समाज में हैवानों के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए : सय्यद आलमगीर अशरफ

नागपुर,20 अप्रेल

रोजाना जिस तरह रेप (बलात्कार) की घटनाए हो रही है उससे पूरा मुल्क परेशान है हर तरफ से इंसाफ के लिये पब्लिक प्रदर्शन एहतिजाज (protest) कर रही है देश में बलात्कारियो के खिलाफ सख्त से सख्त कानून बनाने की अपील कर रही है हालांकि सरकार ने इस ओर पहल की है पूरे मुल्क में प्रदर्शन हो रहे हैं न कि सिर्फ मुल्क में बल्कि विदेशों में भी इस मसले पर बड़ी किरकिरी हुई है

इसी सिलसिले में 20 अप्रेल 2018 शाम 7 बजे नूरी मेहबुबिया जामा मस्जिद पीलीनदी नागपुर में आल इंडिया उलमा मशाइख बोर्ड और अशरफी ग्रुप की जानिब से पुर अमन कैंडल मार्च का एहतेमाम किया गया जुलूस मस्जिद से निकल कर इलाके से होता हुवा मस्जिद पर ही खत्म हुआ जुलूस की कयादत आल इंडिया उलेमा मशायख़ बोर्ड यूथ के राष्ट्रीय अध्यक्ष हज़रत मौलाना सय्यद आलमगीर अशरफ किछौछवी ने की उन्होंने इस अवसर पर कहा कि समाज में हैवानों के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए ,बेटियों की अस्मत लूटने वालों को साज़ाए मौत दी जानी चाहिए ताकि लोगों के दिलों में ऐसा हैवानों वाला क़दम उठाने से पहले एक खौफ रहे ।
उन्होंने कहा मजलूम उसके मजहब की बिना पर नहीं देखा जाना चाहिए वह जिस भी धर्म का हो इससे कोई मतलब नहीं।
अगर समाज ज़ालिम और मजलूम का परीक्षण उसके धर्म के आधार पर करेगा तो न्याय नहीं किया जा सकता ।
उन्होंने कहा देश जिस तरह एकजुट होकर जालिमों के खिलाफ खड़ा हुआ है यह ही हमारे मुल्क की ताकत है और हमें इसे और मजबूत करना है।
हज़रत ने कहा सरकार से हमारा मुतालबा है कि रेप के मुजरिमों को साजाए मौत देने वाला कानून जल्द से जल्द बनाए और फास्ट ट्रैक कोर्ट में रेप के मुक़दमे की सुनवाई हो।
प्रदर्शन में मुख्य रूप से हाफ़िज़ अख़्तर आलम अशरफी,मोहम्मद रियाज़ अशरफी,तौफीक अंसारी, राजा भाई,इम्तियाज़ अशरफी समेत सैकड़ों लोग शामिल हुए प्रदर्शन में युवाओं ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया ।

 

By: Yunus Mohani

हुसैन मीज़ाने इन्साफ ,इन्साफ के बिना अमन मुमकिन नहीं : सय्यद मोहम्मद अशरफ

मारीशस /20 अप्रैल

‘हुसैन मीज़ाने इन्साफ, इंसाफ के बिना अमन मुमकिन नहीं “यह बात वर्ल्ड सूफी फोरम व आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने एक सभा को संबोधित करते हुए कही .
हज़रत ने पूरी दुनिया को हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के यौमे विलादत की मुबारकबाद पेश करते हुए कहा कि इमाम आली मकाम का फरमान है कि  जान का चला जाना नुक्सान नहीं, सबसे बड़ा नुक्सान किसी की नज़र से गिर जाना है’ इसीलिए जब इन्साफ नहीं मिलता तो हुक्मरान आवाम की नज़र से गिर जाते हैं जिसका नतीजा बदअमनी होती है.
उन्होंने कहा कि इन्साफ का होना बहुत ज़रूरी है, सिर्फ अदालतों में ही नहीं हमारा सबके लिए इंसाफ पसंद होना भी ज़रूरी है क्योंकि हम जो अपने लिए चाहते हैं वही दूसरों के लिए भी पसंद करें, यही तलीमे मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम है. इमामे आली मकाम फरमाते हैं कि “अगर दुनिया में इन्केलाब लाना चाहते हो तो तहजीबे नफ्स की शुरुआत खुद से करो, दुनिया खुद बखुद बदल जाएगी, हज़रत ने कहा, यह ज़रूरी बात है हम दूसरों की कमी तलाशते रहते हैं जबकि तरीका यह है कि खुद में सुधार किया जाये ताकि लोग आपको देख कर बदल जाये.
उन्होंने हज़रत इमाम हुसैन का ज़िक्र करते हुए कहा कि इमाम फरमाते हैं “वह क्या बदनसीब इंसान है जिसके दिल में अल्लाह ने जानदारों के लिए रहम की आदत पैदा न की; हज़रत ने यह बात हिन्दोस्तान में कम उम्र बच्चियों के साथ आये दिन हो रही हैवानियत का तज़किरा करते हुए कही, उन्होंने कहा कि यह वह दरिन्दे हैं जो समाज के लिए नासूर हैं और इनकी सजा मौत से कम हरगिज़ नहीं होनी चाहिए.  भारत में भी कई जगह आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड के कार्यकर्ताओं ने महिलाओं के साथ हो रही बर्बरता के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया, उत्तरप्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी बोर्ड के प्रदेश सचिव हज़रत सय्यद हम्माद अशरफ किछौछवी और मौलाना आले रसूल ,रमजान अशरफी सहित सैकड़ों लोगों ने इस बरबरियत के खिलाफ कठोर कानून की मांग की उन्होंने कहा कि ऐसे जालिमों की सजा सिर्फ मौत होनी चाहिए जो महिलाओं पर इस तरह की बरबरियत करते हैं साथ ही हम्माद अशरफ ने कहा कि इस मसले को मज़हब के चश्मे से हरगिज़ नहीं देखा जाना चाहिए ..

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AIUMB ने बलात्कारियों को फांसी की सज़ा देने के लिए राष्ट्रीय सहमति बनाने की मांग की!

13 अप्रैल 2018
कठुआ जिले में आठ वर्षीय निर्दोष लड़की की बलात्कार और हत्या की निंदा करते हुए, सूफी मुस्लिमों की सर्वोच्च संस्था, आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड ने अपराधियों को फांसी की सजा के लिए राष्ट्रीय सहमति बनाने की मांग की है।
AIUMB के राष्ट्रीय सचिव शाह हसन जामी ने कहा, “यह ‘मृत्यु दंड’ से कम नहीं होना चाहिए जो जानवरों की तरह किये गए इस वहशी और अमानवीय क्रूरता के लिए उपयुक्त है”। उन्होंने आगे कहा कि सरकार को बढ़ते हुए बलात्कार के अपराध को रोकने के लिए एक “नया कानून” लाना चाहिए।
आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड के संयुक्त सचिव व अजमेर शरीफ के गद्दीनशीन सय्यद सलमान चिश्ती ने कहा: “भारत में यौन उत्पीड़न (पास्को ) अधिनियम, में 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के साथ बलात्कार के लिए मौत की सजा पर एक संशोधन अनिवार्य है, क्योंकि भारत में बलात्कार की कई क्रूर घटनाएं हुईं जहां पीड़ितों में ज्यादातर लड़कियां थीं,” ।
इस त्रासदी के महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए, वर्ल्ड सूफी फोरम के प्रवक्ता, लेखक और मीडिया सह-समन्वयक, गुलाम रसूल देहलवी ने कहा: “असिफा की क्रूर बलात्कार और बेरहम हत्या-एक भारतीय बेटी के साथ किये गए भयानक अपराध के तौर पर देखा जाना चाहिए हमारी आँखें खुलनी चाहिए मगर सावधान! इसे देश में हिन्दू मुस्लिम मानसिकता के रूप में चित्रित नहीं किया जाना चाहिए। यदि कोई मुस्लिम, हिंदू, दलित या किसी अन्य धर्म, पंथ या जाति का शिकार हो, तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। “अपराध उतना ही संगीन और निंदनीय रहेगा।
श्री देहलवी ने कहा: “कुछ ऐसे लोग हैं जो निर्दोष असिफा के साथ हुई बर्बरता को इस तरह देख रहे हैं कि क्योंकि वह मुस्लिम बेटी हैं, गुर्जर और बकरवाल आदिवासी समुदाय से संबंधित हैं। हालाँकि किसी भी भारतीय नागरिक के लिए जो इस भयानक विकास से ईमानदारी से चिंतित हैं, उसे कोई फर्क नहीं पड़ता- मुस्लिम या हिंदू हमें जो चिंता है, वह झूठी धार्मिक पहचान के भेस में क्रूरता और उत्पीड़न है और धर्म के आधार पर किसी भी विभाजन से ऊपर उठने वाले सभी पीड़ितों के लिए न्याय कि मांग होनी चाहिए। कठुआ की 8 वर्षीय मुस्लिम लड़की और उन्नाव की 18 वर्षीय हिंदू लड़की, क्रूरता की प्रकृति रखने वाले ‘अमानवीय’ पुरुषों की शिकार हुई हैं। वे एक सभ्य समाज का हिस्सा नहीं थे हमें उनके भारतीय होने की वजह खुद को शर्मिंदा महसूस करना चाहिए। हालांकि, भारत में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की भावना को ट्रिगर नहीं करना चाहिए। ”
उन्होंने कहा: “प्रधान मंत्री ने देश को आश्वासन दिया है कि कोई अपराधी बख्शा नहीं जाएगा और” हमारी बेटियों को निश्चित रूप से न्याय मिलेगा”, हमें देखना होगा कि क्या पूरा न्याय दिया जाएगा। और यह केवल तभी संभव है जब बलात्कार के अपराधियों को मृत्यु के लिए फांसी दी जाती है”।
इस संबंध में, aiumb के कार्यवाहक सचिव और एक वरिष्ठ पत्रकार श्री यूनुस मोहानी ने एक चुभता हुआ सवाल उठाया। उन्होंने पूछा: “क्या यह ‘न्यू इंडिया’ ‘उदार और प्रगतिशील’ लोगों से संबंधित है, जो लंबे समय तक अपने समाज में ऐसे घिनौने अपराधों को देख रहे हैं, और अब लगभग एक दैनिक आधार पर?” उन्होंने कहा क्योंकि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में भी कहा है”, “हमें समझ में नहीं आता हैं कि आरोपी को गिरफ्तार करने की बजाय पुलिस ने क्यों शिकायतकर्ता को पहले गंभीर मामलों के संबंध में गिरफ्तार किया है।

By: Ghulam Rasool Dehalvi

अयोध्या मुद्दे का समाधान केवल बातचीत से: सय्यद मोहम्मद अशरफ

नौतनवा: 1 April 2018
भारत नेपाल सीमा पर स्थित नौतनवा में आयोजित एक कार्यक्रम में शिरकत करने आये वर्ल्ड सूफी फोरम एवं ऑल इंडिया ओलेमा मशाइख बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष सैय्यद मोहम्मद अशरफ मियां कछौछवी ने कहा कि देश में अमन कायम रखने के लिए हम सभी को प्यार और मोहब्बत के साथ रहने की जरूरत है।
इस दौरान उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि आयोध्या मसले का हल केवल आपस मे बातचीत से हो सकता है, क्योंकि सियासतदानों ने अपना काम तो कर ही दिया है, अब हम हिंदुस्तान वासियों का काम बचा है और हमें अपनी जिम्मेदारियां निभाना चाहिए और बातचीत से इस मसले का हल निकालना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हम लोग मंदिर और मस्जिद की बात कर रहे है लेकिन इंसानी जिंदगी के बारे में नही कुछ कर रहे है, देश मे नफरत का माहौल बनाने से किसी चीज का हल नहीं निकल सकता इससे इंसानियत जरूर खतरे में पड़ेगी, हमारे मुल्क की गंगा जमुनी तहजीब जरूर खतरे में पड़ेगी और हमारी जो सुपर पावर बनने की रेस है कहीं इन्हीं वजहों से पीछे ना हो जाए इस लिए बातचीत से अयोध्या मसले का कोई न कोई हल निकल आएगा

सियासत ने अपना काम कर दिया है आग आपको बुझानी है : सय्यद मोहम्मद अशरफ

30 मार्च/ कोल्हिपुर महाराजगंज,
“सियासत ने अपना काम कर दिया है आग आपको बुझानी है ” ये बात वर्ल्ड सूफी फोरम एवम् आल इंडिया उलमा व मशायख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने एक जलसे को संबोधित करते हुए कही।
हज़रत ने कहा बिहार, बंगाल में जो कुछ चल रहा है अगर उसे वक़्त रहते नहीं रोका गया तो पूरा देश इसकी चपेट में आ जाएगा और मुल्क के लिए इससे बुरा कुछ नहीं होगा ,उन्होंने कहा जिस तरह लोग सड़कों पर धर्म बचाने निकल पड़े हैं अगर यह लोग धर्म का पालन कर लेते तो इनके हाथ में हथियार नहीं गुलाब के फूल होते।
सियासत अपनी घिनौनी चाल चल रही है और बेरोजगारों की भीड़ उनके इशारे पर नाच रही है नतीजा आगजनी पथराव हत्या लूट ,अगर लोगों ने जल्दी यह बात नहीं समझी तो देश का बड़ा नुक़सान होगा लिहाज़ा सरकारों की पहली ज़िम्मेदारी है कि वह हालात संभाले और निष्पक्षता के साथ कार्यवाही करते हुए दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दे।
हज़रत ने कहा लोगों को याद रखना चाहिए कि मंदिर और मस्जिद का फायदा तब है जब आप ज़िंदा हैं इंसान नहीं होगा तो इनका क्या फायदा और हम इंसान मार रहे हैं इन इबादतगाहों के लिए सामाजिक सदभावना को खतम करने की नापाक कोशिश की जा रही है ,गंगा जमुनी तहजीब को तार तार किया जा रहा है, ऐसे समय में जरूरत है ख्वाजा गरीब नवाज के मिशन पर काम किया जाए, मिशन यह है कि मोहब्बत सबके लिए नफरत किसी से नही अगर सब इसपर अमल कर लें तो इस आग को रोका सकता है।

By: Yunus Mohani

ख्वाजा ग़रीब नवाज़ की विचारधारा को मानने वाले ज़ालिम नहीं हो सकते : सय्यद मोहम्मद अशरफ

24 मार्च/ अजमेर
चिश्ती मंज़िल दरगाह अजमेर शरीफ में आल इन्डिया उलमा व मशाइख बोर्ड ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की जिसकी अध्यक्षता बोर्ड के संरक्षक हज़रत मौलाना सय्यद मेहदी मियाँ चिश्ती साहब ने की। उन्होंने कहा कि दुनिया में जिस तरह बारूद की बू फ़ैल गई है उसे वापिस खुशबूदार बनाने के लिए मोहब्बत वाली खुशबू चाहिए जो गरीब नवाज़ के दर के फूलों से आती है ।हज़रत ने कहा कि गरीब नवाज़ मिशन इंसानियत की सेवा है तड़पती हुई इंसानियत का इलाज गरीब नवाज़ ने किया और अबतक उनके मिशन पर चलने वाले यह काम कर रहे हैं।हज़रत ने सभी उर्स की मुबारकबाद दी। वर्ल्ड सूफी फोरम एवं आल इन्डिया उलमा व माशाइख़ बोर्ड के संस्थापक व अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि इस बारगाह से हमेशा मोहब्बत की तालीम मिली है, यहां लोगो को गले लगाना सिखाया जाता है, गला काटने की बात करने वालों का यहां से कोई वास्ता नहीं। इस बात से यह पहचान करना आसान है कि दहशतगर्द कौन हैं।
हज़रत ने कहा कि हम ख्वाजा के दर से इराक़ में दहशतगर्दों के ज़रिए भारतीय नागरिकों को क़त्ल किए जाने की कड़ी निंदा करते हैं साथ ही यह ऐलान फिर से करते हैं कि इन दहशतगर्दों का इस्लाम से कोई वास्ता नहीं, न सिर्फ इस्लाम बल्कि दुनिया के किसी भी धर्म से इनका ताल्लुक नहीं, क्योंकि मजहब मोहब्बत की तालीम देते हैं।
उन्होंने पूरी दुनिया के लोगों को उर्स गरीब नवाज़ की मुबारकबाद देते हुए कहा कि आईये गरीब नवाज़ के पैगाम “मोहब्बत सबके लिए नफरत किसी से नहीं” को आम करते हुए आपसी दूरियां मिटा दी जाए और देश में अमन की फिजा को और मजबूत किया जाए।
बोर्ड के राष्ट्रीय कार्यकारणी सदस्य हज़रत सय्यद अम्मार अहमद अहमदी उर्फ नय्यर मिंया ने कहा कि सूफिया की तालीम मज़लूम की हिमायत है न की ज़ुल्म करना, गरीब नवाज़ की बारगाह में असली हिन्दुस्तान दिखता है जहां बिना मजहब का फर्क किए, रंगो नसल का इम्तियाज़ किए बिना लोग मोहब्बत के साथ आते हैं और लंगर खाते हैं। उन्होंने कहा, गरीब नवाज़ की बारगाह में आकर वासुदेव कुटंबुकम की जो धारणा है वह दिखाई देती है।
बोर्ड के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव हाजी सय्यद सलमान चिश्ती ने सभी लोगों को ख्वाजा गरीब नवाज़ के 806 वे उर्स की मुबारकबाद दी और कहा कि आल इन्डिया उलमा व मशाइख बोर्ड हुज़ूर गरीब नवाज़ के मिशन को लेकर आगे चल रहा है, हम हर तरह की नफरत का कड़ा विरोध करते हैं, हमारा मिशन गरीब नवाज़ का मिशन है, यानी हर मज़लूम की हिमायत करना और सबके साथ मोहब्बत का सुलूक करना है।उन्होंने कहा,हम विश्व बंधुत्व का संदेश देते हैं, हम सब मिलकर पूरी दुनिया को मोहब्बत से जीत लें और नफरतों को हरा दें।

By: यूनुस मोहानी

इंसानियत की भलाई है ख्वाजा का मिशन : सय्यद मोहम्मद अशरफ

22 मार्च /नागौर,
‘इंसानियत की भलाई है ख्वाजा का मिशन’ वर्ल्ड सूफी फोरम और आल इंडिया उलेमा व मशाइख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने यह बात जश्ने ख्वाजा गरीब नवाज़ नाम से आयोजित एक महफ़िल में कही .
हज़रत ने कहा कि दर्द और ज़ुल्म से तड़पती हुई इंसानियत की भलाई के लिए हम सबको हज़रात ख्वाजा गरीब नवाज़ रहमतुल्लाह अलहि के मिशन पर चलना होगा क्योंकि इन्सानी हमदर्दी और भलाई की फ़िक्र में ही तमाम परेशानियों का हल छुपा हुआ है .
उन्होंने कहा कि गरीब नवाज़ की तालीम है कि भूखों को खाना खिलाओ अपने दुश्मन पर भी मेहरबानी करो अगर हम इन बातों पर अमल करने लग जाएँ तो खुद बखुद कई मसले खतम हो जायेंगे .बारगाहे गरीब नवाज़ से वाबिस्ता होने का यह मतलब नहीं कि सिर्फ हम उनके नामलेवा बने रहे बल्कि असल हक तब अदा होगा जब हम उनकी तालीम पर अमल भी करें उनके दिखाए गये रास्ते पर चलें ,इल्म हासिल करें .
हज़रत गरीब नवाज़ के पैगाम मोहब्बत सबके लिए नफरत किसी से नहीं को आम कर दीजिये इसके लिए बस आपको मोहब्बत वाला बन कर निकलना होगा सबके साथ से बेहतर सुलूक कीजिये आपसी झगड़ों को पहले खतम कीजिये और अपने मोहब्बत वाले सुलूक से लोगों का दिल जीतिये ,क्योंकि असली हुकूमत तो दिलों पर होती है गरीब नवाज़ लोगों के दिलों पर हुकूमत करते हैं.
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यूनुस मोहानी

ख़ुदा की बन्दगी और बन्दों की सेवा करना ही ख्वाजा ग़रीब नवाज़ का मिशन: सैयद मोहम्मद अशरफ

मकराना में जश्न ए ख्वाजा ग़रीब नवाज़ के अवसर पर ऑल इंडिया उलमा व मशाइख़ बोर्ड के अध्यक्ष का ख़िताब

22 मार्च / मकराना, नागौर (प्रेस विज्ञाप्ति) कल रात नागौर शरीफ के मकराना में जश्न ए ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ कार्यक्रम का आयोजन हुआ जिसमें विशेष रूप से आमंत्रित ऑल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड और वर्ल्ड सूफी फोरम के अध्यक्ष हज़रत सैयद मोहम्मद अशरफ किछोछ्वी साहब ने कहा कि हज़रत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती का मिशन ख़ुदा की बन्दगी और उस के बन्दों की सेवा करना है।
हज़रत ने विशेष रूप से कार्यक्रम में आए हुए युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि आप देश का भविष्य हैं, आप को अपनी शिक्षा को लेकर संवेदनशील होना होगा, आज मुस्लिम वर्ग क्यों पिछड़ा है, उसका सब से बड़ा कारण है कि कोशिश और मेहनत करने से पहले ही हार मान लेते हैं कि हम शिक्षा प्राप्त कर के क्या करेंगे जब हमें नौकरियां ही नहीं मिलेंगी। यह गलत सोच है, हज़रत ने कहा कि अगर कोई युवा दिन में आठ घंटे पढ़ाई के लिए समय निकालता है तो आप दस घंटे पढ़ाई के लिए समय निकालें, साथ ही कहा कि शिक्षा प्राप्त करने का उद्देश्य केवल पैसा प्राप्त करना न हो बल्कि हर विभाग में अपना प्रतिनिधित्व होना चाहिए जिस से अपने देश, समाज और कौम की सेवा कर सकें।
हज़रत ने कहा कि आज हम जिन के नाम पर यहाँ इकठ्ठा हुए हैं उनका मिशन शिक्षा प्राप्त करना था, आपने कहा कि मुस्लिम क़ौम कब तक मज़लूमियत का रोना रोती रहेगी, अब समय आ गया है कि मज़लूमियत का रोना बंद करें और कड़ी मेहनत करना शुरू करें। हमारे उज्ज्वल भविष्य का निर्माण वर्तमान प्रतिक्रिया के आधार पर पर टिका हुआ है। नींव को उत्तेजक बना कर निर्माण पूरा कर लें या हार मान कर भविष्य के निर्माण की उम्मीदों के किले अभी गिरा दें, यह आपके हाथ में है।
कार्यक्रम में मौलाना मोहम्मद अबरार अशरफी नाज़िम जामिया हनफ़िया नजमुल उलूम, हाफिज़ मोहम्मद अशरफ शेरानी, मौलाना अरफात अज़हरी, मौलाना मोहम्मद मुस्तक़ीम शेरानी, मौलाना अब्दुल रहमान, हाफिज़ मोहम्मद रिज़वान, हाफिज़ मोहम्मद नदीम, मौलाना मोहम्मद शाहरुख, मौलाना मोहम्मद शाकिर, मौलाना मोहम्मद रफीक़, मौलाना मोहम्मद जावेद और अज़मत अली, अयूब खान शेरानी, यूसुफ खान शेरानी, अब्दुल ग़फ्फार खान के अलावा मकराना की सभी मस्जिदों के इमाम और कई लोगों ने भाग लिया, कार्यक्रम का अंत देश में शांति की दुआ और सलात व सलाम के साथ हुआ।

By:
हुसैन शेरानी

जो लोगों के लिए आसानी पैदा करे उस पर दोज़ख़ की आग हराम : सय्यद मोहम्मद अशरफ

21 मार्च / हनुमानगढ़,
“जो लोगों के लिए आसानी पैदा करे उस पर दोजख की आग हराम है” यह विचार वर्ल्ड सूफी फोरम और आल इन्डिया उलमा व मशाइख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने कल एक जलसे को खिताब करते हुए कही, उन्होंने कहा कि प्यारे अाक़ा सरवरे आलम सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम का इरशाद है कि जिसने अपने लोगों के लिए आसानी पैदा की उस पर जहन्नुम और जहन्नुम की आग पर वह शख्स हराम कर दिया गया ।
उन्होंने कहा, सूफिया ए किराम ने सबके लिए आसानी पैदा की और लोगों को बुराई से भलाई की तरफ लगा दिया, उनका मिशन मोहब्बत है और नफरत की हर बात इनके यहां मना है, इनकी बारगाहों में दिलों को संभाल कर आया जाता है क्योंकि इनकी नजर हमारे ज़ाहिर पर नहीं हमारे दिलों पर होती है।
हज़रत ने कहा दुनिया भूजल संरक्षण दिवस मना रही है, प्यारे नबी का इरशाद है कि “पानी को बर्बाद न करो चाहे तुम्हारे पास झरना ही क्यों न हो “नबी ने यह बात आज से 1400 साल पहले कही, दुनिया आज इसके लिए परेशान है, यानी अगर तालीमे नबी पर अमल किया जाए तो हर समस्या का आसानी से हल निकाला जा सकता है।
उन्होंने कहा, पूरी दुनिया तरह तरह की चोरियों से परेशान है, किसी का डाटा महफूज़ नहीं है लेकिन अल्लाह का निज़ाम यह है कि क़ुरआन का एक एक लफ्ज़ महफूज़ है यह उसकी कुदरत की शान है।

By: यूनुस मोहानी

अल्लाह के हुक्म के पाबंद हो जाओ सड़कों पर आंदोलन नहीं करने पड़ेंगे – सय्यद अशरफ

16 मार्च / हनुमानगढ़
अल्लाह के हुक्म के पाबंद हो जाओ सड़कों पर आंदोलन नहीं करने पड़ेंगे” यह बात वर्ल्ड सूफी फोरम और आल इन्डिया उलमा व माशाइख बोर्ड के संस्थापक, अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने कही।
हज़रत ने कहा कि मौजूदा वक़्त में देश में जिस तरह तीन तलाक़ को लेकर जो मामला चल रहा है और हर तरफ से शरीयत बचाने की आवाज़ लग रही है उनसे पूछा जाना चाहिए कि शरीयत हमें बचाने के लिए है या हम शरीयत को बचा सकते हैं, उन्होंने कहा शरीयत अमल करने की चीज है उस पर अमल कीजिए आपको सड़कों पर उतरना नहीं पड़ेगा ।
उन्होंने कहा कि हमारे नबी रहमते आलम सल्लल्लहू अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया कि निकाह को आसान कर दो हमने उसे मुश्किल कर दिया है आज एक लड़की का बाप हर वक़्त फिक्र में है कि कैसे अपनी बेटी का निकाह करे, दहेज की लानत को हमने अपने ऊपर लाद लिया है, हमें हुक्म है कि निकाह आसान कर दो ताकि ज़िना मुश्किल हो जाए हमने उसका उल्टा किया तो अब सवाल यह है कि क्या ऐसे शरीयत बचेगी ?
हज़रत ने कहा कि निकाह इस तरह मुश्किल हो गया है कि एक ज़िंदगी गरीब बाप को कम लगने लगी है और जिस चीज को अल्लाह और उसके रसूल ने सबसे ज़्यादा ना पसंद किया उसे इस क़दर आसान कर दिया कि एक लम्हे में रिश्ता ख़तम कर दिया जाता है, इस बात का ख्याल भी नहीं कि वह खातून तुम्हारे बच्चो की मां है,आखिर क्या होगा उस औरत का ?
उन्होंने साफ कहा कि अल्लाह के हुक्म के पाबंद हो जाओ, निकाह को आसान करो दहेज की लानत से बचो और जिस चीज को अल्लाह और उसके रसूल पसंद नहीं करते उसके करीब भी मत जाओ खुद बखुद आसानियां हो जाएंगी और सड़कों पर यह आन्दोलन नहीं करने होंगे।

By: यूनुस मोहानी