ख्वाजा ग़रीब नवाज़ की विचारधारा को मानने वाले ज़ालिम नहीं हो सकते : सय्यद मोहम्मद अशरफ

24 मार्च/ अजमेर
चिश्ती मंज़िल दरगाह अजमेर शरीफ में आल इन्डिया उलमा व मशाइख बोर्ड ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की जिसकी अध्यक्षता बोर्ड के संरक्षक हज़रत मौलाना सय्यद मेहदी मियाँ चिश्ती साहब ने की। उन्होंने कहा कि दुनिया में जिस तरह बारूद की बू फ़ैल गई है उसे वापिस खुशबूदार बनाने के लिए मोहब्बत वाली खुशबू चाहिए जो गरीब नवाज़ के दर के फूलों से आती है ।हज़रत ने कहा कि गरीब नवाज़ मिशन इंसानियत की सेवा है तड़पती हुई इंसानियत का इलाज गरीब नवाज़ ने किया और अबतक उनके मिशन पर चलने वाले यह काम कर रहे हैं।हज़रत ने सभी उर्स की मुबारकबाद दी। वर्ल्ड सूफी फोरम एवं आल इन्डिया उलमा व माशाइख़ बोर्ड के संस्थापक व अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि इस बारगाह से हमेशा मोहब्बत की तालीम मिली है, यहां लोगो को गले लगाना सिखाया जाता है, गला काटने की बात करने वालों का यहां से कोई वास्ता नहीं। इस बात से यह पहचान करना आसान है कि दहशतगर्द कौन हैं।
हज़रत ने कहा कि हम ख्वाजा के दर से इराक़ में दहशतगर्दों के ज़रिए भारतीय नागरिकों को क़त्ल किए जाने की कड़ी निंदा करते हैं साथ ही यह ऐलान फिर से करते हैं कि इन दहशतगर्दों का इस्लाम से कोई वास्ता नहीं, न सिर्फ इस्लाम बल्कि दुनिया के किसी भी धर्म से इनका ताल्लुक नहीं, क्योंकि मजहब मोहब्बत की तालीम देते हैं।
उन्होंने पूरी दुनिया के लोगों को उर्स गरीब नवाज़ की मुबारकबाद देते हुए कहा कि आईये गरीब नवाज़ के पैगाम “मोहब्बत सबके लिए नफरत किसी से नहीं” को आम करते हुए आपसी दूरियां मिटा दी जाए और देश में अमन की फिजा को और मजबूत किया जाए।
बोर्ड के राष्ट्रीय कार्यकारणी सदस्य हज़रत सय्यद अम्मार अहमद अहमदी उर्फ नय्यर मिंया ने कहा कि सूफिया की तालीम मज़लूम की हिमायत है न की ज़ुल्म करना, गरीब नवाज़ की बारगाह में असली हिन्दुस्तान दिखता है जहां बिना मजहब का फर्क किए, रंगो नसल का इम्तियाज़ किए बिना लोग मोहब्बत के साथ आते हैं और लंगर खाते हैं। उन्होंने कहा, गरीब नवाज़ की बारगाह में आकर वासुदेव कुटंबुकम की जो धारणा है वह दिखाई देती है।
बोर्ड के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव हाजी सय्यद सलमान चिश्ती ने सभी लोगों को ख्वाजा गरीब नवाज़ के 806 वे उर्स की मुबारकबाद दी और कहा कि आल इन्डिया उलमा व मशाइख बोर्ड हुज़ूर गरीब नवाज़ के मिशन को लेकर आगे चल रहा है, हम हर तरह की नफरत का कड़ा विरोध करते हैं, हमारा मिशन गरीब नवाज़ का मिशन है, यानी हर मज़लूम की हिमायत करना और सबके साथ मोहब्बत का सुलूक करना है।उन्होंने कहा,हम विश्व बंधुत्व का संदेश देते हैं, हम सब मिलकर पूरी दुनिया को मोहब्बत से जीत लें और नफरतों को हरा दें।

By: यूनुस मोहानी

इंसानियत की भलाई है ख्वाजा का मिशन : सय्यद मोहम्मद अशरफ

22 मार्च /नागौर,
‘इंसानियत की भलाई है ख्वाजा का मिशन’ वर्ल्ड सूफी फोरम और आल इंडिया उलेमा व मशाइख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने यह बात जश्ने ख्वाजा गरीब नवाज़ नाम से आयोजित एक महफ़िल में कही .
हज़रत ने कहा कि दर्द और ज़ुल्म से तड़पती हुई इंसानियत की भलाई के लिए हम सबको हज़रात ख्वाजा गरीब नवाज़ रहमतुल्लाह अलहि के मिशन पर चलना होगा क्योंकि इन्सानी हमदर्दी और भलाई की फ़िक्र में ही तमाम परेशानियों का हल छुपा हुआ है .
उन्होंने कहा कि गरीब नवाज़ की तालीम है कि भूखों को खाना खिलाओ अपने दुश्मन पर भी मेहरबानी करो अगर हम इन बातों पर अमल करने लग जाएँ तो खुद बखुद कई मसले खतम हो जायेंगे .बारगाहे गरीब नवाज़ से वाबिस्ता होने का यह मतलब नहीं कि सिर्फ हम उनके नामलेवा बने रहे बल्कि असल हक तब अदा होगा जब हम उनकी तालीम पर अमल भी करें उनके दिखाए गये रास्ते पर चलें ,इल्म हासिल करें .
हज़रत गरीब नवाज़ के पैगाम मोहब्बत सबके लिए नफरत किसी से नहीं को आम कर दीजिये इसके लिए बस आपको मोहब्बत वाला बन कर निकलना होगा सबके साथ से बेहतर सुलूक कीजिये आपसी झगड़ों को पहले खतम कीजिये और अपने मोहब्बत वाले सुलूक से लोगों का दिल जीतिये ,क्योंकि असली हुकूमत तो दिलों पर होती है गरीब नवाज़ लोगों के दिलों पर हुकूमत करते हैं.
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यूनुस मोहानी

ख़ुदा की बन्दगी और बन्दों की सेवा करना ही ख्वाजा ग़रीब नवाज़ का मिशन: सैयद मोहम्मद अशरफ

मकराना में जश्न ए ख्वाजा ग़रीब नवाज़ के अवसर पर ऑल इंडिया उलमा व मशाइख़ बोर्ड के अध्यक्ष का ख़िताब

22 मार्च / मकराना, नागौर (प्रेस विज्ञाप्ति) कल रात नागौर शरीफ के मकराना में जश्न ए ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ कार्यक्रम का आयोजन हुआ जिसमें विशेष रूप से आमंत्रित ऑल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड और वर्ल्ड सूफी फोरम के अध्यक्ष हज़रत सैयद मोहम्मद अशरफ किछोछ्वी साहब ने कहा कि हज़रत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती का मिशन ख़ुदा की बन्दगी और उस के बन्दों की सेवा करना है।
हज़रत ने विशेष रूप से कार्यक्रम में आए हुए युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि आप देश का भविष्य हैं, आप को अपनी शिक्षा को लेकर संवेदनशील होना होगा, आज मुस्लिम वर्ग क्यों पिछड़ा है, उसका सब से बड़ा कारण है कि कोशिश और मेहनत करने से पहले ही हार मान लेते हैं कि हम शिक्षा प्राप्त कर के क्या करेंगे जब हमें नौकरियां ही नहीं मिलेंगी। यह गलत सोच है, हज़रत ने कहा कि अगर कोई युवा दिन में आठ घंटे पढ़ाई के लिए समय निकालता है तो आप दस घंटे पढ़ाई के लिए समय निकालें, साथ ही कहा कि शिक्षा प्राप्त करने का उद्देश्य केवल पैसा प्राप्त करना न हो बल्कि हर विभाग में अपना प्रतिनिधित्व होना चाहिए जिस से अपने देश, समाज और कौम की सेवा कर सकें।
हज़रत ने कहा कि आज हम जिन के नाम पर यहाँ इकठ्ठा हुए हैं उनका मिशन शिक्षा प्राप्त करना था, आपने कहा कि मुस्लिम क़ौम कब तक मज़लूमियत का रोना रोती रहेगी, अब समय आ गया है कि मज़लूमियत का रोना बंद करें और कड़ी मेहनत करना शुरू करें। हमारे उज्ज्वल भविष्य का निर्माण वर्तमान प्रतिक्रिया के आधार पर पर टिका हुआ है। नींव को उत्तेजक बना कर निर्माण पूरा कर लें या हार मान कर भविष्य के निर्माण की उम्मीदों के किले अभी गिरा दें, यह आपके हाथ में है।
कार्यक्रम में मौलाना मोहम्मद अबरार अशरफी नाज़िम जामिया हनफ़िया नजमुल उलूम, हाफिज़ मोहम्मद अशरफ शेरानी, मौलाना अरफात अज़हरी, मौलाना मोहम्मद मुस्तक़ीम शेरानी, मौलाना अब्दुल रहमान, हाफिज़ मोहम्मद रिज़वान, हाफिज़ मोहम्मद नदीम, मौलाना मोहम्मद शाहरुख, मौलाना मोहम्मद शाकिर, मौलाना मोहम्मद रफीक़, मौलाना मोहम्मद जावेद और अज़मत अली, अयूब खान शेरानी, यूसुफ खान शेरानी, अब्दुल ग़फ्फार खान के अलावा मकराना की सभी मस्जिदों के इमाम और कई लोगों ने भाग लिया, कार्यक्रम का अंत देश में शांति की दुआ और सलात व सलाम के साथ हुआ।

By:
हुसैन शेरानी

जो लोगों के लिए आसानी पैदा करे उस पर दोज़ख़ की आग हराम : सय्यद मोहम्मद अशरफ

21 मार्च / हनुमानगढ़,
“जो लोगों के लिए आसानी पैदा करे उस पर दोजख की आग हराम है” यह विचार वर्ल्ड सूफी फोरम और आल इन्डिया उलमा व मशाइख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने कल एक जलसे को खिताब करते हुए कही, उन्होंने कहा कि प्यारे अाक़ा सरवरे आलम सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम का इरशाद है कि जिसने अपने लोगों के लिए आसानी पैदा की उस पर जहन्नुम और जहन्नुम की आग पर वह शख्स हराम कर दिया गया ।
उन्होंने कहा, सूफिया ए किराम ने सबके लिए आसानी पैदा की और लोगों को बुराई से भलाई की तरफ लगा दिया, उनका मिशन मोहब्बत है और नफरत की हर बात इनके यहां मना है, इनकी बारगाहों में दिलों को संभाल कर आया जाता है क्योंकि इनकी नजर हमारे ज़ाहिर पर नहीं हमारे दिलों पर होती है।
हज़रत ने कहा दुनिया भूजल संरक्षण दिवस मना रही है, प्यारे नबी का इरशाद है कि “पानी को बर्बाद न करो चाहे तुम्हारे पास झरना ही क्यों न हो “नबी ने यह बात आज से 1400 साल पहले कही, दुनिया आज इसके लिए परेशान है, यानी अगर तालीमे नबी पर अमल किया जाए तो हर समस्या का आसानी से हल निकाला जा सकता है।
उन्होंने कहा, पूरी दुनिया तरह तरह की चोरियों से परेशान है, किसी का डाटा महफूज़ नहीं है लेकिन अल्लाह का निज़ाम यह है कि क़ुरआन का एक एक लफ्ज़ महफूज़ है यह उसकी कुदरत की शान है।

By: यूनुस मोहानी

अल्लाह के हुक्म के पाबंद हो जाओ सड़कों पर आंदोलन नहीं करने पड़ेंगे – सय्यद अशरफ

16 मार्च / हनुमानगढ़
अल्लाह के हुक्म के पाबंद हो जाओ सड़कों पर आंदोलन नहीं करने पड़ेंगे” यह बात वर्ल्ड सूफी फोरम और आल इन्डिया उलमा व माशाइख बोर्ड के संस्थापक, अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने कही।
हज़रत ने कहा कि मौजूदा वक़्त में देश में जिस तरह तीन तलाक़ को लेकर जो मामला चल रहा है और हर तरफ से शरीयत बचाने की आवाज़ लग रही है उनसे पूछा जाना चाहिए कि शरीयत हमें बचाने के लिए है या हम शरीयत को बचा सकते हैं, उन्होंने कहा शरीयत अमल करने की चीज है उस पर अमल कीजिए आपको सड़कों पर उतरना नहीं पड़ेगा ।
उन्होंने कहा कि हमारे नबी रहमते आलम सल्लल्लहू अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया कि निकाह को आसान कर दो हमने उसे मुश्किल कर दिया है आज एक लड़की का बाप हर वक़्त फिक्र में है कि कैसे अपनी बेटी का निकाह करे, दहेज की लानत को हमने अपने ऊपर लाद लिया है, हमें हुक्म है कि निकाह आसान कर दो ताकि ज़िना मुश्किल हो जाए हमने उसका उल्टा किया तो अब सवाल यह है कि क्या ऐसे शरीयत बचेगी ?
हज़रत ने कहा कि निकाह इस तरह मुश्किल हो गया है कि एक ज़िंदगी गरीब बाप को कम लगने लगी है और जिस चीज को अल्लाह और उसके रसूल ने सबसे ज़्यादा ना पसंद किया उसे इस क़दर आसान कर दिया कि एक लम्हे में रिश्ता ख़तम कर दिया जाता है, इस बात का ख्याल भी नहीं कि वह खातून तुम्हारे बच्चो की मां है,आखिर क्या होगा उस औरत का ?
उन्होंने साफ कहा कि अल्लाह के हुक्म के पाबंद हो जाओ, निकाह को आसान करो दहेज की लानत से बचो और जिस चीज को अल्लाह और उसके रसूल पसंद नहीं करते उसके करीब भी मत जाओ खुद बखुद आसानियां हो जाएंगी और सड़कों पर यह आन्दोलन नहीं करने होंगे।

By: यूनुस मोहानी

फरमाने नबी: उसके लिए जन्नत में घर कि ज़िम्मेदारी मेरी है जो हक़ पर होने के बाद भी झगड़ा छोड़ दे : सय्यद मोहम्मद अशरफ

15 मार्च /हिंडो जैतससर
फरमाने नबी है कि उसके लिए मैं जन्नत में एक घर की ज़िम्मेदारी लेता हूँ जो हक पर होने के बावजूद भी झगड़ा छोड़ दे” यह बात वर्ल्ड सूफी फोरम और आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने कही.
वह कल यहाँ एक जलसे में बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे थे. उन्होंने कहा कि रसूले खुदा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का यह फरमाने आलिशान अमन को कायम करने के लिए बेहतरीन अमल है और अपनी दुनिया और आखिरत दोनों सवारने का जरिया भी है. उन्होंने कहा कि आज कल लोग ग़लत होते हुए भी पीछे नहीं हटने के लिए बज़िद हैं, उन्हें इस फरमाने रसूल पर गौर करना चाहिए क्योंकि अगर आप ग़लत हैं तो आप ज़ुल्म कर रहे हैं और ज़ुल्म करने वाला यकीनन ज़ालिम है.
हज़रत ने कहा, मुल्क में जिस तरह के हालात हैं हमें इस हदीसे पाक पर गौर करने की ज़रूरत है ताकि हम आपस में प्यार और मोहब्बत के साथ रह सकें. हज़रत ने लोगों का ध्यान बदगुमानी की तरफ भी दिलाया और कहा कि रहमते आलम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का इरशाद है कि बदगुमानी बदतरीन झूठ है, लिहाज़ा अपने भाई के लिए बदगुमानी न पालो बल्कि जब तक हकीकत का पता न हों उसके बारे में अच्छा तसव्वुर करो इससे नफरते खतम होंगी और अफवाहों से होने वाले नुक्सान खुद बखुद रुक जायेंगे.
उन्होंने कहा कि तालीमे नबी को जानिए और उस पर अमल कीजिये, मौजूदा माहौल का हल भी हमें कुरआन और हदीस में दिया गया है, उसे पढ़िए और समझिये फिर उस पर अमल भी कीजिये. हज़रत ने कहा कि अपने पड़ोसी का ख्याल रखिये क्योंकि हमारे नबी का फरमान है कि वह शख्स मुसलमान नहीं हो सकता कि जो खुद पेट भर कर खाये और उसका पडोसी भूखा सो जाए और इसमें कहीं मज़हब की क़ैद नहीं है, पड़ोसी किसी भी धर्म का मानने वाला हो हमें उसका भरपूर ख्याल रखना चाहिए.

By: यूनुस मोहानी

शांति के बिना विकास की परिकल्पना भी बेईमानी : सय्यद मोहम्मद अशरफ

13 मार्च/ हिंदौर सूरतगढ़,
“शांति के बिना विकास की परिकल्पना भी बेईमानी” वर्ल्ड सूफी फोरम और आल इन्डिया उलमा व मशायख बोर्ड के संस्थापक व अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने यह बात एक जलसे को संबोधित करते हुए कही।
उन्होंने कहा,विकास के लिए पहली शर्त है शांति, अगर अमन को खतम किया गया तो विकास के बारे में सोचा भी नहीं जा सकता, हज़रत ने कहा कि पैग़म्बरे अमन ने तालीम दी जिससे पूरी दुनिया में निश्चित तौर पर शांति कि स्थापना की जा सकती है, उन्होंने कहा, नबी ने फरमाया कि तुम्हारा पड़ोसी तुम्हारे शर से अगर महफूज़ नहीं है तो तुम मोमिन नहीं हो सकते, सिर्फ इस हदीस पर अमल करने से शांति स्थापित की जा सकती है।
हज़रत ने कहा कि कोई भी धर्म हिंसा की शिक्षा नहीं देता, सभी धर्म कहते हैं कि मानवता की रक्षा की जानी चाहिए, फिर इस्लाम ने तो जानवरों तक के अधिकार बताए हैं और पैगम्बर ने तालीम दी कि किसी चिड़िया का घोसला भी न उजाड़ा जाए। मुसलमानों की ज़िम्मेदारी अमन क़ायम करने की ज़्यादा है क्योंकि हमें लोगों के लिए भलाई करनी है, अगर खुद को बेहतरीन लोगों में शामिल करवाना चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि आपस में मोहब्बत के साथ रहना और अपने पड़ोसी के हुकूक अदा करना हमारी ज़िम्मेदारी है, उसे निभाना होगा, उन्होंने याद दिलाया कि किस तरह हिन्दुस्तान में सूफिया ने मोहब्बत की तालीम को आम किया है, उस पर ध्यान देकर अमल करना होगा क्योंकि मुल्क के विकास में हमारा योगदान अग्रणी होना चाहिए।

नबी का फरमान: जिससे लोग भलाई की उम्मीद न रख पाएँ वह सबसे बुरा इंसान : सय्यद मोहम्मद अशरफ

12 मार्च /सूरतगढ़ गंगानगर

नबी का फरमान जिससे लोग भलाई की उम्मीद न रख पाएँ वह सबसे बुरा इंसान” यह बात वर्ल्ड सूफी फोरम और आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड के संस्थापक व अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने एक जलसे को ख़िताब करते हुए कही.
उन्होंने कहा कि रसूले खुदा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया कि जिस शख्स से लोगों को भलाई की उम्मीद न हो और उसके शर से महफूज़ न हो वह बदतरीन शख्स है. हज़रत ने कहा कि फरमाने नबी यह भी है कि तुम में सबसे बेहतर वह है जो लोगों के काम आए और उनकी भलाई करे तो अब हमें इस पर अमल करना होगा.
उन्होंने कहा कि यहाँ कहीं मज़हब की बात नहीं की गई बल्कि सबके लिए कहा गया है, अगर हम मोहब्बत का दावा करते हैं तो हमें भला बनना होगा न कि बदतरीन और हमारे भला बन जाने से अमन खुद बखुद कायम हो जाऐगा.
उन्होंने कहा, इसी तालीम को औलिया अल्लाह ने आम किया और इस पर अमल कर के लोगों के दिलों को जीत लिया, यही वजह है कि आज भी लोग उनकी मज़ारों पर अकीदत के फूल लेकर आते हैं और दामने मुराद भर भर कर ले जाते हैं. हजरत ख्वाजा गरीब नवाज़ रहमतुल्लाहि अलैहि का कौल कि अपने दुश्मन से मेहरबानी से पेश आना और उसका ख्याल रखना नफस की जीनत में से एक है, साफ़ इसी हदीस की तरफ इशारा करता है, हमें इस पर अमल करना है तभी हम कामयाब हो सकते हैं.

By: यूनुस मोहानी

मंदिर मस्जिद तलाक नहीं ,समस्या है अशिक्षा बेरोज़गारी और गरीबी : सय्यद मोहम्मद अशरफ

12 मार्च /उदयपुर
मंदिर, मस्जिद तलाक़ नहीं समस्या है अशिक्षा बेरोज़गारी और गरीबी: यह विचार वर्ल्ड सूफी फोरम और आल इंडिया उलमा व माशाइख़ बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने उदयपुर में एक सभा को संबोधित करते हुए रखे.
उन्होंने कहा कि मुल्क में रहने वाले मुसलमानों में सबसे कम तलाक होता है, ऐसा अब तक किये गए तमाम सर्वे बताते हैं तो फिर यह राष्ट्रीय समस्या नहीं हो सकती लेकिन मुसलमानों को भी अपने आप में सुधार करना होगा सिर्फ शरियत बचाने का नारा लगाने से कुछ नहीं होगा बल्कि शरियत को जानकर उसपर अमल करना होगा यह तलाक का मुद्दा ही खतम हो जायेगा. अभी लोग अपनी अज्ञानता के चलते कई बार गलती कर रहे हैं जिसे नहीं किया जाना चाहिए.
हज़रत ने कहा कि इसी तरह मंदिर और मस्जिद भी कोई समस्या नहीं है मामला कोर्ट में है जो फैसला आएगा हो जायेगा इसको लेकर भी देश में कोई हंगामा नहीं होना चाहिए और न ही लोगों का वक़्त इस मुद्दे पर बर्बाद किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा, देश की सबसे बड़ी परेशानी बेरोजगार नौजवानों की बढती हुई फ़ौज है जो निरंतर अवसाद में ग्रस्त होती जा रही है, सरकार को इसकी फ़िक्र करनी चाहिए, यदि इस पर जल्दी गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो देश का बड़ा नुक्सान होगा.
अशिक्षा एक गंभीर मुद्दा है जहाँ सर्व शिक्षा अभियान पर इतना पैसा ख़र्च हो रहा है, वहीँ इसका कोई प्रभाव नहीं दिख रहा, लोगों को सही शिक्षा मिले इसका प्रबंध किया जाए और गरीबों के हित में काम किया जाए, शिक्षित लोग रोज़गार प्राप्त करेंगे तो गरीबी खुद बखुद खतम हो जाएगी, इसपर ध्यान दिया जाना चाहिए.
हज़रत यहाँ अपने एक दिवसीय दौरे पर आए हुए थे, इस अवसर पर उन्होंने इस्लाम के पहले खलीफा का ज़िक्र करते हुए बताया कि आज हज़रत अबु बकर सिद्दीक़ रज़ी अल्लाहु अन्हू के विसाल का दिन है, उनकी सीरत पर प्रकाश डालते हुए हज़रत ने कहा कि हमें अपने नबी से वैसे मोहब्बत करनी चाहिए जैसे हज़रत अबु बकर सिद्दीक़ रज़ी अल्लाहु अन्हू ने की.

By : यूनुस मोहानी

दशमलव 5 फीसदी औरतों की नहीं हुकूमत पूरे 5 फ़ीसदी औरतों की फ़िक्र करे : सय्यद मोहम्मद अशरफ

10 मार्च /मालेगांव , .5 फीसदी औरतों की नहीं हुकूमत 5 फ़ीसदी औरतों की फ़िक्र करे “यह बात वर्ल्ड सूफी फोरम एवं आल इंडिया उलेमा व मशाइख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने मालेगांव में आयोजित तह्फ्फुज़े शरियत व सूफी कांफ्रेंस में बोलते हुए कही .

उन्होंने कहा कि मुसलमानों को चाहिए कि वह इल्म हासिल करें और शरियत पर अमल करें ताकि किसी तरह की कोई परेशानी न हो सिर्फ तहफ्फुज़े शरियत का नारा लगाने से कुछ नहीं होगा .हज़रत ने कहा कि शरियत यानि इस्लामी कानून इंसान की हिफाज़त के लिए है ताकि वह ज़ुल्म से बचा रहे आखिर यह हालत कैसे आ गए कि हम शरियत बचाने के लिए आज कोशिश कर रहे हैं ?हमें इस बात पर गौर करना चाहिए अगर हमने शरियत पर अमल किया होता तो यह हालात नहीं आते .

तलाक को लेकर जिस तरह बवाल मचा है और कानून बनाने की कवायद चल रही है वह भी हमारी अपनी कमियों की वजह से हुआ है जिस अमल को अल्लाह और अल्लाह के रसूल ने सख्त नपसंद किया है उसपर अमल किया जाता है तो तकलीफ होनी ही है हमें चाहिए हम अपने अल्लाह को राज़ी करें .

उन्होंने कहा कि अगर सरकार वाकई में मुसलमान औरतों की फ़िक्र कर रही है तो तलाक पर कानून बनाने से तो महज़ .5 %मुस्लिम औरतों का ही भला होगा और अगर आर्टिकल 341 से प्रतिबन्ध हटा लिया जाये तो 5 % मुस्लिम औरतों को फायेदा होगा अगर हक ही देना है तो 341 से प्रतिबन्ध हटा लिया जाना चाहिए क्योंकि तभी सबका साथ सबका विकास मुमकिन होगा .

आल इंडिया उलेमा व मशाइख बोर्ड यूथ के राष्ट्रिय अध्यक्ष मौलाना सय्यद आलमगीर अशरफ किछौछवी ने कहा कि युवाओं को चाहिए कि खुद तालीम हासिल करें और अपने छोटों को मदद करें सूफिया की तालीमात को पढ़ें भी और उस पर अमल भी करें क्योंकि देश में जिस तरह के हालात बनाने की कोशिश की जा रही है उसे सूफिया की मोहब्बत भारी तालीम से ही रोका जा सकता है.

By: Yunus Mohani