ज़रूरतमंदों की मदद भी आंदोलन का हिस्सा: शाह हसन जामी

29 दिसंबर,नई दिल्ली।
आल इंडिया उलमा व मशाइख़ बोर्ड ने हर साल की तरह इस साल भी एक निर्देश अपनी सभी शाखाओं में जारी कर कहा है कि लोगों की मदद की जाए बिना उनकी जात और धर्म पूछे, इस भयानक सर्दी में यूं लोगों तक गर्म कपड़े कम्बल जैसी ज़रूरी चीज़ें पहुंचाई जाऍ जिनके पास अपना बदन ढकने के लिए गर्म कपड़े नहीं है।
इसी क्रम में बोर्ड के राष्ट्रीय महासचिव शाह हसन जामी के द्वारा दिल्ली के श्रम विहार, कालिंदी कुंज इलाके में यह काम शुरू किया गया, यहाँ झुग्गी झोंपड़ी में रहने वाले वह लोग हैं जिनके पास इस भयानक सर्दी से बचाव करने के लिए ओढ़ने का साधन नहीं है।

बोर्ड के कार्यालय प्रभारी हुसैन शेरानी ने सुश्री ऐमन और मौलाना अज़ीम अशरफ के साथ मिलकर कंबल बांटे ।
जिससे काफी लोगों को राहत मिली साथ ही यह संदेश भी दिया गया कि हम लोगों के लिए आसानियां पैदा करने वाले बने न कि मुसीबत।

जामिया में पुलिसिया दमन भारत के भविष्य पर हमला :सय्यद मोहम्मद अशरफ

15 दिसंबर, नई दिल्ली
आल इंडिया उलमा व मशाइख़ बोर्ड के अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफी फ़ोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के अंदर घुस कर जामिया के छात्र छात्राओं पर पुलिस के लाठीचार्ज की कड़ी निन्दा की है।
हज़रत ने कड़े शब्दों में कहा कि यह भारत के भविष्य पर हमला है केंद्र सरकार को फौरन स्थिति को संभालना चाहिए, देश में जिस तरह का माहौल पनप रहा है वह बेहतर नहीं है लोगों में चिंता और भय है सरकार को इसे दूर करना चाहिए, हज़रत ने छात्रों से भी शांति की अपील करते हुए कहा कि कानून को किसी भी हाल में हाथ में न लें शांति और संयम बनाए रखे।
हज़रत ने दिल्ली पुलिस की इस बर्बर कार्यवाही को निकम्मापन करार दिया,उन्होंने कहा कि अगर बिना इजाज़त विश्विद्यालय में पुलिस घुसी है तो इसकी जांच होनी चाहिए और दोषियों पर कड़ी कार्यवाही की जानी चाहिए, विश्विद्यालय पढ़ने की जगह है पुलिसिया तांडव की नहीं इसके लिए सरकार को फौरन क़दम उठाने चाहिए। बच्चों के साथ कोई गलत बर्ताव नहीं किया जाए और उन्हें सकुशल उनके घर भेजा जाय।

By: Yunu Mohani

आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड का CAB और NRC के विरोध दिल्ली में प्रदर्शन

लक्ष्मी नगर,नई दिल्ली 13/12/2019

देश के सभी अमन वाले शेहरियों की जानिब से गुस्से का इज़हार करने के लिए NRC और CAB के ख़िलाफ़ ज़बरदस्त मुज़ाहरा पेश कर राजधानी दिल्ली का लक्ष्मी नगर इलाक़ा भी गवाह बना, नमाज़ ए जुमा के बाद इलाके के हज़ारों लोग NRC और CAB के खिलाफ इकट्ठे हुए।

जुलूस में आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड दिल्ली शाखा के महासचिव सय्यद शादाब हुसैन रिज़वी ने कहा कि किसी भी बुरे काम को रोकना हर मुसलमान का फर्ज़ है और ईमान का हिस्सा है और मुसलमानों पर वाजिब है कि वह देश के संविधान की हिफाज़त करे। उन्होंने और कहा कि यह समय सारे शिकवे भूलाकर तमाम अमन वाले और सेक्युलर लोगों को एक साथ आने का है क्योंकि इन दोनों बिलों के परिणाम सिर्फ मुसलानों को ही नहीं बल्कि देश के विभिन्न वर्गों को दूरगामी नुकसान देंगे।

लोगों के आह्वान पर जनाब मौहम्मद शादाब खान लोगों से मुख़ातिब हुए, मौहम्मद शादाब ने कहा कि एक तरफ देश को तानाशाही की तरफ ले जाया जा रहा है, दूसरी तरफ अमन वाले लोग सो रहे हैं, पहले तीन तलाक के मामले में अहले हदीस और वहाबी चुप रहे कि यह हनफियों का मामला है, फिर 370 पर तमाम मुसलमान चुप रहे कि यह कश्मीरियों का मामला है तो कभी अमन के नाम पर बाबरी मस्जिद मामले में मुसलमानों को चुप रखा गया, कभी दहशतगर्द कहा गया फिर भी मुसलमान चुप रहा, लेकिन अब यह मामला सिर्फ लोकत्रंत्र का नही बल्कि मुसलमानों की इज़्ज़त-आबरू का है। कार्यक्रम को सफल बनाने में जनाब वक़ार चौधरी, जनाब रईसुद्दीन सैफी, मौहम्मद अज़हर, साद अहमद, अनीसुल हक़, साकिब सैफी ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया।

By: Husian Sherani

धर्म को आधार बनाकर बनने वाला कानून संविधान के साथ संविधान निर्माताओं का अपमान : सय्यद मोहम्मद अशरफ

13 दिसंबर शुक्रवार,लखनऊ आल इंडिया उलमा व माशाईख बोर्ड के अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफी फ़ोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने लखनऊ में नागरिकता संशोधन बिल पर कहा है कि मज़हब को बुनियाद बना कर अगर कोई कानून बनाया जाता है तो यह भारत के संविधान के साथ संविधान निर्माताओं का अपमान है।
उन्होंने कहा कि यह देश के मुसलमानों का मसला नहीं है बल्कि हर उस सच्चे भारतीय का मसला है जो भारत के संविधान में विश्वास रखता है क्योंकि हमें एक देश के रूप में बांधे रखने वाला संविधान ही है, हज़रत ने स्पष्ट कहा कि यह डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर का अपमान है या फिर दलितों के खिलाफ कोई घिनौनी साजिश क्योंकि आसाम में जिस तरह ज़्यादा तर एन आर सी के कारण अपनी नागरिकता साबित न कर पाने वाले दबे कुचले हुए लोग ही हैं जबकि मुसलमानों की संख्या मात्र 5 लाख ही है अगर यह पूरे देश में लागू होता है तो दलित और आदिवासी समुदाय सबसे अधिक पीड़ित होगा।
और अगर वह नागरिकता नहीं साबित कर सका तो भ्रष्ट तंत्र उसके पूरे जीवन की कमाई मात्र नागरिकता के नाम पर खा जाएगा क्योंकि यह बात जगजाहिर है कि छोटी छोटी सरकारी योजनाएं गरीबों तक बिना रिश्वत के नहीं पहुंचती तो फिर यह जीवन मरण का सवाल होगा इस प्रकार यह उत्पीड़ित समाज के लोग नागरिकता के लिए शोषण के शिकार रहेंगे और फिर इनके लिए आरक्षण बेमाना हो जायेगा।
हज़रत ने कहा कि जिस तरह इस कानून को सिर्फ मुसलमानों के खिलाफ प्रचारित किया जा रहा है वह सही नहीं है जबकि सच यह है कि यह कानून भारत की आत्मा के खिलाफ है ,यह कानून आइडिया ऑफ इंडिया के खिलाफ है और यह कानून संविधान का मज़ाक है इस बात को मुसलमानों को समझना चाहिए कि इसके खिलाफ लड़ाई हर भारतीय की लड़ाई है जो भारत के संविधान में विश्वास रखता है।
उन्होंने कहा कि देश के सभी अमन पसंद लोगों को सामने आना चाहिए और संविधान बचाने के लिए मुहिम चलानी चाहिए,मामला अब अदालत में है हम भारत के सर्वोच्च न्यायालय से उम्मीद करते हैं कि वह इंसाफ करेगा साथ ही भारत के महामहिम राष्ट्रपति महोदय से अपील करते हैं कि इस संविधान विरोधी कानून को अपनी मंजूरी प्रदान n करें क्योंकि यह कानून डॉक्टर अम्बेडकर का अपमान है साथ ही दलितों और आदिवासियों के उत्पीड़न का हथियार है।

By: Yunus Mohani

موجودہ مشکل حالات میں سیرت عبد القادر جیلانی ؓ امید کی ایک کرن


آل انڈیا علما ومشائخ بورڈ کے زیر اہتمام منعقد یوم عبد القادر جیلانی میں علماءکا اظہار خیال
مولانا مقبول احمد سالک مصباحی نے کہا کہ تصوف حالات کے دھارے میں بہنے اور کمزوری وبزدلی کی کمزور تاویلات کانام نہیں،تصوف درحقیقت اللہ کے ماسوا کسی بھی شئی سے نہ ڈرنے کا کانام ہے،صوفی کی آنکھوں میں اللہ کے سوا کسی کا خوف نہیں ہوتا،خواہ ارباب اقتدار کتنا ہی طاقت ور کیوں نہ ہو،حضرت شیخ عبد القادر جیلانی اپنے کردار وعمل سے امت محمدیہ کو یہی پیغام دیا ہے۔انھوں نے کہا کہ حضرت غوث اعظم کی اکیانوے سالہ زندگی اس پر شاہد عدل ہے کہ آپ کسی بھی سلطان وشہنشاہ کے سامنے کبھی نہیں جھکے،بلکہ اسے اپنی خداد دعوتی کردار وعمل سے مرعوب ومسخر کردیا۔قادری سلسلہ کی ایک خصوصیت یہ بھی ہے کہ اس کے مریدین وخلفانے بیت المقدس کی آزادی میں کلیدی کردار ادا کیا ہے،اس سے اس سلسلہ کی ڈائنامک خصوصیت کا پتہ چلتا ہے۔اور یہ بھی واضح کرتا ہے کہ اصؒ مجاہد فی سبیل اللہ صوفیا اور اولیا اللہ ہی ہیں جو نفس امارہ اور شیطانی طاقتوں کے خلاف جہاد کرتے رہتے ہیں۔

مولانا رئیس ازہری (اسلامی اسکالر)نے کہا کہ اگر آج مسلمانوں کو اپنی زندگی کامیاب بنانی ہے تو اسے سرکار غوث اعظمؓ کی تعلیمات پر عمل پیرا ہونا ہوگا۔ آپ نے تعلیمات سرکار غوث اعظم ؓ کی جھلکیاں پیش کیں کہ توحید پر جمے رہو، توحید کے رنگ میں رنگے رہو، توحید کی رسی مضبوطی سے پکڑے رہو کیونکہ توحید ہی سرمایہ نجات ہے۔آپ نے مزید کہا کہ اولیاء کرام کی مجلسوں میں شرکت کرنے سے تزکیہ نفس ہوتا ہے۔

مولانا مختار اشرف اسلامی اسکالر جامعہ ملیہ اسلامیہ نے کہا کہ ہمیں اس پر بھی غور کرنا چاہیے کہ قرآن پاک نے سچوں کے ساتھ رہنے کا حکم کیوں دیا ہے؟اس کانکتہ یہ ہے کہ علم کوئی بھی شخص حاصل کرکے علامہ بن سکتا ہے،مگر ضروری نہیں کہ وہ سچا بھی ہو۔صحبت سچوں کی ہی اکسیر ہے، سرزمین ہند میں سچوں کے امام حضرت خواجہ معین الدین چشتی ہیں،ان سے قطب الدین جڑے تو بختیا ر کاکی ہوگئے،فریدالدین ان سے جڑے تو گنج شکر ہوگئے،ان سے نظام الدین جڑ ے تو محبوب الہی ہو گئے،سید اشرف کسی سچے کی صحبت میں بیٹھے تو مخدوم سمناں ہوگئے اور یہ سلسلہ خیرو برکت اسی طرح رواں دواں رہا۔انھوں نے کہا کہ آج ملک میں مسلمانوں کے خلاف جو ماحول بن رہا ہے تو یہ ہماری دعوتی کوتاہیوں کی وجہ سے ہے،در اصل فتوی تصوف پر غالب آگیا،حکمت پرعلم غالب آگیا،صوفیا پس منظر میں چلے گئے،سماج پر ظاہر پرست علما غالب آگئے اور سب کچھ بدل کر رکھ دیا،ضرورت اس بات کی ہے کہ فتوی پر دعوت کو غالب کیا جائے،اور صوفیا کے طریقہ دعوت کو عام کیاجائے۔

سید شاداب حسین رضوی رکن دہلی اسٹیٹ حج کمیٹی اورجنرل سکریٹری آل انڈیا علما ومشائخ بور ڈ نے کہا کہ موجودہ حالات اگر چہ مشکل ہیں مگر ہمیں مایوس ہونے کی ضرورت نہیں بلکہ انتہائی دانش مندی اور صبر ورضاسے اس کا سامنا کرنا ہے،بالخصوص جذباتی نعروں سے احتراز کرنا ہے،قانونی چارہ جوئی اور عوامی رائے عامہ کی بیداری،اور مسائل کی گہرائی تک جانے کی ضرورت ہے۔انھوں نے کہا کہ حالات بد سے بدتر ہوسکتے ہیں مگر مومن کبھی مایوس نہیں ہوتا۔

مولانا عظیم اشرف نے کہا کہ مسلمانوں کی افتا دطبع یہ ہے کہ وہ اپنی مرضی سے مسائل کا حل چاہتا ہے جب کہ یہ ناممکن ہے،حل مسائل کے لیے قرآن پاک نے ہمیں جو گائیڈ لائن دیا ہے اس کی اتباع ضروری ہے،قرآن نے واضح الفاظ میں کہا ہے کہ سربلندی اور کامیابی کے لیے ضروری ہے کہ مسلمان اللہ سے ڈرتا رہے اور سچوں کے ساتھ رہے،انھوں نے کہا کہ موجودہ حالات کی تبدیلی کے لیے ضروری ہے کہ مسلمان اپنے حالات خوبدلیں،بد اعمالیوں،بالخصوص کبیرہ گناہوں سے بچیں،صوفیا کرام خاص کر حضرت شیخ عبد القادر جیلانی کی سیرت طیبہ کو اپنے لیے مشعل راہ بنائیں۔
محمد حسین شیرانی نے میٹنگ کا ایجنڈا رکھا جس پر ممبران نے کھل کر اپنی رائے کا اظہا رکیا۔میٹنگ میں خاص کر موجودہ حالات کے تناظر میں مسلمانوں کا رویہ کیا ہو،اس پر بھی غور وخوض ہوا۔
علما ودانشوران نے ان خیالات کا اظہار آل انڈیا علما ومشائخ بور ڈ کی مرکزی آفس میں منعقدہ ماہانہ مشاورتی نشست میں کیا۔نشست کا آغازتلاوت کلام پاک سے مولانا آصف رضانے کیا۔بعدہ سید محمد ریحان (جامعہ ملیہ اسلامیہ)اور حافظ قمر الدین (نیا سویرا نیوز پورٹل)نے نعت پاک پیش کی۔
اس موقعہ سے حاضرین کی ضیافت کا اہتمام بھی کیاگیا۔حضرت شیخ عبد القادر جیلانی رضی اللہ عنہ کی گیارہویں کی مناسبت سے ایصال ثواب کا اہتمام بھی کیاگیا۔صلاۃ وسلام اور مولانا سالک مصباحی کی دعا پر مجلس کا اختتام ہوا۔
شرکاء میں جناب ایڈووکیٹ تہذیب الرحمن،مولانا مظفر ازہری،مولانا محمد قاسم، ماسٹر شبر خصالی،عظمت علی،محمد اشرف امان الرحمن وغیرہ موجود رہے۔

By: Maulana Maqbool Ahmad Salik Misbahi

सख्त कानून बनाने से नहीं बल्कि अच्छा समाज बनाने से रुकेंगे बलात्कार : सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी

4 दिसंबर,लखनऊ
आल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड के अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफी फ़ोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने लख़नऊ में बोर्ड की मीटिंग के दौरान नागरिकता बिल पर बात करते हुए कहा कि संविधान की रक्षा उसपर अमल करने से होगी सिर्फ बात करने से नहीं जब भारत का संविधान पंथ निरपेक्ष है और उसमें न्याय की द्रष्टि में सबको समान माना गया है तो उसमें धर्म के नाम पर फर्क करना गैर संवैधानिक और संविधान की मूल भावना के विपरीत है।
उन्होंने कहा कि अभी नागरिकता बिल पर जिस तरह की बात हो रही है उससे ऐसा महसूस होता है कि यह बिल राजनीत से प्रेरित है सरकार को इसपर विचार करना चाहिए क्योंकि धर्म के नाम पर भेद करना भारत के संविधान के खिलाफ काम होगा ।
हैदराबाद में डॉक्टर प्रियंका रेड्डी के साथ हुई घिनौनी घटना पर बात करते हुए कहा कि देश में बलात्कार किसी भी सख्त कानून बना देने से नहीं रुकेंगे हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि सख्त कानून भी आवश्यक है लेकिन इसके लिए इस तरह के मामले में एक महीने के भीतर सजा का प्रावधान आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि सरकार को इसके लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट में यह मुकदमे चला कर एक माह में फैसले की व्यवस्था करनी चाहिए वहीं उन्होंने यह भी कहा कि यह संपूर्ण रूप से रोकने के लिए सरकार को सबसे पहले पूरे देशें में पूर्ण शराबबंदी लागू करनी चाहिए,वहीं अन्य प्रकार के सभी नशे जिसमें ध्रूम पान भी शामिल है सब पर रोक लगनी चाहिए,वहीं समाज को बेहतर बनाया जाना चाहिए ,जो शिक्षा के बिना संभव नहीं है।
पैगम्बर ने एक आदर्श समाज की स्थापना की जिसका परिणाम यह हुआ कि लोगों में कानून का भय कानून की इज्जत के साथ आया वहीं लोग दूषित सोच से पाक रहे ,क्योंकि बलात्कार जहां एक जघन्य कृत्य है वहीं एक दूषित मानसिकता का परिणाम है हमें मानसिकता और इस घिनौने विचार पर रोक लगानी है और इसके लिए व्यापक अभियान चलाना है ताकि बलात्कारी सोच को समाप्त किया जा सके।
बैठक में बाबरी मस्जिद मामले में दायर की गई पुनर्विचार याचिका पर भी बात हुई और बोर्ड अध्यक्ष ने साफ कर दिया कि हमारा काम दिल जीतना है ,हम अपना काम कर रहे हैं हम इस मामले के पक्षकार नहीं लिहाज़ा हम आम मुसलमानों की तरह अदालत के फैसले का सम्मान करते हैं।
By: Yunus Mohani

محبت رسول امتیوں پر فرض: سید سلمان چشتی

انڈیا اسلامک کلچر سینٹر میں جلسہ سیرۃ النبی ﷺ
نئی دہلی،03دسمبر(پریس ریلیز)گزشتہ رات انڈیا اسلامک کلچر سینٹر کی جانب سے جلسہ سیرۃ النبی ﷺ کا انعقاد کیا گیا جس میں آل انڈیا علماء ومشائخ بورڈ جوائنٹ سکریٹری سید سلمان چشتی نے سیرت رسول ﷺ کے موضوع پر اظہار خیال کرتے ہوئے کہا کہ محبت رسول امتیوں پر فرض ہے جسے ہندوستان میں صوفیا ئے کرام نے عملی جامہ پہنا کر دکھایا اور سر زمین ہند پر رسول اکرم کا پیغام امن،محبت،اخوت و انسانیت، حضرت خواجہ غریب نواز معین الدین چشتی رحمۃ اللہ علیہ نے عام کیا۔ سید سلمان چشتی نے کہا کہ خدمت خلق امت محمدیہ کو رسول اللہ سے ملی امانت ہے جسے ہندوستان میں صوفیا ئے کرام نے سنبھال کر رکھا اور اب ہماری ذمہ داری ہے کہ ہم خدمت خلق کا جذبہ اپنے آنے والی نسلوں تک پہنچائیں۔
انہوں نے خواتین کے حقوق کے بابت فرمایا کہ نبیِ کریم صلی اللہ علیہ وسلم نے خواتین کو ذلت وپستی کے گڑھوں سے نکالا جب کہ وہ اس کی انتہا کو پہنچ چکی تھی، اس کے وجود کو گو ارا کرنے سے بھی انکار کیا جارہا تھا تو رحمۃ للعالمین بن کر تشریف لائے اور آپ نے پوری انسانیت کو اس آگ کی لپیٹ سے بچایا اور عورت کو بھی اس گڑھے سے نکالا۔ اور اس زندہ دفن کرنے والی عورت کو بے پناہ حقوق عطا فرمائے اور قومی وملی زندگی میں عورتوں کی کیا اہمیت ہے، اس کو سامنے رکھ کر اس کی فطرت کے مطابق اس کو ذمہ داریاں سونپیں۔آپ نے کہا کہ آج کے اس پر فتن دور میں ہمیں سیرت رسول پر عمل پیرا ہونے کی ضرورت ہے جس سے اپنی دنیا و آخرت سنوار سکیں۔

By: Husain Sherani