अमन वालों की ख़ामोशी भी ज़ुल्म है : सय्यद अशरफ

कोटा /11 दिसम्बर “अमन वालों कि ख़ामोशी भी ज़ुल्म है’ यह बात आल इंडिया उलेमा व मशायख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने एक जलसे में ख़िताब करते हुए कही .हजरत ने कहा सिर्फ ज़ुल्म करना ही इंसान को ज़ालिम नहीं बनाता बल्कि किसी के किसी के साथ ज़ुल्म करने पर खामोश रहना भी हमे ज़ालिम बनाता है .

उन्होंने कहा जिस तरह आये दिन वहशी दरिन्दे मजलूमों को अपना शिकार बना रहे है उन्हें मज़हब के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए बल्कि उन्हें दरिन्दे के तौर पर देखा जाना चाहिये और उनके खिलाफ इंसानियत के तकाजे पर खड़ा होना चाहिए, लेकिन समाज में जिस तरह की नफरत घुल रही है वहां धर्म पैमाना बनता जा रहा है, जोकि धर्म है ही नहीं ,क्योंकि धर्म मोहब्बत का सन्देश देता है, ज़ुल्म को समाप्त करने का मार्ग दिखाता है, न कि हमें हिंसक पशु बनाता है .

हज़रत ने कहा पैगम्बरे अमनो शांति सल्लललाहूअलहिवसल्लम की तालीमात पर अमल करने से आदमी इंसान बनता है और इंसान ज़ालिम नहीं होता, क्योंकि ज़ालिम आदमी हो सकता है इंसान नहीं.हज़रत ने बिना धर्म सम्प्रदाये का फर्क किये अमन वालों से ज़ुल्म के खिलाफ खड़े हो जाने की अपील की. उन्होंने कहा कि रसूले खुदा का फरमान है कि ज़ालिम और मजलूम दोनों की मदद करो ज़ालिम की मदद यह है कि उसे ज़ुल्म से रोक दिया जाये .
अमन वालों की ख़ामोशी ज़ालिम को और ज़ालिम बनाती है इस चुप्पी को तोडना होगा सबको मोहब्बत के साथ एक जुट होकर ज़ालिम के खिलाफ खड़ा होना होगा पैगाम वही है “मोहब्बत सबके लिए नफरत किसी से नहीं “
जलसे को मौलना उमर अशरफी ने भी संबोधित किया और हजारों की संख्या में लोग मौजूद रहे .

BY: Yunus Mohani

बिके हुए लोग अफवाहों को हवा देकर नफरत फैला रहे हैं :सय्यद मोहम्मद अशरफ

संतकबीर नगर /9 दिसम्बर
बिके हुए लोग अफवाहों को हवा देकर नफरत फैला रहे है यह बात संतकबीनगर ज़िले के धर्मसंघवा नामक स्थान पर एक कार्यक्रम में बोलते हुए आल इंडिया उलमा व मशायख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने कहीं ।
उन्होंने कहा, पूरी दुनिया में अफवाहों के कारोबारी ज़हर बेच रहे हैं हर तरफ ज़ुल्म हो रहा है, ऐसे में अगर अमन वाले लोग खामोश रहे तो दुनिया जल जायेगी, हमे न सिर्फ इस प्यारे वतन को बल्कि पूरी दुनिया को बचाने के लिए आगे आना होगा, अफवाहों पर ध्यान न दें आपस में मोहब्बत को बढ़ाइए ।
हज़रत ने कहा मुल्क में वहशी भेड़ियों की एक टोली घूम रही है जो ज़ुल्म के अंधेरे को कायम करना चाहती है ताकि अमन के उजाले को ख़तम कर दिया जाय, राजस्थान ,शब्बीरपुरा,दादरी ,हरियाणा इसी मंसूबे की कड़ियां हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि न कोई मुस्लिम हिन्दू से नफरत करता है न कोई हिन्दू मुसलमान से, न सिख ईसाई से, नफरत तो सियासत का घिनौना हथियार है जिसको मजहब का लिबास पहना कर ज़ुल्म किया जा रहा है। हज़रत ने कहा याद रखिए अगर ज़ुल्म के खिलाफ नहीं खड़े हुए तो आप भी मुजरिम हैं आप भी ज़ालिम साथ दे रहें है,लिहाज़ा मोहब्ब्त का दिया रोशन किजिए नफरत को नकार दीजिये ।हमारा पैग़ाम वही है मोहब्बत सबके लिए नफरत किसी से नहीं।
जलसे में मौलाना अली अहमद बिस्मिल अजीजी और मौलाना मकबूल सालिक मिस्बाही ने भी अपने ख्यालात का इजहार किया।

By: यूनुस मोहानी

पैग़म्बर -ए-अमन की तालीम पर अमल से ही दुनिया में अमन मुमकिन : सय्यद मोहम्मद अशरफ

कोलकाता/1दिसंबर
पैग़म्बर –ए-अमन की तालीम पर अमल सेे ही दुनिया में अमन मुमकिन है, यह बात एक जश्ने ईद मिलादुन्नबी प्रोग्राम में शिरकत करने कोलकाता आए आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने कहीं। उन्होंने आक़ा अलैहिस्सलाम की एक हदीस बयान की ”तुम्हारे शर (उत्पीड़न)से अगर तुम्हारा पड़ोसी सुरक्षित नहीं है तो तुम मोमिन नहीं हो सकते” और कहा कि अगर पूरी दुनिया इस पर अमल कर ले तो पूरी दुनिया में अमन कायम हो सकता है, क्योंकि एक इंसान दूसरे इंसान का पड़ोसी है, इसी तरह एक मोहल्ला दूसरे मोहल्ले के, एक गांव दूसरे गांव का, शहर दूसरे शहर का, एक प्रदेश दूसरे प्रदेश का, एक देश दूसरे देश का, इस तरह पूरी दुनिया एक दूसरे की पड़ोसी है, लिहाज़ा न किसी फौज की ज़रूरत होगी, न सुरक्षा की, न हथियारों की और यह धन स्वास्थ्य और शिक्षा पर खर्च होगा और दुनिया में अमन क़ायम हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि सबलोग मिलकर आक़ा की यौमे मीलाद मनाएं, इस दिन को यौमे अमन के तौर पर मनाया जाये, लोग मज़लूमों, ग़रीबों,बीमारों और यतीमों की खूब मदद करें और मज़हब और संप्रदाय देखे बिना लोगों की मदद करते रहें।
उधर बोर्ड के ऐलान पर पूरे भारत में आज बोर्ड की यूनिट में वृक्षारोपण का कार्यक्रम संपन्न हुआ, इसी क्रम में महाराजगंज शाखा में भी वृक्षारोपण कार्यक्रम संपन्न हुआ. इस मौके पर मुख्य मोहम्मद इद्रीस अशरफ़ी, रफ़ीक़ अशरफ़ी, इम्तियाज कुरैशी, मोबीन अशरफ़ी, गुलाम रसूल, मोहम्मद सलीम, फरमान कुरैशी, रशीद मोहम्मद साहब और शमीम अशरफ़ी मौजूद रहे।

By: यूनुस मोहानी

मज़लूमों की मदद है आक़ा अलैहिस्सलाम की मीलाद मानने का तरीक़ा : सय्यद मोहम्मद अशरफ

पूना/30 नवंबर
मज़लूमों की मदद है आका अलैहिस्सलाम की मीलाद मनाने का एक तरीक़ा, यह बात आल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने पूना में आयोजित एक धर्मसभा में कहीं,हज़रत ने कहा कि मुस्तफा करीम सल्ललल्लाहू अलैहि वसल्लम की मीलाद से मज़लूमों को ज़ुल्म से निजात मिली, गुमराहियों के घनघोर अंधेरों से छुटकारा मिला और तौहीद की रोशनी नसीब हुई, जहां खुद से खुद पर किए जा रहे ज़ुल्म से इस तरह निजात मिली वहीं ज़ालिमों के ज़ुल्म से भी लोगों को आजादी मिली, औरतों, यतीमों, गरीबों और मिस्कीनो को इज्जत से ज़िन्दगी गुजारने की आज़ादी और अधिकार मिले, यानी आक़ा की मीलाद से मज़लूमों को ज़ुल्म से निजात मिली, लिहाज़ा हमें इसे यौमे अमन के तौर पर मनाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि बेहतर से बेहतर तरीक़े से हमें लोगों तक मदद पहुंचाना चाहिए, लोगों की ज़रूरतों का ख्याल रखा जाना चाहिए, यातीमों ,बेवाओं,गरीबों का ख्याल रखिए, बीमारों की अयादत कीजिए, महफ़िल सजाइए, लोगों में खाना बांटिए, दुरूद और सलाम की महफ़िल कीजिए, जुलूस निकालिये लेकिन ख्याल रहे कि यह रहमते आलम की मीलाद का जुलूस है, किसी को कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए, अपने घर और मोहल्ले को साफ सुथरा कीजिए और सबको इस जश्न में शामिल होने की दावत दीजिए।
हज़रत किछौछवी ने हरे झंडे के साथ हर मज़हबी जलसे जुलूस में मुल्क के झंडे तिरंगे को शामिल करने की अपील भी की। आल इंडिया उलमा व मशाइख़ बोर्ड के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य हज़रत अम्मार अहमद अहमदी उर्फ नय्यर मियां की सरपरस्ती में दिल्ली के जोघाबाई एक्सटेंशन पर गरीबों को गरम कपड़े बांटे, इस मौक़े पर बोर्ड के राष्ट्रीय सचिव सय्यद हसन जामी, यूनुस मोहानी ,मौलाना मुख्तार अशरफ, अंजर अल्वी मौजूद रहे। बोर्ड के ऐलान के मुताबिक बोर्ड की हर शाखा इस काम को कर रही है, बोर्ड के अध्यक्ष के ऐलान पर पूरे देश में मीलाद को यौमे अमन के तौर पर मनाया जा रहा है।
By: यूनुस मोहानी

मज़हब मोहब्बत सिखाता है नफरत नहीं : सय्यद मोहम्मद अशरफ

संभल/19 नवंबर

मज़हब मोहब्बत सिखाता है नफरत नहीं, यह बात हज़रत इमाम हसन की शहादत के मौके पर आयोजित एक धर्मसभा में आल इंडिया उलेमा व मशायख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने कहीं उन्होंने कहा हर धर्म मोहब्बत का पैग़ाम देता है तो फिर धर्म के नाम पर नफरत फैलाने वाले यह लोग कौन है ? आखिर मजहब के नाम पर खून बहाने वाले भोले भाले लोगों को किस तरह गुमराह कर पा रहे हैं ?
उन्होंने कहा कि यह इसलिए कामयाब हो पा रहे हैं क्योंकि हम मजहब को समझना ही नहीं चाहते हम झूठ और फरेब का शिकार हैं लोग हमें हर तरह फरेब दे रहे हैं यहां तक कि हम इबादतगाहों के विवाद में उलझे हुए हैं जब दुनिया दूसरे गृह पर बसने की बात कर रही है उस दौर में हमारा यह हाल है ।
हज़रत ने कहा हमें अपने बुजुर्गों से सीखना होगा कि मुश्किल दौर में किस तरह अमन कायम किया जाए यही तालीम हमें हज़रत इमाम हसन मुज्तबा अलहिससलाम की ज़िन्दगी में मिलती है आपने बताया कि किस तरह अमन को कायम करने के लिए कुर्बानी दी जाय ।आज इस दौर के किसी हुक्मरान में यह हिम्मत नहीं कि अगर अमन और सत्ता में से उसे कोई एक चुनना हो तो वह अमन चुने और अमन को कायम करने के लिए सत्ता को त्याग दे यह अमल इमाम का ही है और हमारी ज़िम्मेदारी है कि इसे अपनी ज़िन्दगी में उतारे तभी हम इस दुनिया को शांति का गहवारा बनाए रख सकते हैं ।
“मोहब्बत सबके लिए नफरत किसी से नहीं “यह संदेश हज़रत इमाम हसन अलैहस्सलाम की ज़िन्दगी में मिलता है आपने अपने क़ातिल का बदला भी अपने रब पर छोड़ दिया और अमन के लिए अज़ीम कुर्बानी पेश की।

By: Yunus Mohani

इमामे हसन की पूरी ज़िन्दगी पैग़ामे अमन है : सय्यद मोहम्मद अशरफ

संभल/18 नवम्बर

इमामे हसन मुजतबा की पूरी ज़िन्दगी पैग़ामे अमन है, यह बात आल इंडिया उलमा व मशाइख़ बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने संभल में हज़रत इमाम हसन अलैहिस्सलाम  की शहादत पर हुए एक जलसे में कही.

हज़रत ने इमाम हसन की ज़िन्दगी पर रौशनी डालते हुए बताया की जब इमाम को ज़हर दे दिया गया और आपके छोटे भाई हज़रत इमाम हुसैन आपके पास आए  तो आपने उनसे कहा कि  जिस पर मुझे शक है अगर वही मेरा क़ातिल है तो अल्लाह उसकी पकड़ करेगा वरना मैं सिर्फ अपने शक की वजह से पूरी उम्मत को बवाल में नहीं डाल सकता, ऐसी हालत में भी हज़रत इमाम ने लोगों के बीच मिसाल पेश की और बता दिया की रहती दुनिया तक यही अमल है जिससे अमन क़ायम किया जाएगा .

एक तरफ कर्बला है जहाँ इमाम सर दे कर दीन को बचा रहे हैं और एक तरफ हज़रत इमामे हसन की शहादत है, दोनों ही शहादतें अज़ीम हैं, अब लोग इमामे हुसैन अलैहिस्सलाम की शहादत का ज़िक्र तो करते हैं लेकिन इमाम हसन की शहादत का ज़िक्र नहीं होता जो ज़ुल्म है.

हज़रत इमाम हसन मुजतबा ने जो रास्ता दिखाया वह यह है की सुलह के ज़रिये अगर अमन क़ायम हो सकता है तो कोशिश करो और इमाम हुसैन ने बताया जब ज़ालिम दीन को तबाह करने पर आ जाए  तो सर देने में भी गुरेज़ न करो .

आज हमारे पास दोनों ही मिसालें हैं. हमें हर हाल में अमन के लिए काम करना होगा. अगर उसका रास्ता सुलह से निकलता है तो सुलह की जानी चाहिए. यह हज़रत इमामे हसन मुजतबा की पैरवी है और अगर ज़ुल्म नहीं रुकता और ज़ालिम बढ़ता ही जाता है तो क़ुरबानी पेश कीजिये लेकिन हर हाल में मक़सद ए अमन को क़ायम  होना चाहिए .

ज़ुल्म सिर्फ किसी कमज़ोर को सताना नहीं है, ज़ुल्म ज़ालिम का साथ देना भी है, लिहाज़ा होशियार रहिये ,अमन का पैग़ाम आम कीजिये, मोहब्बतों वाली बयार बहनी चाहिए, सबको अपनी ज़िन्दगी इस बात पर जीनी है कि ”मोहब्बत सबके लिए नफरत किसी से नहीं”

इबादतगाहें शांति प्राप्त करने के लिए हैं लड़ाने का सामान नहीं: सय्यद मोहम्मद अशरफ

रत्नागिरी/15 नवम्बर

इबादतगाहें शांति प्राप्त करने के लिए हैं लड़ाने का सामान नहीं हैं इन विचारों को आल इंडिया उलमा व मशायिख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने एक जलसे को सम्बोधित करते हुए रखा उन्होंने कहा लोग दुनिया से ऊब कर सुकून हासिल करने के लिए इबादतगाहों का रुख करते हैं ताकि अपनी आत्मा को शांत कर सकें जो परवरदिगार की इबादत से ही मुमकिन है लेकिन अफ़सोस सियासत ने इबादतगाहों को लड़ाने का सामान बना दिया है उन्होंने यह बात मौजूदा समय में बाबरी मस्जिद और राम मंदिर विवाद को लेकर चल रही सरगर्मियों के सम्बन्ध में कही .

हज़रत ने कहा कि कभी कोई धर्म हिंसा की शिक्षा नहीं देता तो फिर धर्म के नाम पर हिंसक तांडव करने वाले यह लोग कौन हैं किसी भी हाल में इनका किसी भी मज़हब से सम्बन्ध नहीं हो सकता क्योंकि जो इंसान ही नहीं है उसका धर्म से क्या लेना देना धर्म आदमी को इंसान बनाता है और इस वक़्त समाज को इंसानों की ज़रूरत है हैवान सिर्फ विनाश कर सकते हैं हमे सचेत रहना होगा जो नफरत की बात करे उससे होशियार रहिये .

उन्होंने कहा देश तभी आगे बढ़ सकता है जब लोग डरे हुए न हों ,लोगों में मोहब्बत हो और एक साथ मिलकर काम करने का आगे बढ़ने का जुनून हो .सूफिया ने हमेशा जोड़ने का काम किया उन्होंने नफरतों को समाप्त कर मोहब्बत करने वालों का समाज बनाया यही वजह है आज भी उनके आस्तानो पर बिना धर्म-जाति के भेद के लोग आते हैं और अपनी अकीदतों के फूल चढाते हैं .

आज भी समाज को बिखराव से बचाने की ज़रूरत है हमे सियासत की गन्दी चालों से बचना होगा धर्मान्धता की अफीम के नशे में नहीं रहना होगा तभी हमारा सुरक्षित रहना संभव है .हज़रत ने साफ़ कहा कि इबादतगाहें मोहब्बतों को बढ़ावा देने के लिए हैं इन्हें नफरतों की गंदगी से बचा लीजिये और समाज में मोहब्बत सबके लिए नफरत किसी से नहीं के सन्देश को आम कीजिये .

इमाम हसन को खलीफा ए राशिद न मानना ज़ुल्म: मौलाना इश्तियाक क़ादरी

लखनऊ 12 नवंबर

ऑल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड के प्रांतीय कार्यालय लखनऊ में ज़िक्रे शहादत इमाम हसन मुजतबा की एक महफ़िल सैयद हम्माद अशरफ (महासचिव AIUMB यूपी) की अध्यक्षता में आयोजित हुयी। महफ़िल को ख़िताब करते हुए मौलाना इश्तियाक अहमद (सदर AIUMB लखनऊ) ने कहा कि इमाम हसन सरदार हैं, आपने हज़रत अमीर मुआविया से सुलह कर अपने नानाजान हुज़ूर ﷺ के इस फरमान को अमलन पूरा किया कि मेरा यह बेटा सरदार है। मैं तुम्हें यक़ीन से बताता हूँ कि मेरा ये बेटा भविष्य में मुसलमानों के दो समूहों के बीच सुलह कराएगा और तफरका ख़त्म करके उम्मत को मुत्तहिद करेगा। हज़रत इमाम हसन ने खिलाफते राशिदा से दस्तबरदार होकर मुसलमानों के हक़ के लिए अज़ीम ईसार पेश किया।
मौलाना ने हदीस पैगंबर ” मेरी उम्मत में खिलाफत तीस साल तक रहेगी फिर बादशाहत हो जाएगी ” का हवाला देते हुए कहा कि हज़रत अबूबकर सिद्दीक़ रज़ियल्लाहु अन्हु की आग़ाज़े खिलाफत से लेकर हज़रत इमाम हसन अलैिस्सलाम के इख्तेतामे खिलाफत तक कुल तीस साल बनते हैं। खलीफा राशिदीन का जिक्र करते हुए युवा पीढ़ी को केवल चार खलीफा के बारे में बताना और पांचवें खलीफा राशिद अमीरुल मोमिनीन हज़रत इमाम हसन मुजतबा अलैहिस्सलाम और उनके दौरे खिलाफ़त को सिरे से नकारना सरासर ज़ुल्म है।
मौलाना आले रसूल अहमद ने इमाम हसन रज़ियल्लाहु अन्हु के मनाक़िब बयान करते हुए कहा कि हज़रत इमाम हसन सर से सीना तक और हज़रत इमाम हुसैन सीना से पैर तक हुज़ूर ﷺ की कामिल शबीह थे। आप ने मदीना से मक्का पैदल चलकर 25 हज अदा फरमाए।
हज़रत इमाम हसन बेहद सखी थे आपने दो मरतबा अपना सारा माल और तीन बार आधा माल राहे खुदा में खर्च फ़रमाया था।
महफ़िल में रमजान अली, मोहम्मद तौफ़ीक़, मोहम्मद असद, मोइन रज़ा, मोहम्मद हाशिम, मोहम्मद अहमद, शोएब अली, अब्दुल गनी, राजू वारसी, तारिक हुसैन, वसीम खान, मतीन बेग, मिहाजुल क़ुरान इंटरनेशनल, लखनऊ के ज़िम्मेदारों अलावा बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। महफ़िल का समापन सलाम और देश में अमन और खुशहाली की दुआ पर हुआ।

By: Yunus Mohani

مولانا نورالہدی مصباحی مخلص اور حق گو عالم دین تھے: اشتیاق احمد قادری

لکھنؤ۔۲نومبر

آل انڈیا علماء و مشایخ بورڈ لکھنو یونٹ کی جانب سے خلیفۂ حضوراشرف ملت، مولانا نورالہدی مصباحی بستوی کے انتقال پر تعزیتی نشست کا انعقاد بورڈ کے صوبائی دفتر نظر باغ میں سید حماد اشرف جنرل سیکرٹری AIUMB کی صدارت میں ہوا۔ پروگرام کاآغاز قاری علی احمد اشرفی نے تلاوت قرآن مجید سے کیا، حسیم و حسن صابری برادران نے نعت رسول کا نذرانہ پیش کیا۔ مولانا اشتیاق احمد قادری صدر AIUMB لکھنؤیونٹ نے خطاب کرتے ہوئے کہا کہ مولانا مرحوم صوم و صلوۃ کے نہایت پابند اور مثبت سوچ کے مالک تھے دین کی خدمت کے لئے ہر وقت تیار رہتے تھے۔ ان کی سب سے بڑی خوبی اور خاصیت تھی وہ تھی حق گوئی جس کا اعتراف سبھی کو ہے۔ پوروانچل میں AIUMB کے ایک مضبوط سپاہی تھے اوربورڈ کے حوالے سے بہت ہی متحرک اور فعال تھے۔
مولانا آل رسول احمد نے کہا کہ مولانا مرحوم کوخدانے جن خوبیوں سے نوازا تھا ان میں سے ا یک یہ کہ وہ دلوں کو جیتنے اور انہیں اپنا بنانے کا ہنر جانتے تھے۔اللہ تعالیٰ نے انہیں دینی وعصری علوم کے علاوہ ملی وسیاسی بصیرتوں سے بھی نواز اتھا۔مولانا موصوف حق گواورملت کادرد رکھتے تھے ان کی زندگی میں کئی اتار چڑھاؤ آئے مگر مولانا جو تھے وہی رہے ان میں کوئی تبدیلی نہ آئی وہ ہر کام اللہ ورسول کی رضا کے لئے کرتے تھے۔اس موقع پر قاری محمد صدیق قادری،محمداحسان اللہ، رمضان اشرفی ،مولانا ربانی فیضی ،مولانا منعم رضا فیضی ،حاجی عبد الواحد خان اور کثیر تعداد میں مدارس کے طلبہ موجود تھے۔

حسینیت نام ہے ظلم کے خلاف کھڑے ہونے کا:سید محمداشرف کچھوچھوی

کلیرشریف۔ہریدوار۔2نومبر

حسینیت نام ہے ظلم کے خلاف کھڑے ہونے کا۔امام حسین علیہ السلام نے ظلم کی علامت یزید کے خلاف اپنے چھ ماہ کے بیٹے حضرت علی اصغرسے لیکراپنے جوان بیٹے حضرت علی اکبررضی اللہ تعالیٰ عنہما تک کوقربان کردیا اورآخر میں خود بھی جام شہادت نوش فرمایا لیکن ظلم کی حمایت نہیں کی۔ امام حسین علیہ السلام سے محبت کرنے والے ہردورمیں ظلم کے خلاف آواز اٹھاتے رہے ہیں اورمظلوموں کے زخموں پرمرہم لگانے کاکام کرتے رہے ہیں۔ ظلم کے خلاف صبروشکر کی تعلیم دنیا قیامت تک امام حسین علیہ السلام سے سیکھتی رہے گی۔ ان خیالات کااظہار حضرت مولانا سید محمداشرف کچھوچھوی بانی وصدر آل انڈیا علماء ومشائخ بورڈ نے سلیم پور کلیر شریف میں ایک جلسہ بنام تاجدار کربلا کانفرنس کوخطاب کرتے ہوئے کیا۔
حضرت نے مزید کہاکہ ظالم کتنابھی طاقتورکیوں نہ ہو اس کی شکست یقینی ہے لیکن اس سے ڈر کراس کی حمایت کرناخلاف اسلام ہے۔ظلم صرف کسی کومار دینا ہی نہیں ہے بلکہ کسی کے حقوق کی پامالی بھی ظلم ہے۔نفرت ظلم ہے اورمحبت اسے مٹانے کاہتھیار لہذا محبت پھیلائیے اورنفرتوں کاخاتمہ کیجئے۔حسین والوں کایہی پیغام ہے کہ محبت سب کے لئے اورنفرت کسی سے نہیں۔
جلسہ کاآغازقاری غلام مرسلین سنبھلی کی تلاوت قرآن کریم سے ہوا۔ جناب ذوالفقار و سید انس نے نعت ومنقبت کے نذرانے پیش کئے۔ جلسہ کی صدارت قاری عاصم صابری نے کی اورنظامت کے فرائض قاری عرفان اشرفی نے انجام دئے۔دہلی سے آئے مولانا اشتیاق القادری نے صوفیاء و اولیا کی تعلیمات و روش کو اپناکر اسی پر عمل پیرا ہونے اور اسے عام کرنے پر زور دیا وہیں قاری مشرف اشرفی سنبھلی نے واقعات کربلا پر روشنی ڈالی۔
جلسہ کااختتام صلوٰۃ وسلام اورملک میں امن و امان کی دعاپرہوا۔جلسہ میں د پیر طریقت سید حسنین سیکری شریف،حکیم سید واصف میاں سہارنپوری ،حافط مہتاب قادری،محمدرفیع کے علاوہ کثیر تعدادمیں عوام موجود رہے۔