दुनिया के सभी देशों से अंतरराष्ट्रीय ईश निंदा क़ानून बनवाने के लिए एकजुट होने की वर्ल्ड सूफी फोरम की अपील।

31 अगस्त /चित्तौड़गढ़,

वर्ल्ड सूफी फोरम के चेयरमैन और आल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड के संस्थापक, अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने पत्रकारों को बताया कि वर्ल्ड सूफी फोरम ने दुनिया के तमाम देशों से पत्र भेज कर अपील की है कि अंतरराष्ट्रीय ईश निंदा क़ानून बना कर दुनिया को वैचारिक आतंकवाद से बचाया जाऐ।
उन्होंने कहा कि यह क़दम हाल में हॉलैंड के एक सरफिरे द्वारा पैग़म्बरे अमन व शांति हज़रत मोहम्मद सल्लाल्लहू अलैहि वसल्लम के कार्टून की प्रतियोगिता आयोजित करने के ऐलान के बाद उठाना ज़रूरी है क्योंकि दुनिया में बसने वाले अरबों की तादाद में मुसलमानों की आस्था ऐसी घिनौनी करतूत से आहत हुई है। न सिर्फ मुसलमानों की बल्कि सभी अमन पसंद लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं ।
उन्होंने कहा, हालांकि पूरी दुनिया में हो रहे विरोध प्रदर्शनों और संयुक्त राष्ट्र मानव अधिकार आयोग से वर्ल्ड सूफी फोरम की शिकायत के बाद इस प्रतियोगता को आयोजित नहीं किया जाने का ऐलान किया गया है लेकिन यह अंतिम उपचार या न्याय नहीं है ।उन्होंने कहा कि कहीं भी दुनिया के किसी कोने में कोई किसी भी धर्म के खिलाफ अगर ऐसी घिनौनी बात करता है जिससे उस धर्म के मानने वालों को दुख होता है तो अंतरराष्ट्रीय कानून का होना जरूरी है ताकि दोषी को सज़ा मिल सके और फिर किसी की हिम्मत न हो ऐसा कुकृत्य करने की।
हज़रत ने कहा नामूसे रिसालत पर हमला करने वाले दुनिया को अशांत करना चाहते हैं असली आतंकी यही विचार रखने वाले हैं जो किसी की धार्मिक भावनाओं को अपना हथियार बना कर अपना शैतानी मकसद हल करना चाहते हैं ।लिहाज़ा इस मुद्दे पर सबको साथ आना होगा ।

By: यूनुस मोहानी

अजमेर शरीफ से बाढ़ पीड़ितों के लिए सहायता रवाना !!

28/अगस्त अजमेर शरीफ

आल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव हज़रत सय्यद सलमान चिश्ती द्वारा चिश्ती मंज़िल झालरा अजमेर शरीफ से केरल के बाद पीड़ितों के लिए सहायता भेजी गई है। इस अवसर पर चिश्ती ने कहा कि हम सब केरल के आफ़तज़दा लोगों के साथ खड़े हैं दरगाह अजमेर शरीफ से सहायता का काम भी किया जा रहा है और दुआ भी हो रही है।
उन्होंने कहा कि लोग जहां भी परेशान हैं इंसानियत का पहला तकाज़ा है कि उनकी बिना किसी भेदभाव के मदद की जाये यह हम सबका सामाजिक, धार्मिक,व मानवीय कर्तव्य है ,जो लोग ऐसे वक्त पर भी नफरत का ज़हर फैलाने का असफल कार्य कर रहे हैं उन्हें समझना चाहिए कि परेशान हिन्दू और मुसलमान ,दलित,ईसाई नहीं होते वह सिर्फ परेशान और मुसीबत में फंसे लोग होते हैं इंसान होते हैं और इंसानों की सेवा से इनकार सिर्फ शैतान करते हैं।
सय्यद सलमान ने कहा कि सभी लोग आगे आएं ताकि केरल के लोगों की भरपूर मदद की जा सके यही धर्म है और यही मानवता गरीब नवाज़ का यही मिशन है इसे हम सबको आगे ले जाना है।उन्होंने कहा कि आल इंडिया उलमा मशाईख बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी की अपील का व्यापक असर हुआ है और पूरे देश से राहत सामग्री पहुंच रही है।

 

By: Younus Mohani

आफत में घिरे लोगों की मदद हम सब का इन्सानी फ़र्ज़ है : सय्यद मोहम्मद अशरफ

20 जुलाई /लखनऊ “आफत में घिरे लोगों की मदद हम सब का इंसानी फ़र्ज़ है “हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी संस्थापक अध्यक्ष आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड एवं चेयरमैन वर्ल्ड सूफी फोरम ने यह बात केरल आपदा में पीड़ितों को मदद पहुँचाने की अपील करते हुए कही .

उन्होंने कहा कि आल इंडिया उलमा मशाइख बोर्ड ने क़ुरबानी के ताल्लुक से जो अपील जारी की है उसमे अहम् बात है कि लोग नफ्ली क़ुरबानी जो करना चाहते हैं उनके लिए बेहतर है कि वह केरल के बाढ़ पीड़ितों या कहीं भी किसी मुसीबत में फंसे इंसान की मदद करें क्योंकि मुसीबतज़दा लोगों कि मदद हमारा इंसानी और अख्लाकी फ़र्ज़ है .हज़रत ने कहा कि लोग सामूहिक रूप से या व्यक्तिगत रूप से मदद पहुंचा सकते हैं इस वक़्त लोगो को हमारी सख्त ज़रूरत है .

ईद-उल-अजहा का त्यौहार हमें मानना है और ये त्य्हार हमें कुर्बानी की सीख देता है लिहाज़ा हम अपने उन लोगों के लिए भी क़ुरबानी का जज्बा दिखाएँ जिन्हें इस मुश्किल वक़्त में हमारी ज़रूरत है .आल इंडिया उलमा मशाइख बोर्ड के ज़रिये भी आप अपनी मदद भेज सकते हैं .

हज़रत ने कहा कि कुर्बानी में इस बात का ख्याल रखना है कि हमारी वजह से किसी को तकलीफ न पहुंचे और हम कोई ऐसा काम न करें जिससे मुल्क में अमन को खतरा है जिस जानवर पर पाबंदी है उसकी कुर्बानी न करें .कुरबानी का मकसद समझें क्योंकि यह एक तरह से भुकमरी के खिलाफ जंग है .

हज़त ने सभी को ईद की मुबारकबाद देते हुए कहा कि केरल सैलाब में जो लोग बेघर हुए हैं सब उनकी मुमकिन मदद करें यह हम सब की साझा ज़िम्मेदारी है .

By: Yunus Mohani

आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड ने संयुक्त राष्ट्र संघ और हॉलैंड सरकार को दर्ज कराया विरोध

पैग़म्बर ए अमन की शान में गुस्ताखी ना क़ाबिल ए बर्दाश्त: सय्यद अशरफ

18 अगस्त (दिल्ली)

“पैग़म्बर ए अमन की शान में गुस्ताखी ना क़ाबिल ए बर्दाश्त” आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष व वर्ल्ड सूफी फोरम के चेयरमैन सय्यद मोहम्मद अशरफ किछोछ्वी ने हॉलैंड के एक सांसद द्वारा पैग़म्बर ए अमन का कार्टून बनाने का कॉम्पीटिशन पार्लियामेंट हाउस में उनकी पार्टी के दफ्तर में आयोजित करने के देहश्तगरदान काम पर कही. हज़रत ने कहा कि किसी भी मज़हब कि तौहीन आतंकवाद ही है, उनहोंने बताया कि आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड ने संयुक्त राष्ट्र संघ व हॉलैंड सर्कार को अपना विरोध पत्र लिख कर दर्ज कराया है और मांग की है कि ऐसा करने वाले किसी व्यक्ति/संस्था को कड़ी से कड़ी सज़ा दी जाए और ताकि भविष्य में कोई ऐसा करने का प्रयत्न भी ना करे. उन्होंने कहा भारत सरकार से भी बोर्ड मांग करता है कि इस मसले पर अपना विरोध हॉलैंड सरकार से जताए क्योंकि इससे भारत में रहने वाले करोड़ों भारतीय मुसलमानों की भावनाएँ आहत हुई हैं. पैग़म्बर की शान में गुस्ताखी मुसलमान बर्दाश्त नहीं कर सकता इसलिए नफरत फैलाने वले उनके जज्बात को इसी के जरिये भड़काना चाहते हैं, जो कि एक वैश्विक षडयंत्र का हिस्सा है. हमें नफरत को पछाड़ने के लिए ऐसा करने वालों को रोकना होगा.

ग़रीबी और अशिक्षा को मिटाने की बात कीजिए तलाक़ पर तकरार बेमानी : सय्यद मोहम्मद अशरफ

श्रीलंका/कोलंबो 9 अगस्त “गरीबी और अशिक्षा मिटाने की बात कीजिए तलाक़ पर तकरार बेमानी” यह बात वर्ल्ड सूफी फोरम व आल इंडिया उलमा व मशायख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने पत्रकारों द्वारा तीन तलाक़ पर पूछे गए सवाल के जवाब में कहीं। वह इस समय श्रीलंका दौरे पर हैं।
हज़रत ने भारत सरकार द्वारा संसद में पेश ट्रिपल तलाक़ बिल में संशोधन पर पूछे गए सवाल पर कहा कि तलाक़ मुसलमानों का सबसे बड़ा मसला नहीं है सबसे बड़ा मसला हिन्दुस्तानी मुसलमानों की बदहाली गरीबी और अशिक्षा है इसपर बहस कर इसे दूर करने का इमानदार प्रयास होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अभी संशोधन क्या हुआ है इसकी जानकारी नहीं है लिहाजा इस पर बात करना सही नहीं है लेकिन यह ज़रूर कहूंगा कि तलाक़ से प्रभावित मुस्लिम महिलाओं की संख्या .5 फीसदी है जबकि अनुच्छेद 341 पर प्रतिबंध होने से लगभग 95% मुसलमान परेशान है और अपने अधिकारों से वंचित हैं यदि सरकार वास्तव में सबका साथ सबका विकास के एजेंडे पर काम करना चाहती है तो इसपर बहस करवाकर इस प्रतिबंध को हटाने का मार्ग प्रशस्त करे।
हज़रत ने कहा कि नफरत को रोकने के लिये मोहब्बत को आम कीजिए , तलाक़ पर कोई बात करने से पहले मुसलमानों को विश्वास में लिया जाना ज़रूरी है।
उन्होंने राज्यसभा के उपसभापति चुने जाने पर श्री हरिवंश जी को मुबारकबाद देते हुए कहा कि हम उम्मीद करते है कि वह अपने अनुभव से देश के लोकतंत्र को और मजबूत करेंगे।

By: Younus Mohani

आतंक को नकारने के लिए पाक की आवाम मुबारकबाद की पात्र – सय्यद अशरफ

26 जुलाई/लखनऊ

“आतंक को नकारने के लिए पाक की आवाम मुबारकबाद की पात्र ” यह बात वर्ल्ड सूफी फोरम व आल इंडिया उलमा व मशायख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने पाकिस्तान इलेक्शन में आतंकी सरगना हाफ़िज़ सईद की पार्टी को एक भी सीट न मिलने पर खुशी जाहिर करते हुए कही ।उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की आवाम ने साफ तौर से बता दिया है कि वह दहशतगर्दी को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं करना चाहते और अमन के साथ हैं ।
हज़रत ने कहा कि इस बार पाकिस्तान में जो बदलाव दिखाई दे रहा है वह हमारे मुल्क के लिए बेहतर है हम उम्मीद करते हैं कि नई हुकूमत से दोनों देशों के ताल्लुकात बेहतर होंगे हज़रत ने इमरान खान को बधाई देते हुए कहा कि हम दुआ करते हैं कि इमरान खान सूफिया की तालीम पर अमल करते हुए पाकिस्तान में मोहब्बत की फिजा को बहाल कर आवाम की बेहतरी के लिए काम करें।हज़रत ने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि दोनों मुल्को के सम्बन्ध बेहतर होंगे।
उन्होंने कहा कि आतंक को रोकना सबकी ज़िम्मेदारी है अगर हमने इसे नहीं समझा तो सबका नुक़सान होगा लिहाजा दोनों मुल्कों को क़दम से क़दम मिलाकर चलना होगा।

 

By: Yunus Mohani

मज़लूम की पहचान मज़हब से न करें, नफरत के एजेंडे को बढ़ने से रोकें : सय्यद मोहम्मद अशरफ

25 जुलाई/अम्बेडकरनगर

मज़लूम की पहचान मज़हब से न करें, नफरत के एजेंडे को बढ़ने से रोकें” यह विचार वर्ल्ड सूफी फोरम व आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड के संस्थापक, अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने हज़रत मख़दूम अशरफ जहांगीर सिमनानी रहमतुल्लाह अलैहि की दरगाह पर हाज़िरी के बाद मीडिया से कही, उन्होंने कहा हम जब मज़लूम की पहचान उसके मज़हब या ज़ाति की बुनियाद पर करते हैं तो नफरत के एजेंडे को ताक़त मिलती है और वह कामयाब हो जाता है।
हज़रत ने कहा कि मज़लूम सिर्फ मज़लूम होता है उसका कोई धर्म या ज़ा नहीं होती लेकिन खास तौर से इस बात को कहना कि यहां मरने वाला मुसलमान है या दलित या फिर कोई और तो इससे समाज में एक तरह का खौफ पनपता है और नफरत फैलती है. हमारा प्रयास होना चाहिए कि अतिताईयों के मक़सद को कामयाब न होने दें जो हम को ज़ाती और धर्म के साथ बांटना चाहते हैं ताकी उनके खतरनाक इरादे कामयाब हो जाएं।
उन्होंने कहा कि सूफिया ने गंगा जमुनी तहज़ीब को जन्म दिया जिसमें नफरत के लिए कोई जगह नहीं है, हमारा मुल्क अपनी इसी खूबसूरती और इस मोहब्बत वाली तहज़ीब के लिए जाना जाता है। कुछ देश के दुश्मन हमसे हमारी यह तहज़ीब छीनना चाहते हैं, हमें मज़हब और ज़ाती के नाम पर बांट कर वह अपने घिनौने एजेंडे को कामयाब करने पर तुले हैं।
हज़रत ने कहा कि मीडिया को भी अपनी ज़िम्मेदारी निभाते हुए इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि नफरत बढ़ाने वाली बातों और खबरों को रोका जाए, यह मुल्क मेरा और आपका नहीं बल्कि हमारा है, हम मिलकर इसका मुस्तक़बिल संवार सकते हैं, हम का माना हिन्दू और मुस्लिम से है, साथ में भारत में रहने वाले सभी धर्म के मानने वाले हैं अगर हम को मैं और तुम में बदला दिया गया तो देश का बड़ा नुक़सान होगा ।
उन्होंने साफ शब्दों में सरकार से कहा कि अब सरकार तय करे कि देश में क़ानून का राज चलेगा या भीड़ फैसला करेगी? हिन्दू ,मुसलमान ,सिख ,ईसाई सब आपस में हैं भाई भाई, क्या यह अब सिर्फ एक जुमला बन गया है या फिर मुल्क की बुनियादी ज़रत है ?

 

By: यूनुस मोहानी

अलग देश की बात करने वाले मुसलमानों के दुश्मन : सय्यद मोहम्मद अशरफ

10 जुलाई/लखनऊ “अलग देश की बात करने वाले मुसलमानों के दुश्मन” यह बात वर्ल्ड सूफी फोरम एवम् आल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने कश्मीर के मुफ्ती नसीरुल इस्लाम के उस बयान पर कही जिसमें मुफ्ती ने कहा था कि अगर भारत सरकार शरीयत अदालत नहीं दे सकती तो मुसलमानों को अलग देश दे दिया जाए। हज़रत ने कहा कि ये मुसलमानों के साथ दुश्मनी निभाना है न की उनकी हिमायत करना क्योंकि हम हिन्दुस्तानी मुसलमान अपने मुल्क से मोहब्बत करने वाले हैं, हमने जिन्ना का भी विरोध किया और ऐसे लोगों का भी हम कड़ा विरोध करते हैं।
उन्होंने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने बेवक्त की शहनाई बजाई है और नादान लोग इसकी धुन को नफरत का राग बना रहे हैं जबकि दारुलक़जा को समाधान केंद्र के तौर पर आप बिना हमारे मुल्क के कानून और संविधान से टकराए बिना बना सकते हैं तो इसमें इतना शोर मचाने का क्या मतलब है?
हज़रत ने यह सवाल भी पूछा कि बोर्ड ने इस वक़्त क्यों यह बात शुरू की जबकि ऐसी कोई दिक्कत है नहीं, उन्होंने कहा कि इसमें सियासत की बू अा रही है, मुल्क के मुसलमान हरगिज़ ऐसी बेबुनियाद बातो के साथ नहीं है और हम  बेबुनियाद बयानबाज़ी की कड़ी निन्दा करते हैं और देश बांटने की बात करने वालो से मुसलमानों को होशियार रहने की अपील करते है ।
 By:
यूनुस मोहानी

मज़हब के नाम पर मौत का कारोबार बर्दाश्त नहीं, आतंकी क़ायर हैं : सय्यद मोहम्मद अशरफ

मॉरीशस /2 जुलाई

मज़हब के नाम पर मौत का कारोबार बर्दाश्त नहीं, आतंकी क़ायर हैं, यह बात वर्ल्ड सूफी फोरम के चेयरमैन व आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड के संस्थापक, अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने अफगानिस्तान में सिख समुदाय पर किए गए आतंकी हमले पर अफसोस जताते हुए कही।
उन्होंने कहा कि आतंकी क़ायरों की बहकी हुईं भीड़ का हिस्सा हैं जो मज़हब का चोला ओढ़ कर बेगुनाह लोगों को शिकार बना रहे हैं, हज़रत ने कहा कि हम इसकी घोर निन्दा करते हैं और सिर्फ निन्दा ही नहीं करते हैं बल्कि दुनिया के सभी अमन पसन्द लोगों  से अपील करते हैं कि आतंक के विरूद्ध धर्म क्षेत्र और जाति का भेद भूल कर खड़े हो जाईए, हमें इस नासूर को समाज से मिटाना ही होगा वरना कोई सुरक्षित नहीं है।
हज़रत ने कहा, दुनिया को नफरत से लड़ने के लिए मोहब्बत का हथियार उठाना होगा क्योंकि बारूद से लगी आग को बारूद से नहीं बुझाया जा सकता, सबको आपस में मोहब्बत करनी होगी और ज़ुल्म से नफरत चाहे वह कहीं भी हो किसी पर भी हो, हमें इसमें दोहरा रवैया नहीं अपनाना चाहिए ।
उन्होंने कहा, हमारी सारी संवेदनाएं उन मज़लूमों के साथ हैं जो इस क़ायराना हमले का शिकार हुए, हम उनके परिवार वालों के लिए सब्र की दुआ करते हैं और जो लोग घायल है जल्द से जल्द उनके स्वस्थ होने की इश्वर से प्रार्थना करते हैं।
हज़रत ने लोगों से मुखातिब होते हुए कहा कि याद रखिए नफरत का इलाज सिर्फ मोहब्बत है अगर आप अमन कायम करना चाहते हैं तो मजलूम के साथ खड़े हो जाईए और ज़ालिम का पुरजोर विरोध कीजिए चाहे वो ज़ालिम कोई भी हो।

By: यूनुस मोहानी

इल्म से दूर रहकर हम खुद अपने ऊपर ज़ुल्म कर रहे हैं : सय्यद मोहम्मद अशरफ

10 मई/ खरगौन, मध्य प्रदेश

“इल्म से दूर रहकर हम खुद अपने ऊपर ज़ुल्म कर रहे हैं” यह विचार वर्ल्ड सूफी फोरम एवम् आल इंडिया उलमा व मशाइख़ बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने जनसभा को संबोधित करते हुए कही, उन्होंने कहा मुसलमान सिर्फ अपने साथ भेदभाव किये जाने की बात करते हैं और मजलूमियत का रोना रोते रहते हैं मुसलमानों ने यही अपना पसंदीदा काम बना रखा है अपनी नाकामयाबियों पर सोचने के बजाय यह पूरी कौम सिर्फ दूसरो को इल्ज़ाम देने के काम में मसरूफ है।
हज़रत ने कहा जिस कौम की किताब क़ुरआन है और उसका पहला अल्फ़ाज़ इकरा है अफसोस वह कौम इल्म से दूर है हमारी कम से कम 50 फीसदी आबादी ने स्कूल और मदरसे का मुंह नहीं देखा आखिर इसके लिए कौन ज़िम्मेदार है?
आपको क्या किसी पार्टी ने अपने बच्चो को पढ़ाने से रोका प्रशासन ने रोका फिर हमारे किसी गैर मजहबी भाई ने आपको रोका नहीं बल्कि आपने अपने ऊपर यह ज़ुल्म खुद किया है किसीऔर ने नहीं हमने खुद पस्ती का रास्ता चुना है हमने अल्लाह और उसके रसूल का फरमान नहीं माना और खुद को परेशानियों में घेरा है अब अगर आपको इस पस्ती से खुद को उबारना है तो इल्म हासिल करना होगा और इसके लिए कौम को बेदार करना होगा ।
हज़रत ने कहा कि मजलूमियत का रोना छोड़ दीजिए और लोगों पर इल्ज़ाम देना बंद कीजिए अपने बच्चे पढ़ाइए यही आगे बढ़ने का रास्ता है ।

By: Yunus Mohani