इबादतगाहें शांति प्राप्त करने के लिए हैं लड़ाने का सामान नहीं: सय्यद मोहम्मद अशरफ

रत्नागिरी/15 नवम्बर

इबादतगाहें शांति प्राप्त करने के लिए हैं लड़ाने का सामान नहीं हैं इन विचारों को आल इंडिया उलमा व मशायिख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने एक जलसे को सम्बोधित करते हुए रखा उन्होंने कहा लोग दुनिया से ऊब कर सुकून हासिल करने के लिए इबादतगाहों का रुख करते हैं ताकि अपनी आत्मा को शांत कर सकें जो परवरदिगार की इबादत से ही मुमकिन है लेकिन अफ़सोस सियासत ने इबादतगाहों को लड़ाने का सामान बना दिया है उन्होंने यह बात मौजूदा समय में बाबरी मस्जिद और राम मंदिर विवाद को लेकर चल रही सरगर्मियों के सम्बन्ध में कही .

हज़रत ने कहा कि कभी कोई धर्म हिंसा की शिक्षा नहीं देता तो फिर धर्म के नाम पर हिंसक तांडव करने वाले यह लोग कौन हैं किसी भी हाल में इनका किसी भी मज़हब से सम्बन्ध नहीं हो सकता क्योंकि जो इंसान ही नहीं है उसका धर्म से क्या लेना देना धर्म आदमी को इंसान बनाता है और इस वक़्त समाज को इंसानों की ज़रूरत है हैवान सिर्फ विनाश कर सकते हैं हमे सचेत रहना होगा जो नफरत की बात करे उससे होशियार रहिये .

उन्होंने कहा देश तभी आगे बढ़ सकता है जब लोग डरे हुए न हों ,लोगों में मोहब्बत हो और एक साथ मिलकर काम करने का आगे बढ़ने का जुनून हो .सूफिया ने हमेशा जोड़ने का काम किया उन्होंने नफरतों को समाप्त कर मोहब्बत करने वालों का समाज बनाया यही वजह है आज भी उनके आस्तानो पर बिना धर्म-जाति के भेद के लोग आते हैं और अपनी अकीदतों के फूल चढाते हैं .

आज भी समाज को बिखराव से बचाने की ज़रूरत है हमे सियासत की गन्दी चालों से बचना होगा धर्मान्धता की अफीम के नशे में नहीं रहना होगा तभी हमारा सुरक्षित रहना संभव है .हज़रत ने साफ़ कहा कि इबादतगाहें मोहब्बतों को बढ़ावा देने के लिए हैं इन्हें नफरतों की गंदगी से बचा लीजिये और समाज में मोहब्बत सबके लिए नफरत किसी से नहीं के सन्देश को आम कीजिये .

मानवजीवन की रक्षा इबादतगाहों के विवाद से ज़्यादा ज़रूरी : सय्यद मोहम्मद अशरफ

लखनऊ/17 नवंबर

मानव जीवन की रक्षा इबादतगाहों के विवाद से ज़्यादा ज़रूरी है क्योंकि मानव जीवन बहुमूल्य है यह बात आल इंडिया उलमा व मशाईख़ बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने लख़नऊ में मीडिया से बाबरी मस्जिद को लेकर चल रहे घटनाक्रम के संबंध में कही. उन्होंने साफ कहा कि हम अगर धर्म की बात करते हैं तो धर्म यह कहता है कि किसी भी तरह बेगुनाहों के खून को बहने से बचाया जाए ।
हज़रत ने साफ कहा कि देश के सभी नागरिकों को न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और सभी को उसके निर्णय का सम्मान करना चाहिए. उन्होंने अदालत के बाहर समझौते के लिए चल रही कोशिशों पर कहा कि यह समझौता पक्षकारों के बीच ही संभव है अगर वह चाहतें है और कोई हल निकल सकता है जिससे मोहब्बत वाली फिज़ा  बनेगी तो ज़रूर होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि हम इस संबंध में पक्षकार नहीं हैं, हमारा काम सौहार्द को बनाने का है, प्रेम बांटने का है, सूफिया की तालीम को आम करते हुए लोगों के बीच मोहब्बत फैलाना है, क्योंकि अगर किसी बेगुनाह का खून बहा तो हम सब हार जाएंगे, क्योंकि इबादतगाह इबादत करने वालों के लिए हैं तो पहला कर्तव्य मानव जीवन की रक्षा है, उसे सांप्रदायिक विवादों से बाहर निकालना है।
हज़रत किछौछवी ने कहा, सूफी संतों  ने सदा जोड़ने का काम किया है, हम तोड़ने वालों के साथ नहीं हैं , लेकिन जोड़ने वालों के साथ हैं. हम यही पैग़ाम आपको भी देते हैं “मोहब्बत सबके लिए, नफरत किसी से नहीं” शांति का यही मंत्र है।

By: युनुस मोहानी

इमाम हसन को खलीफा ए राशिद न मानना ज़ुल्म: मौलाना इश्तियाक क़ादरी

लखनऊ 12 नवंबर

ऑल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड के प्रांतीय कार्यालय लखनऊ में ज़िक्रे शहादत इमाम हसन मुजतबा की एक महफ़िल सैयद हम्माद अशरफ (महासचिव AIUMB यूपी) की अध्यक्षता में आयोजित हुयी। महफ़िल को ख़िताब करते हुए मौलाना इश्तियाक अहमद (सदर AIUMB लखनऊ) ने कहा कि इमाम हसन सरदार हैं, आपने हज़रत अमीर मुआविया से सुलह कर अपने नानाजान हुज़ूर ﷺ के इस फरमान को अमलन पूरा किया कि मेरा यह बेटा सरदार है। मैं तुम्हें यक़ीन से बताता हूँ कि मेरा ये बेटा भविष्य में मुसलमानों के दो समूहों के बीच सुलह कराएगा और तफरका ख़त्म करके उम्मत को मुत्तहिद करेगा। हज़रत इमाम हसन ने खिलाफते राशिदा से दस्तबरदार होकर मुसलमानों के हक़ के लिए अज़ीम ईसार पेश किया।
मौलाना ने हदीस पैगंबर ” मेरी उम्मत में खिलाफत तीस साल तक रहेगी फिर बादशाहत हो जाएगी ” का हवाला देते हुए कहा कि हज़रत अबूबकर सिद्दीक़ रज़ियल्लाहु अन्हु की आग़ाज़े खिलाफत से लेकर हज़रत इमाम हसन अलैिस्सलाम के इख्तेतामे खिलाफत तक कुल तीस साल बनते हैं। खलीफा राशिदीन का जिक्र करते हुए युवा पीढ़ी को केवल चार खलीफा के बारे में बताना और पांचवें खलीफा राशिद अमीरुल मोमिनीन हज़रत इमाम हसन मुजतबा अलैहिस्सलाम और उनके दौरे खिलाफ़त को सिरे से नकारना सरासर ज़ुल्म है।
मौलाना आले रसूल अहमद ने इमाम हसन रज़ियल्लाहु अन्हु के मनाक़िब बयान करते हुए कहा कि हज़रत इमाम हसन सर से सीना तक और हज़रत इमाम हुसैन सीना से पैर तक हुज़ूर ﷺ की कामिल शबीह थे। आप ने मदीना से मक्का पैदल चलकर 25 हज अदा फरमाए।
हज़रत इमाम हसन बेहद सखी थे आपने दो मरतबा अपना सारा माल और तीन बार आधा माल राहे खुदा में खर्च फ़रमाया था।
महफ़िल में रमजान अली, मोहम्मद तौफ़ीक़, मोहम्मद असद, मोइन रज़ा, मोहम्मद हाशिम, मोहम्मद अहमद, शोएब अली, अब्दुल गनी, राजू वारसी, तारिक हुसैन, वसीम खान, मतीन बेग, मिहाजुल क़ुरान इंटरनेशनल, लखनऊ के ज़िम्मेदारों अलावा बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। महफ़िल का समापन सलाम और देश में अमन और खुशहाली की दुआ पर हुआ।

By: Yunus Mohani

धर्म के नाम पर खून बहा है कभी अध्यात्म के नाम पर नहीं – सय्यद अशरफ

रायपुर/छत्तीसगढ़: 7नवंबर

धर्म के नाम पर खून बहा है लेकिन कभी अध्यात्म के नाम पर खून की एक बूंद भी नहीं बहती यह बात एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए ऑल इण्डिया उलमा व मशाइख़ बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने कही. उन्होंने कहा कि अध्यात्म में सबके लिए मोहब्बत है नफरत किसी से नहीं किए जाने का संदेश है। एक सवाल का जवाब देते हुए हज़रत ने कहा कि दुनिया आज धार्मिक उन्माद का घातक परिणाम झेल रही है ,हर तरफ खून की नदियां बह रही हैं ,चाहे वह अफगानिस्तान हो या पाकिस्तान कहीं तालिबान धर्म का चोला पहन कर खून बहा रहा है कहीं आई. एस .आई .एस.,भारत में भी कुछ सिरफिरे यही काम कर रहे हैं धर्म की गलत व्याख्या की जा रही है और लोगों को बहकाया जा रहा है।
उन्होंने कहा, सियासत में धार्मिक उन्माद एक घातक हथियार की तरह प्रयोग किया जा रहा है जिससे लोग मूल प्रश्नों से भटक कर धर्म के आधार पर फैसला कर ले रहे हैं ,जो हमारे लोकतंत्र के लिए बुरा संकेत है।लोगों को वोट का अर्थ समझने की आश्यकता है यह जिम्मेदारी मीडिया को निभानी होगी वोट जनमानस की राय है किसी व्यक्ति एवं विचारधारा के प्रति ।हम जिसे माफिया कहते है अगर उसका ही चुनाव करते हैं तो यह कैसी राय है जो काम बुलेट नहीं कर सकती वह काम बैलेट करता है हमें यह समझना होगा।
बोर्ड की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य हज़रत अम्मार अहमद अहमदी उर्फ नय्यर मियां ने कहा कि इस समय टेलीविजन पर जिस तरह के लोग बैठ कर डिबेट कर रहे हैं और स्वयं को इस्लामिक स्कालर कहलाते हैं उनमें से तो कुछ इस्लाम के संबंध में ज़रा भी नहीं जानते और कई बस पढ़े लिखे हैं जिससे भ्रम फैल रहा है।उन्होंने साफ कहा कि इस्लामिक कानून सार्वभौमिक है और व्यवाहरिक भी सही बात लोगों तक नहीं पहुंच रही है ।उन्होंने मीडिया से अपील करते हुए कहा कि मोहब्बत का संदेश आम कीजिए नफरतों को थाम दीजिये यही समय की पुकार है और यही धर्म भी ।अध्यात्म की शिक्षा है मोहब्बत सबके लिए नफरत किसी से नहीं।

मोहब्बत वालों का है हिन्दुस्तान : सय्यद अशरफ

मेरठ : 6 अक्टूबर हिंदुस्तान हर मोहब्बत करने वाले का है यह बात आल इंडिया उलमा मशायख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने शाहपीर साहब की मस्जिद में आयोजित अजमते हुसैन कांफ्रेंस में बोलते हुए कही ।हज़रत मेरठ में सय्यद अहमद अली सत्तारी की दावत पर कार्यक्रम में मुख्य अतिथि थे ,हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की कुर्बानी को याद करते हुए उन्होंने कहा इमाम ने हिन्दुस्तान की तरफ आने की बात कही इसलिए यह हिन्दुस्तान हुसैन का हिन्दुस्तान है यह प्यारी धरती जहां मोहब्बतें बिखरी हुई हैं यह सरजमीं हुसैन के बेटे गरीब नवाज़ की भी है।किसी को कोई हक नहीं है कि वह अपनी विचारधारा किसी पर थोपे जहां लोग इसे राम कृष्ण और नानक की धरती कहते हैं वहीं यह कबीर का हिन्दुस्तान भी है और मोहब्बत वाले इसे ख्वाजा का हिन्दुस्तान कहते हैं इससे जिन्हें परेशानी है वह देश को तोड़ने की साजिश कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने नफरतें बाटने वाले दुस्साहसी एवम् दुराचारी ज़ालिम शासक यजीद के खिलाफ खड़े होकर बता दिया कि मोहब्बत को मिटाना आसान नहीं है ,ज़ुल्म कुछ देर तो विजय पाता दिखाई देगा लेकिन वास्तविकता यह है कि पराजय उसकी किस्मत है ,हुसैन ने दुनिया को सिखाया कि सर कटा कर अपना पूरा घर लुटा कर किस तरह विजय प्राप्त की जाती है मोहब्बत वालों का यही आचरण है ।
आज हर मोहब्बत वाला हुसैन का है इसमें धर्म की कैद भी नहीं हिन्दुस्तान में ही हुसैनी ब्राह्मण भी हैं सिख भी हैं ईसाई और मुसलमान भी यह है हुसैन की विजय ,विचारधारा की विजय कर्बला में हुसैन की हुईं और कटने के बाद भी उनका सर सबसे बुलंद रहा मजलुमियत में किस तरह जीत हासिल की जाये रहती दुनिया हुसैन से सीखती रहेगी ।
पीर अहमद अली सत्तारि ने कहा कि हुसैन अलैहिस्सलाम से मोहब्बत रखने वाले ज़ुल्म के खिलाफ हर दौर में खड़े होते रहे हैं और मजलूमों की मदद करते रहे हैं देश और समाज में व्याप्त नफरत और भ्रष्टाचार को मिटाना हुसैनियत है और इसे बढ़ावा देना यजीदीयत है।
कार्यक्रम की शुरुआत कुरान की तिलावत के साथ मौलाना मुख्तार अशरफ ने की इसके बाद सय्यद सरमद अली और सय्यद वलीअहमद सत्तारी ने नात और मनकबत पेश की इसके बाद मुफ्ती साजिद हस्नी और नूरमोहम्मद हसनी ने जलसे को खिताब किया जलसे का संचालन मौलाना मोहम्मद सद्दाम ने किया जलसे की सदारत पीर मोहम्मद अली सत्तारी ने की कार्यक्रम का समापन सलातो सलाम के बाद दुनिया में शांति की दुआ के साथ हुआ। बाद में लंगर बांटा गया जलसे में बड़ी संख्या में लोगों ने शिरकत की.
By Yunus Mohani

नफरतें कभी जीत नहीं सकती – सय्यद सलमान चिश्ती

अजमेर 27 सितम्बर
दरगाह हज़रत ख़्वाजा गरीब नवाज़ में छटी के मौके पर चिश्ती मंज़िल में मैसेज ऑफ कर्बला नाम से ऑल इण्डिया उलमा मशाइख़ बोर्ड ने कार्यक्रम आयोजित किया जिसकी सरपरस्ती बोर्ड के संरक्षक हज़रत मौलाना सय्यद मोहम्मद मेंहदी मियां चिश्ती ने की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता बोर्ड की अजमेर शाखा के अध्यक्ष हज़रत मौलाना सय्यद शाहिद चिश्ती ने की उन्होंने कहा कि इस वक़्त दुनिया को अगर बचाया जा सकता है तो वह तरीका हज़रत इमाम हुसैन का तरीका है ,ज़ुल्म के खिलाफ खामोश रहना भी ज़ुल्म है । समाज में ज़ुल्म बढ़ रहा है जो तावतवर है वह कमजोर को जीने नहीं देना चाहता नतीजा यह कि हर तरफ लोग परेशान हैं, सब को इन नफरतों के खिलाफ मोहब्बत लेकर खड़ा होना होगा यही पैगाम कर्बला का है जिसे हज़रत ख्वाजा गरीब नवाज़ ने आगे बढ़ाया और फरमाया मोहब्बत सबके लिये नफरत किसी से नहीं।
बोर्ड के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव हाजी सय्यद सलमान चिश्ती ने कहा कि नफ़रतें कभी जीत नहीं सकती थोड़ी देर को ऐसा धोका हो सकता है कि नफरत जीत गई लेकिन इस हकीकत को छुपाया नहीं जा सकता कि नफरत हार गई मोहब्बत ही जीती है इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की शहादत से यही संदेश मिलता है लोगों ने देखा कि इमाम का पूरा घर कर्बला में है हर वह रिश्ता जिसे हम सबसे ज़्यादा अहमियत देते हैं कर्बला में मौजूद है और सबकी शहादत होती है खेमो को लूटा जाता है लेकिन यह सब होने के बाद मकसदे इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम जीत जाता है और यजीद की ऐसी हार होती है कि तकयामत तक हर रोज़ वह हारता है जब कहीं सच जीतता दिखता है उसमे यजीद की हार नजर आती है ।उन्होंने कहा कि कर्बला का यही पैगाम है कि नफरत कभी जीत नहीं सकती मोहब्बत को हराया नहीं जा सकता ।लिहाजा करबला के इस मैसेज को हमे आत्मसात करते हुए इस दुनिया में मोहब्बतें बांटनी है तभी हम इमाम हुसैन के सच्चे गुलाम कहलाने के हकदार है ।
कार्यक्रम में बोर्ड के दिल्ली कार्यालय के ज़िम्मेदार मौलाना मुख्तार अशरफ ने बोलते हुए कहा कि सर कटा कर सर कैसे बुलंद किया जाता है यह मिसाल कर्बला के अलावा कहीं और नहीं मिलती हर तरफ ज़ुल्म के मुकाबले में धैर्य जीत गया ऐसी अद्भुत जंग कहीं नहीं मिलती ,उन्होंने कहा सर काटने वाला हार गया और जिसने अपना सर्वसव सत्य के लिए लुटा दिया यहां तक की सर तन से जुदा हो गया लेकिन जीत इमाम की हुईं क्योंकि जिसका मकसद जीत जाता है फतह उसकी होती है ।विचारधारा हुसैन अलैहिस्सलाम की जीती और ज़ालिम यजीद हमेशा के लिये मिट गया यह है हुसैनियत कि मकसद पर कायम रहना ,अपने पथ से न डिगना,सत्य के लिये सबकुछ कुर्बान करने का जज्बा रखना, ज़ुल्म के खिलाफ खड़े होना ,यह मेरे इमाम का सदका है कि लोग ज़ुल्म के खिलाफ खड़े होना सीखे और रहती दुनिया तक कोई ऐसा सत्य के लिए अन्न्याय के खिलाफ होने वाला आंदोलन नहीं होगा जिस पर कर्बला का असर न दिखाई दे यह है करबला की जीत और इसका पैगाम यह है कि हर हाल में ज़ुल्म को रोकने के लिये खड़ा होना होगा ।
कार्यक्रम में काफी तादाद में जायरीन शामिल हुए कार्यक्रम के अंत में सलातो सलाम के बाद मुल्क सहित सम्पूर्ण विश्व में शांति की स्थापना की दुआ की गई ।

आल इंडिया उलमा माशाइख़ बोर्ड का बाढ़ पीड़ितो को राहत सामग्री बाटने का काम जारी !

कटिहार : 23 सितम्बर
बिहार में बाढ़ पीड़ितों के बीच एल इंडिया उलमा माशाइख बोर्ड लगातार सक्रिय है और उनकी मदद के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है, इसी क्रम में आज कई गांवो में जाकर बोर्ड के कार्यकर्ताओं ने कपड़े बांटे।
अभी तक कई गांव ऐसे हैं जहां तक संपर्क नहीं हो पा रहा है और सरकारी मदद भी नहीं पहुंच रही है ,लोग बीमार हैं और उनके पास न तो चिकित्सक हैं और न ही दवा ,कई जगह लोगों के पास खाने को कुछ नहीं है और पहनने को कपड़े भी नहीं है इन सब परेशानियों को देखते हुए आल इंडिया उलमा माशायख बोर्ड के कार्यकर्ता गावों में जाकर लोगों को राहत सामग्री पहुंचा रहे हैं ।
बोर्ड के अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी लगातार लोगों से अपील कर रहे हैं कि पीड़ितो की हर संभव मदद के लिए लोग आगे आएं क्योंकि सरकारी मदद बंदरबांट का शिकार हो चुकी है और बाढ़ का ज़िक्र भी खतम हो चला है जबकि लोग बहुत परेशान हैं ।
आज कटिहार के झौआ,सिस्या,डोमोरया,सिक्रोना,रंगपरा,इस्लामपुर,किचोरा ,रानीगंज, डोकरा,सिंगलेपुर सहित पश्चिम बंगाल के खुमेदपुर और शम्सी में ऑल इंडिया उलमा माशायख बोर्ड की टीम ने मौलाना आले रसूल के नेतृत्व में राहत सामग्री बांटी। मौलाना आले रसूल ने बताया यह सिलसिला लगातार चलता रहेगा और दूर दराज के इलाक़े में राहत पहुंचाई जाएगी ,लोगों की हर संभव मदद की जायेगी।
BY: यूनुस मोहानी

आल इंडिया उलमा मशाइख़ बोर्ड ने” रैली फॉर रीवर “अभियान का किया समर्थन !!

नई दिल्ली :22 सितम्बर आल इंडिया उलमा मशायख बोर्ड ने ईशा फाउंडेशन द्वारा नदियों को बचाये एवं साफ़ रखने के लिए चलाये जा रहे जागरूकता अभियान “रैली फॉर रीवर “ का समर्थन किया है .

बोर्ड ने अधिकारिक बयान जारी कर कहा है कि नदियों का संरक्षण मानव जीवन के लिए अतिआवश्यक है यदि जल इसी प्रकार प्रदूषित होता रहा और नदिया सूखती रही तो मानव जीवन दुरूह हो जायेगा .बोर्ड के संयुक्त राष्ट्रिय सचिव हाजी सय्यद सलमान चिश्ती ने कहा कि इस्लाम ने आज से लगभग 1400 साल पहले जल संरक्षण के लिए निर्देश दिए अल्लाह के रसूल हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहुअलहिवसल्लम ने फरमाया कि नदियों में मल मूत्र का त्याग न किया जाये ,न ही उनमे गन्दगी फैलाई जाये पानी को संरक्षित किया जाये और इसको दूषित होने से बचाया जाये .खुद कुरान में पानी को लेकर कई बाते कही गयी और पानी को इश्वर का तोहफा बताया गया है .

उन्होंने जंगे कर्बला का बयान करते हुए कहा कि हुसैन और उनकी प्यास का ज़िक्र तो सभी कर रहे हैं आइये हम सब इमामे हुसैन रज़िअल्लहुतलान्हु के नाम पर मिलकर नदियों को प्रदूषण से बचाने का काम करें उनको नयी ज़िन्दगी देने के लिए आगे आयें ताकि इमाम ने जिस तरह ज़ुल्म के खिलाफ अपना सब कुछ लुटा कर फतह हासिल की हम भी मानवता के खिलाफ इस ज़ुल्म को रोकने के लिए आगे आयें और नदियों को संरक्षण के इस आन्दोलन का सहयोग करें . यहाँ हमे बस नदियों को प्रदूषण से बचाना है यही हमारा कर्तव्य है और कर्बला कर्त्तव्य से न डिगने का सबक है.
By: Yunus Mohani

रोहिंग्या शरणार्थियो को आल इंडिया उलमा मशायख बोर्ड ने बांटी राहत सामग्री !!

नई दिल्ली: 19 सितम्बर आल इंडिया उलमा माशायख बोर्ड की तरफ से रोहिंग्या से भारत आये परिवारों की मदद के लिये राहत सामग्री बांटी गयी ।बोर्ड ने बयान जारी कर कहा कि हमारा काम मोहब्बत बांटना है और मोहब्बत को किसी सरहद,धर्म, संप्रदाय की दीवारों से नहीं रोका जा सकता ,बोर्ड की तरफ से लोगों से अपील की गई कि लोग सिर्फ प्रदर्शन न करे बल्कि परेशानहाल लोगों की हर संभव मदद के लिये भी आगे आयें।
ए.आई.यू.एम. बी. के लोगों ने दिल्ली के कंचनकुंज इलाक़े में शरण लिये रोहिंग्या शरणार्थियों के बीच पहुंचकर उनका हाल लिया और उन्हें राहत सामग्री बांटी।
लोगों ने बताया कि किस तरह उनपर ज़ुल्म किया जा रहा है ।वहीं बर्मा से आये लोगों ने भारत सरकार से बोर्ड के माध्यम से यह याचना भी की जैसे ही बर्मा में हालात सामान्य हो जाते हैं हम खुशी खुशी वापस चले जायेंगे लेकिन तब तक हमे भारत में रहने दिया जाये।
आल इंडिया उलमा मशायख बोर्ड शुरू से भारत सरकार से यह मांग कर रहा है कि भारत सरकार रोहिंग्या शरणार्थियों को ऐसे समय में जब बर्मा में उनका जीवन संकट में है वापस न भेजे और मानवता के आधार पर उन्हें भारत में रहने दिया जाये।बोर्ड ने इस आशय का पत्र संयुक्त राष्ट्र संघ को भी लिखा है।
बोर्ड के संस्थापक अध्यछ हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी के निर्देश पर बोर्ड से यूनुस मोहानी ,मौलाना मुख्तार अशरफ,सय्यद सैफ नक्वी,हाफ़िज़ कमरूद्दीन,हाफ़िज़ सद्दाम,सय्यद अंजर अकील मदारी इत्यादि लोगों ने राहत सामग्री बांटी।
By: Yunus Mohani.

देश में अशान्ति फैलाना चाहते हैं पैग़म्बर के दुश्मन : सय्यद मोहम्मद अशरफ

राजस्थान :17 सितम्बर
देश में अशान्ति फैलाना चाहते हैं पैग़म्बर के दुश्मन यह बात आल इंडिया उलमा व मशायख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने गुजरात कि एक महिला अंजू डांगर द्वारा पैगम्बरे अमन कि शान में गुस्ताखी पर अपना गुस्सा जताते हुए कही ,हज़रत ने साफ़ कहा कि इस्लाम दुश्मन ताक़तें जानती हैं मुसलमान सब कुछ बर्दाश्त कर सकता है लेकिन अपने रसूल कि शान में गुस्ताखी हरगिज़ बर्दाश्त नहीं कर सकता इसीलिए अब यह आतंकी सोच रखने वाले देशद्रोही अपनी नीचता के चरम पर पहुँच रहे हैं ताकि मुसलमानों को तकलीफ दी जा सके .
हज़रत ने कहा आल इंडिया उलमा मशाइख बोर्ड न सिर्फ इसकी भर्त्सना करता है बल्कि इस औरत को सजा दिलाने के लिए हर मुमकिन कोशिश का एलान भी करता है हम मुल्क के कानून के मुताबिक इसे कड़ी से कड़ी सजा दिए जाने के लिए हर मुमकिन कोशिश करेंगे ,उन्होंने यह भी कहा कि अगर सोशल मीडिया पर इस तरह की घटिया टिप्पड़ी होती रहीं किसी भी धर्म या सम्प्रदाय के खिलाफ तो भारत में शांति बनी रहना संभव नहीं होगा ,सरकार को इस पर विचार करते हुए इसे रोकना ही होगा ,देश बड़े खतरे के मुहाने पर खड़ा है ऐसे में इस प्रकार की नफरत का प्रचार सिर्फ ज़हर घोलने वाला है .
उन्होंने साफ़ कहा कि हम अपने नबी की शान में किसी भी तरह की गुस्ताखी बर्दाश्त नहीं करेंगे ,ऐसी नीच सोच रखने वाली महिला को खुली हवा में सांस लेने का अधिकार नहीं है उसे सलाखों के पीछे होना चाहिये.
उन्होंने कहा अगर ऐसा नहीं होता है तो हम देशव्यापी आन्दोलन छेड़ेंगे ताकि आइन्दा किसी भी धर्म या सम्प्रदाए के विरूद्ध ऐसा करने वाला बक्शा न जाये और उसे सख्त से सख्त सजा मिले .यह सिर्फ धार्मिक भावनाए आहत करने भर का मामला नहीं है ,यह मामला देश को सांप्रदायिक आग में झोकने की कोशिश का भी है यानि साफ साफ देशद्रोह का है अतः इस महिला को सख़्त से सख़्त सजा की हम मांग करते हैं.
By: यूनुस मोहानी