समाज में हैवानों के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए : सय्यद आलमगीर अशरफ

नागपुर,20 अप्रेल

रोजाना जिस तरह रेप (बलात्कार) की घटनाए हो रही है उससे पूरा मुल्क परेशान है हर तरफ से इंसाफ के लिये पब्लिक प्रदर्शन एहतिजाज (protest) कर रही है देश में बलात्कारियो के खिलाफ सख्त से सख्त कानून बनाने की अपील कर रही है हालांकि सरकार ने इस ओर पहल की है पूरे मुल्क में प्रदर्शन हो रहे हैं न कि सिर्फ मुल्क में बल्कि विदेशों में भी इस मसले पर बड़ी किरकिरी हुई है

इसी सिलसिले में 20 अप्रेल 2018 शाम 7 बजे नूरी मेहबुबिया जामा मस्जिद पीलीनदी नागपुर में आल इंडिया उलमा मशाइख बोर्ड और अशरफी ग्रुप की जानिब से पुर अमन कैंडल मार्च का एहतेमाम किया गया जुलूस मस्जिद से निकल कर इलाके से होता हुवा मस्जिद पर ही खत्म हुआ जुलूस की कयादत आल इंडिया उलेमा मशायख़ बोर्ड यूथ के राष्ट्रीय अध्यक्ष हज़रत मौलाना सय्यद आलमगीर अशरफ किछौछवी ने की उन्होंने इस अवसर पर कहा कि समाज में हैवानों के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए ,बेटियों की अस्मत लूटने वालों को साज़ाए मौत दी जानी चाहिए ताकि लोगों के दिलों में ऐसा हैवानों वाला क़दम उठाने से पहले एक खौफ रहे ।
उन्होंने कहा मजलूम उसके मजहब की बिना पर नहीं देखा जाना चाहिए वह जिस भी धर्म का हो इससे कोई मतलब नहीं।
अगर समाज ज़ालिम और मजलूम का परीक्षण उसके धर्म के आधार पर करेगा तो न्याय नहीं किया जा सकता ।
उन्होंने कहा देश जिस तरह एकजुट होकर जालिमों के खिलाफ खड़ा हुआ है यह ही हमारे मुल्क की ताकत है और हमें इसे और मजबूत करना है।
हज़रत ने कहा सरकार से हमारा मुतालबा है कि रेप के मुजरिमों को साजाए मौत देने वाला कानून जल्द से जल्द बनाए और फास्ट ट्रैक कोर्ट में रेप के मुक़दमे की सुनवाई हो।
प्रदर्शन में मुख्य रूप से हाफ़िज़ अख़्तर आलम अशरफी,मोहम्मद रियाज़ अशरफी,तौफीक अंसारी, राजा भाई,इम्तियाज़ अशरफी समेत सैकड़ों लोग शामिल हुए प्रदर्शन में युवाओं ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया ।

 

By: Yunus Mohani

हुसैन मीज़ाने इन्साफ ,इन्साफ के बिना अमन मुमकिन नहीं : सय्यद मोहम्मद अशरफ

मारीशस /20 अप्रैल

‘हुसैन मीज़ाने इन्साफ, इंसाफ के बिना अमन मुमकिन नहीं “यह बात वर्ल्ड सूफी फोरम व आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने एक सभा को संबोधित करते हुए कही .
हज़रत ने पूरी दुनिया को हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के यौमे विलादत की मुबारकबाद पेश करते हुए कहा कि इमाम आली मकाम का फरमान है कि  जान का चला जाना नुक्सान नहीं, सबसे बड़ा नुक्सान किसी की नज़र से गिर जाना है’ इसीलिए जब इन्साफ नहीं मिलता तो हुक्मरान आवाम की नज़र से गिर जाते हैं जिसका नतीजा बदअमनी होती है.
उन्होंने कहा कि इन्साफ का होना बहुत ज़रूरी है, सिर्फ अदालतों में ही नहीं हमारा सबके लिए इंसाफ पसंद होना भी ज़रूरी है क्योंकि हम जो अपने लिए चाहते हैं वही दूसरों के लिए भी पसंद करें, यही तलीमे मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम है. इमामे आली मकाम फरमाते हैं कि “अगर दुनिया में इन्केलाब लाना चाहते हो तो तहजीबे नफ्स की शुरुआत खुद से करो, दुनिया खुद बखुद बदल जाएगी, हज़रत ने कहा, यह ज़रूरी बात है हम दूसरों की कमी तलाशते रहते हैं जबकि तरीका यह है कि खुद में सुधार किया जाये ताकि लोग आपको देख कर बदल जाये.
उन्होंने हज़रत इमाम हुसैन का ज़िक्र करते हुए कहा कि इमाम फरमाते हैं “वह क्या बदनसीब इंसान है जिसके दिल में अल्लाह ने जानदारों के लिए रहम की आदत पैदा न की; हज़रत ने यह बात हिन्दोस्तान में कम उम्र बच्चियों के साथ आये दिन हो रही हैवानियत का तज़किरा करते हुए कही, उन्होंने कहा कि यह वह दरिन्दे हैं जो समाज के लिए नासूर हैं और इनकी सजा मौत से कम हरगिज़ नहीं होनी चाहिए.  भारत में भी कई जगह आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड के कार्यकर्ताओं ने महिलाओं के साथ हो रही बर्बरता के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया, उत्तरप्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी बोर्ड के प्रदेश सचिव हज़रत सय्यद हम्माद अशरफ किछौछवी और मौलाना आले रसूल ,रमजान अशरफी सहित सैकड़ों लोगों ने इस बरबरियत के खिलाफ कठोर कानून की मांग की उन्होंने कहा कि ऐसे जालिमों की सजा सिर्फ मौत होनी चाहिए जो महिलाओं पर इस तरह की बरबरियत करते हैं साथ ही हम्माद अशरफ ने कहा कि इस मसले को मज़हब के चश्मे से हरगिज़ नहीं देखा जाना चाहिए ..

By: 

MEMORANDUM To The Prime Minister By District Magistrate

Harshly condemning the rape and murder of the eight-year-old innocent girl in Kathua district,and other rape cases in india  All India Ulama & Mashaikh Board (AIUMB), an apex body of Sufi Muslims in India is putting forward this memorandum to the prime minister of india and demad:

  1. We demand the ‘death penalty’ as only fitting punishment for this insane and inhuman brutality of the beasts.
  2. We demand the complete justice to be delivered. And that is only possible when the rape criminals are hanged to death.
  3. We demand that the government should bring a “new law” on the rising rape crimes, calling for a national consensus for exemplary punishment for the rape culprits.
  4. We demand that an amendment in the Protection of Children from Sexual Offences (POCSO) Act on death penalty for rape of children below 12 years of age is mandatory after India has witnessed several brutal incidents of the rapes where the victims were mostly minor girls.
  5. We demand that the brutal rape and merciless murder of Asifa—a minor Indian child— and the case of Unnao rape victim should open our eyes. But it should not be painted as Hindu-Muslim communal issue in the country. It doesn’t make any difference if the victim is Muslim, Hindu, Dalit or of any other faith, creed or caste. Criminals have no religion at all.

 We ask the Prime Minister to assure the country that no culprit will be spared and that       “Our daughters will definitely get justice”.

علما و مشائخ بورڈ کے قومی صدر سید محمد اشرف کچھوچھوی کا وزیر اعظم سے مطالبہ : عصمت دری کی سزا صرف موت ہو

14 اپریل ، نئی دہلی:
آل انڈیا علماء و مشائخ بورڈ کے قومی صدرمولانا سید محمد اشرف کچھوچھوی نے بیان جاری کیا کہ: ”ہندوستان میں جنسی تشدد ایکٹ میں 12 سال سے کم عمر کی بچیوں کے ساتھ عصمت دری کے لئے موت کی سزا کاایک قانون لازمی ہے،کیونکہ ہندوستان میں بہت سے ایسے شرمناک واقعات ہوئے ہیں جہاں زیادہ تر متاثرہ لڑکیاں نہایت کم سن تھیں”۔ انہوں نے مزید کہا کہ حکومت کوبڑھتی ہو ئی عصمت دری کے جرم کو روکنے کے لئے ”نیا قانون”لانا چاہئے۔
انہوں نے مزید کہا: ”وزیر اعظم نے ملک کو یقین دہانی کرائی ہے کہ کوئی بھی مجرم بخشا نہیں جائے گا اور” ہماری بیٹیوں کو ضرور انصاف ملے گا ” ۔اب ہمیں دیکھنا ہے کہ کیا مکمل انصاف دیا جائے گا۔اور یہ صرف اسی وقت ممکن ہے جب عصمت دری کے مجرموں کو موت کے لئے پھانسی دی جائے ۔
AIUMB کے قومی سکریٹری شاہ حسن جامی نے کہا، ”عصمت دری کے مجرموں کو ‘سزائے موت’ سے کم کوئی سزا دیا جانا سراسر ناانصافی ہوگی۔جو لوگ جانوروں کی طرح کئے گئے اس وحشی اور غیر انسانی ظلم کے مرتکب ہیں، ان کے لئے پھانسی کی دردناک سزاہی مناسب ہے۔
اس سانحے کے اہم پہلوؤں پر روشنی ڈالتے ہوئے ورلڈ صوفی فورم کے ترجمان اور میڈیا کوآرڈینیٹر غلام رسول دہلوی نے کہا: ”آصفہ کی شرمسارعصمت دری اوربے رحم قتل ایک ہندوستانی بیٹی کے ساتھ کئے گئے خوفناک جرم کے طور پر دیکھا جانا چاہئے، اس درندگی سے ہمارا کلیجہ منہ کو آگیاہے اور آنکھیں پھٹی کی پھٹی رہ گئی ہیں۔ذہنی دردوکرب سے پوراجسم کانپ اٹھاہے، لیکن ہمیں چاہئے کہ محتاط رہیں!اسے ملک میں ہندو مسلم فرقہ واریت کے طور پر پیش نہیں کیا جانا چاہئے۔اگر کوئی مسلم، ہندو، دلت یا کسی دوسرے مذہب، عقیدہ یا ذات کیبچی اس حیوانیت کا شکار ہو، تب بھی جرم اتنا ہی سنگین اور قابل مذمت رہے گا”۔
انہوں نے کہا: ”کٹھوا کی 8 سالہ مسلم بچی اور اناؤ کی 18 سالہ ہندو لڑکی دونوں ہی غیر انسانی فطرت اور ظالمانہ سرشت رکھنے والے درندوں کی شکار ہوئی ہیں، جو کسی بھی مذہب کے پیروکار نہیں، بلکہ ہوس کے پجاری ہیں ۔وہ کسی بھی مہذب سماج کا حصہ نہیں، ہمیں ان کے بھارتی ہونے پر خود کو شرمندہ ہونا چاہئے۔”
اس سلسلے میں سینئر صحافی اور بورڈ کے آفس سکریٹری اورجناب یونس موہانی نے ایک چبھتا ہوا سوال اٹھایاکہ: ” کیا یہ ‘نیو انڈیا’آزاداور ترقی پسند لوگوں کا بنایا ہواہے، جو طویل عرصے سے اپنے معاشرے میں ایسے گھناؤنے جرائم کو دیکھ رہے ہیں اور اب یہ تقریباً روزانہ کا معمول بن گیاہے؟” انہوں نے کہاکہ ’’ہمیں سمجھ نہیںآتا ہے کہ مجرم کو گرفتار کرنے کے بجائے پولیس شکایت کنندہ کو ہی پہلے اس سنگین کیس میں نے کیوں گرفتار کرلیتی ہے” ۔

AIUMB ने बलात्कारियों को फांसी की सज़ा देने के लिए राष्ट्रीय सहमति बनाने की मांग की!

13 अप्रैल 2018
कठुआ जिले में आठ वर्षीय निर्दोष लड़की की बलात्कार और हत्या की निंदा करते हुए, सूफी मुस्लिमों की सर्वोच्च संस्था, आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड ने अपराधियों को फांसी की सजा के लिए राष्ट्रीय सहमति बनाने की मांग की है।
AIUMB के राष्ट्रीय सचिव शाह हसन जामी ने कहा, “यह ‘मृत्यु दंड’ से कम नहीं होना चाहिए जो जानवरों की तरह किये गए इस वहशी और अमानवीय क्रूरता के लिए उपयुक्त है”। उन्होंने आगे कहा कि सरकार को बढ़ते हुए बलात्कार के अपराध को रोकने के लिए एक “नया कानून” लाना चाहिए।
आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड के संयुक्त सचिव व अजमेर शरीफ के गद्दीनशीन सय्यद सलमान चिश्ती ने कहा: “भारत में यौन उत्पीड़न (पास्को ) अधिनियम, में 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के साथ बलात्कार के लिए मौत की सजा पर एक संशोधन अनिवार्य है, क्योंकि भारत में बलात्कार की कई क्रूर घटनाएं हुईं जहां पीड़ितों में ज्यादातर लड़कियां थीं,” ।
इस त्रासदी के महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए, वर्ल्ड सूफी फोरम के प्रवक्ता, लेखक और मीडिया सह-समन्वयक, गुलाम रसूल देहलवी ने कहा: “असिफा की क्रूर बलात्कार और बेरहम हत्या-एक भारतीय बेटी के साथ किये गए भयानक अपराध के तौर पर देखा जाना चाहिए हमारी आँखें खुलनी चाहिए मगर सावधान! इसे देश में हिन्दू मुस्लिम मानसिकता के रूप में चित्रित नहीं किया जाना चाहिए। यदि कोई मुस्लिम, हिंदू, दलित या किसी अन्य धर्म, पंथ या जाति का शिकार हो, तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। “अपराध उतना ही संगीन और निंदनीय रहेगा।
श्री देहलवी ने कहा: “कुछ ऐसे लोग हैं जो निर्दोष असिफा के साथ हुई बर्बरता को इस तरह देख रहे हैं कि क्योंकि वह मुस्लिम बेटी हैं, गुर्जर और बकरवाल आदिवासी समुदाय से संबंधित हैं। हालाँकि किसी भी भारतीय नागरिक के लिए जो इस भयानक विकास से ईमानदारी से चिंतित हैं, उसे कोई फर्क नहीं पड़ता- मुस्लिम या हिंदू हमें जो चिंता है, वह झूठी धार्मिक पहचान के भेस में क्रूरता और उत्पीड़न है और धर्म के आधार पर किसी भी विभाजन से ऊपर उठने वाले सभी पीड़ितों के लिए न्याय कि मांग होनी चाहिए। कठुआ की 8 वर्षीय मुस्लिम लड़की और उन्नाव की 18 वर्षीय हिंदू लड़की, क्रूरता की प्रकृति रखने वाले ‘अमानवीय’ पुरुषों की शिकार हुई हैं। वे एक सभ्य समाज का हिस्सा नहीं थे हमें उनके भारतीय होने की वजह खुद को शर्मिंदा महसूस करना चाहिए। हालांकि, भारत में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की भावना को ट्रिगर नहीं करना चाहिए। ”
उन्होंने कहा: “प्रधान मंत्री ने देश को आश्वासन दिया है कि कोई अपराधी बख्शा नहीं जाएगा और” हमारी बेटियों को निश्चित रूप से न्याय मिलेगा”, हमें देखना होगा कि क्या पूरा न्याय दिया जाएगा। और यह केवल तभी संभव है जब बलात्कार के अपराधियों को मृत्यु के लिए फांसी दी जाती है”।
इस संबंध में, aiumb के कार्यवाहक सचिव और एक वरिष्ठ पत्रकार श्री यूनुस मोहानी ने एक चुभता हुआ सवाल उठाया। उन्होंने पूछा: “क्या यह ‘न्यू इंडिया’ ‘उदार और प्रगतिशील’ लोगों से संबंधित है, जो लंबे समय तक अपने समाज में ऐसे घिनौने अपराधों को देख रहे हैं, और अब लगभग एक दैनिक आधार पर?” उन्होंने कहा क्योंकि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में भी कहा है”, “हमें समझ में नहीं आता हैं कि आरोपी को गिरफ्तार करने की बजाय पुलिस ने क्यों शिकायतकर्ता को पहले गंभीर मामलों के संबंध में गिरफ्तार किया है।

By: Ghulam Rasool Dehalvi

Kathua Rape Crime: AIUMB Calls for a National Consensus for Exemplary Punishment for the Culprits

13 April 2018

Harshly condemning the rape and murder of the eight-year-old innocent girl in Kathua district, All India Ulama & Mashaikh Board (AIUMB), an apex body of Sufi Muslims in India is calling for a national consensus for exemplary punishment for the culprits.
“It should be nothing short of a ‘death penalty’ which is only fitting for this insane and inhuman brutality of the beasts”, said Syed Hasan Jamee, the national secretary of the AIUMB. He further said that the government should bring a “new law” on the rising rape crimes.
Syed Salman Chishty, the Joint Secretary of All India Ulama & Mashaikh Board and the hereditary custodian of the Ajmer Sharif said:
“An amendment in the Protection of Children from Sexual Offences (POCSO) Act on death penalty for rape of children below 12 years of age is mandatory after India has witnessed several brutal incidents of the rapes where the victims were mostly minor girls”, he added.
Highlighting the crucial aspects of this tragedy, the World Sufi Forum’s spokesperson, writer and media co-coordinator, Ghulam Rasool Dehlvi stated: “The brutal rape and merciless murder of Asifa—a minor Indian child—should open our eyes. But beware! It should not be painted as Muslim victimhood mentality in the country. It doesn’t make any difference if the victim is Muslim, Hindu, Dalit or of any other faith, creed or caste.”
Mr. Dehlvi continued: “There are a few people who are flogging off the narrative that the innocent Asifa was victimized because she was a Muslim’s daughter, besides belonging to the tribal community of Gujjar and Bakarwal. But for any Indian citizen sincerely concerned with this ghastly development, it makes no difference—being Muslim or Hindu. What worries us is the brutality and oppression in the disguise of the false religious identity and what concerns us the breaking of silence for all victims rising above any division on the basis of religion. Both the 8-year Muslim girl of Kathua and the 18-year old Hindu girl of Unnao were victims of the ‘inhuman’ men of the beastly nature. They were not part of a civilized society. We must feel ashamed of them being Indians. However, it should not trigger any sense of communal polarization in India.”
He added saying: “Though the Prime Minister has assured the country that no culprit will be spared and that “Our daughters will definitely get justice”, we have to watch if the complete justice would be delivered. And that is only possible when the rape criminals are hanged to death”.
In this regard, the officiating secretary of the AIUMB and a veteran journalist, Mr. Yunus Mohani posed a hard-hitting question. He asked: “Is this the newfound narrative of “New India” belonging to the ‘liberal and progressive’ people who have been witnessing such heinous crimes in their society for long, and now almost on a daily basis?”
“We fail to understand why the Investigating Agency instead of arresting the accused persons, arrests the complainant first in connection with such serious cases, as the Allahabad High Court has also asked in its order”, he averred.

By: Ghulam Rasool Dehalvi

इस्लाम ने दिया दुनिया को लेडीज़ फर्स्ट का तसव्वुर : सय्यद मोहम्मद अशरफ

8 अप्रैल/ पश्चिम बंगाल
इस्लाम ने दिया दुनिया को लेडीज़ फर्स्ट का तस्व्वुर” यह बात वर्ल्ड सूफी फोरम व आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने बोर्ड की इस्लामपुर शाखा द्वारा आयोजित एकदिवसीय सेमिनार में बतौर मुख्य अतिथि बोलते हुए कही।
हज़रत ने कहा कि पूरे मुल्क में लोग प्रदर्शन कर रहे हैं, हमारी मां बहनों को भी सड़कों पर उतरना पड़ा है, कानून के खिलाफ जिसकी वजह हमारा दीन पर अमल न करना है, अल्लाह रब्बुल इज्जत तलाक़ को हलाल चीज़ों में सबसे ज़्यादा नापसंद फरमाता है तो फिर उसका इस्तेमाल छोटी छोटी बातों पर करना किस तरह सही हो सकता है, मुसलमान पर शराब हराम है और अक्सर मुसलमान शराब के नशे में तलाक़ दे रहे हैं और फिर मुफ्तियों के पास जाकर फतवा मांगते फिरते हैं, अगर मुसलमान अल्लाह के हुक्म पर अमल करे तो वह इस परेशानी से बच सकते हैं।
उन्होंने कहा, निकाह के वक़्त अगर काजी दूल्हा और दुल्हन दोनों को उनके हक बताए और शादी से एक महीना पहले से दोनों के घरवाले उन्हें शादीशुदा ज़िन्दगी गुजारने के इस्लामी तरीके जानने और समझने के लिए किसी जानकार आलिमे दीन से राबता करे तो इस परेशानी से बड़ी आसानी से बचा जा सकता है।
हज़रत ने कहा कि इस्लाम ने ही दुनिया को लेडीज फर्स्ट का तसव्वुर दिया है, वह भी सिर्फ तसव्वुर नहीं बल्कि इस पर अमल भी किया है, उसका सबसे पहला उदाहरण निकाह है जिसमें पहले लड़की की इजाज़त ली जाती है उसके बाद लड़के से पूछा जाता है, इतने अहम फैसले में इस्लाम ने लड़की को पहला हक दिया है।
यह इस्लाम ही है जिसने हमारी मां के कदमो में जन्नत रखी और हमारी बेटियों को हमारे लिए रहमत बना दिया, ऐसे में इस्लाम पर औरतों के साथ ज़ुल्म का इल्ज़ाम लगाना जहालत है, इसके सिवा कुछ भी नहीं, उन्होंने साफ कहा कि हमारी औरतों को भी दीन सीख कर उस पर मजबूती से अमल करना चाहिए, औरतों की भी ज़िम्मेदारी है समाज को बुराइयों से बचाने की।

By
यूनुस मोहानी

अयोध्या मुद्दे का समाधान केवल बातचीत से: सय्यद मोहम्मद अशरफ

नौतनवा: 1 April 2018
भारत नेपाल सीमा पर स्थित नौतनवा में आयोजित एक कार्यक्रम में शिरकत करने आये वर्ल्ड सूफी फोरम एवं ऑल इंडिया ओलेमा मशाइख बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष सैय्यद मोहम्मद अशरफ मियां कछौछवी ने कहा कि देश में अमन कायम रखने के लिए हम सभी को प्यार और मोहब्बत के साथ रहने की जरूरत है।
इस दौरान उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि आयोध्या मसले का हल केवल आपस मे बातचीत से हो सकता है, क्योंकि सियासतदानों ने अपना काम तो कर ही दिया है, अब हम हिंदुस्तान वासियों का काम बचा है और हमें अपनी जिम्मेदारियां निभाना चाहिए और बातचीत से इस मसले का हल निकालना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हम लोग मंदिर और मस्जिद की बात कर रहे है लेकिन इंसानी जिंदगी के बारे में नही कुछ कर रहे है, देश मे नफरत का माहौल बनाने से किसी चीज का हल नहीं निकल सकता इससे इंसानियत जरूर खतरे में पड़ेगी, हमारे मुल्क की गंगा जमुनी तहजीब जरूर खतरे में पड़ेगी और हमारी जो सुपर पावर बनने की रेस है कहीं इन्हीं वजहों से पीछे ना हो जाए इस लिए बातचीत से अयोध्या मसले का कोई न कोई हल निकल आएगा

सियासत ने अपना काम कर दिया है आग आपको बुझानी है : सय्यद मोहम्मद अशरफ

30 मार्च/ कोल्हिपुर महाराजगंज,
“सियासत ने अपना काम कर दिया है आग आपको बुझानी है ” ये बात वर्ल्ड सूफी फोरम एवम् आल इंडिया उलमा व मशायख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने एक जलसे को संबोधित करते हुए कही।
हज़रत ने कहा बिहार, बंगाल में जो कुछ चल रहा है अगर उसे वक़्त रहते नहीं रोका गया तो पूरा देश इसकी चपेट में आ जाएगा और मुल्क के लिए इससे बुरा कुछ नहीं होगा ,उन्होंने कहा जिस तरह लोग सड़कों पर धर्म बचाने निकल पड़े हैं अगर यह लोग धर्म का पालन कर लेते तो इनके हाथ में हथियार नहीं गुलाब के फूल होते।
सियासत अपनी घिनौनी चाल चल रही है और बेरोजगारों की भीड़ उनके इशारे पर नाच रही है नतीजा आगजनी पथराव हत्या लूट ,अगर लोगों ने जल्दी यह बात नहीं समझी तो देश का बड़ा नुक़सान होगा लिहाज़ा सरकारों की पहली ज़िम्मेदारी है कि वह हालात संभाले और निष्पक्षता के साथ कार्यवाही करते हुए दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दे।
हज़रत ने कहा लोगों को याद रखना चाहिए कि मंदिर और मस्जिद का फायदा तब है जब आप ज़िंदा हैं इंसान नहीं होगा तो इनका क्या फायदा और हम इंसान मार रहे हैं इन इबादतगाहों के लिए सामाजिक सदभावना को खतम करने की नापाक कोशिश की जा रही है ,गंगा जमुनी तहजीब को तार तार किया जा रहा है, ऐसे समय में जरूरत है ख्वाजा गरीब नवाज के मिशन पर काम किया जाए, मिशन यह है कि मोहब्बत सबके लिए नफरत किसी से नही अगर सब इसपर अमल कर लें तो इस आग को रोका सकता है।

By: Yunus Mohani