AIUMB statement on Kasmir Ceasefire: Need for complete cessation of violence

President of All India Ulama & Mashaikh Board (AIUMB), Hazrat Sayed Ashraf Kichchauchwi, during a day-long meeting at a branch of the Board, has welcomed the Centre’s decision to stop operation of security forces in Jammu & Kashmir during the holy month of Ramazan.

Hazrat stressed that people in Jammu and Kshmir are tired of continuous clashes between the militants and the military in several parts of the region. “Therefore, nothing could be better than prevalence of peace and security during the holy month of Ramazan”, he said.

He added saying: “For this noble peace cause to be achieved, the holy month of Ramazan is the best occasion. It is harbinger of goodwill, bonhomie and harmony.” Hazrat ardently appealed to both the state and the people for extending their sincere cooperation in establishment of peace in the region by all possible means.

The AIUMB President stressed the need for complete cessation of violence in every part of the country. He also appealed to the Government of India to take concrete initiatives for finding a long-lasting solution to the issues and conflicts like Kashmir.

 

By: Ghulam Rasool Dehlvi

इल्म से दूर रहकर हम खुद अपने ऊपर ज़ुल्म कर रहे हैं : सय्यद मोहम्मद अशरफ

10 मई/ खरगौन, मध्य प्रदेश

“इल्म से दूर रहकर हम खुद अपने ऊपर ज़ुल्म कर रहे हैं” यह विचार वर्ल्ड सूफी फोरम एवम् आल इंडिया उलमा व मशाइख़ बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने जनसभा को संबोधित करते हुए कही, उन्होंने कहा मुसलमान सिर्फ अपने साथ भेदभाव किये जाने की बात करते हैं और मजलूमियत का रोना रोते रहते हैं मुसलमानों ने यही अपना पसंदीदा काम बना रखा है अपनी नाकामयाबियों पर सोचने के बजाय यह पूरी कौम सिर्फ दूसरो को इल्ज़ाम देने के काम में मसरूफ है।
हज़रत ने कहा जिस कौम की किताब क़ुरआन है और उसका पहला अल्फ़ाज़ इकरा है अफसोस वह कौम इल्म से दूर है हमारी कम से कम 50 फीसदी आबादी ने स्कूल और मदरसे का मुंह नहीं देखा आखिर इसके लिए कौन ज़िम्मेदार है?
आपको क्या किसी पार्टी ने अपने बच्चो को पढ़ाने से रोका प्रशासन ने रोका फिर हमारे किसी गैर मजहबी भाई ने आपको रोका नहीं बल्कि आपने अपने ऊपर यह ज़ुल्म खुद किया है किसीऔर ने नहीं हमने खुद पस्ती का रास्ता चुना है हमने अल्लाह और उसके रसूल का फरमान नहीं माना और खुद को परेशानियों में घेरा है अब अगर आपको इस पस्ती से खुद को उबारना है तो इल्म हासिल करना होगा और इसके लिए कौम को बेदार करना होगा ।
हज़रत ने कहा कि मजलूमियत का रोना छोड़ दीजिए और लोगों पर इल्ज़ाम देना बंद कीजिए अपने बच्चे पढ़ाइए यही आगे बढ़ने का रास्ता है ।

By: Yunus Mohani

सियासी तूफ़ान है संभल कर रहिये तालीमी इदारे ज़द में हैं : सय्यद मोहम्मद अशरफ

8 मई /धर्मसिंहवां, संतकबीर नगर

“सियासी तूफ़ान है संभल कर रहिये तालीमी इदारे ज़द में हैं “यह बात वर्ल्ड सूफी फोरम एवं आल इन्डिया उलमा व मशाइख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने कही, उन्होंने कहा कि पूरे देश में जिस तरह से हालात बने हुए हैं और हम अपनी नासमझियों की वजह से जिस तरह उनका शिकार हो रहे हैं अब हमें होशियार होना होगा. अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में चल रहे हंगामे पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि अब तालीमी इदारे सियासत के तूफ़ान की ज़द में हैं, मदरसे से लेकर यूनिवर्सिटी तक स्कूल से लेकर कॉलेज तक हर जगह सियासत की घिनौनी चाल चली जा रही है, ऐसे में हमें अपने ज़हनो को खोल कर सब्र और अक्ल से काम लेना है और हरगिज़ देश को तोड़ने वाली ताक़तों को कामयाब नहीं होने देना है .

हज़रत ने कहा कि यह वक़्त इम्तेहानो का है और नौजवान आन्दोलन कर रहे हैं, यह हमारी नाकामयाबी है दूसरों के फेंके हुए जाल में हम फंसे हुए हैं ऐसे में हमें जोश से नहीं होश से काम लेना है ताकि हम अपने मकसद यानि तालीम हासिल करने में पूरी तरह कामयाब हो जाएँ और हम जब तालीम हासिल कर लेंगे तो हमें कोई अपने जाल में आसानी से नहीं फंसा सकेगा.

उन्होंने कहा, अपने मिशन से न हटना और उस पर लगे रहना जीत है और यही तरीका हमें सूफिया की ज़िन्दगी में मिलता है, उन्होंने मुश्किलात के बावजूद अपना काम किया और कामयाब हुए, हमे भी चाहिए कि औलिया के दर से वाबिस्ता रहें और मुश्किलों के बावजूद भी अपने काम पर डंटे रहें, मोहब्बत को आम करना हमारा काम हैं, नफरत को खतम कर देना हमारी ज़िम्मेदारी है, कैंपस में हरगिज़ नफरतों को पनपने न दें यही हमारी जीत है और यही मुल्क की तरक्की का रास्ता भी है.

By: यूनुस मोहानी

हमने जिन्ना को 1947 में ही नकार दिया, अब इसके जरिए राजनीत बंद हो : सय्यद मोहम्मद अशरफ

3 मई / बासनी, नागौर

“हमने जिन्ना को 1947 में ही नकार दिया अब इसके जरिए राजनीत बंद हो” यह बात वर्ल्ड सूफी फोरम और आल इन्डिया उलमा व मशाईख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने उर्स शेखे तरीकत के मौके पर एक जलसे को खिताब करते हुए कही।
हज़रत ने कहा कि मुल्क के शिक्षण संस्थानों को नफरत की आग में किसी भी हालत में नहीं धकेला जाना चाहिए क्योंकि समाज पर इसका गहरा और बुरा प्रभाव पड़ता है ,उन्होंने कहा कि जहां तोड़ने की बात शिक्षण संस्थानों में शुरू होगी तो समाज को कोई बिखराव से नहीं रोक सकता ।
हज़रत ने कहा कि भारतीय मुसलमान ख्वाजा के दर को छोड़ कर कहीं नहीं जाने वाला, सूफिया के मोहब्बत के पैगाम को देश में हर जगह आम करना हमारा काम है, जहां भी नफरत की आग लगेगी हम सब भारतवासी मोहब्बत के पानी से उसे बुझा देंगे ।
हज़रत ने कहा कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के पहले ग्रेजुएट ईश्वर चंद्र थे इससे समझना चाहिए कि नाम से किसी शिक्षण संस्थान को निशाना बनाने का प्रयास घिनौनी और स्तरहीन राजनीत के सिवा कुछ नही। हज़रत ने कहा कि सरकार से मांग करते हैं कि शिक्षण संस्थानों को राजनीत से बचाया जाए और उन्हें नफरत की से बचाने हेतु हर संभव प्रयास किया जा

देश को नए अफसर नई ऊँचाइयों पर ले जाएँगे : सय्यद मोहम्मद अशरफ

28 अप्रैल /लखनऊ

मुल्क को नए अफसर नयी ऊँचाइयों पर ले जायेंगे, यह बात वर्ल्ड सूफी फोरम और आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने सिविल सर्विसेज़ में कामयाब होने वाले प्रतिभागियों को मुबारकबाद देते हुए कही उन्होंने कहा उम्मीद है यह नये अफसर देश से भ्रष्टाचार के खात्मे के लिए नयी जंग छेड़ेंगे .
उन्होंने कहा कि लोगों को इन बच्चों से प्रेरणा लेनी चाहिए जिन्होंने मुश्किल हालात में भी अपने लक्ष्य को भेदा है और साथ ही मुबारकबाद के पात्र हैं वह लोग जिन्होंने इनकी मदद की है .हज़रत ने कहा कि मुसलमानों में भी बेदारी आई है और 51 बच्चों का सलेक्शन हुआ है जो ख़ुशी की बात है,उन्होंने कहा कि मेहनत रंग ज़रूर लाती है.
हज़रत ने कहा कि इस सिलसिले को तेज़ी से आगे बढाया जाना चाहिए और मुस्लिम नौजवानों के लिए मदरसों में भी सिविल सर्विसेज़ कोचिंग का निजाम होना चाहिए ताकि ज़कात और इमदाद का सही इस्तेमाल करते हुए समाज में ऐसे अफराद तैयार किये जाएँ जो मुल्क और मिल्लत दोनों की तरक्की में अपना योगदान दें .
उन्होंने सभी प्रतिभागियों के बेहतर जीवन की कामना करते हुए कहा कि देश को इन प्रतिभाओं का पूरा फायदा तब मिलेगा जब यह सब ईमानदारी से अपने कामों को अंजाम देंगे और हम ऎसी उम्मीद करते हैं अपनी युवा पीढ़ी से.

By: यूनुस मोहानी

कुशीनगर में हुआ दर्दनाक हादसा लापरवाही का नतीजा: सय्यद मोहम्मद अशरफ

26/ अप्रैल ,लखनऊ

“कुशीनगर में हुआ हादसा लापरवाही का नतीजा है” यह बात वर्ल्ड सूफी फोरम और आल इन्डिया उलमा व माशाइख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ ने कही उन्होंने कहा कि बहुत ही अफसोसनाक हादसा है जिसमें 13 नौनिहाल काल के गाल में समा गए ।
हज़रत ने कहा कि इस शदीद गम की घड़ी में हम सब उन परिवारों के साथ हैं जिन्होंने अपने जिगर के टुकड़ों को खोया है हम परवरदिगार से दुआ करते हैं कि घरवालों को सब्र अता करे।उन्होंने कहा कुशीनगर में हुआ यह हादसा खुली लापरवाही का नतीजा है जहां एक तरफ रेलवे ने अपना काम ज़िम्मेदारी से नहीं किया और आज भी हजारों रेलवे क्रॉसिंग बिना फाटक के है और बजट के दौरान ऐलान किया गया था कि जल्द ही लगभग सारी क्रॉसिंग पर फाटक लगाए जाएंगे लेकिन अभी तक वह नहीं किया जा सका जो खुली लापरवाही है अगर फाटक मौजूद होता तो हादसे को टाला जा सकता था।
उन्होंने कहा कि स्कूल वैन चला रहा ड्राइवर जैसा सुनने में आया है की वैन चलाते समय इयरफोन का इस्तेमाल कर रहा था जिसकी वजह से उसे ट्रेन आने की आवाज़ सुनाई नहीं दी और कई घरों के चिराग बुझ गए ।राज्य सरकार को भी स्कूलों पर सख्ती कर इस तरह के ड्राइवर को रख कर नवनिहालो की कीमती ज़िंदगियों को खतरे में डालने से सख्ती से रोकना चाहिए।

 

By: यूनुस मोहानी

समाज में हैवानों के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए : सय्यद आलमगीर अशरफ

नागपुर,20 अप्रेल

रोजाना जिस तरह रेप (बलात्कार) की घटनाए हो रही है उससे पूरा मुल्क परेशान है हर तरफ से इंसाफ के लिये पब्लिक प्रदर्शन एहतिजाज (protest) कर रही है देश में बलात्कारियो के खिलाफ सख्त से सख्त कानून बनाने की अपील कर रही है हालांकि सरकार ने इस ओर पहल की है पूरे मुल्क में प्रदर्शन हो रहे हैं न कि सिर्फ मुल्क में बल्कि विदेशों में भी इस मसले पर बड़ी किरकिरी हुई है

इसी सिलसिले में 20 अप्रेल 2018 शाम 7 बजे नूरी मेहबुबिया जामा मस्जिद पीलीनदी नागपुर में आल इंडिया उलमा मशाइख बोर्ड और अशरफी ग्रुप की जानिब से पुर अमन कैंडल मार्च का एहतेमाम किया गया जुलूस मस्जिद से निकल कर इलाके से होता हुवा मस्जिद पर ही खत्म हुआ जुलूस की कयादत आल इंडिया उलेमा मशायख़ बोर्ड यूथ के राष्ट्रीय अध्यक्ष हज़रत मौलाना सय्यद आलमगीर अशरफ किछौछवी ने की उन्होंने इस अवसर पर कहा कि समाज में हैवानों के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए ,बेटियों की अस्मत लूटने वालों को साज़ाए मौत दी जानी चाहिए ताकि लोगों के दिलों में ऐसा हैवानों वाला क़दम उठाने से पहले एक खौफ रहे ।
उन्होंने कहा मजलूम उसके मजहब की बिना पर नहीं देखा जाना चाहिए वह जिस भी धर्म का हो इससे कोई मतलब नहीं।
अगर समाज ज़ालिम और मजलूम का परीक्षण उसके धर्म के आधार पर करेगा तो न्याय नहीं किया जा सकता ।
उन्होंने कहा देश जिस तरह एकजुट होकर जालिमों के खिलाफ खड़ा हुआ है यह ही हमारे मुल्क की ताकत है और हमें इसे और मजबूत करना है।
हज़रत ने कहा सरकार से हमारा मुतालबा है कि रेप के मुजरिमों को साजाए मौत देने वाला कानून जल्द से जल्द बनाए और फास्ट ट्रैक कोर्ट में रेप के मुक़दमे की सुनवाई हो।
प्रदर्शन में मुख्य रूप से हाफ़िज़ अख़्तर आलम अशरफी,मोहम्मद रियाज़ अशरफी,तौफीक अंसारी, राजा भाई,इम्तियाज़ अशरफी समेत सैकड़ों लोग शामिल हुए प्रदर्शन में युवाओं ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया ।

 

By: Yunus Mohani

हुसैन मीज़ाने इन्साफ ,इन्साफ के बिना अमन मुमकिन नहीं : सय्यद मोहम्मद अशरफ

मारीशस /20 अप्रैल

‘हुसैन मीज़ाने इन्साफ, इंसाफ के बिना अमन मुमकिन नहीं “यह बात वर्ल्ड सूफी फोरम व आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने एक सभा को संबोधित करते हुए कही .
हज़रत ने पूरी दुनिया को हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के यौमे विलादत की मुबारकबाद पेश करते हुए कहा कि इमाम आली मकाम का फरमान है कि  जान का चला जाना नुक्सान नहीं, सबसे बड़ा नुक्सान किसी की नज़र से गिर जाना है’ इसीलिए जब इन्साफ नहीं मिलता तो हुक्मरान आवाम की नज़र से गिर जाते हैं जिसका नतीजा बदअमनी होती है.
उन्होंने कहा कि इन्साफ का होना बहुत ज़रूरी है, सिर्फ अदालतों में ही नहीं हमारा सबके लिए इंसाफ पसंद होना भी ज़रूरी है क्योंकि हम जो अपने लिए चाहते हैं वही दूसरों के लिए भी पसंद करें, यही तलीमे मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम है. इमामे आली मकाम फरमाते हैं कि “अगर दुनिया में इन्केलाब लाना चाहते हो तो तहजीबे नफ्स की शुरुआत खुद से करो, दुनिया खुद बखुद बदल जाएगी, हज़रत ने कहा, यह ज़रूरी बात है हम दूसरों की कमी तलाशते रहते हैं जबकि तरीका यह है कि खुद में सुधार किया जाये ताकि लोग आपको देख कर बदल जाये.
उन्होंने हज़रत इमाम हुसैन का ज़िक्र करते हुए कहा कि इमाम फरमाते हैं “वह क्या बदनसीब इंसान है जिसके दिल में अल्लाह ने जानदारों के लिए रहम की आदत पैदा न की; हज़रत ने यह बात हिन्दोस्तान में कम उम्र बच्चियों के साथ आये दिन हो रही हैवानियत का तज़किरा करते हुए कही, उन्होंने कहा कि यह वह दरिन्दे हैं जो समाज के लिए नासूर हैं और इनकी सजा मौत से कम हरगिज़ नहीं होनी चाहिए.  भारत में भी कई जगह आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड के कार्यकर्ताओं ने महिलाओं के साथ हो रही बर्बरता के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया, उत्तरप्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी बोर्ड के प्रदेश सचिव हज़रत सय्यद हम्माद अशरफ किछौछवी और मौलाना आले रसूल ,रमजान अशरफी सहित सैकड़ों लोगों ने इस बरबरियत के खिलाफ कठोर कानून की मांग की उन्होंने कहा कि ऐसे जालिमों की सजा सिर्फ मौत होनी चाहिए जो महिलाओं पर इस तरह की बरबरियत करते हैं साथ ही हम्माद अशरफ ने कहा कि इस मसले को मज़हब के चश्मे से हरगिज़ नहीं देखा जाना चाहिए ..

By: 

MEMORANDUM To The Prime Minister By District Magistrate

Harshly condemning the rape and murder of the eight-year-old innocent girl in Kathua district,and other rape cases in india  All India Ulama & Mashaikh Board (AIUMB), an apex body of Sufi Muslims in India is putting forward this memorandum to the prime minister of india and demad:

  1. We demand the ‘death penalty’ as only fitting punishment for this insane and inhuman brutality of the beasts.
  2. We demand the complete justice to be delivered. And that is only possible when the rape criminals are hanged to death.
  3. We demand that the government should bring a “new law” on the rising rape crimes, calling for a national consensus for exemplary punishment for the rape culprits.
  4. We demand that an amendment in the Protection of Children from Sexual Offences (POCSO) Act on death penalty for rape of children below 12 years of age is mandatory after India has witnessed several brutal incidents of the rapes where the victims were mostly minor girls.
  5. We demand that the brutal rape and merciless murder of Asifa—a minor Indian child— and the case of Unnao rape victim should open our eyes. But it should not be painted as Hindu-Muslim communal issue in the country. It doesn’t make any difference if the victim is Muslim, Hindu, Dalit or of any other faith, creed or caste. Criminals have no religion at all.

 We ask the Prime Minister to assure the country that no culprit will be spared and that       “Our daughters will definitely get justice”.

علما و مشائخ بورڈ کے قومی صدر سید محمد اشرف کچھوچھوی کا وزیر اعظم سے مطالبہ : عصمت دری کی سزا صرف موت ہو

14 اپریل ، نئی دہلی:
آل انڈیا علماء و مشائخ بورڈ کے قومی صدرمولانا سید محمد اشرف کچھوچھوی نے بیان جاری کیا کہ: ”ہندوستان میں جنسی تشدد ایکٹ میں 12 سال سے کم عمر کی بچیوں کے ساتھ عصمت دری کے لئے موت کی سزا کاایک قانون لازمی ہے،کیونکہ ہندوستان میں بہت سے ایسے شرمناک واقعات ہوئے ہیں جہاں زیادہ تر متاثرہ لڑکیاں نہایت کم سن تھیں”۔ انہوں نے مزید کہا کہ حکومت کوبڑھتی ہو ئی عصمت دری کے جرم کو روکنے کے لئے ”نیا قانون”لانا چاہئے۔
انہوں نے مزید کہا: ”وزیر اعظم نے ملک کو یقین دہانی کرائی ہے کہ کوئی بھی مجرم بخشا نہیں جائے گا اور” ہماری بیٹیوں کو ضرور انصاف ملے گا ” ۔اب ہمیں دیکھنا ہے کہ کیا مکمل انصاف دیا جائے گا۔اور یہ صرف اسی وقت ممکن ہے جب عصمت دری کے مجرموں کو موت کے لئے پھانسی دی جائے ۔
AIUMB کے قومی سکریٹری شاہ حسن جامی نے کہا، ”عصمت دری کے مجرموں کو ‘سزائے موت’ سے کم کوئی سزا دیا جانا سراسر ناانصافی ہوگی۔جو لوگ جانوروں کی طرح کئے گئے اس وحشی اور غیر انسانی ظلم کے مرتکب ہیں، ان کے لئے پھانسی کی دردناک سزاہی مناسب ہے۔
اس سانحے کے اہم پہلوؤں پر روشنی ڈالتے ہوئے ورلڈ صوفی فورم کے ترجمان اور میڈیا کوآرڈینیٹر غلام رسول دہلوی نے کہا: ”آصفہ کی شرمسارعصمت دری اوربے رحم قتل ایک ہندوستانی بیٹی کے ساتھ کئے گئے خوفناک جرم کے طور پر دیکھا جانا چاہئے، اس درندگی سے ہمارا کلیجہ منہ کو آگیاہے اور آنکھیں پھٹی کی پھٹی رہ گئی ہیں۔ذہنی دردوکرب سے پوراجسم کانپ اٹھاہے، لیکن ہمیں چاہئے کہ محتاط رہیں!اسے ملک میں ہندو مسلم فرقہ واریت کے طور پر پیش نہیں کیا جانا چاہئے۔اگر کوئی مسلم، ہندو، دلت یا کسی دوسرے مذہب، عقیدہ یا ذات کیبچی اس حیوانیت کا شکار ہو، تب بھی جرم اتنا ہی سنگین اور قابل مذمت رہے گا”۔
انہوں نے کہا: ”کٹھوا کی 8 سالہ مسلم بچی اور اناؤ کی 18 سالہ ہندو لڑکی دونوں ہی غیر انسانی فطرت اور ظالمانہ سرشت رکھنے والے درندوں کی شکار ہوئی ہیں، جو کسی بھی مذہب کے پیروکار نہیں، بلکہ ہوس کے پجاری ہیں ۔وہ کسی بھی مہذب سماج کا حصہ نہیں، ہمیں ان کے بھارتی ہونے پر خود کو شرمندہ ہونا چاہئے۔”
اس سلسلے میں سینئر صحافی اور بورڈ کے آفس سکریٹری اورجناب یونس موہانی نے ایک چبھتا ہوا سوال اٹھایاکہ: ” کیا یہ ‘نیو انڈیا’آزاداور ترقی پسند لوگوں کا بنایا ہواہے، جو طویل عرصے سے اپنے معاشرے میں ایسے گھناؤنے جرائم کو دیکھ رہے ہیں اور اب یہ تقریباً روزانہ کا معمول بن گیاہے؟” انہوں نے کہاکہ ’’ہمیں سمجھ نہیںآتا ہے کہ مجرم کو گرفتار کرنے کے بجائے پولیس شکایت کنندہ کو ہی پہلے اس سنگین کیس میں نے کیوں گرفتار کرلیتی ہے” ۔