पैग़म्बर -ए-अमन की तालीम पर अमल से ही दुनिया में अमन मुमकिन : सय्यद मोहम्मद अशरफ

कोलकाता/1दिसंबर
पैग़म्बर –ए-अमन की तालीम पर अमल सेे ही दुनिया में अमन मुमकिन है, यह बात एक जश्ने ईद मिलादुन्नबी प्रोग्राम में शिरकत करने कोलकाता आए आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने कहीं। उन्होंने आक़ा अलैहिस्सलाम की एक हदीस बयान की ”तुम्हारे शर (उत्पीड़न)से अगर तुम्हारा पड़ोसी सुरक्षित नहीं है तो तुम मोमिन नहीं हो सकते” और कहा कि अगर पूरी दुनिया इस पर अमल कर ले तो पूरी दुनिया में अमन कायम हो सकता है, क्योंकि एक इंसान दूसरे इंसान का पड़ोसी है, इसी तरह एक मोहल्ला दूसरे मोहल्ले के, एक गांव दूसरे गांव का, शहर दूसरे शहर का, एक प्रदेश दूसरे प्रदेश का, एक देश दूसरे देश का, इस तरह पूरी दुनिया एक दूसरे की पड़ोसी है, लिहाज़ा न किसी फौज की ज़रूरत होगी, न सुरक्षा की, न हथियारों की और यह धन स्वास्थ्य और शिक्षा पर खर्च होगा और दुनिया में अमन क़ायम हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि सबलोग मिलकर आक़ा की यौमे मीलाद मनाएं, इस दिन को यौमे अमन के तौर पर मनाया जाये, लोग मज़लूमों, ग़रीबों,बीमारों और यतीमों की खूब मदद करें और मज़हब और संप्रदाय देखे बिना लोगों की मदद करते रहें।
उधर बोर्ड के ऐलान पर पूरे भारत में आज बोर्ड की यूनिट में वृक्षारोपण का कार्यक्रम संपन्न हुआ, इसी क्रम में महाराजगंज शाखा में भी वृक्षारोपण कार्यक्रम संपन्न हुआ. इस मौके पर मुख्य मोहम्मद इद्रीस अशरफ़ी, रफ़ीक़ अशरफ़ी, इम्तियाज कुरैशी, मोबीन अशरफ़ी, गुलाम रसूल, मोहम्मद सलीम, फरमान कुरैशी, रशीद मोहम्मद साहब और शमीम अशरफ़ी मौजूद रहे।

By: यूनुस मोहानी

मज़लूमों की मदद है आक़ा अलैहिस्सलाम की मीलाद मानने का तरीक़ा : सय्यद मोहम्मद अशरफ

पूना/30 नवंबर
मज़लूमों की मदद है आका अलैहिस्सलाम की मीलाद मनाने का एक तरीक़ा, यह बात आल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने पूना में आयोजित एक धर्मसभा में कहीं,हज़रत ने कहा कि मुस्तफा करीम सल्ललल्लाहू अलैहि वसल्लम की मीलाद से मज़लूमों को ज़ुल्म से निजात मिली, गुमराहियों के घनघोर अंधेरों से छुटकारा मिला और तौहीद की रोशनी नसीब हुई, जहां खुद से खुद पर किए जा रहे ज़ुल्म से इस तरह निजात मिली वहीं ज़ालिमों के ज़ुल्म से भी लोगों को आजादी मिली, औरतों, यतीमों, गरीबों और मिस्कीनो को इज्जत से ज़िन्दगी गुजारने की आज़ादी और अधिकार मिले, यानी आक़ा की मीलाद से मज़लूमों को ज़ुल्म से निजात मिली, लिहाज़ा हमें इसे यौमे अमन के तौर पर मनाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि बेहतर से बेहतर तरीक़े से हमें लोगों तक मदद पहुंचाना चाहिए, लोगों की ज़रूरतों का ख्याल रखा जाना चाहिए, यातीमों ,बेवाओं,गरीबों का ख्याल रखिए, बीमारों की अयादत कीजिए, महफ़िल सजाइए, लोगों में खाना बांटिए, दुरूद और सलाम की महफ़िल कीजिए, जुलूस निकालिये लेकिन ख्याल रहे कि यह रहमते आलम की मीलाद का जुलूस है, किसी को कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए, अपने घर और मोहल्ले को साफ सुथरा कीजिए और सबको इस जश्न में शामिल होने की दावत दीजिए।
हज़रत किछौछवी ने हरे झंडे के साथ हर मज़हबी जलसे जुलूस में मुल्क के झंडे तिरंगे को शामिल करने की अपील भी की। आल इंडिया उलमा व मशाइख़ बोर्ड के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य हज़रत अम्मार अहमद अहमदी उर्फ नय्यर मियां की सरपरस्ती में दिल्ली के जोघाबाई एक्सटेंशन पर गरीबों को गरम कपड़े बांटे, इस मौक़े पर बोर्ड के राष्ट्रीय सचिव सय्यद हसन जामी, यूनुस मोहानी ,मौलाना मुख्तार अशरफ, अंजर अल्वी मौजूद रहे। बोर्ड के ऐलान के मुताबिक बोर्ड की हर शाखा इस काम को कर रही है, बोर्ड के अध्यक्ष के ऐलान पर पूरे देश में मीलाद को यौमे अमन के तौर पर मनाया जा रहा है।
By: यूनुस मोहानी

कट्टरवाद इबादतगाहों में खून बहाता है इस्लाम में इसकी जगह नहीं – सय्यद अशरफ

26 नवम्बर /उदयपुर

कट्टरवाद इबादतगाहों में भी खून बहाता है, बेगुनाहों का खून बहाना हराम है, इसका इस्लाम में कोई स्थान नहीं है, यह बात आल इंडिया उलमा व मशाइख़ बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने मिस्र के अल आरिश के करीब अल रवादा की मस्जिद में लगभग 250 नमाज़ियों की हत्या किए जाने पर कहीं।
हज़रत ने कहा, कट्टरवाद एक ज़हर, है वह हर रूप में खतरनाक है, धार्मिक भ्रम में नफरत की फैक्ट्री का नाम ही आतंकवाद है, इसके लिए यह जरूरी नहीं कि इसे किस धर्म के नाम पर किया जा रहा है। हज़रत ने साफ तौर से कट्टरवादी आंदोलन की भर्त्सना करते हुए कहा कि इस प्रकार की विचारधारा का सभ्य समाज में कोइ स्थान नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हमारी सरकार को भी इससे सख्ती से निपटना चाहिए  क्योंकि धर्म के नाम पर हिंसा फैलाने वाले दरिंदे हैं, इन्हे अगर रोका नहीं गया तो शरीफ नागरिकों का जीना मुहाल हो जाएगा। आस्था के नाम पर नफरत का कारोबार ठीक नहीं, इसकी आड़ में देश को तोड़ने की साजिश को हम सब मिलकर नाकाम करें।
कट्टरवाद छद्म रूप धारण कर अमन वालों के भेष में आकर धोखा देने की साजिश भी कर रहा है. इसे समझना होगा, समय रहते यदि ऐसा नहीं किया गया तो परिणाम नुकसान देने वाले होंगे।लोगों को मिलकर मोहब्बत के पैग़ाम आम करना चाहिए।

By: Yunus Mohani

रोहित सरदाना देश से माफी माँगे : सय्यद मोहम्मद अशरफ

संभल/20 नवंबर

किसी की भी धार्मिक भावनाओं को आहत करना खुली दहशतगर्दी है, यह बात ऑल इण्डिया उलमा व मशाईख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने रोहित सरदाना द्वारा हज़रत फातिमा रज़ी अल्लाहु अन्हा  और उम्मुल मोमिनीन हज़रत आयशा रज़ी अल्लाहु अन्हा सहित हज़रत मरियम रज़ी अल्लाहु अन्हा की शान में गुस्ताखी करने पर कही।
उन्होंने कहा कि यह जो धर्मिक माफिया नफरत की सियासत करने के लिए घिनौनी भाषा शैली का प्रयोग कर समाज को नफरत की आग में झोंकने पर तुले हैं, यह मुल्क के और इंसानियत के दुश्मन हैं, इनसे हमारे देश को खतरा है ।किसी भी धर्म की आस्थाओं पर प्रहार हमारे बीच मोहब्बत को खत्म करने की घिनौनी साजिश है।
हज़रत ने कहा, यह वैचारिक दहशतगर्दी है जो बहुत खतरनाक है, भारत सरकार को इसकी रोकथाम के लिए मजबूत क़दम उठाने होंगे ।हज़रत ने मांग की कि हर हाल में रोहित सरदाना को देश से माफी मांगनी चाहिए क्योंकि उसने सिर्फ मुसलमानों की भावनाओं को आहत नहीं किया है बल्कि हिन्दू भाइयों और ईसाई समुदाय की भावनाओं को भी आहत किया है ,इनके द्वारा हिन्दू देवी का भी घोर अपमान किया गया है आखिर यह नफरत की राजनीति कब तक चलेगी।
हज़रत किछौछवी ने कहा, एक तरफ तालिबान और दाईश की विचारधारा है और एक तरफ कट्टरवाद की, दोनों में कोई फर्क नहीं है, दुनिया दोनों से ही खतरे में है, धर्म के नाम पर दहशत अब खुद को पत्रकार कहने वाले भी फैलाने पर तुल गए हैं ,मीडिया को ऐसे लोगों को चिन्हित कर बाहर का रास्ता दिखाने का वक़्त आ गया है क्योंकि देश को नफरतों की आग से बचाना है।

By: यूनुस मोहानी

इबादतगाहें शांति प्राप्त करने के लिए हैं लड़ाने का सामान नहीं: सय्यद मोहम्मद अशरफ

रत्नागिरी/15 नवम्बर

इबादतगाहें शांति प्राप्त करने के लिए हैं लड़ाने का सामान नहीं हैं इन विचारों को आल इंडिया उलमा व मशायिख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने एक जलसे को सम्बोधित करते हुए रखा उन्होंने कहा लोग दुनिया से ऊब कर सुकून हासिल करने के लिए इबादतगाहों का रुख करते हैं ताकि अपनी आत्मा को शांत कर सकें जो परवरदिगार की इबादत से ही मुमकिन है लेकिन अफ़सोस सियासत ने इबादतगाहों को लड़ाने का सामान बना दिया है उन्होंने यह बात मौजूदा समय में बाबरी मस्जिद और राम मंदिर विवाद को लेकर चल रही सरगर्मियों के सम्बन्ध में कही .

हज़रत ने कहा कि कभी कोई धर्म हिंसा की शिक्षा नहीं देता तो फिर धर्म के नाम पर हिंसक तांडव करने वाले यह लोग कौन हैं किसी भी हाल में इनका किसी भी मज़हब से सम्बन्ध नहीं हो सकता क्योंकि जो इंसान ही नहीं है उसका धर्म से क्या लेना देना धर्म आदमी को इंसान बनाता है और इस वक़्त समाज को इंसानों की ज़रूरत है हैवान सिर्फ विनाश कर सकते हैं हमे सचेत रहना होगा जो नफरत की बात करे उससे होशियार रहिये .

उन्होंने कहा देश तभी आगे बढ़ सकता है जब लोग डरे हुए न हों ,लोगों में मोहब्बत हो और एक साथ मिलकर काम करने का आगे बढ़ने का जुनून हो .सूफिया ने हमेशा जोड़ने का काम किया उन्होंने नफरतों को समाप्त कर मोहब्बत करने वालों का समाज बनाया यही वजह है आज भी उनके आस्तानो पर बिना धर्म-जाति के भेद के लोग आते हैं और अपनी अकीदतों के फूल चढाते हैं .

आज भी समाज को बिखराव से बचाने की ज़रूरत है हमे सियासत की गन्दी चालों से बचना होगा धर्मान्धता की अफीम के नशे में नहीं रहना होगा तभी हमारा सुरक्षित रहना संभव है .हज़रत ने साफ़ कहा कि इबादतगाहें मोहब्बतों को बढ़ावा देने के लिए हैं इन्हें नफरतों की गंदगी से बचा लीजिये और समाज में मोहब्बत सबके लिए नफरत किसी से नहीं के सन्देश को आम कीजिये .

मानवजीवन की रक्षा इबादतगाहों के विवाद से ज़्यादा ज़रूरी : सय्यद मोहम्मद अशरफ

लखनऊ/17 नवंबर

मानव जीवन की रक्षा इबादतगाहों के विवाद से ज़्यादा ज़रूरी है क्योंकि मानव जीवन बहुमूल्य है यह बात आल इंडिया उलमा व मशाईख़ बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने लख़नऊ में मीडिया से बाबरी मस्जिद को लेकर चल रहे घटनाक्रम के संबंध में कही. उन्होंने साफ कहा कि हम अगर धर्म की बात करते हैं तो धर्म यह कहता है कि किसी भी तरह बेगुनाहों के खून को बहने से बचाया जाए ।
हज़रत ने साफ कहा कि देश के सभी नागरिकों को न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और सभी को उसके निर्णय का सम्मान करना चाहिए. उन्होंने अदालत के बाहर समझौते के लिए चल रही कोशिशों पर कहा कि यह समझौता पक्षकारों के बीच ही संभव है अगर वह चाहतें है और कोई हल निकल सकता है जिससे मोहब्बत वाली फिज़ा  बनेगी तो ज़रूर होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि हम इस संबंध में पक्षकार नहीं हैं, हमारा काम सौहार्द को बनाने का है, प्रेम बांटने का है, सूफिया की तालीम को आम करते हुए लोगों के बीच मोहब्बत फैलाना है, क्योंकि अगर किसी बेगुनाह का खून बहा तो हम सब हार जाएंगे, क्योंकि इबादतगाह इबादत करने वालों के लिए हैं तो पहला कर्तव्य मानव जीवन की रक्षा है, उसे सांप्रदायिक विवादों से बाहर निकालना है।
हज़रत किछौछवी ने कहा, सूफी संतों  ने सदा जोड़ने का काम किया है, हम तोड़ने वालों के साथ नहीं हैं , लेकिन जोड़ने वालों के साथ हैं. हम यही पैग़ाम आपको भी देते हैं “मोहब्बत सबके लिए, नफरत किसी से नहीं” शांति का यही मंत्र है।

By: युनुस मोहानी

इमाम हसन को खलीफा ए राशिद न मानना ज़ुल्म: मौलाना इश्तियाक क़ादरी

लखनऊ 12 नवंबर

ऑल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड के प्रांतीय कार्यालय लखनऊ में ज़िक्रे शहादत इमाम हसन मुजतबा की एक महफ़िल सैयद हम्माद अशरफ (महासचिव AIUMB यूपी) की अध्यक्षता में आयोजित हुयी। महफ़िल को ख़िताब करते हुए मौलाना इश्तियाक अहमद (सदर AIUMB लखनऊ) ने कहा कि इमाम हसन सरदार हैं, आपने हज़रत अमीर मुआविया से सुलह कर अपने नानाजान हुज़ूर ﷺ के इस फरमान को अमलन पूरा किया कि मेरा यह बेटा सरदार है। मैं तुम्हें यक़ीन से बताता हूँ कि मेरा ये बेटा भविष्य में मुसलमानों के दो समूहों के बीच सुलह कराएगा और तफरका ख़त्म करके उम्मत को मुत्तहिद करेगा। हज़रत इमाम हसन ने खिलाफते राशिदा से दस्तबरदार होकर मुसलमानों के हक़ के लिए अज़ीम ईसार पेश किया।
मौलाना ने हदीस पैगंबर ” मेरी उम्मत में खिलाफत तीस साल तक रहेगी फिर बादशाहत हो जाएगी ” का हवाला देते हुए कहा कि हज़रत अबूबकर सिद्दीक़ रज़ियल्लाहु अन्हु की आग़ाज़े खिलाफत से लेकर हज़रत इमाम हसन अलैिस्सलाम के इख्तेतामे खिलाफत तक कुल तीस साल बनते हैं। खलीफा राशिदीन का जिक्र करते हुए युवा पीढ़ी को केवल चार खलीफा के बारे में बताना और पांचवें खलीफा राशिद अमीरुल मोमिनीन हज़रत इमाम हसन मुजतबा अलैहिस्सलाम और उनके दौरे खिलाफ़त को सिरे से नकारना सरासर ज़ुल्म है।
मौलाना आले रसूल अहमद ने इमाम हसन रज़ियल्लाहु अन्हु के मनाक़िब बयान करते हुए कहा कि हज़रत इमाम हसन सर से सीना तक और हज़रत इमाम हुसैन सीना से पैर तक हुज़ूर ﷺ की कामिल शबीह थे। आप ने मदीना से मक्का पैदल चलकर 25 हज अदा फरमाए।
हज़रत इमाम हसन बेहद सखी थे आपने दो मरतबा अपना सारा माल और तीन बार आधा माल राहे खुदा में खर्च फ़रमाया था।
महफ़िल में रमजान अली, मोहम्मद तौफ़ीक़, मोहम्मद असद, मोइन रज़ा, मोहम्मद हाशिम, मोहम्मद अहमद, शोएब अली, अब्दुल गनी, राजू वारसी, तारिक हुसैन, वसीम खान, मतीन बेग, मिहाजुल क़ुरान इंटरनेशनल, लखनऊ के ज़िम्मेदारों अलावा बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। महफ़िल का समापन सलाम और देश में अमन और खुशहाली की दुआ पर हुआ।

By: Yunus Mohani

آل انڈیا علماء ومشائخ بورڈ کے صوبائی دفتر،لکھنؤ میں اہم میٹنگ منعقد

لکھنؤ۔5نومبر پریس رلیز

آل انڈیا علماء ومشائخ بورڈ کے صوبائی دفتر لکھنؤ میں سید حماداشرف کچھوچھوی (جنرل سکریٹری یوپی) کی صدارت میں ایک اہم میٹنگ منعقد ہوئی جس میں میرٹھ،رائے بریلی،سلطانپور،امیٹھی،بریلی ،سدھارتھ نگر سمیت یوپی کے مختلف اضلاع کے ذمہ داروں نے شرکت کی۔میٹنگ کاآغاز تلاوت قرآن کریم سے ہوا۔جمال اشرف اورتوفیق رضانے نعت ومنقبت کے نذرانے پیش کئے۔
میٹنگ کوخطاب کرتے ہوئے ہوئے مولانا اشتیاق احمدنے کہاکہ صوفیائے کرام نے ہمیشہ بلاتفریق مذہب وملت خدمت خلق اورآپسی بھائی چارہ کا درس دیاہے۔صوفیائے کرام کی انہی تعلیمات کوعام کرنا اورسنی صوفی مسلمانوں میں حب وطن اورآپسی بھائی چارہ کے جذبے کوبیدارکرنااوران کے حقوق کی حصولیابی کے لئے جدوجہد کرنا ہی بورڈ کانصب العین رہاہے۔
مولانا قیصر رضاعلوی نے دور حاضر کے اہم مسائل پر گفتگو کرتے ہوئے کہا کہ بورڈ نے ہمیشہ ملک اور سماج کے ترقی کی بات کر کے وطن سے محبت کی انوکھی مثال قائم کی ہے۔آج جبکہ قوم مسلم غیر ضروری مسائل میں الجھ کر اپنی ترقی پر توجہ مرکوز نہیں کر پارہی ہے ایسی حالت میں ضروری تھا کہ بورڈ صوفیائے کرام کی تعلیمات کے مطابق ان کی اصلاح کے لئے لائحہ عمل طے کرے اور معاشرے میں اخلاقی اور تعلیمی بیداری کی مہم بھی شروع کر ے۔
مولانامقبول احمدسالک مصباحی نے کہا کہ بورڈ کے بانی وصدر نے یہ عندیہ ظاہر کیا ہے کہ بورڈقوم مسلم کے موجودہ مسائل پرایک عظیم الشان سیمینار منعقدکریگا جس میں ملک بھر سے سجادگان،علماء کرام و دانشوران اپنے مقالات پیش کریں گے اور اظہار خیال کریں گے، جوکہ لائق تحسین ہے۔انہوں نے لوگوں سے بورڈ کے ساتھ کھڑے ہونے کی تلقین کی جس سے اہل سنت و جماعت کو تقویت مل سکے۔مولانا کی اس بات سے شرکاء نے اتفاق کیا اوراپنے پورے تعاون کی یقین دہانی کرائی۔
حافظ مبین احمدنے بورڈ کومضبوط کرنے کے لئے یوپی کے تقریباًسبھی اضلاع میں یونٹوں کے قیام اورممبرسازی پرزوردیا ۔
میٹنگ کوحضرت سید احمدشطاری،مولانا انواراحمدشیری،حافظ مبین احمد نے بھی خطاب کیا۔میٹنگ کے آخر میں آل رسول احمدآفس انچارج لکھنؤ نے شرکاء کاشکریہ اداکیا۔
میٹنگ کااختتام صلوٰۃ وسلام اور قاری محمداحمدبقائی صاحب کی ملک وملت کی خوشحالی کی دعاپرہوا۔میٹنگ میں مولان منعم رضا،اما م گل حسن،سید احسان علی،اعجاز خان،رمضان علی،اسعداشرفی،نگارعالم،محمدشبیرخان،متین احمد،محمداحسان اللہ کے علاوہ کثیرتعداد میں لوگ موجودرہے۔

धर्म के नाम पर खून बहा है कभी अध्यात्म के नाम पर नहीं – सय्यद अशरफ

रायपुर/छत्तीसगढ़: 7नवंबर

धर्म के नाम पर खून बहा है लेकिन कभी अध्यात्म के नाम पर खून की एक बूंद भी नहीं बहती यह बात एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए ऑल इण्डिया उलमा व मशाइख़ बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने कही. उन्होंने कहा कि अध्यात्म में सबके लिए मोहब्बत है नफरत किसी से नहीं किए जाने का संदेश है। एक सवाल का जवाब देते हुए हज़रत ने कहा कि दुनिया आज धार्मिक उन्माद का घातक परिणाम झेल रही है ,हर तरफ खून की नदियां बह रही हैं ,चाहे वह अफगानिस्तान हो या पाकिस्तान कहीं तालिबान धर्म का चोला पहन कर खून बहा रहा है कहीं आई. एस .आई .एस.,भारत में भी कुछ सिरफिरे यही काम कर रहे हैं धर्म की गलत व्याख्या की जा रही है और लोगों को बहकाया जा रहा है।
उन्होंने कहा, सियासत में धार्मिक उन्माद एक घातक हथियार की तरह प्रयोग किया जा रहा है जिससे लोग मूल प्रश्नों से भटक कर धर्म के आधार पर फैसला कर ले रहे हैं ,जो हमारे लोकतंत्र के लिए बुरा संकेत है।लोगों को वोट का अर्थ समझने की आश्यकता है यह जिम्मेदारी मीडिया को निभानी होगी वोट जनमानस की राय है किसी व्यक्ति एवं विचारधारा के प्रति ।हम जिसे माफिया कहते है अगर उसका ही चुनाव करते हैं तो यह कैसी राय है जो काम बुलेट नहीं कर सकती वह काम बैलेट करता है हमें यह समझना होगा।
बोर्ड की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य हज़रत अम्मार अहमद अहमदी उर्फ नय्यर मियां ने कहा कि इस समय टेलीविजन पर जिस तरह के लोग बैठ कर डिबेट कर रहे हैं और स्वयं को इस्लामिक स्कालर कहलाते हैं उनमें से तो कुछ इस्लाम के संबंध में ज़रा भी नहीं जानते और कई बस पढ़े लिखे हैं जिससे भ्रम फैल रहा है।उन्होंने साफ कहा कि इस्लामिक कानून सार्वभौमिक है और व्यवाहरिक भी सही बात लोगों तक नहीं पहुंच रही है ।उन्होंने मीडिया से अपील करते हुए कहा कि मोहब्बत का संदेश आम कीजिए नफरतों को थाम दीजिये यही समय की पुकार है और यही धर्म भी ।अध्यात्म की शिक्षा है मोहब्बत सबके लिए नफरत किसी से नहीं।

आल इंडिया उलमा मशाइख़ बोर्ड ने” रैली फॉर रीवर “अभियान का किया समर्थन !!

नई दिल्ली :22 सितम्बर आल इंडिया उलमा मशायख बोर्ड ने ईशा फाउंडेशन द्वारा नदियों को बचाये एवं साफ़ रखने के लिए चलाये जा रहे जागरूकता अभियान “रैली फॉर रीवर “ का समर्थन किया है .

बोर्ड ने अधिकारिक बयान जारी कर कहा है कि नदियों का संरक्षण मानव जीवन के लिए अतिआवश्यक है यदि जल इसी प्रकार प्रदूषित होता रहा और नदिया सूखती रही तो मानव जीवन दुरूह हो जायेगा .बोर्ड के संयुक्त राष्ट्रिय सचिव हाजी सय्यद सलमान चिश्ती ने कहा कि इस्लाम ने आज से लगभग 1400 साल पहले जल संरक्षण के लिए निर्देश दिए अल्लाह के रसूल हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहुअलहिवसल्लम ने फरमाया कि नदियों में मल मूत्र का त्याग न किया जाये ,न ही उनमे गन्दगी फैलाई जाये पानी को संरक्षित किया जाये और इसको दूषित होने से बचाया जाये .खुद कुरान में पानी को लेकर कई बाते कही गयी और पानी को इश्वर का तोहफा बताया गया है .

उन्होंने जंगे कर्बला का बयान करते हुए कहा कि हुसैन और उनकी प्यास का ज़िक्र तो सभी कर रहे हैं आइये हम सब इमामे हुसैन रज़िअल्लहुतलान्हु के नाम पर मिलकर नदियों को प्रदूषण से बचाने का काम करें उनको नयी ज़िन्दगी देने के लिए आगे आयें ताकि इमाम ने जिस तरह ज़ुल्म के खिलाफ अपना सब कुछ लुटा कर फतह हासिल की हम भी मानवता के खिलाफ इस ज़ुल्म को रोकने के लिए आगे आयें और नदियों को संरक्षण के इस आन्दोलन का सहयोग करें . यहाँ हमे बस नदियों को प्रदूषण से बचाना है यही हमारा कर्तव्य है और कर्बला कर्त्तव्य से न डिगने का सबक है.
By: Yunus Mohani