15 जुलाई को ज़्यादा से ज़्यादा दुरुद शरीफ पढ़ें और और दुनिया में अमन की दुआ करें ! सय्यद मोहम्मद अशरफ

नई दिल्ली:आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड के संस्थापक हज़रत मौलाना सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने तुर्की के राष्ट्रपति तय्यब अर्दुगान द्वारा पूरी दुनिया में 15 जुलाई दिन शनिवार को बाद नमाज़े ईशा दुरूद शरीफ पढने और उसके बाद दुनिया में अमन की दुआ करने का आह्वाहान किया है का समर्थन करते हुए पूरी दुनिया के मुसलमानों से अपील की है कि यौमे दुरूद में हिस्सा लें, ऐसे समय में जब हर तरफ ज़ुल्म व ज्यादती का माहौल है, हर तरफ बेगुनाहों का खून बहाया जा रहा है,ऐसा लगता है कि फूलों से भी अब बारूद की खुशबु आने लगी है, इस दौर में अपना रिश्ता पैग़म्बरे अमन सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से मज़बूत करने की ज़रूरत है जिसका रास्ता दुरूद है !

हज़रत ने कहा की यौमे दुरूद में लोग बढ़ चढ़ कर हिस्सा लें,हम तय्यब अर्दुगान की इस पहल का स्वागत करते हैं, उन्होंने बताया कि आल इंडिया उलमा व मशाइख बोर्ड की सभी प्रदेश एवं जिला शाखाएं इसकी तय्यारी में जुट गयी हैं और लोगों में इसका प्रचार और प्रसार किया जा रहा है!
हज़रत ने कहा कि हलक़ए दुरूद स्थापित करना सूफिया ए किराम का तरीका रहा है, दुरूद वह अमल है जो खुदा की बारगाह में रद्द नहीं होता जबकि हमारी नमाज़, रोज़ा, सदक़ा, ज़कात और हज ज़रूरी नहीं है की अल्लाह कुबूल ही कर ले क्योंकि हमारे अमल वैसे नहीं जैसे होने चाहिए लेकिन दुरूद एक अकेला अमल है जो खुदा की बारगाह में रद्द नहीं होता!

आतंकवादियों का मक़सद नफरत को हवा देना, अमरनाथ यात्रियों पर हमला निंदनीय – सय्यद मोहम्मद अशरफ

मुम्बई:आल इन्डिया उलमा व मशाइख बोर्ड के संस्थापक व अध्यक्ष हज़रत मौलाना सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने अमरनाथ यात्रियों की बस पर हुए आतंकवादीयों के हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि बुजदिल मानवता का क़त्ल कर रहे हैं, अमरनाथ यात्रियों पर हमला मुल्क में नफरतों को हवा देने के लिए की गयी गहरी साजिश का हिस्सा है! हुकूमत को इससे कठिनाई से निपटना चाहिए !

हज़रत ने कहा कि मुल्क के अमन को खराब करने के लिए लगातार साजिश की जा रही है हमारी सामाजिक सौहार्द्य को तोड़ने के लिए मज़हब का सहारा लिया जा रहा है, जिस तरह अमरनाथ यात्रियों को निशाना बनाया गया है वह असहनीय है, किसी को किसी की जान लेने का हक़ नहीं है, दहशतगर्द इंसान ही नहीं हैं वह तो हैवान हैं !

हज़रत किछौछवी ने लोगों से सब्र से काम लेने की अपील करते हुए कहा की अगर हमने नफरतों को बढ़ावा दिया तो याद रखिये हम आतंकियों के मददगार होंगे क्योंकि उनका यही मकसद है कि हम भारतीय आपस में टकराएँ और विदेशी ताक़तें अपने मकसद में कामयाब हो जाएँ! हज़रत ने यह भी कहा कि इस मुश्किल वक़्त में हम सब को एकजुट होकर इन नफरत फैलाने वालों को जवाब देना है अपने मुल्क को हर हाल में बचाना है क्योंकि अगर हमारा अमन खराब हुआ तो मुल्क अस्थिर हो सकता है लिहाज़ा हमे चाहिए कि नफरतों को मोहब्बत से हरा दें !

बस ड्राईवर सलीम शैख़ का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा की अपनी ज़िन्दगी खतरे में डालकर 50 लोगों की ज़िन्दगी बचाने वाले ऐसे लोग कभी नफरतों को कामयाब नहीं होने देंगे इनके जज्बे को इंसानियत सलाम करती है.मज़हब के नाम पर आतंक का घिनौना खेल बंद होना चाहिए सरकार को इस तरफ ध्यान देना होगा ताकि आगे ऐसी घटनाएँ न हों, न कहीं भीड़ कानून को हाथ में ले न कहीं मज़हबी जूनून में लोग हैवान बने, मोहब्बत का दामन किसी भी हाल में न छूटे, अगर हम मुल्क से मोहब्बत करते हैं तो इसके अमन को बरक़रार रखने की ज़िम्मेदारी भी हमारी है वरना हम सिर्फ दिखावा कर रहे हैं अपने देश से मोहब्बत नहीं.

मुल्क में किसी भी तरह की दहशतगर्दी को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए चाहे वह किसी भी नाम पर की जाए,न भीड़ की गुंडागर्दी हो न ही दहशतगर्दों की दहशतगर्दी, इसके लिए सरकार को कड़े क़दम उठाने चाहिए!मुल्क की अमनपसंद आवाम नफरतों को हरगिज़ बर्दाश्त नहीं करेगी और मोहब्बत से इसे हराने के लिए हर दम तैयार है!

Mystic Mantra: Wahdat — A nuanced notion of love

By: Ghulam Rasool Dehlvi
Makhdoom Ashraf’s spiritual theories presented in his oral transmission known as “Lataif-e-Ashrafi” are our guiding light today.

Indian Sufi saints of Persian origin have richly contributed to the beautiful mystical traditions in India. Their essential message included brotherhood (ukhuwat-e-insani), inclusivity (shumuliat) and a wide embrace of religious pluralism and multiculturalism. This was the key behind the vast popularity of the Sufi sages in the country.

One such Indian sage who came from Persia was Makhdoom Ashraf Jahangir Simnani whose shrine is in Uttar Pradesh. A disciple of the 13th century Bengali Sufi sheikh Hazrat Alaul Haq Pandavi and a practitioner of Ibn-e-Arabi’s philosophy of Wahdat al-Wajud (unity of the existence), Makhdoom Ashraf is highly venerated in north India. He founded the branch of the Chishti Sufi order — Ashrafi Silsila — with vital contribution of his distinguished mureed (disciple), Syed Shah Abdur Razzaq Noor Ayn.

Makhdoom Ashraf’s spiritual theories presented in his oral transmission known as “Lataif-e-Ashrafi” are our guiding light today. His discourse seeks to deepen our understanding about the basic tenets of Islam, such as wahdat and al-Tawheed (oneness of God). He introduced wahdat as a deeply nuanced and wider notion of love. “Wahdat means annihilation of the lover in the characteristics of his/her beloved”.

Explaining the essential belief in al-Tawheed (the fundamental tenet of Islam) as an all-inclusive and comprehensive Islamic doctrine, Makhdoom Ashraf has dwelled on different degrees of tawheed:

1. Wahdat-e imani (oneness in belief): It is an act of the servants of God, confirming by heart and verbally acknowledging His uniqueness.

2. Wahdat-e ilmi (oneness in knowledge): Makhdoom Ashraf stated: “This second degree of wahdat is attained within oneself, through inner spiritual knowledge. This is also called ilm ul-yaqeen (confirmed knowledge). It urges one to believe that there is no existence other than the Almighty. All other personas, virtues and actions are nothing in comparison to His persona, virtues and actions. In this degree of wahdat, one is supposed to acknowledge the growth of each person as a manifestation of the divine persona of God.”

3. Wahdat-e hali (oneness in spiritual condition): Makhdoom Ashraf explained: “It implies that the condition of wahdat is the most essential virtue of the spiritual practitioners. All darkness of the existence is lost in the light of wahdat. In this state, one should be overwhelmed by the light of wahdat in such a way as the stars lose their light in the sun.”

Finally Makhdoom Ashraf avers: “Wahdat is an ocean and the muwahhid (the believer) is a drop in it with no power of its own”.

नफरत फैलाने वाले देश और मानवता के दुश्मनों से सतर्क रहने की ज़रूरत : सय्यद मोहम्मद अशरफ

नई दिल्ली:आल इण्डिया उलेमा मशाइख बोर्ड के संस्थापक अध्यछ हज़रत सय्यद मोहमम्द अशरफ किछौछवी ने आज महरौली शरीफ दिल्ली में हज़रत अशिकुल्लाह शाह रहमतउल्लाहअलहि के उर्स के मौके पर खिताब करते हुए कहा सुफिया का तरीका मोहब्बत का तरीका है नफरतों की इसमें कोई जगह नहीं है कोई किसी भी मज़हब का हो किसी भी फिक्र का हो सुफिया के यहाँ कोई रोक टोक नहीं सबको मोहब्बतों से नवाजना यही तरीक है बुजुर्गों का और इसी तरह इस्लाम की तबलीग की गयी .
हज़रत ने कहा यह दौर बहुत खतरनाक है हम सबको होशियार रहना होगा किसी को भी कानून हाथ में लेने का हक नहीं है हिन्दोस्तान सबका है और हम सब की ज़िम्मेदारी है इसकी हिफाज़त मुल्क में अमन के कयाम की सबसे ज्यादा ज़िम्मेदारी मुसलमानों की है क्योंकि हम वह कौम हैं जिसे दुनिया में अमन कायम करने के लिए, हक की तबलीग के लिए, ज़ुल्म की मुखालफत के लिए, भेजा गया है.
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में जिस तरह पैगम्बरे इस्लाम सल्लल्लाहुअलहिवसल्लम की शान में फेसबुक पर गुस्ताखी की गयी यह एक साजिश का हिस्सा है और इसकी जितनी भी निंदा की जाये वह कम है मोहसिने इंसानियत की शान में गुस्ताखी जहाँ नाकाबिले बर्दाश्त अमल है और यह बात नफरतों के सौदागर जानते हैं इसीलिए इस तरह का काम किया जाता है ताकि मुसलमान सड़कों पर आये और हिंसा फैलाई जा सके,वही हुआ लोगों ने कानून को हाथ में लिया और आगज़नी की जिससे बदअमनी फैली जो काबिले मज़म्मत है हिंसा करने वाला कोई भी हो उसे जायज़ नहीं ठहराया जा सकता लोगों को कानून का सहारा लेना चाहिए और दोषी को सजा दिलवाने के लिए कोशिश करनी चाहिए न की शहर के अमन को आग लगानी चाहिए .
हज़रत ने कहा हर हाल में हिंसा रुकनी चाहिए हर कीमत पर इसे रोका जाना चाहिए गुस्ताखे रसूल को कड़ी से कड़ी सज़ा मिलनी चाहिए उसे गिरफ्तार भी कर लिया गया है लोगों को सब्र से काम लेना चाहिए और किसी भी तरह कानून को हाथ में नहीं लेना चाहिए यह साजिशों का दौर है हमे बच के रहना होगा .
हज़रत ने साफ़ कहा कि आपको उकसाने की कोशिश की जाएगी इंसानियत की दुश्मन ताक़तें आपको गुस्सा दिलाने की कोशिश करेंगी आप मुल्क के संविधान पर भरोसा रखें और कानून का सहारा लें जितना मुमकिन हो सोशल मीडिया पर हो रही खुराफात से दूर रहें और इनकी रिपोर्ट करें मुल्क हमारा है इसकी हिफाज़त हमे करनी होगी .
इस मौके पर सैकड़ों अकीदतमंद मौजूद रहे सलातो सलाम के बाद कुल शरीफ हुआ और मुल्क में अमन और मुल्क की तरक्की की दुआ की गयी .

نفرت پھیلانے والے ملک اور انسانیت کے دشمنوں سے ہوشیاررہنے کی ضرورت:سید محمد اشرف کچھوچھوی

نئی دہلی: آل انڈیا علماء و مشائخ بورڈ کے بانی اور صدر حضرت مولانا سید محمد اشرف کچھوچھوی نے آج مہرولی شریف دہلی میں حضرت عاشق اللہ شاہ رحمۃ اللہ علیہ کے عرس کے موقعہ پر خطاب کرتے ہوئے کہا کہصوفیاء کرام کا طریقہ محبت کا طریقہ ہے ،نفرتوں کی اس میں کوئی جگہ نہیں ہے، کوئی کسی بھی مذہب کا ہو کسی بھی فکر کا ہوصوفیا کے یہاں کوئی روک ٹوک نہیں ،بزرگوں کا طریقہ سب کو محبتوں سے نوازنارہاہے اور اسی طرح اسلام کیتبلیغ کی گئی ہے۔
حضرت نے کہا یہ دور بہت خطرناک ہے ،ہم سب کو ہوشیار رہنا ہوگا ،کسی کو بھی قانون ہاتھ میں لینے کا کوئی حق نہیں ہیہ،ندوستان سب کا ہے اور ہم سب کی ذمہ داری ہے اس کی حفاظت کرنا ،ملک میں امن کے قیام کی سب سے زیادہ ذمہ داری مسلمانوں کی ہے کیونکہ ہم وہ قوم ہیں جسے دنیا میں امن قائم کرنے کے لئے، حق کیتبلیغ اور ظلم کی مخالفت کے لئے بھیجا گیا ہے۔
انہوں نے کہا کہ مغربی بنگال میں جس طرح پیغمبر اسلام حضرت محمد مصطفیٰ صلی اللہ علیہ وسلم کی شان میں فیس بک پر گستاخی کی گئی ،یہ ایک سازش کا حصہ ہے اور اس کی جتنی بھی مذمت کی جائے وہ کم ہے ،محسن انسانیت کی شان میں گستاخی جہاں ناقابل برداشت عمل ہے یہ بات نفرتوں کے سوداگر جانتے ہیں اسی لئے اس طرح کا کام کیا جاتا ہے تاکہ مسلمان سڑکوں پر آئے اور تشدد پھیلائی جا سکے، وہی ہوا اور لوگوں نے قانون کو ہاتھ میں لیا اور آگ زنی کی جس سے بدامنی پھیلی جو قابل مذمت ہے، تشددپھیلانے والا کوئی بھی ہو اسے جائز نہیں ٹھہرایا جا سکتا، لوگوں کو قانون کا سہارا لینا چاہئے اور مجرم کو سزا دلوانے کے لئے کوشش کرنی چاہئے نہ کی شہر کے امن کے لیے آگ لگائی جائے۔
حضرت نے کہا کہ ہر حال میں تشدد پر لگام لگائی جا ئے ،ہر قیمت پر اسے روکا جانا چاہئے، گستاخ رسول کو سخت سے سخت سزا ملنی چاہئے ،اسے گرفتار بھی کر لیا گیا ہے،مسلمانوں کو صبر سے کام لینا ہوگااور کسی بھی طرح قانون کو ہاتھ میں نہیں لینا ہے، یہ سازشوں کا دور ہے جس میں ہمیں بچ کے رہنا ہوگا۔
حضرت نے صاف کہا کہ آپ کو اکسانے کی کوشش کی جائے گی، انسانیت کی دشمن طاقتیں آپ کو غصہ دلانے کی کوشش کریں گی مگر آپ ملک کے آئین پر انحصار رکھیں اور قانون کا سہارا لیں، جتنا ممکن ہو سوشل میڈیا پر ہو رہی خرافات سے دور رہیں اور ان کی رپورٹ دیں، ملک ہمارا ہے اس کی حفاظت ہمیں کرنی ہوگی۔
اس موقعہ پر سینکڑوں عقیدت مند موجود رہے،صلوٰۃ و سلام کے بعد کل شریف ہوا اور ملک میں امن و امان اور ترقی کی دعا کی گئی۔

भारत को मार रही है हिंसक भीड़ -सय्यद मोहम्मद अशरफ

लखनऊ :आल इंडिया उलेमा मशाइख बोर्ड के संस्थापक अध्यछ हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने झारखण्ड के रामगढ़ के बाजरटांड गाँव में अलीमुदीन उर्फ़ अजगर अली अंसारी की भीड़ के ज़रिये गौमांस के शक में पीट पीट कर की गयी हत्या को भारत की हत्या बताया है .हज़रत ने कहा कि इस तरह की घटनाएँ रोज़ हो रही हैं जो समाज को बाँट रही हैं .

उन्होंने ने साफ़ कहा कि भारत सिर्फ ज़मीन के किसी हिस्से का नाम नहीं है बल्कि यह इस ज़मीन पर रहने वाले हमारे उस समाज का नाम है जो भाईचारे मोहब्बत के लिए जाना जाता है अब इसमें नफरतों को जिस तरह घोला जा रहा है वह मुल्क के लिए बहुत खतरनाक है .

हज़रत ने कहा कि ऐसा लगता है की भीड़ देश को बर्बाद करने पर तुली है एक तरफ प्रधानमन्त्री गुजरात में अहिंसा का पाठ पढ़ा रहे होते हैं और दूसरी तरफ मज़हब के नाम पर एक भारतीय नागरिक को भीड़ पीट पीट कर मार रही होती है. अब भीड़ का कानून चल रहा है जिसमे भीड़ अपने हिसाब से आरोप लगाती है फिर दोषी भी मान लेती है बिना सुबूत और गवाह के और फिर सजा भी दे देती है .

बेरोजगार युवाओं की टोली को मज़हबी कट्टरपंथ की अफीम पिलाई जा रही है जो इस प्यारे हिंदोस्तान के लिए खतरनाक है और उससे ज्यादा खतरनाक है सरकारों का खामोश रहना. अगर यह चुप्पी नहीं टूटी तो भारत को मार देगी यह हिंसक भीड़ .

हज़रत ने साफ़ कहा कि मुल्क की हिफाज़त के लिए मुल्क के अमन की हिफाज़त के लिए किये जा रहे हर छोटे या बड़े प्रयास का हम समर्थन करते हैं और हम साथ हैं. आल इंडिया उलेमा मशाइख बोर्ड मुल्क में अमन के लिए अपनी हर कोशिश कर रहा है.

कुदरत का निजाम है गुनाहों से तौबा(GST) करने वालों को माफ़ी -सय्यद अशरफ

लखनऊ:आल इंडिया उलेमा मशाइख बोर्ड के संस्थापक अध्यछ हज़रत सय्यद मोहमम्द अशरफ किछौछवी ने जी एस टी को गुनाहों से तौबा बताते हुए कहा की अगर इंसान रब की बारगाह में जीएसटी को अपना ले तो उसके दरजात बुलंद होने से कोई नहीं रोक सकता यह रब का निजाम हैं .
यह बात उन्होंने एक सवाल के जवाब में कही जब उनसे जीएसटी पर उनकी राय पूछी गयी उन्होंने कहा की मुल्क की बेहतरी और कालाबाजारी रोकने के लिए अगर कोई क़दम उठाया जाता है तो हम सब को उसका समर्थन करना चाहिए सरकार ने कानून बनाया है अब उसके नतीजे कुछ दिन बाद पता चलेंगे लिहाज़ा किसी चीज़ का विरोध सिर्फ बदगुमानी की बुनियाद पर ठीक नहीं है .
हज़रत ने कल बिहार में भीड़ के ज़रिये दो दलित भाइयों को जान से मारे जाने की पुरजोर मज़म्मत की उन होने कहा की धीरे धीरे जो खौफ का माहौल बनाया जा रहा है वोह मुल्क के लिए खतरनाक है जो किसी को चैन से जीने नहीं देगा अगर आज हिंसक भीड़ के निशाने पर मुसलमान दलित सिख और इसाई हैं तो कल यह आपस में भी एक दुसरे के खून के प्यासे होंगे जो बड़ा डरावना होगा .

उन्होंने कहा जिस तरह उत्तरप्रदेश में आये दिन हिंसक वारदातें हो रही है उससे एक समुदाय में जो डर पैदा हो रहा है वोह ठीक नहीं है सरकार को इस पर ध्यान देना होगा.
हज़रत ने फिर एक बार सभी अमनपसंद भारतियों से एकजुट होकर इस नफरत वाली भीड़ को मोहब्बत से हरा देने की अपील की है उन्होंने कहा की अब समय आ गया कि हम ज़ुल्म के खिलाफ खड़े हो जाएँ क्योंकि नफरते हद से गुज़रती जा रही हैं अगर हमने देर की तो अंजाम ज्यादा बुरा होगा .लिहाज़ा सब्र का दामन बिना छोड़े मोहब्बत को आम किया जाये और नफरत को हरा दिया जाये .

घरेलु हिंसा द्वारा देश को अस्थिर करने की विदेशी ताक़तों की साज़िश – सय्यद मोहम्मद अशरफ

दिल्ली : आल इंडिया उलेमा मशाइख बोर्ड के संस्थापक अध्यछ हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने कहा है कि देश में जो लोग माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं वह विदेशी ताक़तों की कटपुतली हैं प्रशासन को होशियार रहना होगा.

हज़रत ने कहा जिस तरह कुछ हिंसक दरिंदे आये दिन इंसानियत को शर्मसार कर रहे है वह मुल्क़ के लिए बहुत खतरनाक है जिस तरह पाकिस्तान और चीन घात लगाए हुए हैं उससे साफ़ लग रहा है कि यह मुल्क़ का माहौल खराब करने वाले विदेशी एजेंट हैं.

उन्होंने कहा कि पुरे मुल्क़ के लोगों को होशियार रहना होगा यह असामाजिक तत्त्व बड़े सांप्रदायिक दंगे करा सकते हैं लिहाज़ा सरकार को कड़े क़दम उठाने होंगे और इन पर लगाम लगानी होगी.

हज़रत ने साफ़ कहा कि दुनिया जान ले कि भारतीय लोग अपने मुल्क़ को बचाने के लिए अपना सबकुछ निछावर कर सकते हैं.मुल्क़ के मुसलमान मुल्क़ के लिए हर क़ुर्बानी देने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं ,और जब भी मौका आया है तो सबसे पहले आगे आते हैं.
उन्होंने कहा कि मुल्क के सभी अमनपसंद लोग नफरतों के खिलाफ खड़े हों अपने चारों तरफ नज़र रखें और अफवाहों पर ध्यान न दें।

अमन ख़राब करने वाले हैं देश के ग़द्दार-सय्यद अशरफ

जौनपुर :आल इंडिया उलेमा मशाइख बोर्ड के संस्थापक अध्यछ हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने जौनपुर में आयोजित सेमिनार” सूफीवाद और मानवता “में बोलते हुए कहा कि जिस तरह फ़िज़ाओं में ज़हर घोला जा रहा है वह इंसानियत को तबाह कर देगा इससे बचने का एक ही तरीक़ा है कि मोहब्बत को आम किया जाये लोग सब्र का दामन थामे रहें.
हज़रत ने कहा जिस तरह हिंसक भीड़ लोगों को मार रही है वह डरावना है ,अगर अब भी अमनपसंद लोग हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे तो मुल्क़ खतरे में है.
उन्होंने कहा जो लोग समाज को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं वह देश के दुश्मन हैं वह किसी हाल में देशभक्त नहीं हो सकते.
हज़रत किछौछवी ने कहा हिंसा किसी भी चीज़ का हल नहीं है और याद रखिये अगर अमन खत्म होता है तो विकास रुक जाता है जो लोग मुल्क़ के अमन के दुश्मन हैं वो देश के विकास के भी दुश्मन हैं लिहाज़ा इनपर ससरकार को सख्ती दिखानी चाहिए.
अगर इस भीड़ को नहीं रोका गया तो नुक्सान होना तय है.उन्होंने लोगों से सूफियों के तरीके को अपनाने की बात कही जहाँ मोहब्बत सबके लिए नफरत किसी से नहीं का सन्देश है.
हज़रत ने कहा इंसानियत का क़त्ल करने वाले मुल्क़ के गद्दार हैं और सभी अमनपसंद भारतियों की ज़िम्मेदारी है कि इन्हें रोकें मुल्क़ में अमन क़ायम रखने के लिए आल इण्डिया उलेमा मशाइख बोर्ड कोशिशे कर रहा है आप इस मुहीम से जुड़िये और मुल्क़ कि तरक़्क़ी में अपना योगदान दीजिये हिन्दोस्तान हम सब का बराबर है और इसकी हर दुश्मन से हिफाज़त हम सबकी ज़िम्मेदारी.
इस मौके पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे सेमीनार के अंत में सलातो सलाम के बाद मुल्क़ में अमन कि दुआ की गयी.

देश खतरे में, भीड़ कर रही है लोकतंत्र की हत्या -सय्यद अशरफ

सऊदी अरब /मदीना :आल इंडिया उलेमा मशाइख बोर्ड के संस्थापक अध्यछ हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने कल मदीने से जारी अपने बयान में कहा है कि हमारा मुल्क इस वक़्त नफरतों की आग में तप रहा है खतरनाक हिंसक भीड़ खूबसूरत हिन्दोस्तान को तबाह करने पर तुली है .
हज़रत ने कश्मीर में अलविदा नमाज़ के बाद जामिया मस्जिद से निकली भीड़ के ज़रिये डी.एस .पी मोहम्मद अय्यूब पंडित की हत्या को कायरता करार देते हुए इसे मजहबे इस्लाम को बदनाम करने की घिनौनी साजिश करार दिया उन्होंने कहा की आखिर यह कौन सी नमाज़ थी जिसके बाद लोग किसी की जान लेने पर आमादा हो गए कट्टरपंथ को अगर नहीं रोका गया तो यह गुमराह भीड़ सब कुछ तबाह कर देगी .
हज़रत किछौछवी ने चलती ट्रेन में एक मुसलमान लड़के की हत्या को भी शर्मनाक बताया है उन्होंने कहा की यह कोई मज़हब नहीं सिखाता कि किसी का क़त्ल कर दिया जाये लगातार जिस तरह एक मज़हब के लोगों को बीफ के नाम पर निशाना बनाया जा रहा है उससे कानून का राज ख़तम होता दिख रहा है और हम अपने इस मोहब्बत वाले मुल्क को नफरत की आग में जाता हुआ देख रहे हैं भीड़ लोकतंत्र की हत्या कर रही है अदालत के बजाये कुछ सरफिरे फैसले कर रहे हैं और बेगुनाहों को क़त्ल कर रहे हैं .
हज़रत ने कहा क हम हुकूमते हिन्द से मांग करते हैं की इसे हर हाल में रोका जाये क्योंकि हिन्दोस्तान से हम हैं अगर मुल्क जला तो कोई महफूज़ नहीं रहेगा उन्होंने अमन पसंद लोगों से अपील करते हुए कहा की सभी अमन पसंद लोग अब इन नफरत के सौदागरों के खिलाफ एकजुट होकर आयें सवाल मुल्क का है नफरतो को रोकने के लिए मोहब्बतों की बहुत ज़रूरत है.
अमन के कयाम के लिए सभी को एक आवाज़ में कहना होगा कि सभ्य समाज में हिंसा का कोई स्थान नहीं है मौलाना ने लोगों से सब्र से काम लेने की बात कही और कहा कि अफवाहों पर ध्यान न दें अमन कायम करने की हर मुमकिन कोशिश की जाये वहीँ उन्होंने हुकूमत से मांग की कि “सबका साथ सबका विकास “का जो नारा दिया गया है इस पर अमल होना चाहिए और अल्पसंख्यको के मन से डर को निकलने की कोशिश की जानी चाहिए .
हज़रत ने मुल्क में मोहब्बत की हवा चलने और अमन कायम रहने की दुआ की .