ट्रेन प्रबंधन है हादसों का ज़िम्मेदार, बयानबाज़ी से नहीं चलती ट्रेन : सय्यद मोहम्मद अशरफ

मुंबई :21 अगस्त
रेलवे की लापरवाही की वजह हो रहे हैं हादसे, यह बात आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने मुंबई एयरपोर्ट पर मीडिया कर्मियों के सवाल के जवाब में कही, उन्होंने ट्रेन हादसे में हताहत लोगों के लिए अफ़सोस जताते हुए कहा कि ट्रेन बयानों से नहीं कुशल प्रबंधन से चलती है, यह हादसा घोर लापरवाही का नतीजा है और इसकी ज़िम्मेदारी सरकार की है.
उन्होंने कहा कि कैसे संभव हुआ कि जिस ट्रैक पर काम चल रहा था उसपर से ट्रेन को गुजरने दिया गया, इसकी जाँच होनी चाहिए कहीं यह किसी गहरी साजिश का परिणाम तो नहीं है, आखिर लोगों की जान माल की सुरक्षा कि ज़िम्मेदारी सरकार कि है तो इतनी बड़ी लापरवाही कैसे संभव है और इसकी पूरी जवाबदेही सरकार कि बनती है.

हज़रत ने सरकार को आड़े हाथो लेते हुए कहा कि अब बयानबाजी बंद होनी चाहिए एक तरफ लोग जलप्रलय का शिकार हैं कहीं आक्सिज़न की वजह से बच्चे मर रहे हैं और कहीं ट्रेन हादसों में लोगों की जाने जा रही हैं, ऐसे में अनर्गल बयान जनभावनाओं का मज़ाक उड़ाने वाले हैं, ऐसे समय में जब लोग बेरोज़गारी के दलदल में धसते जा रहे हैं, फसले बर्बाद हो गयी हैं और युवा पीढ़ी दिन प्रतिदिन अवसादग्रस्त होती जा रही है, अब लोगों को समस्याओं से भटकाने की कोशिश न की जाये बल्कि उनका हल निकालने का इमानदार प्रयास किया जाना चाहिए.

उन्होंने ट्रेन हादसे के लिए पूरी तरह रेलवे को ज़िम्मेदार ठहराते हुए कहा कि रेल हादसों की पूरी ज़िम्मेदारी रेलवे की है और घोर लापरवाही के चलते इतने लोग हताहत हुए हैं. उन्होंने सरकार से मांग की कि इस हादसे की इमानदारी से जाँच करवा कर दोषियों को ऐसी सज़ा दी जाये कि आइन्दा ऐसी लापरवाही करने की कोई हिम्मत भी न जुटा सके.

सीमांचल की त्रासदी पर समाज, राजनीति एवं धर्म की ख़ामोशी :अब्दुल मोईद अज़हरी

सीमांचल में आई त्रासदी के चलते, हुई भीषण तबाही ने एक क़यामत का माहौल बना दिया है। UP, बिहार और असम के लगभग पचास जिले और उस में रहने वाले लाखों इन्सान अपनी मौत का इंतज़ार कर रहे हैं। अब तक दो सौ से ज़्यादा मौतें हो चुकी हैं। सैकड़ों ला पता हैं। हजारों बे घर हैं। कई रास्ते एवं सड़के ख़त्म हो चुकी हैं जिसके कारण उन तक पहुंचना असंभव हो गया है। ईश्वर के सहारे सहायता कि आस और उम्मीद में दिन काट रहें हैं। कई ऐसे भी हैं जिन के सामने उन का पूरा कुन्बा और घर बार सब बह गया। उन्हें कुछ समझ में नहीं आया तो उन्हों ने आत्म हत्याएं कर लीं। हर रात खौफ़ में और दिन उम्मीद में में गुज़र रहें हैं। उन्हें लगता है कि उन कि मदद को इन्सान आयेंगे।
हर रात उन्हें वो सारे द्रश्य याद आते हैं कि हम ने अपनी नेता के लिए क्या नहीं किया। उन के लिए किसी अच्छे या बुरे में फ़र्क किये बग़ैर काम करते रहे। उन्हों ने वादा किया था कि वो हमें बे सहारा नहीं छोड़ेंगें। हमारे गाँव में आने वाली हर राजनैतिक पार्टी ने और उस के उम्मीदवार के साथ उस के समर्थकों ने हमारी हर संभव मदद कि बात कही थी। अँधेरी काली रात के सन्नाटे में उन्हें वो दिन भी याद आते हैं जब धर्म और समुदाय कि रक्षा के नाम पर इन्हीं नेताओं के इशारे पर एक दुसरे पर घातक हमले भी किये थे। खूब खून बहाया था। लेकिन यह क्या जिस के पिता पुत्र या सम्बन्धी और रिश्तेदार का खून बहाया था आज वही हमारे साथ है। हम एक दुसरे का साथ दे रहे हैं। जीने का सहारा दे रहें। और जिन के लिए यह सब खून खराबा किया था उन को तो हमारी और हमारे बच्चों कि चीखें ही सुनाई नहीं दे रही हैं। यही सब सोंच कर रात कटती है और सुबह फ़िर किसी का जिस्म बेजान मिलता है। और फिर एक साथ एक दूसरे की ढारस बंधाते हैं। अब तो आँखों के आंसू भी सूख गए हैं।
रह रह कर यह ख़याल भी बेचैन करता है कि नव दुर्गा पूजा, क्रष्ण जन्माष्टमी और गणेश चतुर्थी में हम ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। खूब भक्ति प्रदर्शन किया। इस के लिए धर्म-अधर्म की सीमाओं को तोड़ा। पंडित और धर्म गुरुओं की आव भगत की। उनकी सेवा की। लेकिन यह क्या उन्हें भी हमारी कोई फ़िक्र नहीं। उनकी वो सारी उदारता वाली बातें खोखली हो गईं। जलसे और उर्स में करोड़ों खर्च किये। पीरों, आलिमों, मुक़र्रिरों और नात ख्वानों को पात्र से ज़्यादा बल्कि औक़ात से ज़्यादा नज़राना पेश किया। उनकी तकरीरों ने हमेशा एक दूसरे की मदद की बात की लेकिन अफ़सोस आज इस मुश्किल घड़ी में वो भी काम ना आए। आज कोई भी धर्म गुरु हमारी इस दयनीय स्थिति में हमें देखने और हमारी सहायता के लिए निकलने को तैयार नहीं। तो क्या उनकी सहायता और उदारता वाली बातें झूटी हैं। या वो सिर्फ हमारे लिए ही थीं?
बिहार कि सरकार को जनता का इतना ख़याल था कि तेजस्वी यादव और लालू यादव के भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं कर पाए इस लिए एक साफ़ सुथरी और भ्रष्टाचार एवं किसी भी तरह के अधर्म से मुक्त पार्टी के साथ सरकार बना ली। लेकिन अब क्या हुआ? क्या इस सैलाब में डूबने वाले के प्रति उनकी कोई ज़िम्मेदारी नहीं है? अब उन का राज धर्म कहाँ गया? जनता के प्रति अपनी राजनीती और सत्ता को समर्पित करने वाली मर्यादा किस नकारता में विलीन हो गई? सभी खामोश हैं। हाँ यह सच है कि यह एक कुदरती आपदा है लेकिन क्या राजनीती के साथ मानवता का भी सर्वनाश हो गया है?
UP के भी बीस जिले इस बाढ़ कि चपेट में है। लेकिन यह सरकार गाय कि सुरक्षा से निकली तो मदरसे कि देश भक्ति में व्यस्त हो गई। एक सरकार कब्रस्तान और शमसान घाट में उलझी है तो दूसरी सड़कों पर ईद कि नमाज़ और थानों में जन्माष्टमी पर गहरी नज़र रख कर मामले को सुलझा रही है।गोरखपुर के मासूम बच्चों कि मौत हो या या बाढ़ कि गोद में समाने वाले लोगों कि चीखें हों, साहेब के कानों तक यह आवाजें उन्हें डिस्टर्ब कर रही हैं।
एक हमारे देश का मुखिया विश्व के किसी भी कोने में कोई छोटा से छोटा हादसा हो जाए तो न्यूज़ चैनल से पहले उनके ट्वीट से पता चल जाता है कि क्या हुआ है। लेकिन यहाँ इस भीषण आपदा की दयनीय स्थिति में नेट पैक ख़त्म हो गया और माइक काम नहीं कर रहा है। लाल किले से भी कोई संतुष्टि नहीं मिल पाई। गुजरात में GST के विरुध विशाल धरना प्रदर्शन के बाद जब वहाँ के कुछ इलाके बाढ़ से प्रभावित हो गये तो उस के लिए एक खास चार्ट प्लान तैयार किया गया था। लेकिन ना तो यहाँ कोई चार्ट है ना प्लान और ना ही कोई स्पष्ट इरादा है।
अभी सीमांचल की हालत यह है कि जो लोग बाढ़ से बच भी गए हैं अब वहाँ हुई जानवरों और इंसानों की मौतों की वजह से बदबू और सडन पैदा हो गई है उस कि वजह से लोग बुरी तरह से बीमार हो रहे हैं।
अभी भी बिहार एक एक इलाके में गायों कि रक्षा के लिए चार लो लोगों को पीट पीट कर लहू लुहान कर दिया गया। अरे इस बाढ़ में भी हज़ारों माताओं का निधन हो गया है। उन के अंतिम संस्कार कि तैयारी करों उन्हें वहाँ से निकालो। जो बची हैं उनकी सुरक्षा के प्रबल प्रबंध करो।
इन के साथ ही तमाम समाजी और धार्मिक संगठनों ने भी कुछ ना करने का निर्णय ले लिया है। जो यह साफ़ दर्शाता है कि कोई कोई भी सामाजिक और धार्मिक संगठन बग़ैर राजनितिक रिमोट के काम नहीं करता है। एक से एक बड़ी और छोटी तंजीमें जो धर्म बचाने में एड़ी चोटी का ज़ोर लगाती हैं, कहीं लम्बी छुट्टी पर चली गई हैं। ना कोई बयान है और ना ही किसी तरह के आर्थिक सहयोग की कोई ख़बर है। अगर यह लोग ही नहीं बचेंगे तो किस का धर्म और किस का मसलक बचाने के लिए धोके बाज़ी का व्यवसाय करेंगे?
अभी कुछ दिनों से दस बारह साल पुराना संगठन आल इंडिया उलमा व मशाईख़ बोर्ड के संस्थापक एवं अध्यक्ष के बयान देखने और सुनने को मिले हैं। मदद कि अपील भी की है। दुआवों का एहतमाम भी किया है। लेकिन यह समय उन के साथ खड़े होने, उन तक पहुँचने और उन्हें आर्थिक सहयोग पहुँचाने का है।
आज इंसानों के लिए इंसानियत की आवाज़ है। जो भी, जहाँ भी और जिस हाल में भी है, अपने तौर पर उन की मदद करे। वरना एक दूसरे को क्या मुंह दिखाओगे। धर्म, ज़ात, मसलक और राजनीती में मतभेद की लड़ाई के लिए बड़ा समय पड़ा है। लेकिन इन बाढ़ पीड़ितों के लिए क्षण क्षण की देरी उन्हें मौत के करीब कर रही है।
दवा, राशन और दूसरी ज़रूरी चीजों को पहुँचाने का हर संभव प्रयास किया जाये। जो अभी भी बच गए हैं उन्हें बचा लिया जाये। वर्ना याद रखें इतिहास कभी भी किसी भी लम्हे को भूलता और भुलाता नहीं है।
अगर अभी भी उन कि मदद के लिए आगे नहीं आ सकते तो फिर उतार दीजिये ये दस्तारें, जुब्बे, पगड़िया और माले। बंद कीजिये मानव सेवा का ढोंग। छोड़ दीजिये धर्म कि राजनीति। कर लीजिए अपने आप को इंसानियत से, धर्म से और जाती एवं बिरादरी से अलग। मुक्त कीजिये खुद को और सभी अपनी झूटी समाज कि ठेकेदारी से। छोड़ दीजिये उन को उन के हाल पर। जिस ने जान दी है वही ले रहा है। आज इस मुसीबत में हम हैं कल हम सब होंगे।

Abdul Moid Azhari (Amethi) Contact: 9582859385, Email: abdulmoid07@gmail.com

Independence Day celebrated at all the dargahs including in Ajmer Sharif and Delhi

All India Ulama & Mashaikh celebrated 71st Independence Day with great fervor.
All India Ulama & Mashaikh Board organized a national event to pay tribute to the freedom fighters of the country—from 1857 to 1947— on the occasion of I-Day. The event was entitled in Urdu: “Ek Shaam Azaadi Ke Parwanon Ke Naam” (Tribute to the Freedom strugglers on the eve of Independence).
Notably, this event was held not only in Delhi, but across the country, particularly in the Sufi shrines and dargahs like Ajmer Sharif, Dargah of Makhdoom-e-Simnan at Kichhauchha, Makhdoom Shah Mina Lucknow, Gulbarga Shareef, Dargah Banda Nawaz among many others.
Addressing the Delhi’s event at Ghalib Academy, Dargah Hazrat Nizamuddin Aulia, Vice President of Delhi Unit (AIUMB), Syed Fareed Nizami said: The country’s freedom has been achieved at the coast of lives, untiring struggles and sacrifices of our nationalist Muslim visionaries. We are breathing the free air in India because of their struggles”.
Ghulam Rasool Dehlvi, noted Islamic scholar, media researcher and writer revealed the untold facts about the 1857 revolt—the first freedom movement in India. He particularly recalled the ulema and other revolutionaries of the Indian Rebellion against the British imperialists. He stated:
“In today’s critical circumstances of communalism, the 1857 revolt should particularly be recalled. More than 70 percent of the soldiers in this first freedom struggle were Hindus. On the other hand, Muslim leaders like Maulana Ahmed Shah, Bahadur Shah Zafar, Khan Bahadur Khan, Begum Hazrat Mahal, Firoz Shah and Azimullah Khan were the most prominent characters in the annals of the revolt”.
Mr. Dehlvi continued: “Remarkably, Nana Sahib, Rani Laxmi Bai and Tantya Tope declared Bahadur Shah Zafar, a Muslim King, India’s first independent ruler on 11 May 1857. Similarly, Ram Kunwar Singh, Raja Nahir Singh, and Rao Tula Ram exerted herculean efforts and sacrifices to uphold the 1857 revolt. Thus, the first battle for India’s freedom was pioneered by a coalition of Hindu and Muslim leaders”.
Mr. Dehlvi concluded that when our country was enslaved, the ulema like Allama Fazle Haq Khairabadi gave a hard-hitting fatwa against the British and declared the independence war a binding duty for all Muslims.
Speaking in the program, All India Ulama and Mashaikh Board’s spokesperson, Maulana Mukhtar Ashraf said that the ulema and madrassas have significantly contributed to the first freedom movement. Today, although things have changed a bit, the patriotism of Sufi-oriented Indian Muslims remains firm and unshakable. “Today we have gathered here to send blessings (sawab) to the souls of the freedom fighters who have rescued our country from the English looters”, he said.
Yunus Mohani said that Allama Fazle Haq Khairabadi, Maulana Shaukat Ali, Maulana Mohammad Ali Jauhar and Maulana Abdul Bari Firangi Mahli, and many more names that we do not know, have to be recalled today. While mentioning the freedom activism of Bahadur Shah Zafar and his ilk, he said that it is also important to mention Maulana Hassrat Mohani on this occasion because he was the first to demand the absolute independence of the country. He gave the slogan, “Inquilab Zindabad”, which is still full of veins, and it is the greatest tribe, but sadly forgotten today.
The Minhajul Quran Delhi president Syed Ahmed Ali Mujaddidi Sahib was the chief guest in the event. He said: This effort of the All India Ulama & Mashikh Board to remember all the independence leaders will set a great tradition.
In addition, Hazrat Syed Azam Ali Nizami Sahib, Editor of Mahnama Kanzul Iman, Maulana Zafruddin Barkati Saheb, AIUMB Joint Secretary in Delhi, Sayyed Shadab Hussain Rizvi Saheb also spoke on the theme.
By: Ghulam Rasool Dehlvi

महफिले दुरूद सजा कर बाढ़ पीड़ितों के लिए दुआ करें : सय्यद मोहम्मद अशरफ

मुंबई:18 अगस्त हर जगह महफिले दुरूद सजा कर लोग बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए दुआ करें और जो लोग इस प्राकृतिक आपदा में हताहत हुए हैं उनके लिए इसाले सवाब करें आल इंडिया उलमा मशाइख बोर्ड के संस्थापक व अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने बोर्ड के तमाम ज़िम्मेदारों सहित सभी मुसलमानों से यह अपील की उन्होंने यह भी कहा कि लाखों लोग बाढ़ में फंसे हैं सरकारी आकड़ों के मुताबिक लगभग 700 लोग हताहत हो चुके हैं हजारों लोग लापता हैं वर्षों बाद ऐसी भीषण बाढ़ आयी है जिसमें इतनी भयानक इंसानी जान माल की हानि हुई है .

हज़रत ने बताया कि कल बाद नमाज़े इशा मस्जिद गौसुलआलम मडआइलैंड मुंबई में आयोजित महफिले दुरूद में वह स्वयं मौजूद रहेंगे महफिले दुरूद के बाद बाढ़ पीडतों में जो लोग हताहत हुए हैं उनके लिए इसाले सवाब और बाढ़ प्रभावितों के लिए दुआ की जायेगी. उन्होंने लोगों से बाढ़ पीडतों के लिए हर संभव मदद जुटाने की भी अपील की जिससे जिस भी तरह हो सके इस मुश्किल वक़्त में वह लोगों की मदद के लिए आये यही इंसानियत है और मज़हब भी यही सिखाता है मुसीबत में लोगों की मदद करना अगर अपने रब को खुश करना चाहते हो तो उनकी मदद करो जो परेशान हैं.
हमारे लोगों को हमारी ज़रूरत है हमें उनके लिए अपने रब से दुआ भी करनी है कि उन्हें जल्द से जल्द इस आफत से छुटकारा मिल जाये और उनके लिए मदद भी जुटानी है.

लोग बहुत परेशान है सुदूर गावों में कोई सरकारी मदद नहीं पहुँच पा रही है न ही वहाँ सम्पर्क हो पा रहा है हालात बहुत खराब हैं लिहाज़ा लोग महफिले दुरूद में आयें और बाढ़ प्रभावितों के लिए दुआ करें और मदद का भी हर संभव प्रयास करें.
By: यूनुस मोहानी

बाढ़ प्रभावितों की हर संभव मदद के लिए आगे आयें लोग : सय्यद मोहम्मद अशरफ

मुंबई :16 अगस्त
बाढ़ प्रभावितों की हर संभव मदद को लोग आगे आयें और जो बन सके करने का प्रयास करें यह आह्वाहन आल इंडिया उलमा मशाइख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने किया. उन्होंने कहा कि इस मुसीबत की घड़ी में हम सब का फ़र्ज़ है कि उन लोगों की मदद को आगे आयें जो परेशान हैं, प्राकृतिक आपदा में घिरे लोगों को ज़रूरत है और इंसानियत का यही तकाजा जो जिस भी तरह की मदद कर सकता है उसे रुकना नहीं चाहिए और फ़ौरन मदद का हाथ बढ़ाना चाहिए, लोगों के पास न तन ढकने को कपड़े हैं न खाने को अनाज, बीमारों के पास दवा नहीं है, बच्चों के पास दूध नहीं और वह भूक से बिलख रहे हैं, यह वक़्त है कि हम सब मिलकर पूरा देश एकजुट होकर उनकी मदद को आगे आये.
हज़रत ने कहा कि बाढ़ प्रभावित जगहों के नज़दीक जो मस्जिद या दरगाहें हैं आल इंडिया उलमा मशाइख बोर्ड उनके ज़िम्मेदारों से अपील करता है कि उनके दरवाज़े बाढ़ प्रभावितों के लिए खोल दिए जाएँ और लोग वहीँ पहुंचकर उनके खाने पीने और तन ढकने के लिए कपड़ों का इंतज़ाम भी करें, जिस तरह भी हो सके इंसानियत का फ़र्ज़ निभाया जाये, बिना धर्म सम्प्रदाए का भेद किये लोगों की मदद की जाये.
हज़रत ने सरकार से भी मांग की है कि जल्द से जल्द राहत पहुंचाई जाये और सुनिश्चित किया जाये कि हर बार की तरह प्रभावित लोगों के हक़ पर भ्रष्टाचारी लोग डाका न डाल सकें और वास्तविक प्रभावितों तक उनका हक़ पहुँच सके. मुल्क पर यह कठिन समय आया है और पूरे देश को एकजुट होकर इसका मुक़ाबला करना होगा ,उन्होंने उलमा और मशाइख से भी अपील की है कि लोगों में इस बात को पहुंचाएं और मदद जुटाने में सहयोग करें ताकि मानव जीवन की रक्षा की जा सके.

हर हिन्दोस्तानी के दिल में है तिरंगा, यह है हमारी शान: सय्यद सलमान

अजमेर :15 अगस्त तिरंगा हर हिन्दोस्तानी के दिल में है और यह हमारी आन बान शान है, यह बात राजकीय आदर्श उच्च माध्यमिक विध्यालय में झंडा रोहन के लिए आये आल इंडिया उलमा मशाइख बोर्ड के संयुक्त राष्ट्रिय सचिव व दरगाह अजमेर शरीफ के गद्दीनशीन सय्यद सलमान चिश्ती ने कही. उन्होंने कहा कि हर हिन्दोस्तानी के दिल में तिरंगा बस्ता है, हमारी पहचान बहार मुल्कों में हमारे झंडे से होती है, आपने देखा होगा लोग जब हज के लिए काबे में पहुँचते हैं तो उनमे से भी कुछ लोग तिरंगा थामे होते हैं जो यह बताता है कि यह काफिला हिन्दोस्तानियों का है.
हम अपने झंडे का अपमान कभी बर्दाश्त नहीं कर सकते, हम सर कटा सकते हैं लेकिन अपने झंडे को झुकने नहीं दे सकते.
उन्होंने बताया कि आल इंडिया उलमा मशाइख बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा चिश्तिया मंजिल दरगाह अजमेर शरीफ में भी हम सबका सम्मान तिरंगा लगाया गया है जो दरगाह शरीफ परिसर में ही है, यह संदेश है हर भारतीय के लिए कि अपने हर समारोह में तिरंगे को ज़रूर लगाया जाये और उसका पूरा सम्मान भी किया जाये, यह हमारा राष्ट्रध्वज है और हम पर फ़र्ज़ है कि हम इसका सम्मान करें.
सय्यद सलमान चिश्ती ने कहा कि किसी को इस बात से इनकार करने का कोई हक़ नहीं है कि वह राष्ट्रिय ध्वज नहीं फहरायेगा या राष्ट्रगान नहीं गायेगा, जब बात देश की होगी तो हम इस पर समझौते को तैयार नहीं हैं, राष्ट्र का सम्मान ही हमारा सम्मान है और हाल में राष्ट्रगान को लेकर हो रहे विवाद का कोई मतलब नहीं है, यह आज़ादी के बाद से हमेशा गया जाता आया है और गया जाता रहेगा.

अजमेर दिल्ली सहित सभी दरगाहों पर याद किये गए आज़ादी के परवाने

नई दिल्ली :14 अगस्त दरगाह हज़रत निज़ामुद्दीन स्थित ग़ालिब अकादमी में आल इंडिया उलमा मशाइख़ बोर्ड द्वारा पूर्व घोषित कार्यक्रम “एक शाम आज़ादी के परवानो के नाम” संपन्न हुआ. सिर्फ दिल्ली ही नहीं दरगाह अजमेर सहित पूरे देश में स्थित लगभग सभी दरगाहों पर यह कार्यक्रम संपन्न हुआ. इस अवसर पर आल इंडिया उलमा मशाइख़ बोर्ड के दिल्ली शाखा के उपाध्यक्ष और दरगाह हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया रह्मतुल्लाह अलैहि के सज्जादा नशीन हज़रत फरीद अहमद निज़ामी ने कहा कि मुल्क को आज़ादी तोहफे में नहीं मिली है, इसको बड़ी कुर्बानियों के बाद हासिल किया गया है और इस देश को आज़ाद कराने वालों को याद करना हमारा फ़र्ज़ है जिनकी मेहनतों की वजह से हम आज आज़ाद हिन्दोस्तान में साँस ले पा रहे हैं, उन्होंने कहा कि न जाने कितने ऐसे नाम हैं जिनका कहीं ज़िक्र भी नहीं होता, आज उन्हें भुला दिया गया है, आज के दिन आल इंडिया उलमा मशाइख़ बोर्ड ने जो कार्यक्रम रखा है इसका मक़सद यही है कि हम उन्हें याद करें और अपने अन्दर वही जज्बा जगाएं कि अगर वतन पर बात आएगी तो पहला सर हमारा होगा, हालाँकि हम कभी कुर्बानियां देने से पीछे नहीं हटे हैं.
कार्यक्रम में बोलते हुए वर्ल्ड सूफी फोरम के प्रवक्ता और इस्लामिक स्कालर गुलाम रसूल देहलवी ने कहा कि जब हमारा देश गुलामी की बेड़ियों में जकड़ा हुआ था उस वक़्त अल्लामा फज़ले हक़ खैराबादी ने अंग्रेजों के खिलाफ जेहाद का फतवा दिया और एलान कर दिया कि हम अंग्रेजों को बर्दाश्त नहीं करेंगे. उसके बाद सभी जानते हैं इसी दिल्ली की सरज़मीन पर लगभग 20000 उलमा को फाँसी के फंदे पर लटका दिया गया लेकिन वतन को आज़ाद कराने की जो अलख जगी थी उसे लाशों का हुजूम भी ठंडा नहीं कर सका और 15 अगस्त 1947 की वह सुहानी सुबह भी आई कि देश को अंग्रेजों की गुलामी से आज़ादी मिल गयी.
आल इंडिया उलमा मशाइख़ बोर्ड के ज़िम्मेदार मुख्तार अशरफ ने कहा कि मदरसों में पढने वाले लोग सबसे पहले आज़ादी की लडाई में कूद गए. आज हालात कुछ बदले बदले हैं लेकिन आज भी जज्बा वही है अगर हमारे देश की तरफ कोई निगाह उठा कर देखेगा तो हम वह आँख निकाल लेंगे. उल्मा ए अहले सुन्नत की क़ुर्बानियां बेशुमार हैं लेकिन साज़िशन उनके नाम छुपा दिए गये. हम आज यहाँ उन्हें खिराजे अकीदत पेश करने इकट्ठे हुए हैं जो अपना सब कुछ लुटा गए देश के लिए.
यूनुस मोहानी ने कहा कि टीपू सुलतान से शुरू हुई आज़ादी की मुहिम बहादुर शाह ज़फर से होते हुए अल्लामा फज़ले हक खैराबादी, मौलाना शौकत अली जौहर, मौलाना मोहम्मद अली जौहर और मौलाना अब्दुल बारी फिरंगी महली और अनगिनत नाम जिन्हें हम नहीं जानते. आज हम उन्हें श्रधांजलि देने उपस्थित हुए हैं. इस अवसर पर मौलाना हसरत मोहानी का ज़िक्र भी ज़रूरी है क्योंकि यह वह नाम है जिसने मुल्क की सबसे पहले मुकम्मल आज़ादी की मांग की. यही वह नाम है जिसने आज भी नसों में जोश भर देने वाला नारा इंक़लाब जिंदाबाद दिया और यह हमारी जमात से हैं लेकिन अफ़सोस इन्हें भुला दिया गया. आल इंडिया उलमा मशाइख़ बोर्ड का यह प्रयास उन सब जांबाजों को याद करना है जिनकी वजह हमें आज़ादी का परवाना मिला.
इनके आलावा मिन्हाजुल क़ुरआन दिल्ली के सदर सय्यद अहमद अली मुजद्दीदी साहेब, हज़रत शाह तुर्कमान बयाबानी र.अ के सज्जादा नशीन हज़रत सय्यद आज़म अली निजामी साहेब,माहनामा कंज़ुल इमान के मुदीर मौलाना जफरुद्दीन बरकती साहेब,आल इंडिया उलमा व मशाख़ बोर्ड दिल्ली के संयुक्त सचिव सय्यद शादाब हुसैन रिज़वी साहेब ने उम्दा ख़िताब किये.
कार्यकम में शैख़ अब्दुल हक़ महोद्दिस देहलवी के सज्जादा नशीन फरहान हक्की साहेब,जनाब फज़ल साहेब, जनाब अकरम क़ादरी साहेब, सलीम चिश्ती साहेब, रईस अहमद अशरफी साहेब, ज़फर अशरफ़ी साहेब ,निज़ाम अशरफी, अरमान अशरफी क़मर अंसारी, सफ़दर फारूकी, हसीबुर रहमान, अलीशा सिद्दीक़ी,अब्दुल अलीम अब्बासी, व गुलामाने कादरिया सामरिया के प्रतिनिधियों के आलावा बड़ी तादाद में लोगों ने शिरकत की.
कार्यक्रम के अंत में फातिहा ख्वानी हुई और सलात व सलाम के बाद मुल्क में अमन और तरक्की की दुआ की गयी और कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ.
By: यूनुस मोहानी

नौनिहालों की मौत निरंकुश अफसरशाही और भ्रष्टाचार का नतीजा : सय्यद मोहम्मद अशरफ

मुंबई :13 अगस्त गोरखपुर के बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज में नौनिहालों की हुई मौतों पर एक सवाल के जवाब में आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड के संस्थापक व अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने कहा यह निरंकुश अफसरशाही का नतीजा है वह मुंबई में एक कार्यक्रम में पहुंचे हुए थे जहाँ उन्होंने मीडिया द्वारा किये गए सवालों पर राज्य सरकार को आड़े हाथो लेते हुए कहा कि सरकार में बैठे मंत्री और विधायक जितना वक़्त बेबुनियाद बयानबाज़ी में लगा रहे हैं अगर उसका आधा भी व्यवस्था सुधारने के लिए प्रयास करें तो अफसरशाही पर अंकुश लगाया जा सकता है .
हज़रत ने कहा आक्सिज़न की सप्लाई न होने की वजह बच्चों की मौतें हत्या हैं जिसका ज़िम्मेदार शासन और प्रशासन है और अब अपनी नाकामी और निकम्मेपन से बचने के लिए आधारहीन और निर्लज्ज बयानबाज़ी का जो सहारा लिया जा रहा है वह उससे भी ज्यादा शर्मनाक है .उन्होंने कहा सरकार को अपनी ज़िम्मेदारी से भागना नहीं चाहिए और सच्चाई को क़ुबूल करते हुए आने वाले समय में ऐसी कोई घटना न घटे इसका प्रबंध किया जाना चाहिए .
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को देशभक्ति की परीक्षा लेने से वक़्त नहीं है जो इस तरह की लापरवाही पर अंकुश लगाया जा सके अगर मदरसों के बजाये अस्पतालों में सी सी टीवी कैमरे लगा कर निगरानी किये जाने के निर्देश होते तो शायद कितनी माओं की गोदें सूनी होने से बच जाती हज़रत ने यह भी कहा कि मदरसों में हमेशा झंडा फहराया गया और राष्ट्रगीत गाया गया यह देश के सम्मान का विषय है जिसे सब करते हैं और सबको करना भी चाहिए सरकारी आदेश महज़ एक शिगूफा है .मदरसों के लिए दिया गया आदेश महज़ एक साजिश लगता है क्योंकि देश की आज़ादी में मदरसों ने जो भूमिका निभाई है उसे भुलाया नहीं जा सकता अल्लामा फज्लेहक खैराबादी ने अंग्रेजों के खिलाफ जिहाद का बिगुल फूंका तो मौलाना हसरत मोहानी ने मुल्क की सम्पूर्ण आज़ादी का नारा दिया और अपना सबकुछ निछावर किया दिल्ली की सरज़मीन पर २०००० से ज्यादा उलेमा को एक ही दिन फाँसी दी गयी यह सब आज़ादी के दीवाने थे और सब मदरसों से निकले थे .
हज़रत ने कहा मदरसों को पहले आतंक की नर्सरी कहा गया अब मदरसों पर इस तरह का आदेश देकर उनकी देशभक्ति पर प्रश्नचिन्ह लगाने का काम किया जा रहा है जबकि हर मदरसे में तिरंगा लहराया जाता है तो यह सिर्फ राजनीत के लिए किया जा रहा है जब भी मुल्क पर बात आई है हम सबसे पहले अपना सर लेकर मैदान में आयें हैं हमे देशभक्ति सीखने की ज़रूरत नहीं है .उन्होंने कहा कि अगर सरकार की नियत ठीक है तो आदेश सिर्फ मदरसों को क्यों बाक़ी संस्थानों को क्यों नहीं ?
हज़रत किछौछवी ने कहा जब तक निरंकुश अफसरशाही पर लगाम नहीं लगेगी व्यवस्था नहीं सुधरने वाली उन्होंने सरकार से सवाल किया कि आखिर क्यों लोकल ओक्सिज़न सप्लायेर की जगह सरकार बदलते ही लखनऊ की कंपनी को सप्लाई दी गयी और पहले की तुलना में अधिक रेट पर खराब गुणवत्ता की ओक्सिज़न ली गयी सरकार इस विषय पर बात क्यों नहीं कर रही ?दरअसल यह खुला भ्रष्टाचार का मामला लगता है.

BY: यूनुस मोहानी

आइये उन्हें याद करें जिन्होंने दिया आज़ाद हिन्दोस्तान -सय्यद मोहम्मद अशरफ

मेरठ (4 अगस्त)
मेरठ की सरज़मीन से स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को याद करते हुए आल इंडिया उलमा मशाइख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने कहा कि हमे उन्हें याद करना होगा जिन्होंने हमे आज़ाद हिन्दोस्तान दिया जिनकी कुर्बानियों की वजह से आज हम अपने देश में आराम से रह पा रहे हैं लेकिन हम खुद अपने पूर्वजों को भुला रहे हैं, हम आज अल्लामा फज़ले हक़ खैराबादी को नहीं जानते जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ सबसे पहले जिहाद का फतवा दिया, हमने मौलाना मोहम्मद अली जौहर ,मौलाना शौकत अली जौहर को भुला दिया, हद हो गयी हमें अशफाकुल्लाह खान का नाम भी नहीं पता, यह हमारी बेहिसी का नतीजा है, हमे अपनी आने वाली नस्लों को यह बताना होगा कि हमारे बुजुर्गों ने हमारे देश की आजादी के लिए कैसी कैसी कुर्बानी दी है, यह मुल्क हमारा है इसकी हिफाज़त हम सब कि ज़िम्मेदारी है. हज़रत ने कहा कि मौलाना हसरत मोहानी जिन्होंने देश की सम्पूर्ण स्वतंत्रता की सबसे पहले मांग की आज हम उन्हें भूल चुके हैं उनका नारा इन्कलाब जिंदाबाद तो लगाते हैं लेकिन इसको किसने दिया नहीं जानते हैं, यह विचार उन्होंने बड़ी मस्जिद शाहपीर साहब मेरठ में नमाज़े जुमा से पहले अपने संबोधन में रखे .
उन्होंने कहा इस बार आल इंडिया उलमा मशाइख बोर्ड ने 14 अगस्त आजादी कि पूर्व संध्या पर एक शाम आज़ादी के परवानों के नाम से एक कार्यक्रम का आयोजन किया है जिसमे मुजाहिदीने आज़ादी के लिए इसाले सवाब की महफ़िल होगी, जिसे हर जगह किया जायेगा ,इसका एलान मेरठ से इसलिए हो रहा है क्योंकि जंगे आजादी का इस शहर से गहरा रिश्ता है. हज़रत यहाँ आल इंडिया उलमा मशाइख बोर्ड की मेरठ शाखा के सचिव पीर सय्यद अह्मद अली शत्तारी की दावत पर तशरीफ़ लाये उनका इस्तेकबाल मस्जिद के मुतवल्ली सय्यद मोहम्मद अली ,हाफिज मोहम्मद हसन समेत बोर्ड के तमाम ज़िम्मेदारों ने किया

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हर घर पर तिरंगा लहराएँ और मुल्क की तरक्की व अमन की दुआ करें : सय्यद सलमान चिश्ती

अजमेर (31 जुलाई)
हर घर पर तिरंगा लगायें और मुल्क की तरक्की और अमन कि दुआ करें यह बात आल इंडिया उलेमा मशाइख बोर्ड के संयुक्त सचिव हज़रत सलमान चिश्ती ने कही .उन्होंने कहा कि 15 अगस्त आ रहा है जो हमारे देश की आज़ादी का पर्व है इस त्यौहार में सबको बढ़ चढ़ कर शरीक होना है और हमे अपने उन स्वतंत्रता सेनानियों को याद करना है जिनकी कोशिशों और कुर्बानियों की वजह से हमे यह आज़ादी मिली है अब इस आज़ादी को बरकरार रखना हमारा फ़र्ज़ है और हमारी ज़िम्मेदारी. यह बात हज़रत सलमान चिश्ती ने 31 जुलाई को चिश्तिया मंजिल में आल इंडिया उलेमा मशाइख बोर्ड द्वारा आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में कही
बोर्ड के संरक्षक हज़रत सय्यद मोहम्मद मेहँदी मिंयाँ चिश्ती ने बताया कि आल इंडिया उलेमा मशाइख बोर्ड ने एलान किया है कि चाँद की 12 तारीख को हर महीने दुरूद डे मनाया जायेगा और दुनिया में अमन कि ख़ास दुआ की जायेगी लिहाज़ा अजमेर शरीफ में भी चाँद के हर 12 तारीख को दुरूद डे मनाया जायेगा क्योंकि यह वक़्त की ज़रूरत है कि जो हमारा खुदा और रसूल से ताल्लुक कम हुआ है उसे वापिस मज़बूत किया जाये और फिर दुनिया में शांति स्थापना के लिए दुआ की जाये . .
सय्यद शाहिद मिंयाँ चिश्ती ने कहा कि हमारा काम हज़रत ख्वाजा गरीब नवाज़ रहमतुल्लाहअलहि के पैगाम को आम करना है और वह पैगाम है “मोहब्बत सबके लिए नफरत किसी से नहीं “यही हमारा मिशन है और इसी में दुनिया की भलाई है ..
दरगाह अजमेर शरीफ पर छठी शरीफ के मौके पर आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में बोर्ड के संरक्षक हज़रत सय्यद मोहम्मद मेहँदी मियां चिश्ती बोर्ड के संयुक्त सचिव सय्यद सलमान चिश्ती ,अजमेर शाखा के संरक्षक हज़रत सय्यद शाहिद मिंयाँ चिश्ती, चित्तौड़गढ़ शाखा के अध्यक्ष सलीम अशरफी आल इंडिया उलेमा मशाइख बोर्ड के दिल्ली कार्यालय के ज़िम्मेदार मुख़्तार अशरफ मौजूद रहे .