रीयल्टी पर बात हो रियूमर्स पर नहीं : सय्यद मोहम्मद अशरफ

27 दिसंबर 2020, नई दिल्ली
आल इंडिया उलमा मशाईख बोर्ड के अध्यक्ष एवम वर्ल्ड सूफ़ी फोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने देश में कोरोना वैक्सीन को लेकर मचे बवाल पर कहा है कि किसी को भी अफवाहों पर ध्यान नहीं देना चाहिए बल्कि हकीकत पर बात होनी चाहिए ,मुंबई में एक मुस्लिम संगठन द्वारा यह बहस छेड़ी गई है कि जो वैक्सीन भारत में आ रही है उसमें इस्लाम में हराम की गई चीज़ों को इस्तेमाल किया गया है,इस बात से एक नई बात निकल पड़ी है।
हालांकि यह सवाल इंडोनेशिया से उठा जहां चीन में निर्मित कोरोना वैक्सीन का इस्तेमाल किया जाना है क्योंकि यह कहा जा रहा है कि उस वैक्सीन में इस्लाम में हराम पोर्क बेस्ड जिलेटिन का इस्तेमाल हुआ है लिहाज़ा इस वजह से मुसलमान इसे नहीं लगवा सकते और यही बहस हमारे मुल्क में आ पहुंची है जबकि हमारे यहां अभी चीन में निर्मित वैक्सीन को आयात करने का कोई फैसला नहीं हुआ है ,लिहाज़ा इस बहस का अभी कोई औचित्य नहीं है।
उन्होंने कहा लेकिन यह ज़रूरी है कि जो वैक्सीन भारत के लोगों को दी जानी है उसका कंपोजीशन लोगों को बताया जाये यह जानने का उनका हक़ है ,अगर ऐसी बात कही जा रही है तो उसमें कोई बुराई नहीं है क्योंकि हर दवा की पैकिंग पर उसमें इस्तेमाल की जाने वाली चीजों को लिखा जाता है अगर ऐसा कोई मामला है तो इसे भी लोगों को बता दिया जाना चाहिए इसमें कोई बुराई नहीं है।
हज़रत ने कहा लेकिन इसे विवाद का विषय बनाने का काम किसी को भी नहीं करना चाहिए क्योंकि इस वक्त इस महामारी से निपटने के लिए जो भी ज़रूरी है किया जाना है, क्योंकि जान बचाना फ़र्ज़ है और जान पर अगर बन आती है और इसके सिवा कोई विकल्प मौजूद नहीं है तो इसे है लगवाना होगा ,इसलिए इस पर पहले तहकीक होनी चाहिए फिर कोई बात कहनी चाहिए जोश में की गई बातों से सिर्फ समाज में गुमराही फैलती है ।
इससे पहले भी इस तरह के विवाद हो चुके हैं जब एक आयु्वेदिक दवा बनाने वाली कम्पनी के उत्पादों में मानव अस्थियों के प्रयोग की बात आई थी लिहाज़ा ऐसी कोई भी चीज जो हमारे जैन समुदाय के भाइयों ,हिन्दू समाज के लोगों और मुसलमानों के यहां धार्मिक रूप से वर्जित है उसका उपयोग किया गया है तो जानकारी देना आवश्यक है क्योंकि यह सभी की धार्मिक आस्था का सवाल भी है और अगर ऐसा कोई विकल्प मौजूद है जिसमें ऐसा तत्व शामिल नहीं है तो उसे प्राप्त करने का हक़ है वरना महामारी से निपटने के लिए जो भी आवश्यक होगा उसे सभी को लगवाना होगा ऐसे में किसी भी प्रकार का विवाद पैदा करना उचित नहीं होगा।अगर किसी बात पर सवाल उठा है तो उसकी हकीक़त भी बता दी जानी चाहिए इससे समाज में विश्वास बढ़ता है और सवाल का जवाब ना मिलने पर भ्रम फैलता है।

By: यूनुस मोहानी

सय्यद अफजल मियाँ देश के लिए गौरव थे : सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी

20, दिसंबर 2020, किछोछा, अम्बेडकर नगर
जामिया मिल्लिया इस्लामिया और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के पूर्व रजिस्ट्रार और एडीजी (IPS) भोपाल मध्य प्रदेश के सय्यद मोहम्मद अफजल मियां देश के लिए एक अहम शख्शियत थे। आप एक खुश अख़लाक़, एक साहिबे किरदार शख्शियत हमारे बीच से रुखसत हुई है। आप बहुत ही नेकदिल और रहमदिल अफसर थे। इतना ऊंचा पद संभालने के बावजूद आप विनम्र स्वभाव और सहनशीलता के प्रतीक थे। बेशक, आपका निधन न केवल जमात-ए-अहल-ए-सुन्नत बल्कि पूरे देश के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
उक्त बातें आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफी फोरम के चेयरमैन हजरत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने अपनी ख़ानक़ाह अशरफिया किछौछा मुकद्दसा में एक समारोह को संबोधित करते हुए व्यक्त की । हजरत ने कहा कि मरहूम अफ़ज़ल मियां देश की खिदमत के साथ-साथ दीनी तालीम से युवाओं को जोड़ने का उनका लक्ष्य निरंतर जारी था। देश की तरक्की और मज़लूमो को न्याय मिले इसलिए उन्होंने आईपीएस को चुना और समाज सेवा में जुट गए।
उन्होंने युवाओं को शिक्षित होकर ही उन मुकामों को हासिल करने का लक्ष्य बताया जिसके लिए आज का युवा सोच रखता है। दीनी तालीम के साथ साथ आज के हालात पर उनका विशेष ध्यान रहता था। निश्चित ही हम सबको यह कमी सदियों तक महसूस होगी। हज़रत सय्यद अफ़ज़ल मियाँ बरकाती मारहरवी का निधन एक बहुत बड़ी क्षति है जिसकी भरपाई मुश्किल है। हज़रत ने अंत में दुआ फ़रमाई की अल्लाह तआला आपके दरजात बुलन्द फरमाए और घर परिवार और अकीदतमंदों को सब्र अता फरमाए ,आमीन

By: नुरूलहुदा मिस्बाही। भारत डेली न्यूज

जिससे मुल्क में खुशहाली आती हो उस बात का समर्थन : सय्यद मोहम्मद अशरफ

13 दिसंबर,2020,नई दिल्ली,रविवार
आल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफ़ी फोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने एक बयान जारी कर कहा कि हम हर उस बात का समर्थन करते हैं जिससे देश के हर नागरिक को उसका हक़ मिलता हो और देश में खुशहाली आती हो।
उन्होंने कहा कि देश में जिस तरह देश का किसान सड़कों पर है और लगातार हुकूमत से कृषि बिल वापिस लेने की मांग की जा रही है उसमें सरकार और किसानों दोनों के जरिए अलग बात की जा रही है, जहां किसानों की बात है उनका मानना है कि यह देश के किसानों के हक़ में नहीं वहीं सरकार कह रही है कि यह किसानों को बहुत फायदा पहुंचाने वाला है,लेकिन सरकार ने काफी हद तक कानून में बदलाव की बात की है जिससे यह समझ तो आता है कि कुछ कमी ज़रूर रह गई ऐसे में गंभीरता से विचार की ज़रूरत है।
हमारा मुल्क खेती पर निर्भर है ऐसे में अपने खेत छोड़ कर किसान सड़क पर हैं इससे देश का नुकसान हो रहा है लिहाज़ा सरकार को इस पर फौरन फैसला लेना चाहिए और इस गतिरोध को समाप्त करना चाहिए, उन्होंने कहा कि किसी भी हाल में आंदोलन को मज़हबी रंग नहीं देना चाहिए और न हीं इसे हिंसक होना चाहिए जिस तरह कुछ पोस्टर को लेकर विवाद हुआ वह दुर्भाग्यपूर्ण है।
सभी गतिरोध के बाद भी देशहित सर्वोपरि रखना है इसे सरकार को भी समझना चाहिए, उन्होंने कहा कि हर जायज़ मांग का हम समर्थन करते हैं जिससे देश का फायदा होता है हर उस बात का विरोध सबको करना चाहिए जिससे देश का अहित होता है।
हज़रत ने कहा कि हमारा काम है कि देश की और देश के लोगों की दोनों की सेवा करें, अभी हमारे देश के लोग सड़कों पर अगर आये है तो भी हमारा कर्तव्य है कि इनकी सेवा सत्कार की जाये, यह बात सरकार को भी समझ आनी चाहिए, उन्होंने कहा कि हमने बोर्ड के लोगों को निर्देशित किया है कि वह खिदमते खल्क के जज्बे के साथ लोगों की खिदमत करें और लोगों की परेशानी में काम आयें यही धर्म है,।
उन्होंने यह भी कहा कि देश के किसानों की जायज़ मांगों को सरकार को फौरन मान लेना चाहिए और इस मसले को जल्द से जल्द हल करना चाहिए ।

By: Yunus Mohani