नफ़रत बिखराव चाहती है फैसला आपके हाथ : सय्यद मोहम्मद अशरफ

14 जनवरी/नई दिल्ली
आल इंडिया उलमा व मशाईख  बोर्ड के अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफी फोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि”नफरत बिखराव चाहती है,फैसला आपके हाथ है ” उनका यह बयान देश में मौजूदा हालात पर था उन्होंने कहा कि चुनावी समर शुरू हो चुका है लिहाजा नफरत अपना हर हथकंडा आजमाएगी ।
हज़रत ने कहा कि लोग इत्तेहाद कर जीतने की राह तलाश रहे हैं।इधर मुसलमान आपस में छोटी छोटी बातों पर बिखर जाने पर आमादा हैं यह नफरत के एजेंडे को कामयाब बनाने वाली बात है जिसे वक़्त रहते समझना होगा वरना नुकसान तय है ।
उन्होंने कहा कि जिस तरह तेज़ी से हालात बदल रहे हैं हमें अनपर कड़ी नजर रखते हुए फैसला करना होगा जिससे मुल्क को हम नफरत की आंधी से बचा पाये हम फरेब में फंसे तो अपना ही नहीं मुल्क का भी नुकसान करेंगे।
हज़रत से जब उत्तरप्रदेश में समाजवादी और बहुजन समाज पार्टी के इत्तेहाद के बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने सवाल के जवाब में सवाल किया कि इस इत्तेहाद में शामिल पार्टियों ने क्या बताया है कि वह सिर्फ मुसलमानों का वोट चाहती हैं या फिर प्रतिनिधित्व भी देना चाहती हैं ?
उन्होंने कहा कि कब तक सिर्फ यह शोर मचता रहेगा कि मुस्लिम तुष्टिकरण कर रही है कोई सियासी पार्टी क्योंकि अभी तक मुसलमानों को कुछ मिला तो नहीं है यहां तक हमारे वोट पर जीतने के बाद सेहरा दूसरो के सर बाधने वाले और हार का ठीकरा मुसलमानों पर फोड़ने वाले भी हमारा वोट चाहते हैं।
By: Yunus Mohani

بہار اسٹیٹ مدرسہ ایجوکیشن بورڈ کے نصاب سے انگریزی مضمون کو ختم کرنے سے بہارمدارس کے بچوں کا مستقبل خطرے میں: سید محمد اشرف کچھوچھوی 

چتوڑگڑھ،راجستھان،۱؍ستمبر(پریس ریلیز) بہار اسٹیٹ مدرسہ ایجوکیشن بورڈ کی جانب سے فوقانیہ اور مولوی امتحانات سے لازمی پیپر انگریزی جو 100 نمبر کا تھا جسے ہٹا نے سے سیدھا نقصان طلبہ و طالبات کا ہوگا۔ ان خیالات کا اظہار آل انڈیا علماء و مشائخ بورڈ کے قومی صدراور ورلڈ صوفی فورم کے چیئرمین حضرت سید محمد اشرف کچھوچھوی نے چتوڑ گڑھ سے جاری ایک بیان میں کیا۔
بورڈ کے قومی صدر نے کہا کہ طلبہ و طالبات کو کسی بھی یونیورسٹی میں کسی بھی شعبے میں داخلہ لینے کے لئے یا روزگار حاصل کرنے کے لئے انگریزی زبان کا ہونا لازمی ہے۔موجودہ دور میں زیادہ تر علمی معلومات اسی زبان میں میسرہیں جس سے مستفیدہونے کے لیے ضروری ہے کہ اس زبان پر تحریری اور زبانی اعتبار سے دسترس حاصل کی جائی لیکن اس کو ہٹاکر بہار مدرسہ بورڈ نے طلبہ و طالبات کے مستقبل کے ساتھ کھلواڑ کیا ہے اور ساتھ ہی ایجوکیشن بورڈ کے ذریعہ قدیم مدت سے چلی آرہی روایتوں سے ہٹ کر جمعہ کے دن امتحان بھی کرایا گیا ہے جو کہ غلط ہے۔
ان حرکتوں سے پتہ چلتا ہے کہ حکومت بہار نے پورا ارادہ کر لیا ہے کہ مدرسہ بورڈ ختم کردیا جائے جس کا تازہ نمونہ یہ بھی ہے کہ اگست کی آخری تاریخوں میں فوقانیہ اور مولوی جماعت کا امتحان کروایا جا رہا ہے تاکہ کوئی بھی طلبہ و طالبات دیگر کالجوں اور یونیورسٹیوں میں داخلہ نہ لے سکیں کیونکہ ملک کے بیشتر تعلیمی اداروں میں جولائی ماہ ہی میں داخلہ کی کار روائی مکمل کر لی جاتی ہے۔
انہونے یہ بھی کہا کہ یادرکھئے اگر مدرسہ بورڈ کو حکومت نے ختم کردیا تو ہمارے بچوں کا مستقبل تو ختم ہوگا ہی ساتھ ہی ہمارے گھروں میں بے روزگاری بھی بڑھے گی اس لئے آل انڈیا علما و مشائخ بورڈ حکومت بہار سے اسکو بحال کرنے کا پر زور مطالبہ کرتا ہے۔

दुनिया के सभी देशों से अंतरराष्ट्रीय ईश निंदा क़ानून बनवाने के लिए एकजुट होने की वर्ल्ड सूफी फोरम की अपील।

31 अगस्त /चित्तौड़गढ़,

वर्ल्ड सूफी फोरम के चेयरमैन और आल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड के संस्थापक, अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने पत्रकारों को बताया कि वर्ल्ड सूफी फोरम ने दुनिया के तमाम देशों से पत्र भेज कर अपील की है कि अंतरराष्ट्रीय ईश निंदा क़ानून बना कर दुनिया को वैचारिक आतंकवाद से बचाया जाऐ।
उन्होंने कहा कि यह क़दम हाल में हॉलैंड के एक सरफिरे द्वारा पैग़म्बरे अमन व शांति हज़रत मोहम्मद सल्लाल्लहू अलैहि वसल्लम के कार्टून की प्रतियोगिता आयोजित करने के ऐलान के बाद उठाना ज़रूरी है क्योंकि दुनिया में बसने वाले अरबों की तादाद में मुसलमानों की आस्था ऐसी घिनौनी करतूत से आहत हुई है। न सिर्फ मुसलमानों की बल्कि सभी अमन पसंद लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं ।
उन्होंने कहा, हालांकि पूरी दुनिया में हो रहे विरोध प्रदर्शनों और संयुक्त राष्ट्र मानव अधिकार आयोग से वर्ल्ड सूफी फोरम की शिकायत के बाद इस प्रतियोगता को आयोजित नहीं किया जाने का ऐलान किया गया है लेकिन यह अंतिम उपचार या न्याय नहीं है ।उन्होंने कहा कि कहीं भी दुनिया के किसी कोने में कोई किसी भी धर्म के खिलाफ अगर ऐसी घिनौनी बात करता है जिससे उस धर्म के मानने वालों को दुख होता है तो अंतरराष्ट्रीय कानून का होना जरूरी है ताकि दोषी को सज़ा मिल सके और फिर किसी की हिम्मत न हो ऐसा कुकृत्य करने की।
हज़रत ने कहा नामूसे रिसालत पर हमला करने वाले दुनिया को अशांत करना चाहते हैं असली आतंकी यही विचार रखने वाले हैं जो किसी की धार्मिक भावनाओं को अपना हथियार बना कर अपना शैतानी मकसद हल करना चाहते हैं ।लिहाज़ा इस मुद्दे पर सबको साथ आना होगा ।

By: यूनुस मोहानी

अजमेर शरीफ से बाढ़ पीड़ितों के लिए सहायता रवाना !!

28/अगस्त अजमेर शरीफ

आल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव हज़रत सय्यद सलमान चिश्ती द्वारा चिश्ती मंज़िल झालरा अजमेर शरीफ से केरल के बाद पीड़ितों के लिए सहायता भेजी गई है। इस अवसर पर चिश्ती ने कहा कि हम सब केरल के आफ़तज़दा लोगों के साथ खड़े हैं दरगाह अजमेर शरीफ से सहायता का काम भी किया जा रहा है और दुआ भी हो रही है।
उन्होंने कहा कि लोग जहां भी परेशान हैं इंसानियत का पहला तकाज़ा है कि उनकी बिना किसी भेदभाव के मदद की जाये यह हम सबका सामाजिक, धार्मिक,व मानवीय कर्तव्य है ,जो लोग ऐसे वक्त पर भी नफरत का ज़हर फैलाने का असफल कार्य कर रहे हैं उन्हें समझना चाहिए कि परेशान हिन्दू और मुसलमान ,दलित,ईसाई नहीं होते वह सिर्फ परेशान और मुसीबत में फंसे लोग होते हैं इंसान होते हैं और इंसानों की सेवा से इनकार सिर्फ शैतान करते हैं।
सय्यद सलमान ने कहा कि सभी लोग आगे आएं ताकि केरल के लोगों की भरपूर मदद की जा सके यही धर्म है और यही मानवता गरीब नवाज़ का यही मिशन है इसे हम सबको आगे ले जाना है।उन्होंने कहा कि आल इंडिया उलमा मशाईख बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी की अपील का व्यापक असर हुआ है और पूरे देश से राहत सामग्री पहुंच रही है।

 

By: Younus Mohani

आफत में घिरे लोगों की मदद हम सब का इन्सानी फ़र्ज़ है : सय्यद मोहम्मद अशरफ

20 जुलाई /लखनऊ “आफत में घिरे लोगों की मदद हम सब का इंसानी फ़र्ज़ है “हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी संस्थापक अध्यक्ष आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड एवं चेयरमैन वर्ल्ड सूफी फोरम ने यह बात केरल आपदा में पीड़ितों को मदद पहुँचाने की अपील करते हुए कही .

उन्होंने कहा कि आल इंडिया उलमा मशाइख बोर्ड ने क़ुरबानी के ताल्लुक से जो अपील जारी की है उसमे अहम् बात है कि लोग नफ्ली क़ुरबानी जो करना चाहते हैं उनके लिए बेहतर है कि वह केरल के बाढ़ पीड़ितों या कहीं भी किसी मुसीबत में फंसे इंसान की मदद करें क्योंकि मुसीबतज़दा लोगों कि मदद हमारा इंसानी और अख्लाकी फ़र्ज़ है .हज़रत ने कहा कि लोग सामूहिक रूप से या व्यक्तिगत रूप से मदद पहुंचा सकते हैं इस वक़्त लोगो को हमारी सख्त ज़रूरत है .

ईद-उल-अजहा का त्यौहार हमें मानना है और ये त्य्हार हमें कुर्बानी की सीख देता है लिहाज़ा हम अपने उन लोगों के लिए भी क़ुरबानी का जज्बा दिखाएँ जिन्हें इस मुश्किल वक़्त में हमारी ज़रूरत है .आल इंडिया उलमा मशाइख बोर्ड के ज़रिये भी आप अपनी मदद भेज सकते हैं .

हज़रत ने कहा कि कुर्बानी में इस बात का ख्याल रखना है कि हमारी वजह से किसी को तकलीफ न पहुंचे और हम कोई ऐसा काम न करें जिससे मुल्क में अमन को खतरा है जिस जानवर पर पाबंदी है उसकी कुर्बानी न करें .कुरबानी का मकसद समझें क्योंकि यह एक तरह से भुकमरी के खिलाफ जंग है .

हज़त ने सभी को ईद की मुबारकबाद देते हुए कहा कि केरल सैलाब में जो लोग बेघर हुए हैं सब उनकी मुमकिन मदद करें यह हम सब की साझा ज़िम्मेदारी है .

By: Yunus Mohani

आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड ने संयुक्त राष्ट्र संघ और हॉलैंड सरकार को दर्ज कराया विरोध

पैग़म्बर ए अमन की शान में गुस्ताखी ना क़ाबिल ए बर्दाश्त: सय्यद अशरफ

18 अगस्त (दिल्ली)

“पैग़म्बर ए अमन की शान में गुस्ताखी ना क़ाबिल ए बर्दाश्त” आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष व वर्ल्ड सूफी फोरम के चेयरमैन सय्यद मोहम्मद अशरफ किछोछ्वी ने हॉलैंड के एक सांसद द्वारा पैग़म्बर ए अमन का कार्टून बनाने का कॉम्पीटिशन पार्लियामेंट हाउस में उनकी पार्टी के दफ्तर में आयोजित करने के देहश्तगरदान काम पर कही. हज़रत ने कहा कि किसी भी मज़हब कि तौहीन आतंकवाद ही है, उनहोंने बताया कि आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड ने संयुक्त राष्ट्र संघ व हॉलैंड सर्कार को अपना विरोध पत्र लिख कर दर्ज कराया है और मांग की है कि ऐसा करने वाले किसी व्यक्ति/संस्था को कड़ी से कड़ी सज़ा दी जाए और ताकि भविष्य में कोई ऐसा करने का प्रयत्न भी ना करे. उन्होंने कहा भारत सरकार से भी बोर्ड मांग करता है कि इस मसले पर अपना विरोध हॉलैंड सरकार से जताए क्योंकि इससे भारत में रहने वाले करोड़ों भारतीय मुसलमानों की भावनाएँ आहत हुई हैं. पैग़म्बर की शान में गुस्ताखी मुसलमान बर्दाश्त नहीं कर सकता इसलिए नफरत फैलाने वले उनके जज्बात को इसी के जरिये भड़काना चाहते हैं, जो कि एक वैश्विक षडयंत्र का हिस्सा है. हमें नफरत को पछाड़ने के लिए ऐसा करने वालों को रोकना होगा.

सिर्फ जश्ने आज़ादी मनाना नहीं बल्कि आज़ादी को महफूज़ भी रखना है: सय्यद मोहमम्द अशरफ

15 अगस्त /दिल्ली “सिर्फ जश्ने आज़ादी मनाना नहीं बल्कि आज़ादी को महफूज़ भी रखना है “यह बात आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड और वर्ल्ड सूफी फोरम के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहमम्द अशरफ किछौछवी ने जश्ने आज़ादी के मौक़े पर कही उन्होंने मुल्क के सभी लोगों को यौमे आज़ादी की मुबारकबाद देते हुए कहा कि यह मुल्क का राष्ट्रिय पर्व है .

सभी को पूरे हर्षो उल्लास के साथ इसमें शरीक होना चाहिए क्योंकि देश से हम हैं हमारी पहचान हमारे मुल्क से है इसकी आज़ादी को बरक़रार रखना हम सबकी सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी है .उन्होंने कहा कि आज़ादी को छीनने के लिए बड़ी ताकतें लगी हुई हैं लेकिन हम हिन्दोस्तानी अपना सबकुछ लुटाकर भी इसे किसी को छीनने नहीं देंगे .

हज़रत ने कहा कि हमारे बीच में नफरत के बीज इसीलिए बोये जा रहे हैं कि हम एक होकर अपने मुल्क को भी बचाने न खड़े हो सके क्योंकि हमारा इतिहास यही रहा है जब देश की बात आई है तो हम सब एक नज़र आये हैं और देश के दुश्मन यह जानते हैं कि अगर यह एक रहे तो इन्हें मात देना मुमकिन नहीं है .

उन्होंने कहा कि हिन्दू मुस्लिम नहीं हिन्दोस्तानी बन कर सोचिये कि नफरत का नतीजा क्या होगा ?मोहब्बत से नफरतों को हरा दीजिये यही देशभक्ति का तकाजा है.अब अगर कोई नफरत की बात करे तो समझ जाइये यह देश का दुश्मन है देश तोडना चाहता है .लोगों के बहकावे में मत आइये सबको गले लगाइये.

 

By: Yunus Mohani

ग़रीबी और अशिक्षा को मिटाने की बात कीजिए तलाक़ पर तकरार बेमानी : सय्यद मोहम्मद अशरफ

श्रीलंका/कोलंबो 9 अगस्त “गरीबी और अशिक्षा मिटाने की बात कीजिए तलाक़ पर तकरार बेमानी” यह बात वर्ल्ड सूफी फोरम व आल इंडिया उलमा व मशायख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने पत्रकारों द्वारा तीन तलाक़ पर पूछे गए सवाल के जवाब में कहीं। वह इस समय श्रीलंका दौरे पर हैं।
हज़रत ने भारत सरकार द्वारा संसद में पेश ट्रिपल तलाक़ बिल में संशोधन पर पूछे गए सवाल पर कहा कि तलाक़ मुसलमानों का सबसे बड़ा मसला नहीं है सबसे बड़ा मसला हिन्दुस्तानी मुसलमानों की बदहाली गरीबी और अशिक्षा है इसपर बहस कर इसे दूर करने का इमानदार प्रयास होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अभी संशोधन क्या हुआ है इसकी जानकारी नहीं है लिहाजा इस पर बात करना सही नहीं है लेकिन यह ज़रूर कहूंगा कि तलाक़ से प्रभावित मुस्लिम महिलाओं की संख्या .5 फीसदी है जबकि अनुच्छेद 341 पर प्रतिबंध होने से लगभग 95% मुसलमान परेशान है और अपने अधिकारों से वंचित हैं यदि सरकार वास्तव में सबका साथ सबका विकास के एजेंडे पर काम करना चाहती है तो इसपर बहस करवाकर इस प्रतिबंध को हटाने का मार्ग प्रशस्त करे।
हज़रत ने कहा कि नफरत को रोकने के लिये मोहब्बत को आम कीजिए , तलाक़ पर कोई बात करने से पहले मुसलमानों को विश्वास में लिया जाना ज़रूरी है।
उन्होंने राज्यसभा के उपसभापति चुने जाने पर श्री हरिवंश जी को मुबारकबाद देते हुए कहा कि हम उम्मीद करते है कि वह अपने अनुभव से देश के लोकतंत्र को और मजबूत करेंगे।

By: Younus Mohani

Syed Ashraf Kichchauchwi promotes Sufism in Sri Lanka

Friday, August 3/2018

The AIUMB President has gone on a visit to his spiritual followers in Sri Lanka to work on spirituality, humanity and morality that can be carried out through Sufism. He founded the World Sufi Forum in 2016 which has grown vastly all over the globe including Sri Lanka.

He has also granted permission for Baiat-o-Iradat (administering oath of spiritual allegiance), as an heir to the Chishtia, Nizamia and Ashrafia lines of mysticism. He has a vast number of disciples in different parts of the world including Sri Lanka. New disciples are introduced in accordance to the aforementioned mystical paths (silsila).

The World Sufi Forum that Hazrat has initiated is growing globally as each day passes. Through firm determination and constant struggle, Hazrat is engulfing the world with his key messages: Tolerance, Acceptance and Unconditional Love.

It is noteworthy that Hazrat Maulana Syed Mohammad Ashraf Kichhauchwi son of Sayyad Izhar Ashraf Miyan—popularly known as “Shaykh al-A’zam”—the eldest son of Hazrat Sarkar-e-Kalan Sayyad Mukhtar Ashraf (Rahmatullahi alayhi). This clearly shows that he falls in line with the many esteemed and pious Sufi saints that have come through the Chishti-Nizami-Ashrafi Silsila in Kichchawcha Shareef.

It has been the salient characteristic of the Ashrafi Sufi hospice (Khanquah) that in every period, there has been an eminent personality accomplished with both spiritual and modern education, mystical inclination, intellectual grandeur, inherited zeal and determination showing path of Shariat (Revealed Law) and Tariquat (way to Allah).

Alahazrat Ashrafi Mian (R.A.) adorned it up to 1355 AH devoting his whole life in making the world familiar with name and mission of Hazrat Makhdoom Simnani (R.A.) followed by Mufti Syed Shah Mokhtar Ashraf (R.A.) who decorated this dignified office with his sublime spirituality for 62 years. Now Hazrat Maulana Syed Ashraf is inheriting virtues of his righteous predecessors and spiritual ancestors, possessing extraordinary merits whose religious, spiritual and reformatory activities and works have been, internationally recognised and admired.

Hazrat Syed Ashraf Kichchauchwi has been instrumental in promotion of Sufism in the modern India as well as aboard. With his progressive views on religion, nation and society, he has the future needs of the new generation of Muslims at heart.

Source:

www.wordforpeace.com/aiumb-president-in-sri-lanka-to-work-on-spirituality-humanity-and-morality-through-sufism/

 

By: Ghulam Rasool Dehlvi

आतंक को नकारने के लिए पाक की आवाम मुबारकबाद की पात्र – सय्यद अशरफ

26 जुलाई/लखनऊ

“आतंक को नकारने के लिए पाक की आवाम मुबारकबाद की पात्र ” यह बात वर्ल्ड सूफी फोरम व आल इंडिया उलमा व मशायख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने पाकिस्तान इलेक्शन में आतंकी सरगना हाफ़िज़ सईद की पार्टी को एक भी सीट न मिलने पर खुशी जाहिर करते हुए कही ।उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की आवाम ने साफ तौर से बता दिया है कि वह दहशतगर्दी को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं करना चाहते और अमन के साथ हैं ।
हज़रत ने कहा कि इस बार पाकिस्तान में जो बदलाव दिखाई दे रहा है वह हमारे मुल्क के लिए बेहतर है हम उम्मीद करते हैं कि नई हुकूमत से दोनों देशों के ताल्लुकात बेहतर होंगे हज़रत ने इमरान खान को बधाई देते हुए कहा कि हम दुआ करते हैं कि इमरान खान सूफिया की तालीम पर अमल करते हुए पाकिस्तान में मोहब्बत की फिजा को बहाल कर आवाम की बेहतरी के लिए काम करें।हज़रत ने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि दोनों मुल्को के सम्बन्ध बेहतर होंगे।
उन्होंने कहा कि आतंक को रोकना सबकी ज़िम्मेदारी है अगर हमने इसे नहीं समझा तो सबका नुक़सान होगा लिहाजा दोनों मुल्कों को क़दम से क़दम मिलाकर चलना होगा।

 

By: Yunus Mohani