आल इंडिया उलमा मशाइख़ बोर्ड ने” रैली फॉर रीवर “अभियान का किया समर्थन !!

नई दिल्ली :22 सितम्बर आल इंडिया उलमा मशायख बोर्ड ने ईशा फाउंडेशन द्वारा नदियों को बचाये एवं साफ़ रखने के लिए चलाये जा रहे जागरूकता अभियान “रैली फॉर रीवर “ का समर्थन किया है .

बोर्ड ने अधिकारिक बयान जारी कर कहा है कि नदियों का संरक्षण मानव जीवन के लिए अतिआवश्यक है यदि जल इसी प्रकार प्रदूषित होता रहा और नदिया सूखती रही तो मानव जीवन दुरूह हो जायेगा .बोर्ड के संयुक्त राष्ट्रिय सचिव हाजी सय्यद सलमान चिश्ती ने कहा कि इस्लाम ने आज से लगभग 1400 साल पहले जल संरक्षण के लिए निर्देश दिए अल्लाह के रसूल हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहुअलहिवसल्लम ने फरमाया कि नदियों में मल मूत्र का त्याग न किया जाये ,न ही उनमे गन्दगी फैलाई जाये पानी को संरक्षित किया जाये और इसको दूषित होने से बचाया जाये .खुद कुरान में पानी को लेकर कई बाते कही गयी और पानी को इश्वर का तोहफा बताया गया है .

उन्होंने जंगे कर्बला का बयान करते हुए कहा कि हुसैन और उनकी प्यास का ज़िक्र तो सभी कर रहे हैं आइये हम सब इमामे हुसैन रज़िअल्लहुतलान्हु के नाम पर मिलकर नदियों को प्रदूषण से बचाने का काम करें उनको नयी ज़िन्दगी देने के लिए आगे आयें ताकि इमाम ने जिस तरह ज़ुल्म के खिलाफ अपना सब कुछ लुटा कर फतह हासिल की हम भी मानवता के खिलाफ इस ज़ुल्म को रोकने के लिए आगे आयें और नदियों को संरक्षण के इस आन्दोलन का सहयोग करें . यहाँ हमे बस नदियों को प्रदूषण से बचाना है यही हमारा कर्तव्य है और कर्बला कर्त्तव्य से न डिगने का सबक है.
By: Yunus Mohani

देश में अशान्ति फैलाना चाहते हैं पैग़म्बर के दुश्मन : सय्यद मोहम्मद अशरफ

राजस्थान :17 सितम्बर
देश में अशान्ति फैलाना चाहते हैं पैग़म्बर के दुश्मन यह बात आल इंडिया उलमा व मशायख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने गुजरात कि एक महिला अंजू डांगर द्वारा पैगम्बरे अमन कि शान में गुस्ताखी पर अपना गुस्सा जताते हुए कही ,हज़रत ने साफ़ कहा कि इस्लाम दुश्मन ताक़तें जानती हैं मुसलमान सब कुछ बर्दाश्त कर सकता है लेकिन अपने रसूल कि शान में गुस्ताखी हरगिज़ बर्दाश्त नहीं कर सकता इसीलिए अब यह आतंकी सोच रखने वाले देशद्रोही अपनी नीचता के चरम पर पहुँच रहे हैं ताकि मुसलमानों को तकलीफ दी जा सके .
हज़रत ने कहा आल इंडिया उलमा मशाइख बोर्ड न सिर्फ इसकी भर्त्सना करता है बल्कि इस औरत को सजा दिलाने के लिए हर मुमकिन कोशिश का एलान भी करता है हम मुल्क के कानून के मुताबिक इसे कड़ी से कड़ी सजा दिए जाने के लिए हर मुमकिन कोशिश करेंगे ,उन्होंने यह भी कहा कि अगर सोशल मीडिया पर इस तरह की घटिया टिप्पड़ी होती रहीं किसी भी धर्म या सम्प्रदाय के खिलाफ तो भारत में शांति बनी रहना संभव नहीं होगा ,सरकार को इस पर विचार करते हुए इसे रोकना ही होगा ,देश बड़े खतरे के मुहाने पर खड़ा है ऐसे में इस प्रकार की नफरत का प्रचार सिर्फ ज़हर घोलने वाला है .
उन्होंने साफ़ कहा कि हम अपने नबी की शान में किसी भी तरह की गुस्ताखी बर्दाश्त नहीं करेंगे ,ऐसी नीच सोच रखने वाली महिला को खुली हवा में सांस लेने का अधिकार नहीं है उसे सलाखों के पीछे होना चाहिये.
उन्होंने कहा अगर ऐसा नहीं होता है तो हम देशव्यापी आन्दोलन छेड़ेंगे ताकि आइन्दा किसी भी धर्म या सम्प्रदाए के विरूद्ध ऐसा करने वाला बक्शा न जाये और उसे सख्त से सख्त सजा मिले .यह सिर्फ धार्मिक भावनाए आहत करने भर का मामला नहीं है ,यह मामला देश को सांप्रदायिक आग में झोकने की कोशिश का भी है यानि साफ साफ देशद्रोह का है अतः इस महिला को सख़्त से सख़्त सजा की हम मांग करते हैं.
By: यूनुस मोहानी

रोहिंग्या शरणार्थियों पर अनर्गल बयानबाज़ी बंद करें मंत्री- सय्यद अशरफ

चित्तौड़:11 सितम्बर रोहिंग्या शरणार्थियों के मसले पर सरकार के मंत्रियों के बयान से आहत आल इंडिया उलमा मशायख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने कहा कि अनर्गल बयानबाज़ी बंद करें और मानवता की सेवा के लिये रोहिंग्या शरणार्थियों की मदद का हाथ बढ़ाये सरकार ।
उन्होंने कहा संयुक्त राष्ट्र उच्चायोग ने भी साफ कह दिया है कि शरणार्थियों को खतरे वाली जगह पर वापस नहीं भेजा जा सकता यह नियम सभी राष्ट्रों के लिये बाध्यकारी है ।इस सिद्धांत को अंतरराष्ट्रीय कानून का हिस्सा माना जाता है इसलिए यह सब देशों पर लागू होता है चाहे उन्होंने शरणार्थी समझौते पर हस्ताक्षर किये हों या नहीं ।
हज़रत ने साफ कहा अब सरकार अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट करे कि वह अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करेगी या नहीं इसके लिये मंत्रियों को अनर्गल बयानबाज़ी करने की कोई ज़रूरत नही है क्योंकि राजनैतिक लाभ और राष्ट्रहित अलग अलग है ।राष्ट्रहित और मानवता की रक्षा सर्वोपरि है इससे समझौता नहीं किया जा सकता।
हज़रत ने साफ कहा कि अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री को अपने विभाग की योजनाओं पर ध्यान देना चाहिए,वक्फ की लूट पर लगाम लगानी चाहिये न कि अनर्गल बयानबाज़ी करनी चाहिए।
उन्होंने एक बार फिर भारत सरकार से मांग की रोहिंग्या शरणार्थियों को भारत में रहने दिया जाय जबतक बर्मा में हालात सामान्य नहीं हो जाते और बर्मा सरकार से नरसंहार को रोकने के लिये कहे।हज़रत ने लोगों से इन शरणार्थियों की भरसक मदद करने की अपील भी की।

सरकार बर्मा के बेगुनाहों को पनाह दे, मानवता को शर्मसार होने से बचाये : सय्यद मोहम्मद अशरफ

अजमेर:7 सितम्बर
भारत सरकार बर्मा से जान बचा कर आये बेगुनाह शरणार्थियों को शरण दे और मानवता को शर्मसार होने से बचाये,यह बात आल इंडिया उलमा मशाइख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने अजमेर शरीफ में कही। उन्होंने कहा भारत एक शांतिप्रिय देश है और सम्पूर्ण विश्व में शांति स्थापना के लिए सदैव प्रयत्नरत रहा है, इस समय जब बर्मा जो कि आदि भारत का ही अंग था वहां हिंसा चरम पर है, मानवता शर्मसार हो रही है, महिलाएं बच्चे बुज़ुर्ग, जवान कोई महफूज़ नहीं है और बर्मा में बरबरियत के साथ मानवता की हत्या की जा रही है। ऐसे में सरकार का रोहिंग्या शरणार्थियों से देश छोड़ने का आदेश निंदनीय है, हम सरकार से मांग करते हैं कि मानव जीवन बहुमूल्य है इसे बचाने के लिये हर संभव प्रयास किया जाना चाहिये। जिस प्रकार पड़ोसी देश बांग्लादेश ने मानवता के आधार पर दुखी लोगों के लिए दरवाज़े खोल दिये है भारत को भी आगे आकर रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए मदद हाथ बढ़ाना चाहिए।
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र संघ से भी इस संबंध में तुरंत कारगर क़दम उठाने की मांग की। हज़रत ने कहा कि सबको जहां बर्मा के लोगों के लिये दुआ करनी चाहिए वहीं रोहिंग्या शरणार्थियों तक मदद भी पहुंचानी चाहिए।
आल इंडिया उलमा मशाइख़ बोर्ड के संरक्षक व दरगाह अजमेर शरीफ के गद्दीनशीन हज़रत सय्यद मेहदी मिंया चिश्ती ने कहा कि दुनिया को मोहब्बत की ज़रूरत है और हम नफरत की फैक्ट्रीय लगा रहे हैं, धर्म के आधार पर शरणारथियों की स्थिति तय की जाएगी तो हम क्या संदेश देना चाहते हैं। निहत्थे जान बचाकर भागे लोगों से देश को खतरा कैसे हो सकता है। मानवता हमारी ज़रूरत है, सरकार को आगे बढ़ कर मदद करनी चाहिए।
आल इंडिया उलमा मशाइख बोर्ड के संयुक्त राष्ट्रीय सचिव सय्यद सलमान चिश्ती ने कहा कि” अतिथि देवो भव:” सिर्फ पर्यटन विभाग के प्रचार की सामग्री नहीं है यह भारत की संस्कृति है, उन्होंने बताया भारत के संसद भवन पर अंकित वसुधैव कुटुंबकम् का वाक्य हमारी धारणा का प्रतीक है कि हम सम्पूर्ण विश्व को एक परिवार मानते हैं और प्रधानमंत्री जी इसका उपयोग हर जगह करते हैं ऐसे में रोहिंग्या शरणार्थियों के संबंध में किरण रिज्जु का बयान प्रधानमंत्री के शब्दों के विपरीत है। कोई भी धर्म कभी खून बहाना नहीं सिखाता. मैं जितना जानता हूं उसके आधार पर शरणार्थियों की सेवा एंवम् सहायता के लिए हर धर्म ने सीख दी है। उन्होंने कहा कि मानवाधिकारों की रक्षा के लिए हर हाल में हमे बर्मा के शरणार्थियों को भारत में शरण देनी चाहिए,सरकार का यह फैसला की वह देश छोड़ कर चले जाएँ उचित नहीं है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा का भी यह उल्लघन प्रतीत होता है. हम भारत सरकार से मांग करते हैं कि अपना फैसला वापस ले।

Follow the country’s law along with the religion on the occasion of Eid-ul-Azha : Syed Mohammad Ashraf

Ajmer: August 29
On the occasion of the upcoming festival, Eid-ul-Azha, Muslims will be sacrificing the animals while exercising the right to freedom of religion. But at the same time, they should also take care of the laws of the country. This point was particularly highlighted by the Founder and President of All India Ulama & Mashaikh Board, Hazrat ​​Sayed Mohammad Ashraf in Ajmer Sharif Dargah Khwaja Gharib Nawaz (Rahmatullah alaih) in the gathering of Chhati Sharif in Baitun Noor.
He appealed to the people and said that in many places now, some enemies of peace and the people might try to spoil the atmosphere of peace during the sacrifice. “Therefore, we need to work with patience and respect the law of the country and follow it completely”, he said.
He also said that people should not sacrifice in open places. Our Deen (religion) also says this. We should not shed the blood of the Qurbani in the drains, rather bury it, as well as those parts of the animal which are not eaten and the food which is forbidden in Islam should also be buried. We do not have permission to give any of them to anyone else because we cannot give any such food to anyone. At the same time, we must take care of cleanliness so that nobody could have trouble with our sacrifice.
Hazrat further said: we have to make special arrangements to bring the meat of the Qurbani to the disadvantaged, less-fortunate and the poorest of the poor. He said that there is no restriction on sacrifice in our country, but we must take care of the feelings of those practicing other religions and faiths. We have to fulfill the rights of our neighbors and non-Muslims, while we take care of our co-religionists, because we are Muslims, so we must maintain peace and tranquility. This responsibility is ours. He also congratulated the people on Hajj.
Hazrat Maulana Syed Mehdi Mian Chishti congratulated the people on Khwaja Gharib Nawaz’s Chatti Sharif saying that the occasion of Eid-ul-Adha is the best way to get closer to our lord.
Syed Mehdi Mian continued: Every capable Muslim should sacrifice, but we must take care that no one’s heart is hurt, no one is troubled, and it does not spread any kind of dirt. This is the only way we can emulate the example of Hazrat Gharib Nawaz Moinuddin Chishti (r.a).
If someone’s heart is broken, it is a big sin like breaking God’s house. “Hearts are to be connected, not to be broken”….. “You cannot achieve the pleasure of your Lord (Rabb) until you help the disturbed people”, he said.
Joint National Secretary of the AIUMB, Haji Syed Salman Chishti, with the grace of Huzur Gharib Nawaz, greeted on Eid-e-Ibrahimi and the Haj pilgrimage, saying that one should remember that in many parts of the country, people are upset with the flood. We have to help them on this occasion of Eid. Qurbani also teaches us that we are sacrificing our pleasure and welfare for the sake of our Lord. This feeling has to be awakened and spread widely, because human life is in danger and doing something about it is the means to achieve the pleasure of our Lord (Rabb-ul-Alameen). We have to tread the path of Sufia to benefit larger section of the people. “Love for everyone, hatred for none” is the only way to save the world from chaos and strife”, he said.
By: Ghulam Rasool Dehalvi

ईद उल अज़हा के मौक़े पर मज़हब के साथ मुल्क के क़ानून का भी पूरा पालन करें मुसलमान : सय्यद मोहम्मद अशरफ

अजमेर: 29 अगस्त
आने वाले त्योहार ईदुल अज़हा के मौक़े पर मुसलमान जहां मज़हबी आज़ादी के अधिकार पर अमल करते हुए क़ुर्बानी करें वहीं मुल्क के क़ानून का भी पूरा ख्याल रखें. यह बात आल इंडिया उलमा मशाइख़ बोर्ड के संस्थापक व अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने अजमेर शरीफ में दरगाह ख्वाजा ग़रीब नवाज़ रहमतुल्लाह अलैहि में छटी शरीफ की नजर के बाद बैतुन नूर में कही।
हज़रत ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि कई जगह इस बार कुछ इंसानियत और अमन के दुश्मन लोग और संगठन क़ुर्बानी के दौरान अमन खराब करने की कोशिश कर सकते हैं लिहाजा सब्र से काम लें और मुल्क के क़ानून का सम्मान करते हुए उसका पूरा पालन करें ,उन्होंने कहा कि लोग हरगिज़ खुली जगह क़ुर्बानी न करें, दीन भी यही कहता है, क़ुर्बानी के खून को नालियों में न बहाएँ बल्कि उसे दफन करें, साथ ही जानवर के वह अंग जो खाऐ नहीं जाते और इस्लाम में जिनका खाना मना है उसे भी दफन करें, इन्हे किसी को देने की इजाजत नहीं है क्योंकि आपके लिए जो खाना ठीक नहीं वह आप किसी को नहीं दे सकते, साफ सफाई का पूरा ख्याल रखें, किसी को आपकी वजह से परेशानी नहीं होनी चाहिए।
हज़रत ने कहा कि आप क़ुर्बानी का गोश्त ग़रीबों और परेशान हालों तक पहुंचाने का खास इंतज़ाम करें। हज़रत ने बताया कि हमारे मुल्क में क़ुर्बानी पर कोई पाबंदी नहीं है लेकिन किसी गैरमज़हब के मानने वाले की भावनाओं का हमें ख्याल रखना चाहिए, हमें अपने पड़ोसी का हक़ अदा करना है, अपने हमवतन का ख्याल रखना है क्योंकि हम मुसलमान हैं तो अमन क़ायम रखने की ज़िम्मेदारी हमारी है।उन्होंने लोगों को हज की मुबारकबाद दी।
बोर्ड के संरक्षक हज़रत मौलाना सय्यद मेहदी मियां चिश्ती ने लोगों को ख्वाजा गरीब नवाज़ की छटी शरीफ की मुबारकबाद देते हुए कहा कि क़ुर्बानी अपने रब से क़रीब होने का बेहतरीन ज़रिया है और हर साहिबे हैसियत पर क़ुर्बानी वाजिब है लेकिन ख्याल रहे कि हरगिज़ किसी का दिल न दुखे, किसी को परेशानी न हो,गंदगी बिल्कुल न फैले, इसका खास ख्याल रखे, ग़रीब नवाज़ का यही पैग़ाम तो है कि किसी का दिल तोड़ना अल्लाह का घर तोड़ने से बड़ा गुनाह है, लिहाजा दिलों को जोड़िए और ख्याल रहे कि इंसान तब तक अपने रब की खुशी हासिल नहीं कर सकता जब तक वह परेशान हाल लोगों की हैसियत रखते हुए मदद नहीं करता।
बोर्ड के संयुक्त राष्ट्रीय सचिव सय्यद सलमान चिश्ती ने सभी को गरीब नवाज़ की छटी के साथ ही ईद ए इब्राहीमी और हज की मुबारकबाद देते हुए कहा कि हमें याद रहना चाहिए कि मुल्क के कई हिस्सों में बाढ़ से लोग परेशान हैं, हमें उनकी मदद करनी है और यह ईद हमें यही सिखाती भी है कि अपने रब की खुशी के लिए हम अपना माल क़ुर्बान करते हैं. इसी एहसास को और जगाना है, क्योंकि इंसानी ज़िंदगियां खतरे में है और रब की खुशी हासिल करने का हमारे पास ये ज़रिया है। ज़रूरतमंद की मदद करना ही सुफिया का तरीका रहा है. यही नबी का दीन है। मोहब्बत सबके लिए नफरत किसी से नहीं. यही पैग़ाम है दुनिया को नफरतों से बचाने का।
By: यूनुस मोहानी

AIUMB ने कैंप लगाकर राहत सामान इकट्ठा किया

AIUMB (ऑल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड) की इटावा और ग़ज़िआबाद यूनिट का बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत सामग्री जुटाने का कार्य जारी, कैंप लगाकर राहत सामान इकट्ठा किया।

इटावा। असम, उत्तर प्रदेश, बिहार सहित देश के अन्य भागों में बाढ़ से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
बड़ी संख्या में लोग मुसीबत का शिकार हैं और लोगों के पास खाने, पीने और ज़रूरी वस्तुओं की बहुत कमी है। ऐसे वक़्त में आल इंडिया उलेमा व मशाईख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सैयद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने लोगों से खुलकर बाढ़ पीड़ितों की मदद करने के लिए और बोर्ड के सभी शाखाओं द्वारा बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए राहत सामग्री एकत्र करने के लिए कहा था। जिस पर पूरे देश में प्रयास जारी है और राहत सामग्री जमा करके भेजी जा रही है। इसी संबंध में बोर्ड की इटावा और ग़ाज़ियाबाद यूनिट ने बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए अंजुमन हुसैनिया, इटावा के सहयोग से कैंप लगाया और लोगों से अधिक से अधिक मदद करने की अपील की और लोगों की मदद से राहत सामग्री एकत्र की गयी जिसे जल्द ही बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में भेज दिया जाएगा। अंजुमन हुसैनिया शहर इटावा के अध्यक्ष हाजी गुड्ड मंसूरी ने बताया कि ऑल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड की घोषणा के बाद हम लोग हरकत में आ गए हैं क्योंकि मानवता यही है और इस्लामी शिक्षा भी कि परेशान हाल लोगों की मदद की जाए।
गाजियाबाद यूनिट के जिम्मेदार आबिद सिद्दीकी ने कहा कि हमारा मज़हबी और इंसानी कर्तव्य है कि परेशान लोगों की मदद के लिए आगे आएं तथा अल्लाह और उसके रसूल की रजा के लिए लोगों की
उदारता पूर्वक मदद करें।
AIUMB के सक्रिय सदस्य हाजी सरफराज खान ने बताया कि जल्द ही रहत सामग्री लेकर बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लिए रवाना होंगे जहां यह बिना किसी भेदभाव के परेशान हाल लोगों में वितरित किया जाएगा।

AIUMB कैंप में हाजी शेख शकील अहमद, हाजी दिलशाद खान, हाजी हाफिज खुर्शीद अहमद, टिंकू भाई, रफी अब्बासी, मुन्ना वारसी, नोरीद वारसी आदि के अलावा बोर्ड के सदस्य और स्थानीय लोग मौजूद रहे।

न्यायालय के फैसले से पर्सनल लाॅ पर छिड़ी बहस पर लगा विराम : शाह अम्मार अहमद अहमदी

रुदौली:24 अगस्त
न्यायालय द्वारा एक बैठक में तीन तलाक़ पर फैसला आया है, उसने पर्सनल लाॅ पर छिड़ी बहस पर विराम लगा दिया है क्योंकि न्यायालय ने माना है कि मुस्लिम पर्सनल लाॅ संविधान के अनुच्छेद 25 सेे संरकक्षित है और इससे छेड़छाड़ नहीं की जा सकती जो कि मुसलमानों की बड़ी जीत है. यह बयान आल इंडिया उलमा मशाइख बोर्ड के राष्ट्रीय कार्यकारणी सदस्य शाह अम्मार अहमद अहमदी उर्फ नय्यर मियां ने पत्रकारों से कही, उन्होंने कहा कि बोर्ड कोर्ट के फैसले का सम्मान करता है और स्वागत भी ।
उन्होंने कहा कि हमारे संविधान के अनुच्छेद 25 के अनुसार जो यह कहता है कि “लोक व्यवस्था, सदाचार और स्वास्थ्य तथा इस भाग के अन्य उपबंधो के अधीन रहते हुए सभी व्यक्तियों को अंतःकरण की स्वतंत्रता और धर्म के अबाध्य रूप से मानने, आचरण करने और प्रचार करने का समान हक है” के अनुसार मुस्लिम पर्सनल लाॅ को संरक्षण प्राप्त है और न्यायालय ने अपने फैसले में इसको स्पष्ट कर दिया है जो स्वागत योग्य है, अब इस बहस का कोई औचित्य नहीं है कि मुस्लिम पर्सनल लाॅ में कोई छेड़छाड़ संभव है या होने जा रही है ।
हज़रत के अनुसार देश का मुसलमान भारत के संविधान में और न्याय प्रणाली में पूरा भरोसा रखता है, उन्होंने एक ही बैठक में तीन तलाक़ को हराम बताते हुए कहा कि हम इसे बुरा हमेशा से मानते आये है लेकिन क्या जिस चीज को बुरा कहा जाता है अगर कोई उस काम को करता है तो उसका असर नहीं होगा, जरूर होगा बस इतनी सी बात समझने योग्य है ।
उन्होंने कहा कि अदालत के आदेश को पढ़ने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि कोई नया कानून बनाने का आदेश नहीं है क्योंकि संविधान पीठ के 3 जजो ने इस बात को नहीं माना है,लेकिन मुस्लिम समाज को भी अब अपने अंदर फैल रही बुराई को रोकने के लिए कमर कसनी होगी, इसके लिए आल इंडिया उल्मा मशाइख बोर्ड समाजी बेदारी मुहिम चलाएगा।

अधिकांश मुस्लिम महिलाएं शरीअत कानून से खुश : सय्यद आलमगीर अशरफ

रायपुर:23 अगस्त
मुस्लिम महिलाएं शरीअत क़ानून से खुश है और उनके लिए शरीअत कानून में जो प्रावधान है वह उससे पूरी तरह संतुष्ट है, यह बात आज रायपुर मे पत्रकारों से आल इंडिया उल्मा मशायख बोर्ड (युवा )के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सय्यद आलमगीर अशरफ ने कही।
उन्होंने कहा कि हम न्यायालय के आदेश का सम्मान करते है लेकिन मुस्लिम महिलाएं इस फैसले से आहत है और उन्हें ही सबसे ज़्यादा दुख हुआ है, उन्होंने कहा कि आल इंडिया उलमा मशायख बोर्ड लोगों में जागरूकता लाने के लिए पूरे देश में मुहिम छेड़ेगा कि हमारे घर के मसले हम घर में ही आपसी रज़ामंदी से निपटा लें और वह कोर्ट तक पहुंचे ही न।
उन्होंने कहा कि शरीअत के अनुसार एक साथ तीन तलाक़ दिये जाने के बाद निकाह टूट जाता है और हनफी मुस्लिम इसे मानते हैं, यह कैसे हो सकता है कि गोली चले और किसी के सीने में लगे, क्या जिसे गोली लगी वह नहीं मरेगा जबकि किसी की जान लेना कानून के अनुसार घोर अपराध है वैसे ही हम भी एक बैठक में तीन तलाक़ को हराम जानते है लेकिन यह भी उसी तरह हो जाती है जैसे मर्डर हो जाता है लेकिन इसकी रोकथाम के लिए सख्त कानूनी प्रावधान होना आवश्यक है।
हज़रत मौलाना ने कहा कि मुल्क का मुसलमान शरीअत में बदलाव किए जाने की साज़िश को कभी कामयाब नहीं होने देगा, पर्सनल लॉ में बदलाव मुमकिन नहीं है लेकिन कौमी बेदारी की बहुत सख्त ज़रूरत है जिसके लिए आल इंडिया उलमा मशाइख बोर्ड बेदारी मुहिम चलायेगा।
By: यूनुस मोहानी

We stand by the Muslim personal laws, not the self-imposed Muslim Personal Law Board (AIMPLB): Syed Mohammad Ashraf

Hazrat Syed Mohammad Ashraf Kichchawchchvi, Founder & President of All India Ulama & Mashaikh Board has stated that while we fully respect the Supreme Court’s Judgment, we cannot succumb to the self-imposed law of the government. For a well-intentioned and well-spirited reformation in the Indian Muslim society, the government will first have to win the community’s trust with due regard to its faith and all matters of religious conviction.
Speaking to the media outlets, Syed Ashraf Kichchawchchvi said that it would be too early to draw a conclusion from the Supreme Court’s observations, unless the final, complete and conclusive judgment is passed. Personal laws come under the ambit of the essential rights for all religious communities including the Muslim minority. They don’t stand in violation of the constitution, Kichchawchchvi said.
Syed Ashraf Kichchawchchvi also maintained that All India Ulama & Mashaikh Board (AIUMB) stands by the “Indian Muslims’ personal laws” rather than the All India Muslim Personal Law Board (AIMPLB). However, it would not support any infringement on the basic provisions of the religious freedom accorded to the Muslims in the Indian constitution. The Indian constitution’s article 25 which allows the complete freedom of profession and practice of the religion has the primacy in all such affairs, he said.
In this context, Syed Ashraf Kichchawchchvi took a note of introspection as well, while stating that the ulema and Muftis (experts on the Islamic jurisprudence) would do well to carry out a rigorous research on the entire subject. Keeping this purpose in view, the AIUMB plans to organize research seminars and workshops across the country to make a deeper delving into the subject matter. This will help us prepare and interpret a well-thought-out Muslim divorce law which will be pertinent both in the Qur’anic and constitutional terms.

By: Ghulam Rasool Dehalvi