इल्म से दूर रहकर हम खुद अपने ऊपर ज़ुल्म कर रहे हैं : सय्यद मोहम्मद अशरफ

10 मई/ खरगौन, मध्य प्रदेश

“इल्म से दूर रहकर हम खुद अपने ऊपर ज़ुल्म कर रहे हैं” यह विचार वर्ल्ड सूफी फोरम एवम् आल इंडिया उलमा व मशाइख़ बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने जनसभा को संबोधित करते हुए कही, उन्होंने कहा मुसलमान सिर्फ अपने साथ भेदभाव किये जाने की बात करते हैं और मजलूमियत का रोना रोते रहते हैं मुसलमानों ने यही अपना पसंदीदा काम बना रखा है अपनी नाकामयाबियों पर सोचने के बजाय यह पूरी कौम सिर्फ दूसरो को इल्ज़ाम देने के काम में मसरूफ है।
हज़रत ने कहा जिस कौम की किताब क़ुरआन है और उसका पहला अल्फ़ाज़ इकरा है अफसोस वह कौम इल्म से दूर है हमारी कम से कम 50 फीसदी आबादी ने स्कूल और मदरसे का मुंह नहीं देखा आखिर इसके लिए कौन ज़िम्मेदार है?
आपको क्या किसी पार्टी ने अपने बच्चो को पढ़ाने से रोका प्रशासन ने रोका फिर हमारे किसी गैर मजहबी भाई ने आपको रोका नहीं बल्कि आपने अपने ऊपर यह ज़ुल्म खुद किया है किसीऔर ने नहीं हमने खुद पस्ती का रास्ता चुना है हमने अल्लाह और उसके रसूल का फरमान नहीं माना और खुद को परेशानियों में घेरा है अब अगर आपको इस पस्ती से खुद को उबारना है तो इल्म हासिल करना होगा और इसके लिए कौम को बेदार करना होगा ।
हज़रत ने कहा कि मजलूमियत का रोना छोड़ दीजिए और लोगों पर इल्ज़ाम देना बंद कीजिए अपने बच्चे पढ़ाइए यही आगे बढ़ने का रास्ता है ।

By: Yunus Mohani

सियासी तूफ़ान है संभल कर रहिये तालीमी इदारे ज़द में हैं : सय्यद मोहम्मद अशरफ

8 मई /धर्मसिंहवां, संतकबीर नगर

“सियासी तूफ़ान है संभल कर रहिये तालीमी इदारे ज़द में हैं “यह बात वर्ल्ड सूफी फोरम एवं आल इन्डिया उलमा व मशाइख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने कही, उन्होंने कहा कि पूरे देश में जिस तरह से हालात बने हुए हैं और हम अपनी नासमझियों की वजह से जिस तरह उनका शिकार हो रहे हैं अब हमें होशियार होना होगा. अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में चल रहे हंगामे पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि अब तालीमी इदारे सियासत के तूफ़ान की ज़द में हैं, मदरसे से लेकर यूनिवर्सिटी तक स्कूल से लेकर कॉलेज तक हर जगह सियासत की घिनौनी चाल चली जा रही है, ऐसे में हमें अपने ज़हनो को खोल कर सब्र और अक्ल से काम लेना है और हरगिज़ देश को तोड़ने वाली ताक़तों को कामयाब नहीं होने देना है .

हज़रत ने कहा कि यह वक़्त इम्तेहानो का है और नौजवान आन्दोलन कर रहे हैं, यह हमारी नाकामयाबी है दूसरों के फेंके हुए जाल में हम फंसे हुए हैं ऐसे में हमें जोश से नहीं होश से काम लेना है ताकि हम अपने मकसद यानि तालीम हासिल करने में पूरी तरह कामयाब हो जाएँ और हम जब तालीम हासिल कर लेंगे तो हमें कोई अपने जाल में आसानी से नहीं फंसा सकेगा.

उन्होंने कहा, अपने मिशन से न हटना और उस पर लगे रहना जीत है और यही तरीका हमें सूफिया की ज़िन्दगी में मिलता है, उन्होंने मुश्किलात के बावजूद अपना काम किया और कामयाब हुए, हमे भी चाहिए कि औलिया के दर से वाबिस्ता रहें और मुश्किलों के बावजूद भी अपने काम पर डंटे रहें, मोहब्बत को आम करना हमारा काम हैं, नफरत को खतम कर देना हमारी ज़िम्मेदारी है, कैंपस में हरगिज़ नफरतों को पनपने न दें यही हमारी जीत है और यही मुल्क की तरक्की का रास्ता भी है.

By: यूनुस मोहानी

हमने जिन्ना को 1947 में ही नकार दिया, अब इसके जरिए राजनीत बंद हो : सय्यद मोहम्मद अशरफ

3 मई / बासनी, नागौर

“हमने जिन्ना को 1947 में ही नकार दिया अब इसके जरिए राजनीत बंद हो” यह बात वर्ल्ड सूफी फोरम और आल इन्डिया उलमा व मशाईख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने उर्स शेखे तरीकत के मौके पर एक जलसे को खिताब करते हुए कही।
हज़रत ने कहा कि मुल्क के शिक्षण संस्थानों को नफरत की आग में किसी भी हालत में नहीं धकेला जाना चाहिए क्योंकि समाज पर इसका गहरा और बुरा प्रभाव पड़ता है ,उन्होंने कहा कि जहां तोड़ने की बात शिक्षण संस्थानों में शुरू होगी तो समाज को कोई बिखराव से नहीं रोक सकता ।
हज़रत ने कहा कि भारतीय मुसलमान ख्वाजा के दर को छोड़ कर कहीं नहीं जाने वाला, सूफिया के मोहब्बत के पैगाम को देश में हर जगह आम करना हमारा काम है, जहां भी नफरत की आग लगेगी हम सब भारतवासी मोहब्बत के पानी से उसे बुझा देंगे ।
हज़रत ने कहा कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के पहले ग्रेजुएट ईश्वर चंद्र थे इससे समझना चाहिए कि नाम से किसी शिक्षण संस्थान को निशाना बनाने का प्रयास घिनौनी और स्तरहीन राजनीत के सिवा कुछ नही। हज़रत ने कहा कि सरकार से मांग करते हैं कि शिक्षण संस्थानों को राजनीत से बचाया जाए और उन्हें नफरत की से बचाने हेतु हर संभव प्रयास किया जा

ख़ुदा की बन्दगी और बन्दों की सेवा करना ही ख्वाजा ग़रीब नवाज़ का मिशन: सैयद मोहम्मद अशरफ

मकराना में जश्न ए ख्वाजा ग़रीब नवाज़ के अवसर पर ऑल इंडिया उलमा व मशाइख़ बोर्ड के अध्यक्ष का ख़िताब

22 मार्च / मकराना, नागौर (प्रेस विज्ञाप्ति) कल रात नागौर शरीफ के मकराना में जश्न ए ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ कार्यक्रम का आयोजन हुआ जिसमें विशेष रूप से आमंत्रित ऑल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड और वर्ल्ड सूफी फोरम के अध्यक्ष हज़रत सैयद मोहम्मद अशरफ किछोछ्वी साहब ने कहा कि हज़रत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती का मिशन ख़ुदा की बन्दगी और उस के बन्दों की सेवा करना है।
हज़रत ने विशेष रूप से कार्यक्रम में आए हुए युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि आप देश का भविष्य हैं, आप को अपनी शिक्षा को लेकर संवेदनशील होना होगा, आज मुस्लिम वर्ग क्यों पिछड़ा है, उसका सब से बड़ा कारण है कि कोशिश और मेहनत करने से पहले ही हार मान लेते हैं कि हम शिक्षा प्राप्त कर के क्या करेंगे जब हमें नौकरियां ही नहीं मिलेंगी। यह गलत सोच है, हज़रत ने कहा कि अगर कोई युवा दिन में आठ घंटे पढ़ाई के लिए समय निकालता है तो आप दस घंटे पढ़ाई के लिए समय निकालें, साथ ही कहा कि शिक्षा प्राप्त करने का उद्देश्य केवल पैसा प्राप्त करना न हो बल्कि हर विभाग में अपना प्रतिनिधित्व होना चाहिए जिस से अपने देश, समाज और कौम की सेवा कर सकें।
हज़रत ने कहा कि आज हम जिन के नाम पर यहाँ इकठ्ठा हुए हैं उनका मिशन शिक्षा प्राप्त करना था, आपने कहा कि मुस्लिम क़ौम कब तक मज़लूमियत का रोना रोती रहेगी, अब समय आ गया है कि मज़लूमियत का रोना बंद करें और कड़ी मेहनत करना शुरू करें। हमारे उज्ज्वल भविष्य का निर्माण वर्तमान प्रतिक्रिया के आधार पर पर टिका हुआ है। नींव को उत्तेजक बना कर निर्माण पूरा कर लें या हार मान कर भविष्य के निर्माण की उम्मीदों के किले अभी गिरा दें, यह आपके हाथ में है।
कार्यक्रम में मौलाना मोहम्मद अबरार अशरफी नाज़िम जामिया हनफ़िया नजमुल उलूम, हाफिज़ मोहम्मद अशरफ शेरानी, मौलाना अरफात अज़हरी, मौलाना मोहम्मद मुस्तक़ीम शेरानी, मौलाना अब्दुल रहमान, हाफिज़ मोहम्मद रिज़वान, हाफिज़ मोहम्मद नदीम, मौलाना मोहम्मद शाहरुख, मौलाना मोहम्मद शाकिर, मौलाना मोहम्मद रफीक़, मौलाना मोहम्मद जावेद और अज़मत अली, अयूब खान शेरानी, यूसुफ खान शेरानी, अब्दुल ग़फ्फार खान के अलावा मकराना की सभी मस्जिदों के इमाम और कई लोगों ने भाग लिया, कार्यक्रम का अंत देश में शांति की दुआ और सलात व सलाम के साथ हुआ।

By:
हुसैन शेरानी

अल्लाह के हुक्म के पाबंद हो जाओ सड़कों पर आंदोलन नहीं करने पड़ेंगे – सय्यद अशरफ

16 मार्च / हनुमानगढ़
अल्लाह के हुक्म के पाबंद हो जाओ सड़कों पर आंदोलन नहीं करने पड़ेंगे” यह बात वर्ल्ड सूफी फोरम और आल इन्डिया उलमा व माशाइख बोर्ड के संस्थापक, अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने कही।
हज़रत ने कहा कि मौजूदा वक़्त में देश में जिस तरह तीन तलाक़ को लेकर जो मामला चल रहा है और हर तरफ से शरीयत बचाने की आवाज़ लग रही है उनसे पूछा जाना चाहिए कि शरीयत हमें बचाने के लिए है या हम शरीयत को बचा सकते हैं, उन्होंने कहा शरीयत अमल करने की चीज है उस पर अमल कीजिए आपको सड़कों पर उतरना नहीं पड़ेगा ।
उन्होंने कहा कि हमारे नबी रहमते आलम सल्लल्लहू अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया कि निकाह को आसान कर दो हमने उसे मुश्किल कर दिया है आज एक लड़की का बाप हर वक़्त फिक्र में है कि कैसे अपनी बेटी का निकाह करे, दहेज की लानत को हमने अपने ऊपर लाद लिया है, हमें हुक्म है कि निकाह आसान कर दो ताकि ज़िना मुश्किल हो जाए हमने उसका उल्टा किया तो अब सवाल यह है कि क्या ऐसे शरीयत बचेगी ?
हज़रत ने कहा कि निकाह इस तरह मुश्किल हो गया है कि एक ज़िंदगी गरीब बाप को कम लगने लगी है और जिस चीज को अल्लाह और उसके रसूल ने सबसे ज़्यादा ना पसंद किया उसे इस क़दर आसान कर दिया कि एक लम्हे में रिश्ता ख़तम कर दिया जाता है, इस बात का ख्याल भी नहीं कि वह खातून तुम्हारे बच्चो की मां है,आखिर क्या होगा उस औरत का ?
उन्होंने साफ कहा कि अल्लाह के हुक्म के पाबंद हो जाओ, निकाह को आसान करो दहेज की लानत से बचो और जिस चीज को अल्लाह और उसके रसूल पसंद नहीं करते उसके करीब भी मत जाओ खुद बखुद आसानियां हो जाएंगी और सड़कों पर यह आन्दोलन नहीं करने होंगे।

By: यूनुस मोहानी

फरमाने नबी: उसके लिए जन्नत में घर कि ज़िम्मेदारी मेरी है जो हक़ पर होने के बाद भी झगड़ा छोड़ दे : सय्यद मोहम्मद अशरफ

15 मार्च /हिंडो जैतससर
फरमाने नबी है कि उसके लिए मैं जन्नत में एक घर की ज़िम्मेदारी लेता हूँ जो हक पर होने के बावजूद भी झगड़ा छोड़ दे” यह बात वर्ल्ड सूफी फोरम और आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने कही.
वह कल यहाँ एक जलसे में बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे थे. उन्होंने कहा कि रसूले खुदा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का यह फरमाने आलिशान अमन को कायम करने के लिए बेहतरीन अमल है और अपनी दुनिया और आखिरत दोनों सवारने का जरिया भी है. उन्होंने कहा कि आज कल लोग ग़लत होते हुए भी पीछे नहीं हटने के लिए बज़िद हैं, उन्हें इस फरमाने रसूल पर गौर करना चाहिए क्योंकि अगर आप ग़लत हैं तो आप ज़ुल्म कर रहे हैं और ज़ुल्म करने वाला यकीनन ज़ालिम है.
हज़रत ने कहा, मुल्क में जिस तरह के हालात हैं हमें इस हदीसे पाक पर गौर करने की ज़रूरत है ताकि हम आपस में प्यार और मोहब्बत के साथ रह सकें. हज़रत ने लोगों का ध्यान बदगुमानी की तरफ भी दिलाया और कहा कि रहमते आलम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का इरशाद है कि बदगुमानी बदतरीन झूठ है, लिहाज़ा अपने भाई के लिए बदगुमानी न पालो बल्कि जब तक हकीकत का पता न हों उसके बारे में अच्छा तसव्वुर करो इससे नफरते खतम होंगी और अफवाहों से होने वाले नुक्सान खुद बखुद रुक जायेंगे.
उन्होंने कहा कि तालीमे नबी को जानिए और उस पर अमल कीजिये, मौजूदा माहौल का हल भी हमें कुरआन और हदीस में दिया गया है, उसे पढ़िए और समझिये फिर उस पर अमल भी कीजिये. हज़रत ने कहा कि अपने पड़ोसी का ख्याल रखिये क्योंकि हमारे नबी का फरमान है कि वह शख्स मुसलमान नहीं हो सकता कि जो खुद पेट भर कर खाये और उसका पडोसी भूखा सो जाए और इसमें कहीं मज़हब की क़ैद नहीं है, पड़ोसी किसी भी धर्म का मानने वाला हो हमें उसका भरपूर ख्याल रखना चाहिए.

By: यूनुस मोहानी

शांति के बिना विकास की परिकल्पना भी बेईमानी : सय्यद मोहम्मद अशरफ

13 मार्च/ हिंदौर सूरतगढ़,
“शांति के बिना विकास की परिकल्पना भी बेईमानी” वर्ल्ड सूफी फोरम और आल इन्डिया उलमा व मशायख बोर्ड के संस्थापक व अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने यह बात एक जलसे को संबोधित करते हुए कही।
उन्होंने कहा,विकास के लिए पहली शर्त है शांति, अगर अमन को खतम किया गया तो विकास के बारे में सोचा भी नहीं जा सकता, हज़रत ने कहा कि पैग़म्बरे अमन ने तालीम दी जिससे पूरी दुनिया में निश्चित तौर पर शांति कि स्थापना की जा सकती है, उन्होंने कहा, नबी ने फरमाया कि तुम्हारा पड़ोसी तुम्हारे शर से अगर महफूज़ नहीं है तो तुम मोमिन नहीं हो सकते, सिर्फ इस हदीस पर अमल करने से शांति स्थापित की जा सकती है।
हज़रत ने कहा कि कोई भी धर्म हिंसा की शिक्षा नहीं देता, सभी धर्म कहते हैं कि मानवता की रक्षा की जानी चाहिए, फिर इस्लाम ने तो जानवरों तक के अधिकार बताए हैं और पैगम्बर ने तालीम दी कि किसी चिड़िया का घोसला भी न उजाड़ा जाए। मुसलमानों की ज़िम्मेदारी अमन क़ायम करने की ज़्यादा है क्योंकि हमें लोगों के लिए भलाई करनी है, अगर खुद को बेहतरीन लोगों में शामिल करवाना चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि आपस में मोहब्बत के साथ रहना और अपने पड़ोसी के हुकूक अदा करना हमारी ज़िम्मेदारी है, उसे निभाना होगा, उन्होंने याद दिलाया कि किस तरह हिन्दुस्तान में सूफिया ने मोहब्बत की तालीम को आम किया है, उस पर ध्यान देकर अमल करना होगा क्योंकि मुल्क के विकास में हमारा योगदान अग्रणी होना चाहिए।

नफरत की ज़बान से मुल्क का नुकसान : सय्यद मोहम्मद अशरफ

कोलकाता/5 मार्च
“नफरत की ज़बान से मुल्क का नुकसान” यह विचार एक कार्यक्रम में बोलते हुए आल इंडिया उलेमा व मशायख बोर्ड एवं वर्ल्ड सूफी फोरम के अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने रखे.
हज़रत ने कहा इबादतगाहों के लिए इंसानी खून को बहाने की बात करना मूर्खता है,क्योंकि इश्वर की आराधना के लिये बेगुनाहों का खून बहा देना धर्म नहीं हो सकता इसलिए देश के लोगों को सावधान होना चाहिए क्योंकि नफरत से किसी चीज़ का हल नहीं निकल सकता .
सूफी संतो ने हमेशा मोहब्बत का पैगाम दिया है उन्होंने कहा कि सीरिया के लोगों की जो दुर्दशा है उसकी कहानी भर सुन लेने से रूह काँप जाती है अगर भारत में कोई इस तरह की बात कर रहा है तो वह देश का भला नहीं कर रहा .
अमन वाले सभी लोगों को देश के लिए एक जगह आकर नफरतों की आग को बुझाना होगा और यह मोहब्बत के सिवा संभव नहीं है .हिंसा से कुछ हासिल नहीं किया जा सकता हाँ देश और दुनिया में सिर्फ तबाही हो रही है .क्योंकि कभी आग को आग से नहीं बुझाया जाता.
हज़रत ने कहा कि मुसलमानों को ख़ास तौर पर अफवाहों से बचना चाहिए क्योंकि अफवाहों से लोगों में गुस्सा भरने के प्रयास भी किये जा रहे हैं .

By: Yunus Mohani

मोहब्बत ज़िन्दगी है नफरत मौत : सय्यद मोहम्मद अशरफ

4 मार्च/पीलीभीत
मोहब्बत ज़िन्दगी है नफरत मौत ‘यह विचार आल इंडिया उलमा व मशायख बोर्ड एवं वर्ल्ड सूफी फोरम के अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने आल इंडिया अशरफुल अम्बिया कान्फ्रेंस में बोलते हुए रखे .उन्होंने कहा कि दुनिया तबाही की राह पर चल पड़ी है सीरिया हो यमन हो या दुनिया का कोई भी कोना हिंसा पैर पसार रही है और इन्सानी जिंदगियों को निगल रही है .

हज़रत ने कहा कि रहमते आलम सल्लल्लाहुअलहिवसल्लम ने दुनिया को जो पैगाम दिया उसी में सबकी भलाई है हमें सीरत के हर हर पहलू को अमली ज़िन्दगी में उतारने की कोशिश करनी चाहिए मेरे सरकार ने फ़रमाया कि लोगों में बेहतर वह जो लोगों का भला चाहता है ,तो खुद को बेहतर बनाना होगा .

फरमाने रसूल है कि मुसलमान वह जिसकी ज़बान और हाथ से सारे इन्सान महफूज़ रहें तो अब समझ ले दुनिया कि मज़लूमो के कातिल कौन हैं .

मोहब्बत ज़िन्दगी है क्योंकि मोहब्बत में भलाई है, नफरत मौत है क्योंकि नफरत में नुक्सान है गरीब नवाज़ ने इसीलिए कहा मोहब्बत सबके लिए नफरत किसी से नहीं ,इसी बात को आम कर दीजिये दुनिया से ज़ुल्म मिट जायेगा

मुफ्ती साजिद हस्नी कादरी ने कहा कि हमारे आक़ा हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा पूरी दुनिया के लिए रहमत बनकर आए और हुज़ूर ने हमेशा गरीबों व नादार लोगों की मदद की । उन्होंने लोगों से हुज़ूर की सीरत-ए-तैयबा पर चलने की हिदायत दी.

और सरकार ए कलाँ हज़रत सैयद मुख्तार अशरफ अशरफी जिलानी रहमतुल्लाह अलैहि की जीवनी पर भी विस्तार से प्रकाश डाला।

सभा का आगाज़ क़ुरआन करीम की तिलावत के साथ हाफिज रिजवान अशरफ ने किया.निज़ामत मौलाना गुलाम मुस्तफा ने की.जलसे को मुफ़्ती नूर मोहम्मद हसनी, मौलाना यासीन अशरफी, मुफ्ती रिज़वान अहमद अशरफी, मुफ्ती जाकिर हुसैन, सैयद कलीम अशरफ, सैयद सुहैल अहमद अशरफी , सैयद हैदर अशरफ ने भी संबोधित किया।

सभा में मौलाना शादाब अली, ज़हीर अहमद अशरफी, तक़ी शम्सी, मंसूर अहमद शम्सी, जमील अशरफी, गुड्डू अशरफी, सरताज अहमद, नूर मियां लुत्फी, जहीर मियां लुत्फी, गनी शम्सी और हाफिज जाकिर हुसैन के अलावा हज़ारों की तादाद में लोग मौजूद रहे.जलसे का अंत सलात व सलाम और देश में अमन व शांति की दुआ के साथ हुआ.

सीरिया समेत पूरी दुनिया में इंसानियत खतरे में ,जुमे में करें ख़ास दुआ : सय्यद मोहम्मद अशरफ

28 फ़रवरी/जयपुर
सीरिया समेत पूरी दुनिया में इन्सानियत खतरे में है इसके लिए जुमे को ख़ास दुआ का करे एहतेमाम “जयपुर में शरियत का पैगाम उम्मत के नाम कार्यक्रम में बोलते हुए यह ऐलान आल इंडिया उलेमा व मशायख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने किया .

हज़रत ने कहा कि जिस तरह की दर्दनाक खबरे और फोटो तथा वीडियो सीरिया से आ रहे हैं उससे पता चलता है कि इंसानी जिंदगियां किस क़दर परेशानी में हैं ऐसे में हमारा फ़र्ज़ है कि हम वहां जल्द अमन कायम हो इसके लिए दुआ करें और साथ ही उनकी मदद के लिए जो क़दम मुमकिन हो उसे उठाया जाये .हज़रत ने कहा आल इण्डिया उलेमा मशायख बोर्ड पूरी उम्मते मुस्लिम का आह्वाहन करता है कि हर मस्जिद में जुमे के रोज़ ज़ुल्म से करहाती इंसानियत के लिए दुआ की जाये .

हज़रत ने फ़रमाया कि नबी-ए –रहमत हज़रत मोहम्मद मुस्तफा सल्लललाहूअलहि वसल्लम का इरशाद है कि पूरी उम्मत एक जिस्म की तरह है जिसके किसी भी हिस्से में अगर तकलीफ हो तो पूरे जिस्म को इसका एहसास होना चाहिए .यही नहीं तमाम मखलूक अल्लाह का कुनबा है इसमें सिर्फ इंसान नहीं आते बल्कि सभी आ जाते हैं तो हमारी ज़िम्मेदारी है कि तड़पती और दर्द से चीखती इंसानियत का दर्द महसूस करें और ख़ास दुआ करें कि जल्द ही उन्हें इस परेशानी से निजात मिले और सीरिया समेत जहाँ जहाँ भी इंसानियत खतरे में है अमन कायम हो .

उन्होंने लोगों से कहा कि इस जुमे को होली भी है रंगों के त्यौहार में नफरत के सौदागर ज़हर घोल सकते हैं लिहाज़ा आपको होशियार रहना होगा ताकि ऐसी साजिशों को नाकाम किया जा सके हमें अमन को कायम रखना होगा इसके लिए हर मुमकिन कोशिश की जानी चाहिए प्रशासन का पूरा सहयोग कीजिये .