खानकाहों से मोहब्बत का संदेश जारी होता है नफरत की हिमायत नहीं: सय्यद मोहम्मदअशरफ

25 अक्टूबर,दिल्ली
आल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड के अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफ़ी फोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने दरगाह ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैहि के खादिम सरवर चिश्ती के पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया की हिमायत करने पर सख्त गुस्से का इजहार करते हुए कहा कि दरगाहे प्रेम और भाईचारे का संदेश देने की जगह है न कि किसी संदिग्ध और कट्टरपंथी सोच वाले संगठन की हिमायत करने की।
उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यह उनकी ज़ाती सोच है इसका आम मुसलमानों की राय से कोई ताल्लुक नहीं है,इसे पूरी तरह खारिज किया जाना चाहिए क्योंकि अगर इस तरह के संदेश दरगाह के प्लेटफॉर्म से कोई शकस देता है इससे समाज में गलत संदेश जाता है इसे सख्ती के साथ रोका जाना चाहिए, पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया की गतिविधियां संदिग्ध पाई गई है और जांच चल रही है उसकी विचारधारा सबको पता है कट्टरपंथी विचारों से देश का सौहार्द्य बिगड़ता है जिससे देश का नुकसान है हमें ऐसे विचारों को किसी भी कीमत पर प्रोत्साहन नहीं देना है ,और इन्हें बढ़ने से रोकना है क्योंकि देश के युवाओं को भ्रमित नहीं होने देना है।
हज़रत ने सरवर चिश्ती के बयान पर कहा कि यह नासमझी में दिया गया बयान है उन्हें सोचना चाहिए कि वह जहां बैठ कर यह बात कर रहे हैं उस बारगाह का संदेश क्या है ?अजमेर भारतीय मुसलमानों का मरकज़ है वहां बैठ कर ऐसी फिजूल बात करना गुमराह करने जैसा है।

نفرت پھیلانے والوں سے سختی سے نمٹے سرکار: سید محمد اشرف

اکتوبر18. 2020 ، نئی دہلی، (پریس ریلیز) آل انڈیا علماء و مشائخ بورڈ کے قومی صدر اورورلڈ صوفی فورم کے چیئرمین حضرت سید محمد اشرف کچھوچھوی نے ملک میں بڑھتی نفرت اور اس کام میں مصروف ایسی تنظیموں کی مذمت کرتے ہوئے کہا کہ ملک میں امن کو برقرار رکھنے کے لئے حکومت کو نفرت کے تاجروں کے ساتھ سختی سے نمٹنا ہوگا۔
انہوں نے آل انڈیا صوفی سجادہ نشین کونسل کے قومی کنوینر حضرت عبد الخادر قادری وحید پاشا کو فون کے ذریعے سے انجام بھگتنے و جان سے مارنے کی دھمکی پی ایف آئی / ایس ڈی پی آئی کا ممبر بتانے والے فاضل کی طرف سے دیئے جانے پر غصے کا اظہار کیا ہے۔ اعتماد اخبار میں شائع ہونے والے مضمون جس میں SDPI / PFI کے ذریعہ عوام کو آگاہ کیا گیا تھا اور ان کی سچائی کا اعلان کرتے ہوئے عوام کو ایسی تنظیم سے دوررہنے کے لئے کہا گیا تھا، جس سے ہندوستان کے امن نظام کی دیکھ بھال میں رکاوٹ پیدا ہوتی ہے۔ مضمون میں کہا گیا ہے کہ پی ایف آئی / ایس ڈی پی آئی ایک ایسی تنظیم ہے جو ایک بنیاد پرست سلفی آئیڈیالوجی سے متاثر ہے جس کا نظریہ دہشت گردی کو فروغ دیتاہے اور آئی ایس آئی ایس جیسی تنظیم سے مماثلت رکھتا ہے۔ اس کے ذریعہ ہندوستان کی سینکڑوں سال پرانی صوفی روایت پر حملہ کیا جا رہا ہے جس میں محبت ہی محبت ہے۔
اس مضمون پر جس شخص نے خود کو PFI / SDPI کا ممبر قرار دیا ہے اس کی طرف سے جس طرح کا ردعمل دیا گیا ہے وہ اس تنظیم کی ہولناکی کو سمجھانے کے لئے کافی ہے، آخرکس طرح کی تعلیم حاصل کی جا رہی ہے جس سے انسان حیوان بنا جا رہا ہے، احتجاج کا پرتشدد طریقہ فکر کی غلاظت کو بے نقاب کرتا ہے۔حضرت نے کہا کہ جو بھی شخص نفرت پھیلاتا ہے اور کسی مذہب سے اپنے آپ کو جوڑتا ہے اسے کسی مہذب معاشرے میں برداشت نہیں کیا جانا چاہئے، کیونکہ ماب لنچنگ جیسے سنگین جرم ہو یا پھر دہشت گرد کی بزدلانہ حرکت یہ سب ملک کی داخلی سلامتی کے لیے خطرہ ہے۔انہوں نے واضح طور پر نفرت انگیز تنظیموں کے خلاف سخت کارروائی کا مطالبہ کیا۔ حضرت نے کہا کہ ملک کی ترقی امن کے بغیر ممکن نہیں اور ایسے بزدلانہ لوگ ملک کے دشمن ہیں جو نفرت کا کاروبار پھیلائے ہوئے ہیں۔

नफरत फैलाने वालों से सख्ती से निपटे सरकार: सय्यद मोहम्मद अशरफ

18 अक्टूबर 2020, नई दिल्ली,प्रेस रिलीज
आल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफ़ी फोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने देश में बढ़ती नफरत और इस काम में लगी ऐसी संस्थाओं की कड़ी निन्दा करते हुए कहा कि देश में अमन कायम रहे इसके लिए सरकार को नफरत के कारोबारियों से सख्ती से निपटना होगा।
उन्होंने आल इंडिया सूफ़ी सज्जादा नशीन काउंसिल के राष्ट्रीय संयोजक हज़रत अब्दुल खादेर कादरी वहीद पाशा को फोन के माध्यम से अंजाम भुगतने व जान से मारने की धमकी पीएफआई/ एसडीपीआई का सदस्य बताने वाले व्यक्ति फाजिल के द्वारा दिए जाने पर रोष व्यक्त किया है,उर्दू अख़बार एत्माद में प्रकाशित लेख ,’जिसमें एसडीपीआई /पीएफआई के माध्यम से जनता को सचेत किया गया था एवम उनकी सत्यता बयान करते हुए जनता से ऐसे संगठन से दूरी बनाने की बात कही गई थी, जिससे भारत की शांति व्यवस्था बनाए रखने में व्यवधान पैदा होता है।लेख में कहा गया है कि पीएफआई/एसडीपीआई एक कट्टरपंथी सल्फी विचारधारा से प्रेरित संगठन है, जिसकी विचारधारा आतंकवाद को बढ़ावा देती है ,और आईं एस एआई एस जैसे संगठन से मेल खाती है ,इसके द्वारा भारत की सैकड़ों वर्ष पुरानी सूफ़ी परंपरा पर हमला किया जा रहा है जिसमें प्रेम ही प्रेम है ।
इस लेख पर पीएफआई / एसडीपीआई का खुद को सदस्य बताने वाले व्यक्ति द्वारा जिस तरह की प्रतिक्रिया दी गई है वह इस संगठन की भयावयता को बताने के लिए काफी है,आखिर किस तरह की सीख दी जा रही है जिससे इंसान हैवान बना जा रहा है, विरोध का हिंसक तरीका विचार की गन्दगी को सामने रखता है,।
हज़रत ने कहा कि नफरत फैलाने वाला कोई भी हो और खुद को किसी भी धर्म से जोड़ता हो उसे सभ्य समाज में बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए,क्योंकि मोब्लिंचिंग जैसे घिनौने अपराध हो या फिर आतंकवाद की कायराना घटना यह सब देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा हैं ।
उन्होंने साफ तौर से हर प्रकार की नफरत फैलाने वाली घिनौनी सोच रखने वाले संगठनों पर सख्ती के साथ कार्यवाही करने की मांग की हज़रत ने कहा कि देश की तरक्की शांति के बिना संभव नहीं है और ऐसे कायर लोग देश के दुश्मन हैं जो नफरत का कारोबार फैलाए हुए है।

अदालतों का काम इंसाफ देना नाइंसाफी ज़ुल्म है: सय्यद मोहम्मद अशरफ

2 अक्टूबर ,नई दिल्ली आल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड के अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफ़ी फोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में लखनऊ के सी बी आई कोर्ट के आये फैसले पर दो टूक कहा कि इंसाफ और फैसले में फर्क है इसे समझा जाना चाहिये अगर इंसाफ नहीं होता तो यह ज़ुल्म है जिससे बेयकीनी जन्म लेती है । हज़रत ने मुसलमानों से अपनी बात दोहराई और अपील करते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर इस फैसले पर बहस न करें इससे बचें।
उन्होंने कहा कि मुसलमानों को सुलह हुदैबिया को समझना होगा कि पैग़म्बरे अमन ने किस खूबसूरती से इसे अंजाम दिया और जिसका नतीजा फतह हुई जो लोग इसके बारे में नहीं जानते उन्हें चाहिए कि उलमा से इसे सुने समझें और जाने हमारे लिए हर मुसीबत का हल पैगम्बरे अमन की प्यारी सीरत में मौजूद है हमें उसे पढ़ना होगा और उसपर अमल करना होगा यही हमारे लिए निजात का जरिया है हमें यकीन रखना चाहिये कि ज़ुल्म बहुत देर तक कायम नहीं रहता ।
अदालत जो मजलूम को इंसाफ देने के लिए बनी है अगर ऐसे फैसले करेगी तो ज़ालिम की हिमायत होगी जिससे समाज में असंतुलन पैदा होगा और अपराधी बेखौफ हो जायेंगे जिससे शरीफ शहरियों की ज़िन्दगी दुश्वार होगी और मुल्क में अफरा तफरी का माहौल बनेगा यह सोचने का वक्त है कि हम कैसा देश बना रहे हैं जहां अदालत सबूतों के मौजूद होने के बाद भी इस तरह के फैसले दे रही है और पूरे अदालती निज़ाम को कटघरे में खड़ा कर रही है।
हज़रत ने ख़ास तौर से मुस्लिम युवाओं से कहा कि यह सब्र और होशियारी का वक़्त है हमें किसी भी कीमत पर नफरत के कारोबारियों की चाल को कामयाब करने में मदद नहीं करनी है और अगर आप सोशल मीडिया के जरिए इस फैसले पर बात करते हैं तो हम उनके मददगार अनजाने में बन जाते हैं हमें खबर भी नहीं होती कि हम क्या कर रहे हैं और अपनी नासमझी के चलते हम जाल में फांस जाते हैं।
अभी मुल्क में जिस तरह कोरोना का कहर टूटा हुआ है,किसान सड़कों पर हैं नवजवान बेरोजगार हैं ऐसे में हमें इस फिजूल बहस से बचने की जरूरत है और अपने मुल्क की फिज़ा को बेहतर बनाने की कोशिश में जुटे रहना है।अदालतों को अपना काम करना है और हैं सबको अपना ,हमारा काम है मोहब्बत सबके लिए नफरत किसी से नहीं अगर हम अपना काम ईमानदारी से करेंगे तो बदलाव यकीनी है और इसी बदलाव में तरक्की की राह है ,।