Pictures: AIUMB Protest all over India and condemns terror attack on Uri and demands action against Pakistani Government

whatsapp-image-2016-09-26-at-8-39-48-pm
whatsapp-image-2016-09-26-at-8-40-51-pm
whatsapp-image-2016-09-26-at-8-41-28-pm
img-20160924-wa0008
img-20160924-wa0003
img-20160924-wa0005
whatsapp-image-2016-09-23-at-6-05-39-pm
whatsapp-image-2016-09-23-at-6-05-32-pm
whatsapp-image-2016-09-23-at-3-47-56-pm
whatsapp-image-2016-09-23-at-3-47-51-pm
whatsapp-image-2016-09-23-at-3-38-14-pm
whatsapp-image-2016-09-23-at-3-38-22-pm
whatsapp-image-2016-09-23-at-3-38-53-pm
whatsapp-image-2016-09-23-at-3-42-43-pm
whatsapp-image-2016-09-23-at-3-35-51-pm
whatsapp-image-2016-09-23-at-3-36-54-pm
+
whatsapp-image-2016-09-23-at-3-15-01-pm

 

AIUMB form on the Issue of Triple Talaq

Please downlaod this form and fill it and send to Your AIUMB State Unit.

form-law-commision

14691353_1438299056199413_4441321161715152462_o

तीन तलाक और समान नागरिक संहिता का मामला अनावश्यक : सरकार पहले धारा 341 से धार्मिक कैद हटाए, उलमा व मशाईख बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना सैयद मोहम्मद अशरफ की मांग

नई दिल्ली 18 अक्टूबर [प्रेस विज्ञप्ति]

12821546_925815780870659_5973975684250959662_nsyed-mohd-ashraf

ऑल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड ने ला कमीशन के प्रश्न पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सवाल उठाया है कि क्या तीन तलाक रद्द करने और समान नागरिक संहिता से देश के विकास की गति में वृद्धि होगी और अगर मुसलमानों को समान अधिकार देने का इरादा है तो संविधान की धारा 341 से धार्मिक कैद हटाने से परहेज क्यों?

सुन्नी सूफी मुसलमानों के प्रतिनिधि संगठन ऑल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड के अध्यक्ष और संस्थापक हजरत मौलाना सैयद मोहम्मद अशरफ किछौछ्वी ने आज यहां संवाददाताओं से बात करते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 341 में धार्मिक कैद लगाकर सरकार ने मुस्लिम समुदाय के पिछड़े वर्गों को उन सुविधाओं से वंचित कर दिया जो अन्य देशवासियों के उन वर्गों को प्राप्त हैं और अब एक अनावश्यक मामला उठाकर ख्वामख्वाह बेचैनी पैदा करने की कोशिश की जा रही है। जस्टिस  राजेंद्र सच्चर के नेतृत्व में बनाई गई एक समिति ने अपनी सिफारिश में यह बात खुलकर कही है कि मुसलमानों की स्थिति दलितों से भी बदतर हो गई है और इस सिफारिश के मद्देनजर सरकार से यह उम्मीद की जा सकती है कि वह मुसलमानों की सामाजिक, शैक्षिक, आर्थिक और राजनीतिक स्थिति में सुधार के उपाय करेगी लेकिन इसके बजाय तीन तलाक और समान नागरिक संहिता का मामला पूरी शिद्दत के साथ चर्चा में ला खड़ा किया गया और इस बहस में सार्वजनिक मीडिया में मुसलमानों का प्रतिनिधित्व करने के लिए जिन मुस्लिम महिलाओं को लाया जा रहा है उनमें बहुमत सल्फ़ी तथा गैर मोक़ल्लेदीन की है।

 

मुसलमानों के बीच एकता और सहमति पर एक अंतराष्ट्रीय सम्मेलन में बोर्ड के दो बड़े पदाधिकारियों सैयद तनवीर हाशमी और सैयद सलमान चिश्ती के साथ मास्को रवाना होने से पहले कल रात बोर्ड मुख्यालय में संवाददाताओं से हजरत मौलाना सैयद मोहम्मद अशरफ किछौछ्वी ने कहा कि देश में पहले से ही एक कानून चल रहा है। आपराधिक और दीवानी दोनों समान कानून सारे नागरिकों पर लागु हैं। सिर्फ शादी, तलाक और उत्तराधिकार के नियमों में ही तमाम धर्मों के पर्सनल लाज़ पर अमल हो रहा है। शादी में भी स्पेशल मैरिज एक्ट लागू और सक्रिय है। शादी, तलाक और विरासत के शरीयत कानून में हस्तक्षेप से देश के विकास या उसकी खुशहाली में क्या फर्क पड़ेगा नहीं मालूम। इसलिए बोर्ड यह समझता है कि इसकी जरूरत नहीं इसलिए बोर्ड बहुत जल्द भारत भर के  मुफ़्तीयों का एक बड़ा सम्मेलन आयोजित करके इस सवाल पर उनकी लिखित राय तलब करके और सभी पहलुओं पर विचार के एक निष्कर्ष पर पहुंचेगा और यही निष्कर्ष बोर्ड का अंतिम स्टैंड होगा।

एक सवाल के जवाब में हज़रत मौलाना सैयद मोहम्मद अशरफ किछौछ्वी ने कहा कि जो मुस्लिम महिलायें तीन तलाक के उन्मूलन और समान नागरिक संहिता लागु करने की  मांग कर रही हैं उनका संबंध अहले हदीस से है। वह चारों इमामों में से किसी के मसलक (पंथ) का अनुसरण नहीं करतीं। चारों इमामों ने तीन तलाक के मामले की अनुमति दी है, ग़ैर मोक़ल्लिद इससे सहमत नहीं। सवाल यह है कि अहले हदीस को यह अधिकार कहाँ से प्राप्त हो गया कि उससे जुड़ी महिलाएं सभी भारतीय मुस्लिम महिलाओं की प्रतिनिधि बनकर खड़ी हों। संविधान ने भारत में हर धर्म के मानने वाले को अपने धर्म पर चलने की स्वतंत्रता दी  है।

हज़रत मौलाना सैयद मोहम्मद अशरफ किछौछ्वी ने एक और सवाल के जवाब में कहा कि तलाक किसी अप्रिय रिश्ते से भलाई के साथ निकल आने की स्थिति है। इसका दुरुपयोग रोकने के लिए जागरूकता लाना चाहिए। ऑल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड देश भर के उलेमा, मशाइख, इमाम एवं अन्य ज़िम्मेदारों के द्वारा निकाह, तलाक एवं खुला के मामलों से मुसलमानों को अधिक से अधिक आगाह करने के लिए आन्दोलन चलाएगा।

उन्होंने आगे कहा कि कानून इसलिए बनाये जाते हैं कि लोग कानून के अनुसार अपने आप को ढालें न कि लोगों की तबीयत के अनुसार कानून बदला जाए। तीन तलाक को खत्म करने की नीयत ठीक नहीं है क्योंकि अगर कोई व्यक्ति गुस्से में किसी की हत्या कर दे तो क्या सरकार संविधान की धारा 302 को बदलने की कोशिश करेगी। इस का सीधा जवाब नहीं है, क्योंकि कानून तो हर हाल में रहेगा। कानून के खिलाफ कदाचार या इसका दुरुपयोग रोकने के लिए जागरूकता लाने की जरूरत है और इस पर काम होना चाहिए।

Debate on Divorce and Uniform Civil Code is unnecessary: Maulana Syed Mohammad Ashraf Kichchawchchvi

Press Release, AIUMB

New Delhi, October 17, 2016

The president and founder of All India Ulama and Mashaikh Board (AIUMB), Maulana Syed Mohammad Ashraf Kichchawchchvi opened up on the ongoing debate on divorce (triple talaq) and Uniform Civil Code, slamming it as an “unnecessary polemic”. He wondered as to how the Uniform Civil Code or the abolishment of the triple talaq would help in the country’s development.  He asked: If the government intends to provide equal rights to Muslims, it should not refrain from removing the religious stipulation from the Section 341 in the Constitution.

“The religious terms in the section 341 hampers the Muslim community form availing the opportunities of progression open to other backward communities and classes like the Dalits”, said Maulana Syed Mohammad Ashraf Kichchawchchvi.

Talking today to the media reporters, Maulana said that Muslims’ condition is worse than that of the Dalits and other backward sections of the Indian society, as the Sachchar Committee has also revealed. Therefore, the apex body of Sunni Sufi Muslims in India, All India Ulama and Mashaikh Board recommends the government to ameliorate the social, educational, economic and political condition of Muslims rather than indulge in the unnecessary issues and debates.

On this occasion, the Sufi Muslim clerics and scholars also endorsed the demand of the All India Ulama and Mashaikh Board. Two more key officials of the board, who are currently on a visit to an international conference on the unity of Ummah in Moscow, Russia, were also in the AIUMB press meet. Before they left for the conference in Moscow, Maulana Syed Tanveer Hashmi and Syed Salman Chishti endorsed the statements of the founder-president of the AIUMB. They appealed to the Indian government to ensure the constitutional freedom of religious practice to the followers of all religions in India.

Maulana Syed Mohammad Ashraf Kichchawchchvi further said that the debate is pointless because the Uniform Civil Code is already enacted in the country. All the criminal and civil laws are equal and uniform for all the religious communities. Only the laws of marriage, divorce and inherence are practices as per the personal laws, though the Special Marriage Act is also there. Hence, he wondered whether how government’s unsolicited interference in the laws of nikah and talaq would help in the development of the nation on the constructive lines. “Similar personal laws are practiced by people of other faith traditions in India. Apparently, the government’s intent behind raising the issue of triple talaq is dubious”, he said.

Islamic Scholar and writer, Ghulam Rasool Dehlvi, said that the AIUMB did not reject the law commission’s questionnaire, but rather, it has got it translated into Urdu and Hindi for its wider dissemination among the Sufi Sunni Muslims attached to various wings of the board across the country. It has also run a campaign to bring awareness to stop the abuse of triple talaq and other Islamic practices.

The AIUMB also questioned the Salafis lashing out at the law commission’s questionnaire on triple talaq, as the Salafi or Ahle-Hadisi sect has nothing to do with any of the four Islamic schools of law pertaining to the issue. “The Law Commission has done nothing wrong by asking the mainstream Indian Muslims’ opinion on this question. Common Muslims have to be educated and trained to democratically protect and practice their personal laws”, said the founder-president of the AIUMB.

The AIUMB is also planning an Islamic seminar on triple talaq which will gather the leading muftis and experts on Hanafi Islamic school of law. “We will come to the final result after considering all aspects of the matter and will uphold the Ulama and Mashaikh’s position on the issue”, said Syed Muhammad Ashraf Kichchawchchvi.

تین طلاق اور یکساں سول کوڈ کا معاملہ غیر ضروری، حکومت پہلے دفعہ 341سے مذہبی قید ہٹائے،علما ومشائخ بورڈ کے صدر مولانا سید محمد اشرف کا مطالبہ

 

نئی دہلی 15 اکتوبر] پریس ریلیز]

????????????????????????????????????

آل انڈیا علما و مشائخ بورڈ نے لا کیشن کے سوالنامہ پر ردعمل ظاہر کرتے ہوئے سوال اٹھایا ہے کہ کیا تین طلاق کی منسوخی اور یکساں سول کوڈ سے ملک کی ترقی کی رفتار بڑھ جائے گی اور اگر مسلمانوں کو یکساں حقوق دینے کی نیت ہے تو آئین کی دفعہ 341 سے مذہبی قید ہٹانے سے گریز کیوں؟

سنی صوفی مسلمانوں کی نمائندہ تنظیم آل انڈیا علما ومشائخ بورڈ کے صدر اور بانی حضرت مولانا سید محمد اشرف کچھوچھوی نے آج یہاں  نامہ نگاروں  سے بات کرتے ہوئے کہا کہ آئین کی دفعہ 341 میں مذہبی قید لگا کر حکومت نے مسلم فرقہ کے پچھڑے طبقات کو ان سہولتوں سے محروم کر دیا جو دیگر برادران وطن کے ان ہی طبقات کو حاصل ہیں اور اب ایک غیر ضروری معاملہ  اٹھا کر خواہ مخواہ ہیجان پیدا کرنے کی کوشش کی جا رہی ہے۔جسٹس راجیندر سچر کی قیادت میں بنائی گئی ایک کمیٹی نے اپنی سفارش میں یہ بات کھل کر کہی ہے کہ مسلمانوں کی حالت دلتوں سے بھی بد تر ہو گئی ہے اور اس سفارش کے پیش نظر حکومت سے یہ توقع کی جا سکتی ہے کہ وہ مسلمانوں کی سماجی،تعلیمی،مالی اور سیاسی حالت بہتر بنانے کے اقدام کرے گی لیکن اس کی بجائے تین طلاق اور یکساں سول کوڈ کا معاملہ پوری شدت کے ساتھ بحث میں لا کھڑا کیا گیا۔اور اس بحث میں عوامی ذرائع ابلاغ پر مسلمانوں کی نمائندگی کرنے کے لئے جن مسلم عورتوں کو لا یا جارہا ہے ان میں اکثریت سلفی اورغیر مقلدین کی ہے۔

مسلمانوں کے درمیان اتحاد و اتفاق پر ایک بین الاقوامی کانفرنس میں بورڈ کے دو اہم عہدیداروں سید تنویر ہاشمی اور سید سلمان چشتی کے ساتھ ماسکو روانگی سے قبل کل رات بورڈ کے صدر دفتر میں نامہ نگاروں سے حضرت مولانا سید محمد اشرف کچھوچھوی نے کہا کہ ملک میں پہلے سے ہی ایک قانون چل رہا ہے۔ فوجداری اور دیوانی دونوں یکساں قوانین سارے شہریوں پر باضابطہ نافذ ہیں۔صرف نکاح طلاق اور وراثت کے قوانین میں ہی تما م مذاہب کے پرسنل لاز پر عمل ہو رہا ہے۔شادی میں بھی اسپشل میریج ایکٹ نافذ اور زیر عمل ہے۔شادی طلاق اور وراثت کے شرعی قوانین میں مداخلت سے ملک کی ترقی یا اس کی خوش حالی میں کیا فرق پڑے گا نہیں معلوم۔اس لئے بورڈ یہ سمجھتا ہے کہ اس کی ضرورت نہیں اس لئے بورڈ بہت جلد ہندوستان بھر کے مفتیان کرام کی ایک بڑی کانفرنس منعقد کر کے  اس سوال پر ان کی تحریری رائے طلب کرکے اور تمام پہلوؤں پر غور کر کے ایک نتیجہ پر پہنچے گا اوروہی نتیجہ بورڈ کا حتمی موقف ہوگا۔

ایک سوال کے جواب میں حضرت مولانا سید محمد اشرف کچھوچھوی نے کہا کہ جومسلم خواتین تین طلاق کے خاتمے اور یکساں سول کوڈ کے نفاذکا مطالبہ کر رہی ہیں ان کا تعلق اہل حدیث سے ہے۔وہ چاروں ائمہ میں سے کسی کے مسلک کی تقلید نہیں کرتیں۔چاروں ائمہ نے تین طلاق کے معاملہ کی اجازت دی ہے۔غیر مقلد اس سے متفق نہیں۔سوال یہ ہے کہ اہل حدیث کو یہ حق کہاں سے حاصل ہو گیا کہ اس سے تعلق رکھنے والی عورتیں تمام ہندوستانی مسلم خواتین کی نمائندہ بن کر کھڑی ہوں۔آئین نے ہندوستان میں ہر مذہب کے ماننے والے کو اپنے مذہب پر چلنے کی آزادی کی ضمانت دی ہے۔

حضرت مولانا سید محمد اشرف کچھوچھوی نے ایک اور سوال کے جواب میں کہا کہ طلاق کسی ناگوار رشتے سے عافیت کے ساتھ نکل آنے کی صورت ہے۔اس کا غلط استعمال روکنے کے لئے بیداری لانا ضروری ہے۔ قانون اسی لئے بنائے جاتے ہیں کہ لوگ قانون کے مطابق اپنے آپ کو ڈھا لیں نہ کہ لوگوں کی طبیعت کے مطابق قانون بدلا جائے۔ تین طلاق کو ختم کرنے کی نیت ٹھیک نہیں کیونکہ اگر کوئی شخص غصے میں کسی کو قتل کردے تو کیا حکومت آئین کی دفعہ 302کو بدلنے کی کوشش کرے گی۔اس کا سیدھا جواب نہیں ہے کیونکہ قانون تو ہر حال میں رہے گا۔قانون کی خلاف ورزی یا اس کا غلط استعمال روکنے کے لئے بیداری لانے کی ضرورت ہے اور اس پر کام ہونا چاہئے۔

 

ऑल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड लखनऊ में 4 दिसंबर को सुन्नी सूफी सम्मेलन करेगा

लखनऊ कार्यालय में हुई मीटिंग में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय

लखनऊ-5 अक्तूबर (प्रेस विज्ञप्ति)

whatsapp-image-2016-10-04-at-3-56-45-pmwhatsapp-image-2016-10-04-at-4-14-01-pm

सुन्नी सूफी मुसलमानों की प्रतिनिधि संगठन ऑल इंडिया उलेमा व मशाईख बोर्ड की एक बैठक प्रदेश कार्यालय, लखनऊ में आयोजित हुई, जिसमें उ० प्र० के पदाधिकारियों, दरगाहों के सज्जादा नशीन,मशाईख, विद्वानों, मस्जिदों के इमामों ने भाग लिया।

इस अवसर पर ऑल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड के संस्थापक व राष्ट्रीय अध्यक्ष हजरत मौलाना सैयद मोहम्मद अशरफ किछोछवी ने कहा कि आज जब सुन्नी मुसलमान जागरूक हो चुका है और उन लोगों के जो सुन्नी मुसलमानों को धोखा देकर उनके ईमान व अकीदे पर डाका डालते रहे हैं, उनको उजागर कर दिया है तो ये लोग चोला बदल कर फिर से सामने आ रहे हैं। इसी संदर्भ में जमीअतुल उलेमा हिंद ने अजमेर शरीफ में सम्मेलन करने का फैसला किया है और सम्मेलन से पहले राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष अब्दुल वाहिद खत्री ने एक बैठक करके यह घोषणा की थी कि हमारा वहाबियत से कोई सम्बन्ध  नहीं है बल्कि हमारा सिलसिला चिश्तियत से है। मौलाना किछोछवी ने सवाल किया कि क्या जमीअतुल उलेमा अपने सौ साला अकीदे  से तौबा कर रही है या सुन्नी सूफी मुसलमानों को फिर चोला बदल कर धोखा देना चाहती है और गुमराह करना चाहती है। उन्होंने सवाल किया कि आज तक हज़रत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के संबंध में अभद्र टिप्पणी करते रहे हैं सूफियों की मजार पर जाने वालों को कब्र परस्त  और बिदअती जैसे उपनाम से पुकारते रहे हैं। मिलाद पढ़ने को  हराम कहते रहे हैं तो आज क्यों वे पहली बार नातिया मुशायरा कराने की बात कर रहे हैं? क्यों अपना सिलसिला चिश्तियत से जोड़ रहे हैं? क्यों पहली बार सभी दरगाहों  के सज्जादा नशीनों को अजमेर शरीफ में आमंत्रित करके सम्मेलन  करने जा रहे हैं?

मौलाना ने कहा कि उनका मतलब केवल सुनी सूफी मुसलमानों को गुमराह करना है जिसे किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

मौलाना ने कहा कि आज कुछ लोग कहते हैं कि साम्प्रदायिक मतभेद को भुलाकर हमें एकजुटता दिखानी चाहिए लेकिन यहां साम्प्रदायिक मतभेद तो है ही नहीं बल्कि हमारा और उनका मतभेद अकीदे में है जिस से किसी हालत में समझौता नहीं किया जा सकता है।

मीटिंग में ऑल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड के प्रदेश अध्यक्ष हजरत शाह अम्मार अहमद अहमदी, सज्जादा नशीन खानकाह हज़रत शैखुल आलम, रुदौली शरीफ ने कहा कि इस समय हमारी जिम्मेदारी है कि जनता का सही मार्गदर्शन करें। इसी संदर्भ में उन्होंने अपनी राय रखी कि उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक सुन्नी सूफी सम्मेलन का आयोजन किया जाए जिसमें मुसलमानों के  सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक मुद्दों पर जोरदार आवाज उठाई जाए। मीटिंग  में मौजूद सभी लोगों ने यूपी अध्यक्ष के इस राय से सहमति जताई  और 4 दिसंबर 2016 दिन इतवार सम्मेलन की तिथि निर्धारित की गई।

गौरतलब है कि बाद नमाज़े ज़ोहर से मगरिब तक  चलने वाली इस महत्वपूर्ण मीटिंग का नेतृत्व बोर्ड के संस्थापक व राष्ट्रीय अध्यक्ष हजरत मौलाना सैयद मोहम्मद अशरफ किछोछवी व अध्यक्षता हजरत शाह अम्मार अहमद अहमदी ने की।

सैयद हम्माद अशरफ किछोछवी (यूपी महासचिव) ने आए हुए सभी प्रतिभागियों को धन्यवाद दिया। इस अवसर पर मोलाना सय्यद  मेराज अशरफ जाईसी,मौलाना नूरुलहुदा मिस्बाही, मौलाना गयासुद्दीन मिस्बाही ने भी संबोधित किया।

बैठक में मौलाना इश्तियाक कादरी (लखनऊ अध्यक्ष), आले रसूल अहमद, रमजान अली,सैयद नैयर अशरफ किछोछवी, सैयद कमाल अशरफ किछोछवी, सैयद अहसान अली, हाफिज मुबीन अहमद, कारी जमशेद, कारी आमिर रज़ा, लाल शाह कादरी, आबिद सक्लैनी, फहद शाह  व लखनऊ इकाई सहित प्रदेश के सभी जिलों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। मीटिंग का समापन सलाम और देश के लिए शांति की दुआ से हुई।

पैलेट गन का इस्तेमाल तुरंत रोकने के उलेमा मशाईख की मांग

14th Oct

Hazrat Syed Mohammad Ashraf

prsdt8
सैयद मोहम्मद अशरफ किछौछ्वी पीड़ितों के लिए त्वरित पुनर्वास पैकेज के पक्ष में ऑल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड ने कश्मीर में सुरक्षा बलों के हाथों पैलेट गन के इस्तेमाल पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की मांग करते हुए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और जम्मू-कश्मीर की महबूबा मुफ्ती सरकार से मांग की है कि 8 जुलाई के बाद से अब तक पैलेट बंदूकों के इस्तेमाल से प्रभावित कश्मीरी युवाओं के भरपूर इलाज, पुनर्वास और पुनर्वास के लिए पैकेज की घोषणा करे।
बोर्ड के अध्यक्ष और संस्थापक हजरत मौलाना सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछ्वी ने यहां आज बयान में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकवादियों के ठिकानों पर भारतीय सेना की सीमित, विशिष्ट, निशाना बंद कार्रवाई सर्जिकल स्ट्राइक का समर्थन करते हुए कहा कि कश्मीरी जनता को आक्रामकता के सामने अकेले नहीं छोड़ा जा सकता है। पैलेट गन के खिलाफ पूरे देश की जनता की राय को नजरअंदाज करके मुफ्ती सरकार और मोदी सरकार देश की कोई सेवा नहीं कर रही हैं। सुन्नी सूफी मुसलमानों के प्रतिनिधि संगठन ऑल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड कश्मीर में आवामी बेचैनी और इसे नियंत्रित करने के लिए शक्ति के दुरुपयोग से बहुत दुखी है और जल्दी रोकथाम की मांग करता है क्योंकि कश्मीर की जमीन के साथ कश्मीर के निवासी भी हमारे लिए सम्मान और स्वतंत्र, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक देश के नागरिक होने के नाते उन्हें भी सुरक्षा और शांति के साथ जीने और लोकतांत्रिक शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार है।
बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि पाकिस्तान की सरकार और वहां की स्टैब्लिश्मेंट अपनी असफलताओं से जनता का ध्यान हटाने के लिए कश्मीर का मामला गर्म किए हुए है। आतंकवादी हमलों, नियंत्रण रेखा पर सीज़ फायर का उल्लंघन और जनता को बरगला कर प्रदर्शनों और पथराव के लिए प्रेरित करने की अलगाववादियों की कोश्हिशों ने मिलकर राज्य की शांति को भंग कर दिया है और स्थिति को संभालने के लिए प्रशासनिक उपायों के साथ राजनीतिक प्रयास आवश्यक हो गया है।
उन्होंने कश्मीरी जनता से भी सूझ-बूझ से काम लेने की अपील करते हुए सबसे पहले शांति बहाली पर जोर दिया।
ऑल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछ्वी ने कश्मीर के शासक और विपक्षी दलों से अपील की कि वह राज्य में शांति की बहाली के लिए संयुक्त कोशिशें शुरू करें और घावों पर मरहम रखने की प्रक्रिया जल्द से जल्द शुरू करें।

आतंकवाद के विरुद्ध आन्दोलन का नाम हुसैनियत है

15 Oct
Syed Alamghir Ashraf

इस्लाम मानवता का धर्म है। इस्लाम शब्द ही से इस धर्म का उद्देश्य और उस का अर्थ समझ में आ जाता है। इस्लाम एक इन्सान के  निजी एवं व्यक्तिगत जीवन से लेकर उसके पारिवारिक, सामाजिक धार्मिक, राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय जीवन जीने का तरीका सिखाता है। पूरे विश्व में शांति की स्थापना करने हेतु पैगम्बर मुहम्मद SAW साहब ने फ़रमाया की पड़ोसियों का ख़याल रखो। वो पड़ोसी चाहे जिस धर्म या समुदाय से सम्बन्ध रखते हो। अपने आप को किसी धर्म या समुदाय से सम्बंधित करने वाले ढोंगी हर जगह पाए जाते हैं। वो सम्बंधित धर्म और समुदाय को नुकसान पहुन्चाते हैं। उस धर्म का अपमान करते हैं। इस्लाम धर्म से अपने आप को सम्बंधित कर इस्लामी शिक्षाओं का उल्लंघन और उसे अपमानित करने वाला इस्लामी इतिहास में सब से बड़ा आतंकी और अत्याचारी व्यक्ति यज़ीद है। जिस ने पैग़म्बर SAW साहब के परिवार को शहीद किया और औरतों और बच्चों पर ज़ुल्म किया। अब अगर इस्लाम धर्म को यज़ीद की विचारधारा से देखा जाये तो उस में ज़ुल्म, अत्याचार, हिंसा और अन्याय मिलेगा। अगर इस्लाम को हुसैन के कर्मों और उनकी सोच के आधार पर देखा जाये तो इस्लाम में न्याय, शांति, प्रेम, अहिंसा सब्र और सौहार्द मिलेगा। यह एक वास्तविकता है कि अधर्म का अंत होता होता और सत्य अजर और अमर होता है। यही वजह है कि यज़ीद के अत्याचारों का सूर्य शाम के अंधेरों में डूब गया लेकिन हुसैन के सत्य की किरने आज भी हर सवेरे में चमकती हैं। आज हुसैन अ.स. सिर्फ हज़रत अली अ.स. के बेटे और हज़रात मुहम्मद SAW के नवासे नहीं रहे बल्कि क़यामत तक के लिए सत्य और असत्य, सच और झूट, धर्म और अधर्म के बीच फ़र्क और विभाजक का नाम हुसैन है। अत्याचार और अन्याय के विरुद्ध उठने वाली हर आवाज़ का नाम हुसैन है। ज़ुल्म और ज़्यादती के विरुद्ध खड़ा होने वाला हर व्यक्ति हुसैनी है। आल इण्डिया उलमा व मशाईख बोर्ड इसी हुसैनी मिशन को जन जन तक पहुँचाने का काम कर रही है। इस्लाम के नाम पर फैलाई जा रही दहशतगर्दी और उस पर हो रही घिनावनी राजनीति के विरुद्ध तमाम खानकाहों, दरगाहों और आस्तानों की सामूहिक आवाज़ बन कर आल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड देश भर में गग्रुकता अभियान चला रहा है। साम्प्रदायिकता के विरुद्ध आपसी सौहार्द को बहल करने का कार्य कर रहा है। इस संगठन को विश्वास है की सूफियों और सूफीवाद में यकीन और आस्था रखने वाले लोग इस अभियान का हिस्सा बनेंगे और देश के कोने कोने में नफरत के विरुद्ध प्रेम के दीपक हर भारतीय के दिल में रोशन करेंगे। आतंकवाद और कट्टरवाद के हर रंग को मुंह तोड़ जवाब देंगे। यह देश हमारा है। हुसैन अ.स. हमारे है। उनका मिशन हमारा है। हज़रात इमाम हुसैन अ.स. ने फ़रमाया ज़ुल्म और अत्याचार के विरुद्ध जितनी देर से खड़े होगे बलिदान उतना ज्यादा देना होगा। कर्बला में हजारों यज़ीदी फ़ौज के सामने तनहा हुसैन ने ज़ालिम यज़ीद के सामने सीना तान कर यह पैगाम दिया कि ज़ुल्म सहना भी ज़ुल्म है। अकेले पर और कमजोरी की परवाह किये बगैर बुराई के खिलाफ खड़े हो जाओ। सत्य कभी कमज़ोर और तन्हा नहीं होता। आज अधर्मी और असत्य का साथी ज़ालिम यज़ीद का नाम लेने वाला कोई नहीं। कर्बला के बाद किसी माँ ने अपने बच्चे का नाम यज़ीद नहीं रखा। सत्य और धर्म की खुदाई आवाज़ बनकर हुसैन आज भी हर नेक इन्सान के दिल में बसे हैं। जब से इन्सान बेदार और जागरूक हुआ है हर कौम पुकारती है कि हमारे हैं हुसैन।

आज कुछ आतंकवादी अपने आप को मुसलमान कहते हैं और अपनी दहशत के कारोबार को इस्लाम की सेवा कहते हैं। इस्लाम के इन दुश्मनों और उस जैसी विचाधारा रखने वाले हर व्यक्ति को यह समझना होगा की इस्लाम यज़ीदी विचाधारा का नाम नहीं है इस्लाम हो हुसैन आचरण और विचारधारा का नाम है। आज के इस युग में यज़ीदी विचारधारा को वहाबी विचाधारा से जाना जाता है। जो कल यज़ीदी थे आज वही वहाबी हैं। कल भी पैगाबर ए इस्लाम के परिवार वालों ने इस विचारधारा का विरोध किया था और आज भी वो परिवार इस विचारधारा का विरोध कर रहा है। इस परिवार की सामूहिक आवाज़ का नाम आल इण्डिया उलमा व मशाईख बोर्ड है।

उलमा, मशाईख और विद्वानों का यह संगठन पिछले एक दशक से आतंकवाद और कट्टरवाद के विरुद्ध एक लम्बी लड़ाई लड़ रहा है। इस के लिए कई महासभाए और महासम्मेलन का आयोजन भी किया। इसी साल मार्च में अंतर्राष्ट्रीय सूफी सम्मेलन के नाम से एक बड़े सम्मेलन का आयोजन दिल्ली में 4 दिनों तक किया गया। इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए यह संगठन आगामी 4 दिसंबर को एक सुन्नी कांफ्रेंस लखनऊ में करने जा रहा है जिस में देश भर की सूफी सज्जादा और विद्वानों को आमंत्रित किया गया है। चूँकि यह सम्मेलन देश में कट्टरता और साम्प्रदायिकता के विरुद्ध एक आन्दोलन है इस लिए यह हर भारतीय का कार्यक्रम है। इस में हर भारतीय को भाग लेना चाहिए। मीडिया बंधुओं से मुख्य रूप से निवेदन है की इस अभियान का हिस्सा बने और अपन सहयोग दें।