नफरत फैलाने वाले देश और मानवता के दुश्मनों से सतर्क रहने की ज़रूरत : सय्यद मोहम्मद अशरफ

नई दिल्ली:आल इण्डिया उलेमा मशाइख बोर्ड के संस्थापक अध्यछ हज़रत सय्यद मोहमम्द अशरफ किछौछवी ने आज महरौली शरीफ दिल्ली में हज़रत अशिकुल्लाह शाह रहमतउल्लाहअलहि के उर्स के मौके पर खिताब करते हुए कहा सुफिया का तरीका मोहब्बत का तरीका है नफरतों की इसमें कोई जगह नहीं है कोई किसी भी मज़हब का हो किसी भी फिक्र का हो सुफिया के यहाँ कोई रोक टोक नहीं सबको मोहब्बतों से नवाजना यही तरीक है बुजुर्गों का और इसी तरह इस्लाम की तबलीग की गयी .
हज़रत ने कहा यह दौर बहुत खतरनाक है हम सबको होशियार रहना होगा किसी को भी कानून हाथ में लेने का हक नहीं है हिन्दोस्तान सबका है और हम सब की ज़िम्मेदारी है इसकी हिफाज़त मुल्क में अमन के कयाम की सबसे ज्यादा ज़िम्मेदारी मुसलमानों की है क्योंकि हम वह कौम हैं जिसे दुनिया में अमन कायम करने के लिए, हक की तबलीग के लिए, ज़ुल्म की मुखालफत के लिए, भेजा गया है.
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में जिस तरह पैगम्बरे इस्लाम सल्लल्लाहुअलहिवसल्लम की शान में फेसबुक पर गुस्ताखी की गयी यह एक साजिश का हिस्सा है और इसकी जितनी भी निंदा की जाये वह कम है मोहसिने इंसानियत की शान में गुस्ताखी जहाँ नाकाबिले बर्दाश्त अमल है और यह बात नफरतों के सौदागर जानते हैं इसीलिए इस तरह का काम किया जाता है ताकि मुसलमान सड़कों पर आये और हिंसा फैलाई जा सके,वही हुआ लोगों ने कानून को हाथ में लिया और आगज़नी की जिससे बदअमनी फैली जो काबिले मज़म्मत है हिंसा करने वाला कोई भी हो उसे जायज़ नहीं ठहराया जा सकता लोगों को कानून का सहारा लेना चाहिए और दोषी को सजा दिलवाने के लिए कोशिश करनी चाहिए न की शहर के अमन को आग लगानी चाहिए .
हज़रत ने कहा हर हाल में हिंसा रुकनी चाहिए हर कीमत पर इसे रोका जाना चाहिए गुस्ताखे रसूल को कड़ी से कड़ी सज़ा मिलनी चाहिए उसे गिरफ्तार भी कर लिया गया है लोगों को सब्र से काम लेना चाहिए और किसी भी तरह कानून को हाथ में नहीं लेना चाहिए यह साजिशों का दौर है हमे बच के रहना होगा .
हज़रत ने साफ़ कहा कि आपको उकसाने की कोशिश की जाएगी इंसानियत की दुश्मन ताक़तें आपको गुस्सा दिलाने की कोशिश करेंगी आप मुल्क के संविधान पर भरोसा रखें और कानून का सहारा लें जितना मुमकिन हो सोशल मीडिया पर हो रही खुराफात से दूर रहें और इनकी रिपोर्ट करें मुल्क हमारा है इसकी हिफाज़त हमे करनी होगी .
इस मौके पर सैकड़ों अकीदतमंद मौजूद रहे सलातो सलाम के बाद कुल शरीफ हुआ और मुल्क में अमन और मुल्क की तरक्की की दुआ की गयी .

نفرت پھیلانے والے ملک اور انسانیت کے دشمنوں سے ہوشیاررہنے کی ضرورت:سید محمد اشرف کچھوچھوی

نئی دہلی: آل انڈیا علماء و مشائخ بورڈ کے بانی اور صدر حضرت مولانا سید محمد اشرف کچھوچھوی نے آج مہرولی شریف دہلی میں حضرت عاشق اللہ شاہ رحمۃ اللہ علیہ کے عرس کے موقعہ پر خطاب کرتے ہوئے کہا کہصوفیاء کرام کا طریقہ محبت کا طریقہ ہے ،نفرتوں کی اس میں کوئی جگہ نہیں ہے، کوئی کسی بھی مذہب کا ہو کسی بھی فکر کا ہوصوفیا کے یہاں کوئی روک ٹوک نہیں ،بزرگوں کا طریقہ سب کو محبتوں سے نوازنارہاہے اور اسی طرح اسلام کیتبلیغ کی گئی ہے۔
حضرت نے کہا یہ دور بہت خطرناک ہے ،ہم سب کو ہوشیار رہنا ہوگا ،کسی کو بھی قانون ہاتھ میں لینے کا کوئی حق نہیں ہیہ،ندوستان سب کا ہے اور ہم سب کی ذمہ داری ہے اس کی حفاظت کرنا ،ملک میں امن کے قیام کی سب سے زیادہ ذمہ داری مسلمانوں کی ہے کیونکہ ہم وہ قوم ہیں جسے دنیا میں امن قائم کرنے کے لئے، حق کیتبلیغ اور ظلم کی مخالفت کے لئے بھیجا گیا ہے۔
انہوں نے کہا کہ مغربی بنگال میں جس طرح پیغمبر اسلام حضرت محمد مصطفیٰ صلی اللہ علیہ وسلم کی شان میں فیس بک پر گستاخی کی گئی ،یہ ایک سازش کا حصہ ہے اور اس کی جتنی بھی مذمت کی جائے وہ کم ہے ،محسن انسانیت کی شان میں گستاخی جہاں ناقابل برداشت عمل ہے یہ بات نفرتوں کے سوداگر جانتے ہیں اسی لئے اس طرح کا کام کیا جاتا ہے تاکہ مسلمان سڑکوں پر آئے اور تشدد پھیلائی جا سکے، وہی ہوا اور لوگوں نے قانون کو ہاتھ میں لیا اور آگ زنی کی جس سے بدامنی پھیلی جو قابل مذمت ہے، تشددپھیلانے والا کوئی بھی ہو اسے جائز نہیں ٹھہرایا جا سکتا، لوگوں کو قانون کا سہارا لینا چاہئے اور مجرم کو سزا دلوانے کے لئے کوشش کرنی چاہئے نہ کی شہر کے امن کے لیے آگ لگائی جائے۔
حضرت نے کہا کہ ہر حال میں تشدد پر لگام لگائی جا ئے ،ہر قیمت پر اسے روکا جانا چاہئے، گستاخ رسول کو سخت سے سخت سزا ملنی چاہئے ،اسے گرفتار بھی کر لیا گیا ہے،مسلمانوں کو صبر سے کام لینا ہوگااور کسی بھی طرح قانون کو ہاتھ میں نہیں لینا ہے، یہ سازشوں کا دور ہے جس میں ہمیں بچ کے رہنا ہوگا۔
حضرت نے صاف کہا کہ آپ کو اکسانے کی کوشش کی جائے گی، انسانیت کی دشمن طاقتیں آپ کو غصہ دلانے کی کوشش کریں گی مگر آپ ملک کے آئین پر انحصار رکھیں اور قانون کا سہارا لیں، جتنا ممکن ہو سوشل میڈیا پر ہو رہی خرافات سے دور رہیں اور ان کی رپورٹ دیں، ملک ہمارا ہے اس کی حفاظت ہمیں کرنی ہوگی۔
اس موقعہ پر سینکڑوں عقیدت مند موجود رہے،صلوٰۃ و سلام کے بعد کل شریف ہوا اور ملک میں امن و امان اور ترقی کی دعا کی گئی۔

जुनैद जैसी घटनाएं देश में सदियों से स्थापित धार्मिक भाईचारे को चोट पहुंचा रही हैं। हज़रत सय्यद मोहममद अशरफ किछौछवी

देश में धार्मिक जुनून बहुत ज्यादा बढ़ गया है और अल्पसंख्यकों को बुरी तरह परेशान किया जा रहा है।

देश भर में साम्प्रदायिक और विशेषकर मुसलमानों के खिलाफ बढ़ती हुई घातक हिंसा की घटनाएं दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रहीं हैं. और ये सभी घटनाएं इस बात की ओर इशारा करती है कि देश एक खतरनाक दिशा की ओर अग्रसर है। देश के सबसे बड़े अल्पसंख्यक के लिए जीना दूभर किया जा रहा है। अब तो बात बात पर हमले किए जाते हैं और यहां तक कि हत्या कर दी जाती है।

मोहम्मद अखलाक का ग़म क्या कम था कि पहलू खान का मातम मनाना पड़ा। उनका शोक जारी ही था कि झारखंड में बच्चा चोरी के आरोप में नईम, सिराज और संजू को मौत की नींद सुला दिया गया। खून से लथपथ हाथ जोड़े हुए एक मुस्लिम युवक की तस्वीर अभी ज़हन से महव नहीं हुई थी कि राजस्थान के जफर हुसैन को धार्मिक जुनून की भेंट चढ़ा दिया गया।

अभी इस घटना की गूंज थमी भी नहीं थी कि जुनैद की बल्लभगढ़ में भीड़ ने पीटकर और चाकू मारकर हत्या कर दी. इसके अलावा भी ऐसी न जाने कितनी छोटे बड़ी घटनाएं घटित हो रहीं हैं जो सदियों से स्थापित धार्मिक भाईचारे की ईंट से ईंट बजा रहीं हैं। लेकिन इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए न तो कोई कोशिश की जाती है और न ही अपराधियों के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई की जाती है। बल्कि इसके विपरीत उन्हें प्रोत्साहित किया जाता है और परोक्ष रूप से उनकी सराहना भी होती है।

दूसरी तरफ सर्कार इस बात का ढिंढोरा पीट रही है कि पिछले तीन वर्षों में देश ने जबरदस्त प्रगति की है और सरकार ने ऐसे कार्य अंजाम दिए हैं जो 70 वर्षों में भी नहीं हुए थे। समझ में नहीं आता कि वह कौन सा कारनामा है जो क्रेडिट लेने के लिए मंत्रियों में होड़ लगी हुई है। बस यही एक उपलब्धि नज़र आती है कि देश में धार्मिक जुनून बहुत ज्यादा बढ़ गया है और अल्पसंख्यकों को बुरी तरह परेशान किया जा रहा है।

अपने बच्चों को दीनी तालीम से आरास्ता करें मुसलमान: मौलाना किछौछवी

संभल (उत्तर प्रदेश)
शिक्षा को इस्लाम में प्राथमिकता दी गई है और शिक्षा ग्रहण करना हर मुसलमान का कर्त्तव्य है। हमें चाहिए कि अपने बच्चों को दीनी तालीम से आरास्ता करें। तालीम हासिल करके ही व्यक्ति ज़लालत और गुमराही के अंधेरे से बच सकता है।इन विचारों को हज़रत मौलाना सैयद मोहम्मद अशरफ किछौछवी (संस्थापक एवं अध्यक्ष ऑल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड) ने सैफ खां सराय, संभल में ग़ौसुल आलम मेमोरियल एजुकेशनल सोसायटी द्वारा आयोजित दारुल उलूम ग़ौसुल आलम के दस्तारबंदी के मौके पर आयोजित एक सभा में किया। मौलाना किछौछवी ने कहा कि ज्ञान की रोशनी लेकर निकलने वाले प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि वह समाज में फैली बौद्धिक अंधेरे को दूर करें। नबवी शिक्षाओं की भरोसेमंद दस्तार का तकाजा है कि लोगों को अज्ञान के दलदल से निजात दिलाई जाए। उन्होंने कहा कि इसकी शुरुआत नैतिक रूप से परिपक्वता और मजबूती से करनी चाहिए। हर धर्म प्रचारक के लिए आवश्यक है कि पहले वह सीरते नबवी का अध्ययन करे उसके बाद प्रचार प्रसार का कार्य करे जिसे कुरान ने खुलके अज़ीम से याद किया है। नफरतों, तिरस्कार और मानव जाति के अपमान के बजाय सूफ़िया का व्यवहार यानी प्रेम, भाईचारे, सहानुभूति को बढ़ावा देने की सख्त जरूरत है। मुस्लिम क़ौम जहां धर्म से दूरी और बेरग़बती का शिकार होती जा रही है। खुद इसके लिए व्यावहारिक नमूना बनकर दूसरों को उसकी दावत देनी होगी। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि दीन सिर्फ शरई उलूम की पासदारी नहीं करता बल्कि उस पर अमल करने के लिए दुनियावी तक़ाज़ों कि की भरपाई की तरग़ीब देता है। सभा का आगाज़ कारी मोहम्मद शोएब अशरफी की तिलावत से हुआ। बदायूं से तशरीफ़ लाए कारी सैयद गुलाम अली अशरफी ने नात व मन्क़बत के नज़राने पेश किये। हज़रत मुफ्ती सैयद वसीम अशरफ बदायूंनी ने किताब व सुन्नत की रौशनी में फ़ज़ाइले अहले बैत पर ख़िताब किया। हज़रत अल्लामा मुफ्ती सईद वाक़िफ़ अली अशरफी (प्रिंसिपल जामिया सोफिया, किछौछा शरीफ) के अलावा अन्य स्थानीय-उलमा ने भी नसीहत में बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। जलसा की क़यादत हजरत मौलाना हाफ़िज़ सखावत हुसैन अशरफी ने फ़रमाई और सञ्चालन कारी राहत अली अशरफी ने किया। बैठक में शकील अहमद अधिवक्ता (महासचिव संभल अयूब) मौलाना खलील, कारी आमिर अशरफी , कारी एहसान, कारी गुलजार अहमद, मोहम्मद इरफ़ान अशरफी, हाजी रियाज़ुल हुसैन, हाफिज अब्दुल कादिर, मोहम्मद शादाब, मोहम्मद आदिल , अब्दुल गफ्फार अशरफी, हाफिज कमर आलम के अलावा हजारों की तादाद में फरज़नदान तौहीद ने शिरकत फरमाई। जलसा का समापन सलात सलाम और देश में शांति और खुशहाली की दुआ पर हुआ।

मदरसे दीन का क़िला हैं,यहाँ से हमेशा शांति व भाई चारे का पैगाम दिया गया है

सैयद मोहम्मद अशरफ किछौछवी
सूफ़िया ए किराम ने दुनिया के सामने धर्म का प्रचार करने के लिए सुन्नते रसूल ﷺका अहसन तरीक़ा पेश किया। उन्होंने भारतीय सभ्यता और संस्कृति अपनायी और लोगों के साथ प्यार, मोहब्बत और ख़ुलूस का बर्ताव किया और आपके पास आने वाले से उसके धर्म और जाती न पूछते हुए उसके दुःख दर्द को दूर करने की कोशिश की। यही कारण है कि उनके किरदार और अख़लाक़ की बदौलत लाखों की संख्या में लोगों ने इस्लाम क़ुबूल किया।
उक्त विचार हज़रत मौलाना सैयद मोहम्मद अशरफ किछौछवी (संस्थापक एंव अध्यक्ष आल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड) ने कलियर शरीफ में अल जामिया तुल अशरफ़ीअ ज़िया ए मखदूम के संगे बुनियाद के अवसर पर जलसा को संबोधित करते हुए व्यक्त किये।
उन्होंने मुसलमानों के पिछड़ेपन का ज़िक्र करते हुए कहा कि हमारी इस बुरी दशा का कारण क़ुरआन व हदीस की शिक्षाओं का पालन न करना है। सूफ़ी विद्वानों ने प्रेम, भाईचारे, और मानव सेवा का जो पाठ पढ़ाया है उस पर अमल करके ही हम सफलता की राह पर अग्रसर हो सकते हैं।
मौलाना किछौछवी ने कहा कि हमारी ज़िम्मेदारी है कि बुज़ुर्गाने दीन ने इस्लाम की जिन शिक्षाओं को हम तक पहुँचाया है उन पर अमल करें और अपने किरदार व अमल द्वारा इस्लाम की सही तस्वीर पेश करें। मौलाना ने ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ का कथन ”मुहब्बत सबके लिए नफरत किसी से नहीं”का हवाला देते हुए कहा कि हमें शांति, प्रेम और भाईचारे का वातावरण बनाये रखना है और देश के विकास और खुशहाली में अपना रोल अदा करना है।
क़ारी मुशर्रफ हुसैन ने कहा कि मदरसे दीन का क़िला हैं और दीन की तब्लीग में उनका महत्वपूर्ण चरित्र है। मदरसों ने बुज़ुर्गाने दीन के मिशन को जारी रखा है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इंशा अल्लाह आने वाले समय में अल जामिया तुल अशरफ़ीअ ज़िया ए मखदूम भी दीन व सुन्नियत के प्रचार व प्रसार में अपना महत्वपूर्ण रोल अदा करेगा।
सभा का आग़ाज़ क़ारी इरशाद की तिलावत से हुआ, सञ्चालन क़ारी इरफान अशरफी ने अंजाम दिया। क़ारी मुर्सलीन ने नात का नज़राना पेश किया। क़ारी आसिम अशरफी (व्यवस्थापक) ने आने वाले मेहमानों को धन्यवाद् ज्ञापित किया। जलसा में अली शान, आज़ाद साबरी, अली खान, इकरार खान आदि के अलावा बड़ी संख्या में लोग मोजूद रहे। सभा का समापन सलात व सलाम और देश में समृद्धि और शांति की विशेष दुआ पर हुआ।

होशियार रहिये लोग चोला बदल रहे हैं -सय्यद मोहमम्द अशरफ

नेपाल :आल इंडिया उलमा व मशाईख़  बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष  हज़रत मौलाना सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछ्वी एक जलसे को सम्बोधित  करने नेपाल बॉर्डर पहुंचे! उन्होंने वहां लोगों से मुलाक़ात की, उनके हालात जाने, उनकी परेशानियाँ सुनीं  और उन्हें सरकार  तक पहुँचाने  का वादा किया, उसके बाद उन्होंने जलसे से अवाम को सम्बोधित  किया !
हज़रत ने जलसे को खिताब करते हुए कहा कि मुसलमानों को अपना किरदार पेश करना होगा, ज़ुल्म ख़ुद बखुद हार जायेगा लेकिन अफ़सोस की बात है कि आज हम अमल से दूर हैं, हमें दुनिया को अपने किरदार द्वारा बताना होगा कि इस्लाम मोहब्बत का धर्म है ,न कि शर का ! इसलिए  हम सब की ज़िम्मेदारी बनती है कि लोगों के काम आयें और  बिना किसी भेदभाव  के सबके दुःख सुख में खड़े होकर  उनकी मदद करें और अपने देश से  बेपनाह मोहब्बत करें क्योंकि हमारे आक़ा  जनाब मोहम्माद मुस्तफा   सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया कि अपने देश  से मोहब्बत करना आधा ईमान है !
हज़रत ने कहा कि आपको होशियार रहना होगा क्योंकि लोग अब अपना भेष बदल रहे हैं, उनकी कोशिश है कि किसी तरह आपके बीच घुस कर आपको नुक़सान  पहुँचाया जाये! आल इंडिया उलमा व मशाईख़  बोर्ड शासन और प्रशासन को लगातार बता रहा है कि लोग अब धोखा देने के लिए नए नए पैंतरे अपना रहे हैं, जिनका अक़ीदा ही वसीले पर नहीं हैं वह अपना रिश्ता ख्वाजा ग़रीब नवाज़ से जोड़ रहे हैं !
हज़रत किछौछवी ने कहा कि जब आल इंडिया उलमा व मशाईख़ बोर्ड ने इनकी हक़ीक़त खोल दी तो अब यह लोग फरेब दे रहे हैं ! इसलिए  अब होशियार रहने की ज़रूरत है,क्योंकि अगर हम धोका खाया  तो नुक़सान  बड़ा होगा ! अमन क़ायम करने की और इसे महफूज़ रखने की ज़िम्मेदारी हम मुसलमानों की है और यह सिर्फ तब ही मुमकिन है जब हम सिर्फ मोहब्बत वाले बन जाएँ, आपसी रंज़िशों को   खतम कर दीजिये, आपसी मनमुटाव मिटा दीजिये, मुसलमान मोहब्बत वाला होता है, नफरत का तो इस्लाम से रिश्ता ही नहीं है ! सब तक यह पैग़ाम आम कीजिए “मोहब्बत सबके लिए नफरत किसी से नहीं ” जलसे का समापन सलातो सलाम के बाद देश  में अमन की दुआ के साथ हुआ !

सब्र शुक्र और मोहब्बत मोमिनों के यही हथियार हैं -सय्यद मोहम्मद अशरफ

नवगढ़:ऑल इंडिया उलमा व मशाईख़  बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष  सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी आज एक जलसे में शिरकत करने सिद्धार्थनगर के नवगढ पहुंचे यहाँ उन्होंने जनसमूह को खिताब करते हुए कहा कि मुसलमानों  को हर समय  तीन बातों का ख्याल  रखना चाहिए, न सिर्फ मुसलमानों को अगर सभी इस बात का ख्याल रखें तो देश  में अमन के दुश्मन नहीं कामयाब हो सकते, हज़रत ने कहा कि सब्र शुक्र और मोहब्बत यही वह तीन बातें  हैं ।
हज़रत ने अवाम  को आगाह किया कि लोग हमारे देश  पर बुरी नज़र लगाए हुए हैं, वह हमें  आपस में लड़वाना चाहते हैं ताकि हमारे देश  का अमन खतरे में पढ़ जाये और हम विकास न कर पाएं, अब यह देखना होगा कि कौन हैं वह लोग जो अमन खतरे में डालना चाहते हैं । हमें  एकजुट होकर उनका मोहब्बतों से मुक़ाबला करना है, हमारे पास सब्र शुक्र  और मोहब्बत के तीन हथियार हैं जिससे हम इन्हें हरा देंगे ।
हज़रत किछौछवी ने कहा कि हमें  हरगिज़ ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए जिससे किसी और की धार्मिक भावनाओं को चोट पहुंचे, उन्होंने साफ़ तौर पर कहा कि गाय के ज़बीहे पर पूरी तरह रोक लगनी चाहिए, हम सरकार  से माँग करते हैं  कि इसे मुकम्मल तौर पर पूरे देश में बंद किया जाए, उन्होंने लोगों से कहा कि अल्लाह के रसूल जनाब हज़रत मोहम्मद मुस्तफा  सल्लल्लाहु अलैहि वस्सल्लम ने फ़रमाया कि गाय के गोश्त में बीमारी है और इसका दूध दवा और इसके घी में शिफा है तो बीमारी की तरफ क्यों बढ़ा जाए बल्कि  उससे बाज़ आया जाए  अगर कोई सरफिरा ऐसा करता है तो उसे रोका जाना चाहिए ।
हज़रत ने आगे कहा कि मोहब्बतों को आम कीजिए,  हर इंसान कि मदद कीजिए, बिना मज़हब और मिल्लत का फ़र्क़ किए  यहाँ तक कि जानवरों के साथ भी नरमी बरतना इस्लाम है। हज़रत ने अंत  में कहा कि हम वही पैग़ाम लेकर आए जो  हज़रत ख्वाजा गरीब नवाज़ ने दिया जो इस्लाम की असल तालीम भी है यानि ‘मोहब्बत सबके लिए नफरत किसी से नहीं’ सबको इसी पर अमल करना होगा, यही कामयाबी है। प्रोग्राम  का समापन सलात व सलाम के बाद देश और दुनिया में अमन की दुआ के साथ हुआ।

ईद मीलादुन्नबी किसी धर्म के लिए नहीं, पूरी इंसानियत के लिए ख़ुशी का दिन-सय्यद अशरफ

लखनऊ(28 अप्रेल 2017)

इस्लाम शांती और सलामती का धर्म है और हज़रत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्ल्म
तमाम इंसानों के पैग़ंबर हैं! इसलिए  ईद-मीलादुन्नबी को किसी धर्म से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए, यह पूरी इंसानियत के लिए ख़ुशी का मौक़ा है। सूफ़ियाए किराम  ने भी हुज़ूर ﷺ की शांति , आपसी सहिष्णुता और  मोहब्बत की शिक्षाओं को आम किया है। यही कारण है कि उनके जीवन के किसी कोने में घृणा का नाम व निशान तक नहीं मिलता, उन्होंने हर अच्छे और बुरे को अपने पास बिठाया और अपनी शिक्षाओं और प्रेम द्वारा उसे प्यार करने वाला बना दिया! हक़ीक़त  में इस्लाम की उज्ज्वल शिक्षाओं द्वारा ही समाज से घृणा और आतंक  के वातावरण को समाप्त किया जा सकता है! इन विचारों को आल इंडिया उलमा व मशाइख़ बोर्ड के संस्थापक और राष्ट्रीय अध्यक्ष  हज़रत मौलाना सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने लखनऊ कार्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए रखा। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने साफ़ कहा कि हम भी मानते हैं कि छुट्टियों से काम प्रभावित होता है इसलिए इन्हें  कम किया जाना चाहिए लेकिन ईद मीलादुन्नबी की  छुट्टी समाप्त करना सही निर्णय नहीं है क्योंकि यह त्यौहार शांति का त्यौहार है,शांतिपूर्ण  तौर पर इसे मनाया जाता है।
हज़रत ने कहा ” मुसलमानों की ज़िम्मेदारी है कि इस्लामी शिक्षाओं को अपने  जीवन के हर क्षेत्र में अपनाएं , ज्ञान प्राप्त करें, दूसरों की भावनाओं का ख्याल रख्खें, तनाव का माहौल उत्पन्न न होने दें और मोहब्बत का पैग़ाम आम करें।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए सय्यद शादान शिकोही (प्रदेश अध्यछ ) ने कहा कि किसी भी संगठन की शक्ति उसके सदस्य होते हैं, इसलिए  हमें सदस्यता अभियान पर विशेष ध्यान देने की ज़रूरत है। उन्होंने बोर्ड की तहसील स्तर तक इकाइयों के बनाये जाने पर ज़ोर दिया और उम्मीद जताई कि जल्द ही ज़िला शाखाओं से यह काम शुरू कर दिया जाऐगा । उन्होंने सुझाव दिया कि घृणा और आतंक के वातावरण में एक समीति का गठन किया जाऐ जिसमें सभी धर्मों के लोगों की भागीदारी हो जो सूफ़ी शांति संदेश को जन जन तक पहुंचाएं! उनके इस सुझाव का भी लोगों ने स्वागत किया।
हज़रत मौलाना मक़बूल अहमद सालिक मिस्बाही  ने बोर्ड के उद्देश्यों और कार्यक्रमों को लोगों तक पहुंचाने के लिए एक मासिक पत्रिका शुरू किये जाने का प्रस्ताव रखा जिस पर बोर्ड के अध्यक्ष ने कहा कि इंशाअल्लाह जल्द ही  ग़ौसुल आलम मासिक उर्दू में और सूफी विज़न नाम से अंग्रेजी में मासिक निकाला जाएगा जिसकी तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं।
मुफ़्ती सय्यद अज़बर अली ने भी ईद मीलादुन्नबी की छुट्टी को खत्म किये जाने पर अफ़सोस ज़ाहिर किया!
बैठक में मस्जिदों के इमामों की  समस्याओं पर विचार किया गया और यह प्रस्ताव किया गया कि  मस्जिद के इमामों का एक संगठन बनाया जाये जिसके तहत मस्जिद के इमामों के लिए प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित किया जाए और उनकी समस्याओं को दूर करने का प्रयास किया जाये जिससे  उनकी आर्थिक समस्याओं  के समाधान  में मदद मिल सके।
बैठक में सय्यद हम्माद अशरफ किछौछवी (प्रदेश सचिव),सय्यद सिराज अशरफ ,मौलाना इश्तियाक क़ादरी (लखनऊ ज़िला अध्यक्ष ) हाफिज़  मुबीन अहमद (सदर बरेली), क़ारी मोहम्मद अहमद बक़ाई, क़ारी मोईनुद्दीन, मुफ्ती सय्यद निसार अहमद, सय्यद इज़हार मुराद , मौलाना गुलाम रब्बानी, मौलाना हसीब मिस्बाही, मुफ्ती नसीम अख्तर अशरफी ,निगार आलम , क़ारी इरफान अहमद संभली, एडवोकेट हाशमी, मोहम्मद आलम ,असद कुरैशी , अब्दुर्रहमान मौजूद रहे! बैठक का समापन सलाम, देश में शांति और व्यवस्था की दुआ पर हुआ।

Pictures: AIUMB Protest all over India and condemns terror attack on Uri and demands action against Pakistani Government

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Pictures: Protest and Press Conference against Zakir Naik and his Preaching:26th July’16

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