आल इंडिया उलमा माशाइख़ बोर्ड का बाढ़ पीड़ितो को राहत सामग्री बाटने का काम जारी !

कटिहार : 23 सितम्बर
बिहार में बाढ़ पीड़ितों के बीच एल इंडिया उलमा माशाइख बोर्ड लगातार सक्रिय है और उनकी मदद के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है, इसी क्रम में आज कई गांवो में जाकर बोर्ड के कार्यकर्ताओं ने कपड़े बांटे।
अभी तक कई गांव ऐसे हैं जहां तक संपर्क नहीं हो पा रहा है और सरकारी मदद भी नहीं पहुंच रही है ,लोग बीमार हैं और उनके पास न तो चिकित्सक हैं और न ही दवा ,कई जगह लोगों के पास खाने को कुछ नहीं है और पहनने को कपड़े भी नहीं है इन सब परेशानियों को देखते हुए आल इंडिया उलमा माशायख बोर्ड के कार्यकर्ता गावों में जाकर लोगों को राहत सामग्री पहुंचा रहे हैं ।
बोर्ड के अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी लगातार लोगों से अपील कर रहे हैं कि पीड़ितो की हर संभव मदद के लिए लोग आगे आएं क्योंकि सरकारी मदद बंदरबांट का शिकार हो चुकी है और बाढ़ का ज़िक्र भी खतम हो चला है जबकि लोग बहुत परेशान हैं ।
आज कटिहार के झौआ,सिस्या,डोमोरया,सिक्रोना,रंगपरा,इस्लामपुर,किचोरा ,रानीगंज, डोकरा,सिंगलेपुर सहित पश्चिम बंगाल के खुमेदपुर और शम्सी में ऑल इंडिया उलमा माशायख बोर्ड की टीम ने मौलाना आले रसूल के नेतृत्व में राहत सामग्री बांटी। मौलाना आले रसूल ने बताया यह सिलसिला लगातार चलता रहेगा और दूर दराज के इलाक़े में राहत पहुंचाई जाएगी ,लोगों की हर संभव मदद की जायेगी।
BY: यूनुस मोहानी

आल इंडिया उलमा मशाइख़ बोर्ड ने” रैली फॉर रीवर “अभियान का किया समर्थन !!

नई दिल्ली :22 सितम्बर आल इंडिया उलमा मशायख बोर्ड ने ईशा फाउंडेशन द्वारा नदियों को बचाये एवं साफ़ रखने के लिए चलाये जा रहे जागरूकता अभियान “रैली फॉर रीवर “ का समर्थन किया है .

बोर्ड ने अधिकारिक बयान जारी कर कहा है कि नदियों का संरक्षण मानव जीवन के लिए अतिआवश्यक है यदि जल इसी प्रकार प्रदूषित होता रहा और नदिया सूखती रही तो मानव जीवन दुरूह हो जायेगा .बोर्ड के संयुक्त राष्ट्रिय सचिव हाजी सय्यद सलमान चिश्ती ने कहा कि इस्लाम ने आज से लगभग 1400 साल पहले जल संरक्षण के लिए निर्देश दिए अल्लाह के रसूल हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहुअलहिवसल्लम ने फरमाया कि नदियों में मल मूत्र का त्याग न किया जाये ,न ही उनमे गन्दगी फैलाई जाये पानी को संरक्षित किया जाये और इसको दूषित होने से बचाया जाये .खुद कुरान में पानी को लेकर कई बाते कही गयी और पानी को इश्वर का तोहफा बताया गया है .

उन्होंने जंगे कर्बला का बयान करते हुए कहा कि हुसैन और उनकी प्यास का ज़िक्र तो सभी कर रहे हैं आइये हम सब इमामे हुसैन रज़िअल्लहुतलान्हु के नाम पर मिलकर नदियों को प्रदूषण से बचाने का काम करें उनको नयी ज़िन्दगी देने के लिए आगे आयें ताकि इमाम ने जिस तरह ज़ुल्म के खिलाफ अपना सब कुछ लुटा कर फतह हासिल की हम भी मानवता के खिलाफ इस ज़ुल्म को रोकने के लिए आगे आयें और नदियों को संरक्षण के इस आन्दोलन का सहयोग करें . यहाँ हमे बस नदियों को प्रदूषण से बचाना है यही हमारा कर्तव्य है और कर्बला कर्त्तव्य से न डिगने का सबक है.
By: Yunus Mohani

रोहिंग्या शरणार्थियो को आल इंडिया उलमा मशायख बोर्ड ने बांटी राहत सामग्री !!

नई दिल्ली: 19 सितम्बर आल इंडिया उलमा माशायख बोर्ड की तरफ से रोहिंग्या से भारत आये परिवारों की मदद के लिये राहत सामग्री बांटी गयी ।बोर्ड ने बयान जारी कर कहा कि हमारा काम मोहब्बत बांटना है और मोहब्बत को किसी सरहद,धर्म, संप्रदाय की दीवारों से नहीं रोका जा सकता ,बोर्ड की तरफ से लोगों से अपील की गई कि लोग सिर्फ प्रदर्शन न करे बल्कि परेशानहाल लोगों की हर संभव मदद के लिये भी आगे आयें।
ए.आई.यू.एम. बी. के लोगों ने दिल्ली के कंचनकुंज इलाक़े में शरण लिये रोहिंग्या शरणार्थियों के बीच पहुंचकर उनका हाल लिया और उन्हें राहत सामग्री बांटी।
लोगों ने बताया कि किस तरह उनपर ज़ुल्म किया जा रहा है ।वहीं बर्मा से आये लोगों ने भारत सरकार से बोर्ड के माध्यम से यह याचना भी की जैसे ही बर्मा में हालात सामान्य हो जाते हैं हम खुशी खुशी वापस चले जायेंगे लेकिन तब तक हमे भारत में रहने दिया जाये।
आल इंडिया उलमा मशायख बोर्ड शुरू से भारत सरकार से यह मांग कर रहा है कि भारत सरकार रोहिंग्या शरणार्थियों को ऐसे समय में जब बर्मा में उनका जीवन संकट में है वापस न भेजे और मानवता के आधार पर उन्हें भारत में रहने दिया जाये।बोर्ड ने इस आशय का पत्र संयुक्त राष्ट्र संघ को भी लिखा है।
बोर्ड के संस्थापक अध्यछ हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी के निर्देश पर बोर्ड से यूनुस मोहानी ,मौलाना मुख्तार अशरफ,सय्यद सैफ नक्वी,हाफ़िज़ कमरूद्दीन,हाफ़िज़ सद्दाम,सय्यद अंजर अकील मदारी इत्यादि लोगों ने राहत सामग्री बांटी।
By: Yunus Mohani.

देश में अशान्ति फैलाना चाहते हैं पैग़म्बर के दुश्मन : सय्यद मोहम्मद अशरफ

राजस्थान :17 सितम्बर
देश में अशान्ति फैलाना चाहते हैं पैग़म्बर के दुश्मन यह बात आल इंडिया उलमा व मशायख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने गुजरात कि एक महिला अंजू डांगर द्वारा पैगम्बरे अमन कि शान में गुस्ताखी पर अपना गुस्सा जताते हुए कही ,हज़रत ने साफ़ कहा कि इस्लाम दुश्मन ताक़तें जानती हैं मुसलमान सब कुछ बर्दाश्त कर सकता है लेकिन अपने रसूल कि शान में गुस्ताखी हरगिज़ बर्दाश्त नहीं कर सकता इसीलिए अब यह आतंकी सोच रखने वाले देशद्रोही अपनी नीचता के चरम पर पहुँच रहे हैं ताकि मुसलमानों को तकलीफ दी जा सके .
हज़रत ने कहा आल इंडिया उलमा मशाइख बोर्ड न सिर्फ इसकी भर्त्सना करता है बल्कि इस औरत को सजा दिलाने के लिए हर मुमकिन कोशिश का एलान भी करता है हम मुल्क के कानून के मुताबिक इसे कड़ी से कड़ी सजा दिए जाने के लिए हर मुमकिन कोशिश करेंगे ,उन्होंने यह भी कहा कि अगर सोशल मीडिया पर इस तरह की घटिया टिप्पड़ी होती रहीं किसी भी धर्म या सम्प्रदाय के खिलाफ तो भारत में शांति बनी रहना संभव नहीं होगा ,सरकार को इस पर विचार करते हुए इसे रोकना ही होगा ,देश बड़े खतरे के मुहाने पर खड़ा है ऐसे में इस प्रकार की नफरत का प्रचार सिर्फ ज़हर घोलने वाला है .
उन्होंने साफ़ कहा कि हम अपने नबी की शान में किसी भी तरह की गुस्ताखी बर्दाश्त नहीं करेंगे ,ऐसी नीच सोच रखने वाली महिला को खुली हवा में सांस लेने का अधिकार नहीं है उसे सलाखों के पीछे होना चाहिये.
उन्होंने कहा अगर ऐसा नहीं होता है तो हम देशव्यापी आन्दोलन छेड़ेंगे ताकि आइन्दा किसी भी धर्म या सम्प्रदाए के विरूद्ध ऐसा करने वाला बक्शा न जाये और उसे सख्त से सख्त सजा मिले .यह सिर्फ धार्मिक भावनाए आहत करने भर का मामला नहीं है ,यह मामला देश को सांप्रदायिक आग में झोकने की कोशिश का भी है यानि साफ साफ देशद्रोह का है अतः इस महिला को सख़्त से सख़्त सजा की हम मांग करते हैं.
By: यूनुस मोहानी

میانمار میں انسانی حقوق کی پامالی ، مسلم ممالک اور ہندوستانی مسلمان : ایک محاسبہ

روہنگیا مسلمان آخر مسلم ممالک اور بالخصوص خلیجی ممالک میں کیوں پناہ نہیں حاصل نہیں کرسکے؟
غلام رسول دہلوی
روہنگیا بحران میں انسانی حقوق کی سنگین خلاف ورزی ایک کربناک المیہ ہے ۔ میانمار میں انسانیت ختم ہونے کے دہانے پر ہے۔ خواتین اور بچوں کا قتل عام کیا گیا اور معصوم نوجوان اور بزرگوں کو ایک منظم طریقے سے نشانہ بنایا گیا ۔ اس نازک موڑ پر، روہنگیا مہاجرین کو ملک بدر کرنے کے حکومت ہند کے موقف نے بے شمار مسائل کھڑے کر دئے ہیں اور اسے سپریم کورٹ اور نیشنل ہیومن رائٹس کمیشن کی جانب سے تحقیقاتی سوالات کا سامنا ہے۔ ان کی ملک بدری کے اس منصوبہ نے ہندوستانی مسلم رہنماؤں، دانشوروں اور خاص طور پر ان علماء کے درمیان ایک تناؤ کا ماحول پیدا کر دیا ہے جو روہنگیا مسلمانوں کے لئے ہمدردی کا جذبہ رکھتے ہیں۔ ان کے لئے یہ سمجھنا مشکل ہے کہ جس ملک نے اپنی ابتداء سے ہی مہاجرین کا استقبال کیا ہے وہ وہ ان 40 ہزار روہنگیا مہاجرین کو کس طرح ملک بدر کر سکتا ہے جو اس وقت دنیا کی سب سے زیادہ ستائی ہوئی اقلیت ہیں!
یقیناً 40 ہزار روہنگیا مسلمانوں کو ملک بدر کرنے کا حکومت ہند کا منصوبہ ہمارے وطن عزیز کے تاریخی، تہذیبی ،تکثیریت پسند اقدار کے خلاف ہوگا۔سری لنکا، افغانستان اور تبت سمیت کئی پڑوسی ممالک سے آنے والے مجروح اور کمزور لوگوں کی مدد کرنے کی ہندوستان کی ایک طویل تاریخ رہی ہے۔ اس میں کوئی شک نہیں کہ ہندوستان کے پاس ماضی کے واقعات کے پیش نظر جائز سیکورٹی خدشات ہیں اور وسائل کی کمی کا بھی سامنا ہے ،لیکن ہم یہ بھی نہیں بھول سکتے کہ ہندوستان میں تہذیب و ثقافت اور جمہوریت کی ایک قدیم روایت رہی ہے اور ہم نے دنیا کی تمام خطّوں سے آنے والی مظلوم اقلیتوں کی ہمیشہ مدد کی ہے اور ان کا خیر مقدم کیا۔ اور یہی بات ہمارے ملک کو خوبصورت بناتی ہے۔ ضرورت مند لوگوں کی مدد کرنا ہمارا سنسکار رہا ہے۔
سب سے اہم بات یہ ہے کہ روہنگیا پناہ گزینوں کی مدد مذہب کی بنیاد پر نہیں بلکہ انسانی بنیادوں پر کی جانی چاہئے۔ جو لوگ انسانیت کے بجائے مذہب کی بنیاد پر پناہ گزینوں کی قسمت کا فیصلہ کرنے کی کوشش کر رہے ہیں وہ بھی اپنے اپنے مفادات کو فروغ دینے کی کوشش کر رہے ہیں۔اس لئے ہندوستان کو اپنے پناہ گزین قانون میں مذہبی معیار کو ترک کر دینا چاہئے۔ حکومت ہند نے شہریت کے عمل کو آسان بنانے کے لئے 1955 کی شہریت کے قانون میں ترمیم کی تجویز پیش کی تھی۔ لیکن افسوسناک بات یہ ہے کہ اس نئے بل سے صرف عیسائیت، ہندازم، جین ازم، زرتشت ازم اور سکھ ازم کو ہی فائدہ حاصل ہوگا جنہیں اپنے پیدائشی ملکوں میں اقلیتی مذہب سمجھا جاتا ہے۔ اس بل سے بے گھر مسلم افراد کو خارج کردیا گیا ہے۔ لہذا، بہت سے لوگوں کا ماننا ہے کہ روہنگیا مسلمانوں کو ملک نکالنے کی حکومت کی تازہ ترین تجویز اسی بل کا حصہ ہے۔
اگر چہ ہندوستان نے ایسے کسی بھی معاہدے پر دستخط نہیں کیا ہے جس کی وجہ سے مہاجرین کو پناہ دینا اس کا فر ض ہو ، لیکن اس ملک نے ہمیشہ تنازعات اور آفتوں سے پریشان پناہ گزینوں کو پناہ دیا ہے، خواہ وہ شام کے عیسائی ہوں، مالابار کے یہودی ہوں یا ایران کے پارسی ہوں۔ لہذا، روہنگیا مسلمانوں کو اس ملک سے نکالنا اس کی اس انسانی روایت سے انحراف ہوگا جس پر ہندوستان کئی دہائیوں سے قائم رہا ہے۔
انسانی حقوق ناقابل تقسیم ہیں اسی لئے انسانی حقوق کو کسی ایک یا چند مذاہب و اقوام کے لئے خاص نہیں کیا جا سکتا۔ لہٰذا، اگر ہندوستان روہنگیا مسلمانوں کو میانمار روانہ کر دیتا ہے تو یہ ایک کربناک تاریخی المیہ ہو گا۔ یہ ایسے ہی ہوگا جس طرح کیوبا اور امریکہ نے ہٹلر کے مظالم سے بھاگنے والے 900 سے زائد یہودیوں پر مشتمل سمندری جہاز کو 13 مئی 1939 کو موت کے منھ میں ڈال دیا تھا (جن میں سے کم از کم 250 لوگوں کو نازی جرمنی فوج نےموت کے گھاٹ اتار دیا تھا) ۔
ہمیں یہ بھی سوچنا ہوگا کہ آخر مسلم ممالک روہنگیا مسلمانوں کو پناہ دینے کے لئے کیوں آگے نہیں آ رہے ہیں؟ شام کے پناہ گزینوں کو جرمنی اور دوسرے یوروپین ممالک نے پناہ دی ہے۔ تاہم ، بعض مسلم ممالک انہیں مالی مدد تو پہنچا رہے ہیں لیکن پناہ گزین کی حیثیت نہیں دے رہے ہیں۔ یہ واقعی عالمی مسلم برادری کے لئے ایک’ اجتماعی ذلت’ کی بات ہے کہ اسلامی ممالک روہنگیا پناہ گزینوں سے اپنا منھ موڑ رہے ہیں۔انہوں نے شام، عراق، لیبیا، صومالیا اور دیگر جنگ زدہ مسلم ممالک کے انتہائی مصیبت زدہ مسلم پناہ گزینوں کو بھی پناہ فراہم نہیں کیا ہے۔“Left Out In The Cold” کے عنوان سے انسانی حقوق کی تنظیم ایمنسٹی انٹرنیشنل گلف کوآپریشن کونسل کی 2014 کی ایک رپورٹ کے مطابق ، سعودی عرب، بحرین، کویت، قطر، عمان اور متحدہ عرب امارات جیسے دولت مند ممالک نے بھی سرکاری طور پر ایک بھی شامی پناہ گزین کو نہیں اپنایا ہے۔
وہ مسلم ممالک جن کا شمار امیر ترین اسلامی ملکوں میں ہوتا ہے ، وہ مسلم تارکین وطن اور پناہ گزینوں کو بڑے پیمانے پر مالی امداد اور عطیہ فراہم کرتے ہیں۔ حال ہی میں ترکی نے بھی میانمار میں تشدد سے راہ فرار اختیار کرنے والے روہنگیا مسلمانوں کی امداد کے لئے 10 ہزار ٹن فراہم کرنے کا اعلان کیا ہے۔ لیکن وہ پناہ گزینوں کو اپنے وطن میں پناہ نہیں دیتے ہیں۔ ان میں سے کوئی بھی باضابطہ طور پر مہاجریت کے قانونی تصور کو تسلیم نہیں کرتے ہیں۔
بیشتر ہندوستانی مسلمان یہ محسوس کرتے ہیں کہ تمام روہنگیا مہاجروں کو ملک سے نکالنے کا حکومت کا اقدام “اخلاقی طور پر انتہائی ناپسندیدہ” ہے۔ہندوستان نے ہمیشہ پوری دنیا سے بے گھر مہاجرین کو بچانے کی کوشش کی ہے۔ آل انڈیا علماء و مشائخ بورڈ کے بانی و صدرسید محمد اشرف کچھوچھوی نے کہا کہ حکومت ہند کو ان معصوم مہاجرین کو پناہ فراہم کرنا چاہئے جو اپنی زندگی اور وقار کی حفاظت کے لئے ہندوستان کی طرف امید کی نگاہوں سے دیکھتے ہیں۔ جس طرح ہمارے ہمسایہ ملک بنگلہ دیش نے انسانی بنیادوں پر روہنگیا متاثرین کے لیے نئے دروازے کھولے ہیں اسی طرح ہندوستان کو بھی ان مہاجرین کی مدد کے لیے آگے آنا چاہئے۔
جماعت اسلامی ہند کے صدر مولانا سید جلال الدین عمری نے روہنگیا مسلمانوں کی ہلاکتوں پر گہری تشویش کا اظہار کرتے ہوئے اقوام متحدہ، او آئی سی اور مختلف انسانی حقوق کی تنظیموں سے اس بات کا مطالبہ کیا ہے کہ وہ ان کے اپنے ہم وطنوں کو قتل سے روکنے، ان کی شہریت بحال کرنے، ان پر تمام قسم کی پابندیوں کو ہٹانے اور ان کی سماجی اور اقتصادی ترقی پر توجہ مرکوز کرنے کے لئے برمی حکومت پر دباؤ بنائیں۔
اسی طرح، جمعیت علمائے ہند نے میانمار میں روہنگیا مسلمانوں کے تئیں اپنا رویہ تبدیل کرنے کے لئے ایک آخری معیاد مقرر کرنے کی خاطر سلامتی کونسل کا اجلاس بلانے کے لئے اقوام متحدہ سے اپیل کی ہے۔ جمعیت علمائے ہند نے ہندوستان میں پناہ کی تلاش کرنے والے روہنگیا مسلمانوں کے تئیں حکومت ہند کو روایتی انسانی بنیادوں پر اپنے رویہ سے منحرف نہ ہونے پر بھی زور دیا ہے۔ وسیع پیمانے پر ہندوستانی میڈیا میں شائع ہونے والی خبروں کے مطابق جمعیت علمائے ہند نے حکومت ہند سے کہا ہے کہ “اس سلسلے میں ہندوستان کو یورپی یونین سمیت ترقی یافتہ ممالک کی پیروی کرنی چاہئے”۔
آل انڈیا علماء مشائخ بورڈ ، جمعیت علمائے ہند اور جماعت اسلامی ہند جیسی ہندوستانی مسلم تنظیموں نے حکومت ہند، اقوام متحدہ اور بین الاقوامی انسانی حقوق کمیشن سے بجا طور پر میانمار کے راکھین کے علاقے میں ظلم و ستم کا شکار روہنگیا مسلمانوں کی مدد کرنے کی اپیل کی ہے۔ لیکن کیا انہوں نے اس سلسلے میں عالمی ‘مسلم برادری’ سے بھی موثر اقدامات کرنے کے لئے کوئی اپیل کی ہے؟ کیا انہوں نے یہ سوال اٹھایا کہ روہنگیا پناہ گزین مسلم ممالک اور بالخصوص خلیجی ممالک میں کیوں پناہ نہیں حاصل نہیں کرسکے؟
روہنگیا مہاجرین کا بحران واضح طور پر انسانی حقوق کا ایک مسئلہ ہے۔ لیکن یہ ایک انتہائی افسوس ناک امر ہے کہ جب نام نہاد اسلامی ممالک کے اندر حکومتوں یا دہشت گرد تنظیموں کی ایماء پر اسی طرح کی یا اس سے زیادہ درد ناک انسانی حقوق کی خلاف ورزیوں کا معاملہ سامنے آتا ہے تو ہندوستان میں یہ اسلامی تنظیمیں صدائے احتجاج بلند نہیں کرتی ہیں۔ لہذا، یہ سوال اپنی جگہ بالکل درست ہے کہ کیا انسانی حقوق صرف غیر اسلامی ممالک میں رہنے والی مسلم اقلیتوں کے لئے ہیں؟ کیا علماء اور اسلامی رہنما اس وقت کبھی صدائے احتجاج بلند کرتے ہیں جب مسلم ممالک میں غیر مسلم اقلیات کے حقوق کی پامالی ہوتی ہے، ان کی لڑکیوں کو اغوا کیا جاتا ہے ، “اسلامی ریاست” کے قیام کے نام پر ان کی منفی ذہن سازی کی جاتی ہے اور نکاح الجہاد کے نام پر ان کا استحصال کیا جاتا ہے؟
ہندوستانی مسلمانوں کو یہ محسوس کرنا ہوگا کہ ہماری انسانی اور مذہبی ذمہ داری ہے کہ ہم مسلم ممالک اور خاص طور پر پاکستان اور سعودی عرب جیسے ممالک میں جو کہ اسلامی ہونے کا دعوی کرتے ہیں غیر مسلم اقلیتوں پر ڈھائے جانے والے مظالم کے خلاف بھی صدائے احتجاج بلند کریں ۔ ایک انتہائی اہم اور ضروری سوال یہ ہے کہ جب پاکستان، بنگلہ دیش، انڈونیشیا، ملیشیا، سعودی عرب اور مصر جیسے نام نہاد اسلامی ممالک اور مسلم دنیا کے دیگر حصوں میں مذہبی اقلیتوں کے حقوں کو مکمل طور پر پامال کیا جاتا ہے تو ہندوستان کے مسلم رہنما خاموش تماشائی کیوں بنے رہتے ہیں؟

रोहिंग्या शरणार्थियों पर अनर्गल बयानबाज़ी बंद करें मंत्री- सय्यद अशरफ

चित्तौड़:11 सितम्बर रोहिंग्या शरणार्थियों के मसले पर सरकार के मंत्रियों के बयान से आहत आल इंडिया उलमा मशायख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने कहा कि अनर्गल बयानबाज़ी बंद करें और मानवता की सेवा के लिये रोहिंग्या शरणार्थियों की मदद का हाथ बढ़ाये सरकार ।
उन्होंने कहा संयुक्त राष्ट्र उच्चायोग ने भी साफ कह दिया है कि शरणार्थियों को खतरे वाली जगह पर वापस नहीं भेजा जा सकता यह नियम सभी राष्ट्रों के लिये बाध्यकारी है ।इस सिद्धांत को अंतरराष्ट्रीय कानून का हिस्सा माना जाता है इसलिए यह सब देशों पर लागू होता है चाहे उन्होंने शरणार्थी समझौते पर हस्ताक्षर किये हों या नहीं ।
हज़रत ने साफ कहा अब सरकार अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट करे कि वह अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करेगी या नहीं इसके लिये मंत्रियों को अनर्गल बयानबाज़ी करने की कोई ज़रूरत नही है क्योंकि राजनैतिक लाभ और राष्ट्रहित अलग अलग है ।राष्ट्रहित और मानवता की रक्षा सर्वोपरि है इससे समझौता नहीं किया जा सकता।
हज़रत ने साफ कहा कि अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री को अपने विभाग की योजनाओं पर ध्यान देना चाहिए,वक्फ की लूट पर लगाम लगानी चाहिये न कि अनर्गल बयानबाज़ी करनी चाहिए।
उन्होंने एक बार फिर भारत सरकार से मांग की रोहिंग्या शरणार्थियों को भारत में रहने दिया जाय जबतक बर्मा में हालात सामान्य नहीं हो जाते और बर्मा सरकार से नरसंहार को रोकने के लिये कहे।हज़रत ने लोगों से इन शरणार्थियों की भरसक मदद करने की अपील भी की।

सरकार बर्मा के बेगुनाहों को पनाह दे, मानवता को शर्मसार होने से बचाये : सय्यद मोहम्मद अशरफ

अजमेर:7 सितम्बर
भारत सरकार बर्मा से जान बचा कर आये बेगुनाह शरणार्थियों को शरण दे और मानवता को शर्मसार होने से बचाये,यह बात आल इंडिया उलमा मशाइख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने अजमेर शरीफ में कही। उन्होंने कहा भारत एक शांतिप्रिय देश है और सम्पूर्ण विश्व में शांति स्थापना के लिए सदैव प्रयत्नरत रहा है, इस समय जब बर्मा जो कि आदि भारत का ही अंग था वहां हिंसा चरम पर है, मानवता शर्मसार हो रही है, महिलाएं बच्चे बुज़ुर्ग, जवान कोई महफूज़ नहीं है और बर्मा में बरबरियत के साथ मानवता की हत्या की जा रही है। ऐसे में सरकार का रोहिंग्या शरणार्थियों से देश छोड़ने का आदेश निंदनीय है, हम सरकार से मांग करते हैं कि मानव जीवन बहुमूल्य है इसे बचाने के लिये हर संभव प्रयास किया जाना चाहिये। जिस प्रकार पड़ोसी देश बांग्लादेश ने मानवता के आधार पर दुखी लोगों के लिए दरवाज़े खोल दिये है भारत को भी आगे आकर रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए मदद हाथ बढ़ाना चाहिए।
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र संघ से भी इस संबंध में तुरंत कारगर क़दम उठाने की मांग की। हज़रत ने कहा कि सबको जहां बर्मा के लोगों के लिये दुआ करनी चाहिए वहीं रोहिंग्या शरणार्थियों तक मदद भी पहुंचानी चाहिए।
आल इंडिया उलमा मशाइख़ बोर्ड के संरक्षक व दरगाह अजमेर शरीफ के गद्दीनशीन हज़रत सय्यद मेहदी मिंया चिश्ती ने कहा कि दुनिया को मोहब्बत की ज़रूरत है और हम नफरत की फैक्ट्रीय लगा रहे हैं, धर्म के आधार पर शरणारथियों की स्थिति तय की जाएगी तो हम क्या संदेश देना चाहते हैं। निहत्थे जान बचाकर भागे लोगों से देश को खतरा कैसे हो सकता है। मानवता हमारी ज़रूरत है, सरकार को आगे बढ़ कर मदद करनी चाहिए।
आल इंडिया उलमा मशाइख बोर्ड के संयुक्त राष्ट्रीय सचिव सय्यद सलमान चिश्ती ने कहा कि” अतिथि देवो भव:” सिर्फ पर्यटन विभाग के प्रचार की सामग्री नहीं है यह भारत की संस्कृति है, उन्होंने बताया भारत के संसद भवन पर अंकित वसुधैव कुटुंबकम् का वाक्य हमारी धारणा का प्रतीक है कि हम सम्पूर्ण विश्व को एक परिवार मानते हैं और प्रधानमंत्री जी इसका उपयोग हर जगह करते हैं ऐसे में रोहिंग्या शरणार्थियों के संबंध में किरण रिज्जु का बयान प्रधानमंत्री के शब्दों के विपरीत है। कोई भी धर्म कभी खून बहाना नहीं सिखाता. मैं जितना जानता हूं उसके आधार पर शरणार्थियों की सेवा एंवम् सहायता के लिए हर धर्म ने सीख दी है। उन्होंने कहा कि मानवाधिकारों की रक्षा के लिए हर हाल में हमे बर्मा के शरणार्थियों को भारत में शरण देनी चाहिए,सरकार का यह फैसला की वह देश छोड़ कर चले जाएँ उचित नहीं है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा का भी यह उल्लघन प्रतीत होता है. हम भारत सरकार से मांग करते हैं कि अपना फैसला वापस ले।

ईद उल अज़हा के मौक़े पर मज़हब के साथ मुल्क के क़ानून का भी पूरा पालन करें मुसलमान : सय्यद मोहम्मद अशरफ

अजमेर: 29 अगस्त
आने वाले त्योहार ईदुल अज़हा के मौक़े पर मुसलमान जहां मज़हबी आज़ादी के अधिकार पर अमल करते हुए क़ुर्बानी करें वहीं मुल्क के क़ानून का भी पूरा ख्याल रखें. यह बात आल इंडिया उलमा मशाइख़ बोर्ड के संस्थापक व अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने अजमेर शरीफ में दरगाह ख्वाजा ग़रीब नवाज़ रहमतुल्लाह अलैहि में छटी शरीफ की नजर के बाद बैतुन नूर में कही।
हज़रत ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि कई जगह इस बार कुछ इंसानियत और अमन के दुश्मन लोग और संगठन क़ुर्बानी के दौरान अमन खराब करने की कोशिश कर सकते हैं लिहाजा सब्र से काम लें और मुल्क के क़ानून का सम्मान करते हुए उसका पूरा पालन करें ,उन्होंने कहा कि लोग हरगिज़ खुली जगह क़ुर्बानी न करें, दीन भी यही कहता है, क़ुर्बानी के खून को नालियों में न बहाएँ बल्कि उसे दफन करें, साथ ही जानवर के वह अंग जो खाऐ नहीं जाते और इस्लाम में जिनका खाना मना है उसे भी दफन करें, इन्हे किसी को देने की इजाजत नहीं है क्योंकि आपके लिए जो खाना ठीक नहीं वह आप किसी को नहीं दे सकते, साफ सफाई का पूरा ख्याल रखें, किसी को आपकी वजह से परेशानी नहीं होनी चाहिए।
हज़रत ने कहा कि आप क़ुर्बानी का गोश्त ग़रीबों और परेशान हालों तक पहुंचाने का खास इंतज़ाम करें। हज़रत ने बताया कि हमारे मुल्क में क़ुर्बानी पर कोई पाबंदी नहीं है लेकिन किसी गैरमज़हब के मानने वाले की भावनाओं का हमें ख्याल रखना चाहिए, हमें अपने पड़ोसी का हक़ अदा करना है, अपने हमवतन का ख्याल रखना है क्योंकि हम मुसलमान हैं तो अमन क़ायम रखने की ज़िम्मेदारी हमारी है।उन्होंने लोगों को हज की मुबारकबाद दी।
बोर्ड के संरक्षक हज़रत मौलाना सय्यद मेहदी मियां चिश्ती ने लोगों को ख्वाजा गरीब नवाज़ की छटी शरीफ की मुबारकबाद देते हुए कहा कि क़ुर्बानी अपने रब से क़रीब होने का बेहतरीन ज़रिया है और हर साहिबे हैसियत पर क़ुर्बानी वाजिब है लेकिन ख्याल रहे कि हरगिज़ किसी का दिल न दुखे, किसी को परेशानी न हो,गंदगी बिल्कुल न फैले, इसका खास ख्याल रखे, ग़रीब नवाज़ का यही पैग़ाम तो है कि किसी का दिल तोड़ना अल्लाह का घर तोड़ने से बड़ा गुनाह है, लिहाजा दिलों को जोड़िए और ख्याल रहे कि इंसान तब तक अपने रब की खुशी हासिल नहीं कर सकता जब तक वह परेशान हाल लोगों की हैसियत रखते हुए मदद नहीं करता।
बोर्ड के संयुक्त राष्ट्रीय सचिव सय्यद सलमान चिश्ती ने सभी को गरीब नवाज़ की छटी के साथ ही ईद ए इब्राहीमी और हज की मुबारकबाद देते हुए कहा कि हमें याद रहना चाहिए कि मुल्क के कई हिस्सों में बाढ़ से लोग परेशान हैं, हमें उनकी मदद करनी है और यह ईद हमें यही सिखाती भी है कि अपने रब की खुशी के लिए हम अपना माल क़ुर्बान करते हैं. इसी एहसास को और जगाना है, क्योंकि इंसानी ज़िंदगियां खतरे में है और रब की खुशी हासिल करने का हमारे पास ये ज़रिया है। ज़रूरतमंद की मदद करना ही सुफिया का तरीका रहा है. यही नबी का दीन है। मोहब्बत सबके लिए नफरत किसी से नहीं. यही पैग़ाम है दुनिया को नफरतों से बचाने का।
By: यूनुस मोहानी

AIUMB ने कैंप लगाकर राहत सामान इकट्ठा किया

AIUMB (ऑल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड) की इटावा और ग़ज़िआबाद यूनिट का बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत सामग्री जुटाने का कार्य जारी, कैंप लगाकर राहत सामान इकट्ठा किया।

इटावा। असम, उत्तर प्रदेश, बिहार सहित देश के अन्य भागों में बाढ़ से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
बड़ी संख्या में लोग मुसीबत का शिकार हैं और लोगों के पास खाने, पीने और ज़रूरी वस्तुओं की बहुत कमी है। ऐसे वक़्त में आल इंडिया उलेमा व मशाईख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सैयद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने लोगों से खुलकर बाढ़ पीड़ितों की मदद करने के लिए और बोर्ड के सभी शाखाओं द्वारा बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए राहत सामग्री एकत्र करने के लिए कहा था। जिस पर पूरे देश में प्रयास जारी है और राहत सामग्री जमा करके भेजी जा रही है। इसी संबंध में बोर्ड की इटावा और ग़ाज़ियाबाद यूनिट ने बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए अंजुमन हुसैनिया, इटावा के सहयोग से कैंप लगाया और लोगों से अधिक से अधिक मदद करने की अपील की और लोगों की मदद से राहत सामग्री एकत्र की गयी जिसे जल्द ही बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में भेज दिया जाएगा। अंजुमन हुसैनिया शहर इटावा के अध्यक्ष हाजी गुड्ड मंसूरी ने बताया कि ऑल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड की घोषणा के बाद हम लोग हरकत में आ गए हैं क्योंकि मानवता यही है और इस्लामी शिक्षा भी कि परेशान हाल लोगों की मदद की जाए।
गाजियाबाद यूनिट के जिम्मेदार आबिद सिद्दीकी ने कहा कि हमारा मज़हबी और इंसानी कर्तव्य है कि परेशान लोगों की मदद के लिए आगे आएं तथा अल्लाह और उसके रसूल की रजा के लिए लोगों की
उदारता पूर्वक मदद करें।
AIUMB के सक्रिय सदस्य हाजी सरफराज खान ने बताया कि जल्द ही रहत सामग्री लेकर बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लिए रवाना होंगे जहां यह बिना किसी भेदभाव के परेशान हाल लोगों में वितरित किया जाएगा।

AIUMB कैंप में हाजी शेख शकील अहमद, हाजी दिलशाद खान, हाजी हाफिज खुर्शीद अहमद, टिंकू भाई, रफी अब्बासी, मुन्ना वारसी, नोरीद वारसी आदि के अलावा बोर्ड के सदस्य और स्थानीय लोग मौजूद रहे।

न्यायालय के फैसले से पर्सनल लाॅ पर छिड़ी बहस पर लगा विराम : शाह अम्मार अहमद अहमदी

रुदौली:24 अगस्त
न्यायालय द्वारा एक बैठक में तीन तलाक़ पर फैसला आया है, उसने पर्सनल लाॅ पर छिड़ी बहस पर विराम लगा दिया है क्योंकि न्यायालय ने माना है कि मुस्लिम पर्सनल लाॅ संविधान के अनुच्छेद 25 सेे संरकक्षित है और इससे छेड़छाड़ नहीं की जा सकती जो कि मुसलमानों की बड़ी जीत है. यह बयान आल इंडिया उलमा मशाइख बोर्ड के राष्ट्रीय कार्यकारणी सदस्य शाह अम्मार अहमद अहमदी उर्फ नय्यर मियां ने पत्रकारों से कही, उन्होंने कहा कि बोर्ड कोर्ट के फैसले का सम्मान करता है और स्वागत भी ।
उन्होंने कहा कि हमारे संविधान के अनुच्छेद 25 के अनुसार जो यह कहता है कि “लोक व्यवस्था, सदाचार और स्वास्थ्य तथा इस भाग के अन्य उपबंधो के अधीन रहते हुए सभी व्यक्तियों को अंतःकरण की स्वतंत्रता और धर्म के अबाध्य रूप से मानने, आचरण करने और प्रचार करने का समान हक है” के अनुसार मुस्लिम पर्सनल लाॅ को संरक्षण प्राप्त है और न्यायालय ने अपने फैसले में इसको स्पष्ट कर दिया है जो स्वागत योग्य है, अब इस बहस का कोई औचित्य नहीं है कि मुस्लिम पर्सनल लाॅ में कोई छेड़छाड़ संभव है या होने जा रही है ।
हज़रत के अनुसार देश का मुसलमान भारत के संविधान में और न्याय प्रणाली में पूरा भरोसा रखता है, उन्होंने एक ही बैठक में तीन तलाक़ को हराम बताते हुए कहा कि हम इसे बुरा हमेशा से मानते आये है लेकिन क्या जिस चीज को बुरा कहा जाता है अगर कोई उस काम को करता है तो उसका असर नहीं होगा, जरूर होगा बस इतनी सी बात समझने योग्य है ।
उन्होंने कहा कि अदालत के आदेश को पढ़ने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि कोई नया कानून बनाने का आदेश नहीं है क्योंकि संविधान पीठ के 3 जजो ने इस बात को नहीं माना है,लेकिन मुस्लिम समाज को भी अब अपने अंदर फैल रही बुराई को रोकने के लिए कमर कसनी होगी, इसके लिए आल इंडिया उल्मा मशाइख बोर्ड समाजी बेदारी मुहिम चलाएगा।