मोहब्बत ज़िन्दगी है नफरत मौत : सय्यद मोहम्मद अशरफ

4 मार्च/पीलीभीत
मोहब्बत ज़िन्दगी है नफरत मौत ‘यह विचार आल इंडिया उलमा व मशायख बोर्ड एवं वर्ल्ड सूफी फोरम के अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने आल इंडिया अशरफुल अम्बिया कान्फ्रेंस में बोलते हुए रखे .उन्होंने कहा कि दुनिया तबाही की राह पर चल पड़ी है सीरिया हो यमन हो या दुनिया का कोई भी कोना हिंसा पैर पसार रही है और इन्सानी जिंदगियों को निगल रही है .

हज़रत ने कहा कि रहमते आलम सल्लल्लाहुअलहिवसल्लम ने दुनिया को जो पैगाम दिया उसी में सबकी भलाई है हमें सीरत के हर हर पहलू को अमली ज़िन्दगी में उतारने की कोशिश करनी चाहिए मेरे सरकार ने फ़रमाया कि लोगों में बेहतर वह जो लोगों का भला चाहता है ,तो खुद को बेहतर बनाना होगा .

फरमाने रसूल है कि मुसलमान वह जिसकी ज़बान और हाथ से सारे इन्सान महफूज़ रहें तो अब समझ ले दुनिया कि मज़लूमो के कातिल कौन हैं .

मोहब्बत ज़िन्दगी है क्योंकि मोहब्बत में भलाई है, नफरत मौत है क्योंकि नफरत में नुक्सान है गरीब नवाज़ ने इसीलिए कहा मोहब्बत सबके लिए नफरत किसी से नहीं ,इसी बात को आम कर दीजिये दुनिया से ज़ुल्म मिट जायेगा

मुफ्ती साजिद हस्नी कादरी ने कहा कि हमारे आक़ा हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा पूरी दुनिया के लिए रहमत बनकर आए और हुज़ूर ने हमेशा गरीबों व नादार लोगों की मदद की । उन्होंने लोगों से हुज़ूर की सीरत-ए-तैयबा पर चलने की हिदायत दी.

और सरकार ए कलाँ हज़रत सैयद मुख्तार अशरफ अशरफी जिलानी रहमतुल्लाह अलैहि की जीवनी पर भी विस्तार से प्रकाश डाला।

सभा का आगाज़ क़ुरआन करीम की तिलावत के साथ हाफिज रिजवान अशरफ ने किया.निज़ामत मौलाना गुलाम मुस्तफा ने की.जलसे को मुफ़्ती नूर मोहम्मद हसनी, मौलाना यासीन अशरफी, मुफ्ती रिज़वान अहमद अशरफी, मुफ्ती जाकिर हुसैन, सैयद कलीम अशरफ, सैयद सुहैल अहमद अशरफी , सैयद हैदर अशरफ ने भी संबोधित किया।

सभा में मौलाना शादाब अली, ज़हीर अहमद अशरफी, तक़ी शम्सी, मंसूर अहमद शम्सी, जमील अशरफी, गुड्डू अशरफी, सरताज अहमद, नूर मियां लुत्फी, जहीर मियां लुत्फी, गनी शम्सी और हाफिज जाकिर हुसैन के अलावा हज़ारों की तादाद में लोग मौजूद रहे.जलसे का अंत सलात व सलाम और देश में अमन व शांति की दुआ के साथ हुआ.

सीरिया समेत पूरी दुनिया में इंसानियत खतरे में ,जुमे में करें ख़ास दुआ : सय्यद मोहम्मद अशरफ

28 फ़रवरी/जयपुर
सीरिया समेत पूरी दुनिया में इन्सानियत खतरे में है इसके लिए जुमे को ख़ास दुआ का करे एहतेमाम “जयपुर में शरियत का पैगाम उम्मत के नाम कार्यक्रम में बोलते हुए यह ऐलान आल इंडिया उलेमा व मशायख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने किया .

हज़रत ने कहा कि जिस तरह की दर्दनाक खबरे और फोटो तथा वीडियो सीरिया से आ रहे हैं उससे पता चलता है कि इंसानी जिंदगियां किस क़दर परेशानी में हैं ऐसे में हमारा फ़र्ज़ है कि हम वहां जल्द अमन कायम हो इसके लिए दुआ करें और साथ ही उनकी मदद के लिए जो क़दम मुमकिन हो उसे उठाया जाये .हज़रत ने कहा आल इण्डिया उलेमा मशायख बोर्ड पूरी उम्मते मुस्लिम का आह्वाहन करता है कि हर मस्जिद में जुमे के रोज़ ज़ुल्म से करहाती इंसानियत के लिए दुआ की जाये .

हज़रत ने फ़रमाया कि नबी-ए –रहमत हज़रत मोहम्मद मुस्तफा सल्लललाहूअलहि वसल्लम का इरशाद है कि पूरी उम्मत एक जिस्म की तरह है जिसके किसी भी हिस्से में अगर तकलीफ हो तो पूरे जिस्म को इसका एहसास होना चाहिए .यही नहीं तमाम मखलूक अल्लाह का कुनबा है इसमें सिर्फ इंसान नहीं आते बल्कि सभी आ जाते हैं तो हमारी ज़िम्मेदारी है कि तड़पती और दर्द से चीखती इंसानियत का दर्द महसूस करें और ख़ास दुआ करें कि जल्द ही उन्हें इस परेशानी से निजात मिले और सीरिया समेत जहाँ जहाँ भी इंसानियत खतरे में है अमन कायम हो .

उन्होंने लोगों से कहा कि इस जुमे को होली भी है रंगों के त्यौहार में नफरत के सौदागर ज़हर घोल सकते हैं लिहाज़ा आपको होशियार रहना होगा ताकि ऐसी साजिशों को नाकाम किया जा सके हमें अमन को कायम रखना होगा इसके लिए हर मुमकिन कोशिश की जानी चाहिए प्रशासन का पूरा सहयोग कीजिये .