अमन वालों की ख़ामोशी भी ज़ुल्म है : सय्यद अशरफ

कोटा /11 दिसम्बर “अमन वालों कि ख़ामोशी भी ज़ुल्म है’ यह बात आल इंडिया उलेमा व मशायख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने एक जलसे में ख़िताब करते हुए कही .हजरत ने कहा सिर्फ ज़ुल्म करना ही इंसान को ज़ालिम नहीं बनाता बल्कि किसी के किसी के साथ ज़ुल्म करने पर खामोश रहना भी हमे ज़ालिम बनाता है .

उन्होंने कहा जिस तरह आये दिन वहशी दरिन्दे मजलूमों को अपना शिकार बना रहे है उन्हें मज़हब के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए बल्कि उन्हें दरिन्दे के तौर पर देखा जाना चाहिये और उनके खिलाफ इंसानियत के तकाजे पर खड़ा होना चाहिए, लेकिन समाज में जिस तरह की नफरत घुल रही है वहां धर्म पैमाना बनता जा रहा है, जोकि धर्म है ही नहीं ,क्योंकि धर्म मोहब्बत का सन्देश देता है, ज़ुल्म को समाप्त करने का मार्ग दिखाता है, न कि हमें हिंसक पशु बनाता है .

हज़रत ने कहा पैगम्बरे अमनो शांति सल्लललाहूअलहिवसल्लम की तालीमात पर अमल करने से आदमी इंसान बनता है और इंसान ज़ालिम नहीं होता, क्योंकि ज़ालिम आदमी हो सकता है इंसान नहीं.हज़रत ने बिना धर्म सम्प्रदाये का फर्क किये अमन वालों से ज़ुल्म के खिलाफ खड़े हो जाने की अपील की. उन्होंने कहा कि रसूले खुदा का फरमान है कि ज़ालिम और मजलूम दोनों की मदद करो ज़ालिम की मदद यह है कि उसे ज़ुल्म से रोक दिया जाये .
अमन वालों की ख़ामोशी ज़ालिम को और ज़ालिम बनाती है इस चुप्पी को तोडना होगा सबको मोहब्बत के साथ एक जुट होकर ज़ालिम के खिलाफ खड़ा होना होगा पैगाम वही है “मोहब्बत सबके लिए नफरत किसी से नहीं “
जलसे को मौलना उमर अशरफी ने भी संबोधित किया और हजारों की संख्या में लोग मौजूद रहे .

BY: Yunus Mohani

बिके हुए लोग अफवाहों को हवा देकर नफरत फैला रहे हैं :सय्यद मोहम्मद अशरफ

संतकबीर नगर /9 दिसम्बर
बिके हुए लोग अफवाहों को हवा देकर नफरत फैला रहे है यह बात संतकबीनगर ज़िले के धर्मसंघवा नामक स्थान पर एक कार्यक्रम में बोलते हुए आल इंडिया उलमा व मशायख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने कहीं ।
उन्होंने कहा, पूरी दुनिया में अफवाहों के कारोबारी ज़हर बेच रहे हैं हर तरफ ज़ुल्म हो रहा है, ऐसे में अगर अमन वाले लोग खामोश रहे तो दुनिया जल जायेगी, हमे न सिर्फ इस प्यारे वतन को बल्कि पूरी दुनिया को बचाने के लिए आगे आना होगा, अफवाहों पर ध्यान न दें आपस में मोहब्बत को बढ़ाइए ।
हज़रत ने कहा मुल्क में वहशी भेड़ियों की एक टोली घूम रही है जो ज़ुल्म के अंधेरे को कायम करना चाहती है ताकि अमन के उजाले को ख़तम कर दिया जाय, राजस्थान ,शब्बीरपुरा,दादरी ,हरियाणा इसी मंसूबे की कड़ियां हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि न कोई मुस्लिम हिन्दू से नफरत करता है न कोई हिन्दू मुसलमान से, न सिख ईसाई से, नफरत तो सियासत का घिनौना हथियार है जिसको मजहब का लिबास पहना कर ज़ुल्म किया जा रहा है। हज़रत ने कहा याद रखिए अगर ज़ुल्म के खिलाफ नहीं खड़े हुए तो आप भी मुजरिम हैं आप भी ज़ालिम साथ दे रहें है,लिहाज़ा मोहब्ब्त का दिया रोशन किजिए नफरत को नकार दीजिये ।हमारा पैग़ाम वही है मोहब्बत सबके लिए नफरत किसी से नहीं।
जलसे में मौलाना अली अहमद बिस्मिल अजीजी और मौलाना मकबूल सालिक मिस्बाही ने भी अपने ख्यालात का इजहार किया।

By: यूनुस मोहानी

पैग़म्बर -ए-अमन की तालीम पर अमल से ही दुनिया में अमन मुमकिन : सय्यद मोहम्मद अशरफ

कोलकाता/1दिसंबर
पैग़म्बर –ए-अमन की तालीम पर अमल सेे ही दुनिया में अमन मुमकिन है, यह बात एक जश्ने ईद मिलादुन्नबी प्रोग्राम में शिरकत करने कोलकाता आए आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने कहीं। उन्होंने आक़ा अलैहिस्सलाम की एक हदीस बयान की ”तुम्हारे शर (उत्पीड़न)से अगर तुम्हारा पड़ोसी सुरक्षित नहीं है तो तुम मोमिन नहीं हो सकते” और कहा कि अगर पूरी दुनिया इस पर अमल कर ले तो पूरी दुनिया में अमन कायम हो सकता है, क्योंकि एक इंसान दूसरे इंसान का पड़ोसी है, इसी तरह एक मोहल्ला दूसरे मोहल्ले के, एक गांव दूसरे गांव का, शहर दूसरे शहर का, एक प्रदेश दूसरे प्रदेश का, एक देश दूसरे देश का, इस तरह पूरी दुनिया एक दूसरे की पड़ोसी है, लिहाज़ा न किसी फौज की ज़रूरत होगी, न सुरक्षा की, न हथियारों की और यह धन स्वास्थ्य और शिक्षा पर खर्च होगा और दुनिया में अमन क़ायम हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि सबलोग मिलकर आक़ा की यौमे मीलाद मनाएं, इस दिन को यौमे अमन के तौर पर मनाया जाये, लोग मज़लूमों, ग़रीबों,बीमारों और यतीमों की खूब मदद करें और मज़हब और संप्रदाय देखे बिना लोगों की मदद करते रहें।
उधर बोर्ड के ऐलान पर पूरे भारत में आज बोर्ड की यूनिट में वृक्षारोपण का कार्यक्रम संपन्न हुआ, इसी क्रम में महाराजगंज शाखा में भी वृक्षारोपण कार्यक्रम संपन्न हुआ. इस मौके पर मुख्य मोहम्मद इद्रीस अशरफ़ी, रफ़ीक़ अशरफ़ी, इम्तियाज कुरैशी, मोबीन अशरफ़ी, गुलाम रसूल, मोहम्मद सलीम, फरमान कुरैशी, रशीद मोहम्मद साहब और शमीम अशरफ़ी मौजूद रहे।

By: यूनुस मोहानी

मज़लूमों की मदद है आक़ा अलैहिस्सलाम की मीलाद मानने का तरीक़ा : सय्यद मोहम्मद अशरफ

पूना/30 नवंबर
मज़लूमों की मदद है आका अलैहिस्सलाम की मीलाद मनाने का एक तरीक़ा, यह बात आल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने पूना में आयोजित एक धर्मसभा में कहीं,हज़रत ने कहा कि मुस्तफा करीम सल्ललल्लाहू अलैहि वसल्लम की मीलाद से मज़लूमों को ज़ुल्म से निजात मिली, गुमराहियों के घनघोर अंधेरों से छुटकारा मिला और तौहीद की रोशनी नसीब हुई, जहां खुद से खुद पर किए जा रहे ज़ुल्म से इस तरह निजात मिली वहीं ज़ालिमों के ज़ुल्म से भी लोगों को आजादी मिली, औरतों, यतीमों, गरीबों और मिस्कीनो को इज्जत से ज़िन्दगी गुजारने की आज़ादी और अधिकार मिले, यानी आक़ा की मीलाद से मज़लूमों को ज़ुल्म से निजात मिली, लिहाज़ा हमें इसे यौमे अमन के तौर पर मनाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि बेहतर से बेहतर तरीक़े से हमें लोगों तक मदद पहुंचाना चाहिए, लोगों की ज़रूरतों का ख्याल रखा जाना चाहिए, यातीमों ,बेवाओं,गरीबों का ख्याल रखिए, बीमारों की अयादत कीजिए, महफ़िल सजाइए, लोगों में खाना बांटिए, दुरूद और सलाम की महफ़िल कीजिए, जुलूस निकालिये लेकिन ख्याल रहे कि यह रहमते आलम की मीलाद का जुलूस है, किसी को कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए, अपने घर और मोहल्ले को साफ सुथरा कीजिए और सबको इस जश्न में शामिल होने की दावत दीजिए।
हज़रत किछौछवी ने हरे झंडे के साथ हर मज़हबी जलसे जुलूस में मुल्क के झंडे तिरंगे को शामिल करने की अपील भी की। आल इंडिया उलमा व मशाइख़ बोर्ड के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य हज़रत अम्मार अहमद अहमदी उर्फ नय्यर मियां की सरपरस्ती में दिल्ली के जोघाबाई एक्सटेंशन पर गरीबों को गरम कपड़े बांटे, इस मौक़े पर बोर्ड के राष्ट्रीय सचिव सय्यद हसन जामी, यूनुस मोहानी ,मौलाना मुख्तार अशरफ, अंजर अल्वी मौजूद रहे। बोर्ड के ऐलान के मुताबिक बोर्ड की हर शाखा इस काम को कर रही है, बोर्ड के अध्यक्ष के ऐलान पर पूरे देश में मीलाद को यौमे अमन के तौर पर मनाया जा रहा है।
By: यूनुस मोहानी

कट्टरवाद इबादतगाहों में खून बहाता है इस्लाम में इसकी जगह नहीं – सय्यद अशरफ

26 नवम्बर /उदयपुर

कट्टरवाद इबादतगाहों में भी खून बहाता है, बेगुनाहों का खून बहाना हराम है, इसका इस्लाम में कोई स्थान नहीं है, यह बात आल इंडिया उलमा व मशाइख़ बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने मिस्र के अल आरिश के करीब अल रवादा की मस्जिद में लगभग 250 नमाज़ियों की हत्या किए जाने पर कहीं।
हज़रत ने कहा, कट्टरवाद एक ज़हर, है वह हर रूप में खतरनाक है, धार्मिक भ्रम में नफरत की फैक्ट्री का नाम ही आतंकवाद है, इसके लिए यह जरूरी नहीं कि इसे किस धर्म के नाम पर किया जा रहा है। हज़रत ने साफ तौर से कट्टरवादी आंदोलन की भर्त्सना करते हुए कहा कि इस प्रकार की विचारधारा का सभ्य समाज में कोइ स्थान नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हमारी सरकार को भी इससे सख्ती से निपटना चाहिए  क्योंकि धर्म के नाम पर हिंसा फैलाने वाले दरिंदे हैं, इन्हे अगर रोका नहीं गया तो शरीफ नागरिकों का जीना मुहाल हो जाएगा। आस्था के नाम पर नफरत का कारोबार ठीक नहीं, इसकी आड़ में देश को तोड़ने की साजिश को हम सब मिलकर नाकाम करें।
कट्टरवाद छद्म रूप धारण कर अमन वालों के भेष में आकर धोखा देने की साजिश भी कर रहा है. इसे समझना होगा, समय रहते यदि ऐसा नहीं किया गया तो परिणाम नुकसान देने वाले होंगे।लोगों को मिलकर मोहब्बत के पैग़ाम आम करना चाहिए।

By: Yunus Mohani

रोहित सरदाना देश से माफी माँगे : सय्यद मोहम्मद अशरफ

संभल/20 नवंबर

किसी की भी धार्मिक भावनाओं को आहत करना खुली दहशतगर्दी है, यह बात ऑल इण्डिया उलमा व मशाईख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने रोहित सरदाना द्वारा हज़रत फातिमा रज़ी अल्लाहु अन्हा  और उम्मुल मोमिनीन हज़रत आयशा रज़ी अल्लाहु अन्हा सहित हज़रत मरियम रज़ी अल्लाहु अन्हा की शान में गुस्ताखी करने पर कही।
उन्होंने कहा कि यह जो धर्मिक माफिया नफरत की सियासत करने के लिए घिनौनी भाषा शैली का प्रयोग कर समाज को नफरत की आग में झोंकने पर तुले हैं, यह मुल्क के और इंसानियत के दुश्मन हैं, इनसे हमारे देश को खतरा है ।किसी भी धर्म की आस्थाओं पर प्रहार हमारे बीच मोहब्बत को खत्म करने की घिनौनी साजिश है।
हज़रत ने कहा, यह वैचारिक दहशतगर्दी है जो बहुत खतरनाक है, भारत सरकार को इसकी रोकथाम के लिए मजबूत क़दम उठाने होंगे ।हज़रत ने मांग की कि हर हाल में रोहित सरदाना को देश से माफी मांगनी चाहिए क्योंकि उसने सिर्फ मुसलमानों की भावनाओं को आहत नहीं किया है बल्कि हिन्दू भाइयों और ईसाई समुदाय की भावनाओं को भी आहत किया है ,इनके द्वारा हिन्दू देवी का भी घोर अपमान किया गया है आखिर यह नफरत की राजनीति कब तक चलेगी।
हज़रत किछौछवी ने कहा, एक तरफ तालिबान और दाईश की विचारधारा है और एक तरफ कट्टरवाद की, दोनों में कोई फर्क नहीं है, दुनिया दोनों से ही खतरे में है, धर्म के नाम पर दहशत अब खुद को पत्रकार कहने वाले भी फैलाने पर तुल गए हैं ,मीडिया को ऐसे लोगों को चिन्हित कर बाहर का रास्ता दिखाने का वक़्त आ गया है क्योंकि देश को नफरतों की आग से बचाना है।

By: यूनुस मोहानी

मज़हब मोहब्बत सिखाता है नफरत नहीं : सय्यद मोहम्मद अशरफ

संभल/19 नवंबर

मज़हब मोहब्बत सिखाता है नफरत नहीं, यह बात हज़रत इमाम हसन की शहादत के मौके पर आयोजित एक धर्मसभा में आल इंडिया उलेमा व मशायख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने कहीं उन्होंने कहा हर धर्म मोहब्बत का पैग़ाम देता है तो फिर धर्म के नाम पर नफरत फैलाने वाले यह लोग कौन है ? आखिर मजहब के नाम पर खून बहाने वाले भोले भाले लोगों को किस तरह गुमराह कर पा रहे हैं ?
उन्होंने कहा कि यह इसलिए कामयाब हो पा रहे हैं क्योंकि हम मजहब को समझना ही नहीं चाहते हम झूठ और फरेब का शिकार हैं लोग हमें हर तरह फरेब दे रहे हैं यहां तक कि हम इबादतगाहों के विवाद में उलझे हुए हैं जब दुनिया दूसरे गृह पर बसने की बात कर रही है उस दौर में हमारा यह हाल है ।
हज़रत ने कहा हमें अपने बुजुर्गों से सीखना होगा कि मुश्किल दौर में किस तरह अमन कायम किया जाए यही तालीम हमें हज़रत इमाम हसन मुज्तबा अलहिससलाम की ज़िन्दगी में मिलती है आपने बताया कि किस तरह अमन को कायम करने के लिए कुर्बानी दी जाय ।आज इस दौर के किसी हुक्मरान में यह हिम्मत नहीं कि अगर अमन और सत्ता में से उसे कोई एक चुनना हो तो वह अमन चुने और अमन को कायम करने के लिए सत्ता को त्याग दे यह अमल इमाम का ही है और हमारी ज़िम्मेदारी है कि इसे अपनी ज़िन्दगी में उतारे तभी हम इस दुनिया को शांति का गहवारा बनाए रख सकते हैं ।
“मोहब्बत सबके लिए नफरत किसी से नहीं “यह संदेश हज़रत इमाम हसन अलैहस्सलाम की ज़िन्दगी में मिलता है आपने अपने क़ातिल का बदला भी अपने रब पर छोड़ दिया और अमन के लिए अज़ीम कुर्बानी पेश की।

By: Yunus Mohani

इमामे हसन की पूरी ज़िन्दगी पैग़ामे अमन है : सय्यद मोहम्मद अशरफ

संभल/18 नवम्बर

इमामे हसन मुजतबा की पूरी ज़िन्दगी पैग़ामे अमन है, यह बात आल इंडिया उलमा व मशाइख़ बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने संभल में हज़रत इमाम हसन अलैहिस्सलाम  की शहादत पर हुए एक जलसे में कही.

हज़रत ने इमाम हसन की ज़िन्दगी पर रौशनी डालते हुए बताया की जब इमाम को ज़हर दे दिया गया और आपके छोटे भाई हज़रत इमाम हुसैन आपके पास आए  तो आपने उनसे कहा कि  जिस पर मुझे शक है अगर वही मेरा क़ातिल है तो अल्लाह उसकी पकड़ करेगा वरना मैं सिर्फ अपने शक की वजह से पूरी उम्मत को बवाल में नहीं डाल सकता, ऐसी हालत में भी हज़रत इमाम ने लोगों के बीच मिसाल पेश की और बता दिया की रहती दुनिया तक यही अमल है जिससे अमन क़ायम किया जाएगा .

एक तरफ कर्बला है जहाँ इमाम सर दे कर दीन को बचा रहे हैं और एक तरफ हज़रत इमामे हसन की शहादत है, दोनों ही शहादतें अज़ीम हैं, अब लोग इमामे हुसैन अलैहिस्सलाम की शहादत का ज़िक्र तो करते हैं लेकिन इमाम हसन की शहादत का ज़िक्र नहीं होता जो ज़ुल्म है.

हज़रत इमाम हसन मुजतबा ने जो रास्ता दिखाया वह यह है की सुलह के ज़रिये अगर अमन क़ायम हो सकता है तो कोशिश करो और इमाम हुसैन ने बताया जब ज़ालिम दीन को तबाह करने पर आ जाए  तो सर देने में भी गुरेज़ न करो .

आज हमारे पास दोनों ही मिसालें हैं. हमें हर हाल में अमन के लिए काम करना होगा. अगर उसका रास्ता सुलह से निकलता है तो सुलह की जानी चाहिए. यह हज़रत इमामे हसन मुजतबा की पैरवी है और अगर ज़ुल्म नहीं रुकता और ज़ालिम बढ़ता ही जाता है तो क़ुरबानी पेश कीजिये लेकिन हर हाल में मक़सद ए अमन को क़ायम  होना चाहिए .

ज़ुल्म सिर्फ किसी कमज़ोर को सताना नहीं है, ज़ुल्म ज़ालिम का साथ देना भी है, लिहाज़ा होशियार रहिये ,अमन का पैग़ाम आम कीजिये, मोहब्बतों वाली बयार बहनी चाहिए, सबको अपनी ज़िन्दगी इस बात पर जीनी है कि ”मोहब्बत सबके लिए नफरत किसी से नहीं”

इबादतगाहें शांति प्राप्त करने के लिए हैं लड़ाने का सामान नहीं: सय्यद मोहम्मद अशरफ

रत्नागिरी/15 नवम्बर

इबादतगाहें शांति प्राप्त करने के लिए हैं लड़ाने का सामान नहीं हैं इन विचारों को आल इंडिया उलमा व मशायिख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने एक जलसे को सम्बोधित करते हुए रखा उन्होंने कहा लोग दुनिया से ऊब कर सुकून हासिल करने के लिए इबादतगाहों का रुख करते हैं ताकि अपनी आत्मा को शांत कर सकें जो परवरदिगार की इबादत से ही मुमकिन है लेकिन अफ़सोस सियासत ने इबादतगाहों को लड़ाने का सामान बना दिया है उन्होंने यह बात मौजूदा समय में बाबरी मस्जिद और राम मंदिर विवाद को लेकर चल रही सरगर्मियों के सम्बन्ध में कही .

हज़रत ने कहा कि कभी कोई धर्म हिंसा की शिक्षा नहीं देता तो फिर धर्म के नाम पर हिंसक तांडव करने वाले यह लोग कौन हैं किसी भी हाल में इनका किसी भी मज़हब से सम्बन्ध नहीं हो सकता क्योंकि जो इंसान ही नहीं है उसका धर्म से क्या लेना देना धर्म आदमी को इंसान बनाता है और इस वक़्त समाज को इंसानों की ज़रूरत है हैवान सिर्फ विनाश कर सकते हैं हमे सचेत रहना होगा जो नफरत की बात करे उससे होशियार रहिये .

उन्होंने कहा देश तभी आगे बढ़ सकता है जब लोग डरे हुए न हों ,लोगों में मोहब्बत हो और एक साथ मिलकर काम करने का आगे बढ़ने का जुनून हो .सूफिया ने हमेशा जोड़ने का काम किया उन्होंने नफरतों को समाप्त कर मोहब्बत करने वालों का समाज बनाया यही वजह है आज भी उनके आस्तानो पर बिना धर्म-जाति के भेद के लोग आते हैं और अपनी अकीदतों के फूल चढाते हैं .

आज भी समाज को बिखराव से बचाने की ज़रूरत है हमे सियासत की गन्दी चालों से बचना होगा धर्मान्धता की अफीम के नशे में नहीं रहना होगा तभी हमारा सुरक्षित रहना संभव है .हज़रत ने साफ़ कहा कि इबादतगाहें मोहब्बतों को बढ़ावा देने के लिए हैं इन्हें नफरतों की गंदगी से बचा लीजिये और समाज में मोहब्बत सबके लिए नफरत किसी से नहीं के सन्देश को आम कीजिये .

मानवजीवन की रक्षा इबादतगाहों के विवाद से ज़्यादा ज़रूरी : सय्यद मोहम्मद अशरफ

लखनऊ/17 नवंबर

मानव जीवन की रक्षा इबादतगाहों के विवाद से ज़्यादा ज़रूरी है क्योंकि मानव जीवन बहुमूल्य है यह बात आल इंडिया उलमा व मशाईख़ बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने लख़नऊ में मीडिया से बाबरी मस्जिद को लेकर चल रहे घटनाक्रम के संबंध में कही. उन्होंने साफ कहा कि हम अगर धर्म की बात करते हैं तो धर्म यह कहता है कि किसी भी तरह बेगुनाहों के खून को बहने से बचाया जाए ।
हज़रत ने साफ कहा कि देश के सभी नागरिकों को न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और सभी को उसके निर्णय का सम्मान करना चाहिए. उन्होंने अदालत के बाहर समझौते के लिए चल रही कोशिशों पर कहा कि यह समझौता पक्षकारों के बीच ही संभव है अगर वह चाहतें है और कोई हल निकल सकता है जिससे मोहब्बत वाली फिज़ा  बनेगी तो ज़रूर होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि हम इस संबंध में पक्षकार नहीं हैं, हमारा काम सौहार्द को बनाने का है, प्रेम बांटने का है, सूफिया की तालीम को आम करते हुए लोगों के बीच मोहब्बत फैलाना है, क्योंकि अगर किसी बेगुनाह का खून बहा तो हम सब हार जाएंगे, क्योंकि इबादतगाह इबादत करने वालों के लिए हैं तो पहला कर्तव्य मानव जीवन की रक्षा है, उसे सांप्रदायिक विवादों से बाहर निकालना है।
हज़रत किछौछवी ने कहा, सूफी संतों  ने सदा जोड़ने का काम किया है, हम तोड़ने वालों के साथ नहीं हैं , लेकिन जोड़ने वालों के साथ हैं. हम यही पैग़ाम आपको भी देते हैं “मोहब्बत सबके लिए, नफरत किसी से नहीं” शांति का यही मंत्र है।

By: युनुस मोहानी