आल इंडिया उलमा व मशाइख़ बोर्ड की बैठक संपन्न

जयपुर/ 22 फरवरी
आल इंडिया उलमा व मशाइख़ बोर्ड की होटल मोहम्मदी में आगामी 27 फरवरी को होने वाली कान्फ्रेंस के संबंध में एक बैठक का आयोजन किया गया बैठक की अध्यक्षता हाजी सग़ीर अहमद उर्फ़ लल्लू भय्या ने की बैठक में विशेष तौर से बोर्ड दिल्ली कार्यालय से कान्फ्रेंस की तैयारी का जायजा लेने आए मौलाना मुख्तार अशरफ ने भी शिरकत की।
मुख्तार अशरफ ने बताया कि आल इन्डिया उलेमा व मशयाख बोर्ड का मिशन ख्वाजा गरीब नवाज का मिशन है और संदेश भी वही कि मोहब्बत सबके लिए नफरत किसी से नहीं उन्होंने कहा कि देश में तरह का माहौल बन रहा है वह खतरनाक है और इसे मोहब्बत के बिना नहीं सुधारा जा सकता।
मौलाना ने साफ शब्दों में लोगों से कहा कि बोर्ड के बानी व सदर हज़रत मोहम्मद अशरफ किछौछवी इंसानियत का पैगाम लेकर सिर्फ देश में ही नहीं विदेशों में भी लगातार जा रहे हैं और उनकी कोशिशों में रंग दिखाया है आज दुनिया जान चुकी है कि मजहब इंसानियत को महफूज़ करने के लिए है उसे तबाह करने लिए नहीं और सूफिया ने यह कर के दिखाया भी है ।
जयपुर के सबसे बड़े अलिमे दीन मुफ़्ती अब्दुल सत्तार साहब ने कहा कि ऐसे परोग्राम वक़्त कि अहम ज़रुरत हें साथ ही कहा कि जयपुर के तमाम उलमा इस कोंफ्रेंस में शिरकत कर रहे हें.
मीटिंग में कान्फ्रेंस की तैयारी पर विस्तार से चर्चा हुई और बोर्ड के बानी सदर हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी का जयपुर में 27 फरवरी को भव स्वागत किए जाने के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पास किया गया।

By: Yunus Mohani

नफरत का संक्रमण काल चल रहा है देश बचाना होगा: सय्यद मोहम्मद अशरफ

12 फरवरी/कोलकाता,
नफरतों का संक्रमण काल चल रहा है देश बचाना होगा” यह विचार कोलकाता में एक धर्मसभा को संबोधित करते हुए आल इन्डिया उलमा व मशाइख बोर्ड के संस्थापक, अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने रखे, हज़रत यहां जलसे में मुख्य वक्ता के तौर पर आये थे। उन्होंने कहा, देश में नफरतों का बुखार महामारी की तरह फ़ैल रहा है अगर दिल और दिमाग़ की सफाई नहीं की गई तो यह पूरे देश को अपनी चपेट में ले लेगी ।
हज़रत ने कहा कि इसका इलाज सिर्फ मोहब्बत है जिसका प्रयोग सूफिया ने किया और लोगों को एक माला में पिरो दिया, आज भी दरगाहें अकेली ऐसी जगह है जहां सभी धर्म के लोग दिलो में अकीदत लेकर आते हैं और मोहब्बत भाईचारे का सबक हासिल करते हैं, हमें औलिया अल्लाह की ज़िंदगी से सीखना चाहिए, वह गुनहगार से नहीं गुनाह से नफरत करते और गुनहगार को मोहब्बत के आगोश में लेकर उसे गुनाहों से दूर कर देते, अब हमें यही अमल करना है ।
उन्होंने कहा कि अफवाहों पर ध्यान न दिया जाए और हकीकत को समझा जाएँ तो हम काफी हद तक बच सकते हैं, हज़रत ने शिक्षा प्राप्त करने पर बल देते हुए कहा कि इस्लाम ने शिक्षा पर कितना बल दिया है इसे इससे समझना चाहिए कि क़ुरआन में सबसे पहले कहा गया “इकरा” यानी पढ़ो, अल्लाह के हबीब ने फरमाया कि अगर तालीम हासिल करने के लिए चीन भी जाना पड़े तो जाओ, लिहाज़ा मुसलमानों को खास तौर पर अपने बच्चो को पढ़ाना चाहिए, इसके लिए चाहे उन्हें कितनी भी तकलीफ उठानी पड़े।
हज़रत ने कहा कि मुल्क में नफरतों के इस दौर को रोकने के लिए हमारे पास गरीब नवाज़ का दिया बेहरीन फार्मूला है, वह यह है कि” मोहब्बत सबके लिए नफरत किसी से नहीं” हमें इसे अपने अमल में लाना होगा।

By: यूनुस मोहानी

नफरत से इंसानियत और मुल्क दोनों का नुक़सान : सय्यद मोहम्मद अशरफ

10 फरवरी/नागपुर
नफरत इंसानियत और मुल्क दोनों का नुक़सान कर रही है, ये बात आल इंडिया उलमा मशाइख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने नागपुर में आयोजित कार्यक्रम ” हम कहां है” में बोलते हुए कही, हज़रत ने कहा कि यह इस वक़्त में खुद से पूछा जाने वाला सबसे पहला और जरूरी सवाल है कि हम कहां है?
उन्होंने कहा, हमारे इतिहास में हमने जिस तरह इंसानियत को बचाने और ज़ुल्म को खतम करने के लिए कुर्बानियां दी उसे रहती दुनिया तक भुलाया नहीं जा सकता लेकिन अब हम अपने आप को पहचान नहीं रहे क्योंकि हमने अपने गुज़रे हुए कल से सीखने का हुनर खो दिया है, अगर वापस वही मुकाम हासिल करना है तो हमें अपने गुज़रे हुए कल को देखना होगा और सूफिया के तरीके पर अमल करते हुए इंसानियत की भलाई के लिए काम करना होगा।
नफरत को हर हाल में रोक देना होगा और तलीमे नबी पर पूरी तरह अमल करना होगा वरना यह सवाल हमारे सामने ऐसे ही खड़ा रहेगा और हम खुद कभी इसका जवाब नहीं ढूंढ पाएंगे ।
हज़रत ने कहा कि किसी भी मसले पर सिर्फ सुनकर राय बनाने की आदत छोड़ दीजिए, चीज़ों को खोल कर देखिए बच्चो को गुमराह होने से बचने के लिए पढाएं।

By: यूनुस मोहानी

नफरत नहीं रुकी तो ख़तरे में है संविधान : सय्यद मोहम्मद अशरफ

दिल्ली-25 जनवरी
ग़ालिब एकेडमी बस्ती निज़ामुद्दीन में दिनांक 25 जनवरी 2018 को विश्व विख्यात संस्था आल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड की दिल्ली शाखा द्वारा दोपहर 2 बजे से “हम हिन्दुस्तानी”(We The Indians) नाम से कार्यक्रम का आयोजन किया गया. बोर्ड द्वारा यह प्रोग्राम पूरे देश में आयोजित किया गया है, इस कार्यक्रम में मुख्य उपस्थिति आल इंडिया उलमा व मशाइख़ बोर्ड एवं वर्ल्ड सूफी फोरम के अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी की रही. विशिष्ट अतिथि के तौर पर मलेशिया से पधारे शेख इस्माईल कासिम सहित जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ख्वाजा मोहम्मद इकरामुद्दीन रहे।
कार्यक्रम में बोलते हुए हज़रत सय्यद अशरफ किछौछवी ने कहा कि बिना संविधान की इज्जत किये देशप्रेम सिर्फ एक ढोंग है, उन्होंने साफ कहा कि हमें अपनी लोकतांत्रिक प्रणाली को और मज़बूत करना होगा, इसमें विश्वास को बनाए रखना होगा क्योंकि हमारी गंगा जमनी तहज़ीब को जिस तरह नफरत की आग से खतरा है वह बहुत डरावना है, अगर यह तहज़ीब ख़तम हुई तो न कहीं कानून का राज होगा न कहीं लोकतंत्र, हम जिस आज़ादी की बात कर रहे हैं वह एक मज़ाक़ के सिवा कुछ नहीं होगा ,उन्होंने कहा कि देश को बचाने का अपनी आज़ादी को बरकरार रखने का सिर्फ एक रास्ता है मोहब्बत का, वह भी सबके लिये ,नफरत सड़कों पर जिस तरह घिनौनी तस्वीर पेश कर रही है वह मुल्क के लिऐ बुरा है. हमें मुल्क को आगे बढ़ाना है इसके लिए ज़रूरी है अपनी मिली जुली संस्कृति की हम रक्षा करें. संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करें ।
मलेशिया से तशरीफ लाए वर्ल्ड शहादा काउंसिल के अध्यक्ष हज़रत शेख इब्राहिम क़ासीम ने कहा, भारत एक अद्भुत देश है, पूरे संसार में ऐसा अनुपम उदाहरण नहीं मिलता जहां इतने धर्म एक साथ मिलजुल कर रहते हैं, उन्होंने बोर्ड को धन्यवाद देते हुए कहा कि मुझे खुशी है कि आपने अपने गणतंत्र दिवस पर आयोजित इस कार्यक्रम में मुझे बुलाया ताकि इस प्यारे देश को मैं अपनी मोहब्बत का नज़राना पेश कर सकूं।
प्रोफेसर ख्वाजा मोहम्मद इकरामुद्दीन ने कहा, देश में जिस तरह का तरह माहौल बनाया जा रहा है वह हमारे संवैधानिक ढाँचे के लिए खतरनाक है, लोग धार्मिक आधार पर नफरत का व्यापार कर रहे हैं, देश को बचाने के लिए बुद्धिजीवी वर्ग को भी आगे आना होगा. उन्होंने लोगों को सोशल मीडिया की ताकत से रूबरू कराते हुए कहा कि जहां यह विकास प्रतीक है वहीं गलत इस्तेमाल से सबसे बड़ा खतरा है. लिहाज़ा हमें होशियार रहना होगा। कार्यक्रम को हज़रत सय्यद फरीद अहमद निज़ामी ने भी खिताब किया. उन्होंने कहा कि देश सूफी संतों का है इसे आग लगाने की कोशिश की जा रही है, हमें उनके जानशीन होने का हक़ अदा करना है और नफरतों से मुल्क बचाना होगा। कार्यक्रम संचालन मौलाना मुख्तार अशरफ ने किया, कार्यक्रम में राष्ट्रगान हुआ और सलातो सलाम के बाद मुल्क की सलामती अमन और तरक्की की दुआ की गई।

By: Yunus Mohani

मुसलमान मुल्क के वफादार, मुल्क को नुक्सान पहुँचाने वाले नहीं : सय्यद मोहम्मद अशरफ

जबलपुर/23 जनवरी ,मुसलमान मुल्क के वफादार, मुल्क को नुक्सान पहुंचाने वाले नहीं “ यह बात आल इंडिया उलेमा व मशायख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने जबलपुर में एक जलसे को संबोधित करते हुए कही .उन्होंने कहा कि जब भी मुल्क को कुर्बानियों कि ज़रूरत पड़ी है मुसलमान सबसे आगे निकल कर आये हैं .चाहे वह मुल्क की आज़ादी कि लडाई रही हो या दुश्मन से लोहा लेने का मौक़ा और आज भी वही जज्बा है.
हजरत ने मुल्क में मौजूदा दौर में जिस तरह के हाल बने हुए हैं उसपर कहा कि लोगों को मुल्क के सम्मान का ख्याल रखना चाहिए अदालतों के फैसले के खिलाफ जिस तरह लोग सड़कों पर उतर कर हिंसा कर रहे हैं वह ठीक नहीं है .
उन्होंने कहा कि आल इंडिया उलेमा व मशायख बोर्ड 25 जनवरी को पुरे हिन्दोस्तान में “हम हिन्दोस्तानी” (We The INDIAN’S) नाम से कार्यक्रम आयोजित कर रहा है जिसका उद्देश्य लोगों में संविधान के प्रति और अधिक भरोसा पैदा करना है साथ ही अपनी गंगा जमुनी तहजीब को बढ़ावा देना एवं लोकतान्त्रिक प्रणाली को और अधिक मज़बूत करते हुए जनमानस का भरोसा मज़बूत करना है .उन्होंने सभी से इस कार्यक्रम में अपने अपने शहरों में सम्मिलित होने की बात कही.

हज़रत किछौछवी ने कहा कि सबको चाहिए कि मुल्क की तरक्की में अपना भरपूर योगदान दें और नफरत की हवा को थाम दे ताकि मोहब्बत की खुशबू से अपना चमन महक उठे.

By: यूनुस मोहानी

सरकार शिक्षा और रोजगार पर ध्यान दे : सय्यद मोहम्मद अशरफ

19जनवरी/ बुरहानपुर
सरकार शिक्षा और रोजगार पर ध्यान दे,आल इन्डिया उलमा व मशायख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने सरकार को चेताते हुए यह बात कही. उन्होंने कहा देश युवाशक्ति को सही दिशा दिए बिना आगे नहीं बढ़ेगा. देश का विकास युवाओं को बेहतर शिक्षा व्यवस्था और रोजगार देने से होगा। वह यहां मीडिया से रूबरू थे।
हज सब्सिडी खत्म किए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा, हम इस क़दम का स्वागत करते हैं साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर सरकार अपने बयान के मुताबिक़ सब्सिडी की रकम मुस्लिम समाज की बच्चियों की शिक्षा पर खर्च करेगी तो समाज के गरीब वर्ग को इसका फायदा पहुंचेगा।
उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री का बयान कि “हम मदरसों के खिलाफ नहीं और सरकार इन्हें बंद नहीं करने जा रही बल्कि इसमें अच्छी व्यवस्था हो” का भी स्वागत योग्य है, सरकार को सभी नागरिकों के हित में काम करना चाहिए यही लोकतंत्र का तकाजा है।
उन्होंने कहा, जिस तरह देश में बेरोजगारों की भीड़ बढ़ रही है यह खतरनाक है हमारे नौजवान अवसाद ग्रस्त हो रहे हैं और गलत राह पर जा रहे हैं. जिसका नतीजा दिन प्रतिदिन बढ़ता अपराध का ग्राफ है। सरकार को इस और देखना होगा, न सिर्फ केंद्र सरकार बल्कि राज्य में बैठी सरकारों को भी प्रबंध करना चाहिए वरना देश खतरे में है।
हज़रत ने कहा, सूफी संतो की यह पावन धरती आज नफरत की आग में झुलस रही है, सभी को इसे बचाने के लिए आगे आना होगा। हज़रत ने कहा कि ख्वाजा गरीब नवाज़ का यह कौल कि “मोहब्बत सबके लिए नफरत किसी से नहीं” आज बहुत ज़रूरी है क्योंकि इसपर अमल करके ही नफरत को हराया सकता है।

मस्जिदों को नमाजियों से भर दें लाउडस्पीकर की इजाज़त ले: सय्यद मोहम्मद अशरफ

संभल/ 8 जनवरी
मस्जिदों को नामाजियो से भर दें और लाउडस्पीकर की प्रशासन से इजाज़त लें यह बात आल इन्डिया उलेमा व मशायख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने संभल में एक जलसे को संबोधित करते हुए कही ।हज़रत ने साफ तौर पर कहा कि मुसलमान लाउडस्पीकर की आवाज़ की वजह से नमाज़ नहीं पड़ता बल्कि अपने रब के हुक्म से नमाज़ पढ़ता है हमें इस बात को अमली तौर पर बताना होगा।
उन्होंने कहा कि लाउडस्पीकर के लिए जो भी कानूनी तरीका हो उसे अपना कर इजाज़त हासिल करे और क़ानून का पूरा पालन करते हुए अपने दीनी फरीजे को भी पूरा करें । हज़रत ने लोगों से होश से काम लेने की बात कही जज्बात को काबू में रखते हुए काम करे ताकि नफरत अपने मकसद में हरगिज़ कामयाब न हो सके और मोहब्बत के फूल की खुश्बू पूरे चमन को महका दे।
हज़रत किछौछवी ने यह भी कहा कि मस्जिदों को हमे भरना होगा यह हमारी ज़िम्मेदारी है जिसे मुसलमान जान तो रहे हैं लेकिन अमल नहीं कर रहे हम जिस चीज का खुद ख्याल नहीं रख रहे अगर उसे लेकर बात होती है तो गलती हमारी है ,लोग आज तरह तरह से हमे उकसाने की साजिश रच रहें है हमें होशियार रहना होगा ।
अल्लाह के वालियो ने अल्लाह के हुकम और नबी की तालीम को हम तक पहुंचाया अगर हम औलिया अल्लाह से मोहब्बत रखते हैं तो मोहब्बत का तकाजा है कि महबूब की अदा को अपनाया जाय।

By: Yunus Mohani

AIUMB President met with Former PM of Malaysia Dr Mahathir bin Mohammad

Malaysia: 5 January 2018
AIUMB President & Founder Hazrat Maulana Syed Mohammad Ashraf Kichchawchchwi met with Doctor Mahathir bin Mohammad, the fourth Prime Minister of Malaysia from 1981 to 2003, the longest-serving PM of Malayasia, Islamic intellectual, author, thinker and prominent leader of the Muslim world, appreciated World Sufi Forum’s Vision and Global efforts to promote Sufism.
He congratulated Indian Muslims on their peaceful, multi-cultural and pluralistic values. Quoted the Qur’an to be progressive, integrated and United against extremism, terrorism, religious persecution and fanaticism.
When asked about his role model as a leader, he said: ” Beloved Prophet (peace be upon him)”

By: Ghulam Rasool Dehalvi

मोहब्बत ज़िन्दगी है नफरत मौत : सय्यद मोहम्मद अशरफ

गोरखपुर/19 दिसम्बर
मोहब्बत ज़िन्दगी है और नफरत मौत यह बात कल मोहल्ला तुर्कमान गोरखपुर में एक धर्मसभा को संबोधित करते हुए आल इंडिया उलेमा व मशायख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने कहीं ,उन्होंने कहा नफरत समाज को तोड़ती है और मोहब्बत सभ्य समाज का निर्माण करती है ,नफरत आग लगाती है मोहब्बत उस आग को बुझाने का काम करती है,धर्म का संदेश मोहब्ब्त है और अधर्म नफरत है, फैसला आपको करना है कि आप धर्म के साथ हैं या अधर्म के।
हज़रत ने कहा लोग देश को तोड़ने की साजिश रच रहे हैं ,अफवाहों के बाज़ार गर्म है ऐसे माहौल में पैगम्बर हजरत मुहम्मद मुस्तफा सल्लललाहू अलैहि वसल्लम की शिक्षाओं पर अमल करके हम न सिर्फ अपने प्यारे देश बल्कि पूरे संसार में शांति स्थापित कर सकते हैं,उन्होंने कहा खास तौर से हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम आपसी रिश्तों को मजबूत करे पड़ोसी के हक अदा करे साफ सफाई का ध्यान रखे ।
अपने धर्म पर पूरी तरह अमल करते हुए दूसरों की धार्मिक भावनाओं एवं धर्म का सम्मान करें,यही पैग़म्बरे इस्लाम की तालीम है अगर हम इसपर अमल नहीं करते तो हमारा मोहब्ब्त का दावा कमजोर है।देश के मौजूदा हालात पर बोलते हुए हज़रत ने कहा नफरत रोज़ नई सूरत में दिखाई दे रही है लोगों की इज्जत ,जान और माल सब वहशी दरिंदों के निशाने पर है देश का सम्मान तिरंगा भी इस बिगड़ी भीड़ को रास नहीं आ रहा और धर्मांध लोग इसे अपमानित कर रहे हैं सरकार को ऐसे तत्वों से सख्ती से निपटना होगा और सभी शांति के समर्थकों को एक साथ आकर इनके खिलाफ खड़ा होना होगा। हमे अपराधी धर्म आधार पर नहीं देखना चाहिए और न ही पीड़ित को अगर किसी पर भी ज़ुल्म होता है तो ज़ालिम का विरोध करना होगा।क्योंकि अपराधी सिर्फ अपराधी है हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई के रूप में उसकी पहचान नहीं की जानी चाहिए।
जलसे में बड़ी संख्या में लोगों ने शिरकत की जलसे का समापन सलातो सलाम के बाद मुल्क में अमन की दुआ के साथ हुआ।

By: Yunus Mohani

अमन वालों की ख़ामोशी भी ज़ुल्म है : सय्यद अशरफ

कोटा /11 दिसम्बर “अमन वालों कि ख़ामोशी भी ज़ुल्म है’ यह बात आल इंडिया उलेमा व मशायख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने एक जलसे में ख़िताब करते हुए कही .हजरत ने कहा सिर्फ ज़ुल्म करना ही इंसान को ज़ालिम नहीं बनाता बल्कि किसी के किसी के साथ ज़ुल्म करने पर खामोश रहना भी हमे ज़ालिम बनाता है .

उन्होंने कहा जिस तरह आये दिन वहशी दरिन्दे मजलूमों को अपना शिकार बना रहे है उन्हें मज़हब के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए बल्कि उन्हें दरिन्दे के तौर पर देखा जाना चाहिये और उनके खिलाफ इंसानियत के तकाजे पर खड़ा होना चाहिए, लेकिन समाज में जिस तरह की नफरत घुल रही है वहां धर्म पैमाना बनता जा रहा है, जोकि धर्म है ही नहीं ,क्योंकि धर्म मोहब्बत का सन्देश देता है, ज़ुल्म को समाप्त करने का मार्ग दिखाता है, न कि हमें हिंसक पशु बनाता है .

हज़रत ने कहा पैगम्बरे अमनो शांति सल्लललाहूअलहिवसल्लम की तालीमात पर अमल करने से आदमी इंसान बनता है और इंसान ज़ालिम नहीं होता, क्योंकि ज़ालिम आदमी हो सकता है इंसान नहीं.हज़रत ने बिना धर्म सम्प्रदाये का फर्क किये अमन वालों से ज़ुल्म के खिलाफ खड़े हो जाने की अपील की. उन्होंने कहा कि रसूले खुदा का फरमान है कि ज़ालिम और मजलूम दोनों की मदद करो ज़ालिम की मदद यह है कि उसे ज़ुल्म से रोक दिया जाये .
अमन वालों की ख़ामोशी ज़ालिम को और ज़ालिम बनाती है इस चुप्पी को तोडना होगा सबको मोहब्बत के साथ एक जुट होकर ज़ालिम के खिलाफ खड़ा होना होगा पैगाम वही है “मोहब्बत सबके लिए नफरत किसी से नहीं “
जलसे को मौलना उमर अशरफी ने भी संबोधित किया और हजारों की संख्या में लोग मौजूद रहे .

BY: Yunus Mohani