमतुल्लाहि अलैहि का कौल कि अपने दुश्मन से मेहरबानी से पेश आना और उसका ख्याल रखना नफस की जीनत में से एक है, साफ़ इसी हदीस की तरफ इशारा करता है, हमें इस पर अमल करना है तभी हम कामयाब हो सकते हैं.

By: यूनुस मोहानी

मंदिर मस्जिद तलाक नहीं ,समस्या है अशिक्षा बेरोज़गारी और गरीबी : सय्यद मोहम्मद अशरफ

12 मार्च /उदयपुर
मंदिर, मस्जिद तलाक़ नहीं समस्या है अशिक्षा बेरोज़गारी और गरीबी: यह विचार वर्ल्ड सूफी फोरम और आल इंडिया उलमा व माशाइख़ बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने उदयपुर में एक सभा को संबोधित करते हुए रखे.
उन्होंने कहा कि मुल्क में रहने वाले मुसलमानों में सबसे कम तलाक होता है, ऐसा अब तक किये गए तमाम सर्वे बताते हैं तो फिर यह राष्ट्रीय समस्या नहीं हो सकती लेकिन मुसलमानों को भी अपने आप में सुधार करना होगा सिर्फ शरियत बचाने का नारा लगाने से कुछ नहीं होगा बल्कि शरियत को जानकर उसपर अमल करना होगा यह तलाक का मुद्दा ही खतम हो जायेगा. अभी लोग अपनी अज्ञानता के चलते कई बार गलती कर रहे हैं जिसे नहीं किया जाना चाहिए.
हज़रत ने कहा कि इसी तरह मंदिर और मस्जिद भी कोई समस्या नहीं है मामला कोर्ट में है जो फैसला आएगा हो जायेगा इसको लेकर भी देश में कोई हंगामा नहीं होना चाहिए और न ही लोगों का वक़्त इस मुद्दे पर बर्बाद किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा, देश की सबसे बड़ी परेशानी बेरोजगार नौजवानों की बढती हुई फ़ौज है जो निरंतर अवसाद में ग्रस्त होती जा रही है, सरकार को इसकी फ़िक्र करनी चाहिए, यदि इस पर जल्दी गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो देश का बड़ा नुक्सान होगा.
अशिक्षा एक गंभीर मुद्दा है जहाँ सर्व शिक्षा अभियान पर इतना पैसा ख़र्च हो रहा है, वहीँ इसका कोई प्रभाव नहीं दिख रहा, लोगों को सही शिक्षा मिले इसका प्रबंध किया जाए और गरीबों के हित में काम किया जाए, शिक्षित लोग रोज़गार प्राप्त करेंगे तो गरीबी खुद बखुद खतम हो जाएगी, इसपर ध्यान दिया जाना चाहिए.
हज़रत यहाँ अपने एक दिवसीय दौरे पर आए हुए थे, इस अवसर पर उन्होंने इस्लाम के पहले खलीफा का ज़िक्र करते हुए बताया कि आज हज़रत अबु बकर सिद्दीक़ रज़ी अल्लाहु अन्हू के विसाल का दिन है, उनकी सीरत पर प्रकाश डालते हुए हज़रत ने कहा कि हमें अपने नबी से वैसे मोहब्बत करनी चाहिए जैसे हज़रत अबु बकर सिद्दीक़ रज़ी अल्लाहु अन्हू ने की.

By : यूनुस मोहानी

दशमलव 5 फीसदी औरतों की नहीं हुकूमत पूरे 5 फ़ीसदी औरतों की फ़िक्र करे : सय्यद मोहम्मद अशरफ

10 मार्च /मालेगांव , .5 फीसदी औरतों की नहीं हुकूमत 5 फ़ीसदी औरतों की फ़िक्र करे “यह बात वर्ल्ड सूफी फोरम एवं आल इंडिया उलेमा व मशाइख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने मालेगांव में आयोजित तह्फ्फुज़े शरियत व सूफी कांफ्रेंस में बोलते हुए कही .

उन्होंने कहा कि मुसलमानों को चाहिए कि वह इल्म हासिल करें और शरियत पर अमल करें ताकि किसी तरह की कोई परेशानी न हो सिर्फ तहफ्फुज़े शरियत का नारा लगाने से कुछ नहीं होगा .हज़रत ने कहा कि शरियत यानि इस्लामी कानून इंसान की हिफाज़त के लिए है ताकि वह ज़ुल्म से बचा रहे आखिर यह हालत कैसे आ गए कि हम शरियत बचाने के लिए आज कोशिश कर रहे हैं ?हमें इस बात पर गौर करना चाहिए अगर हमने शरियत पर अमल किया होता तो यह हालात नहीं आते .

तलाक को लेकर जिस तरह बवाल मचा है और कानून बनाने की कवायद चल रही है वह भी हमारी अपनी कमियों की वजह से हुआ है जिस अमल को अल्लाह और अल्लाह के रसूल ने सख्त नपसंद किया है उसपर अमल किया जाता है तो तकलीफ होनी ही है हमें चाहिए हम अपने अल्लाह को राज़ी करें .

उन्होंने कहा कि अगर सरकार वाकई में मुसलमान औरतों की फ़िक्र कर रही है तो तलाक पर कानून बनाने से तो महज़ .5 %मुस्लिम औरतों का ही भला होगा और अगर आर्टिकल 341 से प्रतिबन्ध हटा लिया जाये तो 5 % मुस्लिम औरतों को फायेदा होगा अगर हक ही देना है तो 341 से प्रतिबन्ध हटा लिया जाना चाहिए क्योंकि तभी सबका साथ सबका विकास मुमकिन होगा .

आल इंडिया उलेमा व मशाइख बोर्ड यूथ के राष्ट्रिय अध्यक्ष मौलाना सय्यद आलमगीर अशरफ किछौछवी ने कहा कि युवाओं को चाहिए कि खुद तालीम हासिल करें और अपने छोटों को मदद करें सूफिया की तालीमात को पढ़ें भी और उस पर अमल भी करें क्योंकि देश में जिस तरह के हालात बनाने की कोशिश की जा रही है उसे सूफिया की मोहब्बत भारी तालीम से ही रोका जा सकता है.

By: Yunus Mohani

सारी मखलूक़ रब का कुंबा लेकिन एक ख़ुदा को मानने वाले एक नहीं : सय्यद आलमगीर अशरफ

5 मार्च/ नागपुर
सारी मखलूक रब का कुंबा लेकिन एक खुदा को मानने वाले एक नहीं, आल इंडिया उलेमा व मशायख बोर्ड (यूथ) के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सय्यद आलमगीर अशरफ ने यह बात बोर्ड की यूथ विंग की तरफ से चल रहे चार रोज़ा कार्यक्रम के समापन के मौके पर बोलते हुए कही।
उन्होंने कहा कि मुसलमान आपस में मसलक, मशरब में बटे हुए हैं और हालात इतने खराब हो गए हैं कि यह देख रहे हैं जिनपर ज़ुल्म हो रहा है वह हमारे मसलक या मशरब का है कि नहीं जबकि न सिर्फ सारे इंसान बल्कि सारी रचनाएं उस पालनहार का कुनबा है ।
मुसलमानों को शिक्षा पर खास ध्यान देते हुए अपने हालात को बेहतर करने की कोशिश करनी चाहिए और इसके लिए इत्तेहाद वक़्त की सबसे बड़ी जरूरत है आल इन्डिया उलेमा व मशायख बोर्ड लगातार सूफिया के तरीके पर चलते हुए सभी तक मोहब्बत का पैगाम आम कर रहा है युवाओं को इससे जुड़ कर काम को और गति देनी होगी।
मौलाना ने श्री श्री रविशंकर के बयान की निन्दा करते हुए कहा कि संतो की ज़बान ऐसी नहीं होती उनके यहां तो मोहब्बत की भाषा बोली जाती है। सरकार से मौलाना ने मांग करते हुए कहा कि इस प्रकार की बयानबाज़ी करने वालों पर लगाम लगाई जानी चाहिए।
मौलाना अशरफ ने कहा कि मजलूम कोई भी हो हमें उसके साथ खड़े होना है सीरिया में हालात खराब है सबको वहां के रहने वालों के लिए दुआ करनी चाहिए।
आल इंडिया उलेमा व मशायख बोर्ड यूथ जरिए यह प्रोग्राम महबूब नगर , अंसार नगर,धोबिनगर,तकिया दीवान शाह,में संपन्न हुआ इसको सफल बनाने में मुख्य रूप से हाफ़िज़ अख़्तर आलम अशरफी,सूफी असलम क़ादरी , एजाज अशरफी, गुड च्वाइस टेलर, शेख़ जावेद , नब्बू अशरफी , आसिफ अशरफी , आकिब कलाम भाई,मोहम्मद हुसैन , तौसीफ अशरफी, ख्वाजा मोइनुद्दीन, अबुजर अशरफी, नूरुद्दीन अशरफी सहित बड़ी तादाद में युवाओं ने मेहनत की।
प्रोग्राम के समापन पर दरगाह हज़रत बाबा ताजुद्दीन रहमतुल्लाह की दरगाह पर सीरिया सहित संसार में जहां भी इंसानियत परेशान है उनके लिए खास दुआ की गई।

By: Yunus Mohani

नबी ने बताया पाकी आधा ईमान ,यही है स्वच्छता अभियान : सय्यद मोहम्मद अशरफ

सम्भल/ 22 फरवरी
नबी ने बताया पाकी आधा ईमान , यही है स्वच्छता अभियान ” यह बात आल इन्डिया उलमा व मशाइख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने सम्भल में एक जलसे को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि नबी सारे आलम के लिए रहमत हैं और पैग़म्बरे अमन ने पाकी को आधा ईमान कहा, यहां पाकी का सम्बन्ध सिर्फ जिस्म की पाकी से नहीं है बल्कि रूह की पाकी से है, हमें सिर्फ अपना जिस्म पाक नहीं रखना है, अपना घर, अपनी गली, अपना मोहल्ला, अपना शहर, अपना मुल्क सब पाक और साफ रखना है, क्योंकि पाकी आधा ईमान है, तो हर आशिके रसूल अगर यह ज़िम्मेदारी उठा लेगा तो हर जगह सफाई नज़र आएगी।
नबी- ए- रहमत ने आज से लगभग 1400 साल पहले हमें स्वछछता अभियान में लगा दिया जो इतना बड़ा है जिसमें सिर्फ बाहर की गन्दगी साफ नहीं होती है बल्कि अंदर की गन्दगी भी साफ हो जाती है, सिर्फ नजर आने वाली नहीं बल्कि जो आत्मा पर,दिल पर धूल और मैल जमा है उसे भी साफ करने की बात कही गई।
हज़रत ने कहा हमें अपने नबी की हर बात को मानना फ़र्ज़ है अगर हम खुद को उनका उम्मती कहते हैं तो अमल से भी हमें दिखाना होगा ।
हज़रत किछौछवी ने कहा कि इस पैगाम को मुल्क की सतह पर नहीं बल्कि इमान की सतह पर देखा जाना चाहिए।
हज़रत ने कहा, स्वच्छता अभियान का मतलब सिर्फ कूड़ा साफ करना नहीं है याद रखिए अगर नफरत जैसी गन्दगी दिलों से साफ नहीं की गई तो किसी तरह की सफाई का कोई मतलब नहीं है और नबी ने मोहब्बत से नफरत को साफ करने का अमल हमें सिखाया है यही बात गरीब नवाज़ ने लोगो तक पहुंचाई “मोहब्बत सबके लिए नफरत किसी से नहीं “यही मकसद है स्वच्छता अभियान का अगर नफरत पनपती रही तो नुक़सान तय है।

बटला हाउस: मस्जिद खलीलुल्लाह के सेहन में फेहराया गया तिरंगा

नई दिल्ली, 26 जनवरी
गणतंत्र दिवस के अवसर पर आल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड के संस्थापक व राष्ट्रिय अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ कछोछवी ने मस्जिद खलीलुल्लाह, बटला हाउस, ओखला के सेहन में झंडा फहराया। बोर्ड ने यह घोषणा की थी कि वह दरगाह और मस्जिद में तिरंगा लहराएगा क्योंकि मुसलमान देश से प्रेम करने वाला है और उसे अपने देश के झंडे से भी बेपनाह मोहब्बत है। मुसलमान जब भारत से हज के लिए जाता है तो वहाँ उसकी पहचान तिरंगा है, हम तो वहाँ भी तिरंगा लहराते हैं मस्जिद और दरगाहों में क्यों नहीं लहराएँगे।
सय्यद मोहम्मद अशरफ कछोछवी ने इस मौके पर कहा कि देश के संविधान की रक्षा के लिए अपनी कोशिश करनी है और इसका तरीका कानून का पालन करते हुए देश के विकास में अपना योगदान करना है।
मस्जिद खलीलुल्लाह में यह ध्वज आरोहण का कार्यक्रम आल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड के साथ ईद मिलादुन्नबी वेलफेयर सोसायटी, अहले सुन्नत अकैडमी, जामिया हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया, जामिया कादरया और अल नवाज़ रेस्टोरेंट के सहयोग से हुआ।
इस अवसर पर मौलाना अब्दुल मोईद अज़हरी, मौलाना याकूब, मौलाना ज़फरुद्दीन बरकाती और रियाज़ के अलावा बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया।

हज सब्सिडी को ख़तम करके राजनैतिक लाभ उठाने की कोशिश : सय्यद मोहम्मद अशरफ

इंदौर /16 जनवरी
हज सब्सिडी पूरी तरह से खतम करके राजनैतिक लाभ लेने की कोशिश की जा रही है. यह बात आल इन्डिया उलेमा व मशायख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने एक जलसे खिताब करते हुए कही,हज़रत ने कहा कि अगर सरकार सब्सिडी नहीं दे रही तो फिर खुले तौर पर एयरलाइन्स और होटल वगैरह के लिए टेंडर आमंत्रित करे लोगों को एयरइंडिया से ही महंगा सफर न करना पड़े ।
उन्होंने कहा अगर ऐसा ईमानदारी से किया जाता है तो हज सफर सस्ता होगा और ज़्यादा सुविधाजनक भी ।यह फैसला एक नजर में राजनैतिक लाभ लेने के लिए लिया गया प्रतीत हो रहा है सरकार को अपनी नीति को सामने लाना चाहिए वैसे भी मुसलमान हज पर अपनी हलाल कमाई को खर्च करके ही जाते हैं इससे हाजियों की संख्या पर फर्क नहीं पड़ेगा लेकिन उनको खर्च करना पड़ेगा सरकार को अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए ।
हज़रत ने कहा कि सब्सिडी को खतम करने के निर्णय को नफरत के लिए प्रयोग न किया जाय यह याद रखना होगा कि देश सभी का है और हम सबको मोहब्बत से मिलजुल कर इसे आगे बढ़ाने में सहयोग भी करना है लेकिन हुकूमत को भी सोचना होगा कि इस तरह के फैसलों का राजनीतिक इस्तेमाल न किया जाए।
मुसलमान सच्चर कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद आज तक रंगनाथ मिश्र कमेटी की सिफारिशें लागू किए जाने का इंतजार कर रहे हैं लेकिन उसे लागू न करके इस तरह के फैसलों से असंतोष पैदा किया जा रहा है जो उचित नहीं है भारत के सभी नागरिकों के हित के लिए सरकार को काम करना चाहिए।

By: यूनुस मोहानी

मज़लूमों पर ज़ुल्म करने वालों से खतरनाक है हाथ मिलाना : सय्यद मोहम्मद अशरफ

15 जनवरी/इंदौर “मजलूमों पर ज़ुल्म करने वालों से खतरनाक है हाथ मिलाना” यह बात आल इन्डिया उलेमा व मशायख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने इंदौर में जलसे को खिताब करते हुए कही ।उन्होंने कहा ज़ालिम की हिमायत भी ज़ुल्म है ,पूरी दुनिया आतंकवाद के खतरे से दो चार है ऐसे में ज़ालिम को साथ लेकर उसे ख़तम करने की बात बेईमानी है।
हज़रत ने कहा जिस तरह की खबरें ,फोटो और वीडियो फिलिस्तीनियों पर इजरायल के ज़ुल्म के देखने और सुनने के मिलते है वह इंसानियत को शर्मसार करते हैं जो निंदनीय है उन्होंने कहा ऐसे में जब इजरायल के राष्ट्रध्यक्ष भारत दौरे पर आए हैं भारत को उनसे इस संबंध में बात करनी चाहिए और ज़ुल्म को रोकने के लिए कहना चाहिए।
हज़रत ने यह भी कहा कि भारत को इजरायल से व्यापार इसी शर्त पर करना चाहिए कि वह फिलिस्तीनियों पर ज़ुल्म रोके, क्योंकि भारत एक शांतिप्रिय देश है ,और हमारी नीति यहीं है कि हम ज़ालिम के साथ नहीं है। इंसानियत पर ज़ुल्म को मजहब , संप्रदाय , जाति के आधार पर नहीं देखा जा सकता, सभी इंसान हैं और उनके मानवाधिकारों का हनन अपराध है मानवता के प्रति।
हज़रत ने कहा कि हमें होश से काम लेना होगा जोश में आकर कोई ऐसा कदम नहीं उठाया जाना चाहिए जो नफरत को बढ़ावा दे क्योंकि इस्लाम की तालीम मोहब्बत है और हमारा फ़र्ज़ है कि हम उसपर अमल करें ।

By: यूनुस मोहानी

मुसलमान खुद हैं जिम्मेदार सुधार करें : सय्यद मोहम्मद अशरफ

7 जनवरी/ नई दिल्ली
मुसलमान खुद जिम्मेदार हैं सुधार करें यह बात हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया के उर्स के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए आल इंडिया उलेमा व मशायख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने मौजूदा समय में तीन तलाक़ को लेकर चल रही बहस पर कहीं ।
उन्होंने कहा मुसलमान खुद शरीयत पर अमल नहीं करते और इस आधार पर जब कहीं और से बात आती है तो परेशान हो जाते हैं यह हमारी अपनी कमजोरी है,सूफिया ने शरीयत को अपने अमल में ढाल कर पेश किया यही वजह है इनके आस्तानो पर हर मजहब के लोग अकीदत के फूल पेश करते नजर आते हैं हम खुद को अमल की बुनियाद पर सुधारने को तैयार नहीं हो रहे जिसकी वजह है कि जो शरीयत जानते है न इस्लाम वह रोज़ रोज़ नई नई तरह की बात उठा कर हमारे जज्बात को भड़काना चाहते हैं।
हज़रत ने कहा हमें होशियार रहना होगा अपने लोगों को जागरूक करना होगा,यह हमारी ज़िम्मेदारी है हमें होश से काम लेना है वरना याद रखिए हम खुद ही अपने घरों में आग लगाने वाले होंगे, नफरत को कामयाब होने दीजिए खुद को शरीयत पर अमल करने वाला बना लीजिए शरीयत का तहफ्फुज खुद बखुद होगया।
महफ़िल में दरगाह निज़ामुद्दीन औलिया के सज्जादानशीन हज़रत सय्यद अहमद अली निजामी, वली अहद दरगाह हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया सय्यद फरीद अहमद निजामी सहित काफी बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।समापन सलातो सलाम के बाद विश्वशांति की दुआ के साथ हुआ ।

By: YunusMohani