सरकार शिक्षा और रोजगार पर ध्यान दे : सय्यद मोहम्मद अशरफ

19जनवरी/ बुरहानपुर
सरकार शिक्षा और रोजगार पर ध्यान दे,आल इन्डिया उलमा व मशायख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने सरकार को चेताते हुए यह बात कही. उन्होंने कहा देश युवाशक्ति को सही दिशा दिए बिना आगे नहीं बढ़ेगा. देश का विकास युवाओं को बेहतर शिक्षा व्यवस्था और रोजगार देने से होगा। वह यहां मीडिया से रूबरू थे।
हज सब्सिडी खत्म किए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा, हम इस क़दम का स्वागत करते हैं साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर सरकार अपने बयान के मुताबिक़ सब्सिडी की रकम मुस्लिम समाज की बच्चियों की शिक्षा पर खर्च करेगी तो समाज के गरीब वर्ग को इसका फायदा पहुंचेगा।
उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री का बयान कि “हम मदरसों के खिलाफ नहीं और सरकार इन्हें बंद नहीं करने जा रही बल्कि इसमें अच्छी व्यवस्था हो” का भी स्वागत योग्य है, सरकार को सभी नागरिकों के हित में काम करना चाहिए यही लोकतंत्र का तकाजा है।
उन्होंने कहा, जिस तरह देश में बेरोजगारों की भीड़ बढ़ रही है यह खतरनाक है हमारे नौजवान अवसाद ग्रस्त हो रहे हैं और गलत राह पर जा रहे हैं. जिसका नतीजा दिन प्रतिदिन बढ़ता अपराध का ग्राफ है। सरकार को इस और देखना होगा, न सिर्फ केंद्र सरकार बल्कि राज्य में बैठी सरकारों को भी प्रबंध करना चाहिए वरना देश खतरे में है।
हज़रत ने कहा, सूफी संतो की यह पावन धरती आज नफरत की आग में झुलस रही है, सभी को इसे बचाने के लिए आगे आना होगा। हज़रत ने कहा कि ख्वाजा गरीब नवाज़ का यह कौल कि “मोहब्बत सबके लिए नफरत किसी से नहीं” आज बहुत ज़रूरी है क्योंकि इसपर अमल करके ही नफरत को हराया सकता है।

मस्जिदों को नमाजियों से भर दें लाउडस्पीकर की इजाज़त ले: सय्यद मोहम्मद अशरफ

संभल/ 8 जनवरी
मस्जिदों को नामाजियो से भर दें और लाउडस्पीकर की प्रशासन से इजाज़त लें यह बात आल इन्डिया उलेमा व मशायख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने संभल में एक जलसे को संबोधित करते हुए कही ।हज़रत ने साफ तौर पर कहा कि मुसलमान लाउडस्पीकर की आवाज़ की वजह से नमाज़ नहीं पड़ता बल्कि अपने रब के हुक्म से नमाज़ पढ़ता है हमें इस बात को अमली तौर पर बताना होगा।
उन्होंने कहा कि लाउडस्पीकर के लिए जो भी कानूनी तरीका हो उसे अपना कर इजाज़त हासिल करे और क़ानून का पूरा पालन करते हुए अपने दीनी फरीजे को भी पूरा करें । हज़रत ने लोगों से होश से काम लेने की बात कही जज्बात को काबू में रखते हुए काम करे ताकि नफरत अपने मकसद में हरगिज़ कामयाब न हो सके और मोहब्बत के फूल की खुश्बू पूरे चमन को महका दे।
हज़रत किछौछवी ने यह भी कहा कि मस्जिदों को हमे भरना होगा यह हमारी ज़िम्मेदारी है जिसे मुसलमान जान तो रहे हैं लेकिन अमल नहीं कर रहे हम जिस चीज का खुद ख्याल नहीं रख रहे अगर उसे लेकर बात होती है तो गलती हमारी है ,लोग आज तरह तरह से हमे उकसाने की साजिश रच रहें है हमें होशियार रहना होगा ।
अल्लाह के वालियो ने अल्लाह के हुकम और नबी की तालीम को हम तक पहुंचाया अगर हम औलिया अल्लाह से मोहब्बत रखते हैं तो मोहब्बत का तकाजा है कि महबूब की अदा को अपनाया जाय।

By: Yunus Mohani

इस्लाम की तालीम मोहब्बत है और मदरसे इसे हासिल करने की जगह: सय्यद मोहम्मद अशरफ

11 जनवरी /दार्जलिंग
इस्लाम की तालीम मोहब्बत है और मदरसे इसे हासिल करने की जगह”यह बात आल इंडिया उलमा व माशायख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने एक धर्म सभा को संबोधित करते हुए कही , उत्तर प्रदेश शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिज़वी द्वारा मदरसों में आतंकवाद की तालीम दिए जाने के बयान पर बात करते हुए उन्होंने साफ़ कहा अपने सियासी आकाओं को खुश करने और खुद को जेल की सलाखों से बचाने के लिये वह नफरत की सियासत कर रहे हैं और मदरसों को बदनाम करने की घिनौनी कोशिश में लगे हैं उनकी बात का सच से कोई तल्ल्लुक नहीं है .
हज़रत ने भारत सरकार और उत्तरप्रदेश सरकार दोनों से वसीम रिज़वी की जाँच कराकर उनके ज़रिये किये गए वक्फ घोटालों को उजागर कर इन्हें कड़ी सजा देने की मांग की क्योंकि मदरसे मोहब्बत की तालीम देते हैं ,धर्म नफरत नहीं सिखाता तो फिर जहाँ धर्म कि तालीम होती है वहां नफरत को फैलाने वालों का क्या काम .हज़रत ने पैगम्बरे अमन –ओ –शांति हज़रत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलहि वसल्लम की हदीस का ज़िक्र करते हुए कहा कि मोमिन आईने की तरह होता है जिसमे जो खुद जैसा होता है वैसी ही शक्ल आईने में दिखती है क्योंकि आइना झूट नहीं बोलता अगर कोई इंसान बुरा है तो उसे सामने बुराई ही नज़र आएगी वसीम रिज़वी को इसपर गौर करना चाहिए .
उन्होंने कहा लोगों को नफरत की नयी नयी चालों से होशियार रहना होगा और मोहब्बत से नफ़रत को मिटाना होगा ,हम सब की ज़िम्मेदारी है कि जो नफरत की बात करे उसका सामाजिक बहिष्कार करें मज़हब के नाम पर नफरत के व्यापारियों के धंधे को पनपने न दें .मोहब्बत सबके लिए नफरत किसी से नहीं के उसूल पर ज़िन्दगी गुजारें यही वह फार्मूला है जिससे शांति को कायम रखा जा सकता है .

By: Younus Mohani

मोहब्बत ज़िन्दगी है नफरत मौत : सय्यद मोहम्मद अशरफ

गोरखपुर/19 दिसम्बर
मोहब्बत ज़िन्दगी है और नफरत मौत यह बात कल मोहल्ला तुर्कमान गोरखपुर में एक धर्मसभा को संबोधित करते हुए आल इंडिया उलेमा व मशायख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने कहीं ,उन्होंने कहा नफरत समाज को तोड़ती है और मोहब्बत सभ्य समाज का निर्माण करती है ,नफरत आग लगाती है मोहब्बत उस आग को बुझाने का काम करती है,धर्म का संदेश मोहब्ब्त है और अधर्म नफरत है, फैसला आपको करना है कि आप धर्म के साथ हैं या अधर्म के।
हज़रत ने कहा लोग देश को तोड़ने की साजिश रच रहे हैं ,अफवाहों के बाज़ार गर्म है ऐसे माहौल में पैगम्बर हजरत मुहम्मद मुस्तफा सल्लललाहू अलैहि वसल्लम की शिक्षाओं पर अमल करके हम न सिर्फ अपने प्यारे देश बल्कि पूरे संसार में शांति स्थापित कर सकते हैं,उन्होंने कहा खास तौर से हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम आपसी रिश्तों को मजबूत करे पड़ोसी के हक अदा करे साफ सफाई का ध्यान रखे ।
अपने धर्म पर पूरी तरह अमल करते हुए दूसरों की धार्मिक भावनाओं एवं धर्म का सम्मान करें,यही पैग़म्बरे इस्लाम की तालीम है अगर हम इसपर अमल नहीं करते तो हमारा मोहब्ब्त का दावा कमजोर है।देश के मौजूदा हालात पर बोलते हुए हज़रत ने कहा नफरत रोज़ नई सूरत में दिखाई दे रही है लोगों की इज्जत ,जान और माल सब वहशी दरिंदों के निशाने पर है देश का सम्मान तिरंगा भी इस बिगड़ी भीड़ को रास नहीं आ रहा और धर्मांध लोग इसे अपमानित कर रहे हैं सरकार को ऐसे तत्वों से सख्ती से निपटना होगा और सभी शांति के समर्थकों को एक साथ आकर इनके खिलाफ खड़ा होना होगा। हमे अपराधी धर्म आधार पर नहीं देखना चाहिए और न ही पीड़ित को अगर किसी पर भी ज़ुल्म होता है तो ज़ालिम का विरोध करना होगा।क्योंकि अपराधी सिर्फ अपराधी है हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई के रूप में उसकी पहचान नहीं की जानी चाहिए।
जलसे में बड़ी संख्या में लोगों ने शिरकत की जलसे का समापन सलातो सलाम के बाद मुल्क में अमन की दुआ के साथ हुआ।

By: Yunus Mohani

अमन वालों की ख़ामोशी भी ज़ुल्म है : सय्यद अशरफ

कोटा /11 दिसम्बर “अमन वालों कि ख़ामोशी भी ज़ुल्म है’ यह बात आल इंडिया उलेमा व मशायख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने एक जलसे में ख़िताब करते हुए कही .हजरत ने कहा सिर्फ ज़ुल्म करना ही इंसान को ज़ालिम नहीं बनाता बल्कि किसी के किसी के साथ ज़ुल्म करने पर खामोश रहना भी हमे ज़ालिम बनाता है .

उन्होंने कहा जिस तरह आये दिन वहशी दरिन्दे मजलूमों को अपना शिकार बना रहे है उन्हें मज़हब के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए बल्कि उन्हें दरिन्दे के तौर पर देखा जाना चाहिये और उनके खिलाफ इंसानियत के तकाजे पर खड़ा होना चाहिए, लेकिन समाज में जिस तरह की नफरत घुल रही है वहां धर्म पैमाना बनता जा रहा है, जोकि धर्म है ही नहीं ,क्योंकि धर्म मोहब्बत का सन्देश देता है, ज़ुल्म को समाप्त करने का मार्ग दिखाता है, न कि हमें हिंसक पशु बनाता है .

हज़रत ने कहा पैगम्बरे अमनो शांति सल्लललाहूअलहिवसल्लम की तालीमात पर अमल करने से आदमी इंसान बनता है और इंसान ज़ालिम नहीं होता, क्योंकि ज़ालिम आदमी हो सकता है इंसान नहीं.हज़रत ने बिना धर्म सम्प्रदाये का फर्क किये अमन वालों से ज़ुल्म के खिलाफ खड़े हो जाने की अपील की. उन्होंने कहा कि रसूले खुदा का फरमान है कि ज़ालिम और मजलूम दोनों की मदद करो ज़ालिम की मदद यह है कि उसे ज़ुल्म से रोक दिया जाये .
अमन वालों की ख़ामोशी ज़ालिम को और ज़ालिम बनाती है इस चुप्पी को तोडना होगा सबको मोहब्बत के साथ एक जुट होकर ज़ालिम के खिलाफ खड़ा होना होगा पैगाम वही है “मोहब्बत सबके लिए नफरत किसी से नहीं “
जलसे को मौलना उमर अशरफी ने भी संबोधित किया और हजारों की संख्या में लोग मौजूद रहे .

BY: Yunus Mohani

बिके हुए लोग अफवाहों को हवा देकर नफरत फैला रहे हैं :सय्यद मोहम्मद अशरफ

संतकबीर नगर /9 दिसम्बर
बिके हुए लोग अफवाहों को हवा देकर नफरत फैला रहे है यह बात संतकबीनगर ज़िले के धर्मसंघवा नामक स्थान पर एक कार्यक्रम में बोलते हुए आल इंडिया उलमा व मशायख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने कहीं ।
उन्होंने कहा, पूरी दुनिया में अफवाहों के कारोबारी ज़हर बेच रहे हैं हर तरफ ज़ुल्म हो रहा है, ऐसे में अगर अमन वाले लोग खामोश रहे तो दुनिया जल जायेगी, हमे न सिर्फ इस प्यारे वतन को बल्कि पूरी दुनिया को बचाने के लिए आगे आना होगा, अफवाहों पर ध्यान न दें आपस में मोहब्बत को बढ़ाइए ।
हज़रत ने कहा मुल्क में वहशी भेड़ियों की एक टोली घूम रही है जो ज़ुल्म के अंधेरे को कायम करना चाहती है ताकि अमन के उजाले को ख़तम कर दिया जाय, राजस्थान ,शब्बीरपुरा,दादरी ,हरियाणा इसी मंसूबे की कड़ियां हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि न कोई मुस्लिम हिन्दू से नफरत करता है न कोई हिन्दू मुसलमान से, न सिख ईसाई से, नफरत तो सियासत का घिनौना हथियार है जिसको मजहब का लिबास पहना कर ज़ुल्म किया जा रहा है। हज़रत ने कहा याद रखिए अगर ज़ुल्म के खिलाफ नहीं खड़े हुए तो आप भी मुजरिम हैं आप भी ज़ालिम साथ दे रहें है,लिहाज़ा मोहब्ब्त का दिया रोशन किजिए नफरत को नकार दीजिये ।हमारा पैग़ाम वही है मोहब्बत सबके लिए नफरत किसी से नहीं।
जलसे में मौलाना अली अहमद बिस्मिल अजीजी और मौलाना मकबूल सालिक मिस्बाही ने भी अपने ख्यालात का इजहार किया।

By: यूनुस मोहानी

पैग़म्बर -ए-अमन की तालीम पर अमल से ही दुनिया में अमन मुमकिन : सय्यद मोहम्मद अशरफ

कोलकाता/1दिसंबर
पैग़म्बर –ए-अमन की तालीम पर अमल सेे ही दुनिया में अमन मुमकिन है, यह बात एक जश्ने ईद मिलादुन्नबी प्रोग्राम में शिरकत करने कोलकाता आए आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने कहीं। उन्होंने आक़ा अलैहिस्सलाम की एक हदीस बयान की ”तुम्हारे शर (उत्पीड़न)से अगर तुम्हारा पड़ोसी सुरक्षित नहीं है तो तुम मोमिन नहीं हो सकते” और कहा कि अगर पूरी दुनिया इस पर अमल कर ले तो पूरी दुनिया में अमन कायम हो सकता है, क्योंकि एक इंसान दूसरे इंसान का पड़ोसी है, इसी तरह एक मोहल्ला दूसरे मोहल्ले के, एक गांव दूसरे गांव का, शहर दूसरे शहर का, एक प्रदेश दूसरे प्रदेश का, एक देश दूसरे देश का, इस तरह पूरी दुनिया एक दूसरे की पड़ोसी है, लिहाज़ा न किसी फौज की ज़रूरत होगी, न सुरक्षा की, न हथियारों की और यह धन स्वास्थ्य और शिक्षा पर खर्च होगा और दुनिया में अमन क़ायम हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि सबलोग मिलकर आक़ा की यौमे मीलाद मनाएं, इस दिन को यौमे अमन के तौर पर मनाया जाये, लोग मज़लूमों, ग़रीबों,बीमारों और यतीमों की खूब मदद करें और मज़हब और संप्रदाय देखे बिना लोगों की मदद करते रहें।
उधर बोर्ड के ऐलान पर पूरे भारत में आज बोर्ड की यूनिट में वृक्षारोपण का कार्यक्रम संपन्न हुआ, इसी क्रम में महाराजगंज शाखा में भी वृक्षारोपण कार्यक्रम संपन्न हुआ. इस मौके पर मुख्य मोहम्मद इद्रीस अशरफ़ी, रफ़ीक़ अशरफ़ी, इम्तियाज कुरैशी, मोबीन अशरफ़ी, गुलाम रसूल, मोहम्मद सलीम, फरमान कुरैशी, रशीद मोहम्मद साहब और शमीम अशरफ़ी मौजूद रहे।

By: यूनुस मोहानी

मज़लूमों की मदद है आक़ा अलैहिस्सलाम की मीलाद मानने का तरीक़ा : सय्यद मोहम्मद अशरफ

पूना/30 नवंबर
मज़लूमों की मदद है आका अलैहिस्सलाम की मीलाद मनाने का एक तरीक़ा, यह बात आल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने पूना में आयोजित एक धर्मसभा में कहीं,हज़रत ने कहा कि मुस्तफा करीम सल्ललल्लाहू अलैहि वसल्लम की मीलाद से मज़लूमों को ज़ुल्म से निजात मिली, गुमराहियों के घनघोर अंधेरों से छुटकारा मिला और तौहीद की रोशनी नसीब हुई, जहां खुद से खुद पर किए जा रहे ज़ुल्म से इस तरह निजात मिली वहीं ज़ालिमों के ज़ुल्म से भी लोगों को आजादी मिली, औरतों, यतीमों, गरीबों और मिस्कीनो को इज्जत से ज़िन्दगी गुजारने की आज़ादी और अधिकार मिले, यानी आक़ा की मीलाद से मज़लूमों को ज़ुल्म से निजात मिली, लिहाज़ा हमें इसे यौमे अमन के तौर पर मनाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि बेहतर से बेहतर तरीक़े से हमें लोगों तक मदद पहुंचाना चाहिए, लोगों की ज़रूरतों का ख्याल रखा जाना चाहिए, यातीमों ,बेवाओं,गरीबों का ख्याल रखिए, बीमारों की अयादत कीजिए, महफ़िल सजाइए, लोगों में खाना बांटिए, दुरूद और सलाम की महफ़िल कीजिए, जुलूस निकालिये लेकिन ख्याल रहे कि यह रहमते आलम की मीलाद का जुलूस है, किसी को कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए, अपने घर और मोहल्ले को साफ सुथरा कीजिए और सबको इस जश्न में शामिल होने की दावत दीजिए।
हज़रत किछौछवी ने हरे झंडे के साथ हर मज़हबी जलसे जुलूस में मुल्क के झंडे तिरंगे को शामिल करने की अपील भी की। आल इंडिया उलमा व मशाइख़ बोर्ड के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य हज़रत अम्मार अहमद अहमदी उर्फ नय्यर मियां की सरपरस्ती में दिल्ली के जोघाबाई एक्सटेंशन पर गरीबों को गरम कपड़े बांटे, इस मौक़े पर बोर्ड के राष्ट्रीय सचिव सय्यद हसन जामी, यूनुस मोहानी ,मौलाना मुख्तार अशरफ, अंजर अल्वी मौजूद रहे। बोर्ड के ऐलान के मुताबिक बोर्ड की हर शाखा इस काम को कर रही है, बोर्ड के अध्यक्ष के ऐलान पर पूरे देश में मीलाद को यौमे अमन के तौर पर मनाया जा रहा है।
By: यूनुस मोहानी

कट्टरवाद इबादतगाहों में खून बहाता है इस्लाम में इसकी जगह नहीं – सय्यद अशरफ

26 नवम्बर /उदयपुर

कट्टरवाद इबादतगाहों में भी खून बहाता है, बेगुनाहों का खून बहाना हराम है, इसका इस्लाम में कोई स्थान नहीं है, यह बात आल इंडिया उलमा व मशाइख़ बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने मिस्र के अल आरिश के करीब अल रवादा की मस्जिद में लगभग 250 नमाज़ियों की हत्या किए जाने पर कहीं।
हज़रत ने कहा, कट्टरवाद एक ज़हर, है वह हर रूप में खतरनाक है, धार्मिक भ्रम में नफरत की फैक्ट्री का नाम ही आतंकवाद है, इसके लिए यह जरूरी नहीं कि इसे किस धर्म के नाम पर किया जा रहा है। हज़रत ने साफ तौर से कट्टरवादी आंदोलन की भर्त्सना करते हुए कहा कि इस प्रकार की विचारधारा का सभ्य समाज में कोइ स्थान नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हमारी सरकार को भी इससे सख्ती से निपटना चाहिए  क्योंकि धर्म के नाम पर हिंसा फैलाने वाले दरिंदे हैं, इन्हे अगर रोका नहीं गया तो शरीफ नागरिकों का जीना मुहाल हो जाएगा। आस्था के नाम पर नफरत का कारोबार ठीक नहीं, इसकी आड़ में देश को तोड़ने की साजिश को हम सब मिलकर नाकाम करें।
कट्टरवाद छद्म रूप धारण कर अमन वालों के भेष में आकर धोखा देने की साजिश भी कर रहा है. इसे समझना होगा, समय रहते यदि ऐसा नहीं किया गया तो परिणाम नुकसान देने वाले होंगे।लोगों को मिलकर मोहब्बत के पैग़ाम आम करना चाहिए।

By: Yunus Mohani

रोहित सरदाना देश से माफी माँगे : सय्यद मोहम्मद अशरफ

संभल/20 नवंबर

किसी की भी धार्मिक भावनाओं को आहत करना खुली दहशतगर्दी है, यह बात ऑल इण्डिया उलमा व मशाईख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने रोहित सरदाना द्वारा हज़रत फातिमा रज़ी अल्लाहु अन्हा  और उम्मुल मोमिनीन हज़रत आयशा रज़ी अल्लाहु अन्हा सहित हज़रत मरियम रज़ी अल्लाहु अन्हा की शान में गुस्ताखी करने पर कही।
उन्होंने कहा कि यह जो धर्मिक माफिया नफरत की सियासत करने के लिए घिनौनी भाषा शैली का प्रयोग कर समाज को नफरत की आग में झोंकने पर तुले हैं, यह मुल्क के और इंसानियत के दुश्मन हैं, इनसे हमारे देश को खतरा है ।किसी भी धर्म की आस्थाओं पर प्रहार हमारे बीच मोहब्बत को खत्म करने की घिनौनी साजिश है।
हज़रत ने कहा, यह वैचारिक दहशतगर्दी है जो बहुत खतरनाक है, भारत सरकार को इसकी रोकथाम के लिए मजबूत क़दम उठाने होंगे ।हज़रत ने मांग की कि हर हाल में रोहित सरदाना को देश से माफी मांगनी चाहिए क्योंकि उसने सिर्फ मुसलमानों की भावनाओं को आहत नहीं किया है बल्कि हिन्दू भाइयों और ईसाई समुदाय की भावनाओं को भी आहत किया है ,इनके द्वारा हिन्दू देवी का भी घोर अपमान किया गया है आखिर यह नफरत की राजनीति कब तक चलेगी।
हज़रत किछौछवी ने कहा, एक तरफ तालिबान और दाईश की विचारधारा है और एक तरफ कट्टरवाद की, दोनों में कोई फर्क नहीं है, दुनिया दोनों से ही खतरे में है, धर्म के नाम पर दहशत अब खुद को पत्रकार कहने वाले भी फैलाने पर तुल गए हैं ,मीडिया को ऐसे लोगों को चिन्हित कर बाहर का रास्ता दिखाने का वक़्त आ गया है क्योंकि देश को नफरतों की आग से बचाना है।

By: यूनुस मोहानी