सरकार बर्मा के बेगुनाहों को पनाह दे, मानवता को शर्मसार होने से बचाये : सय्यद मोहम्मद अशरफ

अजमेर:7 सितम्बर
भारत सरकार बर्मा से जान बचा कर आये बेगुनाह शरणार्थियों को शरण दे और मानवता को शर्मसार होने से बचाये,यह बात आल इंडिया उलमा मशाइख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने अजमेर शरीफ में कही। उन्होंने कहा भारत एक शांतिप्रिय देश है और सम्पूर्ण विश्व में शांति स्थापना के लिए सदैव प्रयत्नरत रहा है, इस समय जब बर्मा जो कि आदि भारत का ही अंग था वहां हिंसा चरम पर है, मानवता शर्मसार हो रही है, महिलाएं बच्चे बुज़ुर्ग, जवान कोई महफूज़ नहीं है और बर्मा में बरबरियत के साथ मानवता की हत्या की जा रही है। ऐसे में सरकार का रोहिंग्या शरणार्थियों से देश छोड़ने का आदेश निंदनीय है, हम सरकार से मांग करते हैं कि मानव जीवन बहुमूल्य है इसे बचाने के लिये हर संभव प्रयास किया जाना चाहिये। जिस प्रकार पड़ोसी देश बांग्लादेश ने मानवता के आधार पर दुखी लोगों के लिए दरवाज़े खोल दिये है भारत को भी आगे आकर रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए मदद हाथ बढ़ाना चाहिए।
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र संघ से भी इस संबंध में तुरंत कारगर क़दम उठाने की मांग की। हज़रत ने कहा कि सबको जहां बर्मा के लोगों के लिये दुआ करनी चाहिए वहीं रोहिंग्या शरणार्थियों तक मदद भी पहुंचानी चाहिए।
आल इंडिया उलमा मशाइख़ बोर्ड के संरक्षक व दरगाह अजमेर शरीफ के गद्दीनशीन हज़रत सय्यद मेहदी मिंया चिश्ती ने कहा कि दुनिया को मोहब्बत की ज़रूरत है और हम नफरत की फैक्ट्रीय लगा रहे हैं, धर्म के आधार पर शरणारथियों की स्थिति तय की जाएगी तो हम क्या संदेश देना चाहते हैं। निहत्थे जान बचाकर भागे लोगों से देश को खतरा कैसे हो सकता है। मानवता हमारी ज़रूरत है, सरकार को आगे बढ़ कर मदद करनी चाहिए।
आल इंडिया उलमा मशाइख बोर्ड के संयुक्त राष्ट्रीय सचिव सय्यद सलमान चिश्ती ने कहा कि” अतिथि देवो भव:” सिर्फ पर्यटन विभाग के प्रचार की सामग्री नहीं है यह भारत की संस्कृति है, उन्होंने बताया भारत के संसद भवन पर अंकित वसुधैव कुटुंबकम् का वाक्य हमारी धारणा का प्रतीक है कि हम सम्पूर्ण विश्व को एक परिवार मानते हैं और प्रधानमंत्री जी इसका उपयोग हर जगह करते हैं ऐसे में रोहिंग्या शरणार्थियों के संबंध में किरण रिज्जु का बयान प्रधानमंत्री के शब्दों के विपरीत है। कोई भी धर्म कभी खून बहाना नहीं सिखाता. मैं जितना जानता हूं उसके आधार पर शरणार्थियों की सेवा एंवम् सहायता के लिए हर धर्म ने सीख दी है। उन्होंने कहा कि मानवाधिकारों की रक्षा के लिए हर हाल में हमे बर्मा के शरणार्थियों को भारत में शरण देनी चाहिए,सरकार का यह फैसला की वह देश छोड़ कर चले जाएँ उचित नहीं है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा का भी यह उल्लघन प्रतीत होता है. हम भारत सरकार से मांग करते हैं कि अपना फैसला वापस ले।

क़ुर्बानी के असल मक़सद त्याग की भावना को आत्मसात करे मुसलमान : सय्यद मोहम्मद अशरफ

लखनऊ:1 सितम्बर कुर्बानी के असल मकसद त्याग की भावना को आत्मसात करे मुसलमान यह बात आल इन्डिया उलमा मशायक बोर्ड के संस्थापक अध्यछ हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने कही उन्होंने सभी को ईद की मुबारकबाद देते हुए कहा कि इस खुशी में हमे नहीं भूलना है कि हमारे तमाम लोग सैलाब में फंसे हुए हैं ,उनके लिये दुआ भी करनी है और अपनी हैसियत के हिसाब से मदद भी करनी है ,दरअसल कुर्बानी अपने रब की नजदीकी के लिये की जाती है जबकि खुदा खुद कहता है” कि तुम जो जानवर जिबह करते हो न तो उसका खून और न ही उसका गोश्त मुझ तक पहुंचता है मुझ तक सिर्फ तुम्हारी वह नियत पहुंचती है जो तुमने करके कुर्बानी की “।
हज़रत ने कहा कुर्बानी हमे त्याग सिखाती है ,अपने माल से गरीबों तक बेहतर खाना पहुंचाने का एक बेहतरीन जरिया है ,भूखमरी के खिलाफ एलाने जंग है, और लोगों की मदद का जज्बा पैदा करने का एक सबक ,ऐसे दौर में जब लोग महज एक रोटी के टुकड़े के लिए जान लेने और देने पर आमादा है ऐसे में भी कुर्बानी का गोश्त खुशी खुशी गरीबों तक पहुंचता है यह है इस अमल की खूबसूरती, इसे इस दौर में समझना बहुत ज़रूरी है।
हज़रत ने लोगों से क़ानून का सम्मान करते हुए कुर्बानी करने और साफ सफाई का पूरा ख्याल रखने की पुरजोर अपील की उन्होंने कहा कि हमारे किसी भी कार्य से किसी को तकलीफ नहीं पहुंचनी चाहिए ,इसका खास ख्याल रखा जाए ।
हज़रत ने लोगों से बर्मा समेत जहां भी इंसानियत पर ज़ुल्म किया जा रहा है उन सभी जगहों पर अमन के लिए दुआ करने और मजलूमों की हिफाजत के लिए दुआ की अपील की, उन्होंने कहा सभी को खुशियों में शामिल कीजिए यह मौका है लोगों को पैग़ाम देने का कि “मोहब्बत सबके लिए नफरत किसी से नहीं “,सबको ईद की मुबारकबाद
By: यूनुस मोहानी

क़ुर्बानी के लिये इंद्रेश कुमार की राय की मुसलमानों को ज़रूरत नहीं : सय्यद आलमगीर अशरफ

नागपुर: राष्ट्रीय मुस्लिम मंच के अध्यक्ष इंद्रेश कुमार के बयान कि मुसलमान केक काटकर कुर्बानी कर लें पर आल इंडिया उलेमा मशायख बोर्ड (यूथ) के राष्ट्रीय अध्यक्ष सय्यद आलमगीर अशरफ किछौछवी ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि हमें इंद्रेश कुमार और उनके किसी नाम निहाद मुस्लिम राष्ट्रीय मंच जैसे संगठन की राय की जरूरत नहीं है ।
इंद्रेश कुमार को कोई हक नही कि वह मुसलमानों को तबलीग़ करे, मुसलमानों को अपने धर्म को मानने और धार्मिक अनुषठानों को करने की आजादी हमारे संविधान के अनुच्छेद 25 में साफ साफ दी गई है, ऐसे में यह बयान जहां निंदनीय है वहीं संविधान की मूल भावना को ठेस पहुंचाने वाला भी, यह इशारा करता है कि वह कौन लोग है जिनका संविधान में विश्वास नहीं है।
उन्होंने कहा कुर्बानी का असल मकसद खुदा की निकटता प्राप्त करना है और उसका सबसे खूबसूरत जरिया लोगो की मदद है , कुर्बानी के जरिए इस्लाम ने भूखमरी के खिलाफ बड़ी जंग का ऐलान किया क्योंकि पुराने समय से लेकर अबतक भूकमरी सबसे बड़ी त्रासदी है और इसके खात्मे के लिए कुर्बानी एक बड़ा हथियार भी।
उन्होंने बताया कि कुर्बानी के गोश्त को तीन हिस्सों में बांटा जाता है एक गरीबों के लिये एक रिश्तेदारों के लिये और स्वयं अपने लिये इस तरह इस्लाम ने लोगों को त्याग की सीख दी आज भी अरब देशों से कुर्बानी बैंक के जरिए भुकमरी से जूझ रहे सोमालिया सूडान और ऐसे कई देशों को गोश्त भेजा जाता है, इसका मकसद लोगों में त्याग की भावना जगाना है ,वहीं गरीबों की मदद भी ,लेकिन यह बात वह क्या जाने जो सिर्फ नाम के मुसलमान हैं और दूसरों के इशारों पर नाचते है।
हज़रत ने साफ कहा कि इस्लाम में कुर्बानी रब की निकटता एवं भुखमरी के खिलाफ जंग का ऐलान है ।इंद्रेश कुमार पहले इस्लाम को सही से पढ़ें बयानबाज़ी से नफ़रत फैलती है जबकि समाज को मोहब्बत की सख्त जरूरत है।