मोहब्बत वालों का है हिन्दुस्तान : सय्यद अशरफ

मेरठ : 6 अक्टूबर हिंदुस्तान हर मोहब्बत करने वाले का है यह बात आल इंडिया उलमा मशायख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने शाहपीर साहब की मस्जिद में आयोजित अजमते हुसैन कांफ्रेंस में बोलते हुए कही ।हज़रत मेरठ में सय्यद अहमद अली सत्तारी की दावत पर कार्यक्रम में मुख्य अतिथि थे ,हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की कुर्बानी को याद करते हुए उन्होंने कहा इमाम ने हिन्दुस्तान की तरफ आने की बात कही इसलिए यह हिन्दुस्तान हुसैन का हिन्दुस्तान है यह प्यारी धरती जहां मोहब्बतें बिखरी हुई हैं यह सरजमीं हुसैन के बेटे गरीब नवाज़ की भी है।किसी को कोई हक नहीं है कि वह अपनी विचारधारा किसी पर थोपे जहां लोग इसे राम कृष्ण और नानक की धरती कहते हैं वहीं यह कबीर का हिन्दुस्तान भी है और मोहब्बत वाले इसे ख्वाजा का हिन्दुस्तान कहते हैं इससे जिन्हें परेशानी है वह देश को तोड़ने की साजिश कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने नफरतें बाटने वाले दुस्साहसी एवम् दुराचारी ज़ालिम शासक यजीद के खिलाफ खड़े होकर बता दिया कि मोहब्बत को मिटाना आसान नहीं है ,ज़ुल्म कुछ देर तो विजय पाता दिखाई देगा लेकिन वास्तविकता यह है कि पराजय उसकी किस्मत है ,हुसैन ने दुनिया को सिखाया कि सर कटा कर अपना पूरा घर लुटा कर किस तरह विजय प्राप्त की जाती है मोहब्बत वालों का यही आचरण है ।
आज हर मोहब्बत वाला हुसैन का है इसमें धर्म की कैद भी नहीं हिन्दुस्तान में ही हुसैनी ब्राह्मण भी हैं सिख भी हैं ईसाई और मुसलमान भी यह है हुसैन की विजय ,विचारधारा की विजय कर्बला में हुसैन की हुईं और कटने के बाद भी उनका सर सबसे बुलंद रहा मजलुमियत में किस तरह जीत हासिल की जाये रहती दुनिया हुसैन से सीखती रहेगी ।
पीर अहमद अली सत्तारि ने कहा कि हुसैन अलैहिस्सलाम से मोहब्बत रखने वाले ज़ुल्म के खिलाफ हर दौर में खड़े होते रहे हैं और मजलूमों की मदद करते रहे हैं देश और समाज में व्याप्त नफरत और भ्रष्टाचार को मिटाना हुसैनियत है और इसे बढ़ावा देना यजीदीयत है।
कार्यक्रम की शुरुआत कुरान की तिलावत के साथ मौलाना मुख्तार अशरफ ने की इसके बाद सय्यद सरमद अली और सय्यद वलीअहमद सत्तारी ने नात और मनकबत पेश की इसके बाद मुफ्ती साजिद हस्नी और नूरमोहम्मद हसनी ने जलसे को खिताब किया जलसे का संचालन मौलाना मोहम्मद सद्दाम ने किया जलसे की सदारत पीर मोहम्मद अली सत्तारी ने की कार्यक्रम का समापन सलातो सलाम के बाद दुनिया में शांति की दुआ के साथ हुआ। बाद में लंगर बांटा गया जलसे में बड़ी संख्या में लोगों ने शिरकत की.
By Yunus Mohani

नफरतें कभी जीत नहीं सकती – सय्यद सलमान चिश्ती

अजमेर 27 सितम्बर
दरगाह हज़रत ख़्वाजा गरीब नवाज़ में छटी के मौके पर चिश्ती मंज़िल में मैसेज ऑफ कर्बला नाम से ऑल इण्डिया उलमा मशाइख़ बोर्ड ने कार्यक्रम आयोजित किया जिसकी सरपरस्ती बोर्ड के संरक्षक हज़रत मौलाना सय्यद मोहम्मद मेंहदी मियां चिश्ती ने की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता बोर्ड की अजमेर शाखा के अध्यक्ष हज़रत मौलाना सय्यद शाहिद चिश्ती ने की उन्होंने कहा कि इस वक़्त दुनिया को अगर बचाया जा सकता है तो वह तरीका हज़रत इमाम हुसैन का तरीका है ,ज़ुल्म के खिलाफ खामोश रहना भी ज़ुल्म है । समाज में ज़ुल्म बढ़ रहा है जो तावतवर है वह कमजोर को जीने नहीं देना चाहता नतीजा यह कि हर तरफ लोग परेशान हैं, सब को इन नफरतों के खिलाफ मोहब्बत लेकर खड़ा होना होगा यही पैगाम कर्बला का है जिसे हज़रत ख्वाजा गरीब नवाज़ ने आगे बढ़ाया और फरमाया मोहब्बत सबके लिये नफरत किसी से नहीं।
बोर्ड के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव हाजी सय्यद सलमान चिश्ती ने कहा कि नफ़रतें कभी जीत नहीं सकती थोड़ी देर को ऐसा धोका हो सकता है कि नफरत जीत गई लेकिन इस हकीकत को छुपाया नहीं जा सकता कि नफरत हार गई मोहब्बत ही जीती है इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की शहादत से यही संदेश मिलता है लोगों ने देखा कि इमाम का पूरा घर कर्बला में है हर वह रिश्ता जिसे हम सबसे ज़्यादा अहमियत देते हैं कर्बला में मौजूद है और सबकी शहादत होती है खेमो को लूटा जाता है लेकिन यह सब होने के बाद मकसदे इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम जीत जाता है और यजीद की ऐसी हार होती है कि तकयामत तक हर रोज़ वह हारता है जब कहीं सच जीतता दिखता है उसमे यजीद की हार नजर आती है ।उन्होंने कहा कि कर्बला का यही पैगाम है कि नफरत कभी जीत नहीं सकती मोहब्बत को हराया नहीं जा सकता ।लिहाजा करबला के इस मैसेज को हमे आत्मसात करते हुए इस दुनिया में मोहब्बतें बांटनी है तभी हम इमाम हुसैन के सच्चे गुलाम कहलाने के हकदार है ।
कार्यक्रम में बोर्ड के दिल्ली कार्यालय के ज़िम्मेदार मौलाना मुख्तार अशरफ ने बोलते हुए कहा कि सर कटा कर सर कैसे बुलंद किया जाता है यह मिसाल कर्बला के अलावा कहीं और नहीं मिलती हर तरफ ज़ुल्म के मुकाबले में धैर्य जीत गया ऐसी अद्भुत जंग कहीं नहीं मिलती ,उन्होंने कहा सर काटने वाला हार गया और जिसने अपना सर्वसव सत्य के लिए लुटा दिया यहां तक की सर तन से जुदा हो गया लेकिन जीत इमाम की हुईं क्योंकि जिसका मकसद जीत जाता है फतह उसकी होती है ।विचारधारा हुसैन अलैहिस्सलाम की जीती और ज़ालिम यजीद हमेशा के लिये मिट गया यह है हुसैनियत कि मकसद पर कायम रहना ,अपने पथ से न डिगना,सत्य के लिये सबकुछ कुर्बान करने का जज्बा रखना, ज़ुल्म के खिलाफ खड़े होना ,यह मेरे इमाम का सदका है कि लोग ज़ुल्म के खिलाफ खड़े होना सीखे और रहती दुनिया तक कोई ऐसा सत्य के लिए अन्न्याय के खिलाफ होने वाला आंदोलन नहीं होगा जिस पर कर्बला का असर न दिखाई दे यह है करबला की जीत और इसका पैगाम यह है कि हर हाल में ज़ुल्म को रोकने के लिये खड़ा होना होगा ।
कार्यक्रम में काफी तादाद में जायरीन शामिल हुए कार्यक्रम के अंत में सलातो सलाम के बाद मुल्क सहित सम्पूर्ण विश्व में शांति की स्थापना की दुआ की गई ।

आल इंडिया उलमा माशाइख़ बोर्ड का बाढ़ पीड़ितो को राहत सामग्री बाटने का काम जारी !

कटिहार : 23 सितम्बर
बिहार में बाढ़ पीड़ितों के बीच एल इंडिया उलमा माशाइख बोर्ड लगातार सक्रिय है और उनकी मदद के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है, इसी क्रम में आज कई गांवो में जाकर बोर्ड के कार्यकर्ताओं ने कपड़े बांटे।
अभी तक कई गांव ऐसे हैं जहां तक संपर्क नहीं हो पा रहा है और सरकारी मदद भी नहीं पहुंच रही है ,लोग बीमार हैं और उनके पास न तो चिकित्सक हैं और न ही दवा ,कई जगह लोगों के पास खाने को कुछ नहीं है और पहनने को कपड़े भी नहीं है इन सब परेशानियों को देखते हुए आल इंडिया उलमा माशायख बोर्ड के कार्यकर्ता गावों में जाकर लोगों को राहत सामग्री पहुंचा रहे हैं ।
बोर्ड के अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी लगातार लोगों से अपील कर रहे हैं कि पीड़ितो की हर संभव मदद के लिए लोग आगे आएं क्योंकि सरकारी मदद बंदरबांट का शिकार हो चुकी है और बाढ़ का ज़िक्र भी खतम हो चला है जबकि लोग बहुत परेशान हैं ।
आज कटिहार के झौआ,सिस्या,डोमोरया,सिक्रोना,रंगपरा,इस्लामपुर,किचोरा ,रानीगंज, डोकरा,सिंगलेपुर सहित पश्चिम बंगाल के खुमेदपुर और शम्सी में ऑल इंडिया उलमा माशायख बोर्ड की टीम ने मौलाना आले रसूल के नेतृत्व में राहत सामग्री बांटी। मौलाना आले रसूल ने बताया यह सिलसिला लगातार चलता रहेगा और दूर दराज के इलाक़े में राहत पहुंचाई जाएगी ,लोगों की हर संभव मदद की जायेगी।
BY: यूनुस मोहानी

आल इंडिया उलमा मशाइख़ बोर्ड ने” रैली फॉर रीवर “अभियान का किया समर्थन !!

नई दिल्ली :22 सितम्बर आल इंडिया उलमा मशायख बोर्ड ने ईशा फाउंडेशन द्वारा नदियों को बचाये एवं साफ़ रखने के लिए चलाये जा रहे जागरूकता अभियान “रैली फॉर रीवर “ का समर्थन किया है .

बोर्ड ने अधिकारिक बयान जारी कर कहा है कि नदियों का संरक्षण मानव जीवन के लिए अतिआवश्यक है यदि जल इसी प्रकार प्रदूषित होता रहा और नदिया सूखती रही तो मानव जीवन दुरूह हो जायेगा .बोर्ड के संयुक्त राष्ट्रिय सचिव हाजी सय्यद सलमान चिश्ती ने कहा कि इस्लाम ने आज से लगभग 1400 साल पहले जल संरक्षण के लिए निर्देश दिए अल्लाह के रसूल हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहुअलहिवसल्लम ने फरमाया कि नदियों में मल मूत्र का त्याग न किया जाये ,न ही उनमे गन्दगी फैलाई जाये पानी को संरक्षित किया जाये और इसको दूषित होने से बचाया जाये .खुद कुरान में पानी को लेकर कई बाते कही गयी और पानी को इश्वर का तोहफा बताया गया है .

उन्होंने जंगे कर्बला का बयान करते हुए कहा कि हुसैन और उनकी प्यास का ज़िक्र तो सभी कर रहे हैं आइये हम सब इमामे हुसैन रज़िअल्लहुतलान्हु के नाम पर मिलकर नदियों को प्रदूषण से बचाने का काम करें उनको नयी ज़िन्दगी देने के लिए आगे आयें ताकि इमाम ने जिस तरह ज़ुल्म के खिलाफ अपना सब कुछ लुटा कर फतह हासिल की हम भी मानवता के खिलाफ इस ज़ुल्म को रोकने के लिए आगे आयें और नदियों को संरक्षण के इस आन्दोलन का सहयोग करें . यहाँ हमे बस नदियों को प्रदूषण से बचाना है यही हमारा कर्तव्य है और कर्बला कर्त्तव्य से न डिगने का सबक है.
By: Yunus Mohani

रोहिंग्या शरणार्थियो को आल इंडिया उलमा मशायख बोर्ड ने बांटी राहत सामग्री !!

नई दिल्ली: 19 सितम्बर आल इंडिया उलमा माशायख बोर्ड की तरफ से रोहिंग्या से भारत आये परिवारों की मदद के लिये राहत सामग्री बांटी गयी ।बोर्ड ने बयान जारी कर कहा कि हमारा काम मोहब्बत बांटना है और मोहब्बत को किसी सरहद,धर्म, संप्रदाय की दीवारों से नहीं रोका जा सकता ,बोर्ड की तरफ से लोगों से अपील की गई कि लोग सिर्फ प्रदर्शन न करे बल्कि परेशानहाल लोगों की हर संभव मदद के लिये भी आगे आयें।
ए.आई.यू.एम. बी. के लोगों ने दिल्ली के कंचनकुंज इलाक़े में शरण लिये रोहिंग्या शरणार्थियों के बीच पहुंचकर उनका हाल लिया और उन्हें राहत सामग्री बांटी।
लोगों ने बताया कि किस तरह उनपर ज़ुल्म किया जा रहा है ।वहीं बर्मा से आये लोगों ने भारत सरकार से बोर्ड के माध्यम से यह याचना भी की जैसे ही बर्मा में हालात सामान्य हो जाते हैं हम खुशी खुशी वापस चले जायेंगे लेकिन तब तक हमे भारत में रहने दिया जाये।
आल इंडिया उलमा मशायख बोर्ड शुरू से भारत सरकार से यह मांग कर रहा है कि भारत सरकार रोहिंग्या शरणार्थियों को ऐसे समय में जब बर्मा में उनका जीवन संकट में है वापस न भेजे और मानवता के आधार पर उन्हें भारत में रहने दिया जाये।बोर्ड ने इस आशय का पत्र संयुक्त राष्ट्र संघ को भी लिखा है।
बोर्ड के संस्थापक अध्यछ हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी के निर्देश पर बोर्ड से यूनुस मोहानी ,मौलाना मुख्तार अशरफ,सय्यद सैफ नक्वी,हाफ़िज़ कमरूद्दीन,हाफ़िज़ सद्दाम,सय्यद अंजर अकील मदारी इत्यादि लोगों ने राहत सामग्री बांटी।
By: Yunus Mohani.

देश में अशान्ति फैलाना चाहते हैं पैग़म्बर के दुश्मन : सय्यद मोहम्मद अशरफ

राजस्थान :17 सितम्बर
देश में अशान्ति फैलाना चाहते हैं पैग़म्बर के दुश्मन यह बात आल इंडिया उलमा व मशायख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने गुजरात कि एक महिला अंजू डांगर द्वारा पैगम्बरे अमन कि शान में गुस्ताखी पर अपना गुस्सा जताते हुए कही ,हज़रत ने साफ़ कहा कि इस्लाम दुश्मन ताक़तें जानती हैं मुसलमान सब कुछ बर्दाश्त कर सकता है लेकिन अपने रसूल कि शान में गुस्ताखी हरगिज़ बर्दाश्त नहीं कर सकता इसीलिए अब यह आतंकी सोच रखने वाले देशद्रोही अपनी नीचता के चरम पर पहुँच रहे हैं ताकि मुसलमानों को तकलीफ दी जा सके .
हज़रत ने कहा आल इंडिया उलमा मशाइख बोर्ड न सिर्फ इसकी भर्त्सना करता है बल्कि इस औरत को सजा दिलाने के लिए हर मुमकिन कोशिश का एलान भी करता है हम मुल्क के कानून के मुताबिक इसे कड़ी से कड़ी सजा दिए जाने के लिए हर मुमकिन कोशिश करेंगे ,उन्होंने यह भी कहा कि अगर सोशल मीडिया पर इस तरह की घटिया टिप्पड़ी होती रहीं किसी भी धर्म या सम्प्रदाय के खिलाफ तो भारत में शांति बनी रहना संभव नहीं होगा ,सरकार को इस पर विचार करते हुए इसे रोकना ही होगा ,देश बड़े खतरे के मुहाने पर खड़ा है ऐसे में इस प्रकार की नफरत का प्रचार सिर्फ ज़हर घोलने वाला है .
उन्होंने साफ़ कहा कि हम अपने नबी की शान में किसी भी तरह की गुस्ताखी बर्दाश्त नहीं करेंगे ,ऐसी नीच सोच रखने वाली महिला को खुली हवा में सांस लेने का अधिकार नहीं है उसे सलाखों के पीछे होना चाहिये.
उन्होंने कहा अगर ऐसा नहीं होता है तो हम देशव्यापी आन्दोलन छेड़ेंगे ताकि आइन्दा किसी भी धर्म या सम्प्रदाए के विरूद्ध ऐसा करने वाला बक्शा न जाये और उसे सख्त से सख्त सजा मिले .यह सिर्फ धार्मिक भावनाए आहत करने भर का मामला नहीं है ,यह मामला देश को सांप्रदायिक आग में झोकने की कोशिश का भी है यानि साफ साफ देशद्रोह का है अतः इस महिला को सख़्त से सख़्त सजा की हम मांग करते हैं.
By: यूनुस मोहानी

میانمار میں انسانی حقوق کی پامالی ، مسلم ممالک اور ہندوستانی مسلمان : ایک محاسبہ

روہنگیا مسلمان آخر مسلم ممالک اور بالخصوص خلیجی ممالک میں کیوں پناہ نہیں حاصل نہیں کرسکے؟
غلام رسول دہلوی
روہنگیا بحران میں انسانی حقوق کی سنگین خلاف ورزی ایک کربناک المیہ ہے ۔ میانمار میں انسانیت ختم ہونے کے دہانے پر ہے۔ خواتین اور بچوں کا قتل عام کیا گیا اور معصوم نوجوان اور بزرگوں کو ایک منظم طریقے سے نشانہ بنایا گیا ۔ اس نازک موڑ پر، روہنگیا مہاجرین کو ملک بدر کرنے کے حکومت ہند کے موقف نے بے شمار مسائل کھڑے کر دئے ہیں اور اسے سپریم کورٹ اور نیشنل ہیومن رائٹس کمیشن کی جانب سے تحقیقاتی سوالات کا سامنا ہے۔ ان کی ملک بدری کے اس منصوبہ نے ہندوستانی مسلم رہنماؤں، دانشوروں اور خاص طور پر ان علماء کے درمیان ایک تناؤ کا ماحول پیدا کر دیا ہے جو روہنگیا مسلمانوں کے لئے ہمدردی کا جذبہ رکھتے ہیں۔ ان کے لئے یہ سمجھنا مشکل ہے کہ جس ملک نے اپنی ابتداء سے ہی مہاجرین کا استقبال کیا ہے وہ وہ ان 40 ہزار روہنگیا مہاجرین کو کس طرح ملک بدر کر سکتا ہے جو اس وقت دنیا کی سب سے زیادہ ستائی ہوئی اقلیت ہیں!
یقیناً 40 ہزار روہنگیا مسلمانوں کو ملک بدر کرنے کا حکومت ہند کا منصوبہ ہمارے وطن عزیز کے تاریخی، تہذیبی ،تکثیریت پسند اقدار کے خلاف ہوگا۔سری لنکا، افغانستان اور تبت سمیت کئی پڑوسی ممالک سے آنے والے مجروح اور کمزور لوگوں کی مدد کرنے کی ہندوستان کی ایک طویل تاریخ رہی ہے۔ اس میں کوئی شک نہیں کہ ہندوستان کے پاس ماضی کے واقعات کے پیش نظر جائز سیکورٹی خدشات ہیں اور وسائل کی کمی کا بھی سامنا ہے ،لیکن ہم یہ بھی نہیں بھول سکتے کہ ہندوستان میں تہذیب و ثقافت اور جمہوریت کی ایک قدیم روایت رہی ہے اور ہم نے دنیا کی تمام خطّوں سے آنے والی مظلوم اقلیتوں کی ہمیشہ مدد کی ہے اور ان کا خیر مقدم کیا۔ اور یہی بات ہمارے ملک کو خوبصورت بناتی ہے۔ ضرورت مند لوگوں کی مدد کرنا ہمارا سنسکار رہا ہے۔
سب سے اہم بات یہ ہے کہ روہنگیا پناہ گزینوں کی مدد مذہب کی بنیاد پر نہیں بلکہ انسانی بنیادوں پر کی جانی چاہئے۔ جو لوگ انسانیت کے بجائے مذہب کی بنیاد پر پناہ گزینوں کی قسمت کا فیصلہ کرنے کی کوشش کر رہے ہیں وہ بھی اپنے اپنے مفادات کو فروغ دینے کی کوشش کر رہے ہیں۔اس لئے ہندوستان کو اپنے پناہ گزین قانون میں مذہبی معیار کو ترک کر دینا چاہئے۔ حکومت ہند نے شہریت کے عمل کو آسان بنانے کے لئے 1955 کی شہریت کے قانون میں ترمیم کی تجویز پیش کی تھی۔ لیکن افسوسناک بات یہ ہے کہ اس نئے بل سے صرف عیسائیت، ہندازم، جین ازم، زرتشت ازم اور سکھ ازم کو ہی فائدہ حاصل ہوگا جنہیں اپنے پیدائشی ملکوں میں اقلیتی مذہب سمجھا جاتا ہے۔ اس بل سے بے گھر مسلم افراد کو خارج کردیا گیا ہے۔ لہذا، بہت سے لوگوں کا ماننا ہے کہ روہنگیا مسلمانوں کو ملک نکالنے کی حکومت کی تازہ ترین تجویز اسی بل کا حصہ ہے۔
اگر چہ ہندوستان نے ایسے کسی بھی معاہدے پر دستخط نہیں کیا ہے جس کی وجہ سے مہاجرین کو پناہ دینا اس کا فر ض ہو ، لیکن اس ملک نے ہمیشہ تنازعات اور آفتوں سے پریشان پناہ گزینوں کو پناہ دیا ہے، خواہ وہ شام کے عیسائی ہوں، مالابار کے یہودی ہوں یا ایران کے پارسی ہوں۔ لہذا، روہنگیا مسلمانوں کو اس ملک سے نکالنا اس کی اس انسانی روایت سے انحراف ہوگا جس پر ہندوستان کئی دہائیوں سے قائم رہا ہے۔
انسانی حقوق ناقابل تقسیم ہیں اسی لئے انسانی حقوق کو کسی ایک یا چند مذاہب و اقوام کے لئے خاص نہیں کیا جا سکتا۔ لہٰذا، اگر ہندوستان روہنگیا مسلمانوں کو میانمار روانہ کر دیتا ہے تو یہ ایک کربناک تاریخی المیہ ہو گا۔ یہ ایسے ہی ہوگا جس طرح کیوبا اور امریکہ نے ہٹلر کے مظالم سے بھاگنے والے 900 سے زائد یہودیوں پر مشتمل سمندری جہاز کو 13 مئی 1939 کو موت کے منھ میں ڈال دیا تھا (جن میں سے کم از کم 250 لوگوں کو نازی جرمنی فوج نےموت کے گھاٹ اتار دیا تھا) ۔
ہمیں یہ بھی سوچنا ہوگا کہ آخر مسلم ممالک روہنگیا مسلمانوں کو پناہ دینے کے لئے کیوں آگے نہیں آ رہے ہیں؟ شام کے پناہ گزینوں کو جرمنی اور دوسرے یوروپین ممالک نے پناہ دی ہے۔ تاہم ، بعض مسلم ممالک انہیں مالی مدد تو پہنچا رہے ہیں لیکن پناہ گزین کی حیثیت نہیں دے رہے ہیں۔ یہ واقعی عالمی مسلم برادری کے لئے ایک’ اجتماعی ذلت’ کی بات ہے کہ اسلامی ممالک روہنگیا پناہ گزینوں سے اپنا منھ موڑ رہے ہیں۔انہوں نے شام، عراق، لیبیا، صومالیا اور دیگر جنگ زدہ مسلم ممالک کے انتہائی مصیبت زدہ مسلم پناہ گزینوں کو بھی پناہ فراہم نہیں کیا ہے۔“Left Out In The Cold” کے عنوان سے انسانی حقوق کی تنظیم ایمنسٹی انٹرنیشنل گلف کوآپریشن کونسل کی 2014 کی ایک رپورٹ کے مطابق ، سعودی عرب، بحرین، کویت، قطر، عمان اور متحدہ عرب امارات جیسے دولت مند ممالک نے بھی سرکاری طور پر ایک بھی شامی پناہ گزین کو نہیں اپنایا ہے۔
وہ مسلم ممالک جن کا شمار امیر ترین اسلامی ملکوں میں ہوتا ہے ، وہ مسلم تارکین وطن اور پناہ گزینوں کو بڑے پیمانے پر مالی امداد اور عطیہ فراہم کرتے ہیں۔ حال ہی میں ترکی نے بھی میانمار میں تشدد سے راہ فرار اختیار کرنے والے روہنگیا مسلمانوں کی امداد کے لئے 10 ہزار ٹن فراہم کرنے کا اعلان کیا ہے۔ لیکن وہ پناہ گزینوں کو اپنے وطن میں پناہ نہیں دیتے ہیں۔ ان میں سے کوئی بھی باضابطہ طور پر مہاجریت کے قانونی تصور کو تسلیم نہیں کرتے ہیں۔
بیشتر ہندوستانی مسلمان یہ محسوس کرتے ہیں کہ تمام روہنگیا مہاجروں کو ملک سے نکالنے کا حکومت کا اقدام “اخلاقی طور پر انتہائی ناپسندیدہ” ہے۔ہندوستان نے ہمیشہ پوری دنیا سے بے گھر مہاجرین کو بچانے کی کوشش کی ہے۔ آل انڈیا علماء و مشائخ بورڈ کے بانی و صدرسید محمد اشرف کچھوچھوی نے کہا کہ حکومت ہند کو ان معصوم مہاجرین کو پناہ فراہم کرنا چاہئے جو اپنی زندگی اور وقار کی حفاظت کے لئے ہندوستان کی طرف امید کی نگاہوں سے دیکھتے ہیں۔ جس طرح ہمارے ہمسایہ ملک بنگلہ دیش نے انسانی بنیادوں پر روہنگیا متاثرین کے لیے نئے دروازے کھولے ہیں اسی طرح ہندوستان کو بھی ان مہاجرین کی مدد کے لیے آگے آنا چاہئے۔
جماعت اسلامی ہند کے صدر مولانا سید جلال الدین عمری نے روہنگیا مسلمانوں کی ہلاکتوں پر گہری تشویش کا اظہار کرتے ہوئے اقوام متحدہ، او آئی سی اور مختلف انسانی حقوق کی تنظیموں سے اس بات کا مطالبہ کیا ہے کہ وہ ان کے اپنے ہم وطنوں کو قتل سے روکنے، ان کی شہریت بحال کرنے، ان پر تمام قسم کی پابندیوں کو ہٹانے اور ان کی سماجی اور اقتصادی ترقی پر توجہ مرکوز کرنے کے لئے برمی حکومت پر دباؤ بنائیں۔
اسی طرح، جمعیت علمائے ہند نے میانمار میں روہنگیا مسلمانوں کے تئیں اپنا رویہ تبدیل کرنے کے لئے ایک آخری معیاد مقرر کرنے کی خاطر سلامتی کونسل کا اجلاس بلانے کے لئے اقوام متحدہ سے اپیل کی ہے۔ جمعیت علمائے ہند نے ہندوستان میں پناہ کی تلاش کرنے والے روہنگیا مسلمانوں کے تئیں حکومت ہند کو روایتی انسانی بنیادوں پر اپنے رویہ سے منحرف نہ ہونے پر بھی زور دیا ہے۔ وسیع پیمانے پر ہندوستانی میڈیا میں شائع ہونے والی خبروں کے مطابق جمعیت علمائے ہند نے حکومت ہند سے کہا ہے کہ “اس سلسلے میں ہندوستان کو یورپی یونین سمیت ترقی یافتہ ممالک کی پیروی کرنی چاہئے”۔
آل انڈیا علماء مشائخ بورڈ ، جمعیت علمائے ہند اور جماعت اسلامی ہند جیسی ہندوستانی مسلم تنظیموں نے حکومت ہند، اقوام متحدہ اور بین الاقوامی انسانی حقوق کمیشن سے بجا طور پر میانمار کے راکھین کے علاقے میں ظلم و ستم کا شکار روہنگیا مسلمانوں کی مدد کرنے کی اپیل کی ہے۔ لیکن کیا انہوں نے اس سلسلے میں عالمی ‘مسلم برادری’ سے بھی موثر اقدامات کرنے کے لئے کوئی اپیل کی ہے؟ کیا انہوں نے یہ سوال اٹھایا کہ روہنگیا پناہ گزین مسلم ممالک اور بالخصوص خلیجی ممالک میں کیوں پناہ نہیں حاصل نہیں کرسکے؟
روہنگیا مہاجرین کا بحران واضح طور پر انسانی حقوق کا ایک مسئلہ ہے۔ لیکن یہ ایک انتہائی افسوس ناک امر ہے کہ جب نام نہاد اسلامی ممالک کے اندر حکومتوں یا دہشت گرد تنظیموں کی ایماء پر اسی طرح کی یا اس سے زیادہ درد ناک انسانی حقوق کی خلاف ورزیوں کا معاملہ سامنے آتا ہے تو ہندوستان میں یہ اسلامی تنظیمیں صدائے احتجاج بلند نہیں کرتی ہیں۔ لہذا، یہ سوال اپنی جگہ بالکل درست ہے کہ کیا انسانی حقوق صرف غیر اسلامی ممالک میں رہنے والی مسلم اقلیتوں کے لئے ہیں؟ کیا علماء اور اسلامی رہنما اس وقت کبھی صدائے احتجاج بلند کرتے ہیں جب مسلم ممالک میں غیر مسلم اقلیات کے حقوق کی پامالی ہوتی ہے، ان کی لڑکیوں کو اغوا کیا جاتا ہے ، “اسلامی ریاست” کے قیام کے نام پر ان کی منفی ذہن سازی کی جاتی ہے اور نکاح الجہاد کے نام پر ان کا استحصال کیا جاتا ہے؟
ہندوستانی مسلمانوں کو یہ محسوس کرنا ہوگا کہ ہماری انسانی اور مذہبی ذمہ داری ہے کہ ہم مسلم ممالک اور خاص طور پر پاکستان اور سعودی عرب جیسے ممالک میں جو کہ اسلامی ہونے کا دعوی کرتے ہیں غیر مسلم اقلیتوں پر ڈھائے جانے والے مظالم کے خلاف بھی صدائے احتجاج بلند کریں ۔ ایک انتہائی اہم اور ضروری سوال یہ ہے کہ جب پاکستان، بنگلہ دیش، انڈونیشیا، ملیشیا، سعودی عرب اور مصر جیسے نام نہاد اسلامی ممالک اور مسلم دنیا کے دیگر حصوں میں مذہبی اقلیتوں کے حقوں کو مکمل طور پر پامال کیا جاتا ہے تو ہندوستان کے مسلم رہنما خاموش تماشائی کیوں بنے رہتے ہیں؟

रोहिंग्या शरणार्थियों पर अनर्गल बयानबाज़ी बंद करें मंत्री- सय्यद अशरफ

चित्तौड़:11 सितम्बर रोहिंग्या शरणार्थियों के मसले पर सरकार के मंत्रियों के बयान से आहत आल इंडिया उलमा मशायख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने कहा कि अनर्गल बयानबाज़ी बंद करें और मानवता की सेवा के लिये रोहिंग्या शरणार्थियों की मदद का हाथ बढ़ाये सरकार ।
उन्होंने कहा संयुक्त राष्ट्र उच्चायोग ने भी साफ कह दिया है कि शरणार्थियों को खतरे वाली जगह पर वापस नहीं भेजा जा सकता यह नियम सभी राष्ट्रों के लिये बाध्यकारी है ।इस सिद्धांत को अंतरराष्ट्रीय कानून का हिस्सा माना जाता है इसलिए यह सब देशों पर लागू होता है चाहे उन्होंने शरणार्थी समझौते पर हस्ताक्षर किये हों या नहीं ।
हज़रत ने साफ कहा अब सरकार अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट करे कि वह अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करेगी या नहीं इसके लिये मंत्रियों को अनर्गल बयानबाज़ी करने की कोई ज़रूरत नही है क्योंकि राजनैतिक लाभ और राष्ट्रहित अलग अलग है ।राष्ट्रहित और मानवता की रक्षा सर्वोपरि है इससे समझौता नहीं किया जा सकता।
हज़रत ने साफ कहा कि अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री को अपने विभाग की योजनाओं पर ध्यान देना चाहिए,वक्फ की लूट पर लगाम लगानी चाहिये न कि अनर्गल बयानबाज़ी करनी चाहिए।
उन्होंने एक बार फिर भारत सरकार से मांग की रोहिंग्या शरणार्थियों को भारत में रहने दिया जाय जबतक बर्मा में हालात सामान्य नहीं हो जाते और बर्मा सरकार से नरसंहार को रोकने के लिये कहे।हज़रत ने लोगों से इन शरणार्थियों की भरसक मदद करने की अपील भी की।

सरकार बर्मा के बेगुनाहों को पनाह दे, मानवता को शर्मसार होने से बचाये : सय्यद मोहम्मद अशरफ

अजमेर:7 सितम्बर
भारत सरकार बर्मा से जान बचा कर आये बेगुनाह शरणार्थियों को शरण दे और मानवता को शर्मसार होने से बचाये,यह बात आल इंडिया उलमा मशाइख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने अजमेर शरीफ में कही। उन्होंने कहा भारत एक शांतिप्रिय देश है और सम्पूर्ण विश्व में शांति स्थापना के लिए सदैव प्रयत्नरत रहा है, इस समय जब बर्मा जो कि आदि भारत का ही अंग था वहां हिंसा चरम पर है, मानवता शर्मसार हो रही है, महिलाएं बच्चे बुज़ुर्ग, जवान कोई महफूज़ नहीं है और बर्मा में बरबरियत के साथ मानवता की हत्या की जा रही है। ऐसे में सरकार का रोहिंग्या शरणार्थियों से देश छोड़ने का आदेश निंदनीय है, हम सरकार से मांग करते हैं कि मानव जीवन बहुमूल्य है इसे बचाने के लिये हर संभव प्रयास किया जाना चाहिये। जिस प्रकार पड़ोसी देश बांग्लादेश ने मानवता के आधार पर दुखी लोगों के लिए दरवाज़े खोल दिये है भारत को भी आगे आकर रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए मदद हाथ बढ़ाना चाहिए।
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र संघ से भी इस संबंध में तुरंत कारगर क़दम उठाने की मांग की। हज़रत ने कहा कि सबको जहां बर्मा के लोगों के लिये दुआ करनी चाहिए वहीं रोहिंग्या शरणार्थियों तक मदद भी पहुंचानी चाहिए।
आल इंडिया उलमा मशाइख़ बोर्ड के संरक्षक व दरगाह अजमेर शरीफ के गद्दीनशीन हज़रत सय्यद मेहदी मिंया चिश्ती ने कहा कि दुनिया को मोहब्बत की ज़रूरत है और हम नफरत की फैक्ट्रीय लगा रहे हैं, धर्म के आधार पर शरणारथियों की स्थिति तय की जाएगी तो हम क्या संदेश देना चाहते हैं। निहत्थे जान बचाकर भागे लोगों से देश को खतरा कैसे हो सकता है। मानवता हमारी ज़रूरत है, सरकार को आगे बढ़ कर मदद करनी चाहिए।
आल इंडिया उलमा मशाइख बोर्ड के संयुक्त राष्ट्रीय सचिव सय्यद सलमान चिश्ती ने कहा कि” अतिथि देवो भव:” सिर्फ पर्यटन विभाग के प्रचार की सामग्री नहीं है यह भारत की संस्कृति है, उन्होंने बताया भारत के संसद भवन पर अंकित वसुधैव कुटुंबकम् का वाक्य हमारी धारणा का प्रतीक है कि हम सम्पूर्ण विश्व को एक परिवार मानते हैं और प्रधानमंत्री जी इसका उपयोग हर जगह करते हैं ऐसे में रोहिंग्या शरणार्थियों के संबंध में किरण रिज्जु का बयान प्रधानमंत्री के शब्दों के विपरीत है। कोई भी धर्म कभी खून बहाना नहीं सिखाता. मैं जितना जानता हूं उसके आधार पर शरणार्थियों की सेवा एंवम् सहायता के लिए हर धर्म ने सीख दी है। उन्होंने कहा कि मानवाधिकारों की रक्षा के लिए हर हाल में हमे बर्मा के शरणार्थियों को भारत में शरण देनी चाहिए,सरकार का यह फैसला की वह देश छोड़ कर चले जाएँ उचित नहीं है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा का भी यह उल्लघन प्रतीत होता है. हम भारत सरकार से मांग करते हैं कि अपना फैसला वापस ले।

Follow the country’s law along with the religion on the occasion of Eid-ul-Azha : Syed Mohammad Ashraf

Ajmer: August 29
On the occasion of the upcoming festival, Eid-ul-Azha, Muslims will be sacrificing the animals while exercising the right to freedom of religion. But at the same time, they should also take care of the laws of the country. This point was particularly highlighted by the Founder and President of All India Ulama & Mashaikh Board, Hazrat ​​Sayed Mohammad Ashraf in Ajmer Sharif Dargah Khwaja Gharib Nawaz (Rahmatullah alaih) in the gathering of Chhati Sharif in Baitun Noor.
He appealed to the people and said that in many places now, some enemies of peace and the people might try to spoil the atmosphere of peace during the sacrifice. “Therefore, we need to work with patience and respect the law of the country and follow it completely”, he said.
He also said that people should not sacrifice in open places. Our Deen (religion) also says this. We should not shed the blood of the Qurbani in the drains, rather bury it, as well as those parts of the animal which are not eaten and the food which is forbidden in Islam should also be buried. We do not have permission to give any of them to anyone else because we cannot give any such food to anyone. At the same time, we must take care of cleanliness so that nobody could have trouble with our sacrifice.
Hazrat further said: we have to make special arrangements to bring the meat of the Qurbani to the disadvantaged, less-fortunate and the poorest of the poor. He said that there is no restriction on sacrifice in our country, but we must take care of the feelings of those practicing other religions and faiths. We have to fulfill the rights of our neighbors and non-Muslims, while we take care of our co-religionists, because we are Muslims, so we must maintain peace and tranquility. This responsibility is ours. He also congratulated the people on Hajj.
Hazrat Maulana Syed Mehdi Mian Chishti congratulated the people on Khwaja Gharib Nawaz’s Chatti Sharif saying that the occasion of Eid-ul-Adha is the best way to get closer to our lord.
Syed Mehdi Mian continued: Every capable Muslim should sacrifice, but we must take care that no one’s heart is hurt, no one is troubled, and it does not spread any kind of dirt. This is the only way we can emulate the example of Hazrat Gharib Nawaz Moinuddin Chishti (r.a).
If someone’s heart is broken, it is a big sin like breaking God’s house. “Hearts are to be connected, not to be broken”….. “You cannot achieve the pleasure of your Lord (Rabb) until you help the disturbed people”, he said.
Joint National Secretary of the AIUMB, Haji Syed Salman Chishti, with the grace of Huzur Gharib Nawaz, greeted on Eid-e-Ibrahimi and the Haj pilgrimage, saying that one should remember that in many parts of the country, people are upset with the flood. We have to help them on this occasion of Eid. Qurbani also teaches us that we are sacrificing our pleasure and welfare for the sake of our Lord. This feeling has to be awakened and spread widely, because human life is in danger and doing something about it is the means to achieve the pleasure of our Lord (Rabb-ul-Alameen). We have to tread the path of Sufia to benefit larger section of the people. “Love for everyone, hatred for none” is the only way to save the world from chaos and strife”, he said.
By: Ghulam Rasool Dehalvi