आल इंडिया उलमा व मशाईख़ बोर्ड ने श्री रामनाथ कोविंद को दी जीत की बधाई !

नई दिल्ली :(20 जुलाई)
आल इंडिया उलमा व मशाईख़ बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने भारत के 14वें राष्ट्रपति के तौर पर श्री रामनाथ कोविंद के निर्वाचित होने पर बधाई दी है. हज़रत ने कहा कि भारत गणराज्य के 14वें राष्ट्रपति के रूप में चुने जाने पर आल इन्डिया उलमा मशाइख बोर्ड श्री रामनाथ कोविंद को शुभकामनायें देता है और उम्मीद करता है कि आपके नेतृत्व में भारत समृद्धि की नई ऊँचाइयों को छुएगा ,देश में फैल रही नकारात्मकता पर विराम लगेगा और देश वापस जगतगुरु कहलायेगा.

हज़रत ने कहा कि हम कामना करते हैं कि भारत आपके नेतृत्व में विश्व समुदाय में अग्रणी स्थान प्राप्त करे और भारत का सम्मान दिन दूना रात चौगुना बढ़े, गरीबी का मूल नाश हो और बेरोज़गारी समाप्त हो तथा हर प्रकार की हिंसा पर रोक लगे और भारत भूमि शांति भूमि के रूप में विश्व पटल पर नज़र आये.

हिंसा रोकने के लिए बयान नहीं युवाओं को रोज़गार दे सरकार – सय्यद मोहम्मद अशरफ

डीसा गुजरात :(18 जुलाई)
आल इंडिया उलमा मशाइख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने गुजरात में एक जलसे को संबोधित करते हुए कहा कि सियासत जान ले लेती है, चुनावी मौसम में हमे होशियार रहना होगा, किसी भी क़ीमत पर बहकावे में आकर अमन को खराब नहीं होने देना है.
हज़रत अपने एकदिवसीय दौरे पर गुजरात आये हुए थे, गुजरात के हालात पर चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि घिनौनी राजनीत का दौर है अब लोग असल मुद्दों से भटकाना चाहेंगे, कोई भी राजनेता विकास ,स्वास्थ्य या आपके रोज़गार की बात नहीं करेगा, सब बात कर रहे हैं जाति,धर्म की अब हमें समझना होगा कि हम क्या चाहतें हैं.
उन्होंने आये दिन भीड़ द्वारा की जा रही हिंसा पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह भीड़ बेरोज़गारों की वही टोली है जो अपने मुद्दे से भटक गयी है और हिंसा में अपना भविष्य तलाश कर रही है, दरअसल हमारे बेरोजगार युवा राजनीत का ईधन बन गए हैं, समाज के बुद्धजीवी वर्ग को आगे आना होगा इस गुमराह टोली को रास्ते पर लाने के लिए.
हज़रत ने प्रधानमंत्री जी को सलाह देते हुए कहा कि हिंसक टोलियों पर कड़े बयान देना समस्या का हल नहीं है, युवा वर्ग को रोज़गार देना इस समस्या का हल है, अब देश में हर हाथ को काम देने की बात की जानी चाहिए सिर्फ बात न हो उसे अमली जामा पहनाया जाए, स्वरोजगार स्थापित करने के लिए सरकार योजना बनाये. उन्होंने कहा कि हर साल बेरोज़गार युवाओं की संख्या बढ़ रही है, युवा शक्ति हताशा का शिकार है और उसकी उर्जा को नफरत फैलाने वाले गलत इस्तेमाल कर रहे हैं. हताश और कुंठित युवा खुद आसानी से देश के दुश्मनों के चंगुल में फँस जाता है और समाज के लिए समस्या पैदा करता है इसे रोकना होगा.
उन्होंने ने लोगों से कहा कि हम सब को खुद प्रयास कर नफरतों को रोकना होगा, इसके लिए हज़रत ख्वाजा गरीब नवाज़ रहमतुल्लाहअलैहि की तालीम “ मोहब्बत सबके लिए, नफरत किसी से नहीं ” पर अमल करना होगा.

15 जुलाई को ज़्यादा से ज़्यादा दुरुद शरीफ पढ़ें और और दुनिया में अमन की दुआ करें ! सय्यद मोहम्मद अशरफ

नई दिल्ली:आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड के संस्थापक हज़रत मौलाना सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने तुर्की के राष्ट्रपति तय्यब अर्दुगान द्वारा पूरी दुनिया में 15 जुलाई दिन शनिवार को बाद नमाज़े ईशा दुरूद शरीफ पढने और उसके बाद दुनिया में अमन की दुआ करने का आह्वाहान किया है का समर्थन करते हुए पूरी दुनिया के मुसलमानों से अपील की है कि यौमे दुरूद में हिस्सा लें, ऐसे समय में जब हर तरफ ज़ुल्म व ज्यादती का माहौल है, हर तरफ बेगुनाहों का खून बहाया जा रहा है,ऐसा लगता है कि फूलों से भी अब बारूद की खुशबु आने लगी है, इस दौर में अपना रिश्ता पैग़म्बरे अमन सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से मज़बूत करने की ज़रूरत है जिसका रास्ता दुरूद है !

हज़रत ने कहा की यौमे दुरूद में लोग बढ़ चढ़ कर हिस्सा लें,हम तय्यब अर्दुगान की इस पहल का स्वागत करते हैं, उन्होंने बताया कि आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड की सभी प्रदेश एवं जिला शाखाएं इसकी तय्यारी में जुट गयी हैं और लोगों में इसका प्रचार और प्रसार किया जा रहा है!
हज़रत ने कहा कि हलक़ए दुरूद स्थापित करना सूफिया ए किराम का तरीका रहा है, दुरूद वह अमल है जो खुदा की बारगाह में रद्द नहीं होता जबकि हमारी नमाज़, रोज़ा, सदक़ा, ज़कात और हज ज़रूरी नहीं है की अल्लाह कुबूल ही कर ले क्योंकि हमारे अमल वैसे नहीं जैसे होने चाहिए लेकिन दुरूद एक अकेला अमल है जो खुदा की बारगाह में रद्द नहीं होता!

नफरत फैलाने वाले देश और मानवता के दुश्मनों से सतर्क रहने की ज़रूरत : सय्यद मोहम्मद अशरफ

नई दिल्ली:आल इण्डिया उलेमा मशाइख बोर्ड के संस्थापक अध्यछ हज़रत सय्यद मोहमम्द अशरफ किछौछवी ने आज महरौली शरीफ दिल्ली में हज़रत अशिकुल्लाह शाह रहमतउल्लाहअलहि के उर्स के मौके पर खिताब करते हुए कहा सुफिया का तरीका मोहब्बत का तरीका है नफरतों की इसमें कोई जगह नहीं है कोई किसी भी मज़हब का हो किसी भी फिक्र का हो सुफिया के यहाँ कोई रोक टोक नहीं सबको मोहब्बतों से नवाजना यही तरीक है बुजुर्गों का और इसी तरह इस्लाम की तबलीग की गयी .
हज़रत ने कहा यह दौर बहुत खतरनाक है हम सबको होशियार रहना होगा किसी को भी कानून हाथ में लेने का हक नहीं है हिन्दोस्तान सबका है और हम सब की ज़िम्मेदारी है इसकी हिफाज़त मुल्क में अमन के कयाम की सबसे ज्यादा ज़िम्मेदारी मुसलमानों की है क्योंकि हम वह कौम हैं जिसे दुनिया में अमन कायम करने के लिए, हक की तबलीग के लिए, ज़ुल्म की मुखालफत के लिए, भेजा गया है.
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में जिस तरह पैगम्बरे इस्लाम सल्लल्लाहुअलहिवसल्लम की शान में फेसबुक पर गुस्ताखी की गयी यह एक साजिश का हिस्सा है और इसकी जितनी भी निंदा की जाये वह कम है मोहसिने इंसानियत की शान में गुस्ताखी जहाँ नाकाबिले बर्दाश्त अमल है और यह बात नफरतों के सौदागर जानते हैं इसीलिए इस तरह का काम किया जाता है ताकि मुसलमान सड़कों पर आये और हिंसा फैलाई जा सके,वही हुआ लोगों ने कानून को हाथ में लिया और आगज़नी की जिससे बदअमनी फैली जो काबिले मज़म्मत है हिंसा करने वाला कोई भी हो उसे जायज़ नहीं ठहराया जा सकता लोगों को कानून का सहारा लेना चाहिए और दोषी को सजा दिलवाने के लिए कोशिश करनी चाहिए न की शहर के अमन को आग लगानी चाहिए .
हज़रत ने कहा हर हाल में हिंसा रुकनी चाहिए हर कीमत पर इसे रोका जाना चाहिए गुस्ताखे रसूल को कड़ी से कड़ी सज़ा मिलनी चाहिए उसे गिरफ्तार भी कर लिया गया है लोगों को सब्र से काम लेना चाहिए और किसी भी तरह कानून को हाथ में नहीं लेना चाहिए यह साजिशों का दौर है हमे बच के रहना होगा .
हज़रत ने साफ़ कहा कि आपको उकसाने की कोशिश की जाएगी इंसानियत की दुश्मन ताक़तें आपको गुस्सा दिलाने की कोशिश करेंगी आप मुल्क के संविधान पर भरोसा रखें और कानून का सहारा लें जितना मुमकिन हो सोशल मीडिया पर हो रही खुराफात से दूर रहें और इनकी रिपोर्ट करें मुल्क हमारा है इसकी हिफाज़त हमे करनी होगी .
इस मौके पर सैकड़ों अकीदतमंद मौजूद रहे सलातो सलाम के बाद कुल शरीफ हुआ और मुल्क में अमन और मुल्क की तरक्की की दुआ की गयी .

कुदरत का निजाम है गुनाहों से तौबा(GST) करने वालों को माफ़ी -सय्यद अशरफ

लखनऊ:आल इंडिया उलेमा मशाइख बोर्ड के संस्थापक अध्यछ हज़रत सय्यद मोहमम्द अशरफ किछौछवी ने जी एस टी को गुनाहों से तौबा बताते हुए कहा की अगर इंसान रब की बारगाह में जीएसटी को अपना ले तो उसके दरजात बुलंद होने से कोई नहीं रोक सकता यह रब का निजाम हैं .
यह बात उन्होंने एक सवाल के जवाब में कही जब उनसे जीएसटी पर उनकी राय पूछी गयी उन्होंने कहा की मुल्क की बेहतरी और कालाबाजारी रोकने के लिए अगर कोई क़दम उठाया जाता है तो हम सब को उसका समर्थन करना चाहिए सरकार ने कानून बनाया है अब उसके नतीजे कुछ दिन बाद पता चलेंगे लिहाज़ा किसी चीज़ का विरोध सिर्फ बदगुमानी की बुनियाद पर ठीक नहीं है .
हज़रत ने कल बिहार में भीड़ के ज़रिये दो दलित भाइयों को जान से मारे जाने की पुरजोर मज़म्मत की उन होने कहा की धीरे धीरे जो खौफ का माहौल बनाया जा रहा है वोह मुल्क के लिए खतरनाक है जो किसी को चैन से जीने नहीं देगा अगर आज हिंसक भीड़ के निशाने पर मुसलमान दलित सिख और इसाई हैं तो कल यह आपस में भी एक दुसरे के खून के प्यासे होंगे जो बड़ा डरावना होगा .

उन्होंने कहा जिस तरह उत्तरप्रदेश में आये दिन हिंसक वारदातें हो रही है उससे एक समुदाय में जो डर पैदा हो रहा है वोह ठीक नहीं है सरकार को इस पर ध्यान देना होगा.
हज़रत ने फिर एक बार सभी अमनपसंद भारतियों से एकजुट होकर इस नफरत वाली भीड़ को मोहब्बत से हरा देने की अपील की है उन्होंने कहा की अब समय आ गया कि हम ज़ुल्म के खिलाफ खड़े हो जाएँ क्योंकि नफरते हद से गुज़रती जा रही हैं अगर हमने देर की तो अंजाम ज्यादा बुरा होगा .लिहाज़ा सब्र का दामन बिना छोड़े मोहब्बत को आम किया जाये और नफरत को हरा दिया जाये .

घरेलु हिंसा द्वारा देश को अस्थिर करने की विदेशी ताक़तों की साज़िश – सय्यद मोहम्मद अशरफ

दिल्ली : आल इंडिया उलेमा मशाइख बोर्ड के संस्थापक अध्यछ हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने कहा है कि देश में जो लोग माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं वह विदेशी ताक़तों की कटपुतली हैं प्रशासन को होशियार रहना होगा.

हज़रत ने कहा जिस तरह कुछ हिंसक दरिंदे आये दिन इंसानियत को शर्मसार कर रहे है वह मुल्क़ के लिए बहुत खतरनाक है जिस तरह पाकिस्तान और चीन घात लगाए हुए हैं उससे साफ़ लग रहा है कि यह मुल्क़ का माहौल खराब करने वाले विदेशी एजेंट हैं.

उन्होंने कहा कि पुरे मुल्क़ के लोगों को होशियार रहना होगा यह असामाजिक तत्त्व बड़े सांप्रदायिक दंगे करा सकते हैं लिहाज़ा सरकार को कड़े क़दम उठाने होंगे और इन पर लगाम लगानी होगी.

हज़रत ने साफ़ कहा कि दुनिया जान ले कि भारतीय लोग अपने मुल्क़ को बचाने के लिए अपना सबकुछ निछावर कर सकते हैं.मुल्क़ के मुसलमान मुल्क़ के लिए हर क़ुर्बानी देने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं ,और जब भी मौका आया है तो सबसे पहले आगे आते हैं.
उन्होंने कहा कि मुल्क के सभी अमनपसंद लोग नफरतों के खिलाफ खड़े हों अपने चारों तरफ नज़र रखें और अफवाहों पर ध्यान न दें।

अमन ख़राब करने वाले हैं देश के ग़द्दार-सय्यद अशरफ

जौनपुर :आल इंडिया उलेमा मशाइख बोर्ड के संस्थापक अध्यछ हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने जौनपुर में आयोजित सेमिनार” सूफीवाद और मानवता “में बोलते हुए कहा कि जिस तरह फ़िज़ाओं में ज़हर घोला जा रहा है वह इंसानियत को तबाह कर देगा इससे बचने का एक ही तरीक़ा है कि मोहब्बत को आम किया जाये लोग सब्र का दामन थामे रहें.
हज़रत ने कहा जिस तरह हिंसक भीड़ लोगों को मार रही है वह डरावना है ,अगर अब भी अमनपसंद लोग हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे तो मुल्क़ खतरे में है.
उन्होंने कहा जो लोग समाज को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं वह देश के दुश्मन हैं वह किसी हाल में देशभक्त नहीं हो सकते.
हज़रत किछौछवी ने कहा हिंसा किसी भी चीज़ का हल नहीं है और याद रखिये अगर अमन खत्म होता है तो विकास रुक जाता है जो लोग मुल्क़ के अमन के दुश्मन हैं वो देश के विकास के भी दुश्मन हैं लिहाज़ा इनपर ससरकार को सख्ती दिखानी चाहिए.
अगर इस भीड़ को नहीं रोका गया तो नुक्सान होना तय है.उन्होंने लोगों से सूफियों के तरीके को अपनाने की बात कही जहाँ मोहब्बत सबके लिए नफरत किसी से नहीं का सन्देश है.
हज़रत ने कहा इंसानियत का क़त्ल करने वाले मुल्क़ के गद्दार हैं और सभी अमनपसंद भारतियों की ज़िम्मेदारी है कि इन्हें रोकें मुल्क़ में अमन क़ायम रखने के लिए आल इण्डिया उलेमा मशाइख बोर्ड कोशिशे कर रहा है आप इस मुहीम से जुड़िये और मुल्क़ कि तरक़्क़ी में अपना योगदान दीजिये हिन्दोस्तान हम सब का बराबर है और इसकी हर दुश्मन से हिफाज़त हम सबकी ज़िम्मेदारी.
इस मौके पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे सेमीनार के अंत में सलातो सलाम के बाद मुल्क़ में अमन कि दुआ की गयी.

देश खतरे में, भीड़ कर रही है लोकतंत्र की हत्या -सय्यद अशरफ

सऊदी अरब /मदीना :आल इंडिया उलेमा मशाइख बोर्ड के संस्थापक अध्यछ हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने कल मदीने से जारी अपने बयान में कहा है कि हमारा मुल्क इस वक़्त नफरतों की आग में तप रहा है खतरनाक हिंसक भीड़ खूबसूरत हिन्दोस्तान को तबाह करने पर तुली है .
हज़रत ने कश्मीर में अलविदा नमाज़ के बाद जामिया मस्जिद से निकली भीड़ के ज़रिये डी.एस .पी मोहम्मद अय्यूब पंडित की हत्या को कायरता करार देते हुए इसे मजहबे इस्लाम को बदनाम करने की घिनौनी साजिश करार दिया उन्होंने कहा की आखिर यह कौन सी नमाज़ थी जिसके बाद लोग किसी की जान लेने पर आमादा हो गए कट्टरपंथ को अगर नहीं रोका गया तो यह गुमराह भीड़ सब कुछ तबाह कर देगी .
हज़रत किछौछवी ने चलती ट्रेन में एक मुसलमान लड़के की हत्या को भी शर्मनाक बताया है उन्होंने कहा की यह कोई मज़हब नहीं सिखाता कि किसी का क़त्ल कर दिया जाये लगातार जिस तरह एक मज़हब के लोगों को बीफ के नाम पर निशाना बनाया जा रहा है उससे कानून का राज ख़तम होता दिख रहा है और हम अपने इस मोहब्बत वाले मुल्क को नफरत की आग में जाता हुआ देख रहे हैं भीड़ लोकतंत्र की हत्या कर रही है अदालत के बजाये कुछ सरफिरे फैसले कर रहे हैं और बेगुनाहों को क़त्ल कर रहे हैं .
हज़रत ने कहा क हम हुकूमते हिन्द से मांग करते हैं की इसे हर हाल में रोका जाये क्योंकि हिन्दोस्तान से हम हैं अगर मुल्क जला तो कोई महफूज़ नहीं रहेगा उन्होंने अमन पसंद लोगों से अपील करते हुए कहा की सभी अमन पसंद लोग अब इन नफरत के सौदागरों के खिलाफ एकजुट होकर आयें सवाल मुल्क का है नफरतो को रोकने के लिए मोहब्बतों की बहुत ज़रूरत है.
अमन के कयाम के लिए सभी को एक आवाज़ में कहना होगा कि सभ्य समाज में हिंसा का कोई स्थान नहीं है मौलाना ने लोगों से सब्र से काम लेने की बात कही और कहा कि अफवाहों पर ध्यान न दें अमन कायम करने की हर मुमकिन कोशिश की जाये वहीँ उन्होंने हुकूमत से मांग की कि “सबका साथ सबका विकास “का जो नारा दिया गया है इस पर अमल होना चाहिए और अल्पसंख्यको के मन से डर को निकलने की कोशिश की जानी चाहिए .
हज़रत ने मुल्क में मोहब्बत की हवा चलने और अमन कायम रहने की दुआ की .

जुनैद जैसी घटनाएं देश में सदियों से स्थापित धार्मिक भाईचारे को चोट पहुंचा रही हैं। हज़रत सय्यद मोहममद अशरफ किछौछवी

देश में धार्मिक जुनून बहुत ज्यादा बढ़ गया है और अल्पसंख्यकों को बुरी तरह परेशान किया जा रहा है।

देश भर में साम्प्रदायिक और विशेषकर मुसलमानों के खिलाफ बढ़ती हुई घातक हिंसा की घटनाएं दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रहीं हैं. और ये सभी घटनाएं इस बात की ओर इशारा करती है कि देश एक खतरनाक दिशा की ओर अग्रसर है। देश के सबसे बड़े अल्पसंख्यक के लिए जीना दूभर किया जा रहा है। अब तो बात बात पर हमले किए जाते हैं और यहां तक कि हत्या कर दी जाती है।

मोहम्मद अखलाक का ग़म क्या कम था कि पहलू खान का मातम मनाना पड़ा। उनका शोक जारी ही था कि झारखंड में बच्चा चोरी के आरोप में नईम, सिराज और संजू को मौत की नींद सुला दिया गया। खून से लथपथ हाथ जोड़े हुए एक मुस्लिम युवक की तस्वीर अभी ज़हन से महव नहीं हुई थी कि राजस्थान के जफर हुसैन को धार्मिक जुनून की भेंट चढ़ा दिया गया।

अभी इस घटना की गूंज थमी भी नहीं थी कि जुनैद की बल्लभगढ़ में भीड़ ने पीटकर और चाकू मारकर हत्या कर दी. इसके अलावा भी ऐसी न जाने कितनी छोटे बड़ी घटनाएं घटित हो रहीं हैं जो सदियों से स्थापित धार्मिक भाईचारे की ईंट से ईंट बजा रहीं हैं। लेकिन इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए न तो कोई कोशिश की जाती है और न ही अपराधियों के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई की जाती है। बल्कि इसके विपरीत उन्हें प्रोत्साहित किया जाता है और परोक्ष रूप से उनकी सराहना भी होती है।

दूसरी तरफ सर्कार इस बात का ढिंढोरा पीट रही है कि पिछले तीन वर्षों में देश ने जबरदस्त प्रगति की है और सरकार ने ऐसे कार्य अंजाम दिए हैं जो 70 वर्षों में भी नहीं हुए थे। समझ में नहीं आता कि वह कौन सा कारनामा है जो क्रेडिट लेने के लिए मंत्रियों में होड़ लगी हुई है। बस यही एक उपलब्धि नज़र आती है कि देश में धार्मिक जुनून बहुत ज्यादा बढ़ गया है और अल्पसंख्यकों को बुरी तरह परेशान किया जा रहा है।

अपने बच्चों को दीनी तालीम से आरास्ता करें मुसलमान: मौलाना किछौछवी

संभल (उत्तर प्रदेश)
शिक्षा को इस्लाम में प्राथमिकता दी गई है और शिक्षा ग्रहण करना हर मुसलमान का कर्त्तव्य है। हमें चाहिए कि अपने बच्चों को दीनी तालीम से आरास्ता करें। तालीम हासिल करके ही व्यक्ति ज़लालत और गुमराही के अंधेरे से बच सकता है।इन विचारों को हज़रत मौलाना सैयद मोहम्मद अशरफ किछौछवी (संस्थापक एवं अध्यक्ष ऑल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड) ने सैफ खां सराय, संभल में ग़ौसुल आलम मेमोरियल एजुकेशनल सोसायटी द्वारा आयोजित दारुल उलूम ग़ौसुल आलम के दस्तारबंदी के मौके पर आयोजित एक सभा में किया। मौलाना किछौछवी ने कहा कि ज्ञान की रोशनी लेकर निकलने वाले प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि वह समाज में फैली बौद्धिक अंधेरे को दूर करें। नबवी शिक्षाओं की भरोसेमंद दस्तार का तकाजा है कि लोगों को अज्ञान के दलदल से निजात दिलाई जाए। उन्होंने कहा कि इसकी शुरुआत नैतिक रूप से परिपक्वता और मजबूती से करनी चाहिए। हर धर्म प्रचारक के लिए आवश्यक है कि पहले वह सीरते नबवी का अध्ययन करे उसके बाद प्रचार प्रसार का कार्य करे जिसे कुरान ने खुलके अज़ीम से याद किया है। नफरतों, तिरस्कार और मानव जाति के अपमान के बजाय सूफ़िया का व्यवहार यानी प्रेम, भाईचारे, सहानुभूति को बढ़ावा देने की सख्त जरूरत है। मुस्लिम क़ौम जहां धर्म से दूरी और बेरग़बती का शिकार होती जा रही है। खुद इसके लिए व्यावहारिक नमूना बनकर दूसरों को उसकी दावत देनी होगी। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि दीन सिर्फ शरई उलूम की पासदारी नहीं करता बल्कि उस पर अमल करने के लिए दुनियावी तक़ाज़ों कि की भरपाई की तरग़ीब देता है। सभा का आगाज़ कारी मोहम्मद शोएब अशरफी की तिलावत से हुआ। बदायूं से तशरीफ़ लाए कारी सैयद गुलाम अली अशरफी ने नात व मन्क़बत के नज़राने पेश किये। हज़रत मुफ्ती सैयद वसीम अशरफ बदायूंनी ने किताब व सुन्नत की रौशनी में फ़ज़ाइले अहले बैत पर ख़िताब किया। हज़रत अल्लामा मुफ्ती सईद वाक़िफ़ अली अशरफी (प्रिंसिपल जामिया सोफिया, किछौछा शरीफ) के अलावा अन्य स्थानीय-उलमा ने भी नसीहत में बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। जलसा की क़यादत हजरत मौलाना हाफ़िज़ सखावत हुसैन अशरफी ने फ़रमाई और सञ्चालन कारी राहत अली अशरफी ने किया। बैठक में शकील अहमद अधिवक्ता (महासचिव संभल अयूब) मौलाना खलील, कारी आमिर अशरफी , कारी एहसान, कारी गुलजार अहमद, मोहम्मद इरफ़ान अशरफी, हाजी रियाज़ुल हुसैन, हाफिज अब्दुल कादिर, मोहम्मद शादाब, मोहम्मद आदिल , अब्दुल गफ्फार अशरफी, हाफिज कमर आलम के अलावा हजारों की तादाद में फरज़नदान तौहीद ने शिरकत फरमाई। जलसा का समापन सलात सलाम और देश में शांति और खुशहाली की दुआ पर हुआ।